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February 22, 2025

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इंग्लिस ने अंग्रेजों को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा, ऑस्ट्रेलिया ने 5 विकेट से इंग्लैंड को रौंदा

Australia vs England, Champions Trophy 2025: शनिवार को चैंपियंस ट्रॉफी 2025 में इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के बीच एक हाई स्कोरिंग मैच हुआ. अंत में ऑस्ट्रेलिया ने इंग्लैंड को 5 विकेट से हरा दिया. इंग्लैैंड ने बेन डकेट के 165 रनों की रिकॉर्ड पारी के दम पर ऑस्ट्रेलिया के सामने 352 रनों का विशाल लक्ष्य रखा. ऑस्ट्रेलिया ने 47.3 ओवर में पांच विकेट के नुकसान पर 356 रन बनाकर शानदार जीत दर्ज की. इस जीत ने ऑस्ट्रेलिया को ग्रुप बी के अंक तालिका में दूसरे नंबर पर पहुंचा दिया है. जो रूट ने भी जड़ा पचासा टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी इंग्लैंड की टीम ने शुरुआत से ही आक्रामक रुख अपनाया, हालांकि इंग्लैंड की शुरुआत खराब रही. टीम को पहला झटका दूसरे ओवर में 13 के स्कोर पर लगा. छठे ओवर में 43 के स्कोर पर टीम को दूसरा झटका लगा, लेकिन बेन डकेट एक छोर पर जमे रहे. डकेट के 165 रनों के अलावा जो रूट ने 78 गेंद पर 68 रनों की महत्वपूर्ण पारी स्पोर्ट्सी. Josh Inglis’ thumping 💯 turns it around for Australia as they create history in a run-fest in Lahore 🔥#ChampionsTrophy #AUSvENG ✍️: https://t.co/DBjsJNDgkY pic.twitter.com/lGbeqtTHy2 — ICC (@ICC) February 22, 2025 डकेट पर भारी पड़ी जोस इंग्लिस की पारी 352 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी ऑस्ट्रेलियाई टीम ने भी शुरू से ही आक्रामकता दिखाई और इंग्लैंड के गेंदबाजों को खूब धोया. इस जीत के हीरो विकेटकीपर बल्लेबाज जोस इंग्लिस रहे. उन्होंने 66 गेंद पर नाबाद 120 रनों की तेज पारी स्पोर्ट्सी. इंग्लिस ने अपनी पारी में 8 चौके और 6 छक्के लगाए. सलामी बल्लेबाज मैथ्यू शॉर्ट ने 63 रन और एलेक्स कैरी ने 69 रनों की पारी स्पोर्ट्सी. Josh Inglis’ century scripted a remarkable chase for Australia against England and earned him the @aramco POTM award 👏 #ChampionsTrophy pic.twitter.com/B5reS4kgxo — ICC (@ICC) February 22, 2025 ऑस्ट्रेलिया का अगला मुकाबला दक्षिण अफ्रीका से ऑस्ट्रेलिया का अगला मुकाबला अब दक्षिण अफ्रीका से होगा, जबकि इंग्लैंड अब अफगानिस्तान से भिड़ने की तैयारी करेगा. दक्षिण अफ्रीका इस टूर्नामेंट में एक मजबूत टीम बनकर उभरी है. दक्षिण अफ्रीका ने अफगानिस्तान पर बड़ी जीत दर्ज कर अंक तालिका में पहला स्थान हासिल किया है. ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका के मुकाबले के बाद तय होगा कि नंबर वन पर कौन सी टीम रहेगी. India vs pakistan The post इंग्लिस ने अंग्रेजों को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा, ऑस्ट्रेलिया ने 5 विकेट से इंग्लैंड को रौंदा appeared first on Naya Vichar.

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Heavy Rainfall: 50 KM की रफ्तार से चलेगी हवा, 28 फरवरी तक बारिश से नहीं मिलेगी राहत, IMD अलर्ट

Heavy Rainfall: मौसम विभाग ने 23 फरवरी 2025 को ओडिशा और पश्चिम बंगाल के गंगा तटीय क्षेत्रों में बिजली, ओलावृष्टि और तेज हवाएं (40-50 किमी प्रति घंटे) के साथ गरज के साथ बारिश की संभावना है. इसको लेकर ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है. इन राज्यों में बारिश, ओलावृष्टि की संभावना मौसम विभाग के अनुसार छत्तीसगढ़, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम, झारखंड, ओडिशा, अरुणाचल प्रदेश में छिटपुट स्थानों पर ओलावृष्टि की संभावना है. अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में 25 और 26 फरवरी को छिटपुट स्थानों पर भारी वर्षा की संभावना है. जम्मू क्षेत्र में 25 से 28 फरवरी तक छिटपुट स्थानों पर, हिमाचल प्रदेश में भी 25 से 28 फरवरी के दौरान, उत्तराखंड में 27 और 28 फरवरी को भारी बारिश और बर्फबारी की संभावना है. अधिकतम तापमान पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र में अगले 3 दिनों के दौरान अधिकतम तापमान में कोई महत्पूर्ण बदलाव होने की संभावना नहीं है और उसके बाद 4-5 डिग्री सेल्सियस की गिरावट होगी. उत्तर पश्चिम हिंदुस्तान के मैदानी स्थानों में अगले 4 दिनों के दौरान अधिकतम में 2-4 डिग्री सेल्सियस की क्रमिक वृद्धि होने की संभावना है और उसके बाद कोई महत्वपूर्ण बदलाव नहीं होगा. मध्य हिंदुस्तान और गुजरात राज्य में अगले 3 दिनों के दौरान अधिकतम तापमान में कोई महत्पवूर्ण बदलाव होने की संभावना नहीं है और उसके बाद 2-3 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि होगी. हिंदुस्तान के शेष भागों में अगले 4-5 दिनों के दौरान अधिकतम तापमान में कोई महत्वपूर्ण बदलाव होने की संभावना नहीं है. The post Heavy Rainfall: 50 KM की रफ्तार से चलेगी हवा, 28 फरवरी तक बारिश से नहीं मिलेगी राहत, IMD अलर्ट appeared first on Naya Vichar.

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Battle of Baghpat: बागपत की ‘महान चाट लड़ाई’ को 4 साल पूरे, जानिए उस दिन क्या हुआ था?

Battle of Baghpat: उत्तर प्रदेश के बागपत जिले में 22 फरवरी 2021 को हुई एक मजेदार लेकिन चर्चित घटना को आज चार साल हो गए हैं. यह घटना सोशल मीडिया पर इतनी वायरल हुई थी कि इसे “बैटल ऑफ बागपत” का नाम दे दिया गया. झगड़े का वीडियो इंटरनेट पर आग की तरह फैला और देखते ही देखते यह एक मजाकिया किंवदंती बन गया. खास बात यह थी कि इस झगड़े में शामिल एक बुजुर्ग ने ऐसा जोश दिखाया कि लोग उन्हें “बागपत के बाहुबली” और “महायोद्धा” जैसे नाम देने लगे. सबसे मजेदार पहलू यह था कि इस विवाद को कहीं न कहीं “पापड़ी चाट” से जोड़ दिया गया, जिससे यह और भी मजेदार बन गया. It’s the 4th Anniversary of “The Great Battle of Papdi-Chaat” fought at Baghpat. It changed the world there after. 💪🏻💪🏻🔥🔥 pic.twitter.com/LQnMg0dTaP — Yo Yo Funny Singh (@moronhumor) February 22, 2025 क्या था ‘बैटल ऑफ बागपत’? बागपत जिले के एक बाजार में यह विवाद हुआ था. रिपोर्ट्स के मुताबिक, दो पक्षों के बीच नगर पालिका की दुकानों को लेकर बहस हो गई, जो जल्द ही मारपीट में बदल गई. दोनों पक्षों के लोग एक-दूसरे को घूंसे, लात और डंडों से पीटने लगे. लड़ाई में शामिल कुछ लोग बुजुर्ग भी थे, लेकिन उनके अंदर जोश किसी युवा से कम नहीं था. इस झगड़े का सबसे चर्चित चेहरा बने एक बुजुर्ग व्यक्ति, जिनकी लंबी सफेद दाढ़ी थी और जो पूरी ताकत से अपने विरोधियों पर हमला कर रहे थे. उनके गुस्से और जोश ने इंटरनेट यूजर्स को खूब हंसाया. इस वीडियो को देखकर लोगों ने तरह-तरह के मजेदार मीम्स बनाए और यह घटना कुछ ही घंटों में देशभर में चर्चा का विषय बन गई. ‘पापड़ी चाट’ और बागपत की लड़ाई इस झगड़े को लेकर एक और दिलचस्प कहानी सोशल मीडिया पर वायरल हुई. कुछ लोगों ने यह कहना शुरू कर दिया कि लड़ाई की असली वजह “पापड़ी चाट” थी. हालांकि, इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई, लेकिन सोशल मीडिया के लिए यही मजेदार एंगल काफी था. लोगों ने कहना शुरू कर दिया कि “पापड़ी चाट के लिए दो गुटों में महायुद्ध छिड़ गया!” कुछ ने तो यह भी मजाक किया कि “बागपत के योद्धाओं ने चाट की प्लेट के लिए कुरुक्षेत्र बना दिया.” मीम्स और सोशल मीडिया का धमाल ‘बैटल ऑफ बागपत’ का वीडियो वायरल होते ही ट्विटर, इंस्टाग्राम और फेसबुक पर इसे लेकर मीम्स की बाढ़ आ गई. कुछ चर्चित मीम्स इस तरह थे: “बागपत के बाहुबली” – इस मीम में सफेद दाढ़ी वाले बुजुर्ग को ‘बाहुबली’ के रूप में दिखाया गया. “जब कोई मेरी पापड़ी चाट खा ले” – इस मीम में लड़ाई की तस्वीर के साथ यह कैप्शन लिखा गया था. “बागपत का महाहिंदुस्तान” – इसमें इस झगड़े की तुलना कौरव-पांडव युद्ध से की गई. लोगों ने इस घटना का इतना आनंद लिया कि कुछ ने यहां तक कह दिया कि यह “हिंदुस्तान के इतिहास की सबसे बड़ी लड़ाई थी जो पापड़ी चाट के लिए हुई!” पुलिस ने क्या किया? यह मामला जितना मजाकिया दिखा, उतना ही गंभीर भी था. पुलिस ने इस झगड़े को शांत कराया और दोनों पक्षों को समझाने की कोशिश की. कई लोगों को हिरासत में भी लिया गया था. बाद में दोनों पक्षों ने समझौता कर लिया और मामला शांत हुआ. लेकिन सोशल मीडिया के लिए यह घटना “एंटरटेनमेंट का पिटारा” बन गई. Also Read: आधा हिंदुस्तान नहीं जानता कि कितने बैंक अकाउंट रखने चाहिए, जान जाएगा तो बन जाएगा अमीर The post Battle of Baghpat: बागपत की ‘महान चाट लड़ाई’ को 4 साल पूरे, जानिए उस दिन क्या हुआ था? appeared first on Naya Vichar.

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झारखंड में खेल, खिलाड़ी और कोच पर हर साल 20.39 करोड़ खर्च, फिर भी नहीं आ रहे मेडल

Jharkhand News| रांची, राजेश तिवारी : झारखंड में स्पोर्ट्स और खिलाड़ियों को बढ़ावा देने के लिए प्रशासन करोड़ों खर्च कर रही है. इसके बावजूद कई स्पोर्ट्सों की स्थिति ऐसी, जिनमें खिलाड़ियों का प्रदर्शन जीरो है. इसके बावजूद उन स्पोर्ट्सों को प्रशासन की ओर से अच्छा खासा अनुदान मिलता है. फुटबॉल, हॉकी (पुरुष), एथलेटिक्स जैसे स्पोर्ट्सों पर प्रशासन सालाना लाखों खर्च कर रही है. पर इनमें प्रदर्शन शून्य है. कुछ स्पोर्ट्सों को छोड़ दें, तो ज्यादातर स्पोर्ट्सों में खिलाड़ी नेशनल गेम्स में भी मेडल नहीं दिला पा रहे हैं. राज्य में स्त्री हॉकी की स्थिति कुछ हद तक ठीक है, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर पुरुष हॉकी की भागीदारी नगण्य है. यही हाल फुटबॉल का भी है. राज्य को उन स्पोर्ट्सों में मेडल मिल रहे हैं, जिनमें प्रशासन की कोई भागीदारी नहीं है. लॉन बॉल, तीरंदाजी, वुशु, मॉडर्न पेंटाथलॉन जैसे स्पोर्ट्सों को प्रशासन अनुदान तक नहीं देती है. इसके बावजूद इन स्पोर्ट्सों में प्रदर्शन अन्य स्पोर्ट्सों की अपेक्षा बेहतर है. प्रशासन द्वारा स्पोर्ट्स सेंटरों व खिलाड़ियों को तैयार करने में किये जा रहे खर्च के ब्योरे पर नजर डालें, तो पायेंगे कि सेंटरों में रह रहे स्पोर्ट्स, खिलाड़ियों व प्रशिक्षकों पर प्रशासन सालाना 20.39 करोड़ रु खर्च कर रही है. प्रशासन विभिन्न सेंटरों में इस तरह कर रही है खर्च पूरे राज्य में 108 डे-बोर्डिंग सेंटर हैं, जहां कुल 2700 खिलाड़ी हैं. प्रत्येक खिलाड़ी को प्रशासन की तरफ से 6000 रुपये वार्षिक छात्रवृत्ति दी जाती है. यानी इन पर 1.62 करोड़ रु खर्च किये जाते हैं. वहीं, 12 क्रीड़ा किसलय केंद्र में खिलाड़ियों पर एक साल में 20.16 लाख रुपये व 24 स्पोर्ट्सो इंडिया सेंटर के प्रशिक्षकों पर सालाना 72 लाख रुपये खर्च होता है. इसके बावजूद प्रदर्शन के नाम पर कुछ नहीं है. यही हाल राज्य में चलने वाले सेंटर ऑफ एक्सलेंस की भी है. पूरे राज्य में 10 सेंटर ऑफ एक्सलेंस संचालित हैं. यहां भी स्पोर्ट्स,खिलाड़ी, कोच और किट पर प्रशासन सालाना 4.74 करोड़ खर्च कर रही है. पर रिजल्ट नहीं आ पा रहा. आवासीय सेंटरों पर खर्च हो रहे 11 करोड़ रुपये राज्य में कुल 30 आवासीय सेंटर हैं. प्रत्येक सेंटर में 25 यानी कुल 750 एथलीट हैं. इन एथलीटों के केवल भोजन मद में प्रशासन लगभग 8.66 करोड़ खर्च कर रही है. वहीं, इनके किट पर प्रशासन 18.75 लाख रुपये सालाना खर्च कर रही है. इसके अलावा 30 प्रशिक्षकों पर प्रशासन सालाना 2.16 करोड़ खर्च कर रही है. कुल मिला कर प्रशासन इन सेंटरों पर खिलाड़ियों और कोच पर सालाना 11.01 करोड़ खर्च कर रही है. झारखंड की ताजा समाचारें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें फुटबॉल के 55 सेंटर, नतीजा सिफर राज्य में फुटबॉल के करीब 55 आवासीय सेंटर हैं. दोनों वर्गों (स्त्री-पुरुष) को मिला कर राज्य में 45 से 50 हजार फुटबॉलर हैं, लेकिन दोनों वर्गों की टीमों में से कोई भी नेशनल गेम्स के लिए क्वालीफाई नहीं कर पायी. वहीं, राज्य में साझा की ओर से संचालित 10 और प्रशासन द्वारा सीधे तौर पर चलाये जा रहे 25 आवासीय प्रशिक्षण केंद्र हैं. इनमें से अधिकतर सेंटरों की हालत ऐसी ही है. स्पोर्ट्स प्रशिक्षकों की कमी भी बड़ा कारण झारखंड में आर्चरी, एथलेटिक्स, हॉकी, रेसलिंग को छोड़ दें, तो यहां अन्य स्पोर्ट्सों के लिए स्पोर्ट्स प्रशिक्षकों की भारी कमी है. यहां अनट्रेंड स्पोर्ट्स प्रशिक्षकों को 15,000 रुपये प्रतिमाह पर नियुक्त किया जा रहा है. बैडमिंटन, बॉक्सिंग, हैंडबॉल, जूडो, स्विमिंग, ताइक्वांडो, वॉलीबॉल, वेटलिफ्टिंग, साइकिलिंग, बास्केटबॉल समेत ऐसे कई स्पोर्ट्स हैं, जिनमें प्रशिक्षक नहीं हैं. किसी स्पोर्ट्स में प्रशिक्षक रखे भी गये हैं, तो उन्हें अनुबंध पर काफी कम मानदेय देकर उनसे काम लिया जा रहा है. ऐसे स्पोर्ट्स प्रशिक्षक स्टेट लेवल स्पोर्ट्स कर ही राज्य के नेशनल खिलाड़ियों को प्रशिक्षण दे रहे हैं. लॉन बॉल को मिले सर्वाधिक गोल्ड लॉन बॉल में झारखंड के खिलाड़ी लगातार मेडल ला रहे हैं. उत्तराखंड राष्ट्रीय स्पोर्ट्सों में झारखंड ने लॉन बॉल में पांच स्वर्ण, दो रजत और दो कांस्य समेत कुल नौ पदक जीते. इस मामले में दूसरे नंबर पर तीरंदाज रहे, जिन्होंने दो स्वर्ण, दो रजत और दो कांस्य पदक जीते. इससे पहले गोवा में हुए 37वें राष्ट्रीय स्पोर्ट्सों में भी झारखंड के लॉन बॉल खिलाड़ियों का दबदबा दिखा था. गोवा नेशनल गेम्स में झारखंड के लॉन बॉल खिलाड़ियों ने चार गोल्ड और तीन ब्रांज समेत सबसे अधिक सात पदक जीते थे. वहीं, केरल में हुए 35वें राष्ट्रीय स्पोर्ट्सों में लॉन बॉल में झारखंड ने दो गोल्ड, दो रजत और तीन कांस्य पदक जीते थे. उत्तराखंड राष्ट्रीय स्पोर्ट्स में झारखंड स्पोर्ट्स गोल्ड सिल्वर ब्रोंज लॉन बॉल 05 02 02 तीरंदाजी 02 02 02 पेंटाथलॉन 00 01 03 वुशु 00 01 02 तैराकी 00 00 02 हॉकी 00 00 01 सेंटर ऑफ एक्सीलेंस कुल खर्च प्रतिवर्ष = 43800000 रुपये सेंटरों की संख्या = 10 सेंटर कुल खिलाड़ी = 300 (30 एथलीट/सेंटर) भोजन मद में खर्च = 350 रुपये/प्रतिदिन खिलाड़ियों के भोजन पर सालाना खर्च (330 दिन) = 300 एथलीट x 350 x 330 दिन = 34650000 रुपये किट में खर्च = 300 एथलीट x 2500 रुपये/प्रति एथलीट = 750000 प्रशिक्षकों पर खर्च = 10 प्रशिक्षक x 70000 रुपये/प्रशिक्षक x 12 महीने = 8400000 कुल खर्च = 34650000 750000 8400000 = 43800000 रुपये डे-बोर्डिंग केंद्र डे-बोर्डिंग की संख्या = 108 डे-बोर्डिंग के प्रशिक्षकों की संख्या = 1900 प्रशिक्षकों का मानदेय (12 महीने का) = 24624000 रुपये (अनुमानित) खिलाड़ियों की संख्या = 2700 वार्षिक छात्रवृत्ति = 6000 रुपये/प्रति एथलीट सालाना 2700 एथलीटों पर खर्च = 2700 एथलीट x 6000 प्रतिवर्ष = 16200000 रुपये क्रीड़ा किसलय केंद्र केंद्र की संख्या = 12 मानदेय प्रति केंद्र = 14000 प्रति माह सालाना खर्च = 12 केंद्र x 12 महीने x 14000 रुपये प्रतिमाह = 2016000 रुपये स्पोर्ट्सो इंडिया सेंटर केंद्र की संख्या = 24 प्रशिक्षक = 24 मानदेय = 25000 रुपये सालाना खर्च = 24 x 12 x 25000 = 7200000 रुपये आवासीय सेंटर सेंटरों की संख्या = 30 कुल खिलाड़ी = 750 (25 एथलीट/सेंटर) भोजन मद में खर्च = 350 रुपये/प्रतिदिन खिलाड़ियों के भोजन मद में सालाना खर्च (330 दिन) = 750 x 350 x 330 = 86625000 रुपये किट पर खर्च = 750 एथलीटों x 2500 रुपये = 1875000 रुपये प्रशिक्षकों पर खर्च = 30 प्रशिक्षक x 60000 रुपये प्रतिमाह x 12

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Neem Karoli Baba: मन में उठ रहे हैं बुरे विचार, तो याद रखें नीम करोली बाबा की ये बातें

Neem Karoli Baba: नीम करोली बाबा 20वीं सदी के महान संत, योगी और गुरु थे. उनका जीवन भक्ति, साधना और सेवा भाव से प्रेरित था. वे अपने अनुयायियों को भगवान के प्रति प्रेम और समर्पण की भावना को बनाए रखने का उपदेश देते थे. वे भक्ति, सेवा और प्रेम पर उपदेश दिया करते थे. उनका मानना था कि भगवान के प्रति सच्चे प्रेम और भक्ति से ही मुक्ति प्राप्त होती है. वे हमेशा अपने अनुयायियों को भक्ति की भावना में लीन रहने की सलाह दी. उनकी बातें आज भी अनुयायियों का मार्गदर्शन करती हैं. ऐसे में जब जिंदगी जीना आसान न लगे, तो नीम करोली बाबा की बताई ये बातें ध्यान में रखें. ये बातें आपको हिम्मत देने के साथ जीवन को एक नई दिशा प्रदान करेंगी. यह भी पढ़ें- Neem Karoli Baba: खुशी के साथ बिताएंगे जीवन, कभी नहीं होंगे निराश, याद रखें नीम करोली बाबा की ये 3 बातें यह भी पढ़ें- Neem Karoli Baba: किस्मत बदल देगी नीम करोली बाबा की ये 4 बातें, घर में पैसों का लगा रहेगा अंबार नीम करोली बाबा कहते थे कि सब कुछ भगवान का है, हम केवल उनके सेवक हैं. ऐसे में अगर आप किसी बात को लेकर चिंतित हैं, तो इस बात को ध्यान में रखें. नीम करोली बाबा के अनुसार, सबसे प्यार करो, सबकी सेवा करो, सच बोलो और भगवान को याद रखो. नीम करोली बाबा कहा करते थे कि जब आदमी बीमार होता है, किसी दर्द में होता है या फिर किसी दाह संस्कार से वापस लौटकर आता है, तो वह वास्तविक जिंदगी की कई सच्चाइयों से सामना करता है. नीम करोली बाबा के मुताबिक, अगर आप ईश्वर पर विश्वास रखेंगे, तो वह आपका ध्यान रखेंगे. नीम करोली बाबा कहते थे कि व्यक्ति का घमंड ही उसके सारे दुखों की वजह बनता है. ऐसे में व्यक्ति को किसी बात का घमंड नहीं करना चाहिए. अगर आप दुनिया में हर इंसान से प्रेम करेंगे, तो आपके आधे से ज्यादा कष्ट और दुख समाप्त हो जाएंगे. यह भी पढ़ें- Neem Karoli Baba: जिंदगी से हो रहे हैं परेशान, तो ध्यान रखें नीम करोली बाबा की ये 4 बातें Disclaimer: यह आर्टिकल सामान्य जानकारियों और मान्यताओं पर आधारित है. नया विचार इसकी पुष्टि नहीं करता है. The post Neem Karoli Baba: मन में उठ रहे हैं बुरे विचार, तो याद रखें नीम करोली बाबा की ये बातें appeared first on Naya Vichar.

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Mutual Fund: बच्चे भी कर सकते हैं म्यूचुअल फंड में निवेश! जानें पूरी प्रक्रिया और फायदे

Mutual Fund: म्यूचुअल फंड इन्वेस्टमेंट आजकल हर किसी की पसंद बनता जा रहा है. इसकी लोकप्रियता का कारण एफडी और सेविंग्स अकाउंट की तुलना में अधिक रिटर्न और कम जोखिम है. लेकिन, क्या आप जानते हैं कि म्यूचुअल फंड में सिर्फ वयस्क ही नहीं, बल्कि नाबालिग (शिशु) भी निवेश कर सकते हैं? अगर आपके शिशु की उम्र 18 साल से कम है, तो आप उनके नाम पर म्यूचुअल फंड अकाउंट खोल सकते हैं. इसमें अभिभावक (माता-पिता या कानूनी गार्जियन) उनके खाते का संचालन करेंगे. यह निवेश उनके भविष्य की शिक्षा, उच्च शिक्षा या अन्य वित्तीय जरूरतों के लिए किया जा सकता है. ऐसे करें नाबालिग के नाम पर म्यूचुअल फंड निवेश नाबालिग के नाम पर म्यूचुअल फंड में निवेश करने के लिए इन स्टेप्स को फॉलो करें. केवाईसी प्रक्रिया पूरी करें: माता-पिता या कानूनी अभिभावक का केवाईसी (KYC) अनिवार्य होता है. संबंध प्रमाण पत्र: माता-पिता को शिशु से संबंध का प्रमाण देना होगा और यदि कानूनी अभिभावक निवेश कर रहा है, तो कोर्ट द्वारा जारी नियुक्ति पत्र आवश्यक होगा. बर्थ सर्टिफिकेट या प्रशासनी दस्तावेज: नाबालिग की उम्र प्रमाणित करने के लिए जन्म प्रमाण पत्र जरूरी होता है. बैंक खाता जरूरी: निवेश के लिए नाबालिग के नाम पर या “नाबालिग/अभिभावक के अधीन” बैंक खाता होना चाहिए. सिर्फ सिंगल होल्डिंग: नाबालिग के खाते में जॉइंट होल्डिंग की अनुमति नहीं होती. म्यूचुअल फंड में निवेश करने के फायदे बच्चों की उच्च शिक्षा के लिए फंड तैयार करना बचत और निवेश की आदत विकसित करना लॉन्ग-टर्म कंपाउंडिंग से अधिक रिटर्न पाना टैक्स लाभ का फायदा उठाना इसे भी पढ़ें: Mehndi Design: वेडिंग मेहंदी डिजाइन पर कितना होता है खर्च, जानें अपने शहर के डिजाइनरों का चार्ज जब बच्चा 18 साल का हो जाए तो ये काम करें जब बच्चा 18 वर्ष का हो जाता है, तो म्यूचुअल फंड खाते की स्थिति “नाबालिग” से “बालिग” में बदलनी जरूरी होती है. ऐसा न करने पर खाते में लेन-देन रुक सकता है. शिशु का पैन कार्ड और KYC अपडेट करना अनिवार्य होता है. अब टैक्स की जिम्मेदारी माता-पिता की बजाय शिशु की होगी. यदि बड़ी राशि निवेश की गई है, तो 18 साल की उम्र में उसे संभालने की मानसिक तैयारी जरूरी होती है. इसे भी पढ़ें: स्टुअर्ट बिन्नी से अधिक कमाती है उनकी पत्नी मेअंती लैंगर, जानें दोनों के पास कितनी है संपत्ति The post Mutual Fund: शिशु भी कर सकते हैं म्यूचुअल फंड में निवेश! जानें पूरी प्रक्रिया और फायदे appeared first on Naya Vichar.

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अश्लीलता के दुष्प्रभाव और उसकी रोकथाम पर प्रभात खबर संवाद में महिलाओं ने बुलंद की आवाज

Naya Vichar Samvad: नया विचार की ओर से शनिवार को धनबाद के गीताश्री बैंक्वेट हॉल दुर्गा मंदिर रोड हीरापुर में संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया. संवाद की इस कड़ी में सखी बहिनपा मैथिलानी समूह की स्त्रीएं शामिल हुईं. संवाद का विषय था ‘समाज में फैलती अश्लीलता, दोषी कौन?’. इस पर स्त्रीओं ने खुलकर अपने विचार रखे. सबने एक सुर में कहा कि अश्लीलता समाज के लिए अभिशाप है. समय रहते इसे नहीं रोका गया, तो आने वाले समय में इसके भयंकर दुष्परिणाम सभी को झेलने होंगे. स्त्रीओं ने कहा कि स्त्रीएं परिवार की धुरी होती हैं. हमें ही इस कोढ़ को समाज से मिटाना होगा. समय रहते इसका इलाज करना होगा. अपने बच्चों को परंपरा और संस्कृति के साथ सामंजस्य बिठाना सिखाना होगा. गौण होती रिश्तों की अहमियत समझानी होगी. उन्हें सोशल मीडिया, इंटरनेट, ओटीटी एवं अन्य सोशल साइट्स के गुण-दोष बताने होंगे. उनके साथ समय बिताकर सामाजिक, पारिवारिक मूल्यों की जानकारी देना जरूरी है. उनका मार्गदर्शन करना होगा. अभिभावक के साथ बेस्ट फ्रेंड भी बनें, तभी काफी हद तक अश्लीलता पर अंकुश लगा सकते हैं. समाज व परिवार में जितना बिखराव आया है इसका कारण एकल परिवार का चलन व संयुक्त परिवार का विघटन है. हमें बच्चों को परंपरा से भी अवगत करना होगा. सोशल साइट्स पर शिशु क्या सर्च कर रहे हैं, इस पर नजर रखनी होगी. कल्पना झा संस्कार की नींव बचपन में डाली जाती है. आजकल की माताएं बच्चों को खिलौने की जगह मोबाइल पकड़ा कर अपनी जिम्मेवारी से मुक्त हो जाती हैं. ऐसे में शिशु संस्कार और परंपरा से कैसे परिचित हो पायेंगे. उमा झा समाज में बढ़ती अश्लीलता का कारण वर्तमान परिवेश में समाज में बढ़ते तकनीकीकरण, शहरीकरण को मान सकते हैं. अपनी मिट्टी गांव को तो हम भूल ही गये हैं. बच्चों में नैतिक मूल्य की कमी होती जा रही है. कंचन झा सनातन धर्म में सोलह संस्कार माने जाते हैं. उसे कहां फॉलो किया जा रहा है. मां बच्चों की पहली गुरु होती हैं. संस्कार की शुरुआत घर से होती है. हमें बच्चों को नैतिकता का पाठ पढ़ाने के साथ ही रिश्तों का सम्मान करना भी सिखाना होगा. स्वाति झा मौजूदा परिवेश में अश्लीलता हमारे परिवार, समाज, देश की विकट समस्या बनती जा रही है. स्त्रीओं की यह जिम्मेवारी बनती है कि अपनी परंपरा, संस्कृति व संबंधों की अहमियत बच्चों को बतायें. उन्हें देर तक मोबाइल नहीं दें. सुभद्रा झा आजकल के शिशु एकल परिवार में पल रहे है. उन्हें माता-पिता, भाई-बहन के अलावा अन्य रिश्तों की जानकारी नहीं मिल पाती. जरूरी है कि बच्चों को परंपरा व संबंधों की जानकारी दें. छुट्टियों में उन्हें गांव भी लेकर जायें. रूबी खां वर्तमान समय में सभी अपनी लाइफ में व्यस्त हो गये हैं. रिश्तों में एडजस्टमेंट बहुत जरूरी है. आजकल के बच्चों का मानसिक विकास समय से पहले हो जा रहा है. घर का वातावरण फ्रेंडली रखना जरूरी है. रीता चौधरी एक घर में रहकर भी लोग एक-दूसरे की दिनचर्या नहीं जानते. अजनबी की तरह जी रहे हैं. सब मोबाइल की दुनिया में व्यस्त हैं. घर के अभिभावक भी बच्चों की मांग पूरी करना ही अपना कर्तव्य समझ लेते हैं. रंजू झा हिंदुस्तानीय संस्कृति को सहेजने की जरूरत है. हमें जो विरासत में मिली है, उसे संभालना है. सोशल साइट्स से अश्लीलता भी परोसी जा रही है. इसका खामियाजा भी भुगतना पड़ रहा है. शिशु स्मार्ट फोन का मिसयूज कर रहे हैं. डेजी कश्यप बढ़ते बच्चों में कुछ बातों को लेकर क्यूरियोसिटी होती है. उनकी जिज्ञासा दूर करना पेरेंटस, टीचर के लिए जरूरी है. अन्यथा वे सोशल साइट्स का सहारा लेंगे. संबंधों में दूरी के कारण त्योहार फीके होते जा रहे हैं. उनमें जीवंतता लाने की जरूरत है. विनीता चौधरी अति हर चीज की बुरी होती है. अभिभावक बच्चों की हर मांग पूरी ना करें. जब घर में कोई सही-गलत की जानकारी देनेवाला नहीं होगा, तब हम मान-मर्यादा की बात कैसे कर सकते हैं. पहला फर्ज बच्चों के लिए है, हम स्त्रीओं को समझना होगा. पूनम झा समाज में बढ़ती अश्लीलता के लिए सोशल मीडिया भी जिम्मेवार है. ये अच्छी बात है कि बच्चों के साथ दोस्ताना व्यवहार होना चाहिए, लेकिन उम्र का लिहाज जरूरी है. जो मां ही छोटे कपड़े पहनेंगी, वह बेटी को क्या सीख देंगी. रीता मिश्रा आधुनिकता की दौड़ में शामिल होकर हम क्या हासिल कर लेंगे, इसे समझना होगा. अपनी संस्कृति को सहेजना होगा. बिखरते रिश्तों के बीच बच्चों को ना तो दादी-नानी की लोरी सुनने को मिलती है और ना ही संदेश देती कहानियां. प्रीति चौधरी पहल, जो करनी होगी बिखरते परिवार को समेटने की है जरूरत. बच्चों को रिश्तों का मान-सम्मान करना सिखाना होगा. सोशल साइट्स एवं अन्य सोशल प्लेटफार्म का साइड इफेक्ट बताने होंगे. भावनाओं को सहेजना, समझना और बताना होगा. धूमिल होते रिश्तों के साथ संस्कार से सींचने की जरूरत. समाधान, जो सामने आये घर का वातावरण फ्रेंडली हो, जहां इमोशन शेयर हो सके. अनावश्यक डिमांड पर कंट्रोल हो. बच्चों की परवरिश आया के भरोसे न छोड़ें. समय की मांग है फिर से संयुक्त परिवार. इसे भी पढ़ें JAC 10th Board पेपर लीक मामले में 5 हिरासत में, जैक ने रिपोर्ट भेजी, SIT या CID कर सकती है जांच चेयरमैन की नियुक्ति जल्द नहीं हुई, तो JPSC भवन में करेंगे मुर्गी पालन, JLKM नेता की चेतावनी बंगाल से आंध्रप्रदेश तक ट्रफ, जानें झारखंड में कैसा रहेगा कल का मौसम, कहां होगी बारिश Indian Railways News: राजधानी एक्सप्रेस का समय बदल गया है, रांची से खुलने का टाइम यहां चेक कर लें The post अश्लीलता के दुष्प्रभाव और उसकी रोकथाम पर नया विचार संवाद में स्त्रीओं ने बुलंद की आवाज appeared first on Naya Vichar.

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Cyber Crime: आठ लाख रुपये के लालच में मजदूर हुआ साइबर ब्लैकमेल का शिकार, जानें क्या है पूरा मामला

Cyber Crime: मुजफ्फरपुर जिले के अहियापुर थाना क्षेत्र स्थित कफेन शहबाजपुर गांव का एक मजदूर साइबर अपराधियों के जाल में फंस गया. अपराधियों ने उसे सोशल मीडिया पर एक लालच भरा ऑफर दिया, जिसमें उसकी पत्नी को गर्भवती करने पर आठ लाख रुपये देने का वादा किया गया था. इसके बाद उसे पांच लाख रुपये और मिलने की बात कही गई थी. इस लालच में आकर मजदूर ने अपनी निजी जानकारी साझा की, लेकिन अब वह साइबर अपराधियों के ब्लैकमेलिंग के जाल में फंस चुका है. सोशल मीडिया पर मिला आकर्षक ऑफर पीड़ित मजदूर ने बताया कि फेसबुक पर एक ऑफर आया, जिसमें लिखा था कि उसकी पत्नी को गर्भवती करने पर पहले आठ लाख रुपये दिए जाएंगे और फिर बच्चा होने पर पांच लाख रुपये और मिलेंगे. इस आकर्षक ऑफर को देखकर उसने अपनी जानकारी दी और अपराधियों से संपर्क किया. पहली बार भेजे गए रुपये साइबर अपराधियों ने मजदूर से ढाई सौ रुपये अपने अकाउंट से भेजने को कहा. उन्हें विश्वास दिलाने के लिए अपराधियों ने पांच लाख रुपये का नकली चेक भी भेजा. यह देखकर मजदूर को लगा कि उसे जल्द ही पैसे मिलेंगे और उसने विश्वास कर ढाई सौ रुपये भेज दिए. एग्रीमेंट के नाम पर सात हजार रुपये की मांग इसके बाद अपराधियों ने मजदूर से कहा कि एक कानूनी एग्रीमेंट किया जाएगा, जिसमें यह लिखा जाएगा कि आठ लाख रुपये पहले और पांच लाख रुपये बाद में दिए जाएंगे. इस एग्रीमेंट को पक्का करने के लिए उन्होंने मजदूर से सात हजार रुपये की मांग की. मजदूर ने जब इनकार किया, तो अपराधियों ने उसे गालियां दीं और धमकी दी कि वह उसे जेल भेज देंगे. डर से चुप रहा मजदूर, अब मदद की गुहार शुरुआत में मजदूर लोक-लाज के डर से किसी से इस बारे में बात नहीं कर सका. लेकिन जब साइबर अपराधियों का टॉर्चर बढ़ा, तो उसे गांव के जनप्रतिनिधियों से मदद की जरूरत पड़ी. अब पीड़ित ने साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई है, और पुलिस से कार्रवाई की उम्मीद जताई है. मजदूर की गलती और गांव में चर्चा साइबर अपराधी अब मजदूर को यह धमकी दे रहे हैं कि उसने जिन पैसे की मांग की है, उन्हें वापस न भेजने पर उसके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जाएगी और उसे जेल भेज दिया जाएगा. इतना ही नहीं अपराधियों ने मजदूर को यह भी बताया कि उसके खाते में पहले ही पांच लाख रुपये भेज दिए गए हैं, और अब उसे बताई गई जगह पर आकर एग्रीमेंट करने के लिए सात हजार रुपये भेजने होंगे. मजदूर का कहना है कि उसने 13 लाख रुपये के लालच में यह गलती की थी अब वह इस मुसीबत से निकलने की कोशिश कर रहा है. यह मामला अब पूरे गांव में चर्चा का विषय बन चुका है, और पुलिस प्रशासन इस मामले में तेजी से कार्रवाई कर रहा है. ये भी पढ़े: पुलिस को चलाने के लिए दिया गया है हथियार, पटना SSP ने अपराधियों को दी खुली चेतावनी साइबर थाने में शिकायत दर्ज मजदूर ने साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई है और पुलिस अब मामले की जांच कर रही है. उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही साइबर अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. The post Cyber Crime: आठ लाख रुपये के लालच में मजदूर हुआ साइबर ब्लैकमेल का शिकार, जानें क्या है पूरा मामला appeared first on Naya Vichar.

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खूंटी ने दुमका को छह विकेट से हराया

गुमला. जेएससीए अंतर जिला अंडर-23 क्रिकेट टूर्नामेंट में खूंटी ने दुमका को छह विकेट से पराजित किया. खूंटी की ओर से 10 ओवरों में 21 रन देकर चार विकेट लेने वाले मीत जैन मैन ऑफ द मैच बने. गुमला के शहीद तेलंगा खड़िया क्रिकेट स्टेडियम में चल रहे राज्य स्तरीय मुकाबले में टॉस जीत कर दुमका ने पहले बल्लेबाजी का फैसला किया. बैटिंग करने उतरी दुमका की पूरी टीम 29.5 ओवरों में महज 103 रनों पर सिमट गयी. टीम की ओर से प्रीत सिंह 30, आयुष सिंह 15, सचिन व कुणाल ने 11-11 रनों की पारी स्पोर्ट्सी. खूंटी की ओर से मीत जैन ने चार, हर्ष ज्ञानी तीन व सतीश मुंडा ने दो विकेट हासिल किये. जवाबी पारी स्पोर्ट्सने उतरी खूंटी ने चार विकेट के नुकसान पर जीत का आंकड़ा छू लिया. आर्यन हुड्डा ने 28 गेदों पर 59 रनों की पारी स्पोर्ट्सी. बलराम नायक ने 23 रनों का योगदान दिया. जेएससीए के पूर्व अध्यक्ष कुलदीप सिंह, एलओ अरुण राय ने प्लेयर ऑफ द डे मीत जैन को पांच हजार कैश व ट्रॉफी देकर पुरस्कृत किया. मौके पर जिला संघ के सचिव जीतेंद्र सिंह, मनोज चौधरी, विमल कुमार, ओमशंकर सिंह, ज्ञान प्रकाश, मधुसूदन उरांव, सनी साहू, शशि प्रकाश, विनीत नाग आदि उपस्थित थे. डिस्क्लेमर: यह नया विचार समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे नया विचार डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है The post खूंटी ने दुमका को छह विकेट से हराया appeared first on Naya Vichar.

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Bihar Assembly Election 2025: कांग्रेस की बिहार में बढ़ी सक्रियता, डेढ़ माह में कई सीनियर नेताओं ने किया दौरा

Bihar Assembly Election 2025 कांग्रेस के बिहार प्रभारी कृष्णा अल्लावारू 24 फरवरी को फिर चार दिवसीय दौरे पर पटना आ रहे हैं.बिहार के प्रभारी बनने के बाद यह उनका दूसरा दौरा है. इससे पहले वे 20 फरवरी को पटना आए थे.बिहार कांग्रेस प्रभारी के एक सप्ताह के अंदर दूसरे दौरा के साथ इस बात की चर्चा तेज हो गई है कि क्या बिहार में कांग्रेस पार्टी रिवाइवल का प्रयास कर रही है.नेतृत्वक पंडित इसके पीछे कई कारण भी दिख रहे हैं. राहुल समेत कई सीनियर नेताओं ने किया दौरा वे कहते हैं कि पार्टी के कई बड़े नेता पिछले डेढ़ माह में बिहार का दौरा कर चुके हैं. पार्टी के सीनियर नेताओं का कहना है कि कई अन्य बड़े नेता के बिहार आ सकते हैं. राहुल गांधी भी पिछले माह 18 जनवरी को बिहार दौरे पर आए थे. इसके कुछ दिनों बाद ही छह फरवरी को वे फिर से बिहार दौरे पर पहुंचे थे. कांग्रेस के सीनियर नेताओं की इस सक्रियता के बाद इस बात की चर्चा तेज हो गई है कि कांग्रेस बिहार विधान सभा चुनाव को लेकर सक्रिय है.वो बिहार में एक बार फिर से अपनी जमीन को तलाशने का प्रयास कर रही है. कांग्रेस में इसपर चर्चा चल रही है. हालांकि इस मुद्दे पर कांग्रेस में दो धडे हैं. एक की राय है कि कांग्रेस आरजेडी के साथ मिलकर पहले की तरह ही चुनाव लड़ना चाह रही है. कांग्रेस में मतभेद जबकि प्रदेश कांग्रेस का एक धड़ा इस बात पर जोर दे रहा है कि विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी को अपनी अलग राह चुननी चाहिए. कृष्ण अल्लावरू भी जब पटना आये तो उनके एक बयान ने सबका ध्यान अपनी ओर खींचा. अल्लावरू ने कहा कि उनकी पार्टी बिहार में मजबूत रही है और पार्टी के नेता, कार्यकर्ता एक साथ मिलकर फिर से संगठन को उसी मुकाम पर पहुंचायेंगे. सबके साथ मिलकर कांग्रेस को दोबारा मजबूत करने की जिम्मेदारी मिली है. अल्लावरू के इसी बयान के बाद प्रदेश में कांग्रेस की कवायद पर सबकी नजरें टिक गई हैं. कांग्रेस की क्यों बढ़ी सक्रियता दरअसल कांग्रेस लोकसभा चुनाव परिणाम के आदार पर बिहार में अपनी सक्रियता बढ़ा दी है. पिछले लोकसभा चुनाव की तुलना में वर्ष 2024 में हुए चुनाव में कांग्रेस की स्थिति बिहार में मजबूत हुई है. कांग्रेस कटिहार, किशनगंज और सासाराम में जीत दर्ज की है जबकि पूर्णिया में कांग्रेस पार्टी के समर्थक पप्पू यादव की जीत हुई है. यह जीत 2004 के बाद कांग्रेस के हाथ आयी है. इससे कांग्रेस बिहार में अपनी पुरानी जमीन को तलाशने के लिए पहल शुरु कर दी है.वहीं पिछली विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी को 19 विधानसभा सीटों पर जीत मिली थी. जबकि 2015 में कांग्रेस पार्टी को 27 सीटों पर जीत मिली थी. ये भी पढ़ें.. Bihar Assembly Election 2025 कब होगा? नीतीश के मंत्री ने दिए संकेत, देखिए वीडियो तेजस्वी ने क्या कुछ कहा… The post Bihar Assembly Election 2025: कांग्रेस की बिहार में बढ़ी सक्रियता, डेढ़ माह में कई सीनियर नेताओं ने किया दौरा appeared first on Naya Vichar.

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