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1.05 करोड़ गबन मामले में फरार पूर्व डीपीओ शिव कुमार शर्मा गिरफ्तार, भेजे गए जेल

जमुई. शिक्षा विभाग में 1 करोड़ से अधिक के गबन मामले में फरार चल रहे पूर्व जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (डीपीओ) शिव कुमार शर्मा को जमुई पुलिस ने बेगूसराय से गिरफ्तार कर लिया है. गबन और वित्तीय अनियमितता के इस मामले में वे लंबे समय से फरार थे. जमुई पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर मेडिकल जांच के लिए सदर अस्पताल जमुई लाया, जहां से आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. शिव कुमार शर्मा पर आरोप है कि उन्होंने 12 ऐसे लोगों को वर्षों तक वेतन भुगतान किया जो या तो कभी शिक्षक नियुक्त नहीं हुए या फिर वर्षों से अनुपस्थित थे. इस अवैध वेतन भुगतान से प्रशासनी खजाने को 1 करोड़ 5 लाख 98 हजार 832 रुपये का नुकसान पहुंचा. इस घोटाले का खुलासा होने के बाद माध्यमिक शिक्षा निदेशक कन्हैया प्रसाद श्रीवास्तव ने मामले को गंभीरता से लिया और 30 जनवरी 2024 को डीपीओ पर एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया. इसके बाद 5 फरवरी 2024 को जमुई सदर थाना में मामला दर्ज किया गया. गौरतलब है कि शिव कुमार शर्मा 31 जनवरी 2025 को सेवा निवृत्त हो चुके हैं, लेकिन उससे पहले ही उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई थी. एसडीपीओ सतीश सुमन ने गिरफ्तारी की पुष्टि की है.

वेतन गबन के मामले में दर्ज हुई थी प्राथमिकी

गौरतलब है कि जमुई जिला शिक्षा विभाग के तत्कालीन स्थापना डीपीओ (रिटायर्ड) शिवकुमार शर्मा के द्वारा गलत तरीके से लोगों को फायदा पहुंचाकर उन्हें वेतन निर्गत करने एवं एक करोड़ 5 लाख रुपये के गबन करने मामले में नगर थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई कराई थी. तत्कालीन जिला शिक्षा पदाधिकारी कपिल देव तिवारी ने इसे लेकर लिखित आवेदन देकर सदर थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई थी. यह पूरा मामला फर्जी तरीके से वेतन निर्गत करने से जुड़ा हुआ है. जिसमें स्थापना डीपीओ के द्वारा लंबे समय से छुट्टी पर गए शिक्षक या कुछ लोगों को शिक्षक बताकर उन्हें एक करोड़ से भी रुपए से भी अधिक की राशि का भुगतान कर दिया गया. इस मामले में तत्कालीन डीडीसी शशि शेखर चौधरी के द्वारा जब जांच की गई तब इस पूरे मामले का खुलासा किया गया था. इसी मामले में जिलाधिकारी राकेश कुमार ने शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव केके पाठक को कार्रवाई के अनुशंसा की थी और तब जाकर माध्यमिक शिक्षा के निदेशक कन्हैया प्रसाद श्रीवास्तव के द्वारा मामले में स्थापना डीपीओ के विरुद्ध प्राथमिक दर्ज करने का आदेश बीते 30 जनवरी 2024 को निर्गत किया गया था. गौरतलब है कि स्थापना डीपीओ शिवकुमार शर्मा 31 जनवरी 2024 को रिटायर्ड हो रहे थे और उनके रिटायरमेंट से ठीक 1 दिन पहले वेतन घोटाले मामले में उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश निर्गत किया गया था.

स्थापना डीपीओ का विवादों से रहा है गहरा नाता

गौरतलब है कि स्थापना डीपीओ शिवकुमार शर्मा अब रिटायर हो चुके हैं लेकिन अपने कार्यकाल के दौरान उनका विवादों से गहरा नाता रहा. पिछले साल जनवरी 2023 में उनके खिलाफ एक रसोईया ने दुराचार करने का आरोप लगाया था और इसे लेकर व्यवहार न्यायालय में मुकदमा भी दर्ज कराया था. नगर परिषद क्षेत्र के रहने वाली स्त्री ने जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम के समक्ष परिवार दायर कर बताया था कि प्रशासनी बस डिपो के पास उसकी मुलाकात शिवकुमार शर्मा से हुई थी. इस दौरान उन्होंने खुद को डीपीओ बता कर अपने आवास पर खाना बनाने के लिए कहा था. जब वह उसके घर खाना बनाने को तैयार नहीं हुई, तब डीपीओ ने उसके पुत्र को कार्यालय में काम दिलवाने का वादा किया. इसके बाद स्त्री उसके आवास पर खाना बनाने लगी. स्त्री ने बताया था कि कुछ दिन तक तो सब कुछ ठीक-ठाक रहा, लेकिन एक दिन डीपीओ का व्यवहार बदल गया और जब वह खाना बनाकर जा रही थी तो स्थापना डीपीओ ने उन्हें उसे पकड़ लिया और जबरन शारीरिक संबंध बनाने का दवा बनाने लगे. हालांकि इस मामले को स्थापना डीपीओ ने मनगढ़ंत और बेबुनियाद बताया था, लेकिन उन पर लगातार इस तरह के संगीन आरोप लगाते रहे हैं.

राज्यपाल ने भी दिये थे विभागीय कार्रवाई के आदेश

स्थापना डीपीओ शिवकुमार शर्मा का पूरा कार्यकाल ही विवादों से भरा रहा. 23 जून 2023 को मुंगेर प्रमंडल के क्षेत्रीय शिक्षा उपनिदेशक के द्वारा जमुई शिक्षा विभाग की जांच की गई थी. इसमें कई प्रकार की खामियां देखी गई थी. क्षेत्रीय उपनिदेशक की जांच के दौरान यह सामने आया था कि कार्यालय के द्वारा जो पत्र निर्गत पंजी है उसमें बैकडेटिंग की गई थी और इससे कई लोगों को फायदा पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा था. इतना ही नहीं और भी कई प्रकार के कागजात स्थापना डीपीओ के कार्यालय में पाए गए थे जो वैध तरीके से नहीं रखे गए थे. इसके बाद उन्होंने स्थापना डीपीओ से स्पष्टीकरण मांगा. लेकिन अपने अड़ियल रवैया के लिए जाने जाने वाले स्थापना डीपीओ शिवकुमार शर्मा ने क्षेत्रीय उपनिदेशक को किसी प्रकार का जवाब तक नहीं दिया था. जिसके बाद उन्होंने इसकी शिकायत राज भवन से की थी और राज्यपाल ने भी स्थापना डीपीओ के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की अनुशंधा कर दी थी. हालांकि इससे पहले कार्रवाई हो पाती स्थापना डीपीओ का कार्यकाल ही समाप्त हो गया और वह सेवानिवृत हो गए. लेकिन सेवा निवृत्ति के बाद मामले में कार्रवाई करते हुए पुलिस ने सेवानिवृत स्थापना डीपीओ शिवकुमार शर्मा को गिरफ्तार कर लिया है.

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विनोद झा
संपादक नया विचार

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