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June 11, 2025

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Snakes in Bihar: बिहार के इस टाइगर रिजर्व में पाए जाते हैं 45 प्रजाति के सांप, सबसे दुर्लभ है वन सुंदरी

Snakes in Bihar: बेतिया. बिहार के इस टाइगर रिजर्व में अनोखे सांपों का बसेरा है. वैसे तो बिहार के हर ज़िले में विभिन्न प्रजातियों के सांपों का बसेरा है, लेकिन वाल्मीकि टाइगर रिजर्व सांपों का मुख्य गढ़ है. यहां सांपों की 45 से अधिक प्रजातियों का वास है. इनमें दुनिया के सबसे दुर्लभ सांप के साथ पृथ्वी के सबसे बड़े विषैले सांपों की मौजूदगी भी दर्ज की गई है. VTR में कुछ ऐसे सांप भी पाए जाते हैं जो अत्यंत दुर्लभ और अनोखे हैं. इनमें मुख्य रूप से वन सुंदरी, कोरल रेड कुकरी, ट्विन स्पॉटेड वुल्फ स्नेक, मॉक वाइपर, लॉन्ग स्नाउटेड वाइन स्नेक और सालाजार पिट वाइपर जैसे सांप शामिल हैं. केवल दो राज्यों में मौजूद है लॉन्ग स्नाउटेड वाइन लॉन्ग स्नाउटेड वाइन स्नेक को हिंदुस्तान में सिर्फ दो राज्यों में ही देखा गया है. सबसे पहले इसे बिहार के पश्चिम चंपारण ज़िले में स्थित वाल्मीकि टाइगर रिज़र्व के एक खास रेंज में देखा गया था, जिसके बाद नॉर्थ ईस्ट राज्य मेघालय में भी इसकी मौजूदगी दर्ज की गई. बात यदि नॉन वेनेमस सांपों की कि जाए तो, बिहार में मुख्य रूप से रैट स्नेक, बफ कील बैक स्नेक, चेकल्ड कील बैक स्नेक, ग्रीन कील बैक स्नेक, ब्रह्मणी वॉर्म स्नेक, कॉमन कुकरी स्नेक और ब्रोंज़ बैक स्नेक जैसी प्रजातियां पाई जाती हैं. इनके अलावा बोआ और पायथन जैसे सांपों की भी प्रजातियां पाई जाती हैं, जो कुंडली मार कर अपना शिकार पकड़ते हैं. बोआ परिवार में कॉमन सैंड बोआ एवं रेड सैंड बोआ हैं. जबकि पायथन परिवार में बर्मीज पायथन और इंडियन रॉक पायथन जैसे सांप पाए जाते हैं. शेड्यूल-वन की श्रेणी में आता है किंग कोबरा करीब 25 वर्षों से वाइल्ड लाइफ पर काम कर रहे एक्सपर्ट अभिषेक ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि जिले के VTR क्षेत्र में दुनिया का सबसे लंबा विषैला सांप किंग कोबरा पाया जाता है. इसकी लंबाई 18 फीट तक जा सकती है. ये एक ऐसा सांप है, जो दूसरे सांपों का शिकार कर उन्हें अपना आहार बनाता है. बाइट करने पर यह एक बार में 20 एम.एल तक विष को बाहर निकालता है. जहां अन्य सांप जमीन में बिल में रहना पसंद करते हैं. वहीं, कोबरा घोंसलों में रहना पसंद करता है. हिंदुस्तान में इसे वन्य अधिनियम के तहत शेड्यूल-वन की श्रेणी में रखा गया है. यहां चलता है गेहूंवन का राज वाल्मीकि टाइगर रिज़र्व सहित जिले के ज्यादातर क्षेत्रों में स्पेक्टिकल्ड कोबरा खूब पाए जाते हैं. यहां इन्हें आम भाषा में गेहूंवन कहा जाता है. ये पांच फीट तक लंबे और न्यूरोटोक्सिन विष से लैस होते हैं. अन्य किसी भी विषैले सांप की तुलना में इंसानों से इनका सामना सबसे अधिक होता है. इनमें पाया जाने वाला विष इतना घातक होता है कि तुरंत इलाज न मिलने की स्थिति में किसी भी 70 किलो वजनी वयस्क इंसान को महज 30 से 40 मिनटों में मौत की नींद सुला सकता है. ये हिंदुस्तान के चार सबसे अधिक जानलेवा सांपों की लिस्ट में शामिल हैं. यहां मौजूद है करैत की सबसे घातक प्रजाति कॉमन करैत का रंग काला होता है और उसपर से इसके दंश का पता तक नहीं चलता है. सोते हुए इंसान को यदि यह सांप दंश कर ले तो नींद में ही उसकी मौत हो जाती है. यह बेहद तेज न्यूरोटिक्सिन वेनम से लैस होता है. इसके दांत सूई के समान पतले और बेहद छोटे होते हैं. यही कारण है कि ज्यादातर मामलों में इसके दंश से दर्द नहीं होता है और न ही कोई निशान बनता है. ऐसे में डंसे जाने के बाद भी लोग बेसमाचार होते हैं और 30 से 40 मिनटों में मौत पक्की हो जाती है. हिंदुस्तान में चार सबसे चार सबसे अधिक जानलेवा और मौतों के जिम्मेवार सांपों की लिस्ट में इस सांप का नाम भी शामिल है. इस सांप के काटने से जम जाता है खून हीमोटॉक्सिन वेनम से लैस रसल वाइपर एक ऐसा सांप है, जिसके दंश से बेहद दर्दनाक मौत होती है. इसका जहर शरीर में खून को जमाने लगता है और मांस को सड़ाने लगता है. खून के थक्के बनने की वजह से शरीर जगह जगह से फटने लगता है, जिससे पीड़ित को इतना तेज़ दर्द होता है जिसकी कल्पना भी आप और हम नहीं कर सकते हैं. देखने में ये किसी छोटे आकार के अजगर की तरह दिखता है. बिहार में ज्यादातर क्षेत्रों में इसे सुस्कार के नाम से भी जाना जाता है. हिंदुस्तान के चार सबसे अधिक जानलेवा और मौतों के जिम्मेवार सांपों की लिस्ट में रसल वाइपर का नाम भी शामिल है. इसके दंश से भी महज 30 से 40 मिनटों में पीड़ित की मौत हो जाती है. Also Read: बिहार में बिजली खपत का बना नया रिकॉर्ड, भीषण गर्मी में पहुंची 8303 मेगावाट तक डिमांड The post Snakes in Bihar: बिहार के इस टाइगर रिजर्व में पाए जाते हैं 45 प्रजाति के सांप, सबसे दुर्लभ है वन सुंदरी appeared first on Naya Vichar.

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Panchayat Star Cast Fees: सचिव जी ने वसूले लाखों, तो प्रधान जी को मिली रिंकू देवी से भी कम फीस

Panchayat Star Cast Fees: अमेजन प्राइम की हिट वेब सीरीज ‘पंचायत’ अपने शानदार कंटेंट, ह्यूमर और रियलिस्टिक किरदारों की वजह से फैंस की फेवरेट बनी हुई है. अब तक इसके तीन सीजन आ चुके हैं और ‘पंचायत सीजन 4’ जुलाई में रिलीज होने वाला है, हालांकि इसकी तारीख अभी तय नहीं की गई है. जहां दर्शक कहानी और किरदारों के आगे की झलक देखने के लिए बेताब हैं, वहीं लोग यह भी जानना चाहते हैं कि इस शो के एक्टर्स ने इसके लिए कितनी फीस ली थी. ऐसे में आइए हम आपको सचिव जी से लेकर प्रधान जी की फीस बताते हैं. सचिव जी की फीस कितनी थी? View this post on Instagram A post shared by Jitendra Kumar (@jitendrak1) पंचायत के पिछले सीजन यानी सीजन 3 में सचिव जी जीतेंद्र कुमार का किरदार निभा रहे अभिषेक त्रिपाठी ने प्रति एपिसोड 70,000 रुपए चार्ज किये थे. यानी कुल 5.6 लाख लाख रुपए. इसी के साथ वह शो में सबसे ज्यादा फीस लेने वाले एक्टर बन गए. नीना गुप्ता को मिले इतने लाख View this post on Instagram A post shared by Neena Gupta (@neena_gupta) सीरीज में मंजू देवी का किरदार निभा रहीं नीना गुप्ता को 50,000 प्रति एपिसोड मिले यानी कुल 4 लाख हुए. पंचायत में उनकी अदाकारी को दर्शकों ने खूब पसंद किया. प्रधान जी की फीस रिंकू देवी से कम? View this post on Instagram A post shared by Raghubir Yadav (@raghubir_y) पंचायत सीरीज के सीजन 3 में प्रधान जी ब्रिज भूषण दुबे का किरदार निभा रहे रघुवीर यादव को 40,000 प्रति एपिसोड यानी कुल 3.2 लाख रुपए मिले. पिछले सीजन के आखिर में इनपर हमला होते हुए दिखाया गया था. अब इस सीजन में उसी से कहानी की शुरुआत होगी. विकास ने भी लाखों में ली फीस View this post on Instagram A post shared by Chandan Roy (@chandanroy.7) सचिव जी के साथ नजर आने वाले विकास का किरदार निभा रहे चंदन रॉय ने 20,000 प्रति एपिसोड लिए. यानी कुल 1.6 लाख रुपए. एक्टर ने सीरीज में अपने मासूम लेकिन मजेदार अंदाज से दर्शकों का दिल जीत लिया. पंचायत 4 से क्या है उम्मीद? View this post on Instagram A post shared by prime video IN (@primevideoin) ‘पंचायत सीजन 4’ में भी वही पुरानी कास्ट नजर आने वाली है. इस बार कहानी में चुनाव की हलचल देखने को मिलेगी, जिसमें मंजू देवी और क्रांति देवी के बीच सीधी टक्कर देखने को मिल सकती है. वहीं, प्रधान जी पर हुए हमले की गुत्थी भी इसी सीजन में सुलझेगी. यह सीरीज जुलाई में रिलीज होगी लेकिन रिलीज डेट का अभी इंतजार है. यह भी पढ़े: Sitaare Zameen Par में काम करने पर जेनेलिया देशमुख ने तोड़ी चुप्पी, बोलीं- कितनी किस्मतवाली… The post Panchayat Star Cast Fees: सचिव जी ने वसूले लाखों, तो प्रधान जी को मिली रिंकू देवी से भी कम फीस appeared first on Naya Vichar.

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Internship: दिल्ली में लॉन्च हुई मुख्यमंत्री इंटर्नशिप स्कीम, 150 युवाओं को मिलेगा अनुभव

Internship: देश की राजधानी दिल्ली में पढ़ाई कर रहे युवाओं के लिए एक सुनहरा मौका सामने आया है. दिल्ली प्रशासन ने विकसित दिल्ली मुख्यमंत्री इंटर्नशिप योजना को मंजूरी दे दी है, जिसके तहत युवाओं को 89 दिनों तक प्रशासन के साथ काम करने का अवसर मिलेगा. युवाओं की ऊर्जा से बनेगी स्मार्ट दिल्ली मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में इस योजना को मंजूरी दी गई. इस कार्यक्रम का मकसद युवाओं की ऊर्जा और उनके नए विचारों को नीतियों और प्रशासनी फैसलों में शामिल करना है. प्रशासन का कहना है कि इससे दिल्ली को स्मार्ट, स्वच्छ और समृद्ध महानगर बनाने की दिशा में नई सोच और तेजी आएगी. 150 छात्रों को मिलेगा मौका इस योजना के तहत हिंदुस्तान में पढ़ाई कर चुके 150 मेधावी और प्रतिभाशाली युवाओं का चयन किया जाएगा, जो 89 दिनों तक दिल्ली प्रशासन के विभिन्न विभागों में काम करेंगे. इनमें स्वास्थ्य, शिक्षा, परिवहन, प्रशासनिक सुधार, समाज कल्याण और पर्यावरण जैसे विभाग शामिल होंगे. दिल्ली यूनिवर्सिटी करेगी चयन इन इंटर्न्स के चयन की जिम्मेदारी दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) को सौंपी गई है. इसका मकसद पूरी चयन प्रक्रिया को पारदर्शी और योग्यता आधारित बनाना है, ताकि सही उम्मीदवारों को मौका मिल सके. फॉरेंसिक साइंस में भी इंटर्नशिप का अवसर कैबिनेट ने फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) में भी एक साल की इंटर्नशिप योजना को हरी झंडी दी है. इसमें 100 युवाओं को वजीफा देकर इंटर्न बनाया जाएगा. ये युवा फोरेंसिक जीवविज्ञान, साइबर क्राइम, डीएनए एनालिसिस, बैलिस्टिक्स, फिंगरप्रिंट जांच जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षण लेंगे. प्रशासन का फोकस – जनहित में फैसले मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि पिछले 100 दिनों में दिल्ली कैबिनेट की हर बैठक में जनहित से जुड़े अहम फैसले लिए गए हैं. यह इंटर्नशिप योजना न केवल युवाओं को अनुभव देगी, बल्कि प्रशासन को नई सोच से भरपूर सहयोग भी मिलेगा. Also Read: Success Story: पिता को खोया, हौसला नहीं… चौकीदारी करते-करते CAT टॉपर बना बेटा Also Read: Success Story: बिहार की IAS बेटी बनी एमपी की बहु, फॉरेस्ट ऑफिसर से शादी, जानें दोनों का UPSC रैंक The post Internship: दिल्ली में लॉन्च हुई मुख्यमंत्री इंटर्नशिप स्कीम, 150 युवाओं को मिलेगा अनुभव appeared first on Naya Vichar.

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Chanakya Niti: चाणक्य की नजर में कैसी होती है बुद्धिमान स्त्री? जानिए वो 3 खास गुण

Chanakya Niti: चाणक्य को हिंदुस्तान का महान नीति-ज्ञाता और चतुर रणनीतिकार माना जाता है. उन्होंने जीवन के हर पहलू पर गहरी बातें कही हैं, जिनमें स्त्री-नीति भी शामिल है. चाणक्य का मानना था कि एक बुद्धिमान स्त्री न केवल अपने परिवार को संभालती है, बल्कि समाज में भी सम्मान पाती है. आज के समय में भी उनकी कही गई बातें पूरी तरह प्रासंगिक हैं. चाणक्य ने ऐसी स्त्रियों के कुछ खास गुण बताए हैं जो उन्हें दूसरों से अलग और श्रेष्ठ बनाते हैं. अगर कोई स्त्री इन गुणों को अपनाती है, तो वह जीवन में हर स्तर पर सफल हो सकती है. आइए जानते हैं वो तीन खास गुण. Chanakya Niti: सहनशीलता चाणक्य के अनुसार, जो स्त्री सहनशील होती है, वही सच में बुद्धिमान मानी जाती है. वह जीवन में आने वाली मुश्किलों का सामना धैर्य से करती है और कभी जल्दबाजी में निर्णय नहीं लेती. ऐसी स्त्री परिवार के सभी सदस्यों को साथ लेकर चलती है और हर रिश्ते में संतुलन बनाए रखती है. उसका धैर्य ही उसे सम्मान दिलाता है और जीवन में सफलता की राह खोलता है. ये भी पढ़ें: Chanakya Niti: चुपचाप अपना काम करो, क्यों चाणक्य ने ये बात बार-बार दोहराई? वजह चौंका देगी Chanakya Niti: मीठा बोलने की कला चाणक्य ने कहा है कि जो स्त्री अपनी वाणी पर नियंत्रण रखती है और मीठा बोलती है, वह सभी का दिल जीत लेती है. बुद्धिमान स्त्री जानती है कि कठोर शब्दों से रिश्ते टूटते हैं और मधुर वाणी से जुड़ते हैं. वह क्रोध में भी सोच-समझकर बोलती है, जिससे घर का वातावरण शांत बना रहता है. उसकी यह आदत उसे समाज में आदर दिलाती है. Chanakya Niti: ज्ञान और विवेक चाणक्य के अनुसार, बुद्धिमान स्त्री वह होती है जिसके पास केवल पढ़ाई का ज्ञान नहीं, बल्कि व्यवहारिक समझ भी हो. वह हर परिस्थिति में सोच-समझकर फैसला लेती है और दूसरों की भलाई को भी ध्यान में रखती है. ऐसी स्त्री अपने घर, परिवार और समाज के लिए सही मार्गदर्शन देने वाली होती है. उसका विवेक उसे हर क्षेत्र में सम्मान और सफलता दिलाता है. ये भी पढ़ें: Chanakya Niti: जिस प्यार में ये बातें हों, वो कभी नहीं टिकता, चाणक्य की सच्चाई ये भी पढ़ें:  Chanakya Niti: चाणक्य ने बताया था कौन इंसान अमीर बनेगा, जानिए क्या आप उनमें से एक हैं? Disclaimer: यह आर्टिकल सामान्य जानकारियों और मान्यताओं पर आधारित है. नया विचार इसकी पुष्टि नहीं करता है. The post Chanakya Niti: चाणक्य की नजर में कैसी होती है बुद्धिमान स्त्री? जानिए वो 3 खास गुण appeared first on Naya Vichar.

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जंगली हाथियों का आतंक, टाटीझरिया बाजार से लौट रही महिला को उतारा मौत के घाट, देर रात जंगल में मिला शव

Hazaribagh News | टाटीझरिया, सोनु पांडेय : हजारीबाग जिले के टाटीझरिया में जंगली हाथियों का उत्पात थमने का नाम नहीं ले रहा है. लगातार इस क्षेत्र में हाथियों की तबाही जारी है. झुंड से बिछड़ा एक हाथी कल मंगलवार को दिनभर अमनारी बौधा जंगल में राहगीरों के लिए मुसीबत बना रहा. इसी बीच टाटीझरिया के साप्ताहिक बाजार से वापस लौट रही स्त्री को हाथी ने पटक कर मौत के घाट उतार दिया. मृतका की पहचान धर्मपुर पंचायत के खंभवा गांव निवासी मोसोमात लाजवंती के रूप में हुई है. इस घटना से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है. बाइक से गिर गयी थी स्त्री स्त्री टाटीझरिया के साप्ताहिक बाजार से अपने भतीजे के साथ मोटरसाइकिल से वापस घर लौट रही थी. इसी बीच बौधा डैम के समीप पश्चिमी वन प्रमंडल अमनारी जंगल के पास पहुंचते ही हाथी उन्हें दौड़ाने लगा. इसी दौरान स्त्री बाइक से नीचे गिर गयी. बाइक सवार को इसका पता भी नहीं चला और वह घर पहुंच गया. झारखंड की ताजा समाचारें यहां पढ़ें देर रात 1 बजे मिला शव मामले की जानकारी होते ही परिजन और ग्रामीण स्त्री को ढुंढने निकलें. देर रात करीब 1 बजे अमनारी जंगल में झाड़ियों से घिरी गड्ढे में स्त्री का शव मिला. घटना की सूचना मिलते ही टाटीझरिया थाना प्रभारी सरोज सिंह चौधरी और फोरेस्टर विद्या भूषण घटनास्थल पर पहुंचे. अंतिम संस्कार के लिए परिजनों को मिले 50 हजार रुपये घटना से आक्रोशित परिजनों ने जब मुआवजे की मांग की, तो रैंजर एस एन तिवारी ने मृतक के परिजन को तत्काल में अंतिम संस्कार करने के लिए 50 हजार रुपये दिये. इसके अलावा परिजनों को मुआवजे की राशि दी जाएगी. समाचार लिखे जाने तक शव थाने में ही है. कागजी कार्रवाई के बाद शव पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भेजा जायेगा. इसे भी पढ़ें BBMKU : 19 जुलाई को बीबीएमकेयू का दूसरा दीक्षांत समारोह, राष्ट्रपति हो सकती हैं मुख्य अतिथि Liquor Scam : जांच में बड़ा खुलासा, विनय चौबे की पत्नी के खाते में यहां से हर माह आती थी मोटी रकम Corona Update : झारखंड में 6 कोरोना संक्रमित मरीज, एक की हुई मौत, अब तक इतने हुए ठीक The post जंगली हाथियों का आतंक, टाटीझरिया बाजार से लौट रही स्त्री को उतारा मौत के घाट, देर रात जंगल में मिला शव appeared first on Naya Vichar.

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घर, ऑफ‍िस या कार… अब नहीं कर सकेंगे AC का टेंपरेचर ज्यादा और कम, जानें सरकार ने क्यों किया ऐलान

AC Temperature New Rule: देश में लगातार बढ़ रही गर्मी और बिजली की खपत को देखते हुए केंद्र प्रशासन ने एक बड़ा फैसला लिया है. अब जल्द ही घर, ऑफिस और गाड़ियों में चलने वाले एयर कंडीशनर (AC) पर टेम्परेचर लिमिट लागू होने जा रही है. इस नए नियम के तहत एसी का तापमान 20 डिग्री सेल्सियस से कम और 28 डिग्री से अधिक सेट नहीं किया जा सकेगा. क्या होगा नया नियम? केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने मंगलवार को जानकारी देते हुए बताया कि प्रशासन ऊर्जा संरक्षण और पर्यावरण संतुलन को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठा रही है. उन्होंने कहा कि यह नियम आवासीय, वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों और वाहनों में लगे एसी पर लागू होगा. यानी अब कोई भी व्यक्ति अपने कमरे या गाड़ी में एसी को 20°C से नीचे या 28°C से ऊपर नहीं चला सकेगा. क्यों जरूरी हुआ ये बदलाव? केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने बताया कि जितना कम तापमान पर एसी चलता है, उतनी ही ज्यादा बिजली की खपत होती है. इससे न केवल ऊर्जा की बर्बादी होती है, बल्कि पर्यावरण पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है. इस कदम से क्लाइमेट चेंज से लड़ने और बिजली की बचत में मदद मिलेगी. जापान और इटली में पहले से लागू है ऐसा नियम प्रेस कॉन्फ्रेंस में खट्टर ने बताया कि दुनिया के कई देशों में यह प्रणाली पहले से लागू है. जापान में एसी का तापमान 26°C पर फिक्स किया गया है. इटली में यह सीमा 23°C है. हिंदुस्तान भी अब इसी दिशा में कदम बढ़ा रहा है ताकि 2030 और 2047 के विजन को पूरा किया जा सके. अभी कितने डिग्री पर चलते हैं एसी? वर्तमान में बाजार में उपलब्ध अधिकतर एसी 16°C तक के न्यूनतम तापमान पर चल सकते हैं. लेकिन प्रशासन के इस प्रस्ताव के बाद नई तकनीक वाले एसी में यह लिमिट पहले से फिक्स होगी. यानी उपभोक्ता चाहकर भी एसी को 20 डिग्री से कम या 28 डिग्री से अधिक पर सेट नहीं कर पाएंगे. The post घर, ऑफ‍िस या कार… अब नहीं कर सकेंगे AC का टेंपरेचर ज्यादा और कम, जानें प्रशासन ने क्यों किया ऐलान appeared first on Naya Vichar.

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जयंती विशेष: बिस्मिल का कलम और क्रांति से एक जैसा रिश्ता था

वर्ष 1897 में 11 जून को उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में जन्मे वीरमाता मूलारानी और पिता मुरलीधर के पुत्र, क्रांतिकारी और कलमकार शहीद रामप्रसाद ‘बिस्मिल’ की यह जयंती इस मायने में अत्यंत विशिष्ट है कि उनके नायकत्व में हुए जिस क्रांतिकारी काकोरी ट्रेन एक्शन को गुनाह करार देकर अंग्रेजों ने 19 दिसंबर, 1927 को उन्हें गोरखपुर जेल में शहीद कर डाला था, यह उसका शताब्दी वर्ष है. इससे पहले 2022 में हम बिस्मिल की सवा सौवीं जयंती मना चुके हैं. प्रसंगवश, बिस्मिल की ही शहादत के दिन उनके दो और साथियों अशफाक उल्ला खां व रौशन सिंह को भी इसी गुनाह में शहीद कर दिया गया था- अशफाक को फैजाबाद, जबकि रौशन को इलाहाबाद की मलाका जेल में. गोंडा जेल में बंद उनके एक अन्य साथी राजेंद्रनाथ लाहिड़ी को इससे दो दिन पहले- 17 दिसंबर को- ही सूली की भेंट कर दिया गया था. बिस्मिल के बारे में कहा जाता है कि वे जितने समर्पित क्रांतिकारी थे, उतने ही संवेदनशील कवि/शायर, लेखक और अनुवादक भी. चूंकि अनुवादक होने के लिए एक से अधिक भाषाओं का ज्ञान जरूरी है, इसलिए उन्होंने हिंदी के अतिरिक्त कई अन्य भाषाओं का ज्ञान भी प्राप्त कर रखा था. उनके क्रांतिकारी जीवन की शुरुआत 1915 में हुई थी, जब ऐतिहासिक ‘गदर षड्यंत्र’ में भाई परमानंद को फांसी की सजा से उद्वेलित होकर उन्होंने ब्रिटिश साम्राज्य के समूल विनाश की प्रतिज्ञा की और उसे पूरी करने के लिए अपना पहला हथियार अपनी पुस्तकों की बिक्री से प्राप्त धन से खरीदा था. इस रूप में देखें, तो उनका कलम और क्रांति से एक जैसा रिश्ता था. ब्रिटिश साम्राज्य के समूल विनाश की अपनी प्रतिज्ञा के प्रति वे यावत्जीवन दृढ़ रहे और न कभी यह सोचा कि उनका मिशन अधूरा रह गया, न यह कि उनका बलिदान व्यर्थ हो जाने वाला है. उन्हें विश्वास था कि एक न एक दिन हिंदू-मुसलमान दोनों मिलकर गोरों से अपनी आजादी छीन लेंगे. अलबत्ता, उन्हें कोई कसक थी तो उनकी ही एक गजल के अनुसार बस यही कि ‘काश, अपनी जिंदगी में हम (आजादी का) वो मंजर देखते.’ सुविदित तथ्य है कि बिस्मिल अपनी शहादत से दो दिन पूर्व तक गोरखपुर जेल के अधिकारियों की नजरें बचाकर आत्मकथा लिखते रहे थे, जो गणेशशंकर विद्यार्थी के प्रयासों से उनके शहादत वर्ष में ही प्रकाशित हो गयी थी. यह आत्मकथा क्रांतिकारी आंदोलन की शक्ति का भी पता देती है और उसकी कमजोरियों का भी. इसका भी कि किस तरह कई क्रांतिकारी नामधारियों की प्रांतीयता जनित संकीर्णताएं व भेदभाव क्रांतिकारी आंदोलन की जड़ें मजबूत करने में गंभीर बाधाएं खड़ी करते रहते थे और किस तरह विभिन्न एक्शनों में कमजोर इच्छाशक्ति वाले साथी पुलिस के दमन, अत्याचार व माफी जैसे प्रलोभनों के सामने टूटकर सारा भेद खोल देते थे. बिस्मिल को फांसी के फंदे तक पहुंचाने में भी ऐसे साथियों की बड़ी भूमिका थी. बिस्मिल के ही शब्दों में हालत यह थी कि ‘जिन्हें हम हार समझे थे, गला अपना सजाने को, वही तब नाग बन बैठे थे हमको काट खाने को.’ इन ‘काट खाने को बैठे’ नागों में सबसे बड़ा नाम उस बनारसीलाल का था, जिसने पुलिस के बहकाने पर सेशन कोर्ट में अपने बयान में यह तक कह दिया था कि बिस्मिल क्रांतिकारी आंदोलन के लिए धन जुटाने हेतु किये जाने वाले एक्शनों से हासिल रुपयों से अपने परिवार का निर्वाह करता है. यह बनारसीलाल ‘क्रांतिकारी’ बनने से पहले रायबरेली जिला कांग्रेस कमेटी का मंत्री रह चुका था और असहयोग आंदोलन में उसने छह महीने की कैद की सजा भी भोगी थी. बिस्मिल उस पर बहुत स्नेह रखते थे और आंदोलन में पैसों की तंगी के वक्त भी उसे किसी तरह की कोई कमी नहीं होने देते थे. फिर भी वे उसे इकबाली मुल्जिम बनने से नहीं रोक पाये थे. अपनी अंतिम गजल में संभवतः इसी को लेकर उन्होंने लिखा था- ‘मिट गया जब मिटने वाला फिर सलाम आया तो क्या! दिल की बर्बादी के बाद उनका पयाम आया तो क्या! मिट गयीं जब सब उम्मीदें मिट गये जब सब खयाल, उस घड़ी गर नामावर लेकर पयाम आया तो क्या! आखिरी शब दीद के काबिल थी ‘बिस्मिल’ की तड़प, सुब्ह-दम कोई अगर बाला-ए-बाम आया तो क्या!’ यह जानना भी दिलचस्प है कि 1936 में तुर्की के क्रांतिकारी मुस्तफा कमाल पाशा ने साउथ इस्ट अनातोलिया स्थित अपने देश के दियारबाकिर राज्य में ‘बिस्मिल शहर’ बसाकर उनकी शहादत को सलाम किया था. दियारबाकिर अरबी का शब्द है, जिसका अर्थ है विद्रोहियों का क्षेत्र. पाशा ने दियारबाकिर से ही क्रांति की शुरुआत की थी. उन्होंने अपने संस्मरणों में भी खुद को बिस्मिल से बेहद प्रभावित बताया है. बिस्मिल उनके लिए हिंदुस्तानीय क्रांति के प्रतीक थे. यूं तो बिस्मिल पर भी पाशा का जादू सिर चढ़कर बोलता था. वर्ष 1922 में, तुर्की में विजय दिवस मनाया गया, तो बिस्मिल ने ‘प्रभा’ पत्रिका में ‘विजयी कमाल पाशा’ शीर्षक से लेख लिखा था. The post जयंती विशेष: बिस्मिल का कलम और क्रांति से एक जैसा रिश्ता था appeared first on Naya Vichar.

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Bihar: नशे में धुत स्कॉर्पियो ड्राइवर ने मचाई तबाही! चार लोगों को कुचला, आक्रोशित भीड़ ने गाड़ी को फूंका

Bihar: बिहार के वैशाली जिले के सहदेई बुजुर्ग प्रखंड अंतर्गत सहदेई बाजार रविवार की शाम उस वक्त दहल उठा जब नशे में धुत एक स्कॉर्पियो चालक ने तेज रफ्तार में वाहन चलाते हुए चार लोगों को रौंद डाला. हादसे में दो लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं, जबकि दो अन्य को भी चोटें आई हैं. घटना के बाद आक्रोशित स्थानीय लोगों ने चालक को पकड़कर जमकर पिटाई की और फिर स्कॉर्पियो को आग के हवाले कर दिया. पहले पोल से टकराई स्कॉर्पियो, फिर दौड़ा दी भीड़ पर स्थानीय लोगों के मुताबिक, स्कॉर्पियो काफी तेज रफ्तार में माहवीर चौक से गुजर रही थी. चालक ने पहले एक विद्युत पोल में टक्कर मारी, जहां बर्तन धो रहे राकेश कुमार साह का बेटा धिरु कुमार बाल-बाल बचा. उसे मामूली चोटें आईं. इसके बाद चालक ने गाड़ी तेजी से रेलवे ढाला पार कर रामगंज की ओर भगाया, जहां पैदल चल रहे लोगों को कुचल डाला. घायलों में शेखोपुर निवासी समरजीत कुमार सिंह, रामगंज निवासी पंडित पासवान के दामाद सुरेंद्र पासवान, प्रेम साह और धिरु कुमार शामिल हैं. इनमें से समरजीत कुमार और सुरेंद्र पासवान की स्थिति गंभीर बनी हुई है. उन्हें बेहतर इलाज के लिए रेफर किया गया है. पुलिस एक घंटे तक नहीं पहुंची, गुस्से में फूटी जनता घटना की जानकारी तुरंत डायल 112 को दी गई, लेकिन स्थानीय थाना की पुलिस लगभग एक घंटे तक घटनास्थल पर नहीं पहुंची. इस देरी को लेकर लोगों का गुस्सा भड़क उठा। भीड़ ने स्कॉर्पियो चालक को पकड़कर जमकर पीटा और फिर गाड़ी को तोड़फोड़ कर आग लगा दी. मौके पर हालात इतने तनावपूर्ण हो गए कि फोर्स को बुलाना पड़ा. Also Read: बिहार में थाई मांगुर पर कसेगा शिकंजा, कैंसर फैलाने वाली मछली के खिलाफ अब चलेगा प्रशासन का डंडा प्रशासन की सुस्ती पर उठे सवाल स्थानीय लोगों ने पुलिस की लापरवाही और शराब के खुलेआम सेवन को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी. लोगों का कहना है कि जब शराबबंदी है, तो नशे में धुत चालक इतनी आसानी से स्कॉर्पियो लेकर सड़क पर कैसे घूम रहा था अगर पुलिस समय पर पहुंचती, तो गाड़ी में आग लगाने जैसी स्थिति नहीं आती. The post Bihar: नशे में धुत स्कॉर्पियो ड्राइवर ने मचाई तबाही! चार लोगों को कुचला, आक्रोशित भीड़ ने गाड़ी को फूंका appeared first on Naya Vichar.

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Latest Mehndi Design: नई-नवेली दुल्हन लगाएं ये मेहंदी के डिजाइन, साजन जी हो जाएंगे दीवाने 

Latest Mehndi Design:  दुल्हन बनना सभी लड़कियों के लिए बहुत खास एहसास होता है. ऐसे में हर एक चीज का ध्यान बड़े ही नजाकत के साथ रखना पड़ता है. ऐसे में दुल्हन अपनी मेहंदी को लेकर काफी ज्यादा सचेत रहती है कि कैसे आपने खास दिन के लिए खास मेहंदी लगाएं. आज के समय में दुल्हन को हर किसी से अलग डिजाइन जगन ज्यादा पसंद आता है. चलिए इस आर्टिकल में जानते हैं कि दुल्हन कैसे सबसे हटके मेहंदी के डिजाइन लगा सकते हैं.  दूल्हा दुल्हन वाले मेहंदी मेहंदी में साधारण डिजाइन तो सब लोग लगाते हैं लेकिन क्या आप जानते हैं कि हाथों में दूल्हा और दुल्हन के डिजाइन वाली मेहंदी लगाना आज के समय में काफी ज्यादा ट्रेंड में है. इसे लगाने के बाद हाथों की खूबसूरती और बढ़ जाती है. Dulha dulhan mehdni  डोली वाली डिजाइन  कई बार तो ऐसा भी होता है कि दुल्हन को अपने हाथों में डोली और हाथी घोड़े के डिजाइन लगवाना ज्यादा पसंद आता है. इन सभी डिजाइन को हाथ में लगाने से बाकी केहाथों में और दुल्हन के हाथों में अंतर नजर आता है.  Doli भरे हुए हाथ  आज के समय में बड़े लोगों को देख कर दुल्हन भी हाथों में मिनीमल डिजाइन लगाते हैं. लेकिन दुल्हन का हाथ भर हुआ जितना खूबसूरत लगता है उतना शयड ही मिनीमल डिजाइन लगे. ऐसे में दुल्हन अपने खास दिन में भरे हुए हाथ के डिजाइन लगा सकती हैं.  Bhare hath ki mehndi बारीक मेहंदी डिजाइन  दुल्हन की मेहंदी अगर बारीक लगी हुई हो तो काफी ज्यादा अच्छी लगती है. ऐसे में अगर बारीकी के साथ लगाई गई मेहंदी डिजाइन को देखें तो बहुत ज्यादा ही खूबसूरत लगता है.  Baarik desigen The post Latest Mehndi Design: नई-नवेली दुल्हन लगाएं ये मेहंदी के डिजाइन, साजन जी हो जाएंगे दीवाने  appeared first on Naya Vichar.

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छपरा में पुलिसकर्मियों की बस में ट्रक ने मारी टक्कर, पीएम मोदी के कार्यक्रम की तैयारी में जा रहे 17 जवान जख्मी

छपरा में पुलिसकर्मियों की बस में ट्रक ने टक्कर मार दी. पीएम मोदी के कार्यक्रम को लेकर रोहतास के डेहरी ऑन सोन से सिवान जा रही पुलिसकर्मियों की बस छपरा में हादसे का शिकार हो गयी. बालू लदे ट्रक ने बस में टक्कर मार दी. हादसे में करीब डेढ़ दर्जन पुलिसकर्मी जख्मी हुए हैं. वहीं बस के ड्राइवर की हालत अधिक गंभीर देखते हुए उसे हायर सेंटर रेफर किया गया. कैसे हुआ हादसा? अस्पताल में इलाज कराने पहुंची जख्मी स्त्री पुलिसकर्मी ने बताया कि बस में सवार होकर सभी पुलिसकर्मी सिवान जा रहे थे. बस खड़ी थी. इस दौरान एक ट्रक ने आकर जोरदार टक्कर मार दी. हादसे में शिकार बने पुलिसकर्मियों को आनन-फानन में अस्पताल लाया गया. जहां उनका इलाज हुआ. मिली जानकारी के अनुसार, बस के ड्राइवर को चोट अधिक आयी है. जिन्हें बेहतर इलाज के लिए रेफर कर दिया गया है. (सारण से हरि प्रकाश मिश्र की रिपोर्ट) समाचार अपडेट की जा रही है. The post छपरा में पुलिसकर्मियों की बस में ट्रक ने मारी टक्कर, पीएम मोदी के कार्यक्रम की तैयारी में जा रहे 17 जवान जख्मी appeared first on Naya Vichar.

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