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July 1, 2025

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Beauty Tips: चेहरा 10 साल छोटा दिखेगा अगर अपनाएं ये 3 ब्यूटी हैबिट्स

Beauty Tips: हर कोई चाहता है कि उसका चेहरा हमेशा जवान और चमकदार दिखे. लेकिन उम्र के साथ चेहरे पर झुर्रियां और दाग-धब्बे आना आम बात है. क्या आप जानते हैं कि सिर्फ कुछ आसान और रोजाना की आदतें अपना कर आप अपना चेहरा 10 साल छोटा दिखा सकते हैं? इस आर्टिकल में हम आपको तीन ऐसे ही असरदार ब्यूटी हैबिट्स बताएंगे, जो आपकी खूबसूरती को निखारेंगे और उम्र के असर को कम करेंगे. तो आइए जानते हैं ये 3 ब्यूटी हैबिट्स. Beauty Tips: फेस क्लींजिंग और मॉइस्चराइजिंग दिनभर धूल, प्रदुषण और पसीने से स्किन थक जाती है. अगर आप रात को सोने से पहले हल्के फेसवॉश से चेहरा साफ कर के हल्का मॉइस्चराइजर लगाएंगे, तो स्किन को सही आराम मिलेगा. इससे चेहरे की रौनक बनी रहेगी और झुर्रियां जल्दी नहीं आएंगी. यह एक बहुत ही आसान आदत है लेकिन इसका असर बहुत गहरा होता है. ये भी पढ़ें: Skincare Tips: आपकी त्वचा के लिए ये 5 स्किनकेयर टिप्स जानना है जरूरी, तुरंत अपनाएं Beauty Tips: सनस्क्रीन को अपनी स्किन के दोस्त की तरह मानें धूप में निकलने से स्किन पर टैनिंग, डार्क स्पॉट और एजिंग के निशान जल्दी दिखने लगते हैं. अगर आप हर दिन SPF 30 या उससे ज्यादा वाला सनस्क्रीन लगाएंगे, तो सूरज की किरणें आपकी स्किन को नुकसान नहीं पहुंचा पाएंगी. यह हैबिट चेहरे को जवान और हेल्दी बनाए रखने में बहुत मदद करती है. चाहे मौसम कोई भी हो, सनस्क्रीन कभी स्किप न करें. Beauty Tips: अच्छी नींद और सही खान-पान स्किन की असली चमक तब आती है जब शरीर अंदर से हेल्दी होता है. हर दिन 7–8 घंटे की नींद और ताजे फल, पानी, हरी सब्जियां लेने से चेहरा तरोताजा दिखता है. जंक फूड, नींद की कमी और स्ट्रेस चेहरे पर उम्र के निशान ला देते हैं. एक अच्छा डेली रूटीन आपकी स्किन को समय से पहले बूढ़ा नहीं होने देगा. ये भी पढ़ें: Tips to Stop Hair Fall: बालों के झड़ने से बचाने के लिए अपनाएं ये 5 आसान टिप्स ये भी पढ़ें: Natural Beauty Hacks: बिना मेकअप भी पाएं दमकती और फ्रेश त्वचा, जानिए आसान और असरदार नुस्खे Disclaimer: यह आर्टिकल सामान्य जानकारियों और मान्यताओं पर आधारित है. नया विचार इसकी पुष्टि नहीं करता है. The post Beauty Tips: चेहरा 10 साल छोटा दिखेगा अगर अपनाएं ये 3 ब्यूटी हैबिट्स appeared first on Naya Vichar.

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Soya Chunks Cutlet Recipe: मिनटों में बनाएं क्रिस्पी और टेस्टी सोया कटलेट, आसान तरीका जानें

Soya Chunks Cutlet Recipe: अगर आप कुछ हेल्दी और टेस्टी स्नैक बनाना चाहते हैं, तो सोया कटलेट आपके लिए बहुत अच्छा ऑप्शन है. इसमें प्रोटीन होता है जो हमारे शरीर के लिए फायदेमंद है. यह रेसिपी ऐसे लोगों के लिए है जो जल्दी और आसान तरीका चाहते हैं. चाहे शाम का स्नैक्स हो या अचानक कोई मेहमान आ जाएं, आप इसे बना सकते हैं. हम आपको स्टेप बाय स्टेप बताएंगे कि कैसे मिनटों में कुरकुरे और मसालेदार सोया कटलेट बनाएं. सामग्री सूखे सोया चंक्स – 1 कप उबले हुए आलू – 2 अदरक (बारीक कटा हुआ) – ½ इंच प्याज (बारीक कटा हुआ) – ½ हरी धनिया (बारीक कटी हुई) – थोड़ी सी जीरा – 1 छोटी चम्मच लाल मिर्च पाउडर – 1 छोटी चम्मच गरम मसाला पाउडर – ¼ छोटी चम्मच धनिया पाउडर – ½ छोटी चम्मच अमचूर पाउडर – ½ छोटी चम्मच चाट मसाला – ½ छोटी चम्मच ब्रेड क्रम्ब्स – ⅓ कप नमक – स्वादानुसार तेल – तलने के लिए मैदा – 2 छोटी चम्मच कॉर्न फ्लोर – 2 छोटी चम्मच पानी – ¼ कप विधि सबसे पहले सोया चंक्स को गरम पानी में 30 मिनट तक भिगोकर नरम कर लें. फिर पानी निकालकर सोया चंक्स को अच्छे से निचोड़ लें ताकि उसमें से सारा पानी निकल जाए. अब सोया चंक्स को हाथ से छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़ लें या मिक्सी में थोड़ी मोटी पेस्ट बना लें. साथ ही उबले हुए आलू को भी अच्छे से मैश कर लें ताकि वे चिकने हो जाएं. एक बड़े बर्तन में मैश किए हुए आलू और सोया चंक्स डालें. इसमें बारीक कटे हुए प्याज, अदरक, हरी धनिया और हरी मिर्च मिलाएं. अब इसमें जीरा, लाल मिर्च पाउडर, गरम मसाला, धनिया पाउडर, चाट मसाला, अमचूर पाउडर और स्वादानुसार नमक डालकर सभी मसालों को अच्छी तरह मिक्स करें. अगर मिश्रण बहुत चिपक रहा हो तो उसमें ब्रेड क्रम्ब्स डालकर मिलाएं. यह कटलेट को अच्छी तरह सेट होने और पकड़ बनाने में मदद करेगा. फिर इस मिश्रण से अपनी पसंद के अनुसार कटलेट के आकार बनाएं. अब मैदा और कॉर्न फ्लोर को थोड़ा पानी डालकर गाढ़ा पेस्ट तैयार करें. इस पेस्ट में हर कटलेट को दोनों तरफ से डुबोएं ताकि वे अच्छी तरह से कवर हो जाएं. कटलेट को ब्रेड क्रम्ब्स में अच्छे से लपेटें या आप रवा भी इस्तेमाल कर सकते हैं. फिर मध्यम आंच पर कड़ाही में थोड़ा तेल गर्म करें और कटलेट को सुनहरा होने तक दोनों तरफ से तलें. कटलेट को तेल से निकालकर किचन टॉवल पर रखें ताकि तेल निकल जाए. अब गरमागरम सोया कटलेट हरी चटनी या टमाटर केचप के साथ परोसें और मजा लें. ये भी पढ़ें: Baby Corn Manchurian: घर पर बनाएं टेस्टी और क्रिस्पी मंचूरियन, आसान रेसिपी के साथ ये भी पढ़ें: Crispy Corn Fry Recipe: झटपट बनाएं क्रिस्पी और मसालेदार कॉर्न, बच्चों और बड़ों की फेवरेट ये भी पढ़ें: Vegetable Curry Recipe: घर पर बनाएं टेस्टी और हेल्दी मिक्स वेजिटेबल करी, जानिए आसान स्टेप-बाय-स्टेप रेसिपी The post Soya Chunks Cutlet Recipe: मिनटों में बनाएं क्रिस्पी और टेस्टी सोया कटलेट, आसान तरीका जानें appeared first on Naya Vichar.

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Bihar Tourism: 30 सितंबर तक वीटीआर जंगल सफारी में घूमना-फिरना बंद, ये बड़ी वजह आई सामने

Bihar Tourism: बिहार में मानसून के कारण मौसम सुहावना बना हुआ है. ऐसे में लोग वैसे जगह जाना पसंद करते हैं जहां उन्हें हरियाली मिले, पेड़-पौधे ज्यादा से मिले. वीटीआर जैसी जगह जाकर खूबसूरत दृश्य का दीदार करना लोगों को बड़ा अच्छा लगता है. लेकिन, इस बीच पर्यटकों को निराश करने वाली समाचार आ गई है. दरअसल, वीटीआर जंगल सफारी में घूमने-फिरने पर रोक लगा दी गई है. यह प्रतिबंध काफी लंबे समय के लिए लगाया गया है. दरअसल, 1 जुलाई से 30 सितंबर पर पर्यटकों की एंट्री पर रोक रहेगी. इसके साथ ही इस फैसले की बड़ी वजह भी बता दी गई है. इस वजह से लिया गया फैसला जानकारी के मुताबिक, वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में बाघों और अन्य जंगली जानवरों के प्रजनन काल की शुरुआत और मानसून के मौसम को ध्यान में रखते हुए जंगल सफारी पर रोक लगा दी गई है. इस दौरान मंगराहा, वाल्मीकिनगर और गोबर्धना में जंगल सफारी, वाल्मीकिनगर में साइकिल सफारी और गंडक नदी में जलस्तर बढ़ने के कारण वोटिंग जैसी तमाम गतिविधियों पर रोक लगी रहेगी. साथ ही एक दिवसीय, दो दिवसीय और तीन दिवसीय टूर पैकेज पर भी रोक लगी रहेगी. व्याघ्र पर्यावरण संरक्षण प्राधिकरण के आदेशों का पालन करते हुए बड़ा निर्णय लिया गया है. इस दौरान पर्यटकों के बेहतर अनुभव के लिए जंगल के रास्तों की स्थिति की जांच और मरम्मती का काम किया जाएगा. ये सभी गतिविधियां रहेंगी जारी हालांकि, इस दौरान वाल्मीकिनगर, मंगराहा और गोबर्धना में पर्यटकों के लिए ठहरने की सुविधा उपलब्ध रहेगी. साथ ही वाल्मीकिनगर में इको पार्क भी पर्यटकों के लिए खुला रहेगा. लेकिन, जंगल सफारी और अन्य गतिविधियों पर प्रतिबंध रहेगा. इधर, यह भी जानकारी सामने आई है कि, पिछले कुछ वर्षों में वाल्मिकी टाइगर रिजर्व में आने वाले पर्यटकों की संख्या बढ़ी है. वहीं, जंगल सफारी को लेकर उठाया गया यह कदम जंगली जानवरों के प्रजनन और संरक्षण को बढ़ावा देगा और साथ ही पर्यटकों की सुरक्षा को भी सुनिश्चित करेगा. Also Read: Patna Metro Update: पटना मेट्रो के किराया पर आया बड़ा अपडेट, इस आधार पर अधिकारी तय करेंगे भाड़ा The post Bihar Tourism: 30 सितंबर तक वीटीआर जंगल सफारी में घूमना-फिरना बंद, ये बड़ी वजह आई सामने appeared first on Naya Vichar.

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गौरव भाटिया ने तेजस्वी यादव को बताया मौलाना, कहा- शरिया वाले जा सकते हैं पाकिस्तान

Bihar Election: पटना. बिहार विधानसभा चुनाव से पहले सभी पार्टियों के बीच बयानबाजी तेज हो गयी है. वक्फ को लेकर पिछले दिनों गांधी मैदान में हुई रैली में राजद नेता तेजस्वी यादव के बयान पर अब भाजपा उनपर हमलावर हो गयी है. तेजस्वी यादव ने रविवार को कहा कि बिहार में सत्तारूढ़ पार्टी सत्ता से बाहर होने की राह पर है और अगर राज्य में विपक्षी दलों के गठबंधन की प्रशासन आई, तो केंद्र की नरेंद्र मोदी प्रशासन के लाए गए वक्फ अधिनियम को कूड़ेदान में फेंक देगी. भाजपा प्रवक्ता गौरव भाटिया ने पलटवार किया है. उन्होंने कहा है कि देश को इस्लामिक मुल्क बनाने की कोशिश हो रही है. गौरव भाटिया ने तेजस्वी यादव को मौलाना करार देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बिहार जायेंगे और चुनाव बाद शरिया वाले पाकिस्तान जा सकते हैं. बिहार में अगले 50 साल तक सत्ता में नहीं आयेगा राजद गौरव भाटिया ने दिल्ली में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, ”इस देश को इस्लामिक मुल्क बनाने का प्रयास हो रहा है. ये शरिया कानून लागू करना चाहते हैं. मौलाना तेजस्वी यादव संविधान को जानते नहीं है. आरजेडी बिहार में अगले 50 साल सत्ता में आने वाली नहीं है. हमारे लिए अंबेडकर जी पूजनीय है. तेजस्वी यादव और लालू यादव सांप्रदायिक नेतृत्व करते हैं. हिन्दू और मुस्लिम नेतृत्व कर रहे हैं.” शरिया वाले चले जाएं पाकिस्तान बीजेपी प्रवक्ता गौरव भाटिया ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जिक्र करते हुए कहा, ”प्रधानमंत्री चुनाव प्रचार में बिहार तो जाएंगे ही, शरिया वाले पाकिस्तान जा सकते हैं. तेजस्वी यादव जिस मंच पर थे, वहां शरिया कानून लागू करने की बात हो रही थी. जंगल राज बिल्कुल लालू और तेजस्वी यादव जैसा होता है.” बीजेपी नेता गौरव भाटिया ने तेजस्वी पर तीखा हमला करते हुए उन्हें नौवीं फेल बता दिया. भाटिया ने कहा, ”नौवीं फेल बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री हिंदुस्तान के सांसद से पारित कानून को कूड़ेदान में फेंकने की बात करते हैं. ये नमाजवादी बाबा साहेब के संविधान का सम्मान नहीं करते है.” Also Read: छठ के बाद बिहार में विधानसभा चुनाव के आसार, 22 साल बाद आयोग जांच रहा वोटर लिस्ट The post गौरव भाटिया ने तेजस्वी यादव को बताया मौलाना, कहा- शरिया वाले जा सकते हैं पाकिस्तान appeared first on Naya Vichar.

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Anupama: शाह हाउस में छाएगा मातम, बाबूजी की होगी मौत, पाखी-गौतम नहीं, ये शख्स लेगा हंसमुख की जान

Anupama Spoiler Alert: सीरियल अनुपमा के लेटेस्ट एपिसोड में दिखाया जाएगा कि राही और परी, अंश और प्रार्थना को लेकर बातें करते हैं. राही को फिक्र होती है कि दोनों के रिश्ते की वजह से उनके परिवार के बीच फिर से लड़ाई होगी. परी सारी बातें सुनती है और फिर राही को इन सब पर ज्यादा ध्यान नहीं देने के लिए कहती है. वह उसे अपने डांस अकेडमी पर फोकस करने के लिए कहती है. दूसरी तरफ हिंदुस्तानी हॉस्पिटल में है और उसकी तबीयत ठीक नहीं. उसकी रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोट लगी है और इसे ठीक करने के लिए डॉक्टक सर्जरी करवाने के लिए कहते है. डॉक्टर उसे पैसे का इंतजाम करने के लिए कहते हैं. हिंदुस्तानी के लिए ये काम करेगी अनुपमा अनुपमा में दिखाया जाएगा कि अनुपमा को समझ नहीं आता की हिंदुस्तानी की सर्जरी के लिए वह पैसे कैसे कमाएगी. अनुपमा एक डांस कंपीटीशन में भाग लेने का सोचती है. दूसरी तरफ शाह हाउस में पाखी कहती है कि बाबूजी जानते हैं कि अनु कहां है. बाबूजी उसे इन सबमें नहीं पड़ने के लिए कहता है. पाखी फिर कहती है कि प्रार्थना परिवार और अंश के बीच आने की कोशिश कर रही है. वहीं, राही के अकेडमी में दो नये एडमिशन होते हैं और वह ये जानकरा काफी खुश हो जाती है. अनु और प्रीत फंट जुटाने के तरीकों के बारे में सोचती है. तोशू लेगा बाबूजी की जान कई मीडिया रिपोर्टस में बताया जा रहा है कि तोशू की नजर अनुपमा के पॉलिसी के पैसों पर है. उसकी नीयत के बारे में बाबूजी को पता चल जाएगा. बाबूजी का एक्सीडेंट हो जाएगा और उनकी मौत हो जाएगी. उनकी मौत कैसे हुई, इस बारे में जानने के लिए अनुपमा शाह हाउस आ जाएगी. वह हिंदुस्तानी के इलाज के लिए पॉलिसी वाले पैसे ले लेगी. तोशू को इस बात पर काफी गुस्सा आता है. दूसरी तरफ अनु को पता चलेगा कि तोशू ने ही बाबूजी की जान ली है. वह ये जानकर काफी शॉक्ड हो जाएगी. यह भी पढ़ें- Shefali Jariwala Death Reason: शेफाली की अंतिम घड़ियों का दर्दनाक सच, करीबी दोस्त ने खोले राज, कहा- पराग ने जब देखा तो… The post Anupama: शाह हाउस में छाएगा मातम, बाबूजी की होगी मौत, पाखी-गौतम नहीं, ये शख्स लेगा हंसमुख की जान appeared first on Naya Vichar.

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Hindi Toughest Word: बचपन से पढ़े हैं हिंदी तो बोलकर दिखाएं ये 7 शब्द, अच्छे-अच्छों की जुबान लड़खड़ाई

Hindi Toughest Word: हिंदी को अक्सर लोग आसान और सहज भाषा मानते हैं, लेकिन इसके कुछ शब्द ऐसे हैं, जिन्हें बोलते हुए अच्छे-अच्छों की जुबान लड़खड़ा जाए. बचपन से पढ़ी और बोली जाने वाली हिंदी में भी कई कठिन उच्चारण वाले शब्द मौजूद हैं, जो लोगों की भाषा पर पकड़ की असली परीक्षा लेते हैं. ऐसे शब्द भाषा की खूबसूरती को और भी समृद्ध बनाते हैं. हम आपको ऐसे ही 7 चुनिंदा शब्दों से रूबरू कराएंगे, जो दिखने में साधारण लगते हैं लेकिन बोलने में बड़े-बड़ों के पसीने छुड़ा देते हैं, तो तैयार हो जाइए अपनी हिंदी शब्द-ज्ञान को परखने के लिए. Hindi Toughest Word: वात्याचक्र हिंदी का एक शब्द वात्याचक्र दिखने में आसान है लेकिन इसे बोलने में काफी लोगों की जुबान लड़खड़ा जाती है. वात्याचक्र शब्द का अर्थ चक्रवात होता है. इसे तूफान या चक्राकार भी कहते हैं. वात्याचक्र दो शब्दों से मिलकर बना है वात्य और चक्र. इसमें वात्य का अर्थ है वायु या हवा और चक्र का मतलब घेरा या चक्कर होता है. यत्किंचित शब्द यत्किंचित का अर्थ है थोड़ा, अल्प, जरा सा या बहुत ही कम मात्रा में कोई वस्तु या बात. यह शब्द आमतौर पर किसी बेहद छोटी चीज के लिए प्रयोग होता है. जैसे – यत्किंचित प्रयास से भी सफलता मिल सकती है. मतलब थोड़ा सा प्रयास भी लाभकारी हो सकता है. विप्रलब्ध शब्द का अर्थ हिंदी में एक शब्द विप्रलब्ध है. इसका अर्थ है वह इंसान जो जो छल या धोखे का शिकार हुआ हो. इसका प्रयोग आमतौर पर किसी ऐसे व्यक्ति या स्थिति के लिए किया जाता है, जहां उम्मीद के विपरीत धोखा मिला हो. हालांकि, इसका प्रयोग संस्कृत भाषा में भी होता है. दुर्निवार शब्द दुर्निवार शब्द हिंदी कठिन शब्दों में से एक है. इसका अर्थ है जिसे रोका या टाला न जा सके. यह शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है. इसमें दुर यानी कठिन या बुरा होता है. वहीं, निवार का अर्थ रोकना होता है. पुनरावृति का अर्थ पुनरावृति का अर्थ है किसी कार्य, शब्द, क्रिया या घटना का बार-बार होना या दोहराया जाना. यह शब्द पुनः (फिर से) और आवृत्ति (दोहराना) शब्द से जुड़कर बना है. उदाहरण के लिए, किसी गलती की पुनरावृति का मतलब है वही गलती फिर से होना. यह शिक्षा, शोध, या अभ्यास में भी प्रयोग होता है. किंकर्तव्यविमूढ़ कठिन शब्द किंकर्तव्यविमूढ़ एक बेहद कठिन लेकिन सुंदर हिंदी शब्द. इसका अर्थ होता है ऐसी स्थिति में फंसा व्यक्ति, जिसे समझ में न आए कि अब क्या करना चाहिए. साधारण भाषा में कंप्यूज इंसान को किंकर्तव्यविमूढ़ कह सकते हैं. इसमें किम् (क्या), कर्तव्य (करने योग्य), और विमूढ़ (भ्रमित) शब्द जुड़कर यह भाव बनाते हैं. ये भी पढ़ें: सड़क पर सफेद और पीली लाइन का मतलब क्या है? 99% लोग नहीं जानते सही जवाब! यह भी पढ़ें: SSC JE 2025: एसएससी जेई भर्ती का नोटिफिकेशन जारी, जानिए कैसे करें आवेदन और क्या है पूरी प्रक्रिया नोट: इन शब्दों को सबसे कठिन शब्द कहना उचित नहीं है. हालांकि, हिंदी भाषा पर अच्छी कमांड बनाने के लिए आप इसका उपयोग कर सकते हैं. The post Hindi Toughest Word: बचपन से पढ़े हैं हिंदी तो बोलकर दिखाएं ये 7 शब्द, अच्छे-अच्छों की जुबान लड़खड़ाई appeared first on Naya Vichar.

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पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन का नाम बदलने की तैयारी? सीएम गुप्ता ने रेल मंत्री को भेजा प्रस्ताव

CM Rekha Gupta: दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को पत्र लिखकर पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन का नाम बदलने की मांग की है. सीएम गुप्ता ने प्रस्ताव रखा है कि स्टेशन का नाम ‘महाराजा अग्रसेन रेलवे स्टेशन’ रखा जाए. उनके अनुसार, महाराजा अग्रसेन समाज सेवा, समानता और न्याय के प्रतीक रहे हैं इसलिए उनके सम्मान में यह नाम परिवर्तन उचित होगा. यह पत्र 19 जून को लिखा गया था, जिसकी जानकारी अब सार्वजनिक हुई है. इस प्रस्ताव को लेकर हिंदुस्तानीय जनता पार्टी के दो वरिष्ठ नेताओं ने भी पुष्टि की है, हालांकि रेल मंत्रालय की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है. ऐतिहासिक स्टेशन और नई पहचान की कोशिश गौरतलब है कि पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन राजधानी का एक प्रमुख और ऐतिहासिक रेलवे स्टेशन है, जहां रोज़ाना लाखों यात्रियों की आवाजाही होती है. नाम परिवर्तन का यह प्रस्ताव एक सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान को नया स्वरूप देने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है. यमुना और पर्यावरण को लेकर भी सक्रिय इसके साथ ही, सीएम रेखा गुप्ता ने हाल ही में यमुना नदी में प्रदूषण के लिए पूर्ववर्ती प्रशासनों को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि उनकी प्रशासन यमुना को प्रदूषण मुक्त बनाने, कूड़े के पहाड़ हटाने और नालों की सफाई का अभियान चला रही है. उन्होंने हाल ही में कोसी कलां के निकट कमर गांव में 16 करोड़ रुपये की लागत से बने 2.5 टन प्रतिदिन क्षमता वाले बायो-सीएनजी संयंत्र का उद्घाटन किया. उन्होंने बताया कि जल्द ही गोबर गैस संयंत्र भी स्थापित किए जाएंगे ताकि यमुना प्रदूषण को नियंत्रित किया जा सके और प्रधानमंत्री मोदी के ‘वेस्ट टू वेल्थ’ मंत्र को साकार किया जा सके. यह भी पढ़ें.. सिर्फ ₹200 में ₹75,000 का बीमा! जानिए क्या है LIC की आम आदमी बीमा योजना यह भी पढ़ें.. ऑटोमैटिक मिलेगा लोअर बर्थ, जानें किसे और कैसे देगा रेलवे The post पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन का नाम बदलने की तैयारी? सीएम गुप्ता ने रेल मंत्री को भेजा प्रस्ताव appeared first on Naya Vichar.

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Bihar: जब बाबा नागार्जुन ने उर्दू को दूसरी राजभाषा बनाने का किया विरोध, कहा था- हां मैं हूं जनसंघ का समर्थक

Bihar: जब बिहार प्रशासन ने उर्दू को दूसरी राजभाषा का दर्जा देने का फैसला किया था तो बाबा नागार्जुन ने इसका कड़ा विरोध किया था. बाबा को जब कहा गया कि आप उर्दू का विरोध कर रहे हैं, ऐसे में लोग यह कहेंगे कि आप जनसंघ के समर्थक हैं. बाबा ने कहा इसकी कोई परवाह नहीं, कोई कहे तो कहे, इस मामले में हां मैं हूं जनसंघ का समर्थक. गुलाम सरवर की गिनती उन दिनों अल्पसंख्यकों के बड़े नेताओं में होती थी. उन्ही के दवाब में प्रशासन ने यह कदम उठाया था. फकक्ड़ की तरह था बाबा नागार्जुन का जीवन बाबा नागार्जुन का जीवन फकक्ड़ की तरह था. 1974 के छात्र आंदोलन के अगुआ नेताओं में से एक रहे शिवानंद तिवारी उन दिनों को याद करते हुए कहते हैं, बाबा से हमारा परिचय 1974 में पटना में हुआ. कदमकुंआ के कांग्रेस मैदान के निकट एक सर्वोदय खादी संस्थान था. आंदोलन को लेकर शिवानंद तिवारी वहां गये थे. वहीं किसी ने उनसे आकर कहा कि बाबा नागार्जुन आपसे मिलना चाहते हैं. शिवानंद तिवारी बताते हैं, मैं यह सुनकर बहुत उत्साहित हुआ कि बाबा नागार्जुन मुझसे मिलना चाहते है. वो बाबा के कमरे में पहुंचे. बाबा एक खटिया पर चुकुमुकु बैठे थे. सिर पर छितराये बाल, चेहरे पर बड़ी बड़ी बिखरी दाढ़ी और पीले दांत. पहली नजर में बाबा का व्यक्तितव कहीं से उन्हें प्रभावित नहीं कर पाया. शिवानंद जी बताते हैं, बाबा ने तकिये के नीचे से एक लिफाफा निकाली. उन्हें बलगम की शिकायत थी. लिफाफे को खोला और कफ निकाल उसे करीने से मोड़ कर तकिया के नीचे रख दिया. यह देखकर मुझे घिन जैसी आई. जब चंबल में डकैतों से मिले शिवानंद जी बताते हैं आंदोलन के दौरान ही जेल में हमारे साथ कवि लाल धुंआ जी भी बंद थे. उन्होंने बाबा का एक क़िस्सा सुनाया. एक बार बाबा मध्यप्रदेश में चंबल इलाके में पहुंचे. लाल धुंआ जी भी साथ थे. वहां उनकी बहन ब्याही थी. बस से उतर कर गांव की ओर जाना था. वहीं मोड़ पर पेड़ की छाया में कुछ लोग बैठे थे. वहीं मिठाई की दो तीन दुकानें थीं. गर्मी का मौसम था. लोग वहां सुस्ताने और पानी पीने के लिए बैठते थे. वहां मिठाई की दो तीन दुकानें थीं. पेड़ा की बिक्री को बैठे थे. उनमें से पेड़ा वाले के पास पांच से सात किलो तक पेड़ा था. बाबा को कौतुहल हुआ. तभी दो लोग उस पेड़ा वाले के पास पहुंचे. एक के कंधे पर बंदूक टंगी थी. उसने सभी पेड़ा ले लिया. वे थोड़ा आगे बढ़ गये बाबा ने दुकानदार से पूछा. ये लोग कौन थे ? दुकानदार ने बताया कि वे लोग बागी थे. जब सरदार ने वहां से निकले को कहा बाबा को मालूम था कि उस इलाक़े में डाकुओं को बागी कहा जाता है. वे उनके पीछे हो लिये. लाल धुंआ जी ने रोका तो उन्होंने कहा कि चलो, इनका जीवन कैसा होता हे, देखा जाए.हम लोग उन दोनों के पीछे लग गये. उनको लगा कि ये हमलोगों का पीछा कर रहे हैं. तत्काल बंदूक टांगे व्यक्ति ने बाबा के सीने पर बंदूक सटा दिया. बाबा घबराये नहीं, कहा हम तुम्हारे सरदार से मिलना चाहते हैं. उन दोनों ने बाबा को पकड़ लिया अपने सरदार के पास ले गये. सरदार थोड़ा पढ़ा लिखा था. उसने बाबा नागार्जुन का नाम सुना था. बाबा को आदर से बिठाया. बाबा ने कहा हम यह देखना और जानना चाहते हैं कि आपलोग किस प्रकार जंगल में रहते हैं. तब तक अगले दिन उस इलाके में पुलिस की घेराबंदी शुरू हो गई. सरदार ने बाबा को कहा ,आप लोग तत्काल यहां से निकल जाइये. नहीं तो पुलिस की गोली के शिकार हो जायेंगे. सरदार ने अपने दो विश्वस्त लोगों को बाबा के साथ लगा दिया. उसने बाबा को जंगल के रास्ते नदी पार कर एक क़स्बे में पहुँचा दिया. जहाँ से इनको शहर जाने की सवारी मिल गई. बाबा के आमदनी का नहीं था कोई नियमित साधन शिवानंद जी बताते हैं बाबा के आमदनी का कोई नियमित साधन नहीं था. परिवार की चिंता की भी चिंता थी. इसलिए किसी कार्यक्रम में उनको बुलाया जाता था तो अपनी फ़ीस तय करा लेते थे. बड़े बेटे बचपन से अस्वस्थ रहते थे. छोटे बेटे के पढ़ाई का खर्च था. सबके लिए खर्च जुटाना चुनौती थी.एकबार किसी ने उनसे पूछा कि आप कविता में बहुत छोटी लाइन लिखते हैं. बाबा ने कहा कि यह बिक जाता है. बड़ी लाइनें नहीं बिकती. जेल में बंद कई लोगों की नहीं हुई चर्चा इमरजेंसी के दौरान जेल में बंद कई ऐसे लोग थे उनके जेल जीवन पर चर्चा नहीं हुई. फुलवारी जेल में बंद शिवानंद तिवारी उन दिनों को याद कर बताते हैं, हमलोगों के साथ कवि लाल धुआं जेल में बंद थे. उन्होंने ही बाबा के साथ बाग़ियों से मुलाक़ात की कहानी बताई थी. लाल धुआं जो फक्कड़ मिज़ाज के आदमी थे. खर्चा चलाने के लिए पटना में प्रूफ़ रीडिंग करते थे. उनके जैसा कोई मजाकिया किस्म के आदमी थे. जब आपातकाल लगा तो लाल धुंआ जी गिरफ़्तार नहीं किए गए. यह उनके क्रांतिकारी मन को मंजूर नहीं हुआ. दारु पीने की आदत थी. अंग्रेज़ी संभव नहीं थी. देसी ही चलाते थे. रोज़ाना दारू पी कर बीएन कालेज से इंजीनियरिंग कालेज के गेट तक रिक्शा के पौदान पर चढ़ कर प्रशासन और इमरजेंसी के खिलाफ नारे लगाते और भाषण करते थे. शुरू में पुलिस ने ध्यान नहीं दिया. लाल धुंआ जी की नहीं हुई औपचारिक शादी आखिरकार तीन-चार दिनों के बाद पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया. गिरफ्तार कर उन्हें फुलवारी जेल में ही लाया गया. मैं भी गिरफ़्तारी के बाद वहीं था. उन दिनों जेल की हालत अजायबघर जैसी हो गई थी. इमरजेंसी के साथ ही आरएसएस सहित कई संगठनों पर प्रतिबंध लगा दिया गया था. उन सब के लोग जेल में बंद थे. आंदोलनकर्मी तो थे ही. लाल धुंआ जी की औपचारिक शादी नहीं हुई थी. लेकिन शांति जी एक मारवाड़ी स्त्री उनकी सहयात्री थीं. शांति जी दो-चार दिनों के अंतराल पर ठर्रा की बोतल लेकर उनसे मिलने आती थीं. उनमें से एक तो वहीं गेट पर ही खत्म कर देते थे. दूसरा बोतल अंदर आते थे. उस

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Bhojpuri: ब्रेकअप के बाद काजल राघवानी के आरोपों पर खेसारी लाल यादव ने तोड़ी चुप्पी, कहा- ‘उनकी दो रोटी भी चल रही है तो…’

Bhojpuri: भोजपुरी सिनेमा के सुपरस्टार खेसारी लाल यादव और एक्ट्रेस काजल राघवानी की जोड़ी को दर्शकों ने खूब प्यार दिया है. दोनों ने कई ब्लॉकबस्टर फिल्मों में स्क्रीन शेयर किया हैं. ऑनस्क्रीन के साथ-साथ इनकी ऑफस्क्रीन केमिस्ट्री के किस्से भी खूब चर्चा में रहते थे. खेसारी और काजल की दोस्ती ने अफेयर की समाचारों को हवा दी. हालांकि ब्रेकअप के बाद काजल ने खेसारी पर कई आरोप लगाए थे, जिसे लेकर खेसारी लाल यादव ने चुप्पी तोड़ी है. अगर मुझे कुछ होता है तो… बता दें, फिल्मों के शूटिंग के समय दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ी और दोनों एक-दूसरे के काफी करीब आ गए थे. लेकिन वक्त के साथ इनका रिश्ता खराब होता गया और साल 2019 के बाद दोनों के बीच दूरियां आ गई. इसके बाद 2024 में काजल ने एक इंटरव्यू में खेसारी पर गंभीर आरोप लगाए. काजल ने कहा कि खेसारी ने उनसे शादी का वादा किया था, लेकिन बाद में उन्होंने पीछे हटकर धोखा दिया. इतना ही नहीं, काजल ने कहा था कि ‘अगर मुझे कुछ होता है तो इसके जिम्मेदार खेसारी होंगे.’ इस आरोप पर खेसारी ने भी खुलकर अपनी बात रखी थी.  अगर कुछ बुरा हुआ तो… यूपी तक चैनल को दिए इंटरव्यू में खेसारी ने कहा था कि अगर काजल की जिंदगी में कुछ अच्छा हुआ तो उसका क्रेडिट भी उन्हें दिया जाए और अगर कुछ बुरा हुआ तो उसकी भी जिम्मेदार वही हैं. अगर उनकी दो रोटी भी चल रही है तो वो भी मेरी वजह से ही है. उन्होंने आगे कहा कि वह 24 घंटे काम में बिजी रहते हैं. उनके पास इतना वक्त नहीं कि वो किसी को नुकसान पहुंचाएं या किसी के खिलाफ साजिश रचें. उन्होंने कहा कि काजल कई जगह शूटिंग और शो करने जाती हैं, ऐसे में अगर कहीं उनके फैंस ने कुछ कर दिया तो उसमें वो खुद कैसे जिम्मेदार हैं? खेसारी-काजल की फिल्में   खेसारी ने साफ कर दिया था कि उनका और काजल का रिश्ता सिर्फ दोस्ती तक ही था और अफेयर जैसी कोई बात नहीं थी. उन्होंने कहा कि इंडस्ट्री में दोस्ती और अफवाहें दोनों साथ-साथ चलती हैं. खेसारी लाल यादव और काजल राघवानी ने ‘प्यार किया तो निभाना’, ‘दुल्हन वही जो पिया मन भाए’, ‘मैं सहरा बांध के आऊंगा’ जैसी कई हिट फिल्में की हैं. पर्दे पर इनकी जोड़ी खूब चली लेकिन रियल लाइफ में अब दोनों के रास्ते अलग हैं और दोनों अब एक-दूसरे से कोई रिश्ता नहीं रखते. ये भी पढ़ें: Bhojpuri: अक्षरा सिंह की नई फिल्म के टीजर ने इंटरनेट पर लगाई आग, इस दिन सिनेमाघरों में दिखेगी ‘रूद्र-शक्ति’ की प्रेम कहानी ये भी पढ़ें: Bhojpuri: बॉक्स ऑफिस पर इन दो फिल्मों से मचेगा तांडव, जब एक-दूसरे से भिड़ेंगे निरहुआ और प्रदीप पांडे The post Bhojpuri: ब्रेकअप के बाद काजल राघवानी के आरोपों पर खेसारी लाल यादव ने तोड़ी चुप्पी, कहा- ‘उनकी दो रोटी भी चल रही है तो…’ appeared first on Naya Vichar.

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धोनी ही नहीं विराट, सचिन और रोहित भी करवा चुके हैं ट्रेडमार्क रजिस्ट्रेशन, ये हैं उनके नाम

Trademark Registration by Players: दुनिया के कई मशहूर खिलाड़ी अब सिर्फ स्पोर्ट्स तक सीमित नहीं हैं, वे अपने खास पहचान और उपनाम को कानूनी रूप से सुरक्षित करवा कर उसे एक ब्रांड में तब्दील कर रहे हैं. ट्रेडमार्क पंजीकरण के जरिये ये खिलाड़ी अपने नाम, अंदाज या निकनेम को व्यावसायिक रूप से संरक्षित करते हैं ताकि उनका इस्तेमाल सिर्फ उनकी अनुमति से ही किया जा सके. खिलाड़ी अब सिर्फ स्पोर्ट्स ही नहीं, बल्कि ब्रांड भी बन चुके हैं. उनका नाम, अंदाज और उपनाम अब कानूनी रूप से संरक्षित हैं और व्यापारिक दुनिया में भी उनकी चमक बरकरार है.  हाल ही में हिंदुस्तानीय क्रिकेट के सुपरस्टार कैप्टन एमएस धोनी ने ‘कैप्टन कूल’ नाम के ट्रेडमार्क के लिए आवेदन किया. हिंदुस्तानीय क्रिकेट के सबसे शांत कप्तान महेंद्र सिंह धोनी को यह नाम उन्हें मैदान पर उनके संयमित स्वभाव के कारण मिला. आवेदन 5 जून को दायर किया गया था और 16 जून को इसे ट्रेडमार्क जर्नल में प्रकाशित किया गया. यह ट्रेडमार्क स्पोर्ट्स प्रशिक्षण और कोचिंग सेवाओं की श्रेणी में पंजीकृत है. लेकिन धोनी अकेले नहीं हैं, जिन्होंने ट्रेडमार्क के लिए आवेदन किया है. इससे पहले कई खिलाड़ियों ने इसके लिए अप्लाई किया है और जरूरी अधिकार प्राप्त किया है.  विराट कोहली ने ‘VK’ लोगो और नाम को चुना. हिंदुस्तान के स्टार बल्लेबाज विराट कोहली ने अपने नाम और ‘VK’ लोगो को ट्रेडमार्क करवाया हुआ है. यह उन्हें न सिर्फ मैदान पर, बल्कि फैशन और विज्ञापन जगत में भी एक पहचान दिलाता है. कोहली ने हाल ही में टेस्ट और टी20 से संन्यास लिया है, लेकिन वनडे में उनका सफर जारी है.  रोहित शर्मा ने ‘हिटमैन’ के नाम से मशहूर होने के बाद इसे ट्रे़डमार्क करवाया है. रोहित शर्मा ने इस उपनाम को चुना है. यह नाम उनकी आक्रामक बल्लेबाजी शैली को दर्शाता है. रोहित अब टेस्ट और टी20 को अलविदा कह चुके हैं, लेकिन वनडे फॉर्मेट में सक्रिय रहेंगे. इसके साथ ही RS by Tru Elements ट्रू एलिमेंट्स के साथ साझेदारी में उनका एक लाइसेंस प्राप्त ब्रांड है. सचिन तेंदुलकर ने ‘मास्टर ब्लास्टर’ को ट्रेडमार्क करवाया है. क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर ने अपने उपनाम को चुना है. यह नाम उन्हें उनकी दमदार बल्लेबाजी के कारण मिला और आज भी उनके फैंस उन्हें इसी नाम से पुकारते हैं. उन्होंने अपने सिग्नेचर को भी ट्रेडमार्क करवाया है. दो गेंदों में क्लीन बोल्ड हुए श्रेयस अय्यर, तो खुशी से उछल पड़ीं मां, वायरल हुआ वीडियो अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों ने भी करवाए हैं ट्रेडमार्क क्रिस्टियानो रोनाल्डो ने CR7 और CR9 ब्रांड को ट्रेडमार्क किया है, जो कपड़ों से लेकर होटल इंडस्ट्री तक फैला है. उसैन बोल्ट ने अपने आइकॉनिक लाइटनिंग पोज को ट्रेडमार्क कराया है, जो अब एक ग्लोबल पहचान बन चुका है. इसके साथ ही उन्होंने टू द वर्ल्ड वाक्य को भी ट्रेडमार्क करवाया है. सेरेना विलियम्स ने अपने नाम और लोगो का ट्रेडमार्क लेकर फैशन और व्यवसाय में कदम बढ़ाया है. नोवाक जोकोविच ने अपने उपनाम ‘नोले‘ को ट्रेडमार्क करवाया है. लियोनेल मेसी ने अब तक 76 से अधिक ट्रेडमार्क पंजीकृत कराए हैं, जिनमें गहने, परिधान और स्पोर्ट्स उपकरण शामिल हैं.  रोंडा राउजी ने ‘राउडी रोंडा राउजी’ और अपने नाम को ट्रेडमार्क किया है. ट्रेडमार्क क्यों है जरूरी?  ट्रेडमार्क रजिस्ट्रेशन एक कानूनी प्रक्रिया है जो किसी नाम, प्रतीक या ब्रांड आइडेंटिटी को संरक्षण देता है. इससे खिलाड़ियों को अपने ब्रांड को व्यावसायिक रूप से उपयोग करने और दूसरों द्वारा गलत इस्तेमाल से बचाने का अधिकार मिलता है.  विराट और रोहित के मैदान में वापसी पर सस्पेंस, BCCI को अब भी है मंजूरी इंतजार हिंदुस्तानीय टीम में है दूसरा शेन वॉर्न, जिसे ग्रेग चैपल ने बताया वर्तमान क्रिकेट में का कलाई बेस्ट स्पिनर OMG लौट आए स्टेन और वार्न! उसी तेजी और टर्न से उड़े स्टंप्स-बिखरी गिल्लियां, गेंदों से बरपा कहर; विश्वास करना मुश्किल The post धोनी ही नहीं विराट, सचिन और रोहित भी करवा चुके हैं ट्रेडमार्क रजिस्ट्रेशन, ये हैं उनके नाम appeared first on Naya Vichar.

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