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May 7, 2025

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Mock Drill: सिविल डिफेंस मॉकड्रिल के दौरान क्या-क्या होगा? पटना जंक्शन पर हुआ ये बड़ा बदलाव

Mock Drill: बिहार प्रशासन आज शाम एक अभूतपूर्व मॉकड्रिल आयोजित करने जा रही है. जिसका उद्देश्य हवाई हमले जैसी आपात परिस्थितियों में राज्य की तैयारी और नागरिकों की सतर्कता का आकलन करना है. केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देश पर यह अभ्यास पटना, पूर्णिया, बेगूसराय, कटिहार, किशनगंज और अररिया जिलों में किया जाएगा. पटना के जिलाधिकारी डॉ. चंद्रशेखर सिंह ने बताया कि मॉकड्रिल शाम 6:58 बजे सायरन बजने के साथ शुरू होगी. राजधानी के 80 से अधिक स्थानों पर एक साथ सायरन बजेगा, जो नागरिकों को अलर्ट करेगा. इसके तुरंत बाद शाम 7:00 बजे से 7:10 बजे तक बिजली आपूर्ति बंद कर दी जाएगी. केवल इमरजेंसी सेवाओं जैसे अस्पताल और आवश्यक उद्योगों को बिजली मिलेगी. नागरिकों से कहा गया है कि वे घरों और दुकानों में इन्वर्टर चालू न करें, खिड़कियां और लाइटें बंद रखें तथा मोबाइल फोन का प्रयोग न करें. वाहन चालकों को वाहन रोककर हेडलाइट बंद करनी होगी. डीएम ने क्या कहा? डीएम ने स्पष्ट किया कि यह केवल एक रिहर्सल है और लोगों को किसी प्रकार की घबराहट नहीं होनी चाहिए. इस अभ्यास का उद्देश्य शहर की सुरक्षा प्रणाली को परखना और संभावित कमजोरियों को चिन्हित कर उनमें सुधार करना है. पटना जंक्शन पर सिर्फ दो गेटों से प्रवेश और निकास मॉकड्रिल से पहले ही मंगलवार को पटना समेत सभी छह जिलों में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया. पटना जंक्शन, एयरपोर्ट, हाईकोर्ट, विधानसभा और प्रमुख धार्मिक स्थलों पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है. पटना जंक्शन पर सिर्फ दो गेटों से प्रवेश और निकास हो रहा है, जहां यात्रियों की जांच मेटल डिटेक्टर और एक्स-रे मशीन से की जा रही है. Also Read: ऑपरेशन सिंदूर: पाकिस्तान पर एयर स्ट्राइक के बाद पूरे बिहार में अलर्ट, पटना सहित कई जिलों में बढ़ाई गई सुरक्षा भीड़-भाड़ वाले स्थानों पर सादी वर्दी में पुलिस बल रहेगी तैनात राज्य पुलिस महानिदेशक विनय कुमार ने बताया कि भीड़-भाड़ वाले स्थानों पर सादी वर्दी में पुलिस बल की तैनाती की गई है. नेपाल सीमा से सटे जिलों में विशेष निगरानी रखी जा रही है ताकि किसी भी तरह की घुसपैठ को रोका जा सके. उन्होंने सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों को निर्देश दिया है कि वे लगातार पेट्रोलिंग करें और सुरक्षा इंतजामों की समीक्षा करते रहें. मुख्य सचिव अमृतलाल मीणा ने बताया कि मॉकड्रिल का बड़ा उद्देश्य यह है कि किसी युद्ध जैसी स्थिति में जब ब्लैकआउट किया जाए, तो दुश्मन यह अनुमान न लगा सके कि आबादी कहां है. साथ ही, सिविल डिफेंस की तैयारियों को मजबूत करने का भी यह एक व्यावहारिक परीक्षण है. Also Read: बिहार को जल्द मिलेगी तीसरी अमृत हिंदुस्तान ट्रेन, इस जिले से पंजाब का सफर होगा आसान The post Mock Drill: सिविल डिफेंस मॉकड्रिल के दौरान क्या-क्या होगा? पटना जंक्शन पर हुआ ये बड़ा बदलाव appeared first on Naya Vichar.

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क्या भारतीय सेना के ब्रिगेड मुख्यालय पर पाकिस्तान ने किया हमला? वायरल वीडियो का सच जानिए

कश्मीर के पहलगाम में बीते दिनों हुए आतंकी हमले का जवाब हिंदुस्तानीय सेना ने एयर स्ट्राइक से दिया है. पाकिस्तान और पाक अधिकृत कश्मीर के आतंकी ठिकानों पर मंगलवार की रात करीब 2.30 बजे हिंदुस्तानीय सेना ने हवाई हमले किए. आतंकियों के 9 ठिकानों को ध्वस्त किया गया. वहीं सोशल मीडिया पर फेक वीडियो भी वायरल होने लगे. जिसमें हिंदुस्तानीय सेना की क्षति का दावा किया जा रहा है. संजय झा ने जतायी नाराजगी, फेक न्यूज से सतर्क रहने को कहा जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने इसे पाकिस्तानी मीडिया की करतूत बताया. हिंदुस्तान के भी कुछ लोगों ने इसका दावा किया तो संजय झा ने नाराजगी जतायी. दरअसल, तेजस्वी प्रकाश नाम से बनी एक X हैंडल से कुछ वीडियो पोस्ट किया गया. जिसने हिंदुस्तानीय सेना के ठिकाने पर हमले का दावा किया है. हालांकि फैक्ट चेक में ये फेक साबित हुआ. ALSO READ: Video: ‘हम प्रशासन के साथ…’ देश की सुरक्षा का है मामला’ तेजस्वी यादव गरजे #FakeAlert 😡 पाकिस्तानी मीडिया द्वारा FAKE VIDEO शेयर कर हिंदुस्तानीय सेना पर हमले की अफवाह फैलाई जा रही है! मुझे हैरानी है कि उसकी इस नापाक कोशिश में हिंदुस्तान के भी कुछ लोग साथ दे रहे हैं! कृपया सोशल मीडिया पर शेयर हो रहे ऐसे फर्जी वीडियो और पोस्ट से सावधान रहें! सच्चाई यह है :… https://t.co/nAvgC5MYFQ — Sanjay Kumar Jha (@SanjayJhaBihar) May 7, 2025 फैक्ट चेक में फेक निकला वीडियो फैक्ट चेक में ये सूचना भ्रामक साबित हुई है. हिंदुस्तानीय सेना के ब्रिगेड मुख्यालय पर पाकिस्तान के द्वारा हमला किए जाने से जुड़ा वीडियो फेक साबित हुआ है. Social media posts falsely claims that Pakistan destroyed Indian Brigade Headquarters.#PIBFactCheck ❌ This claim is #FAKE ✅ Please avoid sharing unverified information and rely only on official sources from the Government of India for accurate information. pic.twitter.com/9W5YLjBubp — PIB Fact Check (@PIBFactCheck) May 7, 2025 The post क्या हिंदुस्तानीय सेना के ब्रिगेड मुख्यालय पर पाकिस्तान ने किया हमला? वायरल वीडियो का सच जानिए appeared first on Naya Vichar.

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पीएम मोदी ने लोगों का दर्द सुना… हवाई हमले को लेकर शहीद शुभम के पिता ने दी प्रतिक्रिया

Operation Sindoor India Attacks on Pakistan: पहलगाम आतंकी हमले के 15 दिनों के बाद हिंदुस्तानीय सेना ने पाकिस्तान के खिलाफ अपना बदला पूरा कर लिया है. बुधवार की देर रात इंडियन आर्मी ने पाकिस्तान और पाक अधिकृत कश्मीर (POK) स्थित 9 आतंकी ठिकानों को नेस्तनाबूद कर दिया. ऑपरेशन सिंदूर के नाम से सेना बदले की कार्रवाई करके बहावलपुर, मुरीदके, बाघ, कोटली और मुजफ्फराबाद में मिसाइलें दागी. रिपोर्ट्स के मुताबिक इस एयर स्ट्राइक से 100 से ज्यादा आतंकी जहन्नुम पहुंच गए हैं. इस दौरान 3 प्रमुख आतंकी संगठनों जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा और हिजबुल मुजाहिद्दीन के ट्रेनिंग कैंप को जमीदोज करने का काम किया गया. हिंदुस्तान के इस हवाई कार्रवाई में पहलगाम में मारे गए शुभम द्विवेदी के पिता संजय द्विवेदी की प्रतिक्रिया सामने आई है. हिंदुस्तानीय सेना का धन्यवाद- शहीद शुभम के पिता पाकिस्तान के खिलाफ हिंदुस्तान के एयर स्ट्राइक हमले को लेकर आतंकी हमले में शहीद हुए शुभम के पिता संजय द्विवेदी ने कहा कि मैं समाचारें लगातार देख रहा हूं. हिंदुस्तानीय सेना को सलाम करता हूं और पीएम मोदी को धन्यवाद देता हूं. पीएम मोदी ने देश के लोगों का दर्द सुना. उन्होंने ANI से बात करते हुए कहा कि हिंदुस्तानीय सेना ने पाकिस्तान में पनप रहे आतंकवादियों को खत्म करने का काम किया है. इसके लिए मैं हिंदुस्तानीय सेना को धन्यवाद देता हूं. जब से यह समाचार सामने आई है, तब से पूरा परिवार बहुत हल्का महसूस कर रहा है. (shubham dwivedis father reaction on operation sindoor) #WATCH | #OperationSindoor | #PahalgamTerroristAttack में मारे गए शुभम द्विवेदी के पिता संजय द्विवेदी ने कहा “मैं लगातार समाचारें देख रहा हूं। मैं हिंदुस्तानीय सेना को सलाम करता हूं और प्रधानमंत्री मोदी को धन्यवाद देता हूं, जिन्होंने देश की जनता का दर्द समझा। जिस तरह से हिंदुस्तानीय सेना ने… pic.twitter.com/2etMCNzzYs — ANI_HindiNews (@AHindinews) May 7, 2025 22 अप्रैल को आतंकियों ने घटना को दिया था अंजाम इसके अलावा, आतंकी हमले में मारे गए शुभम द्विवेदी की पत्नी ने ऑपरेशन सिंदूर को लेकर बयान दिया है. उन्होंने कहा कि मैं प्रधानमंत्री मोदी का बहुत धन्यवाद करती हूं कि उन्होंने मेरे पति की मौत का बदला लिया. जिस तरह से उन्होंने पाकिस्तान को जवाब दिया, उसने हमारा भरोसा कायम रखा है. यह मेरे पति को सच्ची श्रद्धांजलि है. दरअसल, पिछले महीने की 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के बैसरन घाटी में आतंकियों ने कायराना हमला किया था. इस दौरान आतंकवादियों ने 26 लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी थी, जिसमें यूपी के कानपुर जिले के शुभम द्विवेदी भी शामिल थे. की गोली मारकर हत्या कर दी थी. (shubham dwivedis wife reaction on operation sindoor) #WATCH | कानपुर: पहलगाम आतंकी हमले में मारे गए शुभम द्विवेदी की पत्नी ने #OperationSindoor पर कहा, “मैं प्रधानमंत्री मोदी का बहुत धन्यवाद करती हूं कि उन्होंने मेरे पति की मौत का बदला लिया। और जिस तरह से उन्होंने (पाकिस्तान को) जवाब दिया, उसने हमारा भरोसा कायम रखा है। यह मेरे पति… pic.twitter.com/se9rqrAj8D — ANI_HindiNews (@AHindinews) May 7, 2025 The post पीएम मोदी ने लोगों का दर्द सुना… हवाई हमले को लेकर शहीद शुभम के पिता ने दी प्रतिक्रिया appeared first on Naya Vichar.

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Chanakya Niti: पतन का कारण बनती हैं ये चीजें, समय रहते नहीं सुधरे तो होगा पछतावा 

Chanakya Niti: चाणक्य नीति में ऐसी नीतियों का संग्रह है जो व्यक्ति को आगे बढ़ने में सहायक है. व्यक्तिगत और सामाजिक बातों की शिक्षा भी इन नीतियों से मिल जाती है. चाणक्य नीति आज भी प्रासंगिक है और जीवन में सफलता, नीति और व्यवहारिक बातों की सीख देता है. आचार्य चाणक्य एक बुद्धिमान और महान नेतृत्वज्ञ थे. अपने बुद्धि और विवेक की मदद से आचार्य चाणक्य ने मौर्य समराज्य की स्थापना में अहम भूमिका निभाया था. जीवन में कुछ आदतों से महत्वपूर्ण चीजें नष्ट हो जाती हैं. चाणक्य नीति के पांचवे अध्याय के सातवें श्लोक में कहा गया है, आलस्योपहता विद्या परहस्त गतं धनम्।   अल्पबीजहतं क्षेत्रं हतं सैन्यमनायकम्। ।  इस श्लोक के अनुसार, आलस से विद्या का नाश होता है और दूसरों के हाथ में धन जाने से धन भी नष्ट होता है. आगे इस श्लोक में कहा गया है कि कम बीज से खेत नष्ट होता है और बिना सेनापति के सेना नष्ट हो जाती है.  विद्या के नाश का कारण  आचार्य चाणक्य के अनुसार, विद्या के नष्ट होने का कारण आलस है. आज के समय में कई संसाधन होने पर भी लोग आलस के कारण पढ़ाई पर ध्यान नहीं दे पाते हैं. आलस करने से जो विद्या आपके पास भी है वह भी धीरे धीरे खत्म होने लग जाती है इसलिए चीजों को जानने और सीखने की कोशिश करते रहना चाहिए. यह भी पढ़ें: Chanakya Niti: अगर हैं आपमें ये 4 खूबियां, तो आगे बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता यह भी पढ़ें–Chanakya Niti: जीवन में बढ़ना है आगे तो थाम लें इन लोगों का साथ, पूरे परिवार का भी हो जाएगा भला धन के बारे में चाणक्य नीति में धन के बारे में कहा गया है कि अपने धन को लेकर सतर्क रहें. अगर धन किसी और के हाथ में जाता है तो खर्च हो जाता है. अपने धन सम्पत्ति का खास ध्यान रखें नहीं तो आपको भारी नुकसान हो सकता है. सही मात्रा का चयन बिना तैयारी के किया गया काम पूरा फल नहीं दे पाता है. चाणक्य नीति के अनुसार, अगर खेत में सही मात्रा में बीज नहीं डाला जाए तो खेती बर्बाद हो जाती है. इस बात को आप जीवन में भी लागू कर सकते हैं अगर आप पूरी मेहनत नहीं करते हैं तो आपको सफलता नहीं मिल पाती है. नेतृत्व की कमी अगर किसी संगठन में अच्छे लीडर की कमी है तो ऐसा संगठन ज्यादा दिन तक सफल नहीं हो पाता है. टीम की सफलता के लिए एक मजबूत लीडर की जरूरत पड़ती है. यह भी पढ़ें– Chanakya Niti: हर दिन खुद से पूछिए ये सवाल, जो हर बुद्धिमान पूछता है, बदल जाएगा आपका जीवन The post Chanakya Niti: पतन का कारण बनती हैं ये चीजें, समय रहते नहीं सुधरे तो होगा पछतावा  appeared first on Naya Vichar.

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Operation Sindoor पर पाकिस्तानी एक्ट्रेस का बयान, हानिया आमिर से माहिरा खान तक ने कहा- कायरतापूर्ण हरकत…

Pakistani Actresses on Operation Sindoor: हिंदुस्तानीय सेना ने बुधवार देर रात को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के जरिए पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में 9 आतंकी ठिकानों पर एयरस्ट्राइक कर पहलगाम हमले का करारा जवाब दिया है. हिंदुस्तान के लिए यह काफी गौरवशाली क्षण है. एक ओर जहां कई दिग्गज और फिल्म इंडस्ट्री के स्टार्स ने इस कदम पर सोशल मीडिया के माध्यम से खुशी जाहिर की है. तो वहीं, अब पाकिस्तानी एक्टर्स की प्रतिक्रिया सामने आई है, जिसके मुताबिक उन्होंने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को ‘कायरतापूर्ण’ बताया है. ‘अल्लाह हमारे देश की रक्षा करे’ पाकिस्तान की पॉपुलर एक्ट्रेस माहिरा खान ने लेखिका फातिमा भुट्टो के ट्वीट को रीपोस्ट करते हुए हिंदुस्तानीय सेना के ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को ‘कायरतापूर्ण’ बताया है. साथ ही उन्होंने अपने देश की सलामती की दुआ भी की है. एक्ट्रेस ने इंस्टाग्राम स्टोरी शेयर करते हुए लिखा, “सीरियसली कायरतापूर्ण!!! अल्लाह हमारे देश की रक्षा करे, सदबुद्धि आए. आमीन.” हानिया आमिर ने कहा ‘कायरतापूर्ण’ वहीं, हिंदुस्तान में भी मशहूर पाकिस्तानी एक्ट्रेस हनिया आमिर ने भी अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर एक शब्द में प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने हिंदुस्तान के पाक आतंकी ठिकानों पर किए गए हमले को “कायरतापूर्ण” बताया. पाकिस्तानी सितारों के अकाउंट बैन मालूम हो कि 22 अप्रैल को हुए पहलगाम आतंकी हमले के बाद सोशल मीडिया से पाकिस्तानी कलाकारों के अकाउंट को बैन कर दिया गया है. इनमें हानिया आमिर, माहिरा खान, फवाद खान, अली जफर सहित कई पाकिस्तानी सितारों के नाम शामिल हैं. ऑपरेशन सिंदूर में कितने आतंकी मारे गए? समाचार लिखे जाने तक ऑपरेशन सिंदूर में 17 आकंतवादी मारे गए हैं और 60 घायल हुए हैं. हिंदुस्तानीय सेना ने बुधवार की देर रात 7 मई को 1.30-2.30 बजे बजेरातकोटली, अहमदपुर शर्किया, मुजफ्फराबाद, मुरीदके और फैसलाबाद समेत 9 ठिकानों को ध्वस्त कर दिया है. यह भी पढ़े: Operation Sindoor पर मीमर्स का मास्टरस्ट्रोक, ‘कायरिस्तान’ और ‘चुटकी सिंदूर’ ट्रेंड में… The post Operation Sindoor पर पाकिस्तानी एक्ट्रेस का बयान, हानिया आमिर से माहिरा खान तक ने कहा- कायरतापूर्ण हरकत… appeared first on Naya Vichar.

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Poha Recipes: सुबह की शुरुआत करें स्वादिष्ट पोहे के साथ, जानिए इसे बनाने की आसान रेसिपी

Poha Recipes: पोहे को नाश्ते में खाना सेहत के लिए बहुत फायदेमंद है क्योंकि ये नाश्ते के लिए हल्का और ऊर्जा से भरपूर होता है. इसमें आयरन, कार्बोहाइड्रेट और फाइबर भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं. पोहा आपके पेट को ज्यादा भारी नहीं करता, इसलिए सुबह के समय इसे खाना शरीर के लिए अच्छा है. साथ ही इसमें प्याज, मूंगफली, हरी मिर्च और नींबू जैसे ताजे और पोषक तत्व मिलाए जाते है, जिससे यह और भी पौष्टिक बन जाता है. ऐसे में आज हम आपको इस आर्टिकल में पोहा बनाने के बारे में बताने जा रहें है.  पोहा बनाने की सामग्री  मोटा चूड़ा  – 2 कप  प्याज – 1 (बारीक कटा हुआ) हरी मिर्च – 2 (बारीक कटी हुई) मूंगफली – आधा कप  सरसों के दाने – चम्मच  करी पत्ते – 8 से 10  हल्दी पाउडर – आधा चम्मच  नमक – स्वादानुसार नींबू – 1 हरा धनिया – 1 कलियां (कटा हुआ) तेल – 3 चम्मच  भुजिया – परोसने के लिए  यह भी पढ़ें: Sev Ki Sabji: अब तीखे स्वाद की तलाश खत्म, घर पर झटपट बनाएं सेव की सब्जी  यह भी पढ़ें: Rajbhog Ice Cream: स्वाद ऐसा कि भूल जाएंगे बाजार का स्वाद, बिना झंझट के घर पर बनाएं शाही राजभोग आइसक्रीम पोहा बनाने की विधि  सबसे पहले पोहे को एक छलनी में लेकर दो बार पानी अच्छे से धो लें. ज्यादा देर पानी में न भिगोए, वरना ये नरम हो सकते हैं. धोने के बाद उसे 2 मिनट के लिए अलग रख दें. अब एक कड़ाही में तेल गरम करें. फिर इसमें सरसों के दाने, करी पत्ते, हरी मिर्च और मूंगफली डालें. मूंगफली को लाल होने तक भूनें, ध्यान रखें मूंगफली जले नहीं. अब इसमें कटा हुआ प्याज डालकर उसे हल्का सुनहरा होने तक भूनें. इसके बाद हल्दी पाउडर और थोड़ा नमक डालकर चलाए और धुले हुए पोहे डालकर अच्छे से मिलाएं.अब इसमें नींबू का रस, ऊपर से हरा धनिया डालें.  अब तैयार है आपक गरमागरम पोहा, इसे प्लेट में निकालें और सर्व करने के लिए इसको भुजिया के साथ परोसें. The post Poha Recipes: सुबह की शुरुआत करें स्वादिष्ट पोहे के साथ, जानिए इसे बनाने की आसान रेसिपी appeared first on Naya Vichar.

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Operation Sindoor Air Strike: ये तो सिर्फ झांकी है… राफेल का नया अवतार बाकी है, इस मिसाइल ने मचाई PoK में तबाही

Operation Sindoor Air Strike: पहलगाम में हुए बर्बर आतंकवादी हमले के जवाब में हिंदुस्तानीय सेना ने करारा जवाब दिया है. आधी रात को पाकिस्तान और पाकिस्तानी अधिकृत कश्मीर में कई जगहों पर कई जोरदार धमाके सुने गए हैं. हिंदुस्तानीय सेना ने पहलगाम हमले का बदला देते हुए ऑपरेशन सिंदूर शुरू कर दिया है. हिंदुस्तानीय वायुसेना के कई फाइटर जेट से एयर स्ट्राइक को अंजाम दिया गया है. पीओके और पाकिस्तान में मौजूद 9 आतंकी ठिकानों पर एयर स्ट्राइक कर दी. हिंदुस्तानीय सेना द्वारा एयर स्ट्राइक में अभी तक 70 आतंकियों के मरने की समाचार आ रही है. हालांकि, हिंदुस्तानीय वायुसेना ने इस ऑपरेशन में स्कैल्प मिसाइल गिराया है. आइए जानते हैं भारीतय सेना ने किन मिसाइलों का इस्तेमाल किया है. Operation Sindoor Air Strike: सेना ने इस्तेमाल किया ये मिसाइल हिंदुस्तानीय सेना ने पीओके और पाकिस्तान में मौजूद 9 आतंकी ठिकानों पर एयर स्ट्राइक कर दी. हिंदुस्तानीय वायु सेना ने लड़ाकू विमान राफेल से एयर स्ट्राइक किया है. हिंदुस्तानीय सेना ने स्कैल्प मिसाइल से हमला किया है. SCALP मिसाइल फ्रांस और यूके द्वारा बनाया गया एक मिसाइल है. इस मिसाइल का पूरा नाम स्ट्राइक एयर-लॉन्च क्रूज मिसाइल है हिंदुस्तानीय वायुसेना द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले फाइटर मिसाइल को यूके में स्टॉर्म शैडो नाम से जाना जाता है. वहीं, फ्रांस में इसे SCALP-EG के नाम से जाना जाता है. खास तौर पर इस मिसाइल का इस्तेमाल सेफ डिस्टेंस से एयरबेल और बंकर जैसे टार्गेट पर बिल्कुल सटीक हमला करने के लिए किया जाता है. ये भी पढ़ें: Operation Sindoor: आधे घंटे में पूरी तबाही, जहां ली कसाब ने ट्रेनिंग वही मस्जिद नेस्तनाबूद राफेल का असली रूप बाकी राफेल लड़ाकू विमान के तीन मुख्य रूप हैं. इसमें राफेल सी (Rafale C), राफेल बी (Rafale B), और राफेल एम (Rafale M) शामिल है. राफेल सी एकल सीट वाला भूमि-आधारित विमान है, राफेल बी दो सीट वाला भूमि-आधारित विमान है, और राफेल एम एकल सीट वाला विमान है जो विमानवाहक पोतों से संचालित होता है. राफेल सी राफेल सी एकल सीट वाला होता है. हिंदुस्तानीय वायुसेना (IAF) के राफेल लड़ाकू विमानों से लैस स्कैल्प क्रूज मिसाइल और हैमर मिसाइल दो ऐसी शक्तिशाली हथियार प्रणालियां हैं, जिन्हें ऑपरेशन सिंदूर जैसे अभियानों में उपयोग किया गया है. ये भी पढ़ें: Operation Sindoor: तीनों सेनाओं ने मिलकर ऑपरेशन सिंदूर को दिया अंजाम, जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर के ठिकाने तबाह The post Operation Sindoor Air Strike: ये तो सिर्फ झांकी है… राफेल का नया अवतार बाकी है, इस मिसाइल ने मचाई PoK में तबाही appeared first on Naya Vichar.

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जयंती विशेष : प्राच्य विद्याओं के विशारद थे भारत रत्न पीवी काणे

हिंदुस्तानीय नेतृत्व के महासागर में चंद हंस ऐसे हैं जो डॉ पांडुरंग वामन काणे का महत्व समझते हैं. हिंदुस्तानीय चिंतन, धर्म और अध्यात्म पर काम करने वालों में काणे का नाम अग्रपंक्ति में है. उन्होंने अपनी सारस्वत साधना से इतिहास खड़ा किया. वे न केवल संस्कृत एवं प्राच्य विद्याओं के विशारद थे, बल्कि विधिज्ञ भी थे. डॉ काणे संस्कृत के आचार्य, मुंबई विश्वविद्यालय के कुलपति और 1953 से 1959 तक राज्यसभा के मनोनीत सदस्य रहे. उन्होंने पेरिस, इस्तांबुल व कैंब्रिज के प्राच्यविज्ञ सम्मेलनों में हिंदुस्तान का प्रतिनिधित्व किया. साहित्य अकादमी ने 1956 में उन्हें ‘धर्मशास्त्र का इतिहास’ के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार दिया. वर्ष 1963 में काणे को देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान हिंदुस्तान रत्न से अलंकृत किया. महाराष्ट्र के रत्नागिरी में सात मई, 1880 को जन्मे काणे ने भी नहीं सोचा था कि वे हिंदुस्तानीय धर्मशास्त्र का इतिहास लिख डालेंगे. वे तो धर्मशास्त्र के एक ग्रंथ ‘व्यवहार-मयूख’ की रचना में लगे थे और उस ग्रंथ को रचने के उपरांत उनके मन में आया कि पुस्तक का एक परिचय लिखा जाए, ताकि पाठकों को धर्मशास्त्र के इतिहास की संक्षिप्त जानकारी हो सके. धर्मशास्त्र की संक्षिप्त जानकारी देने के प्रयास में काणे एक ग्रंथ से दूसरे ग्रंथ, एक खोज से दूसरी खोज, एक सूचना से दूसरी सूचना तक बढ़ते चले गये और पृष्ठ दर पृष्ठ लिखते गये. एक नया विशाल ग्रंथ तैयार हुआ और हिंदुस्तानीय ज्ञान परंपरा के इतिहास में एक बड़ा काम हो गया. ‘धर्मशास्त्र का इतिहास’ का पहला खंड 1930 में प्रकाशित हुआ. केवल हिंदुस्तान ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में पुरातन ज्ञान की नयी हलचल मच गयी. ‘धर्मशास्त्र का इतिहास’ के प्राक्कथन में काणे ने स्वयं लिखा है- ‘व्यवहार-मयूख के संस्करण के लिए सामग्री संकलित करते समय मेरे ध्यान में आया कि जिस प्रकार मैंने ‘साहित्य दर्पण’ के संस्करण में प्राक्कथन के रूप में अलंकार साहित्य का इतिहास, नामक एक प्रकरण लिखा है, उसी पद्धति पर व्यवहार-मयूख में भी एक प्रकरण संलग्न कर दूं, जो निश्चय ही धर्मशास्त्र के छात्रों के लिए पूर्ण लाभप्रद होगा. इस दृष्टि से जैसे-जैसे धर्मशास्त्र का अध्ययन करता गया, मुझे ऐसा दिख पड़ा कि सामग्री अत्यंत विस्तृत एवं विशिष्ट है, उसे एक संक्षिप्त परिचय में आबद्ध करने से उसका उचित निरूपण न हो सकेगा. साथ ही उसकी प्रचुरता के समुचित परिज्ञान, सामाजिक मान्यताओं के अध्ययन, तुलनात्मक विधि शास्त्र तथा अन्य विविध शास्त्रों के लिए उसकी जो महत्ता है, उसका भी अपेक्षित प्रतिपादन न हो सकेगा. अंत में मैंने यह निश्चय किया कि स्वतंत्र रूप से धर्मशास्त्र का एक इतिहास ही लिपिबद्ध करूं. आज धर्मशास्त्र का इतिहास एक ऐसी अनमोल थाती है, जिसमें वैदिक काल से आधुनिक काल तक के न केवल धर्म ग्रंथ बल्कि तमाम विधि-विधान, सामाजिक रीति-रिवाज का भी पर्याप्त विवरण है.’ काणे के धर्मशास्त्र के इतिहास के एक के बाद एक पांच खंड प्रकाशित हुए. वर्ष 1962 में पांचवां खंड आया. यह काम अद्भुत, उपयोगी और अतुलनीय है. बेहिचक कहना चाहिए कि काणे आज तक अकेले ऐसे ‘हिंदुस्तान रत्न’ हैं, जो शास्त्र चिंतन व संस्कृत को समर्पित रहे हैं. आज जब संस्कृत भाषा को लगातार उपेक्षा का शिकार होना पड़ रहा है, तब काणे को याद रखना बहुत जरूरी है. वर्ष 1930 में जब वे पचास वर्ष के थे, तब धर्मशास्त्र के इतिहास का पहला खंड आया और जब अंतिम खंड आया, तब 82 वर्ष के. उन्होंने अपना पूरा जीवन धर्मशास्त्र के अध्ययन में समर्पित कर दिया. इस ऐतिहासिक ग्रंथ के अतिरिक्त भी उनके अनेक ग्रंथ प्रकाशित हुए. उत्तररामचरित से लेकर कादंबरी, हर्षचरित, हिंदुओं के रीति-रिवाज तथा आधुनिक विधि और संस्कृत काव्यशास्त्र का इतिहास उनकी कृतियां हैं. उनकी पुस्तकों के बिना आज कोई भी पुस्तकालय पूरा नहीं हो सकता. उनके द्वारा रचा गया ज्ञानकोश अंग्रेजी, संस्कृत और मराठी भाषा में उपलब्ध है. काणे ने 18 अप्रैल, 1972 को शरीर त्याग दिया, पर जो अनमोल ज्ञान वे छोड़ गये हैं, उसका महत्व अपरिमित है. विद्वानों की दुनिया उन्हें भुला नहीं सकती. जब भी हिंदुस्तानीय संस्कृति को लेकर कोई विवाद उठता है, तो काणे की रचनाओं से निकाल कर ही उद्धरण दिये जाते हैं. उनकी कल्पना तार्किक थी. उन्होंने लिखा, ‘हिंदुस्तानीय संविधान हिंदुस्तानीय संस्कृति के अनुरूप नहीं है, क्योंकि लोगों को अधिकार तो दिये गये हैं, परंतु जिम्मेदारी नहीं दी गयी है.’ आज कौन उनकी इस बात से इनकार करेगा? हिंदुस्तान में लोगों को हरसंभव अधिकार मिले हुए हैं, परंतु लोग जिम्मेदारी उठाने को तैयार नहीं हैं, जिससे समाज में अनेक चुनौतियां खड़ी हो गयी हैं. हिंदुस्तान रत्न डॉ पांडुरंग वामन काणे की 142वीं जयंती पर उन्हें याद करना तभी सार्थक है, जब हम हिंदुस्तान और उसके हिंदुस्तान तत्व के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझें. The post जयंती विशेष : प्राच्य विद्याओं के विशारद थे हिंदुस्तान रत्न पीवी काणे appeared first on Naya Vichar.

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Operation Sindoor Air Strike: POK में आग बरसाने के बाद भारत को इजराइल का साथ! आतंकियों के खात्मे के लिए कही ये बड़ी बात

Operation Sindoor Air Strike: जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आंतकी हमले का बदला हिंदुस्तानीय सेना ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ (Operation Sindoor) के तहत लिया. सेना ने 9 आतंकी ठिकानों पर हवाई हमले किए. ऑपरेशन सिंदूर के तहत हिंदुस्तान द्वारा पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों पर की गई एयर स्ट्राइक को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समर्थन मिल रहा है. अमेरिका और इजराइल आदि देशों ने हिंदुस्तान की कार्रवाई पर प्रतिक्रियाएं दी हैं.  हाल ही में हुई थी बैठक (Operation Sindoor Air Strike in Hindi) मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इजराइल ने हिंदुस्तान की कार्रवाई को “आतंकवाद के खिलाफ जरूरी कदम” बताया है. हाल ही में हिंदुस्तान के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने इजराइल के राजदूत रूवेन अजर से मुलाकात की थी. यह बातचीत हिंदुस्तान और इजराइल के बीच आतंकवाद के खिलाफ मिलकर काम करने को लेकर हुई थी, खासकर उन हमलों को लेकर जो हिंदुस्तान की सीमा पार से आते हैं. बैठक के बाद डॉ. जयशंकर ने सोशल मीडिया पर बताया कि नई दिल्ली में इजराइली राजदूत के साथ बातचीत सकारात्मक रही. उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ हिंदुस्तान के साथ इजराइल के मजबूत समर्थन की सराहना की थी. यह भी पढ़ें- Operation Sindoor: लश्कर और जैश-ए-मोहम्मद के ठिकाने तबाह, मारा गया मसूद! एलओसी पर भी गोलाबारी (Operation Sindoor Air Strike) हमले के बाद पाकिस्तानी सेना ने जम्मू-कश्मीर में नियंत्रण रेखा (एलओसी) के पास अग्रिम पंक्ति के गांवों में भारी गोलाबारी की जिसमें तीन लोगों की मौत हो गई. सैन्य हमले ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत हिंदुस्तान ने किए जिससे पाकिस्तान सहम गया. यह भी पढ़ें- Operation Sindoor: हिंदुस्तान की कार्रवाई जिम्मेदाराना…अमेरिका में दूतावास ने क्या कहा? दोनों देशों की सेना हाई अलर्ट पर (Operation Sindoor Air Strike) रिपोर्ट्स के मुताबिक, हिंदुस्तान ने यह कार्रवाई जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में की. हिंदुस्तानीय खुफिया एजेंसियों की सटीक जानकारी के आधार पर एयरफोर्स ने जैश के ठिकानों को निशाना बनाते हुए उन्हें पूरी तरह तबाह कर दिया. इस ऑपरेशन का उद्देश्य सिर्फ बदला लेना नहीं, बल्कि पाकिस्तान की जमीन पर पल रहे आतंक के अड्डों को खत्म करना था. वहीं इस हमले के बाद पाकिस्तानी में अनिश्चितता का माहौल है. वहीं दोनों देशों की सेना हाई अलर्ट पर है. यह भी पढ़ें- Operation Sindoor: घर में घुसकर मारता है नया हिंदुस्तान…पाकिस्तान पर कार्रवाई के बाद दुनिया देख रही ताकत The post Operation Sindoor Air Strike: POK में आग बरसाने के बाद हिंदुस्तान को इजराइल का साथ! आतंकियों के खात्मे के लिए कही ये बड़ी बात appeared first on Naya Vichar.

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त्रिनिदाद में भारतवंशी कमला प्रसाद की जीत का अर्थ

हिंदुस्तान से दूर लघु हिंदुस्तान कहे जाने वाले टापू देश त्रिनिदाद और टोबैगो के आम चुनाव में कमला प्रसाद-बिसेसर के नेतृत्व वाली यूनाइटेड नेशनल कांग्रेस ने प्रचंड बहुमत हासिल किया है. चुनाव विगत 25 अप्रैल को हुए थे. इस जीत के बाद वह फिर से अपने देश की प्रधानमंत्री बन गयी हैं. उनकी इस उपलब्धि से न केवल त्रिनिदाद में, बल्कि हिंदुस्तान, विशेषकर बिहार के बक्सर में लोग खुश होंगे. कमला प्रसाद के पुरखे बक्सर के भेलपुर गांव से थे. कमला प्रसाद-बिसेसर इससे पहले 2010 से 2015 तक त्रिनिदाद और टोबैगो की प्रधानमंत्री थीं. ऐसे ही कुछ समय पहले तक कमला हैरिस अमेरिका की उपराष्ट्रपति थीं. कमला प्रसाद-बिसेसर की जीत को हिंदुस्तान-त्रिनिदाद संबंधों के लिए एक सकारात्मक संकेत के रूप में देखा जा रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कमला प्रसाद की जीत पर उन्हें बधाई दी है. कमला प्रसाद-बिसेसर ने त्रिनिदाद और टोबैगो की पहली स्त्री प्रधानमंत्री के रूप में (2010-2015) भी हिंदुस्तान के साथ द्विपक्षीय सांस्कृतिक, आर्थिक और कूटनीतिक संबंधों को मजबूत करने में मदद की थी. त्रिनिदाद में हिंदुस्तानीय मूल के लोग, जो देश की आबादी का एक बड़ा हिस्सा हैं, अपनी सांस्कृतिक पहचान को बनाये रखने के लिए दिवाली, होली जैसे उत्सवों और हिंदुस्तानीय सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन करते हैं. कमला प्रसाद ने इन आयोजनों में सक्रिय भागीदारी की और हिंदुस्तानीय संस्कृति को त्रिनिदाद की मुख्यधारा में एकीकृत करने के प्रयास किये. उनकी हिंदुस्तानीय जड़ों ने उन्हें हिंदुस्तानीय डायस्पोरा के बीच एक प्रतीकात्मक व्यक्तित्व बनाया. त्रिनिदाद और टोबैगो की नेतृत्व मुख्य रूप से दो प्रमुख दलों- पीपुल्स नेशनल मूवमेंट (पीएनएम) और यूनाइटेड नेशनल कांग्रेस ( यूएनसी) के इर्द-गिर्द घूमती है. वहां चुनाव अक्सर वित्तीय स्थिति, अपराध, भ्रष्टाचार, और सामाजिक कल्याण जैसे मुद्दों पर लड़े जाते हैं. जातीय पहचान भी एक महत्वपूर्ण कारक बनी हुई है, हालांकि समय के साथ इसमें बदलाव आया है. गौरतलब है कि कमला प्रसाद-बिसेसर के परदादा पंडित रामलखन मिश्रा बिहार के बक्सर जिले के इटाढ़ी प्रखंड के भेलपुर गांव से थे, जिन्हें 19वीं सदी में मजदूरी के लिए त्रिनिदाद और टोबैगो ले जाया गया था. तब हजारों हिंदुस्तानीयों को गिरमिटिया मजदूरों के रूप में कैरेबियाई देशों में भेजा गया था. रामलखन मिश्रा त्रिनिदाद में ही बस गये और उनकी संतानों ने वहां की सामाजिक और नेतृत्वक व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी. यहां यह याद किया जा सकता है कि कमला प्रसाद-बिसेसर ने त्रिनिदाद और टोबैगो की प्रधानमंत्री के तौर पर 2012 में हिंदुस्तान का दौरा किया था. तब अपने हिंदुस्तानीय मूल पर गर्व व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा था कि उनके पूर्वज हिंदुस्तान की संस्कृति और परंपरा से गहरे तौर पर जुड़े थे, और यह सांस्कृतिक विरासत उनके जीवन का अभिन्न हिस्सा है. बक्सर के भेलपुर गांव में आज भी उनका पैतृक घर मौजूद है. उस यात्रा के दौरान उन्होंने गांव के लोगों से भेंट की, अपने रिश्तेदारों से बातचीत की और एक सभा को संबोधित किया. उनके उस दौरे ने स्थानीय समुदाय में उत्साह पैदा किया और हिंदुस्तान-त्रिनिदाद संबंधों को प्रचारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी. मौजूदा पीढ़ी को शायद छेदी जगन के बारे में जानकारी न हो, जो 1961 में सुदूर कैरिबियाई टापू देश गुयाना के प्रधानमंत्री बन गये थे. गुयाना त्रिनिदाद का पड़ोसी देश है. उनके बाद तो गुयाना और त्रिनिदाद में हिंदुस्तानवंशी प्रधानमंत्री बनते ही रहे हैं. हिंदुस्तानवंशी ऋषि सुनक भी ब्रिटेन के प्रधानमंत्री रह चुके हैं. हिंदुस्तानीयों का नेतृत्व करने में कोई जवाब नहीं है. संसद का चुनाव चाहे कनाडा का हो, ब्रिटेन का हो या फिर किसी अन्य लोकतांत्रिक देश का, हिंदुस्तानीय उनमें अपना असर दिखाने से पीछे नहीं रहते. अगर यह बात न होती, तो लगभग 22 देशों की पार्लियामेंट में 182 हिंदुस्तानवंशी सांसद न होते. अपनी धरती से दूर जाकर हिंदुस्तानवंशी नेतृत्व तक ही सीमित नहीं रहे. उन्होंने स्पोर्ट्सों में भी बुलंदियों को छुआ. क्रिकेट की ही बात करें, तो सोनी रामाधीन की जादुई स्पिन गेंदबाजी के बाद कैरिबियाई देशों में रहने वाले नौजवानों को लगा कि वे स्पोर्ट्सों में अपनी प्रतिभा के बल पर आगे बढ़ सकते हैं. सोनी रामाधीन त्रिनिदाद से ही थे. रोहन कन्हाई, एल्विन कालीचरण, इंसान अली, शिव नारायण चंद्रपाल, राम नरेश सरवान आदि कितने ही हिंदुस्तानीय मूल के खिलाड़ी वेस्टइंडीज से स्पोर्ट्से और कइयों ने कप्तानी भी की. रामाधीन से हटकर बात करें, तो फिजी के हिंदुस्तानवंशी गोल्फर विजय सिंह दुनिया के चोटी के गोल्फ खिलाड़ी बने, तो फिजी के ही विकास धुरासू ने फ्रांस की फुटबॉल टीम से फीफा विश्व कप में हिस्सा लिया. हिंदुस्तान से बाहर बसा हरेक हिंदुस्तानवंशी हिंदुस्तान का ब्रांड एंबेसेडर है. जो सिलसिला छेदी जगन ने शुरू किया और जिसे मॉरीशस में शिवसागर रामगुलाम से लेकर अनिरुद्ध जगन्नाथ, त्रिनिदाद और टोबैगो में वासुदेव पांडे और कमला प्रसाद, सूरीनाम में चंद्रिका प्रसाद संतोखी, अमेरिका में कमला हैरिस और ब्रिटेन में सुनक ने आगे बढ़ाया, वह निरंतर चलता रहेगा.(ये लेखक के निजी विचार हैं.) The post त्रिनिदाद में हिंदुस्तानवंशी कमला प्रसाद की जीत का अर्थ appeared first on Naya Vichar.

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