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April 18, 2025

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Murshidabad Violence: मुर्शिदाबाद हिंसा के बाद झारखंड के इस जिले में निषेधाज्ञा, अफवाह फैलायी तो होगा एक्शन

Murshidabad Violence: पाकुड़-वक्फ संशोधन अधिनियम-2025 पारित किए जाने के बाद झारखंड के सीमावर्ती राज्य पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में दो समुदायों के बीच हुई हिंसक घटना को लेकर पाकुड़ प्रशासन अलर्ट है. प्रशासन ने पाकुड़ शहर में 18 अप्रैल से 15 मई तक निषेधाज्ञा लागू कर दी है. शहर में धारा 163 लगा दी गयी है. इस संबंध में अनुमंडल पदाधिकारी साइमन मरांडी ने आदेश पत्र जारी किया है. निषेधाज्ञा के बाद अब ये करना होगा प्रतिबंधित पाकुड़ के अनुमंडल पदाधिकारी साइमन मरांडी द्वारा जारी आदेश के अनुसार पांच या पांच से अधिक की संख्या में व्यक्तियों के साथ किसी भी स्थान विशेष पर बिना कारण जमा होना, भ्रमण करना अथवा भीड़ लगाना प्रतिबंधित होगा. किसी भी व्यक्ति अथवा व्यक्तियों द्वारा निषेधाज्ञा क्षेत्र में कोई अग्नि शास्त्र, परंपरागत हथियार, लाठी, डंडा, भला, तीर धनुष आदि कोई भी हथियार लेकर चलना, भ्रमण करना अथवा उसका व्यवहार किए जाने पर प्रतिबंध लगाया गया है. कानून का उल्लंघन करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी. ये भी पढ़ें: Air Show 2025 Ranchi: रांची में एयर शो की कैसी है तैयारी? हवाई करतब देख होंगे मंत्रमुग्ध, लेकिन इसकी है नो एंट्री अफवाह फैलानेवालों पर होगी कड़ी कार्रवाई : डीसी डीसी मनीष कुमार, पुलिस अधीक्षक प्रभात कुमार, एसडीओ साइमन मरांडी, एसडीपीओ दयानंद आजाद और नगर थाना प्रभारी प्रयागराज ने शुक्रवार को शहर में विधि-व्यवस्था का जायजा लिया. अधिकारियों ने गांधी चौक मस्जिद के पास पहुंचकर आसपास की जगह का निरीक्षण किया. उपस्थित पदाधिकारी को सतर्कता बरतने का निर्देश दिया. उन्होंने कहा कि अफवाह फैलानेवालों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी. नहीं बख्शे जाएंगे अफवाह फैलानेवाले-डीसी पाकुड़ के डीसी ने कहा कि अफवाह फैलाने वालों को किसी भी हालत में बख्शा नहीं जाएगा. दोषियों को चिह्नित कर कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है. बीते गुरुवार को कुछ असामाजिक तत्वों ने हिंसा की अफवाह फैला दी थी. इसे लेकर शहर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया था. ये भी पढ़ें: कल्पना संग हेमंत सोरेन की स्पेन और स्वीडन यात्रा, औद्योगिक और ऊर्जा क्षेत्र में और मजबूत होगा झारखंड The post Murshidabad Violence: मुर्शिदाबाद हिंसा के बाद झारखंड के इस जिले में निषेधाज्ञा, अफवाह फैलायी तो होगा एक्शन appeared first on Naya Vichar.

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Satellite Toll: सैटेलाइट टोल 1 मई से लागू नहीं होगा, सरकार ने दी सफाई

Satellite Toll: देशभर में टोल प्रणाली को लेकर जारी अफवाहों पर केंद्र प्रशासन ने स्थिति स्पष्ट कर दी है. सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने साफ किया है कि 1 मई 2025 से सैटेलाइट बेस्ड टोल सिस्टम लागू करने को लेकर कोई निर्णय नहीं लिया गया है. मीडिया रिपोर्ट्स पर मंत्रालय का खंडन हाल ही में कई मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि हिंदुस्तान प्रशासन मौजूदा फास्टैग बेस्ड टोल सिस्टम को हटाकर सैटेलाइट बेस्ड टोल कलेक्शन सिस्टम लागू करने जा रही है. इन रिपोर्ट्स में कहा गया कि नया सिस्टम 1 मई से लागू होगा. इसी को देखते हुए मंत्रालय ने स्पष्टीकरण जारी किया है. नई तकनीक से होगा टोल कलेक्शन आसान प्रशासन ने कहा है कि फिलहाल एएनपीआर (Automatic Number Plate Recognition) और फास्टैग बेस्ड बाधा रहित टोलिंग सिस्टम को कुछ चयनित टोल प्लाजा पर लागू किया जाएगा. सैटेलाइट बेस्ड टोल का उद्देश्य बाधारहित वाहन आवाजाही यात्रा समय में कमी ऑटोमैटिक टोल कटौती कैसे काम करेगा नया सिस्टम? टोल प्लाजा पर लगे उन्नत एएनपीआर कैमरे वाहनों की नंबर प्लेट को स्कैन करेंगे. मौजूदा RFID फास्टैग सिस्टम के साथ मिलकर टोल शुल्क अपने आप कट जाएगा. वाहन को टोल प्लाजा पर रुकने की जरूरत नहीं होगी. नियमों का उल्लंघन करने पर सख्त कार्रवाई यदि कोई वाहन नियमों का पालन नहीं करता है, तो ई-नोटिस जारी किया जाएगा. भुगतान न करने पर फास्टैग निलंबित किया जा सकता है. भविष्य में अन्य दंडात्मक कार्रवाई भी हो सकती है. इसे भी पढ़ें: SIP: एसआईपी के 25x12x15 फॉर्मूले से आप भी बन सकते हैं करोड़पति, ऐसे समझिए इसका जादू फिलहाल सैटेलाइट टोल नहीं होगा चालू हिंदुस्तान प्रशासन फिलहाल सैटेलाइट बेस्ड टोल सिस्टम लागू नहीं कर रही है. हालांकि, एएनपीआर और फास्टैग का संयोजन करके टोल वसूली को और अधिक स्मार्ट और आसान बनाया जा रहा है. इससे यात्रा अनुभव बेहतर होगा और टोल प्लाजा पर जाम की समस्या में भी कमी आएगी. इसे भी पढ़ें: हिंदुस्तान के 90% लोग नहीं जानते किस ट्रेन में मिलता है फ्री खाना? यात्री साथ लाते हैं बर्तन The post Satellite Toll: सैटेलाइट टोल 1 मई से लागू नहीं होगा, प्रशासन ने दी सफाई appeared first on Naya Vichar.

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सुपौल में राहुल गांधी का पुतला फूंक रहे थे भाजपाई, कांग्रेसियों ने किया विरोध तो हो गया मार, देखें वीडियो

सुपौल, राहुल : जिले के गांधी मैदान से शुरू हुआ भाजपा कार्यकर्ताओं का जुलूस शुक्रवार को उस वक्त बवाल में बदल गया, जब वे कांग्रेस कार्यालय के समीप सोनिया गांधी और राहुल गांधी का पुतला दहन करने पहुंचे. पुतला दहन का विरोध करते हुए कांग्रेस कार्यकर्ता भी मौके पर जुट गए, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच जोरदार झड़प हो गई. कई कार्यकर्ता हो गए घायल  स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि दोनों ओर से लाठियां चलीं, जिसमें कई कार्यकर्ता घायल हो गए. देखते ही देखते मौके पर अफरातफरी का माहौल बन गया. पुलिस को स्थिति नियंत्रण में लाने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ी. काफी देर तक दोनों दलों के कार्यकर्ता एक-दूसरे के खिलाफ नारेबाजी और धक्का-मुक्की करते रहे. बिहार की ताजा समाचारों के लिए यहां क्लिक करें कांग्रेसियों ने फूंका प्रधानमंत्री की पुतला झड़प के बाद आक्रोशित कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पुतला दहन कर विरोध जताया. स्थानीय लोगों का कहना है कि पहली बार शहर में इस तरह का माहौल देखने को मिला. घटना के बाद कांग्रेस और भाजपा दोनों ने एक-दूसरे पर आरोप लगाए हैं और सोशल मीडिया पर भी बयानबाजी तेज हो गई है. इसे भी पढ़ें : Bihar Rain Alert : बिहार के 22 जिलों में होगी भयंकर बारिश, मौसम विभाग ने जारी किया ऑरेंज अलर्ट, जानिए अपने जिले का हाल The post सुपौल में राहुल गांधी का पुतला फूंक रहे थे भाजपाई, कांग्रेसियों ने किया विरोध तो हो गया मार, देखें वीडियो appeared first on Naya Vichar.

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NEET MDS 2025 Exam: नीट एमडीएस परीक्षा कल, एग्जाम सेंटर पहुंचने से पहले देखें ये जरूरी गाइडलाइंस

NEET MDS 2025 Exam Guidelines: नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन इन मेडिकल साइंसेज (NBEMS) 19 अप्रैल 2025 को NEET MDS परीक्षा आयोजित करेगा. यह परीक्षा कंप्यूटर पर एक ही दिन और एक ही सत्र में ली जाएगी. अगर आप भी इस परीक्षा में शामिल हो रहे हैं तो यहां आप एग्जाम सेंटर पहुंचने से पहले जरूरी गाइंडलाइंस (NEET MDS 2025 Exam Guidelines) देखें. नीट एमडीएस के लिए जरूरी गाइडलाइंस (NEET MDS 2025 Exam) NEET MDS 2025 Exam में शामिल होने वाले उम्मीदवारों को समय पर परीक्षा केंद्र पहुंचना जरूरी है. जो लोग देर से आएंगे, उन्हें परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं दी जाएगी चाहें वह सेंटर परिसर में ही क्यों न हों. एडमिट कार्ड में जो समय लिखा है तो उसी के अनुसार रिपोर्टिंग करनी होगी. परीक्षा शुरू होने से 30 मिनट पहले रिपोर्टिंग काउंटर बंद हो जाएगा. सभी उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वे परीक्षा से एक दिन पहले ही केंद्र का स्थान और एंट्री प्वाइंट देख लें, ताकि किसी तरह की परेशानी न हो और समय पर परीक्षा दी जा सके. यह भी पढ़ें- SSC GD Constable Result 2025: एसएससी जीडी कॉन्स्टेबल रिजल्ट जल्द, यहां सबसे पहले देखें NEET MDS 2025: परीक्षा में इन चीजों को ले जाना मना है NEET MDS 2025 परीक्षा के दौरान कुछ चीजें परीक्षा हॉल में बिल्कुल नहीं ले जा सकते जिनमें शामिल हैं: किताबें, नोट्स, कैलकुलेटर, पेन ड्राइव, इरेजर, राइटिंग पैड या कोई भी स्टेशनेरी मोबाइल फोन, ब्लूटूथ, इयरफोन, स्मार्ट वॉच, हेल्थ बैंड जैसे इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स अंगूठी, कंगन, झुमके, चेन, पेंडेंट, बैज या ब्रोच वॉलेट, चश्मा, हैंडबैग, बेल्ट, टोपी जैसे पर्सनल सामान खाना या पानी की बोतल. गलत आंसर पर निगेटिव मार्किंग (NEET MDS Exam 2025) परीक्षा ऑनलाइन और कंप्यूटर बेस्ड (CBT) आधारित होगी. एग्जाम में कुल 240 बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ) पूछे जाएंगे. परीक्षा एक ही शिफ्ट में दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक आयोजित की जाएगी. कैंडिडेट्स को परीक्षा के लिए 3 घंटे का समय मिलेगा. गलत उत्तरों के लिए 25% अंक काटे जाएंगे लेकिन जो प्रश्न नहीं दिए जाएंगे, उन पर कोई अंक नहीं कटेगा. यह भी पढ़ें- CTET 2025: सीटीईटी जुलाई सेशन के लिए नोटिफिकेशन कब जारी करेगा CBSE? देख लें अन्य जरूरी डिटेल The post NEET MDS 2025 Exam: नीट एमडीएस परीक्षा कल, एग्जाम सेंटर पहुंचने से पहले देखें ये जरूरी गाइडलाइंस appeared first on Naya Vichar.

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Skill Development: सामूहिक विकास के लिए जरूरी है ज्ञान का हस्तांतरण और प्रौद्योगिकी का साझाकरण 

Skill Development:तकनीक एवं स्टार्टअप से संबंधित अफ्रीका का सबसे बड़ा कार्यक्रम ‘गीटेक्स अफ्रीका 2025’ में हिंदुस्तान ने शिरकत की, जिसमें बताया गया कि हिंदुस्तान की डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (डीपीआई) ने खासकर डिजिटल पहचान (आधार), डिजिटल भुगतान (यूपीआई), ई-कॉमर्स (ओएनडीसी) और स्वास्थ्य सेवा के विकास के जरिए विभिन्न क्षेत्रों में परिवर्तनकारी बदलाव किए हैं. हिंदुस्तान अपने कौशल से जुड़े इकोसिस्टम में उन्नत तकनीकों- एआई, साइबर सुरक्षा, फिनटेक और डिजिटल अवसंरचना को तेजी से एकीकृत कर रहे हैं. स्किल इंडिया डिजिटल हब (एसआईडीएच), जोकि कौशल से जुड़े इकोसिस्टम के लिए एक डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना है. इसने डेढ़ वर्ष में एक करोड़ से अधिक उपयोगकर्ताओं को जोड़ा है.  ये ऐसे क्षेत्र हैं, जो हमारे अफ्रीकी भागीदारों के साथ सहयोग की संभावनाओं से भरपूर हैं और हम निरंतर साझेदारी के जरिए सामूहिक रूप से अपनी वित्तीय स्थितिओं को विकसित कर सकते हैं. यह कार्यक्रम नीति निर्माताओं, परिवर्तनकर्ताओं और दूरदर्शी लोगों को सामूहिक रूप से चर्चा एवं सहयोग करने तथा वैश्विक वित्तीय स्थिति के समावेशी व न्यायसंगत विकास की अनिवार्यता को आगे बढ़ाने के अवसरों पर विचार-विमर्श करने का एक मंच प्रदान करता है. तीन-दिवसीय यह कार्यक्रम मोरक्को की राजधानी मारकेश में संपन्न हुआ. विकासशील वित्तीय स्थितिओं की तुलना में तेज है हिंदुस्तान का डिजिटलीकरण कौशल विकास और उद्यमशीलता राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा शिक्षा राज्यमंत्री जयंत चौधरी ने इस शिखर सम्मेलन में हिंदुस्तान का प्रतिनिधित्व किया.उन्होंने  कहा, “हिंदुस्तान, जहां डिजिटलीकरण की गति कुछ अन्य विकासशील वित्तीय स्थितिओं की तुलना में तेज है, स्थापित ओपन-सोर्स डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना प्रणाली के साथ सहयोग और ज्ञान के साझाकरण के जरिए ऐसे प्रणाली विकसित करने के इच्छुक अन्य विकासशील देशों में डिजिटलीकरण की गति को उत्प्रेरित करने की क्षमता रखता है.” इसके अलावा, हिंदुस्तान एआई से जुड़े पेशेवरों के लिए एक प्रमुख संसाधन प्रतिभा केन्द्र है और एआई स्टैनफोर्ड इंडेक्स 2025, जो एआई को अपनाने हेतु एक वातावरण का विकास करने में प्रशासन और उद्योग जगत के प्रयासों का एक स्पष्ट संकेतक है.  एआई से जुड़ी प्रतिभाओं की भर्ती में वर्ष- दर-वर्ष के आधार पर 33.39 प्रतिशत की वृद्धि के साथ अग्रणी है. जयंत चौधरी ने एआई, अनुसंधान और क्षमता में तालमेल की खोज पर व्यापक रूप से चर्चा की. उन्होंने इस बात पर भी चर्चा की कि कैसे डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना समावेशन, नवाचार एवं न्यायसंगत विकास के लिए उत्प्रेरक साबित हो सकती है. The post Skill Development: सामूहिक विकास के लिए जरूरी है ज्ञान का हस्तांतरण और प्रौद्योगिकी का साझाकरण  appeared first on Naya Vichar.

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सीवान में ऑपरेशन के बाद जच्चा-बच्चा की मौत, डॉक्टर पर लापरवाही का आरोप

सीवान, अरविंद कुमार सिंह : शहर के डॉक्टर्स कॉलोनी स्थित एक निजी अस्पताल में सिजेरियन डिलीवरी के बाद प्रसूता और नवजात की मौत से हड़कंप मच गया. मृतका सुषमा देवी (35) गोपालगंज के बरौली थाना क्षेत्र के बलहा गांव निवासी सोनू कुमार बिन की पत्नी थी. परिजनों ने अस्पताल और डॉक्टर पर लापरवाही का गंभीर आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा किया. घटना के बाद डॉक्टर और कर्मचारी अस्पताल बंद कर फरार हो गए.  डॉक्टर पर जबरदस्ती नॉर्मल डिलीवरी कराने का आरोप परिजनों के अनुसार, सुषमा का नौ महीने से उक्त अस्पताल में इलाज चल रहा था. गुरुवार रात 11 बजे प्रसव पीड़ा के बाद उन्हें भर्ती किया गया. आरोप है कि अस्पताल ने रातभर जबरदस्ती नॉर्मल डिलीवरी कराने की कोशिश की. जब यह संभव नहीं हुआ, तो शुक्रवार सुबह सिजेरियन किया गया. सिजेरियन के बाद सुषमा ने एक शिशु को जन्म दिया, लेकिन कुछ देर बाद शिशु की मौत हो गई. परिजनों ने बताया कि शिशु का अंतिम संस्कार कर लौटने पर डॉक्टर ने सुषमा की हालत गंभीर बताकर एक यूनिट ब्लड लाने को कहा. पति सोनू ने दोपहर 12 बजे ब्लड लेकर आए, तो देखा कि सुषमा को एंबुलेंस में रखा गया है और उनकी मौत हो चुकी थी.  बिहार की ताजा समाचारों के लिए यहां क्लिक करें पैसे लेने के बावजूद लापरवाही से किया ऑपरेशन परिजनों ने आरोप लगाया कि डॉक्टर ने पैसे लेने के बावजूद लापरवाही से ऑपरेशन किया, जिससे सुषमा की जान गई. उन्होंने बताया कि भर्ती के समय सुषमा स्वस्थ थीं. अस्पताल ने सारे कागजात भी रख लिए। हंगामे की सूचना पर परिजनों ने 112 पर कॉल कर पुलिस को बुलाया. महादेवा थानाध्यक्ष निर्भय कुमार ने बताया कि घटना की जांच के लिए पदाधिकारियों को भेजा गया है. लिखित शिकायत मिलने पर आगे की कार्रवाई होगी.  इसे भी पढ़ें : Bihar Train : बिहार से दिल्ली, पंजाब जाने वालों को रेलवे ने दी खुशसमाचारी, इन ट्रेनों को दोबारा चलाने का किया ऐलान The post सीवान में ऑपरेशन के बाद जच्चा-बच्चा की मौत, डॉक्टर पर लापरवाही का आरोप appeared first on Naya Vichar.

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FasTag: ‘एएनपीआर-फास्टैग आधारित बैरियर-लेस टोलिंग सिस्टम’ होंगे लागू

FasTag:चयनित टोल प्लाजा पर ‘ऑटोमेटिक नंबर प्लेट कॉग्निशन'(एएनपीआर) -फास्टैग-आधारित बाधा-रहित टोलिंग प्रणाली’ लागू की जाएगी. टोल प्लाजा के माध्यम से वाहनों की निर्बाध, बाधा-मुक्त आवाजाही को सक्षम करने और यात्रा के समय को कम करने के लिए चयनित टोल प्लाजा पर ‘एएनपीआर-फास्टैग-आधारित बाधा-रहित टोलिंग प्रणाली’ के क्रियान्वयन के लिए एनएचएआई ने बोलियां आमंत्रित की है. जिसे चुनिंदा टोल प्लाजा पर लगाया जाएगा. इस प्रणाली के प्रदर्शन, दक्षता और उपयोगकर्ता की प्रतिक्रिया के आधार पर, देश भर में इसके क्रियान्वयन के बारे में निर्णय लिया जाएगा. ऐसे काम करता है एएनपीआर तकनीक मौजूदा ‘फास्टैग सिस्टम’ टोल कटौती के लिए रेडियो-फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन (आरएफआईडी) का उपयोग करता है. वहीं उन्नत टोलिंग प्रणाली में ‘ऑटोमेटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन’ (एएनपीआर) तकनीक होती है, जो वाहनों की नंबर प्लेट पढ़कर उसकी पहचान करती है. इसके तहत, वाहनों को उच्च क्षमता वाले एएनपीआर कैमरों और फास्टैग रीडर्स के माध्यम से उनकी पहचान के आधार पर टोल प्लाजा पर रुकने की आवश्यकता के बिना चार्ज किया जायेगा. नियमों का पालन न करने की स्थिति में, उल्लंघनकर्ताओं को ई-नोटिस दिए जाएंगे, जिसका भुगतान न करने पर फास्टैग को निलंबित किया जा सकता है और वाहन से संबंधित अन्य दंड लगाया जा सकता है. सेटेलाइट आधारित टोलिंग प्रणाली का अभी निर्णय नहीं  कुछ मीडिया रिपोर्ट में एक मई से सेटेलाइट आधारित टोलिंग प्रणाली शुरू किये जाने से संबंधित रिपोर्ट के मद्देनजर मंत्रालय की ओर से स्पष्टीकरण दिया गया कि सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय या हिंदुस्तानीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) द्वारा एक मई 2025 से सैटेलाइट आधारित टोलिंग के राष्ट्रव्यापी कार्यान्वयन के संबंध में ऐसा कोई निर्णय नहीं लिया गया है. The post FasTag: ‘एएनपीआर-फास्टैग आधारित बैरियर-लेस टोलिंग सिस्टम’ होंगे लागू appeared first on Naya Vichar.

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केसरी चैप्टर 2 : क्या आप जानते हैं, जालियांवाला बाग नरसंहार के खिलाफ नहीं लड़ा गया था कोई केस?

Table of Contents केसरी चैप्टर 2 में जालियांवाला बाग का सच सामने लाने की कोशिश कौन थे सी शंकरन नायर , जिनका किरदार केसरी चैप्टर 2 में अक्षय कुमार ने निभाया जालियांवाला बाग नरसंहार के बाद गठित हुआ था हंटर कमीशन हंटर आयोग के सदस्य kesari 2 : जालियांवाला बाग नरसंहार हिंदुस्तानीय इतिहास की एक ऐसी घटना है, जिसे याद कर आज भी लोगों के रोंगटे खड़े हो जाते हैं और लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि आखिर जनरल डायर ने निहत्थे लोगों जिसमें औरतें और शिशु भी शामिल थे, उनपर इतना जुल्म क्यों किया? जालियांवाला बाग नरसंहार में अधिकारिक तौर पर 379 लोग मारे गए थे जबकि बताया यह जाता है कि नरसंहार में 1500 से अधिक लोगों को मारा गया था और 2000 से अधिक लोग घायल हुए थे. इस नरसंहार के बाद निहत्थे लोगों पर गोलियां चलवाने वाले जनरल डायर का क्या हुआ? क्या कोई मुकदमा उसपर दायर हुआ? कोई सजा मिली, ऐसे कई सवाल लोगों के मन में है. केसरी चैप्टर 2 में जालियांवाला बाग का सच सामने लाने की कोशिश केसरी चैप्टर 2 के जरिए हिंदुस्तान में 13 अप्रैल 1919 में घटित एक घटना का सच सामने लाने की कोशिश की गई है. हालांकि यह मूवी ऐतिहासिक रूप से सच नहीं है, क्योंकि जालियांवाला बाग नरसंहार के बाद कोई मुकदमा कोर्ट तक नहीं पहुंचा था, लेकिन इस मूवी में कोर्टरूम ड्रामा के जरिए जालियांवाला बाग में जनरल रेजिनाल्ड एडवर्ड हैरी डायर ने जो हैवानियत की थी, उसका काला चेहरा उजागर करने की कोशिश की गई है, जिसे उस दौर में ढंकने की कोशिश की गई थी. इस फिल्म में जालियांवाला नरसंहार के प्रति आम हिंदुस्तानीयों के मन में जो गुस्सा था उसे दिखाया गया है और यह बताया गया है कि जालियांवाला बाग में हिंदुस्तानीय किसी साजिश को अंजाम देने के लिए नहीं जुटे थे. कौन थे सी शंकरन नायर , जिनका किरदार केसरी चैप्टर 2 में अक्षय कुमार ने निभाया सी शंकरन नायर आजादी से पहले हिंदुस्तान के एक काबिल वकील थे. जालियांवाला बाग नरसंहार के बाद उन्होंने अपना विरोध दर्ज कराते हुए वायसराय की कार्यकारिणी से इस्तीफा दे दिया और इस नरसंहार के खिलाफ आवाज बुलंद की थी. उस वक्त उन्होंने एक किताब भी लिखी थी जिसमें इस हत्याकांड का विरोध किया गया था और जनरल डायर को निशाने पर लिया गया था. जालियांवाला बाग नरसंहार के बाद गठित हुआ था हंटर कमीशन जालियांवाला बाग नरसंहार के बाद हिंदुस्तानीयों ने इसका बहुत विरोध किया. आम जनमानस में ब्रिटिश प्रशासन के प्रति नफरत बढ़ गई और उनका विश्वास इस घटना ने डिगा दिया. इसे देखते हुए ब्रिटिश हिंदुस्तान में हंटर आयोग का 29 अक्टूबर 1919 को गठन किया गया. इस आयोग ने 26 मई 1920 को अपनी रिपोर्ट दी. जिसमें यह माना गया कि जनरल डायर का बिना चेतावनी दिए गोली चलवाने का निर्णय गलत था और यह भी माना गया कि हिंदुस्तानीय किसी षडयंत्र को अंजाम देने के लिए वहां जमा नहीं हुए थे. जनरल डायर को पद छोड़ना पड़ा था, लेकिन उसे कोई आपराधिक सजा नहीं सुनाई गई थी. किसी हिंदुस्तानीय ने इस घटना के खिलाफ कोर्ट का रुख नहीं किया था, क्योंकि उस वक्त हिंदुस्तान पर अंग्रेजों का शासन था और हिंदुस्तानीय गुलाम थे. हंटर आयोग के सदस्य अध्यक्ष – लॉर्ड विलियम हंटर, पूर्व सॉलिसिटर-जनरल डब्ल्यूएफ राइस न्यायमूर्ति जीसी रैनकिन मेजर जनरल सर जॉर्ज बैरो सर चिमनलाल सीतलवाड़ पंडित जगत नारायण सरदार सुल्तान अहमद खान Also Read : ‘सीरियल किलर’ चार्ल्स शोभराज जिसकी दीवानी थी 16 से 50 साल तक की औरतें, ऐसा था उसका मायाजाल सुप्रीम कोर्ट के जजमेंट के बाद क्या राष्ट्रपति 3 महीने के अंदर किसी बिल को पास करने के लिए बाध्य होंगे? क्या होगा वक्फ एक्ट का भविष्य ? जब संविधान में धार्मिक समुदायों को मिले हैं ये अधिकार… 277 लोगों की हत्या का आरोपी ब्रह्मेश्वर मुखिया राक्षस था या मसीहा, उसके आतंक की पूरी कहानी विभिन्न विषयों पर एक्सप्लेनर पढ़ने के लिए क्लिक करें The post केसरी चैप्टर 2 : क्या आप जानते हैं, जालियांवाला बाग नरसंहार के खिलाफ नहीं लड़ा गया था कोई केस? appeared first on Naya Vichar.

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VIP कार, VIP तस्करी, किशनगंज में लग्जरी गाड़ी से मिली भारी मात्रा में शराब, बंगाल से कनेक्शन

Kishanganj News: बिहार के किशनगंज में पुलिस के हाथ एक बड़ी कामयाबी लगी है. पुलिस ने किशनगंज के ठाकुरगंज में बंगाल से आ रही एक लग्जरी कार से भारी मात्रा में विदेशी शराब बरामद किया है. यह मामला उस वक्त का है, जब बंगाल से आ रही एक तेज रफ्तार कार पुलिस चेकिंग के दौरान चकमा देकर भागने लगी. किसी तरह पुलिस ने कार का पीछा किया, लेकिन शराब तस्कर कार छोड़कर भाग गये. पुलिस ने कार को कब्जे में लेकर अज्ञात लोगों के खिलाफ बिहार मद्य निषेध उत्पाद अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर जांच में जुट गई है. कार से 408 लीटर शराब पुलिस ने किया जब्त पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार बंगाल से आ रही इस लग्जरी कार से 408 लीटर विदेशी शराब जब्त किया गया है. भारी मात्रा में विदेशी शराब की यह खेप बिहार में शराबंदी होने के बावजूद गैर-कानूनी तरीके से लाया जा रहा था. बिहार की ताजा समाचारों के लिए क्लिक करें मक्के के खेत के रास्ते भागे शराब तस्कर बंगाल से शराब लेकर आ रही कार के चालक ने जब वाहन चेकिंग के दौरान पुलिस बल को देखा, तो उसने कार की रफ्तार बढ़ा दी और गाड़ी मोड़कर भागने लगा. इसके बाद चेकिंग कर रहे पुलिस बल को शक हुआ और पुलिस ने कार का पीछा करना शुरु किया और ग्रामाणों को भी इसकी सूचना दी, जिसके बाद उस रास्ते पर लगभग एक किमी दूर मानिकपुर पेट्रोल पम्प पर ग्रामीणों ने कार को घेर लिया. इस दौरान कार चालक और शराब तस्कर कार को रास्ते पर ही छोड़कर पास के मक्के के खेत के रास्ते से भाग खड़े हुए. इसके बाद ठाकुरगंज के थानाध्यक्ष मकसूद अहमद असर्फी के नेतृत्व में पुलिस बल तुरंत घटनास्थल पर पहुंची और कार को कब्जे में ले लिया. इसे भी पढ़ें: बिहार के इन 27 जिलों में अगले 24 घंटे होगी मेघगर्जन, वज्रपात और बारिश, IMD ने जारी किया ऑरेंज अलर्ट शराब तस्करी की सूचना मिलने से अलर्ट थी पुलिस कुछ दिनों पहले ही पुलिस को यह सूचना मिली थी कि बंगाल से रास्ते यहां विदेशी शराब की तस्करी की जा रही है, जिसके बाद पुलिस प्रशासन अलर्ट मोड में थी. पुलिस ने शराब तस्करी की सूचना मिलते ही ठाकुरगंज में बंगाल से आने वाले सभी रास्तों पर नाकाबंदी कर दी थी. शहर के जगन्नाथ मंदिर के पास बंगाल की तरफ से आ रहे वाहनों को रोक कर जांच की जा रही थी, तभी विदेशी शराब से लदा यह हुंडई क्रेटा कार तेज रफ्तार में आ रही थी, लेकिन पुलिस की नाकाबंदी देख भागने लगी. जिसके बाद पुलिस को शक हुआ और फिर पुलिस ने पीछा किया. (हर्षित कुमार) The post VIP कार, VIP तस्करी, किशनगंज में लग्जरी गाड़ी से मिली भारी मात्रा में शराब, बंगाल से कनेक्शन appeared first on Naya Vichar.

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2 घंटे में तय कर सकेंगे ऋषिकेश से कर्णप्रयाग का सफर

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने खुशी जाहिर करते हुए बताया कि “इस परियोजना के तहत टीबीएम तकनीक का पहली बार पहाड़ी इलाकों में इस्तेमाल हुआ है. 9.11 मीटर व्यास वाली सिंगल-शील्ड रॉक टीबीएम ने जिस गति और सटीकता का प्रदर्शन किया, वह हिंदुस्तान के निर्माण क्षेत्र में एक नई मिसाल है.” योगनगरी ऋषिकेश से तपोनगरी कर्णप्रयाग का सफर अब दो घंटे में ही पूरा होने वाला है. हिंदुस्तानीय रेल ने देवभूमि में ‘शिव’ और ‘शक्ति’ के वरदान से देश की सबसे लंबी रेलवे सुरंग के निर्माण में सफल ब्रेक थ्रू हासिल कर लिया है. 125 किमी से अधिक लंबी ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना उत्तराखंड की प्राकृतिक सुंदरता, तीर्थ स्थलों और आध्यात्मिक महत्व को नए सिरे से परिभाषित करने वाली है.यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ के दर्शन को हर साल लाखों श्रद्धालु यात्रा पर निकलते हैं.मगर भौगोलिक संरचना और सीमित कनेक्टिविटी ने हमेशा से यात्रियों और स्थानीय निवासियों के लिए चुनौतियां पेश की हैं. इन चुनौतियों को दूर करने और उत्तराखंड के दुर्गम इलाकों को रेल नेटवर्क से जोड़ने के लिए हिंदुस्तानीय रेल ने ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना शुरू की. इस परियोजना के पूरा होने से करोड़ों श्रद्धालुओं के चारधाम यात्रा की मन्नत पूरी होने वाली है. 2 घंटे में तय कर सकेंगे ऋषिकेश से कर्णप्रयाग का सफर 3 ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना हिमालय के दुर्गम और भौगोलिक तौर पर संवेदनशील क्षेत्र (सिस्मिक जोन IV) में बन रही है. इस रेल लाइन में देश की सबसे लंबी रेलवे सुरंग 14.577 किमी (47825 फीट) शामिल है, जो देवप्रयाग और जनासू के बीच बन रही है. 16 अप्रैल, 2025 को रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 14.58 किमी लंबी सुरंग T-8 के ब्रेकथ्रू का उद्घाटन किया, जो देश की सबसे लंबी रेलवे सुरंग है. इसके अलावा 38 नियोजित सुरंग ब्रेकथ्रू में से 28 पूरे हो चुके हैं. परियोजना के पहले चरण को 2026 के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य है, और 2027 के मध्य तक यह पूरी तरह से चालू हो सकती है. इस परियोजना में आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है, जैसे कि टनल बोरिंग मशीन (TBM) जिसने सुरंग निर्माण में अभूतपूर्व प्रगति दर्ज की है. अगस्त 2024 में टनल बोरिंग मशीन ‘शिव’ और ‘शक्ति’ ने एक महीने में 1080.11 रनिंग मीटर सुरंग खोदकर नया रिकॉर्ड बनाया. इस परियोजना में रेल ब्रिज नंबर 8 इंजीनियरिंग का एक और चमत्कार है. योग से तप की कनेक्टिविटी ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना 125.2 किमी लंबी ब्रॉड गेज रेल लाइन है, जो योग नगरी ऋषिकेश को कर्णप्रयाग से जोड़ेगी. यह परियोजना हिंदुस्तानीय रेल की चारधाम रेल परियोजना का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य उत्तराखंड के चार पवित्र तीर्थ स्थलों को रेल नेटवर्क से जोड़ना है. इस रेल लाइन की कुल लागत लगभग 16 हजार करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई है. परियोजना की सबसे खास बात यह है कि इसका 83 प्रतिशत हिस्सा सुरंगों से गुजरेगा, जिसमें 17 मुख्य सुरंगें और 12 एस्केप टनल शामिल हैं. इसकी कुल लंबाई 213 किलोमीटर है, जिसमें 193 किलोमीटर का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है. 2 घंटे में तय कर सकेंगे ऋषिकेश से कर्णप्रयाग का सफर 4 पांच जिलो को रेल नेटवर्क से जोड़ेगी यह यात्रा ऋषिकेश से कर्णप्रयाग तक सड़क मार्ग से 6-7 घंटे लगते हैं जो मौसम और भूस्खलन के कारण और बढ़ सकता है. चारधाम रेल परियोजना के तहत बन रही ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन इस दूरी को तकरीबन दो घंटे में पूरा करेगी. इससे तीर्थयात्रियों, पर्यटकों और स्थानीय लोगों के लिए यात्रा तेज, सुरक्षित और सुविधाजनक हो जाएगी. उत्तराखंड में भारी बारिश, बर्फबारी और भूस्खलन के कारण सड़क मार्ग अक्सर अवरुद्ध हो जाते हैं. मानसून और सर्दियों के मौसम में यह अक्सर होता है. इस परियोजना का 83 प्रतिशत हिस्सा सुरंगों के माध्यम से गुजरता है, जो इसे मौसम की मार से मुक्त रखेगा और निर्बाध कनेक्टिविटी सुनिश्चित करेगा, जिससे तीर्थयात्री और पर्यटक साल भर चारधाम की यात्रा कर सकेंगे. यह परियोजना उत्तराखंड के पांच प्रमुख जिलों—देहरादून, टिहरी गढ़वाल, पौड़ी गढ़वाल, रुद्रप्रयाग और चमोली को रेल नेटवर्क से जोड़ेगी. योग नगरी ऋषिकेश, मुनि की रेती, देवप्रयाग, श्रीनगर, रुद्रप्रयाग, गौचर और कर्णप्रयाग जैसे शहर और कस्बे रेल मार्ग से जुड़ जाएंगे. इससे सुदूर पहाड़ी क्षेत्रों के लोग स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा, रोजगार और बाजारों तक आसानी से पहुंच सकेंगे. चारधाम रेल परियोजना का मुख्य उद्देश्य यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ को रेल नेटवर्क से जोड़ना है. मिल सकेगा आर्थिक और सामाजिक लाभ ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना उत्तराखंड में पर्यटन को बढ़ावा देने वाली है. चारधाम यात्रा के अलावा, उत्तराखंड के अन्य पर्यटन स्थल जैसे ऋषिकेश, हरिद्वार और औली तक पहुंचना आसान हो जाएगा. इससे स्थानीय व्यापार, होटल उद्योग और परिवहन सेवाओं को बढ़ावा मिलेगा और उत्तराखंड के सुदूर इलाकों में नए व्यापार केंद्रों के विकास को प्रोत्साहन मिलेगा. देवप्रयाग, श्रीनगर, रुद्रप्रयाग और गौचर जैसे शहरों में आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी, जिससे स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर पैदा होंगे. The post 2 घंटे में तय कर सकेंगे ऋषिकेश से कर्णप्रयाग का सफर appeared first on Naya Vichar.

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