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May 28, 2025

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ज्वेलरी दुकानदार का झोला लेकर बाइक से हुए फरार

मझिआंव. मझिआंव बाजार समिति परिसर स्थित अखिलेश सोनी की ज्वेलरी दुकान से दो लोगों ने 75 हजार रुपये नकद व जेवर समेत लगभग डेढ़ लाख रुपयों की संपत्ति चुरा ली. इसके बाद चोर वे फरार हो गये. भागते हुए चोर की तसवीर सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गयी है. इस संबंध में अखिलेश सोनी के पुत्र ने बताया कि घर से पिताजी झोला लेकर आये थे. वह झोला रखकर एक तरफ का शटर खोलकर दूसरी तरफ का शटर खोलने लगे. इसी दौरान पहले से घात लगाये चोर ने तेजी से उनका झोला उठाया और बाइक से भाग गया. बताया जाता है कि इसी ज्वेलरी दुकान में कुछ माह पहले चोर इसी तर्ज पर पैसे एवं जेवर का झोला उठाकर भाग गये थे. इसके बाद भी व्यवसायियों ने सबक नहीं लिया. तीन टीम बनाकर हुई चोर की तलाश : इस संबंध में पुलिस निरीक्षक सह थाना प्रभारी सुनील कुमार तिवारी ने बताया कि सीसीटीवी फुटेज के आधार पर चोरों की तलाश के लिए पुलिस पदाधिकारी का तीन टीम बनायी गयी है. इनमें एक टीम का नेतृत्व वह स्वयं कर रहे है. पुलिस चोरों को तलाश रही है. उन्होंने कहा कि एक टीम शाहपुर रोड, दूसरी टीम गोवावल क्षेत्र एवं तीसरे टीम में वह बेलचंपा व रेहला तक गये, लेकिन चोरों का कुछ पता नहीं चला है. डिस्क्लेमर: यह नया विचार समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे नया विचार डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है The post ज्वेलरी दुकानदार का झोला लेकर बाइक से हुए फरार appeared first on Naya Vichar.

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ब्वॉयफ्रेंड से बात करने से रोका तो पत्नी ने बंधक बनाकर पति को पिटवाया

: अहियापुर के एक गांव का रहने वाला है पति : आभूषण कारोबारी पति ने दर्ज करायी प्राथमिकी संवाददाता, मुजफ्फरपुर अहियापुर थाना क्षेत्र के एक गांव में एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है. जहां एक आभूषण कारोबारी की पत्नी ने अपने ब्वॉयफ्रेंड से बात करने से रोकने पर पति को बंधक बनाकर उसकी बेरहमी से पिटाई करवाई और फिर घर से नकदी व ज्वेलरी समेत पांच लाख रुपये की संपत्ति लेकर फरार हो गई है. आक्रोशित पत्नी ने मायके से अपने संबंधियों को बुलवाकर पति की हाथ- पैर बांधकर पिटाई करवाई. खून से लथपथ हो गया तो पड़ोसियों ने डायल 112 को सूचना दी. पुलिस ने हाथ- पैर की रस्सी खोलकर उसकी जान बचायी. पूरा मामला अहियापुर थाना क्षेत्र के एक गांव का है. पीड़ित पति आभूषण का कारोबारी है. उसकी पत्नी घर से नकदी व ज्वेलरी समेत पांच लाख का संपत्ति लेकर फरार हो गयी. पंचायत में कारोबारी ने मामला को सुलझाने की कोशिश किया. लेकिन, उसकी पत्नी समझने को तैयार नहीं हुई. इसके बाद पीड़ित कारोबारी ने अहियापुर थाने में अपनी पत्नी व उसके परिवार के दो सदस्यों को नामजद व अन्य अज्ञात को आरोपी बनाया है. पुलिस मामले की छानबीन में जुट गयी है. घटना बीते 11 मई की रात की है. पीड़ित पति, जो मूल रूप से मनियारी थाना क्षेत्र का रहने वाला है और वर्तमान में अहियापुर के एक गांव में घर बनाकर रहता है, उसने अपनी प्राथमिकी में बताया है कि उस रात उसकी पत्नी किसी दूसरे व्यक्ति से मोबाइल पर बात कर रही थी. जब उसने पत्नी को रोका तो विवाद बढ़ गया. इसके बाद पत्नी ने सीतामढ़ी के नानपुर थाना क्षेत्र से अपने संबंधियों को बुला लिया. इन लोगों ने उसे अकेला पाकर रस्सी से हाथ-पैर बांध दिया और जमकर मारपीट की, यहां तक कि उसके सिर पर भी हमला बोल दिया. डिस्क्लेमर: यह नया विचार समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे नया विचार डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है The post ब्वॉयफ्रेंड से बात करने से रोका तो पत्नी ने बंधक बनाकर पति को पिटवाया appeared first on Naya Vichar.

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शारीरिक दक्षता परीक्षा के चौथे दिन 119 अभ्यर्थी सफल

37-प्रतिनिधि, अररिया अररिया कॉलेज स्टेडियम में गृह रक्षा वाहिनी के रिक्त पदों पर नामांकन को लेकर जारी शारीरिक दक्षता परीक्षा के चौथे दिन निर्धारित 1400 अभ्यर्थियों में 991 अभ्यर्थियों ने भाग लिया. इसमें 1600 मीटर की दौड़ सहित ऊंची कूद व सीना जांच में कुल 119 अभ्यर्थी सफल हुए. चिकित्सीय परीक्षण में भी सभी 119 अभ्यर्थी फिट घोषित किये गये. बिहार गृह रक्षा वाहिनी के जिला समादेष्टा ने बताया कि स्वच्छ व निष्पक्ष माहौल में परीक्षा का आयोजन किया जा रहा है. बीते 25 मई से जारी परीक्षा में कुल 11102 अभ्यर्थियों के आवेदन प्राप्त हुए हैं. इसमें 1931 स्त्री व 9171 पुरुष आवेदक शामिल हैं. पुरुष अभ्यर्थियों के लिये शारीरिक दक्षता परीक्षा बुधवार के अतिरिक्त 29 मई, 30 मई, 31 मई व 02 जून को आयोजित की जायेगी. वहीं आगामी 03 व 04 जून को स्त्री अभ्यर्थियों के लिए शारीरिक दक्षता परीक्षा का आयोजन किया जायेगा. डिस्क्लेमर: यह नया विचार समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे नया विचार डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है The post शारीरिक दक्षता परीक्षा के चौथे दिन 119 अभ्यर्थी सफल appeared first on Naya Vichar.

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मशाल खेल प्रतियोगिता में बच्चों ने किया उत्कृष्ट प्रदर्शन

किशनगंज. जिले के दिघलबैंक प्रखंड उच्च विद्यालय गंधर्वडांगा में संकुल स्तरीय मशाल स्पोर्ट्सकूद प्रतियोगिता का आयोजन किया गया. इस अवसर पर अपने संबोधन में संकुल संचालक सह प्रधानाध्यापक अभिराम कुमार ने कहा कि स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क का वास होता है. इसलिए पढ़ाई के साथ-साथ स्पोर्ट्सकूद भी विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए आवश्यक है. उन्होंने कहा कि प्रशासन की ओर से बच्चों में स्पोर्ट्स भावना को प्रोत्साहित करने के लिए विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जा रहा है. सीआरसी से संबंधित सभी स्कूलों के छात्र-छात्राओं ने मशाल स्पोर्ट्स प्रतियोगिता में भाग लिया तथा उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्र,छात्राओं को सम्मानित किया गया इस अवसर पर शिक्षक दीपक झा, निर्मल रॉय,कुमार सौरव,जानकी कुमारी,असलम अनवर सहित सभी शिक्षक, शिक्षिकाएं उपस्थित थे. डिस्क्लेमर: यह नया विचार समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे नया विचार डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है The post मशाल स्पोर्ट्स प्रतियोगिता में बच्चों ने किया उत्कृष्ट प्रदर्शन appeared first on Naya Vichar.

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संकुल स्तर पर मशाल खेल प्रतियोगिता का आयोजन

किशनगंज. जिले के पोठिया प्रखंड के संकुल संसाधन केंद्र उच्च विद्यालय शीतलपुर में मशाल स्पोर्ट्स प्रतियोगिता का आयोजन मध्य विद्यालय पूरबडांगी परिसर में आयोजित की गयी. जिसमें उच्च विद्यालय शीतलपुर,मध्य विद्यालय शीतलपुर, मध्य विद्यालय खजूरबाड़ी, मध्य विद्यालय पूरबडांगी के बच्चों ने एथलेटिक्स, कबड्डी, फुटबॉल, साइक्लिंग और वॉलीबॉल स्पोर्ट्स में भाग लिया. इस अवसर पर सीआरसी संचालक सह मध्य विद्यालय के प्रधानाध्यापक मो महबूब अहमद ने कहा कि स्पोर्ट्स जीवन का अभिन्न अंग है, जो शारीरिक और मानसिक विकास में सहायक है. हार-जीत से अधिक स्पोर्ट्स भावना महत्वपूर्ण है. स्पोर्ट्स हमें दूसरों के साथ बातचीत करने और टीम में काम करने के तरीके सिखाते हैं. यह हमें नेतृत्व कौशल, आत्मविश्वास और सहयोग की भावना विकसित करने में भी मदद करते हैं. जबकि सीआरसीसी बृजेंद्र पोद्दार ने इस अवसर पर कहा कि स्पोर्ट्स से शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य दोनों के लिए महत्वपूर्ण है. यह हमें स्वस्थ रखने, दिमाग की क्षमता को विकसित करने, सामाजिक कौशल विकसित करने और तनाव दूर करने में मदद करता है. बेहतर प्रदर्शन करने वालों छात्र,छात्राओं को सर्टिफिकेट और मेडल देकर सम्मानित किया गया. इस अवसर पर प्रधानाध्यापक सरोज कुमार, अनंत कुमार मंडल, बिपिन कुमार, शैलेंद्र कुमार चौरसिया, सोनी कुमारी, बिपिन कुमार, अबू फैज मो आदिल, मो फिरोज, प्रदीप घोष, प्रतिमा साहा, मधुलिना प्रशासन, तबस्सुम नाज, पूजा कुमारी, रोली कुमारी, मनीषा कुमारी, मो मारूफ रियाज, प्रभास रामदास, साबिहा नाज, राखी पॉल, जय गुण निशा, मंटू खालको और विजय कुमार साह सहित कई अन्य शिक्षक शिक्षिकाएं उपस्थित थे. डिस्क्लेमर: यह नया विचार समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे नया विचार डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है The post संकुल स्तर पर मशाल स्पोर्ट्स प्रतियोगिता का आयोजन appeared first on Naya Vichar.

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महिलाओं को दी योजनाओं की जानकारी

13-प्रतिनिधि, नरपतगंज नरपतगंज नगर पंचायत क्षेत्र के मधुरा पश्चिमी वार्ड संख्या 04 आदिवासी टोला में मुख्यमंत्री द्वारा आयोजित स्त्रीओं के आर्थिक व सामाजिक सशक्तिकरण के लिए स्त्री संवाद कार्यक्रम का आयोजन नारी शक्ति किया गया. कार्यक्रम में सैकड़ों की संख्या में क्षेत्र की स्त्रीओं ने भाग लिया. जहां बाल विकास परियोजना पदाधिकारी अहमद रजा खां ने मौके पर मौजूद स्त्रीओं को स्त्री संवाद के दौरान बिहार प्रशासन द्वारा स्त्रीओं के हित में चलाया जा रहा है. विभिन्न योजनाओं व स्त्रीओं के आर्थिक व सामाजिक शक्ति करण के बारे में विस्तृत जानकारी दी. साथ ही स्त्रीओं से आसपास के लोगों को योजनाओं के बारे में जागरूक करने की भी अपील की. मौके पर जीविका के सीसी उमेश कुमार, अध्यक्ष गीता देवी, सीएम पारो देवी, सीआरपी उषा देवी, सीएमआरपी चुनमुन देवी, बीके सुरेश पासवान,मीणा मरांडी ,ललिता मुरमुर, शैली मुरमुर, सुनीता मुरमुर, बसंती, सोरेन के अलावा दर्जनों की संख्या में जीविका दीदी व क्षेत्र के स्त्रीएं मौजूद थी. डिस्क्लेमर: यह नया विचार समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे नया विचार डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है The post स्त्रीओं को दी योजनाओं की जानकारी appeared first on Naya Vichar.

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हिंडनबर्ग मामले में Madhabi Puri Buch को मिला क्लीन चिट, लोकपाल ने याचिका की खारिज

Hindenburg Research: पूर्व सेबी प्रमुख माधबी पुरी बुच को हिंडनबर्ग रिसर्च रिपोर्ट के आधार पर लगाए गए सभी आरोपों से लोकपाल ने क्लीन चिट दे दी है. लोकपाल ने अपने आदेश में कहा कि शिकायतों में लगाए गए आरोप केवल धारणाओं पर आधारित हैं और उनके पक्ष में कोई ठोस प्रमाण नहीं है. इस फैसले से बुच को बड़ी राहत मिली है और सेबी की साख पर उठे सवालों पर भी विराम लगा है. हिंडनबर्ग रिपोर्ट बना था आधार पिछले साल तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा समेत अन्य शिकायतकर्ताओं ने लोकपाल के समक्ष शिकायत दर्ज की थी. इस शिकायत का मुख्य आधार हिंडनबर्ग रिसर्च की वह रिपोर्ट थी जो 10 अगस्त, 2024 को प्रकाशित हुई थी. इस रिपोर्ट में दावा किया गया था कि माधबी पुरी बुच और उनके पति की अस्पष्ट विदेशी फंड में हिस्सेदारी थी, जिसका कथित तौर पर उपयोग अदाणी समूह से जुड़े कोष की हेराफेरी में किया गया. लोकपाल ने कहा – आरोप सिर्फ धारणा पर आधारित लोकपाल की छह सदस्यीय पीठ ने अपने निर्णय में कहा कि शिकायतें सिर्फ अनुमान और संदेह पर आधारित हैं, जिसकी अध्यक्षता न्यायमूर्ति ए.एम. खानविलकर कर रहे थे. आदेश में स्पष्ट किया गया कि इस रिपोर्ट के अलावा कोई स्वतंत्र और प्रमाणिक साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया, जिससे आरोपों की पुष्टि हो सके. मौखिक सुनवाई और जवाब दाखिल लोकपाल ने 8 नवंबर 2024 को शिकायतकर्ताओं की याचिका पर कार्यवाही शुरू की थी और माधबी बुच से स्पष्टीकरण मांगा था. उन्हें 4 सप्ताह के भीतर अपना जवाब देने को कहा गया था. इसके बाद बुच ने 7 दिसंबर को हलफनामे के माध्यम से जवाब दाखिल किया. इसमें उन्होंने आरोपों को बेबुनियाद बताया और उनके पीछे की मंशा पर सवाल उठाए. 19 दिसंबर को लोकपाल ने शिकायतकर्ताओं और बुच को मौखिक सुनवाई का अवसर दिया था. कोई कार्रवाई नहीं, मामला बंद लोकपाल ने माना कि शिकायतकर्ता आरोपों को हिंडनबर्ग रिपोर्ट से अलग साबित नहीं कर सके. उन्होंने जो अन्य तर्क दिए, वे भी प्रमाणिक नहीं पाए गए. इसके आधार पर लोकपाल ने मामले को समाप्त करते हुए सभी शिकायतों को खारिज कर दिया और किसी भी आपराधिक या प्रशासनिक कार्रवाई की आवश्यकता नहीं बताई. बुच का कार्यकाल और सेबी से विदाई माधबी पुरी बुच ने 2 मार्च 2022 को सेबी की चेयरपर्सन के रूप में कार्यभार संभाला था और वह 28 फरवरी 2025 को अपने पद से सेवानिवृत्त हुईं. हिंडनबर्ग विवाद के चलते उनके कार्यकाल के अंतिम समय में कुछ गंभीर आरोपों की आंच आई थी, लेकिन अब लोकपाल की जांच के बाद उन्हें पूरी तरह से क्लीन चिट मिल गई है. इसे भी पढ़ें: PIB Fact Chack: केंद्रीय कर्मचारियों की रिटायरमेंट आयु में 2 साल की बढ़ोतरी, जानें दावे की असलियत हिंडनबर्ग रिसर्च का अंत हिंडनबर्ग रिसर्च के संस्थापक ने जनवरी 2025 में कंपनी के बंद होने की घोषणा कर दी थी. इस रिपोर्टिंग फर्म की कई रिपोर्ट्स ने वैश्विक स्तर पर हलचल मचाई थी, लेकिन आलोचनाओं और विवादों के चलते उसका अंत हो गया. यह फैसला बुच के पेशेवर जीवन पर लगे धब्बों को हटाने का काम करेगा और सार्वजनिक सेवा क्षेत्र में निष्पक्षता की मिसाल पेश करेगा. इसे भी पढ़ें: LIC शेयर में जबरदस्त तेजी, मार्केट कैप में 45,000 करोड़ रुपये से अधिक की बढ़ोतरी The post हिंडनबर्ग मामले में Madhabi Puri Buch को मिला क्लीन चिट, लोकपाल ने याचिका की खारिज appeared first on Naya Vichar.

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नक्सल विरोधी रणनीति का असर दिख रहा है

Anti Naxal Operation : नक्सलवाद के खिलाफ संघर्ष में सुरक्षा बलों ने पिछले दिनों छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले के अबूझमाड़ के जंगल में सीपीआइ (माओवादी) के महासचिव और सर्वोच्च कमांडर नंबाला केशव राव उर्फ बासवराजू को मार गिराया. उसके साथ 26 और नक्सली मारे गये. नक्सलवाद के उभार के बाद से यह पहला मौका है, जब महासचिव स्तर का व्यक्ति मारा गया हो. बासवराजू को जिस ऑपरेशन के जरिये केंद्रीय रिजर्व पुलिस और छत्तीसगढ़ पुलिस ने मार गिराया, उसे सुरक्षा बलों ने ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट नाम दिया है. छत्तीसगढ़, तेलंगाना और महाराष्ट्र तक फैले जंगलों में जारी इस ऑपरेशन के तहत जहां 54 नक्सली गिरफ्तार किये जा चुके हैं, वहीं 84 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है. मोदी प्रशासन ने 2014 में जब सत्ता संभाली थी, तब देश के 70 जिलों में नक्सलवाद का बड़ा असर था. भाजपा ने 2014 के चुनाव घोषणा पत्र में नक्सलवाद पर लगाम को अपने प्रमुख कार्यक्रम में शामिल किया था. उसके एक साल पहले ही छत्तीसगढ़ की झीरम घाटी में राज्य कांग्रेस के तकरीबन समूचे नेतृत्व को नक्सलियों ने निशाना बनाया था. उससे उपजा क्षोभ ताजा था. गौर से देखें, तो पायेंगे कि नक्सलवाद का प्रभाव उन इलाकों में ज्यादा तेजी से बढ़ा, जहां जंगल थे, जहां आदिवासी समुदाय की आबादी ज्यादा थी और जहां शिक्षा का प्रसार कम था. यह सच है कि आधुनिक सभ्यता की सहयोगी आधुनिक व्यवस्था की निगाह जल-जंगल आदि प्राकृतिक संसाधनों के जरिये मुनाफाखोरी पर रही है. इस प्रवृत्ति के खिलाफ स्थानीय लोगों में प्रचार के जरिये नक्सलवाद ने अपनी गहरी पैठ बनायी. नक्सलवाद बुनियादी रूप से आधुनिक चीन के संस्थापक माओ त्से तुंग की विचारधारा से प्रेरित है, जिनकी मान्यता थी कि सत्ता बारूद से निकलती है. नक्सलवादी या माओवादी सोच के मूल में हिंसा की अवधारणा है, जिसके अनुसार बदलाव हिंसा के जरिये ही आता है. माओवाद अगर वैचारिकी तक सीमित रहता, तो गनीमत थी. लेकिन माओवादी कमांडरों ने बाद में अपने प्रभाव वाले इलाकों में ताकत का इस्तेमाल वसूली और मोटी कमाई के लिए करना शुरू कर दिया. तब से उनके प्रति समर्थन घटने लगा. अपने प्रभाव क्षेत्र में वे अक्सर विकास के आधुनिक माध्यमों और प्रतीकों, मसलन- रेलवे लाइन, स्टेशन, डाकघर, स्कूल आदि को निशाना बनाते रहे. धीरे-धीरे उनके इस कृत्य को स्थानीय निवासी विकास विरोधी मानने लगे. जैसे-जैसे स्थानीय लोगों की समझ बढ़ी, नक्सलियों का आधार कमजोर होता गया. उनके द्वारा किये गये नरसंहारों ने भी उनका आधार कमजोर करने में बड़ी भूमिका निभायी. केंद्र की मोदी प्रशासन माओवादी हिंसा को आंतरिक सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा मानती रही है. वैसे प्रशासन को पता था कि नक्सलियों पर ऐसी कार्रवाई का एक बड़ा बौद्धिक वर्ग विरोध करेगा. इसलिए नक्सली हिंसा पर लगाम के लिए दोतरफा कार्रवाई शुरू की गयी. एक तरफ सुरक्षा बलों के बीच तालमेल बढ़ाने और नक्सल विरोधी खुफिया तंत्र को मजबूत बनाने पर जोर दिया गया, वहीं समावेशी विकास का पहिया तेजी से दौड़ाने की कोशिश की गयी. इसमें सामुदायिक भागीदारी को भी बढ़ावा दिया गया. इससे माओवादी हिंसा में कमी आयी. लोगों में भय का माहौल कम हुआ. इसके साथ ही माओवादी उग्रवाद से प्रभावित कई जिलों को मुख्यधारा में शामिल करने में तेजी आयी. नक्सलियों के आत्मसमर्पण और उनके पुनर्वास पर जोर दिया गया. हिंसा छोड़कर मुख्यधारा में शामिल होने और सामान्य जिंदगी बिताने के लिए नक्सलियों को प्रशासनी स्तर पर मदद दी जाने लगी. इसके साथ ही प्रशासन की ओर से बुनियादी ढांचे की कमी दूर करने के लिए नक्सल प्रभावित जिलों के लिए विशेष योजना के तहत विशेष केंद्रीय सहायता दी जा रही है. इसकी वजह से पिछले 10 वर्षों के दौरान, 8,000 से अधिक नक्सलियों ने हिंसा का रास्ता छोड़ दिया है. नक्सलियों के खिलाफ ज्यादा सटीक कार्रवाई के कारण अब खूंखार नक्सली या तो मारे जा रहे हैं या फिर समर्पण कर रहे हैं, वहीं जनजातीय इलाकों में नयी सड़कें और रेल लाइनें बनायी जा रही हैं. माओवाद विरोधी कार्रवाई की कमान संभालने वाले केंद्रीय बलों के अधिकारियों का मानना है कि मौजूदा प्रशासन ने उनके लिए मुफीद माहौल मुहैया कराया है. छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल प्रशासन की हार के बाद सुरक्षा बलों के कुछ अधिकारियों का मानना था कि नयी प्रशासन की नीति बदलेगी. इस कारण स्थानीय पुलिस और प्रशासन माओवादी हिंसा के खिलाफ उनके कदमों के प्रति सहयोगी रुख रखेगा. नक्सलवाद पर नकेल के उपायों का असर ही कहा जायेगा कि 2014 में नक्सल प्रभावित जिलों की संख्या 70 थी, जो अब घटकर 38 रह गयी है. नक्सलवाद खत्म हो, विकास की गाड़ी दौड़ती रहे और जनजातीय समूह के लोगों को भी विकास में भागीदार बनाया जाये, इससे शायद ही किसी को इनकार होगा. लेकिन व्यवस्था को यह भी देखना होगा कि फिर ऐसे हालात न बनें, जिससे स्थानीय निवासियों को बरगलाना आसान हो और वे हथियार उठाने के लिए मजबूर हों.(ये लेखक के निजी विचार हैं.) The post नक्सल विरोधी रणनीति का असर दिख रहा है appeared first on Naya Vichar.

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ब्रेड के रंग से न हो जाएं गुमराह! जानिए असली और नकली ब्राउन ब्रेड में फर्क

Brown Bread Benefits, Original And Duplicate Brown Bread: जल्दबाजी में लोगों के ब्रेकफास्ट का विकल्प ब्राउन ब्रेड ही होता है. इसकी सबसे बड़ी वजह होती है कि यह व्हाइट ब्रेड की अपेक्षा ज्यादा हेल्दी होता है. लेकिन सवाल है कि क्या हर ब्राउन ब्रेड सेहतमंद ही होता है? क्योंकि सिर्फ ब्राउन दिखना ही उनके असली होने का प्रमाण नहीं है. विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर ब्राउन ब्रेड का सेवन गलत तरीके से किया जाए, तो यह फायदे की जगह नुकसान भी पहुंचा सकती है. आइए जानते हैं ब्राउन ब्रेड खाते समय किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है लेबल जरूर पढ़ें ब्राउन ब्रेड खरीदते वक्त सिर्फ उसके रंग या नाम पर न जाएं. बहुत-सी कंपनियां ब्रेड को ब्राउन रंग देने के लिए केवल कलरिंग एजेंट का इस्तेमाल करती हैं, जबकि उसमें रिफाइंड मैदा ही होता है. इसलिए ब्रेड का पैकेट ध्यान से पढ़ें. जिसमें “100% Wheat” या “Whole Grain” लिखा हो उसे ही खरीदें. Also Read: Baby Names: दो अक्षर के स्टाइलिश बेबी नेम्स, अपने शिशु के लिए जरूर चुनें अधिक मात्रा में न खाएं भले ही ब्राउन ब्रेड व्हाइट ब्रेड की तुलना में फाइबर से भरपूर होती है, लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि इसे आप कितना भी खा सकते हैं. अत्यधिक मात्रा में ब्रेड खाने से शरीर में कार्बोहाइड्रेट्स की अधिकता हो सकती है, जिससे वजन, ब्लड शुगर बढ़ने के साथ साथ गैस की समस्या हो सकती है. असली और नकली ब्राउन ब्रेड में फर्क करें सिर्फ ब्रेड का रंग भूरा होने से वो “ब्राउन ब्रेड” नहीं हो जाता. असली ब्राउन ब्रेड गेहूं से बनती है और इसमें मैदे की मात्रा बहुत कम या नहीं के बराबर होती है. नकली ब्राउन ब्रेड में अक्सर ब्राउन शुगर, कलरिंग एजेंट और मैदा होता है, जिससे सेहत को नुकसान हो सकता है. ब्रेड को संतुलित डाइट में शामिल करें ब्रेड को हमेशा ताजे फल, सब्जियां, अंडे या पीनट बटर के साथ ही खाना चाहिए ताकि शरीर को आवश्यक पोषक तत्व मिल सकें. सिर्फ ब्रेड पर निर्भर रहना पोषण की कमी का कारण बन सकता है. डायबिटीज और वजन बढ़ने वालों के लिए नहीं है ब्रेड फायदेमंद डायबिटीज के मरीजों को ब्राउन ब्रेड का सेवन भी सोच-समझकर करना चाहिए. ग्लाइसेमिक इंडेक्स अधिक होने के कारण यह ब्लड शुगर लेवल को प्रभावित कर सकती है. इसके अलावा जो लोग वजन कम करना चाहते हैं, उन्हें भी ब्रेड सीमित मात्रा में खाना चाहिए. बिना प्रिजर्वेटिव्स वाली ब्रेड चुनें ब्रेड में प्रिजर्वेटिव्स और ऐडेड शुगर का इस्तेमाल आम बात है. कोशिश करें कि कम से कम प्रिजर्वेटिव्स वाली ब्रेड का चुनाव करें या फिर घर पर ही होल व्हीट आटे से ब्रेड बनाएं. Also Read: पहनना है कुछ अलग तो ट्राय करें सिगरेट पैंट, सलवार और प्लाजो को भूल जाएंगे The post ब्रेड के रंग से न हो जाएं गुमराह! जानिए असली और नकली ब्राउन ब्रेड में फर्क appeared first on Naya Vichar.

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सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड की मुख्य सचिव और JSSC के सचिव को जारी किया नोटिस, जतायी नाराजगी

रांची, राणा प्रताप-सुप्रीम कोर्ट ने अवमानना याचिका पर सुनवाई के दौरान झारखंड प्रारंभिक विद्यालय प्रशिक्षित सहायक आचार्य संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा-2023 के रिजल्ट प्रकाशित करने में देरी को लेकर नाराजगी जतायी है. जस्टिस जेके महेश्वरी और जस्टिस अरविंद कुमार की पीठ ने मामले में झारखंड की मुख्य सचिव और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) के सचिव को नोटिस जारी किया है. इस मामले की अगली सुनवाई जुलाई के तीसरे सप्ताह में होगी. आदेश का पालन नहीं हुआ तो अवमानना की होगी कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि एक माह के अंदर अनुपालन प्रतिवेदन दायर किया जाए. इस दौरान यदि आदेश का पालन नहीं होता है तो जिम्मेवार अधिकारी के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की जाएगी. इससे पहले याचिकाकर्ता की ओर से सुप्रीम कोर्ट के वरीय अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे ने पैरवी की. उन्होंने पीठ को बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने एसएलपी में 30 जनवरी 2025 को आदेश पारित किया था तथा सहायक आचार्य संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा का रिजल्ट जल्द प्रकाशित करने का आदेश दिया था, लेकिन अब तक रिजल्ट का प्रकाशन नहीं किया गया है. ये भी पढ़ें: झारखंड हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस MS रामचंद्र राव का तबादला, इनकी जगह लेंगे सीनियर जस्टिस तरलोक सिंह चौहान अवमानना याचिका दायर कर आदेश का अनुपालन कराने की मांग याचिकाकर्ता परिमल कुमार ने अवमानना याचिका दायर कर आदेश का अनुपालन कराने की मांग की है. जेएसएससी ने वर्ष 2023 में झारखंड के प्रारंभिक विद्यालयों में 26001 प्रशिक्षित सहायक आचार्यों की नियुक्ति के लिए प्रक्रिया शुरू की थी. ये भी पढ़ें: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू देवघर एम्स के पहले दीक्षांत समारोह में करेंगी शिरकत, राष्ट्रपति भवन से मिली स्वीकृति ये भी पढ़ें: 16वें वित्त आयोग की टीम के समक्ष रखें झारखंड के विकास का रोडमैप, सीएम हेमंत सोरेन का अफसरों को निर्देश ये भी पढ़ें: झारखंड शराब घोटाले में अरेस्ट IAS विनय चौबे और गजेंद्र सिंह से पूछताछ के लिए ACB को मिली 2 दिनों की रिमांड The post सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड की मुख्य सचिव और JSSC के सचिव को जारी किया नोटिस, जतायी नाराजगी appeared first on Naya Vichar.

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