Jharkhand News| रांची, राजेश तिवारी : झारखंड में स्पोर्ट्स और खिलाड़ियों को बढ़ावा देने के लिए प्रशासन करोड़ों खर्च कर रही है. इसके बावजूद कई स्पोर्ट्सों की स्थिति ऐसी, जिनमें खिलाड़ियों का प्रदर्शन जीरो है. इसके बावजूद उन स्पोर्ट्सों को प्रशासन की ओर से अच्छा खासा अनुदान मिलता है. फुटबॉल, हॉकी (पुरुष), एथलेटिक्स जैसे स्पोर्ट्सों पर प्रशासन सालाना लाखों खर्च कर रही है. पर इनमें प्रदर्शन शून्य है. कुछ स्पोर्ट्सों को छोड़ दें, तो ज्यादातर स्पोर्ट्सों में खिलाड़ी नेशनल गेम्स में भी मेडल नहीं दिला पा रहे हैं. राज्य में स्त्री हॉकी की स्थिति कुछ हद तक ठीक है, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर पुरुष हॉकी की भागीदारी नगण्य है. यही हाल फुटबॉल का भी है. राज्य को उन स्पोर्ट्सों में मेडल मिल रहे हैं, जिनमें प्रशासन की कोई भागीदारी नहीं है. लॉन बॉल, तीरंदाजी, वुशु, मॉडर्न पेंटाथलॉन जैसे स्पोर्ट्सों को प्रशासन अनुदान तक नहीं देती है. इसके बावजूद इन स्पोर्ट्सों में प्रदर्शन अन्य स्पोर्ट्सों की अपेक्षा बेहतर है. प्रशासन द्वारा स्पोर्ट्स सेंटरों व खिलाड़ियों को तैयार करने में किये जा रहे खर्च के ब्योरे पर नजर डालें, तो पायेंगे कि सेंटरों में रह रहे स्पोर्ट्स, खिलाड़ियों व प्रशिक्षकों पर प्रशासन सालाना 20.39 करोड़ रु खर्च कर रही है. प्रशासन विभिन्न सेंटरों में इस तरह कर रही है खर्च पूरे राज्य में 108 डे-बोर्डिंग सेंटर हैं, जहां कुल 2700 खिलाड़ी हैं. प्रत्येक खिलाड़ी को प्रशासन की तरफ से 6000 रुपये वार्षिक छात्रवृत्ति दी जाती है. यानी इन पर 1.62 करोड़ रु खर्च किये जाते हैं. वहीं, 12 क्रीड़ा किसलय केंद्र में खिलाड़ियों पर एक साल में 20.16 लाख रुपये व 24 स्पोर्ट्सो इंडिया सेंटर के प्रशिक्षकों पर सालाना 72 लाख रुपये खर्च होता है. इसके बावजूद प्रदर्शन के नाम पर कुछ नहीं है. यही हाल राज्य में चलने वाले सेंटर ऑफ एक्सलेंस की भी है. पूरे राज्य में 10 सेंटर ऑफ एक्सलेंस संचालित हैं. यहां भी स्पोर्ट्स,खिलाड़ी, कोच और किट पर प्रशासन सालाना 4.74 करोड़ खर्च कर रही है. पर रिजल्ट नहीं आ पा रहा. आवासीय सेंटरों पर खर्च हो रहे 11 करोड़ रुपये राज्य में कुल 30 आवासीय सेंटर हैं. प्रत्येक सेंटर में 25 यानी कुल 750 एथलीट हैं. इन एथलीटों के केवल भोजन मद में प्रशासन लगभग 8.66 करोड़ खर्च कर रही है. वहीं, इनके किट पर प्रशासन 18.75 लाख रुपये सालाना खर्च कर रही है. इसके अलावा 30 प्रशिक्षकों पर प्रशासन सालाना 2.16 करोड़ खर्च कर रही है. कुल मिला कर प्रशासन इन सेंटरों पर खिलाड़ियों और कोच पर सालाना 11.01 करोड़ खर्च कर रही है. झारखंड की ताजा समाचारें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें फुटबॉल के 55 सेंटर, नतीजा सिफर राज्य में फुटबॉल के करीब 55 आवासीय सेंटर हैं. दोनों वर्गों (स्त्री-पुरुष) को मिला कर राज्य में 45 से 50 हजार फुटबॉलर हैं, लेकिन दोनों वर्गों की टीमों में से कोई भी नेशनल गेम्स के लिए क्वालीफाई नहीं कर पायी. वहीं, राज्य में साझा की ओर से संचालित 10 और प्रशासन द्वारा सीधे तौर पर चलाये जा रहे 25 आवासीय प्रशिक्षण केंद्र हैं. इनमें से अधिकतर सेंटरों की हालत ऐसी ही है. स्पोर्ट्स प्रशिक्षकों की कमी भी बड़ा कारण झारखंड में आर्चरी, एथलेटिक्स, हॉकी, रेसलिंग को छोड़ दें, तो यहां अन्य स्पोर्ट्सों के लिए स्पोर्ट्स प्रशिक्षकों की भारी कमी है. यहां अनट्रेंड स्पोर्ट्स प्रशिक्षकों को 15,000 रुपये प्रतिमाह पर नियुक्त किया जा रहा है. बैडमिंटन, बॉक्सिंग, हैंडबॉल, जूडो, स्विमिंग, ताइक्वांडो, वॉलीबॉल, वेटलिफ्टिंग, साइकिलिंग, बास्केटबॉल समेत ऐसे कई स्पोर्ट्स हैं, जिनमें प्रशिक्षक नहीं हैं. किसी स्पोर्ट्स में प्रशिक्षक रखे भी गये हैं, तो उन्हें अनुबंध पर काफी कम मानदेय देकर उनसे काम लिया जा रहा है. ऐसे स्पोर्ट्स प्रशिक्षक स्टेट लेवल स्पोर्ट्स कर ही राज्य के नेशनल खिलाड़ियों को प्रशिक्षण दे रहे हैं. लॉन बॉल को मिले सर्वाधिक गोल्ड लॉन बॉल में झारखंड के खिलाड़ी लगातार मेडल ला रहे हैं. उत्तराखंड राष्ट्रीय स्पोर्ट्सों में झारखंड ने लॉन बॉल में पांच स्वर्ण, दो रजत और दो कांस्य समेत कुल नौ पदक जीते. इस मामले में दूसरे नंबर पर तीरंदाज रहे, जिन्होंने दो स्वर्ण, दो रजत और दो कांस्य पदक जीते. इससे पहले गोवा में हुए 37वें राष्ट्रीय स्पोर्ट्सों में भी झारखंड के लॉन बॉल खिलाड़ियों का दबदबा दिखा था. गोवा नेशनल गेम्स में झारखंड के लॉन बॉल खिलाड़ियों ने चार गोल्ड और तीन ब्रांज समेत सबसे अधिक सात पदक जीते थे. वहीं, केरल में हुए 35वें राष्ट्रीय स्पोर्ट्सों में लॉन बॉल में झारखंड ने दो गोल्ड, दो रजत और तीन कांस्य पदक जीते थे. उत्तराखंड राष्ट्रीय स्पोर्ट्स में झारखंड स्पोर्ट्स गोल्ड सिल्वर ब्रोंज लॉन बॉल 05 02 02 तीरंदाजी 02 02 02 पेंटाथलॉन 00 01 03 वुशु 00 01 02 तैराकी 00 00 02 हॉकी 00 00 01 सेंटर ऑफ एक्सीलेंस कुल खर्च प्रतिवर्ष = 43800000 रुपये सेंटरों की संख्या = 10 सेंटर कुल खिलाड़ी = 300 (30 एथलीट/सेंटर) भोजन मद में खर्च = 350 रुपये/प्रतिदिन खिलाड़ियों के भोजन पर सालाना खर्च (330 दिन) = 300 एथलीट x 350 x 330 दिन = 34650000 रुपये किट में खर्च = 300 एथलीट x 2500 रुपये/प्रति एथलीट = 750000 प्रशिक्षकों पर खर्च = 10 प्रशिक्षक x 70000 रुपये/प्रशिक्षक x 12 महीने = 8400000 कुल खर्च = 34650000 750000 8400000 = 43800000 रुपये डे-बोर्डिंग केंद्र डे-बोर्डिंग की संख्या = 108 डे-बोर्डिंग के प्रशिक्षकों की संख्या = 1900 प्रशिक्षकों का मानदेय (12 महीने का) = 24624000 रुपये (अनुमानित) खिलाड़ियों की संख्या = 2700 वार्षिक छात्रवृत्ति = 6000 रुपये/प्रति एथलीट सालाना 2700 एथलीटों पर खर्च = 2700 एथलीट x 6000 प्रतिवर्ष = 16200000 रुपये क्रीड़ा किसलय केंद्र केंद्र की संख्या = 12 मानदेय प्रति केंद्र = 14000 प्रति माह सालाना खर्च = 12 केंद्र x 12 महीने x 14000 रुपये प्रतिमाह = 2016000 रुपये स्पोर्ट्सो इंडिया सेंटर केंद्र की संख्या = 24 प्रशिक्षक = 24 मानदेय = 25000 रुपये सालाना खर्च = 24 x 12 x 25000 = 7200000 रुपये आवासीय सेंटर सेंटरों की संख्या = 30 कुल खिलाड़ी = 750 (25 एथलीट/सेंटर) भोजन मद में खर्च = 350 रुपये/प्रतिदिन खिलाड़ियों के भोजन मद में सालाना खर्च (330 दिन) = 750 x 350 x 330 = 86625000 रुपये किट पर खर्च = 750 एथलीटों x 2500 रुपये = 1875000 रुपये प्रशिक्षकों पर खर्च = 30 प्रशिक्षक x 60000 रुपये प्रतिमाह x 12