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June 5, 2025

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Gaya News: अब गया में इस जगह से भी बुक कर सकेंगे रेल टिकट, लाखों लोगों को होगा फायदा

Gaya News: गया जी शहरवासियों के लिए एक राहत भरी समाचार है. अब उन्हें रेलवे टिकट खरीदने के लिए स्टेशन पर लंबी कतारों में खड़ा नहीं होना पड़ेगा, क्योंकि इस वर्ष गया प्रधान डाकघर में रेलवे टिकट काउंटर खोले जाने की योजना पर तेजी से काम शुरू होने वाला है. डाक विभाग के अधिकारियों के अनुसार, रेलवे और डाक विभाग के बीच हुए समझौते के तहत यह सुविधा शुरू की जायेगी. पहले चरण में टिकारी और जहानाबाद के घोसी डाकघरों में यह सेवा शुरू की जा चुकी है. अब दूसरे चरण में गया प्रधान डाकघर को शामिल किया गया है. रेलवे स्टेशन पर भीड़ से मिलेगी राहत गया रेलवे स्टेशन पर टिकट काउंटरों पर अक्सर लंबी कतारें देखी जाती हैं, जिससे यात्रियों को काफी परेशानी होती है. ऐसे में प्रधान डाकघर में टिकट काउंटर खुलने से यात्रियों को विकल्प मिलेगा और स्टेशन पर भीड़ भी कम होगी. डाकघर अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल वरीय स्तर से आधिकारिक पत्र नहीं मिला है, लेकिन आंतरिक स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी गयी हैं. सभी आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद टिकट काउंटर चालू कर दिया जायेगा. बिहार की ताजा समाचारों के लिए क्लिक करें आसपास के लोगों को होगा सीधा लाभ इस कदम से रेलवे को भी राजस्व में वृद्धि होने की संभावना है. यह सेवा शहरवासियों के लिए एक नयी सुविधा के रूप में काम करेगी. लोग अपने नजदीकी डाकघर से ही आसानी से रेल टिकट खरीद सकेंगे, जिससे समय और मेहनत दोनों की बचत होगी. यह सुविधा शुरू होने के साथ ही रेलवे और डाक विभाग की साझा सेवा प्रणाली को और मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. इसे भी पढ़ें: बिहार से गुजरेगी एक और वंदे हिंदुस्तान ट्रेन, हजार किलोमीटर से ज्यादा का सफर महज इतने देर में होगा पूरा The post Gaya News: अब गया में इस जगह से भी बुक कर सकेंगे रेल टिकट, लाखों लोगों को होगा फायदा appeared first on Naya Vichar.

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Muzaffarpur News: कर्मभूमि एक्सप्रेस से 24 बच्चे मानव तस्करों के चंगुल से बचाए गए, 5 गिरफ्तार, क्या दिया गया था लालच

Muzaffarpur News: कर्मभूमि एक्सप्रेस से 24 बच्चों को मानव तस्करों के चंगुल से मुक्त कराते हुए, 5 तस्करों को गिरफ्तार किया गया है. आरपीएफ, जीआरपी व बचपन बचाओ आंदोलन की संयुक्त टीम के अभियान के तहत बड़ी सफलता मिली है. मानव तस्कर इन बच्चों को पंजाब के अलग-अलग शहरों में मजदूरी कराने के लिए ले जा रहे थे. बीते दिनों बुधवार को शाम लगभग 6:50 बजे, जब ट्रेन नारायणपुर अनंत स्टेशन से गुजर रही थी, तो सामान्य कोच में कुछ डरे-सहमे शिशु देखे गए. ऑपरेशन में कौन-कौन रहे शामिल खुफिया विभाग के अधिकारियों ने पहले भी कर्मभूमि एक्सप्रेस में मानव तस्करी को लेकर सूचना दिया था. अभियान में आरपीएफ इंस्पेक्टर मनीष कुमार और जीआरपी थानाध्यक्ष रंजीत कुमार के नेतृत्व में राजेंद्र कुमार सिंह, आनंद कुमार, सूरज पाण्डेय, रितेश कुमार, लालबाबू खान, रंजीत पासवान, बचपन बचाओ आंदोलन के सहायक परियोजना अधिकारी जय मिश्रा टीम में शामिल थे. पकड़े गए पांचों मानव तस्कर विलास कुमार, फलका, कटिहार, कटिहार और पूर्णिया से कुल 6 बच्चों को जालंधर की मक्का फैक्ट्री में ले जा रहा था. अविनाश हेमब्रम, दालकोला, पश्चिम बंगाल, 2 बच्चों को लुधियाना में मजदूरी के लिए ले जा रहा था. मनोज केवट, आजमनगर, कटिहार, कटिहार और सहरसा से 7 बच्चों में से 5 को अंबाला और 2 को जालंधर ले जा रहा था. तनवीर कुमार, गंगौर, खगड़िया, खगड़िया से 6 बच्चों में से 3 को अंबाला और 2 को लुधियाना ले जा रहा था. मनीष कुमार, हसनपुर, समस्तीपुर, समस्तीपुर से 3 बच्चों में से 2 को जालंधर और 1 को अमृतसर के होटलों में मजदूरी के लिए ले जा रहा था. बिहार की ताजा समाचारों के लिए क्लिक करें बच्चों को दस से 12 हजार प्रति माह का दिया लालच आरपीएफ के अनुसार पूछताछ में इन तस्करों ने बताया कि कि वे बच्चों को ठेकेदारी के तौर पर पंजाब के विभिन्न शहरों में स्थित फैक्ट्रियों और होटलों में मजदूरी कराने के लिए ले जा रहे थे. प्रत्येक शिशु को 10 से 12 हजार रुपये प्रति माह का लालच दिया गया था. बच्चों के नाम और पते का सत्यापन करने के बाद, सभी पांचों तस्करों की तलाशी ली गयी. लिखित शिकायत के बाद आगे की कार्रवाई के लिए मामले को जीआरपी को सौंप दिया गया. इसे भी पढ़ें: बिहार से गुजरेगी एक और वंदे हिंदुस्तान ट्रेन, हजार किलोमीटर से ज्यादा का सफर महज इतने देर में होगा पूरा The post Muzaffarpur News: कर्मभूमि एक्सप्रेस से 24 शिशु मानव तस्करों के चंगुल से बचाए गए, 5 गिरफ्तार, क्या दिया गया था लालच appeared first on Naya Vichar.

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महुआ मोइत्रा के पति पिनाकी मिश्रा के पास कितनी है संपत्ति, कहां से होती है इतनी आमदनी?

Pinaki Mishra Net Worth: तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा से विवाह के बाद बीजू जनता दल (बीजेडी) के पूर्व सांसद और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील पिनाकी मिश्रा एक बार फिर चर्चा में आ गए हैं. सोशल मीडिया पर वायरल हुई उनकी तस्वीरों ने लोगों की उत्सुकता को और बढ़ा दिया है कि आखिर उनकी संपत्ति और आमदनी के स्रोत क्या हैं? आइए, इसके बारे में विस्तार जानते हैं. पिनाकी मिश्रा की कुल संपत्ति पिनाकी मिश्रा की कुल संपत्ति का आकलन मुख्य रूप से उनके 2019 के लोकसभा चुनावी हलफनामे पर आधारित है. इस हलफनामे के अनुसार, 2019 में उनकी कुल संपत्ति लगभग 117.47 करोड़ रुपये थी. चल संपत्ति: 89.87 करोड़ रुपये अचल संपत्ति: 27.60 करोड़ रुपये देयता: 2.19 करोड़ रुपये हालांकि 2014 के हलफनामे में यह संपत्ति 137 करोड़ रुपये तक बताई गई थी, जिससे स्पष्ट है कि समय के साथ इसमें उतार-चढ़ाव आया. पिनाकी मिश्रा की अचल संपत्ति भुवनेश्वर में आवासीय संपत्ति: 10 करोड़ रुपये से अधिक दिल्ली के जोरबाग में घर: 9 करोड़ रुपये से अधिक ये संपत्तियां उनकी पारिवारिक और व्यक्तिगत परिसंपत्तियों का हिस्सा हैं. पिनाकी मिश्रा की चल संपत्ति और निवेश 6 करोड़ रुपये से अधिक के शेयर 57 करोड़ रुपये से अधिक के म्यूचुअल फंड 3 करोड़ रुपये से अधिक की एलआईसी पॉलिसी 8 करोड़ रुपये का पर्सनल लोन 5 करोड़ रुपये से अधिक के अन्य एसेट्स पिनाकी मिश्रा की लग्जरी गाड़ियां और ज्वैलरी हुंडई क्रेटा – 16 लाख रुपये मर्सिडीज – 1 करोड़ रुपये से अधिक मर्सिडीज जीएलए 200 स्पोर्ट्स – 36 लाख रुपये उनके पास 28 लाख रुपये मूल्य के आभूषण भी थे, जबकि उनकी पूर्व पत्नी संगीता मिश्रा के पास 1 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के आभूषण थे. पिनाकी मिश्रा की आमदनी के स्रोत वकालत से आमदनी पिनाकी मिश्रा सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील हैं और कॉरपोरेट, कस्टम, खनन, पर्यावरण और संवैधानिक मामलों में विशेषज्ञता रखते हैं. 2018-19: 24 करोड़ रुपये 2017-18: 19 करोड़ रुपये 2016-17: 56 करोड़ रुपये 2015-16: 14 करोड़ रुपये 2014-15: 12 करोड़ रुपये निवेश और रियल एस्टेट रियल एस्टेट सेक्टर में उनकी ओशन ग्रांड रिसोर्ट, जुपिटर एस्टेट, व्हाइट लिली एस्टेट नामक कंपनियां हैं, जिसके किराए और मुनाफे से भी उन्हें आमदनी होती है. पिनाकी मिश्रा का नेतृत्वक करियर चार बार पुरी से सांसद रह चुके पिनाकी मिश्रा को बीजेडी में सक्रिय भूमिका के चलते वेतन और भत्ते भी मिले हैं. हालांकि, 2024 में उन्हें टिकट नहीं मिला और अब वे नेतृत्व में कम सक्रिय हैं. पिनाकी मिश्रा की पारिवारिक पृष्ठभूमि पिनाकी मिश्रा का जन्म 23 अक्टूबर 1959 को ओडिशा के कटक में हुआ है. उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के सेंट स्टीफंस कॉलेज से इतिहास में स्नातक और फिर कानून की पढ़ाई की. उनकी पहली शादी संगीता मिश्रा से हुई थी और उनका बेटा पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के दत्तक दामाद रंजन भट्टाचार्य की बेटी से विवाहित हैं. वे पूर्व सीजेआई दीपक मिश्रा के रिश्तेदार भी हैं. इसे भी पढ़ें: Pakistan Budget: अब उड़ेगा पाकिस्तान, 4,224 अरब रुपये का बना है बजट महुआ मोइत्रा की पारिवारिक पृष्ठभूमि महुआ मोइत्रा का जन्म 12 अक्टूबर 1974 को हुआ था. महुआ मोइत्रा की शादी पिनाकी मिश्रा से पहले एक डेनिश व्यक्ति लार्स ब्रॉर्सन से हुई थी. यह शादी करीब दो दशक पहले हुई थी. महुआ मोइत्रा तृणमूल कांग्रेस की सांसद हैं. लार्स ब्रॉर्सन एक डेनिश नागरिक थे और यह शादी तब हुई, जब महुआ अमेरिका में निवेश बैंकर के रूप में जेपी मॉर्गन में काम कर रही थीं. उनके बीच सांस्कृतिक और पेशेवर पृष्ठभूमि के कारण यह रिश्ता चर्चा में रहा. हालांकि, यह शादी ज्यादा समय तक नहीं चली और दोनों का तलाक हो गया. तलाक का सटीक समय और कारण सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं हैं, क्योंकि महुआ ने इस बारे में ज्यादा जानकारी साझा नहीं की. इसे भी पढ़ें: बैंकों में घुसकर कर्मचारियों पर हमला… नहीं चलेगा, एक्शन में आया वित्त मंत्रालय The post महुआ मोइत्रा के पति पिनाकी मिश्रा के पास कितनी है संपत्ति, कहां से होती है इतनी आमदनी? appeared first on Naya Vichar.

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नक्सलवाद, अपराध, मानव तस्करी और ड्रग्स के खिलाफ बड़े एक्शन की तैयारी

Police in Action| बोकारो, रंजीत कुमार : उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल में संगठित अपराध, नक्सवाद, मानव तस्करी और ड्रग्स के खिलाफ बड़े एक्शन की तैयारी शुरू हो गयी है. आईजी क्रांति कुमार गडिदेशी ने गुरुवार को कैंप2 में बोकारो एसपी कार्यालय सभागार में जोन के सभी एसएसपी और एसपी के साथ समीक्षा बैठक की. इसमें स्पष्ट निर्देश दिया कि पुलिस को पीपुल फ्रेंडली बनना है. संगठित अपराध से जुड़े लोगों, नक्सलियों और ड्रग्स के कारोबार से जुड़े लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करनी है. नक्सली गतिविधियों को जड़ से खत्म करेगी पुलिस आईजी ने कहा कि संगठित अपराध और नक्सली गतिविधियों को जड़ से खत्म करने के लिए कार्रवाई और तेज करनी होगी. किसी भी हाल में संगठित अपराध को बरदाश्त नहीं किया जायेगा. नक्सलियों की कमर तोड़ी जा चुकी है. बचे-खुचे नक्सली से कह दें कि वे सरेंडर कर दें. अगर सरेंडर नहीं करेंगे, तो उनका खात्मा कर दिया जायेगा. नक्सलियों के खिलाफ लगातार मुहिम चलेगा. ड्रग्स व नशे के कारोबारियों के खिलाफ जोन में लगातार छापेमारी तेज करें. ठोस व कड़े कदम उठायें. साइबर क्राइम पर नजर रखें पुलिस अधिकारी – आईजी आईजी ने कहा कि साइबर अपराध और साइबर अपराधियों पर भी सभी पुलिस अधिकारी कड़ी नजर रखें. लगातार बढ़ रहे साइबर क्राइम की जांच तेज करें और पीड़ितों को न्याय दिलायें. अपराधियों को सलाखों के पीछे पहुंचायें. उन्होंने कहा कि साइबर क्राइम के बढ़ते मामलों को रोकने के लिए जागरूकता और तकनीकी निगरानी जरूरी है. सभी पुलिस अधिकारी ह्यूमन ट्रैफिकिंग पर विशेष नजर रखें. इसमें शामिल लोगों को चिह्नित करें. ऐसे लोगों की गिरफ्तारी में देर न करें. झारखंड की ताजा समाचारें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें बैठक में शामिल हुए सभी जिलों के एसएसपी, एसपी आईजी ने कहा कि पुलिस अधिकारी अपने-अपने क्षेत्र में सक्रियता के साथ अपराध नियंत्रण के लिए अभियान चलायें. बैठक में सभी जिलों के एसपी के साथ अपराध नियंत्रण, नक्सली गतिविधियों व ड्रग्स से जुड़े आपराधिक कांडों की समीक्षा की गयी. मौके पर बोकारो एसपी हरविंदर सिंह, धनबाद एसएसपी प्रभात कुमार, धनबाद ग्रामीण एसपी कपिल चौधरी, धनबाद सिटी एसपी ऋत्विक श्रीवास्तव, हजारीबाग एसपी अंजनी अंजन, रामगढ़ एसपी अजय कुमार, चतरा एसपी सुमित अग्रवाल, कोडरमा एसपी अनुदीप सिंह, गिरिडीह एसडीपीओ मौजूद थे. इसे भी पढ़ें 2 दिन के लिए देवघर आ रहीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, यात्रा को यादगार बनाने में जुटी झारखंड प्रशासन Bokaro News: चाकू मारकर रिपोर्ट लिखवाने थाने पहुंचा आरोपी, भागने के चक्कर में पकड़ाया JAC Board 12th Arts Result 2025: राजमहल के देव स्टेट टॉपर, बनना चाहते हैं IAS अधिकारी, 2 अन्य टॉपर की क्या है चाहत? Kal Ka Mausam : देवघर में भारी बारिश के बाद ट्रफ में समाया चक्रवात, जानें झारखंड में कैसा रहेगा कल का मौसम The post नक्सलवाद, अपराध, मानव तस्करी और ड्रग्स के खिलाफ बड़े एक्शन की तैयारी appeared first on Naya Vichar.

समस्तीपुर

सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के मंत्री श्री महेश्वर हजारी द्वारा कल्याणपुर विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत आपदा पीड़ितों में बांटा गया अनुदान राशि का चेक

नया विचार न्यूज समस्तीपुर– सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के मंत्री श्री महेश्वर हजारी द्वारा कल्याणपुर विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत विभिन्न आपदा पीड़ितों को ₹400000 की दर से अनुदान राशि का चेक उपलब्ध कराया गया। लाभूकों में मिंटू देवी पति स्वर्गीय चिंटू दास, कोशिला कुमारी पति शिवचंद्र पासवान तथा लक्ष्मी देवी पति स्वर्गीय नगीना सहनी शामिल है, जिनमें प्रत्येक को चार लाख रुपए की दर से कुल 12 लख रुपए की राशि प्रदान किया गया ।इसके अतिरिक्त ग्राम पंचायत सोरमार प्रखंड कल्याणपुर जिला समस्तीपुर में मनरेगा से निर्मित स्पोर्ट्स मैदान का उद्घाटन भी माननीय मंत्री के कर कमलों द्वारा किया गया. मौके पर श्री महेश कुमार भगत कार्यक्रम अधिकारी कल्याणपुर ,श्रीमती पूनम कुमारी मुखिया एवं अन्य जनप्रतिनिधि गण तथा पदाधिकारी मौजूद रहे मौजूद रहे।

समस्तीपुर

विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर समस्तीपुर मंडल में वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन

नया विचार न्यूज समस्तीपुर –  विश्व पर्यावरण दिवस के उपलक्ष्य में पर्यावरण संरक्षण और हरियाली को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आज समस्तीपुर मंडल में एक विशेष वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मंडल रेल प्रबंधक (मरेप्र) श्री विनय श्रीवास्तव ने स्वयं वृक्षारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का महत्वपूर्ण संदेश दिया। इस कार्यक्रम के अंतर्गत मंडल परिसर और उसके आसपास के क्षेत्रों में विभिन्न प्रकार के छायादार और औषधीय पौधों का रोपण किया गया। श्री विनय श्रीवास्तव ने अपने संबोधन में कहा, “प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने और आने वाली पीढ़ियों को एक स्वच्छ एवं सुरक्षित पर्यावरण देने के लिए वृक्षारोपण अनिवार्य है। इस प्रकार के आयोजनों से जनमानस में पर्यावरण के प्रति जागरूकता आती है और समाज में सकारात्मक परिवर्तन होता है।”कार्यक्रम में मंडल के अन्य अधिकारी, कर्मचारी तथा रेलवे परिवार के सदस्यों ने भी भाग लिया और पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने का संकल्प लिया। सभी प्रतिभागियों को पर्यावरण संरक्षण के महत्व को समझाते हुए यह प्रेरित किया गया कि वे न केवल पौधे लगाएं, बल्कि उनका संरक्षण भी सुनिश्चित करें।

समस्तीपुर

आस्था के साथ साथ पर्यावरण व नदी संरक्षण हेतु जन भागीदारी भी जरूरी-डीपीओ

गंगा दशहरा को लेकर जिला प्रशासन द्वारा एस डी आर एफ के टीम की की गई तैनाती नया विचार न्यूज समस्तीपुर –  दिनांक 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस और गंगा दशहरा के अवसर पर जिला गंगा समिति जिला प्रशासन समस्तीपुर द्वारा पर्यावरण और नदियों के संरक्षण को लेकर मोहनपुर स्थित रसलपुर गंगा घाट पर जागरूकता अभियान चलाया गया। जिसका नेतृत्व स्वयं जिला परियोजना पदाधिकारी नीरजेश कुमार कर रहे थे। डीपीओ द्वारा सभी श्रद्धालुओं को पर्यावरण और नदियों को स्वच्छ रखने के लिए शपथ दिलाया गया और विश्व पर्यावरण दिवस 2025 का थीम “प्लास्टिक प्रदूषण को समाप्त करना”को ध्यान रखते हुए गंगा दशहरा के उपलक्ष्य पर गंगा स्नान करने आए श्रद्धालुओं के बीच “कपड़े के थैले” का वितरण किया गया। प्लास्टिक के थैले पर “सिंगल यूज प्लास्टिक का वहिष्कार कर स्वच्छ हिंदुस्तान की ओर बढ़े”, ” हम गंगा एवं सहायक नदियों तालाबों एवं अन्य जल स्रोतों में कूड़ा कचरा एवं पॉलीथिन प्रवाहित नहीं करेंगे” इत्यादि संदेश लिखा था। जहां गंगा में स्नान को लेकर आएं श्रद्धालु अपने घर का कूड़ा कचरा भी नदी में प्रवाहित को लेकर आएं थे मौके पर डीपीओ द्वारा नदी में कचरा नहीं डालने व कूडादान में कचरे डालने का आग्रह करते देखा गया इसके निपटान के लिए जिला गंगा समिति के सौजन्य से दो कचरा का डब्बा भी उपलब्ध कराया गया था। पर्यावरण को लेकर नदी के तट पर पौधा रोपण भी किया गया और एन एस एस के स्वयंसेवकों द्वारा चित्रकला के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया गया। कार्यक्रम में जिला गंगा समिति के नोडल पदाधिकारी अजय कुमार,गंगा सेवी भाई रणधीर,बिपुल कुमार सिंह,रजनीश कुमार,आदर्श, मुस्कान,अन्नू,ईशा, पिंकी, के साथ साथ हजारों की संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे।

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Chenab Railway Bridge: चिनाब रेलवे ब्रिज, एफिल टॉवर से ऊंचा, इंजीनियरिंग का अनोखा नमूना, पीएम मोदी करेंगे उद्घाटन

Chenab Railway Bridge: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार 6 जून को जम्मू और कश्मीर के चिनाब नदी पर बने दुनिया के सबसे ऊंचे रेलवे ब्रिज का उद्घाटन करने वाले हैं. पीएम ने गुरुवार को एक ट्वीट किया और लिखा, “कल, 6 जून वास्तव में जम्मू और कश्मीर के मेरे भाइयों और बहनों के लिए एक विशेष दिन है. 46,000 करोड़ रुपये की प्रमुख बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का उद्घाटन किया जा रहा है, जिसका लोगों के जीवन पर बहुत सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा. वास्तुकला की एक असाधारण उपलब्धि होने के अलावा, चिनाब रेल पुल जम्मू और श्रीनगर के बीच संपर्क में सुधार करेगा. अंजी ब्रिज चुनौतीपूर्ण भूभाग में हिंदुस्तान का पहला केबल-स्टेड रेल पुल है. उधमपुर-श्रीनगर-बारामुल्ला रेल लिंक (USBRL) परियोजना सभी मौसम में संपर्क सुनिश्चित करती है और श्री माता वैष्णो देवी कटरा से श्रीनगर तक वंदे हिंदुस्तान ट्रेनें आध्यात्मिक पर्यटन को बढ़ावा देंगी और आजीविका के अवसर पैदा करेंगी.” PM Narendra Modi tweets, “Tomorrow, 6th June is indeed a special day for my sisters and brothers of Jammu and Kashmir. Key infrastructure projects worth Rs. 46,000 crores are being inaugurated which will have a very positive impact on people’s lives. In addition to being an… pic.twitter.com/bEM5VNv96C — ANI (@ANI) June 5, 2025 कश्मीर के लिए वंदे हिंदुस्तान ट्रेन को हरी झंडी दिखाएंगे पीएम मोदी प्रधानमंत्री मोदी शुक्रवार को चेनाब रेल पुल का उद्घाटन करेंगे और कश्मीर के लिए वंदे हिंदुस्तान ट्रेन को हरी झंडी दिखाएंगे, जो हिंदुस्तान के रेलवे इतिहास में एक प्रमुख मील का पत्थर होगा. Visited the tallest railway bridge in the world, The Chenab Bridge, to review arrangements for the visit of the Hon PM @narendramodi ji tomorrow. Tomorrow is a landmark day for J&K when, finally, the valley will be connected to the rest of the country by a railway link to be… pic.twitter.com/bthZVHQ33j — Omar Abdullah (@OmarAbdullah) June 5, 2025 चिनाब रेलवे ब्रिज की खासियत नदी तल से 359 मीटर ऊंचा चिनाब रेल पुल दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे पुल है.पेरिस के एफिल टॉवर से 35 मीटर अधिक ऊंचाब्रिज की लंबाई 1,315 मीटरब्रिज कटरा-बनिहाल खंड में बनाया गया है ब्रिज पर सेंसर लगाए गए हैं जो हवा की गति, भूकंप, और संरचनात्मक तनाव की निगरानी करते हैं.ब्रिज को विस्फोट-प्रतिरोधी बनाया गया है इंजीनियरिंग का अनोखा नमूना है चिनाब ब्रिज चिनाब रेलवे ब्रिज इंजीनियरिंग का अनोखा नमूना है. ब्रिज की लंबाई 1.3 किलोमीटर है, जो कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और भूकंप संभावित क्षेत्र (जोन V) में बनाया गया है. ब्रिज 260 किमी/घंटा की रफ्तार वाली हवाओं और भूकंपीय गतिविधियों का सामना कर सकता है. The post Chenab Railway Bridge: चिनाब रेलवे ब्रिज, एफिल टॉवर से ऊंचा, इंजीनियरिंग का अनोखा नमूना, पीएम मोदी करेंगे उद्घाटन appeared first on Naya Vichar.

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हरित भविष्य को सशक्त बनाना: मोदी सरकार के 11 वर्षों ने भारत के अक्षय ऊर्जा क्षेत्र को कैसे बदल दिया

केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री श्री प्रहलाद जोशी द्वारा लिखित सौर ऊर्जा में तीसरे, पवन ऊर्जा में चौथे और कुल नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता में चौथे स्थान के साथ, आज हिंदुस्तान स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में दुनिया के अग्रणी देशों में से एक है. 232 गीगावाट से अधिक स्थापित और 176 गीगावाट निर्माणाधीन नवीकरणीय क्षमता होने के साथ, हम न केवल अपनी ऊर्जा से जुड़ी आवश्यकताओं को पूरा कर रहे हैं, बल्कि ऊर्जा में बदलाव से जुड़ी वैश्विक चर्चा को सक्रिय रूप से आकार दे रहे हैं. यह प्रगति संयोग नहीं है, बल्कि यह पिछले 11 वर्षों में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में लगातार किए गए साहसिक सुधारों, समयबद्ध फैसलों और स्पष्ट दीर्घकालिक दृष्टिकोण का परिणाम है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पास एक मजबूत नवीकरणीय ऊर्जा इकोसिस्टम बनाने का एक स्पष्ट दृष्टिकोण था. गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में, उन्होंने स्वच्छ ऊर्जा को वैश्विक प्राथमिकता बनने से बहुत पहले बड़े पैमाने पर सौर परियोजनाओं का बीड़ा उठाया था. 2014 में पदभार संभालने के बाद, उन्होंने उस विजन को राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ाया.  नतीजतन, आज हिंदुस्तान सौर, पवन और स्वच्छ ऊर्जा से जुड़े नवाचार में एक वैश्विक लीडर के रूप में खड़ा है. पिछले वर्ष में ही, हमने राष्ट्रीय ग्रिड में रिकॉर्ड 29 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा जोड़ी. सौर ऊर्जा क्षमता 2014 के सिर्फ 2.63 गीगावाट से बढ़कर 2025 में 108 गीगावाट से अधिक हो गई है, जो 41 गुना की आश्चर्यजनक वृद्धि है. पवन ऊर्जा क्षमता भी 51 गीगावाट को पार कर गई है. देश भर में फैली इन परियोजनाओं को अब एकीकृत पारेषण प्रणाली के माध्यम से एक साथ जोड़ा जा रहा है, जिससे एक राष्ट्र एक ग्रिड (वन नेशन वन ग्रिड) का सपना साकार होगा, जहां प्रत्येक हिंदुस्तानीय, चाहे वह किसी भी भौगोलिक क्षेत्र में रहता हो, विश्वसनीय बिजली प्राप्त कर सकेगा. लेकिन इस बदलाव के स्तर को समझने के लिए हमें यह याद रखना होगा कि हमने शुरुआत कहां से की थी. वर्ष 2014 में हिंदुस्तान का बिजली क्षेत्र गहरे संकट से जूझ रहा था. बिजली की कमी लगातार बनी हुई थी. 2012 में डबल ग्रिड फेलियर हुआ, जिसने सबसे पहले उत्तरी क्षेत्र को 36,000 मेगा वाट लोड की हानि के साथ प्रभावित किया और बाद में उत्तरी, पूर्वी एवं उत्तर-पूर्वी ग्रिडों के ध्वस्त होने का कारण बना, जिससे 48,000 मेगावाट का असर पड़ा. ये घटनाएं आज भी हमारी यादों में ताजा है. पारेषण इंफ्रास्ट्रक्चर पर अत्यधिक बोझ था और निवेशकों का भरोसा कम था. नवीकरणीय ऊर्जा को महंगा और अविश्वसनीय माना जाता था. वैश्विक समुदाय ने हिंदुस्तान को एक गंभीर स्वच्छ ऊर्जा खिलाड़ी के रूप में नहीं देखा. वहीं, देश के भीतर, जनता की अपेक्षाएं मामूली थीं. नीतिगत अनिर्णायकता की स्थिति के चलते भी हिंदुस्तान को ‘नाजुक पांच’ वित्तीय स्थितिओं में से एक के रूप में गिना जाता था.वह परिदृश्य निर्णायक रूप से बदल गया है. हिंदुस्तान ऊर्जा की कमी से ऊर्जा आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ गया है. पिछड़ने की स्थिति से उबरते हुए, अब हम मिसाल के रूप में नेतृत्व कर रहे हैं. यहां, मैं मोदी प्रशासन के तहत पिछले 11 वर्षों में नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में किए गए 11 परिवर्तनकारी सुधारों पर प्रकाश डालता हूं, जिनमें से प्रत्येक आत्मनिर्भरता, समावेशी विकास और स्थिरता के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाता है. सबसे पहले, फीड-इन टैरिफ से पारदर्शी, बाजार-संचालित बोली प्रक्रिया में बदलाव ने एक महत्वपूर्ण क्षण को चिह्नित किया. प्रतिस्पर्धी बोली और टैरिफ युक्तिकरण के कारण सौर टैरिफ 2010 में ₹10.95 प्रति यूनिट से गिरकर 2021 तक आश्चर्यजनक रूप से ₹1.99 प्रति यूनिट रह गया, जिसने हिंदुस्तान को सौर ऊर्जा में मूल्य के मामले में वैश्विक लीडर के रूप में स्थापित किया. इस सुधारों ने निवेशकों का विश्वास बढ़ाया और जीवाश्म ईंधन के साथ मूल्य के मामले में समानता स्थापित की है. दूसरा, अंतर-राज्यीय पारेषण प्रणाली (आईएसटीएस) शुल्कों की छूट एक और प्रमुख कदम रहा है. इन शुल्कों को हटाकर, प्रशासन ने परियोजना डेवलपर्स के लिए प्रमुख बाधाओं में से एक को समाप्त कर दिया. अपतटीय पवन के लिए 2032 तक और हरित हाइड्रोजन के लिए 2030 तक विस्तारित, इस नीति ने भौगोलिक सीमाओं से नवीनीकरणीय ऊर्जा परिनियोजन को प्रभावी रूप से मुक्त कर दिया और पूरे हिंदुस्तान में ऊर्जा प्रवाह को प्रोत्साहित किया. तीसरा, आयात पर निर्भरता कम करने और रोजगार सृजन के लिए प्रशासन ने 24,000 करोड़ रुपये के प्रोत्साहन के साथ सौर विनिर्माण के लिए उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना शुरू की. इससे घरेलू विनिर्माण में उछाल आया है, जो 2014 की 2.3 गीगावाट से बढ़कर मॉड्यूल में 88 गीगावाट और 2025 तक सेल क्षमता में 0 से 25 गीगावाट हो गया है. हिंदुस्तान अब केवल सौर ऊर्जा का उपयोग ही नहीं कर रहा है, बल्कि इसे बना भी रहा है. इससे आपूर्ति शृंखला मजबूत होती है और ऊर्जा सुरक्षा बढ़ती है. चौथा, आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने और घरेलू विनिर्माण को प्रोत्साहन देने के लिए, प्रशासन ने मॉडल और विनिर्माताओं की स्वीकृत सूची (एएलएमएम), घटकों और विनिर्माताओं की स्वीकृत सूची (एएलसीएम) के साथ-साथ घरेलू सामग्री आवश्यकताओं (डीसीआर) को लागू किया, जिससे गुणवत्ता आश्वासन, आपूर्ति श्रृंखला की संपूर्णता सुनिश्चित हुई और आयातित सौर घटकों पर निर्भरता कम हुई. इन उपायों ने हिंदुस्तानीय निर्माताओं के लिए एक समान अवसर तैयार किए हैं, जिससे एक लचीले और प्रतिस्पर्धी सौर इकोसिस्टम का मार्ग प्रशस्त हुआ है. पांचवां, प्रधानमंत्री के विजन के तहत, पीएम-सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना एक परिवर्तनकारी पहल बन गई है, जिसका लक्ष्य 30 गीगावाट की विकेंद्रीकृत क्षमता तैयार करने के लिए एक करोड़ घरों में छत पर सौर ऊर्जा स्थापित करना है. लगभग 13.75 लाख घरों को पहले ही इससे जोड़ा जा चुका है, जिससे जमीनी स्तर पर स्वच्छ ऊर्जा तक पहुंच में बदलाव आ रहा है. छठा, पीएम-कुसुम योजना किसानों को विकेंद्रीकृत सौर प्रणाली लगाने में सक्षम बनाकर कृषि को सौर ऊर्जा से लैस कर रही है. 11 लाख से अधिक पंपों को सौर ऊर्जा से युक्त किया गया है, जिससे हिंदुस्तान का ये सबसे अधिक ऊर्जा-गहन क्षेत्र जलवायु सहयोगी में बदल गया है. सातवां, हिंदुस्तान अब स्वच्छ ऊर्जा के मामले में दुनिया का अनुसरण नहीं कर रहा है, बल्कि दुनिया का नेतृत्व कर रहा है. 2014 में एफडीआई के मामूली प्रवाह से, हिंदुस्तान ने अप्रैल 2020 से सितंबर

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आदिवासी कौन है? UPSC के इस सवाल ने खोल दी सोच की परतें

Tribal Communities: आदिवासी कौन है? इस प्रश्न का सभी लोग अलग अलग तरीके से व्याख्या करते हैं. महात्मा गांधी ने ट्राइबल को गिरिजन कहकर संबोधित किया है. वहीं, कई लेखों में इन्हें अत्विका भी कहा गया है. लेकिन इसका उत्तर चाहे जो भी हो लेकिन जब भी यह शब्द आता है तो लोगों के दिलो में उनके प्रति कई तरह छवि बनने लगती है. कई लोग आज भी इन्हें पिछड़पन की श्रेणी में रखते हैं, लेकिन जनजातीय समाज से एक सभ्य समाज को कई चीजें सीखनी चाहिए. दरअसल यह सवाल यूपीएससी के मॉक इंटरव्यू में भी पूछा भी गया था. मॉक इंटरव्यू में आदिवासियों पर क्या सवाल पूछा गया था सिविल सर्विस की तैयारी कराने वाले कोचिंग संस्थान दृष्टि कोचिंग सेंटर के संस्थापक विकास दिव्यकीर्ति ने एक बार सिविल सर्वेंट के अभ्यर्थी दीपक कुमार से इस संबंध में सवाल पूछा था. उनका प्रशन था कि आदिवासी समाज से सभ्य समाज को क्या सीखना चाहिए? ऐसी 5 बातें बताइए. इस सवाल का जवाब देते हुए अभ्यर्थी दीपक कुमार ने कहा था कि सबसे पहले लोगों को प्रकृति पूजी सीखना चाहिए, जो वनस्पतियों की पूजा करते हैं. Also Read: हर दिन आधा घंटा कर लीजिए यह एक्सरसाइज, फिर देखिये चमत्कार, इस बीमारी के लिए है सबसे अधिक कारगर अभ्यर्थी दीपक कुमार ने क्या दिया था जवाब दूसरी बात दीपक कुमार ने कहा कि आदिवासियों से उनकी संस्कृति की सभ्यता है उसके बारे में सीखना चाहिए. तीसरे प्वॉइंट्स में उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज के अंदर जो लैंगिक समानता का पक्ष है, उसे सीखना चाहिए. चौथी चीज लोगों को पारंपरिक आयुर्वेद जैसी जो चीजें हैं यानी कि ट्राइबल मेडिसेन के बारे में सीखना चाहिए. पांचवा चीज है कि हम कितने भी आधुनिक क्यों न हो जाए, अपनी जो जमीन और संस्कृति उसे कभी नहीं छोड़ना चाहिए. लेखक जावेद अख्तर ने भी की थी आदिवासियों के जीवन शैली की तारीफ मशहूर लेखक जावेद अख्तर ने भी एक रांची में आयोजित टाटा स्टील झारखंड लिटरेरी मीट के एक कार्यक्रम में कहा था कि जीवन मूल्यों के बारे में हमें आदिवासियों से सीखना चाहिए. प्रकृति के प्रति उनके मन में जो श्रद्धा है, उनके मन में जो समर्पण है, उससे हमें सीखना चाहिए. आदिवासियों ने प्रकृति के संरक्षण में बड़ा योगदान दिया है. वे जहां भी रहते हैं, प्रकृति के बीच रहते हैं और उसका संरक्षण करते हैं. Also Read: Chanakya Niti: जीवन में हर कदम पर हाथ लगेगी सफलता, किसी भी काम की शुरुआत से पहले ध्यान में रखें ये बातें The post आदिवासी कौन है? UPSC के इस सवाल ने खोल दी सोच की परतें appeared first on Naya Vichar.

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