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April 13, 2025

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Bettiah: इम्तेयाज अपहरण मामले में छह नबालिग हिरासत में

नरकटियागंज. शिकारपुर थना क्षेत्र के मल्दहिया गांव के छात्र इम्तियाज के अपहरण मामले में शनिवार की देर रात्रि अपहृत छात्र की दादी समेत छह नाबालिग लड़कों को पुलिस ने हिरासत में लिया है. अपहृत की दादी हसीना खातून को पूछताछ के बाद पुलिस ने उसे मुक्त कर दिया. अपहरण के पीछे भूमि विवाद का मामला बताया जा रहा है. जबकि पुलिस वीडियो गेम समेत दोनों बिन्दुओ पर जांच कर रही है. एसडीपीओ जयप्रकाश सिंह ने बताया कि अपहृत की बरामदगी को लेकर पुलिस हर संभव प्रयास कर रही है. जल्द ही मामले का उदभेदन कर लिया जाएगा. बताया जाता है कि अपहृत छात्र की सौतेली दादी हसीना खातून को छात्र के पिता ने घर से निकाल दिया है. जिसके बाद वह नरकटियागंज शहर के अस्पतालो में काम कर अपना गुजर बसर करती है. घर में ताला बंद करने की शिकायत उसने एसपी समेत सभी पुलिस पदाधिकारियों से भी की है. इधर छात्र के गायब होने के बाद छात्र की मां मिसरून खातुन ने पुलिस से आशंका जताई कि उसकी सास का भी अपहरण करने में हाथ हो सकता है. जिसके आधार पर पुलिस ने हसीना खातून को नगर के अस्पताल रोड से रात में उठाया. लेकिन काफी पूछताछ एवं उसके मोबाइल खंगालने के बाद जब पुलिस को कोई सुराग नहीं मिला तो रात में ही उसे छोड़ दिया गया. इधर हसीना खातून ने कहा कि उसको तो पहले ही घर से निकाल दिया गया है. उसको घर से निकालने में उसके सौतेले बेटो का साथ मुखिया सनाउल्लाह दें रहें हैं. हसीना खातून ने यह भी बताया कि इसकी 7 धूर जमीन पर बने घर इसके हिस्से में है. जिसपर मुखिया की नजर है. जमीन हथियाने की नीयत से पोते के अपहरण में उसको फंसाने की साजिश रची जा रही है. लेकिन पुलिस ने जांच के बाद इसे छोड़ दिया. विदित हो कि मलदहिया पोखरिया गांव निवासी मिसरून खातुन ने शिकारपुर थाना में एफआईआर दर्ज कराई है. जिसमें बताया है कि उसका 15 साल का पुत्र शनिवार को घर से यह कहकर निकला कि वह टीसी निकालने मटियरिया विद्यालय जा रहा है. शनिवार को ही 2:35 बजे उसके ही मोबाइल से फोन आया कि उसके पुत्र का अपहरण कर लिया गया है.अपहरणकर्ता ने 10 लाख रुपए की फिरौती मांगी तथा कहा कि फिरौती की रकम नहीं देने और पुलिस में जाने पर उसके पुत्र को जान से मार दिया जाएगा. जिसके बाद घर के लोग डर गए और पहले रिश्तेदारी में उसकी तलाश करने लगे. कोई सुराग नहीं मिलने पर उन्होंने पुलिस की मदद ली. डिस्क्लेमर: यह नया विचार समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे नया विचार डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है The post Bettiah: इम्तेयाज अपहरण मामले में छह नबालिग हिरासत में appeared first on Naya Vichar.

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Bettiah: शराब निर्माण एवं बिक्री के मामले में आठ गिरफ्तार

बेतिया . शराब निर्माण, संग्रहण, तस्करी के विरुद्ध उत्पाद विभाग की ओर से अभियान चलाया गया. उत्पाद अधीक्षक मनोज कुमार सिंह के देखरेख में इस अभियान में आठ लोगो को गिरफ्तार करते हुए भारी मात्रा में शराब बरामद किया गया. अधीक्षक मद्य निषेध मनोज कुमार सिंह ने बताया कि जिलाधिकारी के निर्देश पर कई टीम का गठन करते हुए मुफस्सिल के हजारी बैलहट्टा, पुरुषोतमपुर, बैरिया के बैजुआ दियारा, लौरिया के सिसवनिया धांगड़ टोली बैरिया के सरैयामन एवं चनपटिया के बीन टोली में छापामारी की गयी. जहां से श्याम कुमार, छोटू साह, सुनील यादव, मुकेश कुमार, सीमा देवी, सोनु कुमार विवेक कुमार एवं सन्नी कुमार को गिरफ्तार किया गया है. इनके पास से 73.620 लीटर विदेशी शराब, 41.600 लीटर देशी शराब बरामद किया गया है. गिरफ्तार सभी आरोपियों पर अग्रेतर कार्रवाई की जा रही है. डिस्क्लेमर: यह नया विचार समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे नया विचार डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है The post Bettiah: शराब निर्माण एवं बिक्री के मामले में आठ गिरफ्तार appeared first on Naya Vichar.

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Bettiah: बिजली का करंट लगने से युवक की मौत

योगापट्टी. प्रखंड के नवलपुर कवलापुर गांव में 33 वर्षीय व्यक्ति की करंट की चपेट में आने से घटनास्थल पर ही मौत हो गई है. मृतक युवक की पहचान नवलपुर के कवलापुर गांव निवासी भिखारी राम का 33 वर्षीय पुत्र सुरेंद्र राम की रूप में हुई है. करंट लगने पर परिजनों ने आनन फानन स्थानीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में लाया गया. जहां चिकित्सकों ने देखते ही उसे मृत घोषित कर दिया है. मृतक को करंट लगने का कारण स्पष्ट नहीं हो पाई है. इस घटना से मृतक के परिजनों में रो रोकर बुरा हाल बताया जाता है. सूचना पर पहुंची पुलिस मामले की जांच में जुट गई है. नवलपुर थाना अध्यक्ष अनुपम कुमार राय ने बताया है कि करंट लगने से युवक की मौत का मामला सामने आया है. शव को पोस्टमार्टम के लिए जीएमसीएच बेतिया भेज दिया गया है. पोस्टमार्टम के बाद शव को परिजनों को सौंप दी जाएगी. डिस्क्लेमर: यह नया विचार समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे नया विचार डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है The post Bettiah: बिजली का करंट लगने से युवक की मौत appeared first on Naya Vichar.

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सुप्रीम कोर्ट के जजमेंट के बाद क्या राष्ट्रपति 3 महीने के अंदर किसी बिल को पास करने के लिए बाध्य होंगे?

Table of Contents तमिलनाडु के राज्यपाल ने राष्ट्रपति के पास विधेयक क्यों भेजे? क्या है राष्ट्रपति का ‘पॉकेट वीटो’ अनुच्छेद 111 के अनुसार विकल्प अनुच्छेद 200 और 201 के अनुसार राष्ट्रपति के पास विकल्प सुप्रीम कोर्ट ने क्यों की अनुच्छेद 143 की बात सुप्रीम कोर्ट के जजमेंट के बाद अब आगे क्या? President Pocket Veto : ‘पॉकेट वीटो’ यह शब्द सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले के बाद से चर्चा में है, जिसमें यह कहा गया है कि राष्ट्रपति किसी बिल को अनिश्चित काल तक के लिए रोककर नहीं रख सकते हैं. सुप्रीम कोर्ट ने यह कहा है कि राष्ट्रपति अधिकतम तीन महीने के भीतर ही किसी बिल पर अपनी राय प्रशासन को बता दें. सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला तमिलनाडु प्रशासन द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है. तमिलनाडु प्रशासन ने राज्यपाल आरएन रवि के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में गुहार लगाई है. तमिलनाडु प्रशासन का कहना है कि राज्यपाल ने विधानसभा से पारित 10 विधेयकों को लंबित रखा हुआ है. दरअसल राज्यपाल ने उन विधेयकों को राष्ट्रपति के पास भेजा हुआ है. कोर्ट ने अपने फैसले में यह मजबूती से कहा है कि राज्यपाल और राष्ट्रपति जैसे पदों की भूमिका पारदर्शी होनी चाहिए, साथ ही अगर संविधान से जुड़ा कोई मसला हो तो उसकी समुचित व्याख्या के लिए सुप्रीम कोर्ट से सलाह ली जानी चाहिए, इससे लोकतंत्र मजबूत होता है. तमिलनाडु के राज्यपाल ने राष्ट्रपति के पास विधेयक क्यों भेजे? तमिलनाडु के राज्यपाल ने 10 वि्धेयकों को राष्ट्रपति के पास विचार के लिए इसलिए भेजा है क्योंकि उन्हें बिल पर कुछ आपत्तियां थीं. राज्यपाल ने उनकी संवैधानिकता की जांच के लिए उन्हें राष्ट्रपति के पास भेजा, संविधान का अनुच्छेद 200 राज्यपाल को यह अधिकार देता है. जब राज्यपाल बिल को राष्ट्रपति के पास भेज देते हैं तो उस बिल पर निर्णय करने का अधिकार राष्ट्रपति का होता है. चूंकि राष्ट्रपति ने अबतक उन 10 विधेयक को निर्णय नहीं लिया है इसलिए यह कहा जा रहा है कि राष्ट्रपति ने उन विधेयक पर पॉकेट वीटो लगा दिया है. क्या है राष्ट्रपति का ‘पॉकेट वीटो’ हिंदुस्तानीय संविधान में राष्ट्रपति के पास जो अधिकार हैं, उनके लिए वीटो शब्द का प्रयोग नहीं किया गया है, लेकिन जब भी कोई बिल राष्ट्रपति के पास स्वीकृति के लिए आता है, तो राष्ट्रपति के पास तीन तरह के विकल्प मौजूद है, जिसके तहत राष्ट्रपति बिल पर निर्णय सुनाते हैं. अनुच्छेद 111 के अनुसार विकल्प बिल को स्वीकार कर सकते हैं, जिससे वह कानून बन जाता है. बिल को अस्वीकार कर सकते हैं, जिससे बिल निरस्त हो जाता है. बिल को पुनर्विचार के लिए भेज सकते हैं, अगर बिल दोबारा आता है, तो उसे स्वीकार करना अनिवार्य है. धन विधेयक के साथ यह स्थिति नहीं है, क्योंकि धन विधेयक राष्ट्रपति की सिफारिश पर ही लोकसभा में पेश होता है. अनुच्छेद 200 और 201 के अनुसार राष्ट्रपति के पास विकल्प बिल को स्वीकार कर सकते हैं बिल को अस्वीकार कर सकते हैं विचार के लिए विधानमंडल को वापस भेज सकते हैं, या पॉकेट वीटो का प्रयोग कर सकते हैं पॉकेट वीटो : पॉकेट वीटो राष्ट्रपति का वह अधिकार है, जिसके तहत राष्ट्रपति किसी विधेयक को अनिश्चितकाल तक के लिए लंबित रख सकते हैं. चूंकि हिंदुस्तानीय संविधान में यह वर्णित नहीं है कि राष्ट्रपति को कितने दिनों के अंदर विधेयक पर निर्णय लेना है इसलिए कभी-कभी पॉकेट वीटो राष्ट्रपति की अस्वीकृति की तरह काम करता है. सुप्रीम कोर्ट ने क्यों की अनुच्छेद 143 की बात सुप्रीम कोर्ट ने पॉकेट वीटो के संबंध में फैसला लेते हुए कहा कि यह जरूरी नहीं है कि राष्ट्रपति सुप्रीम कोर्ट से राय मांगे, लेकिन संविधान के अनुच्छेद 143 के तहत अगर किसी बिल में असंवैधानिकता जैसा कुछ विषय हो तो राष्ट्रपति को सुप्रीम कोर्ट से राय मांगनी चाहिए, ताकि संविधान की व्याख्या सही ढंग से हो पाए. कार्यपालिका के पास संविधान की व्याख्या का अधिकार नहीं है, यह अधिकार सिर्फ सुप्रीम कोर्ट के पास है. सुप्रीम कोर्ट के जजमेंट के बाद अब आगे क्या? सुप्रीम कोर्ट ने अपने जजमेंट में यह कहा है कि किसी भी बिल को अनिश्चितकाल तक के लिए लटकाया नहीं जा सकता है और यह कहा है कि राष्ट्रपति को किसी भी बिल पर तीन महीने के अंदर निर्णय कर लेना चाहिए. इस संबंध में विधायी मामलों के जानकार अयोध्या नाथ मिश्र ने बताया कि अगर सुप्रीम कोर्ट ने यह कहा है, तो कुछ सोचकर ही कहा है. हिंदुस्तानीय संविधान ने राष्ट्रपति को सर्वोच्च माना है. इस लिहाज से सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय लंबी बहस को जन्म देता है. यह कोई ऐसा विषय नहीं है, जिसपर एक मिनट में राय दे दी जाए. कोर्ट का पूरा जजमेंट पढ़कर समझना होगा. हिंदुस्तानीय संविधान विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका के अधिकार स्पष्टत: विभाजित हैं, इसलिए कोई भी निर्णय सोच-विचार कर करना चाहिए. जल्दी में कुछ भी कहना एकतरफा बात होगी. वहीं प्रसिद्ध कानूनविद्‌ फैजान मुस्तफा का कहना है कि आज की स्थिति में यही कानून है, इसलिए राष्ट्रपति को इसका अनुपालन करना होगा. Also Read : 277 लोगों की हत्या का आरोपी ब्रह्मेश्वर मुखिया राक्षस था या मसीहा, उसके आतंक की पूरी कहानी जब बिहार में एक साथ बिछा दी गईं थीं 30–40–50 लाशें,  नरसंहारों की कहानी कंपा देगी रूह  बेलछी गांव में हुआ था बिहार का पहला नरसंहार, 11 दलित की हत्या कर आग में झोंक दिया गया था पंबन ब्रिज और रामसेतु का है रामेश्वरम से खास नाता, क्यों प्रशासन ने बनाई थी रामसेतु को तोड़ने की योजना विभिन्न विषयों पर एक्सप्लेनर पढ़ने के लिए क्लिक करें The post सुप्रीम कोर्ट के जजमेंट के बाद क्या राष्ट्रपति 3 महीने के अंदर किसी बिल को पास करने के लिए बाध्य होंगे? appeared first on Naya Vichar.

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संघर्ष से सफलता तक: दलित समाज के बेटे ने लिखी सफलता की नई इबारत, कोविड में चल बसे थे पिता फिर भी नहीं माने हार

Success Story, मोनु कुमार मिश्रा, बिहटा: अगर हौसले बुलंद हों तो कोई भी राह मुश्किल नहीं होती” — यह कहावत बिहार के बिहटा प्रखंड स्थित सदीसोपुर गांव के दो सगे भाइयों कुंदन कुमार और मनीष कुमार की संघर्षभरी और प्रेरणादायक जीवन यात्रा पर बिल्कुल सटीक बैठती है. दलित समाज से आने वाले इन युवकों ने कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपनी मेहनत, लगन और आत्मविश्वास से एक ऐसा मुकाम हासिल किया, जो समाज के तमाम युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुका है. कोविड में चल बसे थे पिता कुंदन कुमार, मनीष कुमार और प्रीति कुमारी की यह यात्रा आसान नहीं रही. इनके पिता, स्वर्गीय अरविंद कुमार, टाइल्स और मार्बल का कार्य कर परिवार का गुजारा करते थे. 2021 में कोविड काल के दौरान उनका देहांत हो गया, जिससे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा.आर्थिक तंगी पहले से ही थी, ऊपर से पिता की मृत्यु ने हालात और भी मुश्किल बना दिए.मां उमरावती देवी, एक साधारण गृहिणी होने के बावजूद, बच्चों को आगे बढ़ाने का हौसला नहीं खोया. सेल्फ स्टडी से हासिल की सफलता महंगी कोचिंग का खर्च वहन कर पाना इनके लिए संभव नहीं था. बावजूद इसके दोनों भाइयों ने सेल्फ स्टडी को हथियार बनाया और कठिन परिश्रम से सफलता हासिल की. इनकी प्रारंभिक शिक्षा सदीसोपुर के प्रशासनी विद्यालय में हुई और आगे की पढ़ाई पटना के कॉमर्स कॉलेज से पूरी की गई. इसे भी पढ़ें:  बिहार के 17 जिलों में आंधी-तूफान और सभी जिलों में अगले 24 घंटे होगी बारिश, IMD ने जारी किया येलो और ऑरेंज अलर्ट भीमराव अंबेडकर के विचार को साकार करती है इनकी कहानी इनकी कहानी केवल एक पारिवारिक संघर्ष की नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव और शिक्षा की शक्ति की कहानी है. यह परिवार डॉ. भीमराव अंबेडकर के उस विचार को साकार करता है कि “शिक्षा ही समाजिक परिवर्तन का सबसे सशक्त माध्यम है. अम्बेडकर जयंती के अवसर पर यह प्रेरक स्टोरी यह संदेश देती है कि सीमित संसाधनों में भी असीम संभावनाएं छिपी होती हैं—बस जरूरत है तो मजबूत इरादों और निष्ठा की. इसे भी पढ़ें: बिहार के जमीन मालिकों के लिए बड़ी समाचार, इस दिन के बाद नहीं जमा कर सकेंगे स्वघोषणा पत्र The post संघर्ष से सफलता तक: दलित समाज के बेटे ने लिखी सफलता की नई इबारत, कोविड में चल बसे थे पिता फिर भी नहीं माने हार appeared first on Naya Vichar.

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Watch Video: अरे वाह! IPL 2025 में नये मेहमान की एंट्री, मैदान में हरकत देख हैरान रह गए खिलाड़ी, देखें वीडियो

IPL New Family Member: टाटा आईपीएल 2025 में एक नये और बेहद खास मेहमान की एंट्री हुई है. उस खास मेहमान को मैदान में भी उतारा गया. उसकी हरकतें खिलाड़ियों को रोमांचित भी कर रहा है. उस खास मेहमान से मिलने और उसके बारे में जानने की जिज्ञासा आपकी बढ़ती जा रही है. तो अधिक देर न कर, बताते हैं उस खास मेहमान के बारे में. दरअसल आईपीएल 2025 में रविवार को जिस खास मेहमान की आधिकारिक रूप से एंट्री कराई गई है, वो एक रोबोट डॉग है. आईपीएल के आधिकारिक एक्स अकाउंट से उस रोबोट डॉग के एंट्री की घोषणा की गई. रोबोट का बेहतरीन वीडियो भी शेयर किया गया. वीडियो के साथ-साथ आईपीएल ने फैन्स से मदद भी मांगी है. फैन्स से नये मेहमान के नाम को लोकर सुझाव मांगा गया है. डैनी मॉरिसन ने रोबोट डॉग को फैन्स से कराया रूबरू रोबोट डॉग को फैन्स से रूबरू पूर्व दिग्गज क्रिकेटर और मशहूर कमेंटेटर डैनी मॉरिसन ने कराया. वीडियो में मॉरिसन ने बताया, रोबोट डॉग आईपीएल कवरेज का हिस्सा होगा. वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि रोबोट किस तरह से मॉरिसन की आवाज पर रिएक्ट कर रहा है. 𝗛𝗼𝗹𝗱 𝗼𝗻! 𝗪𝗲’𝘃𝗲 𝗮 𝗻𝗲𝘄 𝗜𝗣𝗟 𝗳𝗮𝗺𝗶𝗹𝘆 𝗺𝗲𝗺𝗯𝗲𝗿 𝗶𝗻 𝘁𝗼𝘄𝗻 👀 It can walk, run, jump, and bring you a ‘heart(y)’ smile 🐩❤️ And…A whole new vision 🎥 Meet the newest member of the #TATAIPL Broadcast family 👏 – By @jigsactin P.S: Can you help us in… pic.twitter.com/jlPS928MwV — IndianPremierLeague (@IPL) April 13, 2025 फैन्स मांगा रोबोट डॉग का नाम आईपीएल ने वीडियो शेयर कर रोबोट डॉग का नाम सुझाने की अपील की है. आईपीएल ने वीडियो शेयर करते हुए लिखा, “अरे वाह! हमारे शहर में आईपीएल परिवार का एक नया सदस्य आया है. यह चल सकता है, दौड़ सकता है, कूद सकता है, और आपको ‘दिल से’ मुस्कुराहट ला सकता है. TATA IPL ब्रॉडकास्ट परिवार के सबसे नए सदस्य से मिलिए. क्या आप हमारे प्यारे छोटे दोस्त का नामकरण करने में हमारी मदद कर सकते हैं?” रोबोट डॉग से मिलकर हैरान हुए खिलाड़ी कमेंटेटर डैनी मॉरिसन जब फैन्स से मिलाने के लिए रोबोट डॉग को मैदान के बीच लाते हैं, तो उस समय खिलाड़ी प्रैक्टिस कर रहे थे. मुंबई इंडियंस के कप्तान हार्दिक पांड्या और दिल्ली कैपिटल्स के कप्तान अक्षर पटेल उस रोबोट डॉग के साथ स्पोर्ट्सते और हाथ मिलाते दिख रहे हैं. खिलाड़ी रोबोट डॉग की हरकतों को देखकर हंस रहे हैं, तो रोमांचित भी होते दिख रहे हैं. वीडियो के आखिर में मॉरिसन रोबोट डॉग के साथ रेस लगाते हैं, लेकिन रोबोट ने उन्हें पीछे छोड़ दिया. The post Watch Video: अरे वाह! IPL 2025 में नये मेहमान की एंट्री, मैदान में हरकत देख हैरान रह गए खिलाड़ी, देखें वीडियो appeared first on Naya Vichar.

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Mayawati: भतीजे के प्यार में पिघली ‘बुआ’, आकाश आनंद की हुई घर वापसी, उत्तराधिकारी पर भी किया ट्वीट

Mayawati: बीएसपी नेता आकाश आनंद की घर वापसी हो गई है. अपने भतीजे आकाश आनंद को बसपा सुप्रीमो मायावती ने पार्टी में वापस ले लिया है. रविवार को आकाश ने सोशल मीडिया एक्स पर एक लंबा चौड़ा पोस्ट कर मायावती से माफी मांगी थी, जिसके बाद मायावती ने उन्हें माफ करते हुए पार्टी में दोबारा शामिल कर लिया है. रविवार को ही एक ट्वीट कर मायावती ने इसकी घोषणा की. इससे पहले आकाश ने एक्स पर एक के बाद एक कर कुल चार पोस्ट किए थे, जिसमें उन्होंने अपनी बुआ और बसपा सुप्रीमो मायावती से माफी मांगते हुए फिर से पार्टी में लेने की गुहार लगाई थी. मायावती ने ट्वीट कर बताया अपना फैसला अपने भतीजे की माफी को स्वीकार करते हुए बुआ मायावती ने उन्हें माफ कर दिया है. रविवार को अपने ट्वीट में बसपा सुप्रीमो ने कहा “श्री आकाश आनन्द द्वारा एक्स पर आज अपने चार पोस्ट में सार्वजनिक तौर पर अपनी गलतियों को मानने व सीनियर लोगों को पूरा आदर-सम्मान देने के साथ ही अपने ससुर की बातों में आगे नहीं आकर बीएसपी पार्टी व मूवमेंट के लिए जीवन समर्पित करने के मद्देनजर इन्हें एक और मौका दिए जाने का निर्णय लिया है.” उत्तराधिकारी को लेकर भी किया ट्वीट रविवार को मायावती ने अपने एक और ट्वीट किया में अपने उत्तराधिकारी का जिक्र किया है. उन्होंने लिखा ‘वैसे अभी मैं स्वस्थ हूं और जब तक पूरी तरह से स्वस्थ रहूंगी, मान्यवर श्री कांशीराम जी की तरह, पार्टी व मूवमेंट के लिए पूरे जी-जान व तन्मयता से समर्पित रहकर कार्य करती रहूंगी. ऐसे में मेरे उत्तराधिकारी बनाने का कोई प्रश्न ही नहीं उठता है. मैं अपने निर्णय पर अटल हूं व रहूंगी. मायावती ने भले ही अपने भतीजे को माफ कर दिया है लेकिन इस बार वो उत्तराधिकारी को लेकर कठोर बनी हुई हैं. आकाश आनंद ने मांगी थी माफी इससे पहले रविवार को एक के बाद एक कर आकाश आनंद ने चार ट्वीट कर मायावती और बसपा से माफी मांगी थी और पार्टी में फिर से शामिल करने की गुहार लगाई थी.  आकाश ने अपनी पोस्ट में कहा था “बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष, उत्तर प्रदेश की चार बार मुख्यमंत्री रही एवं लोकसभा व राज्यसभा की भी कई बार सदस्य रही आदरणीय बहन कुमारी मायावती जी को मैं अपना दिल से एकमात्र नेतृत्वक गुरू व आदर्श मानता हूं. आज मैं यह प्रण लेता हूं कि बहुजन समाज पार्टी के हित के लिए मैं अपने रिश्ते-नातों को व खासकर अपने ससुराल वालों को कतई भी बाधा नहीं बनने दूंगा.” उन्होंने इसी श्रृंखला की अगली पोस्ट में कहा यही नहीं बल्कि कुछ दिनों पहले किए गए अपने ट्वीट के लिए भी माफी मांगता हूं जिसकी वजह से आदरणीय बहन जी (मायावती) ने मुझे पार्टी से निकाल दिया है. आगे से इस बात को सुनिश्चित करूंगा कि मैं अपने किसी भी नेतृत्वक फैसले के लिए किसी भी नाते-रिश्तेदार और सलाहकार की कोई सलाह मशविरा नहीं लूंगा.”  Also Read: Akash Anand Sorry: गलतियों के लिए आकाश आनंद ने बुआ मायावती से मांगी माफी, लगाई पार्टी में वापस लेने की गुहार The post Mayawati: भतीजे के प्यार में पिघली ‘बुआ’, आकाश आनंद की हुई घर वापसी, उत्तराधिकारी पर भी किया ट्वीट appeared first on Naya Vichar.

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‘घर से घसीट कर पिता को ले गयी, अधमरा कर दरवाजे पर छोड़ गयी’ बेटी का देवघर पुलिस पर गंभीर आरोप

सारठ (देवघर)-पालोजोरी प्रखंड के बगदाहा गांव निवासी महेश्वर राणा (65) की शुक्रवार को जामताड़ा के एक अस्पताल में इलाज के क्रम में मौत हो गयी. इस संबंध में महेश्वर राणा की बेटी मंगली देवी ने खागा थाना में आवेदन देकर सारठ व खागा थाना पुलिस पर बेरहमी से पीटने का आरोप लगाया है. बेटी मंगली का कहना है कि पुलिस की पिटाई से ही उनके पिता की मौत हो गयी. बेटी ने खागा व सारठ पुलिस पर कार्रवाई की मांग की है. आवेदन देकर बेटी ने कहा कि 12 अप्रैल शनिवार की सुबह लगभग नौ बजे खागा व सारठ थाने की पुलिस उसके घर बगदाहा राणा टोला पहुंची. इसके बाद पुलिस ने घर से उसके पिता महेश्वर राणा को मारपीट कर घसीटते हुए जबरन पुलिस वैन में बिठाया और साथ लेकर चले गयी. इसी क्रम में पुलिस ने उसकी मां के साथ भी मारपीट की. पुलिस ने ह भी नहीं बतायी कि उसके पिता को क्यों उठा कर ले जा रही है ? इसके बाद शनिवार की दोपहर ही लगभग 2 बजे पुलिस ने उसके पिता को लगभग बेहोशी की हालत में अधमरा स्थिति में घर के दरवाजा के पास छोड़कर चली गयी. घरवालों ने महेश्वर राणा की नाजुक स्थिति को देखकर उसे तुरंत बेहतर इलाज के लिए सदर अस्पताल जामताड़ा में भर्ती करवाया, लेकिन बेरहमी से मारपीट करने के कारण डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया. इसके बाद महेश्वर का शव जैसे ही उसके गांव बगदाहा राणा टोला पहुंचा लोगों का आक्रोश पुलिस के प्रति खुलकर सामने आ गया. लोग एक सुर से महेश्वर राणा की मौत के लिए पुलिस पदाधिकारी पर आरोप लगाते हुए कार्रवाई की बात कर रहे थे. महेश्वर के नाती पर है लड़की भगाने का आरोप महेश्वर राणा की बेटी की शादी सारठ थाना क्षेत्र के लोधरा गांव में हुई है. उसी गांव के एक व्यक्ति ने महेश्वर के नाती पर उसकी बेटी को भगाने का आरोप लगाते हुए सारठ थाने में शिकायत की थी. लड़की के पिता के दबाव में आकर सारठ थाना की पुलिस बगदाहा गांव पहुंची. लड़की के पिता को यह शक था कि उसकी लड़की को लेकर महेश्वर राणा का नाती अपने नाना के घर ले गया हो. बगदाहा पहुंचने पर पुलिस को कुछ नहीं मिला. इसके बाद पुलिस महेश्वर राणा को उठाकर ले गयी. मामले की हो सीआईडी जांच : चुन्ना सिंह मामले की जानकारी मिलते ही विधायक उदय शंकर सिंह उर्फ चुन्ना सिंह रविवार को बगदाहा गांव पहुंचकर परिजनों से मामले की जानकारी ली. इसके बाद उन्होंने पुलिस की कार्यशैली को लेकर गहरा आक्रोश जताते हुए कहा कि महेश्वर राणा की मौत के लिए पुलिस ही जिम्मेदार है. विधायक ने कहा : जिसे न्याय करना चाहिए, वही जब गलत करने लगे तो न्याय की आस किससे की जायेगी. पुलिस की कार्यशैली पिछले कुछ दिनों से संदेश पैदा करती है. पुलिस साइबर ठग के नाम पर भोले-भाले लोगों के साथ अच्छा व्यवहार नहीं कर रही है. महेश्वर राणा के मामले में सारठ व खागा थाना के पुलिस पदाधिकारी की संलिप्तता की जांच उच्चस्तरीय कमेटी या सीआइडी से कराने की मांग प्रशासन से की जायेगी. आरोप गलत-सीसीआर डीएसपी सीसीआर डीएसपी लक्ष्मण प्रसाद ने बताया कि आरोप गलत है. पॉक्सो एक्ट में पुलिस आरोपित को खोजने गयी थी, लेकिन वह नहीं मिला. 62 वर्षीय बुजुर्ग को उनके घर से पूछताछ के लिए लाया जा रहा था. रास्ते में बुजुर्ग ने कहा कि उपवास में हैं. इसके बाद पुलिस उन्हें उनके घर छोड़ आयी. बाद में तबीयत बिगड़ने के कारण किसी अस्पताल में मौत हुई है. हालांकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मामला स्पष्ट हो सकेगा. ये भी पढ़ें: झारखंड के प्रशासनी स्कूलों के 12 हजार शिक्षकों का घटेगा वेतन, 20 साल बाद टूटी वित्त विभाग की नींद The post ‘घर से घसीट कर पिता को ले गयी, अधमरा कर दरवाजे पर छोड़ गयी’ बेटी का देवघर पुलिस पर गंभीर आरोप appeared first on Naya Vichar.

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बिहार DGP विनय कुमार का फरमान, किसी भी थाना से नहीं लौटे कोई फरियादी, करें जीरो एफआइआर

Bihar DGP New order, रोशन कुमार, गया: गया पहुंचे डीजीपी विनय कुमार ने रविवार को पुलिस ऑफिस में घंटों बैठक की. यहां उन्होंने मगध रेंज के आइजी क्षत्रनील सिंह, एसएसपी आनंद कुमार, सिटी एसपी रामानंद कुमार कौशल और एएसपी अनवर जावेद अंसारी की मौजूदगी में जिले के सभी इंस्पेक्टर व डीएसपी रैंक के सभी पुलिस पदाधिकारियों को दर्जनों बिंदुओं पर टिप्स दिया. डीजीपी ने कहा कि बदलते माहौल में अब पुलिस को भी अपनी छवि पर ध्यान देने जरूरत है. ऐसा करने से पब्लिक के बीच पुलिस महकमे के प्रति एक नया विश्वास कायम होगा. गलत सूचना देने पर हो कार्रवाई DGP ने आगे काह कि अब किसी फरियादी को यह कह कर उसे थाना परिसर से लौटा दे रहे हैं कि अमुक घटना उनके थाना क्षेत्र में नहीं है, तो इससे पीड़ित व्यक्ति और दु:खी हो जाता है. जबकि ऐसे मामले में थानाध्यक्ष की थोड़ी सी सतर्कता से जीरो एफआईआर करने पर पीड़ित को काफी राहत मिल सकती है. डीजीपी ने एसएसपी व सिटी एसपी को निर्देश देते हुए कहा कि जिले में सभी थानों से एक ऐसा रेकॉर्ड बनाये, जिसमें उल्लेख हो कि किस थाने में कितना जीरो एफआईआर दर्ज किया गया. लेकिन, अगर कोई गलत सूचना देता है तो उसके विरुद्ध स्पष्टीकरण सहित अन्य कार्रवाई करें. पुलिस पर हो रहे हमले के प्रति हो गंभीर डीजीपी ने कहा कि हाल के दिनों में पुलिस पर हो रहे हमले से संबंधित घटनाओं में बढ़ोतरी हुई है. इस विषय पर विशेष रूप से ध्यान देने की आवश्यकता है. उन कारणों की तलाश करें, जिससे पब्लिक उग्र होकर पुलिस पर हमला करने को विवश हो जा रही है. ऐसी घटनाओं पर अंकुश लगाने को लेकर कारगर कदम उठाये. पुलिस व पब्लिक के बीच दोस्ताना व्यवहार करें. लेकिन, ऐसा नहीं हो कि कोई व्यक्ति आवश्यक रूप से थाना परिसर में बैठकी लगाता रहे. ऐसे लोगों को चिह्नित कर अंकुश लगाये. नये कानून व ई-साक्ष्य के प्रति रहे सचेत डीजीपी ने पुलिस पदाधिकारियों से कहा कि हाल ही में लागू हुए नये कानून के प्रति सजग रहें. साथ ही ई-साक्ष्य के प्रति सभी इन्वेस्टिगेशन ऑफिसर सचेत रहे. ई-साक्ष्य संकलन में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जायेगी. लंबित कांडों के अनुसंधान में पुलिस पदाधिकारियों के द्वारा टाल-मटोल की नीति अपनायी गयी, तो ऐसे अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई होगी. लापता नाबालिग व बालिग लोगों में दर्ज करें एफआईआर डीजीपी ने कहा कि लापता होनेवाले नाबालिग शिशु व बच्चियों सहित व्यस्क लोगों के मामले में बिल्कुल लापरवाही नहीं करें. परिजनों के द्वारा सूचना मिलते ही एफआईआर दर्ज करें और उसे बरामद करने के प्रति आवश्यक कार्रवाई शुरू कर दें. ऐसा देखा जाता है कि मीसिंग के मामले में संबंधित थाने के पुलिस पदाधिकारी सिर्फ आवेदन लेकर परिजनों को समझा बुझा कर थाना से चला देते हैं. ऐसा करनेवाले पुलिस पदाधिकारी दंड के भागी होंगे. ऐसी घटनाओं को लेकर पूर्व में भी ठोस निर्देश दिया जा चुका है. इसे भी पढ़ें: बिहार के इस जिले में एयरपोर्ट बनने के बाद उठी AIIMS की मांग, आंदोलन करने को तैयार लोग, 9 जिलों को होगा फायदा हाल के वर्षों में 2025 ऐसा साल है, जब रामनवमी में नहीं हुई कोई घटनाएं डीजीपी ने पुलिस पदाधिकारियों का हौसला बढ़ाते हुए कहा कि हाल के वर्षों में 2025 ऐसा साल रहा है, जब रामनवमी में पूरे बिहार में हिंसक घटनाएं नहीं हुई है. मगध रेंज के गया सहित पांचों जिलों में बहुत ही शांतिपूर्ण माहौल में रामनवमी पर्व संपन्न हुआ. इसके लिए सभी पुलिस पदाधिकारी बधाई के पात्र हैं. जल्द ही पुलिस पदाधिकारियों को सम्मानित किया जायेगा. इसे भी पढ़ें:  बिहार के 17 जिलों में आंधी-तूफान और सभी जिलों में अगले 24 घंटे होगी बारिश, IMD ने जारी किया येलो और ऑरेंज अलर्ट लगातार चार घंटों तक दिये टिप्स करीब तीन बजे शुरू हुई मीटिंग के दौरान डीजीपी ने लगातार चार घंटों तक पुलिस पदाधिकारियों को दर्जनों बिंदुओं पर टिप्स दिया. इस दौरान डीजीपी ने अपने आइपीएस जीवन काल में अबतक हुई कई महत्वपूर्ण घटनाओं का भी जिक्र करते हुए पुलिस पदाधिकारियों को गुर सिखाये. डीजीपी ने कहा कि थाना परिसर में बने आगंतुक कक्ष को सुंदर बना कर रखें. थाना परिसर में आनेवाले हर लोगों की इंट्री विजिटर बुक में दर्ज करें और संबंधित वरीय अधिकारी विजिटर बुक का जायजा लेंगे, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि थाना में किस-किस प्रकार के लोगों का आना-जाना लगा रहता है. डीजीपी ने कहा कि सभी थानाध्यक्ष पंचायत स्तर पर जनता दरबार लगाये. पब्लिक से मिलने-जुलने में कोई कोताही नहीं करें. साथ ही उनके साथ बैठक चाय-नाश्ता भी करें और चाय-नास्ता का खर्च का भुगतान संबंधित विभाग से कराये. The post बिहार DGP विनय कुमार का फरमान, किसी भी थाना से नहीं लौटे कोई फरियादी, करें जीरो एफआइआर appeared first on Naya Vichar.

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झारखंड के सरकारी स्कूलों के 12 हजार शिक्षकों का घटेगा वेतन, 20 साल बाद टूटी वित्त विभाग की नींद

Jharkhand Government School: संदीप सावर्ण, जमशेदपुर-झारखंड के प्रशासनी स्कूलों में पदस्थापित करीब 12,000 शिक्षकों का वेतन घटेगा. इसे लेकर पूर्वी सिंहभूम समेत राज्य के शिक्षकों में रोष है. दरअसल, पिछले दिनों वित्त विभाग ने राज्य के सभी उपायुक्तों सह जिला लेखा पदाधिकारी को एक पत्र भेजा है, जिसमें बताया गया है कि एक जनवरी 2006 यानी छठा वेतनमान लागू होने से पूर्व बहाल जिन कर्मियों को भी बंचिंग का लाभ (वेतन की असमानता को दूर करने के लिए अतिरिक्त इंट्रीमेंट) मिला है, वह गलत मिला है. उन्हें बंचिंग का लाभ नहीं मिल सकता है. बंचिंग का लाभ लेने वाले कर्मियों के वेतन में कटौती का आदेश दिया गया है. इस आदेश के बाद राज्य के करीब 12,000 शिक्षकों समेत अलग-अलग विभागों में पदस्थापित कर्मियों के वेतन में प्रति माह करीब 9,000 रुपये की कटौती हो जायेगी. साथ ही पिछले करीब 20 वर्षों में उन्होंने जो भी अतिरिक्त राशि वेतन के रूप में लिया है, उसकी रिकवरी भी करने की तैयारी है. वित्त विभाग के इस पत्र के बाद शिक्षकों में हड़कंप मच गया है. वेतन निर्धारण के लिए क्या है हिंदुस्तान प्रशासन की गाइडलाइन वेतन बैंड / वेतनमान में वेतन का निर्धारण 1 जनवरी 2006 को यथाविद्यमान मौजूदा मूल वेतन को 1.86 के गुणक से गुणा करके तथा इस प्रकार प्राप्त संख्या को 10 के अगले गणज से पूर्णांकित करके किया जाएगा. उदाहरण के तौर पर जैसे 2451 हो तो 2460 तक बढ़ा दिया जाएगा. यदि संशोधित वेतन बैंड / वेतनमान का न्यूनतम उपर्युक्त (1) के अनुसार प्राप्त राशि से ज्यादा है तो वेतन संशोधित वेतन बैंड / वेतनमान के न्यूनतम पर निर्धारित किया जाएगा.उदाहरण: अगर किसी कर्मचारी का 1 जनवरी 2006 को मूल वेतन 5000 रुपये था, तो:• 5000 × 1.86 = 9300• इसे अगली दस की संख्या पर राउंड करेंगे = 9310• अब, मान लीजिए अपग्रेड किए गए पद का ग्रेड पे है 4200• तो कुल वेतन = 9310 4200 = 13,510 रुपये 20 साल के बाद वित्त विभाग की टूटी है नींद झारख‍ंड में 1998, 1999, 2000, 2004 एवं 2005 में शिक्षकों की बहाली हुई. इसके कुछ दिनों के बाद यानी एक जनवरी 2006 को छठा वेतनमान लागू कर दिया गया. जिसके बाद शिक्षकों के ग्रेड पे को रिवाइज कर दिया गया. केंद्र प्रशासन ने वेतनमान के निर्धारण के लिए रूल 1 और रूल 2 को तय किया. 2006 में सभी शिक्षकों के वेतनमान का निर्धारण रूल 2 के अनुसार कर दिया गया. कुछ ऐसे शिक्षक भी थे जो 93,000 से 34,200 के वेतनमान तक नहीं पहुंच पा रहे थे, उन्हें अतिरिक्त इंक्रीमेंट का लाभ देकर छठा वेतनमान दिया गया. लेकिन, अब करीब 20 साल के बाद वित्त विभाग की नींद टूटी और विभाग ने एक पत्र जारी कर कहा है कि शिक्षकों को रूल 1 के अनुसार ही वेतनमान दिया जाना था. पूर्व में तय किए गए वेतनमान को रद्द करने का निर्देश दिया गया है. अधिकारियों की गलती की सजा शिक्षकों को क्यों ? 2006 से पूर्व बहाल शिक्षकों या अन्य कर्मियों का पे-फिक्सेशन हिंदुस्तान प्रशासन के रूल नंबर 2 के अनुसार किया गया है. उक्त वेतन निर्धारण तत्कालीन विभागीय अधिकारियों ने की. जिला लेखा पदाधिकारी सह उपायुक्त ने उसका सत्यापन भी किया. जिसके बाद उसे लागू कर दिया गया. करीब 20 वर्षों से शिक्षक बढ़े हुए वेतनमान पर सैलरी ले रहे हैं. अब जब आठवां वेतनमान की सुगबुगाहट तेज हुई है, उससे पूर्व वित्त विभाग की नींद टूटी है और वेतनमान में संशोधन करने का निर्देश दिया गया है. शिक्षकों से राशि रिकवरी की तैयारी भी है. नाम नहीं छापने की शर्त पर शिक्षकों ने कहा कि आखिर इस पूरी प्रक्रिया में शिक्षक की कहां गलती है, क्या शिक्षकों ने जबरदस्ती गलती करवाई. क्या किसी शिक्षक ने वेतनमान तय किया था. दोषी अधिकारियों के बजाय शिक्षकों पर क्यों कार्रवाई की जा रही है. पूर्वी सिंहभूम जिले में 700 शिक्षकों का वेतन हुआ होल्ड वित्त विभाग के निर्देश के बाद पूर्वी सिंहभूम जिले के करीब 700 शिक्षकों का वेतन होल्ड कर दिया गया है. उन्हें मार्च माह का वेतन नहीं मिला है. जिला शिक्षा विभाग की ओर से इस मामले में होमवर्क किया जा रहा है. इससे पूर्व इस प्रकार का मामला चाईबासा में निकल कर सामने आ चुका है. ये भी पढ़ें: डॉ अशोक प्रियदर्शी को बिरसा मुंडा शिखर सम्मान, डॉ शेखर मल्लिक को बिनोद बिहारी महतो स्मृति सम्मान, 15 साहित्यकार सम्मानित The post झारखंड के प्रशासनी स्कूलों के 12 हजार शिक्षकों का घटेगा वेतन, 20 साल बाद टूटी वित्त विभाग की नींद appeared first on Naya Vichar.

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