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March 24, 2025

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Bihar Crime: मर्डर कर डेड बॉडी को आम के पेड़ पर टांग दिया, वारदात से दहली वैशाली

Bihar Crime: हाजीपुर. वैशाली जिले के भगवानपुर में अपराधियों ने एक युवक की हत्या कर दी है. अपराधियों ने युवक की हत्या करने के बाद उसकी डेड बॉडी को आम के पेड़ पर टांग दिया है. इस सनसनीखेज हत्याकांड से इलाके के लोग दहल उठे हैं. दरअसल वैशाली जिले के भगवानपुर में दुकानदार की हत्या कर शव को दुकान के पीछे आम के पेड़ पर टांग दिया गया. हत्या के विरोध में लोग सड़क पर उतर आये हैं. पुलिस मामले की जांच कर रही है. शिवरात्रि को ही खोली थी अपनी दुकान जानकारी के अनुसार सोमवार की सुबह पेड़ पर लटक रहे शव को देखने के बाद इलाके के लोग सन्न रह गए. सूचना मिलते ही मौके पर पुलिस भी पहुंची. मृत युवक का नाम सौरभ कुमार और उम्र 24 साल बताई जा रही है. सौरभ कुमार भगवानपुर थाना क्षेत्र के ही असुरार गांव निवासी बताया गया है. शिवरात्री के दिन ही सौरभ ने दुकान खोली थी. अब इसी दुकान के पीछे स्थित एक पेड़ पर उसकी लाश लटकती हुई हालत में मिली है. हत्या के कारणों का खुलासा नहीं इस वारदात के बाद सौरभ के परिजनों और आसपास के लोगों को गुस्सा फूट पड़ा है. गुस्साये लोगों ने नेशनल हाइवे-22 पर शव रख दिया है और एनएच को जाम कर दिया है. इधर मौके पर पहुंची पुलिस टीम जांच-पड़ताल में जुटी है और साथ ही साथ जाम हटाने की भी कोशिश की जा रही है. समाचार लिखे जाने तक लोग सड़क पर ही बैठे थे. पुलिस ने इस पूरे मामले में कहा है कि अभी जांच चल रही है. हत्या के कारणों का पता नहीं चला है. हत्यारों की पहचान के लिए पूछताछ की जा रही है. Also Read: अगले तीन माह में नक्सलमुक्त होगा बिहार, पुलिस मुख्यालय ने तैयार किया एक्शन प्लान The post Bihar Crime: मर्डर कर डेड बॉडी को आम के पेड़ पर टांग दिया, वारदात से दहली वैशाली appeared first on Naya Vichar.

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Vajrasana Benefits for Belly Fat: बेली फैट कम करना है तो खाना खाने के बाद करें वज्रासन

Vajrasana Benefits for Belly Fat: आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी और गलत खानपान के चलते अधिकतर लोगों का पेट बाहर निकल आता है. मोटापे की समस्या न सिर्फ आपकी पर्सनालिटी पर असर डालती है, बल्कि यह कई बीमारियों को भी न्योता देती है. अगर आपका भी पेट बाहर निकल रहा है और आप इसे कम करने का आसान तरीका ढूंढ रहे हैं, तो वज्रासन आपके लिए फायदेमंद साबित हो सकता है. खास बात यह है कि वज्रासन को खाने के तुरंत बाद भी किया जा सकता है और यह पाचन को भी बेहतर बनाता है. Diamond Pose: वज्रासन क्या है? Vajrasana benefits for belly fat: बेली फैट कम करना है तो खाना खाने के बाद करें वज्रासन वज्रासन एक साधारण लेकिन प्रभावी योगासन है, जिसे डायमंड पोज (Diamond Pose) भी कहा जाता है. इस आसन को करने के लिए घुटनों के बल बैठकर एड़ियों पर शरीर का भार रखना होता है. वज्रासन का नियमित अभ्यास करने से पेट की चर्बी कम होती है और पाचन तंत्र मजबूत होता है. वज्रासन करने का सही तरीका किसी साफ और समतल जगह पर योग मैट बिछाकर बैठें. पैरों को मोड़कर घुटनों के बल बैठ जाएं. एड़ियां आपस में सटी हों और पैरों की उंगलियां बाहर की ओर हों. अब अपने हाथों को घुटनों पर रखें और पीठ को सीधा रखें. आंखें बंद करें और सामान्य रूप से गहरी सांस लें. इस मुद्रा में 5 से 10 मिनट तक बैठें. How Vajrasana helps in weight loss: वज्रासन के फायदे Vajrasana benefits for belly fat: बेली फैट कम करना है तो खाना खाने के बाद करें वज्रासन पाचन में सुधार वज्रासन करने से पाचन क्रिया मजबूत होती है. खाने के बाद इसे करने से गैस, अपच और एसिडिटी जैसी समस्याएं दूर होती हैं. 2.पेट की चर्बी कम होती है वज्रासन से पेट की अतिरिक्त चर्बी धीरे-धीरे कम होने लगती है. इससे पेट अंदर रहता है और मोटापे से छुटकारा मिलता है. 3. मेटाबॉलिज्म को बढ़ावा यह आसन शरीर के मेटाबॉलिज्म को तेज करता है, जिससे कैलोरी तेजी से बर्न होती है और वजन नियंत्रित रहता है. 4. पीठ और रीढ़ की हड्डी को मजबूती वज्रासन से पीठ दर्द की समस्या से राहत मिलती है और रीढ़ की हड्डी मजबूत होती है. 5. मानसिक शांति और तनाव कम वज्रासन करने से दिमाग को शांति मिलती है और तनाव कम होता है. यह ध्यान केंद्रित करने में भी मदद करता है. Vajrasana after food benefits: ध्यान रखें ये बातें वज्रासन करने से पहले और बाद में पानी न पिएं. अगर आपके घुटनों में दर्द है या कोई सर्जरी हुई है तो वज्रासन करने से बचें. इसे खाने के तुरंत बाद करने से ही अधिक लाभ मिलता है. वज्रासन न सिर्फ आपके पेट को अंदर रखने में मदद करता है, बल्कि यह आपके संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद है. अगर आप भी अपने बढ़ते वजन और बाहर निकलते पेट से परेशान हैं, तो खाने के बाद 5-10 मिनट वज्रासन जरूर करें और कुछ ही दिनों में फर्क महसूस करें. Also Read: Yoga Asanas for Stiffness: लंबे समय तक बैठे रहने से शरीर में आई अकड़न दूर करेंगे ये योग आसन Also Read:Daily Exercise for Healthy Lungs: फेफड़े की तंदुरुस्ती के लिए रोज करें ये 5 आसान The post Vajrasana Benefits for Belly Fat: बेली फैट कम करना है तो खाना खाने के बाद करें वज्रासन appeared first on Naya Vichar.

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Eid-Ul-Fitr 2025: 31 मार्च या 1 अप्रैल भारत में ईद कब, जानें चांद देखने का महत्व और समय

Eid-Ul-Fitr 2025: ईद-उल-फितर इस्लाम धर्म का एक अत्यंत महत्वपूर्ण त्योहार है, जिसे रमजान के महीने के अंत में मनाया जाता है. यह त्योहार चंद्रमा देखने को लेकर निर्भर करता है, इसलिए हर वर्ष इसकी तिथि भिन्न होती है. वर्ष 2025 में हिंदुस्तान में ईद कब मनाई जाएगी—31 मार्च या 1 अप्रैल? इस प्रश्न का उत्तर चांद के दीदार पर निर्भर करेगा. ईद की तारीख कैसे तय होती है? इस्लामी कैलेंडर चंद्रमा के आधार पर चलता है, और महीनों की गणना चांद के दर्शन के अनुसार की जाती है. रमजान का महीना 29 या 30 दिनों का होता है, और इसके समाप्त होने पर शव्वाल (इस्लामी कैलेंडर का दसवां महीना) का चाँद दिखाई देता है, जिसके अगले दिन ईद-उल-फितर का उत्सव मनाया जाता है. रोजा इफ्तार में खजूर खाने की खास वजह, जानिए इसका धार्मिक महत्व कब मनाई जा सकती है ईद हिंदुस्तान में चांद के दर्शन के साथ 2 मार्च से रमजान का आगाज हुआ था. इस्लामी कैलेंडर के अनुसार, रमजान के बाद शव्वाल के पहले दिन ईद का त्योहार मनाया जाता है. वास्तव में, शव्वाल का चांद देखने के बाद ही रमजान का समापन होगा और ईद का उत्सव मनाया जाएगा. रमजान 30 दिनों तक चलता है, जिसके बाद 1 अप्रैल को ईद मनाई जाएगी. हालांकि, यदि चांद 30 मार्च की रात को दिखाई देता है, तो ईद 31 मार्च को मनाई जाएगी. चांद देखने की परंपरा ईद की सही तिथि निर्धारित करने के लिए इस्लामी विद्वान और धार्मिक संस्थाएं पूरे देश में चांद देखने की घोषणा करती हैं. हिंदुस्तान, पाकिस्तान, सऊदी अरब और अन्य मुस्लिम देशों से विभिन्न स्थानों से चांद देखने की सूचनाएं प्राप्त होती हैं. सामान्यतः, सऊदी अरब में चांद एक दिन पहले दिखाई देता है, जिसके कारण वहां ईद हिंदुस्तान से एक दिन पहले मनाई जाती है. ईद का महत्व और परंपराएं ईद-उल-फितर सिर्फ एक पर्व नहीं है, बल्कि यह भाईचारे, दया और खुशी का दिन है. इस दिन लोग मस्जिदों में विशेष नमाज अदा करते हैं, गरीबों को जकात और फितरा देते हैं, और अपने प्रियजनों के साथ खुशी मनाते हैं. सेवाईं, मिठाइयां और पकवानों के बिना ईद अधूरी होती है. The post Eid-Ul-Fitr 2025: 31 मार्च या 1 अप्रैल हिंदुस्तान में ईद कब, जानें चांद देखने का महत्व और समय appeared first on Naya Vichar.

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विकेट के पीछे थे धोनी, डेब्यू करने आए ‘झारखंड के गेल’, CSK vs MI मैच में रॉबिन मिंज का स्पेशल मोमेंट

IPL 2025 के तीसरे मुकाबले में CSK vs MI के बीच हुए रोमांचक मुकाबले ने झारखंड के क्रिकेट प्रेमियों के लिए गर्व का पल ला दिया. IPL 2025 के पहले ही मैच में मुंबई इंडियंस ने सभी को चौंका दिया, जब उन्होंने चेपक में चेन्नई सुपर किंग्स के खिलाफ एक अनजान से चेहरे, रॉबिन मिंज को प्लेइंग इलेवन में मौका दिया. 22 वर्षीय रॉबिन मिंज झारखंड के एक प्रतिभाशाली बल्लेबाज हैं. IPL में डेब्यू करने वाले पहले आदिवासी क्रिकेटर बन गए हैं. मुंबई इंडियंस ने उन्हें 65 लाख रुपये में खरीदा. इसी नीलामी में CSK भी उन्हें लेने की रेस में थी. हालांकि बाजी मुंबई के हाथ लगी.  इस हाई-वोल्टेज मैच में दोनों टीमों के विकेटकीपर झारखंड से थे- मुंबई इंडियंस के युवा प्रतिभाशाली खिलाड़ी रोबिन मिंज और चेन्नई सुपर किंग्स के दिग्गज कप्तान महेंद्र सिंह धोनी. इस मुकाबले में रोबिन मिंज ने मुंबई इंडियंस के लिए आईपीएल में अपना डेब्यू किया. यानी विकेट के पीछे धोनी थे तो विकेट के आगे झारखंड के गेल. हालांकि CSK vs MI मैच में मुंबई के लिए विकेटकीपिंग का जिम्मा रियान रिकलटन ने संभाला था. लेकिन धोनी के सामने मिंज का डेब्यू स्पेशल लम्हा रहा. Robin Minz Debut in front of MS Dhoni. इस मैच में मुंबई इंडियंस ने टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी की. लेकिन उसकी शुरुआत अच्छी नहीं रही. कप्तान रोहित शर्मा 0 के स्कोर पर चलते बने. उसके बाद नियमित अंतराल पर विकेट गिरे. 87 रन पर चार विकेट गिरने के बाद रॉबिन मिंज बैटिंग करने उतरे. वे जब बैटिंग करने उतरे तो बॉलिंग नूर अहमद थे, तो विकेट के पीछे धोनी. हालांकि मिंज के लिए पहला मैच ज्यादा सफल नहीं रहा. वे केवल 3 रन बनाकर आउट हो गए. लेकिन मुंबई के लिए अपना आईपीएल पदार्पण करने वाले मिंज आने वाले मैचों में कमाल दिखाते जरूर नजर आएंगे.  रॉबिन मिंज का क्रिकेट सफर रॉबिन मिंज का सफर आसान नहीं रहा. झारखंड के एक साधारण परिवार से आने वाले इस खिलाड़ी के पास न तो किसी बड़ी अकादमी का समर्थन था और न ही कोई विशेष सुविधाएं. लेकिन उनकी कड़ी मेहनत और प्रतिभा ने उन्हें यहां तक पहुंचाया. पहली बार वह 2024 की मिनी नीलामी में चर्चा में आए, जब गुजरात टाइटन्स ने उन्हें खरीदा था. वह IPL में चुने जाने वाले पहले आदिवासी क्रिकेटर बने, लेकिन किस्मत ने साथ नहीं दिया. एक बाइक दुर्घटना के कारण वह डेब्यू करने से पहले ही टूर्नामेंट से बाहर हो गए. लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और फिर वापसी की.  मिंज कोई पारंपरिक तकनीकी बल्लेबाज नहीं हैं. वह आते ही गेंदबाजों पर हमला बोलते हैं, तेजी से रन बनाते हैं और बड़े शॉट लगाने में माहिर हैं. उनका हेलीकॉप्टर शॉट भी शानदार है. उनकी आक्रामक शैली के कारण कुछ लोग उन्हें “झारखंड का क्रिस गेल” तो कुछ “अगला धोनी” तक कहते हैं. हालांकि, वह खुद इन बड़े नामों के दबाव में नहीं दिखते. मिंज ने झारखंड के लिए स्पोर्ट्सते हुए कर्नल सीके नायडू ट्रॉफी में हरियाणा के खिलाफ 80 गेंदों पर 77 रन की तेज़तर्रार पारी स्पोर्ट्सी, जिसने चयनकर्ताओं का ध्यान खींचा. अब तक स्पोर्ट्से गए 7 टी20 मैचों में उन्होंने 181.08 की स्ट्राइक रेट से बल्लेबाजी की है. इस साल उन्होंने झारखंड के लिए प्रथम श्रेणी क्रिकेट में भी डेब्यू किया. चेन्नई ने दर्ज की शानदार जीत मैच की बात करें तो मुंबई इंडियंस ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में 155 रन बनाए, जिसमें चेन्नई सुपर किंग्स के गेंदबाजों का शानदार प्रदर्शन देखने को मिला. नूर अहमद ने चार विकेट और खलील अहमद ने तीन विकेट झटककर मुंबई की बल्लेबाजी को झकझोर दिया. लक्ष्य का पीछा करने उतरी चेन्नई सुपर किंग्स ने 19.1 ओवर में छह विकेट खोकर यह मुकाबला अपने नाम कर लिया. कप्तान ऋतुराज गायकवाड़ और रचिन रविंद्र ने शानदार पारियां स्पोर्ट्सीं, जबकि मुंबई के लिए विग्नेश पुथुर ने तीन विकेट झटके, लेकिन रचिन रविंद्र की शानदार पारी की बदौलत चेन्नई ने जीत हासिल की.  जोफ्रा आर्चर और ‘ब्लैक टैक्सी’; हरभजन सिंह ने ये क्या कर डाला, बोला कुछ ऐसा मच गया भारी बवाल दीपक चाहर ने बीच मैदान ऐसा क्या किया? धोनी को बल्ले से लगानी पड़ी चपत, वायरल हुआ Video टीम इंडिया से बाहर होने के बाद न नींद न आराम, तूफानी शतक के बाद इशान किशन की तैयारी का आया Video The post विकेट के पीछे थे धोनी, डेब्यू करने आए ‘झारखंड के गेल’, CSK vs MI मैच में रॉबिन मिंज का स्पेशल मोमेंट appeared first on Naya Vichar.

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Bullet Train : जहां चल रहा था बुलेट ट्रेन का काम वहां हो गया बड़ा हादसा

Bullet Train : अहमदाबाद के नजदीक बुलेट ट्रेन परियोजना स्थल पर निर्माण के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला ‘सेगमेंटल लॉन्चिंग गैंट्री’ दुर्घटनावश अपनी जगह से हट गया. इसकी वजह से समीपवर्ती रेलवे लाइन पर कई ट्रेनों की आवाजाही बाधित हुई. राष्ट्रीय हाई-स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एनएचएसआरसीएल) ने बताया कि यह हादसा रविवार रात करीब 11 बजे वटवा में हुआ. हालांकि, इसमें कोई हताहत नहीं हुआ और न ही पहले से बने हुए ढांचे को कोई नुकसान पहुंचा. अहमदाबाद रेलवे मंडल के एक अधिकारी ने बताया कि इस घटना के कारण कम से कम 25 ट्रेनों को रद्द कर दिया है. 15 ट्रेनों को आंशिक रूप से रद्द किया गया. इसके अलावा, पांच ट्रेनों का समय पुनर्निर्धारित किया गया और छह ट्रेनों के मार्ग बदल दिए गए. रेलवे अधिकारियों ने बताया कि प्रभावित रेलवे लाइन से ‘गैंट्री’ हटाने का प्रयास जारी है ताकि ट्रेनों की आवाजाही बहाल की जा सके. एनएचएसआरसीएल के एक अधिकारी ने बताया कि क्रेनों की मदद से रेलमार्गो की बहाली का कार्य किया जा रहा है. एनएचएसआरसीएल के बयान के अनुसार, “बीती रात करीब 11 बजे वटवा (अहमदाबाद के पास) में निर्माण के लिए इस्तेमाल की जा रही एक ‘सेगमेंटल लॉन्चिंग गैंट्री’, कंक्रीट गर्डर लॉन्चिंग पूरी करने के बाद पीछे हट रही थी। इसी दौरान हादसा हुआ.” बयान में आगे कहा गया, “इस घटना से पास की रेलवे लाइन प्रभावित हुई है. एनएचएसआरसीएल के वरिष्ठ अधिकारी, पुलिस और अग्निशमन विभाग के अधिकारी मौके पर स्थिति की निगरानी कर रहे हैं. इस हादसे में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है और बने हुए ढांचे को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है.” अहमदाबाद रेलवे मंडल के एक अधिकारी के अनुसार, इस घटना से वटवा और अहमदाबाद स्टेशनों के बीच डाउन लाइन पर रेल यातायात प्रभावित हुआ. रद्द की गई ट्रेनों में वटवा-बोरीवली एक्सप्रेस, अहमदाबाद-मुंबई सेंट्रल एक्सप्रेस, वडोदरा-वटवा इंटरसिटी, अहमदाबाद-वलसाड गुजरात क्वीन, जामनगर-वडोदरा इंटरसिटी, वडनगर-वलसाड-वडनगर एक्सप्रेस और वटवा-आनंद मेमू शामिल हैं. अहमदाबाद-मजीठिया चेन्नई सेंट्रल हमसफर एक्सप्रेस, राजकोट-सिकंदराबाद एक्सप्रेस और कुछ अन्य ट्रेनों को पुनर्निर्धारित किया गया है. रेलवे अधिकारियों ने यात्रियों की सहायता के लिए एक हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया है. The post Bullet Train : जहां चल रहा था बुलेट ट्रेन का काम वहां हो गया बड़ा हादसा appeared first on Naya Vichar.

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Premanand Ji Maharaj: मन का मायाजाल या बुरी नजर? प्रेमानंद जी महाराज ने बताया सच, अपनाएं ये उपाय

Premanand Ji Maharaj: कई लोग होते हैं उनके जिंदगी में चल रही परेशानियों को बुरी नजर या टोटका बताते हैं. वे अक्सर कहा करते हैं कि किसी इंसान को बुरी नजर लग गई है. इससे निजात पाने के लिए कई लोग ढोंगी बाबा का झांसे में फंस जाते हैं. उनसे झाड़-फूंक कराते हैं. हालांकि, कई बार इन चक्करों में पड़कर इंसान अपना बहुत नुकसान करा लेता है. ऐसे ही कई भक्त प्रेमानंद जी महाराज के पास आते हैं और बोलते हैं कि उनके घर पर किसी की बुरी नजर लग गई है या उन पर कोई टोटका कर दिया गया है. ऐसे ही लोगों के लिए प्रेमानंद जी महाराज ने एक बताई है, जो कि लोगों को जरूर सुननी चाहिए. इन बातों को अपने जीवन में उतारकर व्यक्ति इन सब चक्करों से छुटकारा पा सकता है. प्रेमानंद जी महाराज ने बताई वजह प्रेमनांद जी महाराज कहते हैं कि कोई अन्य व्यक्ति ये सब नहीं रचता है, बल्कि हमारे भीतर बैठा मन इन सब चीजों की रचना करता है. ये सिर्फ हमारे दिमाग की रचना होती है. इसके अलावा, उन्होंने इन सब चीजों से बचने के उपाय के बारे में भी बताए हैं. जिनको अपनाने से घर में सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली आती है. इसके अलावा, बुरी नजरों से बचने में भी आसानी होती है. आइए जानते हैं कि प्रेमानंद जी महाराज ने कौन-से उपायों का सुझाव दिया है. यह भी पढ़ें- Premanand Ji Maharaj: अपना ली प्रेमानंद जी की ये बातें, तो याद किया हुआ नहीं भूलेंगे कभी यह भी पढ़ें- प्रेमानंद जी महाराज ने तलाक बढ़ने की बताई वजह, हर शख्स को जाननी चाहिए ये बातें अपनाएं प्रेमानंद जी महाराज के ये सुझाव प्रेमानंद जी महाराज ने कहा कि बुरी नजरों से बचने के लिए भगवत पाठ बहुत जरूरी होता है. रोजाना आप एक घंटे भगवत पाठ करते हैं, तो आपको मन की शांति मिलेगी. साथ ही घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह भी होगा. प्रेमानंद जी महाराज ने राधारानी का नाम भी जपने को लेकर कहा है. ऐसा करने से आत्मिक शांति तो मिलती है साथ ही घर की खुशहाली में वृद्धि भी होती है. इसके अलावा, यह बुरी नजर से छुटकारा दिलाने में भी मदद करता है. प्रेमानंद जी महाराज ने कहते हैं कि बुरी नजरों से बचने के लिए घर में भगवत पाठ के बाद दीपक और आरती जलाना चाहिए. यह घर में सकारात्मक ऊर्जा को फैलाने का काम करता है. प्रेमानंद जी महाराज कहते हैं कि ये काम करीब 2 महीने तक अपनाने चाहिए. इसके बाद आपको खुद-ब-खुद बदलाव दिखने लगेगा. यह भी पढ़ें- Premanand Ji Maharaj: भव्य तरीके से मनाया जाएगा प्रेमानंद जी महाराज का जन्मदिन, दूर-दूर से आएंगे श्रद्धालु, तारीख आई सामने Disclaimer: यह आर्टिकल सामान्य जानकारियों और मान्यताओं पर आधारित है. नया विचार किसी भी तरह से इनकी पुष्टि नहीं करता है. The post Premanand Ji Maharaj: मन का मायाजाल या बुरी नजर? प्रेमानंद जी महाराज ने बताया सच, अपनाएं ये उपाय appeared first on Naya Vichar.

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Rana Sanga History: राणा सांगा ने बयाना के युद्ध में दी थी बाबर को मात

Table of Contents राणा सांगा और बाबर के बीच पहला युद्ध बाबर को किसने बुलाया इब्राहीम लोदी को तीन बार हराया Rana Sanga History: संसद में राणा सांगा पर दिए गए एक बयान ने नेतृत्व में हलचल मचा दी है. इसमें राणा सांगा पर आरोप लगाया गया है कि वो बाबर को हिंदुस्तान लेकर आए थे. जबकि इस बात को लेकर इतिहासकार ही दो खेमों में बंटे हैं. इतिहास के पन्नों को खंगालें तो पता चलता है कि राणा सांगा महान योद्धा थे. वो मेवाड़ के शासक महाराणा रायमल बेटे थे. राणा सांगा तीन भाई थे. महाराणा रायमल ने ही उन्हें अपना उत्तराधिकारी घोषित किया था. 1508 में वो मेवाड़ की सत्ता पर बैठे. उन्होंने 100 से अधिक लड़ाईयां लड़ी और जीत हासिल की. इन युद्धों के कारण ही उनके शरीर पर 80 से अधिक घाव थे. राणा सांगा और बाबर के बीच पहला युद्ध इतिहासकारों के अनुसार बाबर ने हिंदुस्तान पर आक्रमण करने के लिए 1503 में प्रयास शुरू किए थे. इसके बाद 1504, 1518 और 1519 में भी उसने हिंदुस्तान में घुसपैठ की कोशिश की. लेकिन सफल नहीं हुआ. 1526 में इब्राहीम लोदी के सूबेदारों के बुलावे पर वो पानीपत पहुंचा और यहां जीत हासिल की. जबकि राणा सांगा और बाबर के बीच पहला युद्ध 21 फरवरी 1527 को बयाना में हुआ था. इसमें बाबर की सेना को मुंह की खानी पड़ी थी. इस युद्ध का जिक्र बाबरनामा में भी है. इसके बाद मार्च 1927 में आगरा से 60 किलोमीटर दूर भरतपुर के खानवा में दोनों सेनाओं के बीच युद्ध हुआ. इसी युद्ध के दौरान राणा सांगा की आंख में एक तीर लगा और वो युद्ध क्षेत्र से दूर चले गए. इसके बाद राजपूत जीता हुआ युद्ध हार गए. महाराणा सांगा की 1528 में 46 साल की उम्र में मौत हो गई. राजपूत सरदारों पर ही उन्हें जहर देकर मारने का आरोप है. बाबर को किसने बुलाया इतिहासकार रवि भट्ट के अनुसार राणा सांगा ने बाबर को बुलाया या नहीं इसको लेकर मतभेद हैं. राणा सांगा ने बाबर को बुलाया, इसका उल्लेख बाबरनामा में हैं. वहीं कुछ इतिहासकार लिखते हैं कि बाबर ने राणा सांगा से संपर्क किया था. अलग-अलग इतिहासकार लिखते हैं कि दिल्ली के सुल्तान इब्राहीम लोदी के रिश्तेदार ही उसे सत्ता से बेदखल करना चाहते थे. इसीलिए 1523 में इब्राहीम लोदी के भाई आलम खान, चाचा अलाउद्दीन और पंजाब के दौलत खान ने बाबर से संपर्क किया था. इनके बुलावे पर ही बाबर एक बार फिर हिंदुस्तान आया था. 1526 में उसने पानीपत की लड़ाई में इब्राहीम लोदी को हराया और दिल्ली की सत्ता पर कब्जा किया. इब्राहीम लोदी को तीन बार हराया इतिहास में दर्ज है कि राणा सांगा ने इब्राहीम लोदी को तीन बार युद्ध में हराया था. ऐसे उन्हें बाबर की मदद जरूरत क्यों थी. राणा सांगा उस दौरान इतने ताकतवर थे कि उन्हें किसी मदद की जरूरत नहीं थी. कई राजपूत शासकों के साथ मिलकर उन्होंने एक बड़ी गठबंधन तैयार किया था. 1526 में पानीपत के युद्ध में बाबर ने इब्राहीम लोदी को हराया था. इसी के साथ हिंदुस्तान में मुगल साम्राज्य की नींव पड़ी थी. बाबर ने जब साम्राज्य विस्तार की नीति शुरू की तो उसके और राणा सांगा के बीच युद्ध शुरू हो गया. 1527 में बयाना में राणा सांगा ने बाबर की सेना को हराया था. इसके बाद मुगल सेना में राणा सांगा के नाम की दहशत हो गई थी. पढ़ें नया विचार प्रीमियम स्टोरी: मुगल साम्राज्य की शाही स्त्रीएं, महल से दो कमरे के मकान तक इंसानों जैसे रोबोट में क्या है खास, हिंदुस्तान की शालू बोल सकती है 47 भाषाएं सालार मसूद गाजी की हार का बहराइच में जश्न, महाराजा सुहेलदेव से मिली थी मात हमास का समर्थन किया तो नहीं पढ़ पाएंगे अमेरिका में, ट्रंप की कड़ी कार्रवाई अमेरिका में मंदिरों पर हमला, खालिस्तान समर्थकों से क्या है लिंक The post Rana Sanga History: राणा सांगा ने बयाना के युद्ध में दी थी बाबर को मात appeared first on Naya Vichar.

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सीयूइटी यूजी के लिए आज तक आवेदन का मौका

पटना. नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) ने सीयूइटी यूजी-2025 में शामिल होने के लिए 24 मार्च तक आवेदन कर सकते हैं. आवेदन के बाद सीयूइटी यूजी-2025 का सुधार विंडो 26 से 28 मार्च तक खुला रहेगा. सुधार विंडो के जरिये उम्मीदवार अपने आवेदन पत्र में कोई भी आवश्यक बदलाव या सुधार कर सकते हैं. सीयूइटी यूजी आठ मई से एक जून तक आयोजित किया जायेगा. इस परीक्षा में 37 विषय शामिल होंगे और यह 13 हिंदुस्तानीय भाषाओं में आयोजित होगी. हर टेस्ट पेपर की अवधि 60 मिनट होगी और परीक्षा उम्मीदवारों की संख्या और विषयों के संयोजन के आधार पर कई शिफ्टों में ली जायेगी. उम्मीदवार भाषा और सामान्य योग्यता परीक्षा सहित अधिकतम पांच विषयों का चयन कर सकते हैं. परीक्षा शुल्क का निर्धारण चुने गये विषयों की संख्या के आधार पर किया जायेगा. डिस्क्लेमर: यह नया विचार समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे नया विचार डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है The post सीयूइटी यूजी के लिए आज तक आवेदन का मौका appeared first on Naya Vichar.

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पटना पुस्तक महोत्सव में भोजपुरी कविता रुचि आ रचाव का विमोचन

संवाददाता, पटना बिहार दिवस के अवसर पर शहर के गांधी मैदान में आयोजित पटना पुस्तक महोत्सव में रविवार को मुख्य मंच पर डाॅ सुनील कुमार पाठक की भोजपुरी की दूसरी समालोचना -कृति भोजपुरी कविता : रुचि आ रचाव का विमोचन किया गया. पुस्तक का प्रकाशन दिल्ली के भोजपुरी संस्थान ने किया है. विमोचन समारोह में मुख्य अतिथि भोजपुरी और हिंदी के सुप्रसिद्ध साहित्यकार भगवती प्रसाद द्विवेदी ने कहा कि भोजपुरी काव्यालोचना को समृद्ध करने में डाॅ सुनील पाठक का महत्वपूर्ण योगदान है. इस अवसर पर लेखक डाॅ सुनील ने कहा कि भोजपुरी कविता का काव्य-फलक सामाजिक प्रतिबद्धतामूलक है. विशिष्ट अतिथि डाॅ रामरक्षा मिश्र ””””विमल”””” ने कहा कि भोजपुरी समीक्षा में डाॅ सुनील का अवदान अत्यंत उल्लेखनीय और ऐतिहासिक है. यह काफी गंभीरतापूर्वक विषय की गहराई में उतर कर कविताओं का निष्पक्ष मूल्यांकन करते हैं. मुख्य वक्ता हिंदी और भोजपुरी एवं संस्कृत के विद्वान मार्कंडेय शारदेय ने विश्वास व्यक्त किया कि जिस गति और गंभीरता से भोजपुरी काव्य- परंपरा और प्रगति का विवेचनात्मक अध्ययन प्रस्तुत कर रहे हैं वह भोजपुरी साहित्य के लिए अत्यंत शुभ एवं सार्थक है. डिस्क्लेमर: यह नया विचार समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे नया विचार डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है The post पटना पुस्तक महोत्सव में भोजपुरी कविता रुचि आ रचाव का विमोचन appeared first on Naya Vichar.

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एक दूसरे की मदद करें तो बिहार फिर से कर सकता है विश्व का नेतृत्व : राज्यपाल

संवाददाता, पटना हिंदुस्तानीय व्यापार प्रबंधन संस्थान (आइआइबीएम) की ओर से पुस्तक विमोचन समारोह का आयोजन किया गया. स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और मुंगेर से तीन बार सांसद रहे स्वर्गीय बनारसी प्रसाद सिंह के जीवन पर आधारित पुस्तक ””अंग प्रदेश के गांधी : बनारसी बाबू”” का विमोचन मुख्य अतिथि राज्यपाल आरिफ मो खान ने किया. इस अवसर पर उन्होंने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि बिहार सांस्कृतिक और आध्यात्मिक राजधानी रहा है. प्रज्ञा और बुद्धिमत्ता का केंद्र रहा है. जिस तरह देश की स्वास्थ्य सेवाओं में केरल का योगदान है उसी तरह देश के अन्य क्षेत्रों में बिहार का बड़ा योगदान है. बिहार के लोग एक दूसरे की अगर मदद करें और बिहार में बिहारी को खोजें तो बिहार फिर से विश्व का नेतृत्व कर सकता है. राज्यपाल ने कहा कि बिहारियों को एक होने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि बनारसी प्रसाद सिंह अपना जीवन गांधीवादी मूल्यों, सत्य और अहिंसा को समर्पित कर दिया. इस पुस्तक के माध्यम से नयी पीढ़ी को उनके जीवन से प्रेरणा मिलेगी और वे राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान देने के लिए प्रेरित होंगे. वहीं बिहार विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह ने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि बनारसी बाबू का जीवन हमें बताता है कि कैसे नैतिकता, सेवा और नेतृत्व का सही उपयोग करके समाज में परिवर्तन लाया जा सकता है. उन्होंने इस पुस्तक को एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक दस्तावेज बताया. जमालपुर के विधायक अजय कुमार सिंह भी इस अवसर पर मौजूद रहे. स्वागत भाषण में बिहार विधान परिषद के सदस्य डॉ. समीर कुमार सिंह ने कहा कि बनारसी बाबू केवल एक स्वतंत्रता सेनानी ही नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन के प्रतीक भी थे. आईआईबीएम पटना के निदेशक डॉ. रोहित सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन किया. कार्यक्रम संचालन सुश्री प्रियनंदिनी ने किया. मौके पर लोकसभा सचिवालय के पूर्व निदेशक डॉ. रणवीर कुमार व अन्य गणमान्य लोगों ने पुस्तक का विमोचन किया. डिस्क्लेमर: यह नया विचार समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे नया विचार डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है The post एक दूसरे की मदद करें तो बिहार फिर से कर सकता है विश्व का नेतृत्व : राज्यपाल appeared first on Naya Vichar.

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