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July 1, 2025

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JAC 11th Result 2025 OUT: जारी हो गया झारखंड बोर्ड 11वीं का रिजल्ट, jacresults.com पर करें चेक

JAC 11th Result 2025 OUT: झारखंड एकेडमिक काउंसिल (JAC) ने 11वीं कक्षा के परीक्षा परिणाम जारी कर दिए हैं. जिन स्टूडेंट्स ने परीक्षा दी थी, वे अब आधिकारिक वेबसाइट jacresults.com या jac.jharkhand.gov.in पर जाकर अपना रिजल्ट ऑनलाइन चेक कर सकते हैं. JAC 11वीं का रिजल्ट ऐसे चेक करें jac.jharkhand.gov.in या jacresults.com पर जाएं. “Class XI Examination – 2025” लिंक पर क्लिक करें. अपना रोल नंबर और रोल कोड डालें. रिजल्ट स्क्रीन पर दिखेगा, उसका प्रिंटआउट ले सकते हैं. कब हुई थी परीक्षा? झारखंड बोर्ड की 11वीं कक्षा की परीक्षा 20 से 22 मई 2025 के बीच आयोजित की गई थी. यह परीक्षा दो सिटिंग में हुई थी. पहली सिटिंग सुबह 10:45 बजे से दोपहर 12 बजे तक चली, जबकि दूसरी सिटिंग दोपहर 2 बजे से शुरू हुई. इस परीक्षा में करीब 3.5 लाख छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया था. Also Read: Success Story: झोपड़ी से शुरू हुआ सफर, पिता फेरी लगाकर पालते थे परिवार… बेटे ने UPSC पास कर रच दिया इतिहास Also Read: Best MBBS College: बिहार का ये मेडिकल कॉलेज बना छात्रों की पहली पसंद, 2 लाख से कम में करें MBBS, शानदार प्लेसमेंट गारंटी! The post JAC 11th Result 2025 OUT: जारी हो गया झारखंड बोर्ड 11वीं का रिजल्ट, jacresults.com पर करें चेक appeared first on Naya Vichar.

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Home Remedies for Acne: 7 दिन में चेहरे के मुंहासों से छुटकारा पाएं, जानिए ये 4 आसान और असरदार देसी उपाय

Home Remedies for Acne: चेहरे पर पर मुंहासे होना एक आम समस्या है, लेकिन यह खूबसूरती को बिगाड़ देता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि कुछ आसान और देसी नुस्खों से आप सिर्फ सात दिन में अपने चेहरे को साफ और दमकता हुआ बना सकते हैं? बिना महंगे प्रोडक्ट्स के, घर पर ही ये उपाय आपकी स्किन को हेल्दी और निखार देंगे. अगर आप भी मुंहासों से परेशान हैं और जल्दी असर दिखाने वाले घरेलू तरीके ढूंढ रहे हैं, तो ये चार सरल और असरदार उपाय आपके लिए हैं. तो आइये जानते हैं की आप कैसे घरेलु उपायों से चेहरे के मुंहासे को 7 दिन में कम कर सकते हैं. नीम का पेस्ट लगाएं नीम में कई तरह के रोगाणु मारने वाले गुण होते हैं. आप नीम की पत्तियों को पीसकर पेस्ट बना लें. इस पेस्ट को रोजाना मुंहासों वाली जगह पर लगाएं. इससे आपकी त्वचा साफ होगी और मुंहासे जल्दी ठीक होंगे. शहद और दालचीनी का मास्क शहद और दालचीनी दोनों में एंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं. एक चम्मच शहद में आधा चम्मच दालचीनी पाउडर मिलाएं और अच्छी तरह मिलाएं. इसे चेहरे पर 15 मिनट के लिए लगाएं और फिर ठंडे पानी से धो लें. यह मास्क मुंहासों को कम करता है और दाग भी हल्का करता है. ये भी पढ़ें: Beauty Tips: चेहरा 10 साल छोटा दिखेगा अगर अपनाएं ये 3 ब्यूटी हैबिट्स ये भी पढ़ें: Skincare Tips: आपकी त्वचा के लिए ये 5 स्किनकेयर टिप्स जानना है जरूरी, तुरंत अपनाएं हल्दी और दूध से फेस पैक बनाएं हल्दी में सूजन कम करने वाले गुण होते हैं और दूध त्वचा को मुलायम बनाता है. आप थोड़ी हल्दी लेकर उसमें दूध मिलाकर पेस्ट बना लें. इसे चेहरे पर लगाएं और 20 मिनट बाद साफ पानी से धो लें. नियमित इस्तेमाल से त्वचा साफ़ और दमकदार हो जाएगी. एलोवेरा जेल का इस्तेमाल करें एलोवेरा त्वचा को ठंडक और आराम देता है. आप ताजा एलोवेरा जेल निकालकर मुंहासों पर रोज लगाएं. यह त्वचा के बैक्टीरिया को कम करता है और नए दाने बनने से रोकता है. इससे आपकी स्किन जल्दी ठीक होकर सुंदर दिखेगी. ये भी पढ़ें: Tips to Stop Hair Fall: बालों के झड़ने से बचाने के लिए अपनाएं ये 5 आसान टिप्स ये भी पढ़ें: Natural Beauty Hacks: बिना मेकअप भी पाएं दमकती और फ्रेश त्वचा, जानिए आसान और असरदार नुस्खे Disclaimer: यह आर्टिकल सामान्य जानकारियों और मान्यताओं पर आधारित है. नया विचार इसकी पुष्टि नहीं करता है. The post Home Remedies for Acne: 7 दिन में चेहरे के मुंहासों से छुटकारा पाएं, जानिए ये 4 आसान और असरदार देसी उपाय appeared first on Naya Vichar.

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Aadra Nakshtra Bihari Thali: मानसून बिहार के लिए इसलिए होती है खास… दाल पूरी, आम और खीर का भोग लगाकर निभाते हैं परंपरा

Aadra Nakshtra Bihari Thali: देशभर में मानसून के एंट्री को भले ही एक सामान्य मौसम में परिवर्तन के रुप में देखा जाता है. लेकिन, बात जब बिहार की होती है तो यहां मानसून का आगमन बेहद ही खास माना जाता है. एक खास परंपरा के तहत बारिश का सम्मान किया जाता है. इसके साथ ही दाल पूरी, आम और खीर का भोग लगाकर पूरी परंपरा निभाई जाती है. बिहार में मानसून पूरी तरह से एक्टिव हो गया है. लगभग हर जिले में झमाझम बारिश का दौर जारी है. इस बीच ‘आद्रा नक्षत्र’ भी आ चुका है. बता दें कि, इसका इंतजार बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी बड़े ही बेसब्री से करते हैं. सालों से चली आ रही है परंपरा दरअसल, हर बिहारी के घर में ‘आद्रा नक्षत्र’ के आगमन के दौरान दाल पूरी, आम और खीर बनता है. पूरी, खीर और आम से सजी थाली परोसी जाती है. इसकी बेहद ही खास परंपरा सालों से चलती आ रही है, जो कि काफी प्रचलित है. दरअसल, कहा जाता है कि, बिहार के लोग एक खास स्वाद के साथ बारिश का स्वागत करते हैं और सम्मान देते हैं. यह समय खेती-किसानी की शुरूआत का माना जाता है, जिसे लोग उत्सव के रुप में मनाते हैं. कहा जाता है कि, बिहार में आद्रा नक्षत्र के दौरान इस खास स्वाद को बनाने और खाने की परंपरा सैकड़ों सालों से जारी है. भगवान इंद्र से करते हैं कामना इसके साथ ही बिहार की संस्कृति में बारिश का बेहद ही खास महत्व माना गया है. यह बिहार की उपजाऊ जमीन पर खेती की अच्छी संभावना को बढ़ाती है. ऐसे में बारिश की निरंतरता बनाए रखने की कामना करते हुए दाल पूरी, खीर और आम का भोग इंद्र भगवान को लगाया जाता है. इंद्र भगवान से कामना की जाती है कि, ऐसे ही बारिश होती रहे, जिससे कृषि और पैदावार अच्छी हो. इस दौरान धान की रोपाई की जाती है. बता दें कि, यह परंपरा सैकड़ों साल से चलती आ रही है. अदरा नक्षत्र को ही ज्योतिष में आद्रा नक्षत्र कहा जाता है. Also Read: Bihar News: 10 साल की बच्ची के गले में लिपटा दो विषैला सांप, जान की बाजी लगा कर पिता ने बचाया The post Aadra Nakshtra Bihari Thali: मानसून बिहार के लिए इसलिए होती है खास… दाल पूरी, आम और खीर का भोग लगाकर निभाते हैं परंपरा appeared first on Naya Vichar.

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बिहार ऑर्थोपेडिक एसोसिएशन अब मिडकॉन भी शुरू किया, मुजफ्फपुर में हुआ पहला कॉन्फ्रेंस  

बिहार ऑर्थोपेडिक एसोसिएशन (बीओए) हर वर्ष वार्षिक सम्मेलन ‘बोआकॉन’ करता रहा है.  आईएमए से जुड़े लगभग सभी ब्रांच वार्षिक सम्मेलन करते हैं. लेकिन इस बार से बिहार ऑर्थोपेडिक एसोसिएशन ने एक नई पहल शुरू की है. अब वर्ष के बीच में बीओए ‘मिडकॉन’ शुरू किया गया हैं. पहला बीओए मिडकॉन रविवार को मुजफ्फपुर में समाप्त हुआ. कॉन्फ्रेंस में शामिल डॉक्टर मिडकॉन -25 मुजफ्फपुर में हुआ समाप्त: डॉ प्रवीण कुमार साहू इस संबंध में एसोसिएशन के सचिव और एनएमसीएच, पटना में ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ प्रवीण कुमार साहू का कहना है कि यह शुरूआत ऑर्थोपेडिक सर्जन के बीच में कम्युनिकेशन को और सघन बनाने के लिए किया गया है. अब बिहार के हड्डी रोग विशेषज्ञ वर्ष एक बार नहीं, बल्कि दो बार मिलेंगे और नई तकनीक व विधा पर विचारों का आदान-प्रदान करेंगे. रविवार को दो दिवसीय मिडकॉन-25 मुजफ्फपुर में समाप्त हुआ, जो बिहार ऑर्थोपेडिक एसोसिएशन के तत्वाधान में मुजफ्फपुर ऑर्थोपेडिक क्लब के द्वारा आयोजित हुआ.  बिहार की ताजा समाचारों के लिए यहां क्लिक करें केंद्रीय जल शक्ति राज्य मंत्री ने किया उद्धाटन  कॉन्फ्रेंस का उद्घाटन केंद्रीय जल शक्ति राज्य मंत्री डॉ राजभूषण चौधरी किए. इसकी अध्यक्षता बिहार ऑर्थोपेडिक एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ उपेंद्र प्रसाद ने की. कांफ्रेंस में कुल 48 शोध पत्र पेश किए गए जिसमें एक मेरा भी शोध पत्र था. छह प्रजेंटेशन था. पोस्ट ग्रेजुएट विद्यार्थी भी अपना पेपर प्रस्तुत किए।हमलोग हर वर्ष मिडकॉन राज्य के अलग अलग जिलों में करेंगे.  इसे भी पढ़ें: Doctors Day Special: बचाव ही बेहतर इलाज है, स्त्रीएं नियमित कराएं अपनी जांच: डॉ. प्रज्ञा मिश्रा चौधरी The post बिहार ऑर्थोपेडिक एसोसिएशन अब मिडकॉन भी शुरू किया, मुजफ्फपुर में हुआ पहला कॉन्फ्रेंस   appeared first on Naya Vichar.

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Chaat Recipe: टिक्की और समोसा नहीं, बनाएं शकरकंद से चाट 

Chaat Recipe: शाम में जब हल्की-सी भूख लगती है और कुछ चटपटा खाने का मन करता है, तब शकरकंद चाट एक परफेक्ट साथी बन जाती है. ये कोई आम चाट नहीं, बल्कि बचपन की गलियों की याद, सर्द हवाओं में लिपटी वो खुशबू है जो सीधे दिल तक जाती है. शकरकंद पोषक तत्वों से भरपूर होती है, इसलिए ये स्वाद के साथ सेहत भी देती हैं. यही वजह है कि इसे बड़े बूढ़े से लेकर शिशु तक सब पसंद करते हैं। चाहे ठेले पर खड़ी भीड़ हो या घर की रसोई, शकरकंद चाट हर जगह अपनी सादगी और स्वाद से दिल जीत लेती है. तो चलिए घर पर इसे बनाने के बारे में जानते हैं इस आर्टिकल में. शकरकंद चाट बनाने की सामग्री  शकरकंद 1-2 उबले ताजा दही (दही) 2 बड़े चम्मच  नींबू का रस 1 छोटा चम्मच  चाट मसाला 1 छोटा चम्मच  नमक स्वादानुसार  प्याज, टमाटर, धनिया बारीक कटा हुआ  अनार के दाने1 बड़ा चम्मच  1 बड़ा चम्मच बारीक सेव (गार्निश के लिए) यह भी पढ़ें- Palak Paratha Recipe: स्वाद और सेहत का बेस्ट कॉम्बो है ये पलाक पराठा, जानें बनाने की आसान विधि यह भी पढ़ें- Masala Papad Recipe: सिर्फ 5 मिनट में तीखे स्वाद और कुरकुरेपन से भरा मसाला पापड़ शकरकंद चाट बनाने की विधि सबसे पहले शकरकंद को छीलकर चार भाग में काट लें. अब इसमें उबले हुए चने, प्याज, टमाटर, धनिया, नींबू का रस, चाट मसाला और नमक डालें. इसके बाद अब इसमें ताजा दही और अनार मिलाएं. ऊपर से क्रंच के लिए सेव डालें और सबको परोसें. यह भी पढ़ें- Namkeen Recipe: बाजार से नहीं… अब घर पर बनाएं मूंग दाल नमकीन, जानें आसान विधि यह भी पढ़ें- Mushroom Recipe: बारिश के मौसम में बनाएं गरमागरम क्रिस्पी मशरूम पकौड़ा The post Chaat Recipe: टिक्की और समोसा नहीं, बनाएं शकरकंद से चाट  appeared first on Naya Vichar.

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Maalik Trailer: ‘मजबूर बाप का मजबूत बेटा’ बने राजकुमार राव, मालिक का धमाकेदार ट्रेलर आउट, जानें रिलीज डेट

Maalik Trailer: राजकुमार राव की मच अवेटेड फिल्म ‘मालिक’ का ट्रेलर आखिरकार रिलीज हो गया है और इसे देखने के बाद सोशल मीडिया पर फैंस के रिएक्शन जबरदस्त हैं. ट्रेलर में जहां एक ओर राव का दमदार डायलॉग डिलीवरी देखने को मिलती है, वहीं फिल्म की कहानी में एक्शन, इमोशन और नेतृत्व का तगड़ा कॉम्बिनेशन नजर आता है. ऐसे में फिल्म की खासियत से लेकर रिलीज डेट के बारे में सबकुछ विस्तार से बताते हैं. ट्रेलर की शुरुआत से ही छा गए राजकुमार ट्रेलर की शुरुआत एक इमोशनल बातचीत से होती है, जहां राजकुमार राव कहते हैं – “हम मजबूर बाप का बेटा हैं, किस्मत थी हमारी, पर आपको मजबूत बेटा का बाप बनना पड़ेगा, किस्मत है आपकी.” इस संवाद ने फिल्म की टोन को तुरंत सेट कर दिया है. फिल्म में वह एक आम इंसान से असाधारण ‘मालिक’ बनने का सफर तय करते हैं. ट्रेलर में क्या है खास? राजकुमार राव का रफ एंड टफ लुक ट्रेलर में जान डाल रहा है. वहीं, मानुषी छिल्लर पत्नी के रोल में काफी बेहतरीन लग रही हैं. इसके अलावा विधानसभा चुनाव से लेकर बंदूक उठाने तक का सफर और एक्शन और पॉलिटिक्स का जबरदस्त मिश्रण फिल्म की एक्साइटमेंट को सातवें आसमान पर पहुंचा चूका है. ट्रेलर में हुमा कुरैशी, प्रोसेनजीत चटर्जी और स्वानंद किरकिरे की झलक भी दिखती है. कब रिलीज होगी फिल्म? राजकुमार राव की ‘मालिक’ 11 जुलाई, 2025 को सिनेमाघरों में रिलीज होने जा रही है. पुलकित के निर्देशन में बनी यह फिल्म एक गैंगस्टर ड्रामा है, जिसमें नेतृत्व, समाज और क्राइम के बीच फंसे एक आम इंसान की कहानी को दिखाया गया है. यह भी पढ़े: Kannappa Worldwide Collection: प्रभास-अक्षय की ‘कन्नप्पा’ दुनियाभर में हिट या फ्लॉप? आंकड़े चौंका देंगे The post Maalik Trailer: ‘मजबूर बाप का मजबूत बेटा’ बने राजकुमार राव, मालिक का धमाकेदार ट्रेलर आउट, जानें रिलीज डेट appeared first on Naya Vichar.

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“पूरा गांधी परिवार, KGB या CIA का कठपुतली था…” निशिकांत दुबे के बयान से बिहार में मचा सियासी संग्राम 

Bihar Vidhan Sabha Chunav 2025: बिहार विधानसभा चुनाव के नजदीक आते ही आरोप-प्रत्यारोप और सियासी बयानबाजियां बढ़ गई हैं. झारखंड के गोड्डा से हिंदुस्तानीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद निशिकांत दुबे ने कांग्रेस के फंडिंग को लेकर बड़ा खुलासा किया है. सांसद दुबे के बयान पर राष्ट्रीय जनता दल (RJD) से राज्यसभा सांसद मनोज झ और जेडीयू प्रवक्ता नीरज कुमार ने अपनी राय रखी है.  मनोज झा ने किया पलटवार ?  आरजेडी राज्यसभा सांसद मनोज कुमार झा ने बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे के ‘CIA का पैसा कांग्रेस के पास’ वाले बयान पर कहा, “सुबह-सुबह इनको कोई अंकल जी या आंटी जी व्हाट्सएप फॉरवर्ड भेजते हैं, और ये उसे जस का तस डाल देते हैं.  गिरफ्तार करवा लो भाई, प्रशासन तो तुम्हारी है! चिंता करो गोड्डा की.  तुम इतने बेताब हो कि किसी तरह प्रधानमंत्री जी की नजर में आ जाओ. ऐसा नहीं होता. बात करने में एक गंभीरता होनी चाहिए. कई लोगों पर आरोप हैं. फिर इतिहास में क्यों जा रहे हो? अभी डोनाल्ड ट्रम्प के बारे में टिप्पणी करो ना भाई! 18 बार बोल चुके हैं. वहां तो हिम्मत नहीं पड़ती.” JDU प्रवक्ता नीरज कुमार ने क्या कहा ?  “पूरा गांधी परिवार, kgb या cia का कठपुतली था…” निशिकांत दुबे के बयान से बिहार में मचा सियासी संग्राम  3 जेडीयू प्रवक्ता नीरज कुमार ने बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे के ‘CIA का पैसा कांग्रेस के पास’ वाले बयान पर कहा, “अगर CIA का पैसा कांग्रेस पार्टी की नेतृत्वक फंडिंग में इस्तेमाल हो रहा है, तो यह चिंता का विषय है. चिंता केवल इसी बात की नहीं है, यह देश की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी महत्वपूर्ण है. निशिकांत दुबे जी के पास कोई साक्ष्य होगा, वह साक्ष्य सक्षम एजेंसी को उपलब्ध कराना उनका दायित्व है.” Also Read: तेजस्वी यादव के बयान पर भड़की भाजपा, मंत्री बोलें- किसकी इतनी हिम्मत हो गई कि…?  आखिर निशिकांत दुबे ने क्या कहा ?  भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने कहा, ” मैंने अपने सोशल मीडिया पर कल भी कुछ बाते रखी थीं और आज भी रखी हैं. कल मैंने कहा था कि 2 बड़ी एजेंसी CIA और KGB हैं, जो प्रत्येक देशों में काम करती हैं. CIA और मित्रोखिन की डायरियों में इस बात का उल्लेख है कि दिवंगत कांग्रेस नेता एचकेएल भगत के नेतृत्व में कांग्रेस के 150 सांसद को सोवियत रूस द्वारा वित्त पोषित किया गया था. इसमें यह भी उल्लेख है कि 16000 आर्टिकल ऐसे छपे जो रूस अपने हिसाब से छपवाता था.” #WATCH | Delhi: BJP MP Nishikant Dubey says “The diaries of CIA and Mitrokhin mention that under the leadership of the late Congress leader HKL Bhagat, more than 150 Congress MPs were funded by Soviet Russia. It also mentions that a total of 16,000 news articles were published by… https://t.co/5CqwNDiBel pic.twitter.com/snxzLBm86Q — ANI (@ANI) July 1, 2025 उन्होंने आगे कहा कि इसमें यह भी उल्लेख है कि कांग्रेस उम्मीदवार सुभद्रा जोशी ने 1977-80 तक चुनाव के नाम पर जर्मन प्रशासन से 5 लाख रुपए लिए और उसके बाद उनको इंडो-जर्मन फोरम का अध्यक्ष बना दिया गया. अगर आप इसे देखें तो ऐसा लगता था कि गांधी परिवार के नेतृत्व में हमारा देश सोवियत रूस को बेच दिया गया था. जब 2004 में मनमोहन सिंह की प्रशासन बनी तो R.A.W. के संयुक्त निदेशक रवींद्र सिंह को भगा दिया गया और आज तक उनका कोई अता-पता नहीं है. ये सारी बातें बताती हैं कि 2014 तक, अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल के 5-6 साल को छोड़ दें तो ये प्रशासन या तो KGB या CIA चला रही थी. कांग्रेस और पूरा गांधी परिवार इन दोनों एजेंसियों की कठपुतली था और ये देश के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है. The post “पूरा गांधी परिवार, KGB या CIA का कठपुतली था…” निशिकांत दुबे के बयान से बिहार में मचा सियासी संग्राम  appeared first on Naya Vichar.

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पढ़ना चाहती हूं महाराज जी… सीएम योगी से बोली पंखुड़ी, मिला ऐसा जवाब कि आंखें भर आईं

Gorakhpur News: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जनता दर्शन कार्यक्रम में आज एक मार्मिक दृश्य देखने को मिला, जिसने प्रशासनिक संवेदनशीलता और मानवीयता की मिसाल पेश की. कोतवाली क्षेत्र के पुरदिलपुर की रहने वाली कक्षा 7 की छात्रा पंखुड़ी त्रिपाठी जब मुख्यमंत्री के सामने अपनी पढ़ाई जारी रखने की गुहार लेकर पहुंची, तो मुख्यमंत्री ने न सिर्फ उसकी बात पूरी गंभीरता से सुनी, बल्कि भरोसा दिलाया कि उसकी पढ़ाई किसी भी कीमत पर नहीं रुकेगी. मुख्यमंत्री ने कहा कि या तो उसकी फीस माफ करवाई जाएगी या फिर शासन की ओर से उसकी पढ़ाई की पूरी व्यवस्था कर दी जाएगी. पंखुड़ी ने जनता दर्शन में मुख्यमंत्री से कहा, “महाराज जी, मैं पढ़ना चाहती हूं लेकिन हमारे पास फीस भरने के पैसे नहीं हैं. कृपया मदद कीजिए.” इस पर मुख्यमंत्री थोड़ी देर रुक गए, बच्ची से आत्मीयता के साथ बातचीत की और पूरी परिस्थिति समझी. जब पंखुड़ी ने बताया कि वह एक इंग्लिश मीडियम स्कूल में पढ़ती है और उसके पिता दिव्यांग हैं, जबकि मां मीनाक्षी एक दुकान पर काम करके घर चला रही हैं, तो मुख्यमंत्री ने तुरंत अधिकारियों को निर्देशित किया कि इस बच्ची की पढ़ाई किसी भी सूरत में नहीं रुकनी चाहिए. मुख्यमंत्री ने कहा, “बिलकुल परेशान मत हो बेटा, तुम्हारी पढ़ाई में कोई रुकावट नहीं आने देंगे. तुम्हारी फीस माफ कराने की कोशिश करेंगे और अगर माफ नहीं हुई तो प्रशासन खुद तुम्हारी फीस देगी. खूब मन लगाकर पढ़ो.” मुख्यमंत्री के इस भरोसे से पंखुड़ी भावविभोर हो गई और बोली, “महाराज जी जैसा कोई नहीं है.” मुख्यमंत्री के साथ फोटो खिंचवाने की पंखुड़ी की इच्छा भी मुख्यमंत्री ने पूरी की, जिससे उसके चेहरे पर खुशी की लहर दौड़ गई. यह पल उसके लिए जीवनभर की याद बन गया. जनता की पीड़ा सुनने और समाधान का भरोसा देने वाले मुख्यमंत्री गोरखपुर प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मंगलवार सुबह गोरखनाथ मंदिर स्थित महंत दिग्विजयनाथ स्मृति भवन के सभागार में जनता दर्शन कार्यक्रम में शामिल हुए. यहां उन्होंने करीब 100 से ज्यादा लोगों की समस्याएं सुनीं और उनके समाधान के लिए अधिकारियों को जरूरी निर्देश दिए. मुख्यमंत्री ने कहा कि “जनता की समस्याओं का समाधान करना हमारी प्रशासन की पहली प्राथमिकता है. हर व्यक्ति की पीड़ा को गंभीरता से लें और समयबद्ध ढंग से उसका समाधान करें. इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं चलेगी.” मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर लोगों की मदद के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए कि इलाज कराने के लिए जरूरतमंद मरीजों से अस्पताल का इस्टीमेट मंगवाकर शासन को भेजा जाए ताकि तत्काल मदद की जा सके. साथ ही आवास योजना और अन्य कल्याणकारी योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक जरूरतमंदों को दिलाने का निर्देश दिया गया. मानवीय संवेदना की मिसाल बने मुख्यमंत्री योगी आज का दिन केवल पंखुड़ी के लिए नहीं बल्कि पूरे गोरखपुर के लिए एक प्रेरणा बन गया. जब एक साधारण सी बच्ची ने अपने सपनों को बचाने के लिए मुख्यमंत्री से मदद मांगी, तो उन्हें सिर्फ आश्वासन नहीं मिला बल्कि समाधान का ठोस भरोसा भी मिला. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का यह रूप न सिर्फ एक संवेदनशील प्रशासक का है बल्कि एक अभिभावक की तरह बच्चों के भविष्य को संवारने वाला भी है. पंखुड़ी के लिए एक जुलाई सिर्फ नया सत्र नहीं, बल्कि नए विश्वास, नई उम्मीद और एक नई शुरुआत का दिन बन गया. The post पढ़ना चाहती हूं महाराज जी… सीएम योगी से बोली पंखुड़ी, मिला ऐसा जवाब कि आंखें भर आईं appeared first on Naya Vichar.

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How Many BTech Seats: इतने मार्क्स पर IIT Delhi में तुरंत मिल जाएगा एडमिशन, देखें बीटेक कंप्यूटर साइंस की कितनी सीटें

How Many BTech Seats: इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए जब भी किसी अच्छे कॉलेज का नाम लिया जाता है, तो सबसे पहले हिंदुस्तानीय प्रौद्योगिकी संस्थान यानी IIT का ही नाम आता है. इन संस्थानों में भी IIT Delhi को हिंदुस्तान के सर्वश्रेष्ठ बीटेक कॉलेजों में शीर्ष स्थान प्राप्त है. इसकी वजह यहां की बेहतरीन फैकल्टी, अत्याधुनिक लैब्स, और शानदार कैंपस प्लेसमेंट हैं. हर साल हजारों छात्र IIT Delhi में बीटेक करने का सपना देखते हैं, खासकर कंप्यूटर साइंस ब्रांच में, जिसकी डिमांड सबसे ज्यादा रहती है. बता दें कि इस कॉलेज का अक ब्रांच अब अबू धाबी में भी है. यहां भी बीटेक के कई ब्रांच में दाखिला शुरू हो गया है. IIT Delhi How Many BTech Seats: कितनी है बीटेक की सीटें? JoSAA 2025 की सीट मैट्रिक्स में बताया गया है कि आईआईटी दिल्ली में ग्रेजुएशम लेवल पर कुल 1209 सीटें हैं. इसमें बीटेक कोर्स में कुल 865 सीटें हैं. इसके अलावा BTech+MTech कोर्स के लिए दाखिला होता है. कंप्यूटर साइंस ब्रांच सबसे ज्यादा मशहूर है. IIT Delhi BTech Computer Science Admission यहां डायरेक्ट लिंक से चेक करें. IIT Delhi में बीटेक कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग (CSE) ब्रांच के लिए कुल 173 सीटें निर्धारित की गई हैं. इन सीटों के लिए हर साल लाखों उम्मीदवार JEE Advanced परीक्षा में शामिल होते हैं और कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करते हैं. सीमित सीटों के कारण यहां एडमिशन लेना आसान नहीं होता. कितने मार्क्स पर एडमिशन? उम्मीदवारों को ऑल इंडिया रैंकिंग के आधार पर ही सीट मिलती है, और कटऑफ हर साल बदलता रहता है. सीटें OBC, SC, ST और अन्य आरक्षित श्रेणियों के लिए अलग-अलग आरक्षित होती हैं, लेकिन जनरल कैटेगरी के लिए भी मुकाबला काफी तगड़ा रहता है. कंप्यूटर साइंस ब्रांच IIT Delhi की सबसे लोकप्रिय शाखाओं में शामिल है, इसलिए यहां कटऑफ हमेशा ऊंचा जाता है. पिछले कुछ वर्षों के ट्रेंड को देखें तो जनरल कैटेगरी में JEE Advanced में 98 से 99 परसेंटाइल तक अंक लाने वाले छात्र ही सीट हासिल कर पाते हैं. इसका मतलब साफ है कि अगर IIT Delhi के कंप्यूटर साइंस ब्रांच में दाखिला चाहिए तो पिछले साल क्लोजिंग रैंक 116 था. IIT Delhi Placement Record: प्लेसमेंट रिकॉर्ड शानदार IIT Delhi का प्लेसमेंट रिकॉर्ड देशभर में बेहतरीन माना जाता है. यहां बड़ी-बड़ी मल्टीनेशनल कंपनियां हर साल करोड़ों के पैकेज लेकर आती हैं. गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, अमेजन जैसी कंपनियां लगातार IIT Delhi के टॉप टैलेंट को हायर करती हैं. इसके अलावा, यहां की फैकल्टी भी रिसर्च, इनोवेशन और प्रोजेक्ट गाइडेंस में छात्रों का पूरा सहयोग करती है. यही वजह है कि छात्र कंप्यूटर साइंस जैसी टॉप ब्रांच के लिए IIT Delhi को पहली पसंद मानते हैं. ज्यादा जानकारी के लिए ऑफिशियल वेबसाइट- home.iitd.ac.in पर जाना होगा. ये भी पढ़ें: JEE में हार नहीं मानी, ड्रॉप ईयर में प्लानिंग बदली, और बन गए IITian! The post How Many BTech Seats: इतने मार्क्स पर IIT Delhi में तुरंत मिल जाएगा एडमिशन, देखें बीटेक कंप्यूटर साइंस की कितनी सीटें appeared first on Naya Vichar.

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Bihar Chunav: बिहार का वह नेता जो पहले बने प्रधानमंत्री फिर ली मुख्यमंत्री पद की शपथ, 15 साल तक रहे सीएम

Bihar Chunav: बिहार अब विधानसभा चुनाव के मुहाने पर खड़ा है. वोटर वेरिफिकेशन का दौर खत्म होते ही चुनाव आयोग 18वीं विधानसभा चुनाव का ऐलान करेगा. ऐसे में आज हम आपको बिहार के एक ऐसे नेता के बारे में बताएंगे जिसकी पहचान सिर्फ राजनेता की नहीं बल्कि आजादी के सिपाही और समाज सुधारक की भी रही है. यह नेता जब नेतृत्व में आए तो पहले प्रधानमंत्री बने. इसके बाद उन्होंने मुख्यमंत्री पद की शपथ और जब मुख्यमंत्री बने तो 15 साल तक इस पद पर रहे और जब उनका निधन हुआ तो उनकी तिजोरी में महज 24 हजार रुपये थे. हम बात कर रहे हैं बिहार के पहले मुख्यमंत्री और बिहार केसरी श्रीकृष्ण सिंह की. आइए जानते हैं उनके प्रधानमंत्री से मुख्यमंत्री बनने की कहानी.  श्रीकृष्ण सिंह 1937 में ली प्रधानमंत्री पद की ली शपथ  साल 1935 में अंग्रेजों ने ब्रिटिश संसद से हिंदुस्तान प्रशासन अधिनियम पारित किया. इसका उद्देश्य हिंदुस्तान में ब्रिटिश शासन को और अधिक व्यवस्थित करना और हिंदुस्तान को एक संघीय प्रणाली की ओर ले जाना था. इसी नियम के तहत 1937 में बिहार में चुनाव हुआ और इस चुनाव में कांग्रेस को जीत मिली. वहीं, श्रीकृष्ण सिंह भी केंद्रीय असेंबली और बिहार असेंबली के सदस्य चुने गए और उन्होंने राज्य के प्रधानमंत्री की शपथ ली. हालांकि आजादी से एक साल पहले 1946 में कानून में संशोधन हुआ और राज्यों के प्रधानमंत्रियों का पद खत्म करके मुख्यमंत्री का पद लाया गया. इस तरह श्रीकृष्ण सिंह पहले प्रधानमंत्री फिर मुख्यमंत्री बनने वाले बिहार के एकमात्र राजनेता बने.  15 साल तक संभाली बिहार की कमान  श्रीकृष्ण सिंह, जिन्हें “श्री बाबू” और “बिहार केसरी” के नाम से जाना जाता है, बिहार के पहले मुख्यमंत्री थे. उनका जन्म 21 अक्टूबर 1887 को नवादा जिले के खनवा गांव में हुआ था, लेकिन उनका पैतृक गांव शेखपुरा जिले के मौर में आता है. श्रीकृष्ण सिंह ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा गांव के स्कूल और मुंगेर के जिला स्कूल में प्राप्त की. उन्होंने पटना कॉलेज में कानून की पढ़ाई की और 1915 में मुंगेर में वकालत शुरू की. 1916 में महात्मा गांधी से मिलने के बाद, उन्होंने हिंदुस्तानीय स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय रूप से भाग लेना शुरू किया और कई बार जेल गए. श्रीकृष्ण सिंह  निधन हुआ तो तिजोरी में थे 24500 रुपए  15 साल मुख्यमंत्री रहने के बाद भी जब उनके निधन के बाद उनकी तिजोरी खोली गई तो केवल 24500 रुपये मिले थे. जिसमें एक लिफाफे में रखे 20000 प्रदेश कांग्रेस कमेटी के लिए थे और दूसरे लिफाफे में 3000 मुनीम जी की बेटी की शादी के लिए और तीसरे लिफाफे में 1000 थे जो महेश बाबू की छोटी कन्या के लिए थे और चौथे लिफाफे में 500 श्री कृष्ण सिंह की सेवा करने वाले खास नौकर के लिए थे. श्री कृष्ण सिंह परिवारवाद के भी खिलाफ थे. मुख्यमंत्री के रूप में कार्यकाल बतौर मुख्यमंत्री उनके राज के दौरान बिहार में बहुत सारी फैक्ट्रियां लगी, इनमें बरौनी रिफाइनरी  आयल देश का पहला कारखाना, सिंदरी और बरौनी रसायनिक खाद कारखाना, एशिया का सबसे बड़ा इंजीनियरिंग कारखाना भारी उद्योग निगम एचईसी हटिया, देश का सबसे बड़ा स्टील प्लांट सैल बोकारो, बरौनी डेयरी, एशिया का सबसे बड़ा रेलवे यार्ड बड़हरा, देश का पहला रेल सड़क पुल राजेंद्र पुल, कोसी प्रोजेक्ट, पूसा एग्री कल्चर कॉलेज, बिहार, भागलपुर, रांची विश्वविद्यालय की स्थापना हुई.  बिहार की ताजा समाचारों के लिए यहां क्लिक करें दलितों को दिलाया बैद्यनाथ धाम मंदिर में प्रवेश  हालांकि सवर्ण समुदाय के भूमिहार जाति से आने वाले श्रीकृष्ण सिंह दलितों के भी बड़े हितैषी रहे. दलितों की स्थिति को सुधारने के लिए श्रीकृष्ण सिंह ने विनोबा भावे के आह्वान पर राज्य में 33 लाख एकड़ जमीन दान देकर शिक्षा और स्वास्थ्य की इमारत खड़ी की थी. जमीदारी प्रथा को खत्म करने वाले  बिहार में श्रीकृष्ण सिंह ही थे.इतना ही नहीं जमींदारी प्रथा खत्म करने वाला बिहार देश  का पहला राज्य बना. इतना ही नहीं श्रीकृष्ण सिंह ने पहल करते हुए 700 दलितों को लेकर बाबा वैद्यनाथ धाम मंदिर में पूजा अर्चना की और दलितों को मंदिर में प्रवेश दिलाया. इससे पहले दलितों को बाबा बैद्यनाथ के मंदिर में प्रवेश की इजाजत नहीं थी.   इसे भी पढ़ें: बिहार में चुनाव से पहले NRC लागू करने की कोशिश, वेरिफिकेशन बहाना, RJD का मोदी प्रशासन पर निशाना The post Bihar Chunav: बिहार का वह नेता जो पहले बने प्रधानमंत्री फिर ली मुख्यमंत्री पद की शपथ, 15 साल तक रहे सीएम appeared first on Naya Vichar.

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