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March 13, 2025

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RC और Driving License में इस दिन तक अपडेट करवा लें अपना मोबाइल नंबर, नहीं तो देने पड़ेंगे इतने पैसा

RC and Driving License वाहन रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट एवं ड्राइविंग लाइसेंस में आधार लिंक्ड मोबाइल नंबर अपडेट किये बिना अब वाहन का प्रदूषण प्रमाण पत्र एवं दुरूस्ती प्रमाण पत्र जारी नहीं किए जाएंगे. गुरुवार को परिवहन सचिव संजय कुमार अग्रवाल ने इस बात की जानकारी देते हुए कहा कि परिवहन विभाग द्वारा राज्य के सभी वाहन स्वामियों को कॉन्टैक्टलेस सेवाओं का लाभ प्रदान करने हेतु आधार लिंक्ड मोबाइल नंबर अपडेट करना अनिवार्य किया गया है. 31 मार्च तक करा ले मोबाइल नम्बर अपडेट ड्राइविंग लाइसेंस एवं वाहन रजिस्ट्रेशन में मोबाइल नंबर अपडेट करने की अंतिम समय सीमा 31 मार्च निर्धारित की गई है. जिन वाहन चालकों एवं वाहन मालिकों ने अब तक डीएल और वाहन रजिस्ट्रेशन में लिंक्ड मोबाइल नम्बर अपडेट नहीं किये हैं वह 31 मार्च तक निश्चित रूप से अपडेट करा लें. इसमें बाद जुर्माना लिया जाएगा. सितंबर 2024 से अब तक लगभग 32 हजार से अधिक लोगों ने वाहन रजिस्ट्रेशन में अपना आधार लिंक्ड मोबाइल नम्बर अपडेट करा लिया है. वाहन सॉफ्टवेयर में किया जायेगा प्रावधान इस निर्णय के तहत, वाहन सॉफ्टवेयर में आवश्यक बदलाव किए जाएंगे, ताकि आधार लिंक्ड मोबाइल नंबर अपडेट होने के बाद ही प्रदूषण एवं दुरूस्ती प्रमाण पत्र जारी किए जा सकें. मोबाइल नंबर अपडेट कराने के लिए आधार से लिंकड मोबाइल नंबर देना होगा. अपडेट कराने की सुविधा परिवहन सेवा पोर्टल पर उपलब्ध है. नंबर अपडेट नहीं होने की स्थिति में संबंधित वाहन का पॉल्यूशन सर्टिफिकेट भी नहीं बना सकेंगे. वाहन मालिकों से अपील परिवहन सचिव संजय कुमार अग्रवाल ने कहा कि सभी वाहन मालिक जल्द से जल्द अपने आधार से जुड़े मोबाइल नंबर को अपडेट कराएं, ताकि वे प्रदूषण प्रमाण पत्र एवं दुरूस्ती प्रमाण पत्र निर्गत कराने सहित अन्य ऑनलाइन सेवाओं का लाभ सुगमता से उठा सकें. 24 लाख से अधिक वाहन मालिकों का नंबर अपडेट नहीं विभागीय समीक्षा में पाया गया है कि वर्ष 2014 से 2025 तक कुल लगभग 24 लाख वाहन मालिकों ने अपने आधार से जुड़े मोबाइल नंबर को अपडेट नहीं किया है. इसके कारण वे कॉन्टैक्टलेस सेवाओं का लाभ उठाने में असमर्थ हैं. अपडेट नहीं होने से नहीं मिल पाता निर्गत ई चालान की सूचना कई ऐसे वाहन मालिक/वाहन चालक हैं, जिनका वाहन के रजिस्ट्रेशन एवं ड्राईविंग लाइसेंस के साथ लिंक मोबाइल नंबर और पता गलत/उपयोग में नहीं है. इसके इस वजह से दुर्घटना एवं अन्य घटना की स्थिति में वाहन मालिक/चालक की पहचान में परेशानी होती है. वाहन रजिस्ट्रेशन से लिंक मोबाइल नंबर अपडेट नहीं होने से यातायात उल्लंघनकर्ताओं के मोबाइल पर निर्गत ई चालान की सूचना नहीं मिल पाती है. ऑनलाइन अपडेट कर सकते हैं मोबाइल नंबर वाहन रजिस्ट्रेशन या ड्राइविंग लाईसेंस बनाने के समय लिंकड मोबाइल नंबर अगर उपयोग में नहीं है या नया नंबर अपडेट करना चाहते हैं तो घर बैठे ही ऑनलाइन आसानी से मोबाइल नंबर अपडेट कर सकते हैं. वाहन रजिस्ट्रेशन में मोबाइल नंबर parivahan.gov.in पर एवं ड्राइविंग लाईसेंस में मोबाइल नंबर sarathi.parivahan.gov.in पर ऑनलाइन अपडेट कर सकते हैं. ये भी पढ़ें.. तुम दूसरी शादी करके मुझे अपने साथ रख लो… पवन सिंह की पत्नी ने सोशल मीडिया पर शेयर किया इमोशनल पोस्ट ये भी पढ़ें.. Bhojpuri Songs: बिहार में ‘डबल मीनिंग’ भोजपुरी गानों पर लगी रोक, इन गानों की बढ़ी मांग… ये भी पढ़ें.. Bihar Assembly Election 2025: पटना की सड़कों पर कन्हैया कुमार के लगे पोस्टर, कांग्रेस में बढ़ी हलचल ये भी पढ़ें.. जेपी गंगा पथ पर दीघा से दीदारगंज तक इस माह से दौड़ेगी गाड़ियां, अप्रैल में पूरे होंगे ये दस प्रोजेक्ट पढ़ें नया विचार की प्रीमियम स्टोरी :Magadha Empire : सुनिए मगध की कहानी, एक था राजा बिम्बिसार जिसने साम्राज्य विस्तार के लिए वैवाहिक गठबंधन किया The post RC और Driving License में इस दिन तक अपडेट करवा लें अपना मोबाइल नंबर, नहीं तो देने पड़ेंगे इतने पैसा appeared first on Naya Vichar.

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क्या चाहता है भारत का मुसलमान है? क्यों शिक्षा के क्षेत्र में वह अब भी है सबसे निचले पायदान पर

Table of Contents मुसलमान हाशिए पर क्यों हैं? देश में शिक्षा प्रणाली का हुआ है काफी विस्तार मुसलमानों में शिक्षा की स्थिति लड़के और लड़कियों के बीच शिक्षा में भेदभाव शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में भी शिक्षा के स्तर में अंतर शिक्षा से वंचित रहने के पीछे आर्थिक कारण  Educational Status Of Muslims In India :  हिंदुस्तान का मुसलमान इतना पिछड़ा क्यों है? उसकी शैक्षिक, आर्थिक और सामाजिक स्थिति देश के अन्य समुदाय से पिछड़ी क्यों है? इस सवाल का जवाब तलाशने और मुसलमानों के पिछड़ेपन को दूर करने के सुझाव देने के लिए हाल ही में सेंटर फाॅर डेवलपमेंट पाॅलिसी एंड प्रैक्टिस ने एक रिपोर्ट जारी की है. इस रिपोर्ट को नाम दिया गया है Rethinking Affirmative Action for Muslims in India. यह रिपोर्ट मुसलमानों के प्रति धारणाओं, उनकी अपेक्षाओं, आकांक्षाओं और चिंताओं को बताती है और यह भी बताती है कि मुस्लिम समाज के पिछड़ेपन को कैसे दूर किया जाए. मुसलमान हाशिए पर क्यों हैं? हिंदुस्तानीय मुसलमान जो मध्यकालीन हिंदुस्तान में सत्ता में थे, वे आज हाशिए पर हैं. इसकी वजह तलाशने के लिए 2005 में सच्चर कमेटी का गठन हुआ और इसने अपनी रिपोर्ट भी दी. सच्चर कमेटी की रिपोर्ट ने भी यह माना कि मुसलमानों के पिछड़ेपन की मुख्य वजह शिक्षा ही है. आधुनिक काल में भी मुसलमानों के बीच शिक्षा की स्थिति संतोषजनक नहीं है, जिसकी वजह से मुसलमान पिछड़े हैं. देश में शिक्षा प्रणाली का हुआ है काफी विस्तार हिंदुस्तान की शिक्षा प्रणाली रिपोर्ट में यह बात कही गई है कि पिछले कुछ दशकों में हिंदुस्तान की शिक्षा प्रणाली में अभूतपूर्व विस्तार हुआ है. स्कूल–काॅलेजों में एडमिशन में कई गुना वृद्धि दर्ज की गई है. यहां गौर करने वाली बात यह है कि देश में स्कूल काॅलेजों की संख्या में भी काफी इजाफा हुआ है. देश में स्टूडेंट्‌स की संख्या पर अगर गौर करें तो यह 300 मिलियन से अधिक है. वर्तमान समय में हिंदुस्तान की शिक्षा प्रणाली विश्व में चीन के बाद दूसरे नंबर पर है. देश ने शिक्षा के क्षेत्र में इतनी तरक्की कर ली है कि अब लगभग सभी घरों की पहुंच में एक प्राथमिक विद्यालय है. एक किलोमीटर के दायर में  प्राथमिक/उच्च प्राथमिक विद्यालयों हैं. यह माना जाता है कि शैक्षिक विस्तार प्रक्रिया सामाजिक-आर्थिक रूप से वंचित समूहों की शैक्षिक स्थिति में सुधार करती है. इस लिहाज से मुस्लिम समाज तक भी शिक्षा की लौ पहुंचनी चाहिए थी.  मुसलमानों में शिक्षा की स्थिति देश में अन्य समुदाय और जातियों से मुसलमानों की शैक्षणिक स्थिति की तुलना करेंगे तो हम पाएंगे कि प्राथमिक शिक्षा के स्तर पर तो सामाजिक अंतर बहुत कम हुआ . लेकिन जब बात बच्चों की काॅलेज की शिक्षा या उच्च शिक्षा की आती है, तो ड्राॅपआउट बहुत ज्यादा नजर आता है और इसमें फिर सामाजिक अंतर भी बढ़ जाता है. हालांकि बढ़ती उम्र में बच्चों में ड्राॅपआउट हर वर्ग में दिखता है, लेकिन पढ़ाई छोड़ने में एक स्पष्ट सामाजिक भेदभाव है, जो मुस्लिम परिवारों में बहुत ज्यादा हो जाती है. हिंदू की सवर्ण जाति से अगर तुलना करें तो मुसलमान काॅलेज की पढ़ाई में उनसे काफी पीछे हैं. हिंदू सवर्ण जाति जहां 30.9 प्रतिशत शिक्षा लेती है, वहीं मुसलमान 15.6 प्रतिशत हैं. लड़के और लड़कियों के बीच शिक्षा में भेदभाव मुस्लिम समाज में अगर लड़कियों की शिक्षा की बात करें, तो स्थिति बहुत ही खराब नजर आती है. भले ही मुसलमान समाज लड़कों को शिक्षा को लेकर कोई विशेष सुविधा प्रदान नहीं करता है, लेकिन लड़कियों की स्थिति शिक्षा को लेकर बहुत ही बुरी होती जाती है. 6–13 साल के आयु वर्ग में जहां लड़कों की शिक्षा का प्रतिशत 91.1 है, वह 18 –25 आयु वर्ग में यह 18.4 प्रतिशत है. वहीं लड़कियों में 6–13 साल में शिक्षा का स्तर 89.0 है, जो 18 –25 आयु वर्ग में 12.7 हो जाता है. 14 –17 साल के आयु वर्ग में यह प्रतिशत 64.3 प्रतिशत का है. वहीं हिंदू सवर्ण जाति में यह प्रतिशत 6–13 में 97.8 प्रतिशत, 14–17 साल में 91.7 और 18–25 में यह प्रतिशत गिर 27.6 प्रतिशत हो जाता है. पढ़ें नया विचार की प्रीमियम स्टोरी :मुगल राजदरबार में अकबर ने शुरू कराया था होली का जश्न, औरंगजेब ने लगा दिया था प्रतिबंध शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में भी शिक्षा के स्तर में अंतर आंकड़े बताते हैं कि मुसलमानों की शैक्षिक भागीदारी क्षेत्रीय विविधताओं के अनुरूप है. शहरी मुसलमान जहां शिक्षा को लेकर जागरूक दिखते हैं, वहीं ग्रामीण क्षेत्र के लोग शिक्षा को तवज्जो नहीं देते हैं. शहरी इलाकों में काॅलेज जाने वाले शिशु जहां 19.4 प्रतिशत हैं, वहीं ग्रामीण इलाकों में यह प्रतिशत 13 है. वहीं आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, गुजरात, महाराष्ट्र, हरियाणा और पंजाब जहां शिक्षा का स्तर अच्छा है, वहीं  बिहार, झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश (यूपी) और राजस्थान में यह काफी गिरा हुआ है. हिंदुस्तान में हिंदू सवर्णों में उच्च शिक्षा का प्रतिशत जहां 22.7 प्रतिशत है वह मुसलमानों में 5.7 है.  शिक्षा से वंचित रहने के पीछे आर्थिक कारण  मुस्लिम समाज की संरचना पर अगर गौर करेंगे तो पाएंगे कि आर्थिक समस्या शिक्षा के क्षेत्र में बहुत बड़ी बाधा है. जिन लोगों की आर्थिक स्थिति अच्छी है, वो तो शिक्षा पर खर्च कर पाने की स्थिति में हैं, लेकिन जिनकी आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है, वे शिक्षा को दरकिनार करके ही चलते हैं. यहां गौर करने वाली बात यह है कि मुस्लिम समाज में माता–पिता के बीच भी शिक्षा का स्तर कम है, जिसकी वजह से भी वे शिक्षा के महत्व को समझ नहीं पाते हैं, जो लोग इस सुख से वाकिफ हैं, वे अपने बच्चों को शिक्षा दिलाना चाहते हैं. पढ़ें नया विचार की प्रीमियम स्टोरी :पाकिस्तान में ट्रेन हाईजैक करने वाली बलूच लिबरेशन आर्मी की मांग क्या है, वे क्यों 1948 से ही कर रहे विद्रोह? संपत्ति पर आदिवासी स्त्रीओं के अधिकार, क्या कहता है देश का कानून और कस्टमरी लाॅ Magadha Empire : वैशाली की नगरवधू आम्रपाली, जिसके प्रेमसंबंध मगध के राजाओं से थे ; उसने संन्यास क्यों लिया? विभिन्न विषयों पर एक्सप्लेनर पढ़ने के लिए क्लिक करें The post क्या चाहता है हिंदुस्तान का मुसलमान है? क्यों शिक्षा के क्षेत्र में वह अब भी है सबसे निचले पायदान पर appeared first on

समस्तीपुर

होली स्पेशल ट्रेनों का परिचालन

नया विचार समस्तीपुर – होली के अवसर पर यात्रियों की अतिरिक्त भीड़ के मद्देनजर रेलवे द्वारा कई स्पेशल ट्रेनों का परिचालन किया जा रहा है । इसी कड़ी में और अतिरिक्त स्पेशल ट्रेनों का परिचालन निम्नानुसार किया जा रहा है: 1. गाड़ी सं. 05273/05274 दरभंगा-दौराई (अजमेर)-दरभंगा स्पेशल (सीतामढ़ी-रक्सौल- नरकटियागंज-गोरखपुर-मथुरा-जयपुर के रास्ते) – गाड़ी सं. 05273 दरभंगा-दौराई स्पेशल 22 एवं 29 मार्च, 2025 को दरभंगा से 13.15 बजे खुलकर अगले दिन 22.30 बजे दौराई पहुंचेगी । वापसी में गाड़ी सं. 05274 दौराई-दरभंगा स्पेशल 23 एवं 30 मार्च, 2025 को दौराई से 23.45 बजे खुलकर तीसरे दिन 06.50 बजे दरभंगा पहुंचेगी । 2. गाड़ी सं. 05507/08 सहरसा-अमृतसर-सहरसा स्पेशल – गाड़ी सं. 05507 सहरसा-अमृतसर स्पेशल 16 मार्च, 2025 को सहरसा से 19.00 बजे खुलकर अगले दिन 02.20 बजे अमृतसर पहुंचेगी । वापसी में गाड़ी संख्या 05508 अमृतसर-सहरसा स्पेशल दिनांक 18 मार्च को अमृतसर से 04.00 बजे खुलकर अगले दिन 11.45 बजे सहरसा खुलेगी ।

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कौन हैं सुधीर राजभर, जिनके ‘चमार स्टुडियो’ के उत्पादों के फैन हैं रिहाना और राहुल गांधी

Success Story: कोई क्या इस बात का अनुमान लगा सकता है कि जिस शब्द के सुनने से ही लोग घृणात्मक मुद्रा बना लेते हैं, वह नाम अंतरराष्ट्रीय फलक पर चमकने लगेगा और उसके उत्पादों का फैन पॉप सिंगर रिहाना और कांग्रेस के नेता राहुल गांधी भी हो सकते हैं. शायद आप उस आदमी का नाम जानना चाहेंगे, जिसने यह मुकाम हासिल किया है. उस आदमी का नाम सुधीर राजभर है. सुधीर राजभर मुंबई के धारावी में चमार स्टूडियो के संस्थापक और प्रेरणादायी उद्यमी हैं, जिन्होंने समाजिक चुनौतियों को अवसरों में बदला. जौनपुर के सुधीर राजभर का मुंबई में हुआ पालन-पोषण द इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के रहने वाले सुधीर राजभर का पालन-पोषण मुंबई में हुआ. उन्होंने ड्राइंग और पेंटिंग में स्नातक की डिग्री प्राप्त की. गांव जाने पर उन्हें जातिसूचक शब्द ‘चमार’ से संबोधित किया जाता था, जिससे उन्हें आघात पहुंचता था. सुधीर राजभर ने 2018 में की चमार स्टूडियो की स्थापना सुधीर राजभर ने साल 2018 में मुंबई के धारावी में चमार स्टूडियो की शुरुआत की, जिसका उद्देश्य ‘चमार’ शब्द को गौरव प्रदान करना था. उन्होंने चमड़े के उत्पाद जैसे हैंडबैग, जूते और टोटे बैग बनाना शुरू किया. स्थानीय कारीगरों के साथ मिलकर उन्होंने फुटपाथ पर अपने उत्पाद बेचे, जिससे व्यवसाय का विस्तार हुआ. चमार स्टुडियो के उत्पादों की कीमत चमार स्टूडियो के उत्पाद 1,500 रुपये से 6,000 रुपये तक की कीमत में उपलब्ध हैं. ब्रांड के उत्पाद अमेरिका, जर्मनी और जापान में भी बिकते हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली है. सुधीर राजभर ने चमार स्टुडियो की स्थापना से लेकर अब तक करीब 10 लाख सोफा का उत्पादन किया है. उनके उत्पादों की शोहरत की बात करें, तो पॉप सिंगर रिहाना चमार स्टुडियो के सोफा को खरीदने वाली उपभोक्ता हैं. राहुल गांधी ने एक्स पर की सुधीर राजभर की तारीफ सोशल मीडिया मंच पर राहुल गांधी ने अपने पोस्ट में लिखा है, “चमार स्टूडियो के सुधीर राजभर हिंदुस्तान के लाखों दलित युवाओं के जीवन और यात्रा को समेटे हुए हैं1 बेहद प्रतिभाशाली, विचारों से भरपूर और सफल होने के लिए भूखे लेकिन अपने क्षेत्र के अभिजात वर्ग से जुड़ने के लिए पहुंच और अवसर की कमी है. हालांकि, अपने समुदाय के कई अन्य लोगों के विपरीत उन्हें अपना खुद का नेटवर्क बनाने का अवसर मिला. उन्होंने धारावी के कारीगरों के छिपे हुए कौशल को समझा और उन्होंने एक ऐसा ब्रांड बनाया, जिसे वैश्विक स्तर पर फैशन के सबसे प्रतिष्ठित गलियारों में पहचाना जाता है.” पारंपरिक कारीगरी और आधुनिक उद्यमिता पर काम करता है चमार स्टुडियो राहुल गांधी ने आगे लिखा है कि चमार स्टूडियो की सफलता इस बात पर प्रकाश डालती है कि पारंपरिक कारीगरी और आधुनिक उद्यमिता कैसे एक साथ काम कर सकती है, ताकि कुशल कारीगरों को उस सफलता का एक हिस्सा मिल सके, जो उन्होंने अपने हाथों से बनाई है. आज धारावी में सुधीर और उनकी टीम के साथ काम करते हुए मैंने समावेशी उत्पादन नेटवर्क के महत्व को रेखांकित किया, जो विभिन्न क्षेत्रों में कुशल श्रमिकों को आगे बढ़ाता है. इसे भी पढ़ें: Watch Video: पैरों पर प्लास्टर, हाथों में बैशाखी; टूटा पैर लेकर राजस्थान रॉयल्स के कैंप में पहुंचे द्रविड़ सुधीर राजभर का मॉडल कारगर है: राहुल गांधी राहुल गांधी ने लिखा, “मुझे लगा कि सुधीर के लिए अपने ज्ञान और अनुभव को दूसरों के साथ साझा करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है. इसलिए, हम अपने दोस्त रामचेत मोची को सुल्तानपुर से उनसे मिलने लाए और समझा कि कैसे डिज़ाइन और नवाचार उनके व्यवसाय को बदल सकते हैं.” उन्होंने लिखा है, “मैंने लोकसभा में इस बारे में बात की थी कि कैसे एक समृद्ध हिंदुस्तान का निर्माण केवल “उत्पादन और भागीदारी” के माध्यम से किया जा सकता है. चमार स्टूडियो की सफलता से पता चलता है कि यह मॉडल कारगर है और मुझे उम्मीद है कि हम पूरे हिंदुस्तान में इस तरह के मॉडल को अपना सकते हैं.” इसे भी पढ़ें: Watch Video: मीडिया के सवाल से परेशान चैंपियंस ट्रॉफी के इस स्टार ने खुद को कार में किया बंद The post कौन हैं सुधीर राजभर, जिनके ‘चमार स्टुडियो’ के उत्पादों के फैन हैं रिहाना और राहुल गांधी appeared first on Naya Vichar.

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झारखंड का तापमान 39 डिग्री के पार, और चढ़ेगा पारा, 4 दिन तक Heat Wave का अलर्ट

Heat Wave Alert: झारखंड का अधिकतम तापमान 39 डिग्री के पार पहुंच गया. इसमें अभी 3 डिग्री की और वृद्धि होने की संभावना है. मौसम विभाग ने राज्य में 4 दिन तक हीट वेव का येलो अलर्ट जारी किया है. यानी तापमान 42 डिग्री के पार जा सकता है. डाल्टेनगंज में अधिकतम तापमान 39.2 डिग्री सेंटीग्रेड हुआ हिंदुस्तान मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के रांची स्थित मौसम केंद्र ने बताया है कि डाल्टेनगंज का तापमान 39.2 डिग्री सेंटीग्रेड हो चुका है, जो सामान्य से 6 डिग्री अधिक है. यहां का न्यनतम तापमान 18.3 डिग्री है, जो सामान्य से 1.8 डिग्री सेंटीग्रेड अधिक है. रांची का उच्चतम पारा 34 डिग्री सेंटीग्रेड के पार राजधानी रांची का उच्चतम पारा 34.1 डिग्री हो चुका है, जो सामान्य से 3.2 डिग्री सेंटीग्रेड अधिक है. पिछले 24 घंटे के दौरान इसमें 2.3 डिग्री सेंटीग्रेड की वृद्धि हुई है. न्यूनतम तापमान 2 डिग्री सेंटीग्रेड बढ़कर 19.2 डिग्री हो गया है, जो सामान्य से 2.6 डिग्री सेल्सियस अधिक है. नया विचार प्रीमियम स्टोरी : Ho Tribe: कन्या भ्रूण हत्या से कोसों दूर हो जनजाति के लोग, बेटियों के जन्म पर मनाते हैं जश्न बोकारो-जमशेदपुर का अधिकतम पारा सामान्य से 5 डिग्री अधिक बोकारो का अधिकतम तापमान सामान्य से 5.6 डिग्री और न्यूनतम तापमान सामान्य से 4.2 डिग्री सेंटीग्रेड अधिक रिकॉर्ड किया गया है. जमशेदपुर का उच्चतम तापमान भी सामान्य से 5 डिग्री सेल्सियस अधिक है. हालांकि, न्यूनतम तापमान अभी सामान्य से 0.3 डिग्री सेंटीग्रेड कम है. झारखंड का तापमान 39 डिग्री के पार, और चढ़ेगा पारा, 4 दिन तक heat wave का अलर्ट 2 2 दिन में 2-3 डिग्री बढ़ेगा झारखंड का अधिकतम तापमान मौसम विभाग ने कहा है कि 2 दिन में झारखंड के उच्चतम तापमान में धीरे-धीरे 2 से 3 डिग्री सेंटीग्रेड की वृद्धि हो सकती है. इसके बाद 3 दिन तक इसमें किसी बड़े बदलाव की संभावना नहीं है. झारखंड की ताजा समाचारें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें मौसम विभाग की चेतावनी- 14 से 17 मार्च तक चलेगी उष्ण लहर मौसम विभाग ने झारखंड के लिए जो चेतावनी जारी की है, उसमें कहा है कि 14 मार्च 2025 से 17 मार्च 2025 तक प्रदेश के दक्षिण-पूर्वी और उत्तर-पश्चिमी हिस्से में कहीं-कहीं लू चलने की संभावना है. दक्षिण-पूर्वी भागों में पश्चिमी सिंहभूम, पूर्वी सिंहभूम और सरायकेला-खरसावां, तो उत्तर-पश्चिमी हिस्से के गढ़वा और पलामू में उष्ण लहर चलने की संभावना है. रांची का तापमान 37 डिग्री हो जाने का अनुमान राजधानी रांची के उच्चतम तापमान में 3 दिन तक वृद्धि के बाद इसमें थोड़ी गिरावट आने की संभावना जतायी गयी है. रांची का उच्चतम तापमान 14 मार्च को 36 डिग्री, 15 और 16 मार्च को 37 डिग्री और 17 मार्च को 35 डिग्री सेंटीग्रेड रहने का अनुमान है. इसे भी पढ़ें 13 मार्च को कहां है सबसे सस्ता सिलेंडर, आपके यहां कितना है 14.2 किलो के एलपीजी सिलेंडर का दाम, यहां देखें Video: झारखंड के साइंटिस्ट की मोहाली में मौत, क्या हुआ था उस रात, CCTV के फुटेज में देखें होली से पहले झुमरा पहाड़ के जंगल में लगी आग, ग्रामीणों की बढ़ी चिंता Holi 2025: खास है सरायकेला की होली, भक्तों संग रंग-गुलाल स्पोर्ट्सने घर-घर दस्तक देते हैं राधा-कृष्ण बाबाधाम में कब है होली? कब होगा होलिका दहन? बाबा मंदिर में कैसे मनती है होली? पढ़ें विस्तार से The post झारखंड का तापमान 39 डिग्री के पार, और चढ़ेगा पारा, 4 दिन तक Heat Wave का अलर्ट appeared first on Naya Vichar.

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Holi Health Care : होली का त्योहार न करे सेहत पर वार

Holi Health Care : जिस तरह रंगों के बिना होली की कल्पना नहीं की जा सकती, उसी तरह गुझिया की मिठास के बिना यह त्योहार फीका-सा लगता है. तभी तो होली आने के कुछ दिन पहले से ही घरों में गुझिया बननी शुरू हो जाती हैं, ताकि घर आये मेहमान और परिवार के सदस्य इन गुझियों का जी भर कर मजा ले सकें. हां, मगर कभी-कभी स्वाद के चक्कर में हम जरूरत से ज्यादा गुझिया व अन्य पकवानों का सेवन कर लेते हैं, जिससे फूड प्वॉइजनिंग या बदहजमी जैसी समस्याएं हमारे त्योहार के मजे का किरकिरा कर देती हैं. त्योहार का भरपूर मजा लेने के लिए जरूरी है कि आप स्वाद के साथ सेहत का भी पूरा ख्याल रखें. ओवरइटिंग से बचें होली के मौके पर हर तरफ मिठाइयां व पकवान ही नजर आते हैं, इसलिए आप हर वक्त कुछ न कुछ खाते रहते हैं. ऐसा करना यह काफी नुकसानदेह है. त्योहारों के मौके पर ओवरइटिंग से बचना चाहिए. होली पर बननेवाली मिठाइयां व व्यजंन काफी तले-भुने होते हैं और यह आसानी से नहीं पच पाते हैं. इनके सेवन से आपको फूड प्वॉइजनिंग की समस्या हो सकती है. पानी पीते रहें होली पर आप खाना नहीं भूलते, लेकिन पानी पीने का ध्यान आपको नहीं रहता. पानी की कमी से खाद्य पदार्थ को पचने में काफी समस्या आती है. कम से कम आठ गिलास पानी जरूर पीएं. इसे भी पढ़ें : UPSC CAPF 2025 : केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल में बनें असिस्टेंट कमांडेंट, 357 पदों पर मांगे गये हैं आवेदन न भूलें व्यायाम आमतौर पर लोग त्योहारों के दिन व्यायाम करने में ढीले पड़ जाते हैं, लेकिन ऐसा नहीं करना चाहिए. इस दिन भी आपको रोज की तरह व्यायाम करना चाहिए इससे आपके शरीर में कैलोरी की मात्रा सीमित रहेगी. इन बातों पर दें ध्यान होली के मौके पर ज्यादा तला-भुना व मसालेदार खाना खाने से बचें. भांग, केसर का शरबत या अन्य किसी नशे का सेवन न करें. गुझिया का ज्यादा सेवन न करें. खोए व मैदे से बनी गुझिया आपके सेहत के लिए फायदेमंद नहीं है, इसलिए इन्हें सीमित मात्रा में खाएं. आप ड्राई फ्रूट्स का सेवन कर सकते हैं. यह आपके स्वास्थ के लिए फायदेमंद है. पेय पदार्थ में आप जूस पी सकती हैं. इससे आपके शरीर को पोषण भी मिलेगा. कोशिश करें कि आप घर पर बनी मिठाइयों का सेवन करें. बाजार की मिठाइयों में कई तरह की मिलावट होती है, जिससे आपके स्वास्थ्य को नुकसान पहुंच सकता है. The post Holi Health Care : होली का त्योहार न करे सेहत पर वार appeared first on Naya Vichar.

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Watch Video: मीडिया के सवाल से परेशान चैंपियंस ट्रॉफी के इस स्टार ने खुद को कार में किया बंद

Champions Trophy: पिछले हफ्ते दुबई में हिंदुस्तान की चैंपियंस ट्रॉफी जीत के बाद तेज गेंदबाज हर्षित राणा मंगलवार की सुबह अपने गृहनगर दिल्ली लौट आए. इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पहुंचने पर हर्षित का पत्रकारों से सामना हुआ. हर्षित ने पत्रकारों के कुछ सवालों के जवाब दिए, लेकिन जवाब देते समय हिंदुस्तानीय स्टार थोड़े परेशान दिखे. वायरल वीडियो में, हर्षित पत्रकारों में से एक के सवाल पर स्पष्ट रूप से नाराज दिखे. उन्होंने पत्रकारों को धन्यवाद देने के बाद आखिरकार अपनी कार का दरवाजा बंद कर लिया. इसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. हर्षित अकेले कार में लॉक हो गए. वीडियो में हर्षित को यह कहते हुए सुना गया, “सर, बहुत अच्छा लगा, बता तो दिया आपको.’ गौतम गंभीर और रोहित शर्मा भी स्वदेश लौटे हर्षित ने बांग्लादेश और पाकिस्तान के खिलाफ हिंदुस्तान के पहले दो ग्रुप मैच स्पोर्ट्से, लेकिन वरुण चक्रवर्ती के प्लेंइग इलेवन में आने के बाद उन्हें बाकी टूर्नामेंट के लिए बेंच पर बैठना पड़ा.हर्षित के अलावा हिंदुस्तानीय टीम के मुख्य कोच गौतम गंभीर भी मंगलवार को दिल्ली पहुंचे. इस बीच, हिंदुस्तानीय कप्तान रोहित शर्मा अपनी पत्नी और बच्चों के साथ मुंबई पहुंचे. स्टार बल्लेबाज विराट कोहली और उनकी पत्नी अनुष्का शर्मा मंगलवार को स्टेडियम से लौटने के बाद टीम होटल से चले गए थे. हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि यह जोड़ा हिंदुस्तान लौटा है या नहीं. #WATCH | Delhi: Cricketer Harshit Rana returns to India from Dubai. Team India clinched its third #ChampionsTrophy title yesterday by beating New Zealand in the final. pic.twitter.com/8agTCFSMLL — ANI (@ANI) March 10, 2025 टी20 वर्ल्ड कप 2024 में भी हिंदुस्तान ने जीते थे अपने सभी मुकाबले रोहित की टीम अमेरिका और वेस्टइंडीज में 2024 टी20 विश्व कप में अपराजित रही और इस चैंपियंस ट्रॉफी में भी उसने अपना अभियान जारी रखा. रोहित ने इस उपलब्धि के बारे में कहा, ‘ईमानदारी से कहूं तो यह एक बड़ी उपलब्धि है और इससे पता चलता है कि यह किस प्रकार की टीम है. इससे पता चलता है कि टीम में बहुत गुणवत्ता है, बहुत गहराई है, समूह के भीतर बहुत समझ है, बहुत आनंद है, बहुत उत्साह है और हम इसी तरह से अपना क्रिकेट स्पोर्ट्सना चाहते हैं.’ पूरे टूर्नामेंट में अजेय रहा हिंदुस्तान हिंदुस्तान आठ देशों के टूर्नामेंट में घरेलू मैदान पर इंग्लैंड को 3-0 से वनडे सीरीज में हराकर इस टूर्नामेंट में पहुंचा और अपने सभी पांच मैच जीते हैं. हिंदुस्तान अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद की वनडे और टी-20 विश्व टीम रैंकिंग में टॉप पर है. रोहित ने कहा, ‘हिंदुस्तान एक मैच हार जाता है या फिर मैच इधर-उधर हो जाता है तो इस पर बहुत सारी अटकलें लगाई जाती हैं. लेकिन खिलाड़ी और टीम वास्तव में इसे एक तरफ रखकर केवल इस बात पर ध्यान केंद्रित करने में सफल रहे हैं कि मैच कैसे जीता जाए और स्पोर्ट्स का आनंद कैसे लिया जाए.’ Also Read… जिस टीम को नहीं समझा काबिल, चैंपियंस ट्रॉफी में उसके प्रदर्शन से गदगद रिकी पोंटिंग, कहा बहुत जल्द जीतेगी ICC ट्रॉफी 2027 विश्वकप तक हिंदुस्तान स्पोर्ट्सेगा 27 वनडे मैच, कब और किन टीमों से होगा मुकाबला जानें फुल शेड्यूल खुल गई पोल, फटेहाल निकला पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड! अब खिलाड़ियों की मैच फीस में करेगा कटौती The post Watch Video: मीडिया के सवाल से परेशान चैंपियंस ट्रॉफी के इस स्टार ने खुद को कार में किया बंद appeared first on Naya Vichar.

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Rupee Symbol: रुपये के सिंबल को किसने किया था डिजाइन? DMK से है खास रिश्ता

Rupee Symbol: तमिलनाडु में DMK प्रशासन ने वित्त वर्ष 2025-26 के बजट के लिए जो ‘लोगो’ जारी किया, उसमें हिंदुस्तानीय रुपये के प्रतीक चिह्न ₹ की जगह एक तमिल अक्षर का उपयोग किया गया है. स्टालिन प्रशासन के इस फैसले से विवाद गहरा गया है. बीजेपी ने मुख्यमंत्री एमके स्टालिन नीत पार्टी पर हमला बोला है. मजे की बात ये है कि जिस रुपये के सिंबल को स्टालिन की प्रशासन ने बजट से हटाया है, उसे कोई और नहीं बल्कि डीएमके नेता के बेटे ने ही डिजाइन किया था. उदय कुमार धर्मलिंगम ने डिजाइन किया था रुपये का सिंबल रुपये के सिंबल को डीएमके नेता के बेटे उदय कुमार धर्मलिंगम ने डिजाइन किया था. उदय कुमार के पिता का नाम एन धर्मलिंगम थे, जो डीएमके के विधायक रह चुके हैं. उदय कुमार धर्मलिंगम देश के जाने-माने शिक्षाविद और डिजाइनर हैं. वो आईआईटी गुवाहाटी में असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में कार्यरत हैं. जब उदय कुमार ने रुपये का सिंबल तैयार कर प्रतियोगिता जीती थी, तो उनके पिता एन धर्मलिंगम ने कहा था कि उनके लिए यह गौरव का क्षण है. उनके बेटे ने तमिलनाडु का गौरव बढ़ाया है. उदय ने रुपये के सिंबल को देवनागरी के ‘र’ और रोमन के R को मिलाकर तैयार किया था. पढ़ें नया विचार की प्रीमियम स्टोरी : स्टालिन प्रशासन ने बजट से रुपये का सिंबल ‘₹’ हटाया, तमिलनाडु में गहराया भाषा विवाद तमिलनाडु के बजट में किस लोगा का किया गया इस्तेमाल तमिलनाडु के बजट में रुपये के लोगो की जगह में तमिल शब्द ‘रुबय’ का प्रथम अक्षर अंकित किया गया है. तमिल भाषा में हिंदुस्तानीय मुद्रा को ‘रुबय’ बोला जाता है. लोगो में यह भी लिखा है कि ‘सबकुछ सबके लिए’, जिससे राज्य में सत्तारूढ़ द्रमुक शासन के समावेशी मॉडल के दावे का संकेत मिलता है. The DMK Government’s State Budget for 2025-26 replaces the Rupee Symbol designed by a Tamilian, which was adopted by the whole of Bharat and incorporated into our Currency. Thiru Udhay Kumar, who designed the symbol, is the son of a former DMK MLA. How stupid can you become,… pic.twitter.com/t3ZyaVmxmq — K.Annamalai (@annamalai_k) March 13, 2025 स्टालिन प्रशासन के फैसले पर बौखलाए अन्नामलाई स्टालिन प्रशासन के इस कदम की प्रदेश भाजपा प्रमुख के अन्नामलाई ने आलोचना की है. उन्होंने कहा, “द्रमुक प्रशासन का वित्त वर्ष 2025-26 के लिए राज्य का बजट एक तमिल द्वारा डिजाइन किये गए रुपये के उस प्रतीक चिह्न को प्रतिस्थापित करता है, जिसे पूरे हिंदुस्तान द्वारा अपनाया गया और हमारी मुद्रा में शामिल किया गया है.” उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, “तिरु उदय कुमार, जिन्होंने रुपये का प्रतीक चिह्ल डिजाइन किया था, द्रमुक के एक पूर्व विधायक के बेटे हैं.” उन्होंने तमिलनाडु के वित्त वर्ष 2024-25 के बजट का ‘लोगो’ भी साझा किया, जिसमें हिंदुस्तानीय रुपये का प्रतीक चिह्न अंकित था. The post Rupee Symbol: रुपये के सिंबल को किसने किया था डिजाइन? DMK से है खास रिश्ता appeared first on Naya Vichar.

समस्तीपुर

GOB मद की आवंटन के अभाव में माह दिसंबर से वेतन लंबित

शिक्षकों की फीकी होगी होली व रमजान नया विचार समस्तीपुर। बिहार पंचायत नगर प्रारंभिक शिक्षक संघ(मूल) के प्रदेश सचिव सह जिलाध्यक्ष कुमार रजनीश ने आज 13 मार्च, 2025,गुरूवार को कुमार सत्यम,डीपीओ (स्थापना)समस्तीपुर से शिक्षकों की विभिन्न समस्याओं को लेकर मुलाकात किया।संघ के नेता कुमार रजनीश ने डीपीओ स्थापना से कहा कि हिन्दू और मुस्लिम के महान पर्व होली व रमजान के अवसर पर प्रखंड, नगर एवं विशिष्ट शिक्षकों का GOBमद से वेतन पाने वाले प्रारंभिक शिक्षकों का वेतन माह दिसंबर 2024 से ही आवंटन के अभाव में अटका हुआ है।नतीजतन पिछले 03 माह से वेतन का इंतजार शिक्षक कर रहे हैं।होली व रमजान जैसे पर्व में वेतन नहीं मिलना काफी खेदजनक है।इसलिए इस बार वेतन के अभाव में शिक्षकों के परिवार में होली व रमजान का पर्व फीकी रहेगी। वेतन के अभाव में शिक्षकों के परिवार में अनेकों तरह की घरेलू समस्या उत्पन्न हो रही है।होली व रमजान के पर्व में शिक्षकों को रूपये के अभाव में काफी कठिनाई हो रहा है।कई प्रखंड के शिक्षकों का बकाया अंतर वेतन व एरियर की राशि भुगतान भी लंबित हैं,जिसके कारण शिक्षकों में काफी आक्रोश है।डीपीओ स्थापना ने वेतन भुगतान एवं लंबित कार्य को निष्पादन हेतु तथा GOB मद की आवंटन के लिए संबंधित विभागीय कार्यालय,बिहार,पटना से फोन पर बात कर अवगत कराया। आवंटन प्राप्त होते हीं अपने स्तर से यथाशीध्र वेतन भुगतान,बकाया अंतर वेतन एवं शिक्षकों की अन्य कार्य भी समाधान करने का आश्वासन दिया।

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10 Lines on Bhagat Singh in Hindi: महान क्रांतिकारी भगत सिंह के बारे में 10 लाइन

10 Lines on Bhagat Singh in Hindi: देश के महान क्रांतिकारी और शहीद भगत सिंह (Shaheed Bhagat Singh) बहुत कम आयु मे ही देश के लिए शहीद हो गए थे. उनका जन्म लायलपुर जिले के बंगा में सन् 1907 में हुआ था. 23 साल की उम्र में ही अंग्रेजों ने उन्हें फांसी पर चढ़ा दिया था. देश के नौजवानों के लिए भगत सिंह प्रेरणादायी हैं और देश में भगत सिंह को लेकर एक अलग ही भावना और इज्जत देखने को मिलती है. नौजवानों को उनकी बहादुरी, कारनामे और विचार काफी ज्यादा प्रभावित करते हैं. इसलिए यहां महान क्रांतिकारी भगत सिंह के बारे में 10 लाइन (10 Lines on Bhagat Singh in Hindi) दी जा रही हैं. महान क्रांतिकारी भगत सिंह पर 10 लाइन (10 Lines on Bhagat Singh) महान क्रांतिकारी भगत सिंह पर 10 लाइन (10 Lines on Bhagat Singh in Hindi) इस प्रकार हैं- भगत सिंह (Bhagat Singh) का जन्म 28 सितंबर 1907 को पंजाब के लायपुर जिले में हुआ था वे ब्रिटिश शासन के दौरान एक हिंदुस्तानीय क्रांतिकारी और एक प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी थे. भगत सिंह ब्रिटिश उपनिवेशवाद के खिलाफ सशस्त्र प्रतिरोध में विश्वास करते थे और क्रांतिकारी विचारधाराओं से गहराई से प्रेरित थे. भगत सिंह को 1928 में एक ब्रिटिश पुलिस अधिकारी जे.पी. सॉन्डर्स की हत्या में उनकी भूमिका के लिए गिरफ्तार किया गया था. उनके कार्यों की प्रेरणा लाला लाजपत राय की मौत का बदला लेने की इच्छा से प्रेरित थी, जो पुलिस लाठीचार्ज में घायल हो गए थे. भगत सिंह का मुकदमा और उसके बाद की मौत की सजा हिंदुस्तानीय स्वतंत्रता के लिए एक नारा बन गई. 23 मार्च 1931 को भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव के साथ फांसी पर लटका दिए गए थे. भगत सिंह के बलिदान ने हिंदुस्तानीयों की पीढ़ियों को स्वतंत्रता के लिए उनके संघर्ष में प्रेरित किया.  भगत सिंह को साहस, देशभक्ति और उत्पीड़न के विरुद्ध प्रतिरोध के प्रतीक के रूप में याद किया जाता है. भगत सिंह का जीवन युवाओं के लिए प्रेरणादायी माना जाता है. Naya Vichar Premium Story: झारखंड में परीक्षाओं में धांधली को लेकर केंद्र से भी सख्त कानून, फिर भी थमने का नाम नहीं ले रहे पेपर लीक के मामले भगत सिंह का जन्म कब हुआ था? भगत सिंह (Bhagat Singh in Hindi) का जन्म 28 सितंबर 1907 को पंजाब के लायपुर जिले में हुआ था. इनके पिता का नाम किशन सिंह और माता का नाम विद्यावती था. सिर्फ भगत सिंह ही नहीं बल्कि इनके पिता और चाचा अजीत सिंह और स्वर्ण सिंह भी जानें-माने स्वतंत्रता सेनानी थे. भगत सिंह ने अपनी पढ़ाई डीएवी हाई स्कूल लाहौर से की थी. 13 अप्रैल 1919 को जलियांवाला बाग में सभा के दौरान जो कुछ भी हुआ उसका काफी गहरा असर 12 वर्षीय भगत सिंह पर पड़ा. इसी दौरान उन्होंने यह कसम खायी कि अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ वह आजादी की लड़ाई लड़ेंगे. राजगुरु और सुखदेव के साथ मिलकर भगत सिंह ने काकोरी कांड को अंजाम दिया. यह भी पढ़ें- 10 Lines on Albert Einstein: अल्बर्ट आइंस्टीन पर 10 लाइन और जानें उनके बारे में The post 10 Lines on Bhagat Singh in Hindi: महान क्रांतिकारी भगत सिंह के बारे में 10 लाइन appeared first on Naya Vichar.

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