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July 9, 2025

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Bihar Politics: गमछी अलग, नारे अनेक, झंडा अलग….फिर भी एकता की मिठास में डूबा महागठबंधन

Bihar Political News: वीर चंद्र पटेल मार्ग पर सुबह पौने नौ बजे महागठबंधन के दिग्गज नेताओं का जमावड़ा शुरू हुआ. तेज बदर कट्टू धूप और पुरवैया की तेजी ने नेताओं की परीक्षा लेनी शुरू की. बावजूद सियासी पारा चढ़ता गया. पार्टी के हिसाब से नारेबाजी हो रही थी . ढोल ताशे बज रहे थे. खास बात यह दिखी कि ट्रेड यूनियन की मांगों पर महागठबंधन का मतदाता पुनरीक्षण का मुद्दा हावी रहा. हालांकि महागठबंधन में अभूतपूर्व एकता देखने को मिली. खास बात कि प्रतिरोध मार्च की राह में आने-जाने वालों को कोई खास परेशानी नहीं हुई. हालांकि इस दौरान एक हाथ में झंडा और दूसरे हाथ से सेल्फी का ऐसा दौर शुरू हुआ कि पूरे तीन घंटे चला. गजब की बात यह रही कि कार्यकर्ता सिर्फ नेताओं के साथ ही नहीं ली जा रही थी, कार्यकर्ता अकेले ही खचाखच सेल्फी मारे जा रहे थे. बेशक नेता और कार्यकर्ता पसीने से लथपथ दिखाई दिये.  पप्पू यादव और कन्हैया कुमार को नहीं मिली जगह  करीब सवा दस बजे तेजस्वी यादव अपने सहयोगी नेताओं के साथ पहुंचे. वाम दल के सभी नेता उसी दौरान वहां पहुंचे. 10:30 बजे राहुल गांधी आयकर गोलंबर पहुंचे. फिर सबसे पहले वह एक खास गाड़ी में सवार हुए. इस दौरान तेजस्वी यादव, माकपा माले के महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य ,भाकपा के राष्ट्रीय महासचिव डी राजा, सीपीएम के महासचिव एमए बेबी, मुकेश सहनी के अलावा कांग्रेस और राजद के कई अन्य नेता भी चढ़ गये. तेज धूप में काफी समय से खड़े सांसद पप्पू यादव और कांग्रेस के फायर ब्रांड नेता के रूप में बढ़ाये जा रहे कन्हैया कुमार उस वाहन में जगह नहीं मिली. कन्हैया कुमार चढ़ भी गये थे,लेकिन सुरक्षा कर्मियों ने उन्हें उतार दिया. शुरुआत में राहुल गांधी वाहन में तेजस्वी के साथ आगे दिखे,लेकिन बाद में राहुल कुछ पीछे खड़े हो गये. बाकी लोगों को उन्होंने खुद आगे किया. तेज धूप थी. उसका असर साफ दिख रहा था. सबके चेहरे धूप मे लाल हुए जा रहे थे. भाजपा कार्यालय के समक्ष हुआ प्रदर्शन  10 बज कर 57 मिनट पर नेताओं का वाहन भाजपा के प्रदेश कार्यालय पहुंचा. नारेबाजी तेज हो गयी. इससे पहले ही महागठबंधन के लोगों ने भाजपा कार्यालय के समक्ष प्रदर्शन शुरू कर दिया था. इसको देखते हुए पुलिस हरकत में आ गयी. उसने वहां सुरक्षा घेरा खड़ा कर दिया. पुलिस का रुख समझते हुए कार्यकर्ता वहां से आगे बढ़ गये. सप्तमूर्ति चौराहे पर काफिला करीब सवा 11 बजे पहुंचा. हालांकि शीर्ष नेताओं का साढ़े 11 बजे पहुंचा. इस दौरान महागठबंधन कार्यकर्ताओं ने पुलिस की बेरीकेटिंग के सामने प्रदर्शन शुरू कर दिया. कुछ नेता और राजद की स्त्री नेता बेरीकेटिंग पर लटकी दिखाई दी. अन्य दलों के कुछ कार्यकर्ता बेरीकेट पर चढ़ गये. पुलिस ने उन्हें उतारा नहीं. पर बता दिया कि इस ओर आने की कोशिश नहीं की . बाद में कुछ जोर दिखाया तो डंडा धारी पुलिस आ गयी. इसके बाद मामला शांत हो गया. फिर सभी कार्यकर्ताओं ने अपने नेताओं के भाषण सुने और चुपचाप घर लौट गये. Also read: मधेपुरा विधानसभा में किसका पलड़ा होगा भारी, चौक-चौराहों पर शुरू हो गयी नेतृत्वक डिबेट खास बात आर ब्लॉक महागठबंधन नेताओं का काफिला निकल रहा था. फुटपाथ पर कुछ बीमार से दिख रहे लोग पड़े हुए थे. शोर हुआ. वह वहीं बैठ गये. काफिला गुजर गया. फिर वह वहीं लेट गये. सियासत में यथार्थ की कुछ और भी झलक देखी गयी. The post Bihar Politics: गमछी अलग, नारे अनेक, झंडा अलग….फिर भी एकता की मिठास में डूबा महागठबंधन appeared first on Naya Vichar.

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भालुओं की बस्ती में मिलती है यह खास सब्जी, स्वाद और फायदा इतना कि मटन भी इसके आगे फेल

Rugda Benefits: झारखंड, बिहार के जंगलों में एक ऐसी सब्जी पायी जाती है, जिसके स्वाद और पोषण के आगे मटन भी फेल हो जाए. खासकर आदिवासी लोग इसे बड़े चाव से खाते हैं. क्योंकि इस समुदाय की थाली में इसका खास स्थान है. कभी कभी बाजार में इसकी डिमांड इतनी हो जाती है कि इसकी कीमत 800 रुपये तक पहुंच जाती है. जी हां, हम बात कर रहे हैं रूगड़ा की. जिसे कई जगह भुटकी या तो कई जगह इसे पुट्टू के नाम से जानते हैं. दीमक की मिट्टी और जंगल की राख में उगती है ‘ब्लैक गोल्ड’ रूगड़ा या भुटकी दरअसल मशरूम की ही एक खास प्रजाति है, जो बरसात के मौसम में दीमक के टीलों और मिट्टी में प्राकृतिक रूप से उगती है. जंगल की आग बुझने के बाद जो काली मिट्टी बचती है, उसी में यह सब्जी सिर उठाती है. यही वजह है कि इसका रंग बाहर से काला होता है. हालांकि कई जगह पर सफेट रंग का भी देखने को मिल जाता है. हालांकि काला होने के बाद जब इसे धोया जाता है तो यह सफेद हो जाता है. फिर दिखने में आम यह मशरूम के जैसा ही लगता है. Also Read: Hung Curd Sandwich Recipe: स्कूल में टिफिन खोलते ही खुश हो जाएंगे शिशु, इस तरह मिनटों में उनके लिए बनाएं हंग कर्ड सैंडविच भालू भी हैं इसके दीवाने! न्यूज 18 की एक रिपोर्ट के अनुसार भालू का भी यह बेहद पसंदीदा व्यंजन है. रिपोर्ट में बताया गया है कि वाल्मीकिनगर जंगल और पश्चिम चंपारण के वन क्षेत्रों में रहने वालों की मानें तो भालू अक्सर अपनी गुफाएं रूगड़ा (भुटकी) वाले इलाके के पास ही बनाते हैं. यानी यह सब्जी इंसानों के साथ-साथ वन्यजीवों की भी पसंदीदा है. स्वाद में मटन, गुणों में अमृत जो लोग रूगड़ा या भुटकी खा चुके हैं, उनका कहना है कि इसका स्वाद ठीक मटन जैसा लगता है. कई लोग इसे मटन से अधिक फायदेमंद मानते हैं. क्योंकि इसमें उच्च प्रोटीन, फाइबर, पाचन में सहायक होने के साथ साथ रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाले पोषक तत्व भी पाये जाते हैं. मांग तो बहुत है, लेकिन मिलता मुश्किल से खास बात ये है कि यह मानसून के शुरुआत में ही मिलता है. क्योंकि इसकी उपलब्धता पर्यावरण और जंगलों पर भी निर्भर करती है. लंबे समय तक नहीं मिलने के कारण इसे खाने के शौकीन लोग मार्केट में आते ही हाथों-हाथ खरीद लेते हैं. Also Read: Paneer Samosa Recipe: हर बाइट में स्वाद और कुरकुरापन का जादू, इस तरह घर पर बनाएं पनीर समोसा The post भालुओं की बस्ती में मिलती है यह खास सब्जी, स्वाद और फायदा इतना कि मटन भी इसके आगे फेल appeared first on Naya Vichar.

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वडोदरा पुल हादसे में मरने वालों की संख्या बढ़कर हुई 10, सीएम भूपेंद्र पटेल ने दिए जांच के आदेश

Vadodara Bridge Collapse: गुजरात के वडोदरा में बुधवार को बड़ा हादसा हो गया. महिसागर नदी पर बने चार दशक पुराने पुल का कुछ हिस्सा ढह जाने से कई वाहन महिसागर नदी में गिर गए. हादसे में एक शिशु समेत 10 लोगों की मौत हो गई और नौ अन्य को बचा लिया गया. अधिकारियों ने यह जानकारी दी. बचाए गए लोगों में कईयों को चोटें आई हैं. हादसे में बचाए गए नौ लोगों में से पांच को वडोदरा के सर सैयाजीराव जनरल अस्पताल में रेफर किया गया है. राहत की बात यही है कि इनमें किसी को गंभीर चोट नहीं आई है. कैसे हुआ इतना बड़ा हादसा महिसागर नदी पर बना पुल का एक हिस्सा बुधवार को भरभरा कर गिर गया. वडोदरा ग्रामीण पुलिस अधीक्षक रोहन आनंद ने बताया कि गंभीरा पुल का एक स्लैब ढह जाने से 10 लोगों की मौत हो गई. महिसागर नदी पर स्थित गंभीरा पुल मध्य गुजरात और राज्य के सौराष्ट्र क्षेत्र को जोड़ता है. यह पुल पादरा शहर के पास स्थित है. घटनास्थल के दृश्यों में देखा जा सकता है कि पुल के दो खंभों के बीच बने स्लैब का पूरा हिस्सा ढह गया. स्लैब के ढहने से पुल से गुजर रहे वाहन नदी में गिर गए. पुल ढहने से 5 वाहन नदी में गिर वडोदरा के जिलाधिकारी अनिल धमेलिया ने बताया कि पुल ढहने के बाद पांच वाहन सीधे नदी में गिर गए. इन वाहनों में दो ट्रक, दो वैन, एक ऑटो रिक्शा और एक दोपहिया वाहन शामिल हैं. हादसे के दौरान दो वाहनों को गिरने से बचा लिया गया. पुलिस ने बताया कि पुल ढहने की घटना में मारे गए 10 लोगों में दो साल का एक बच्चा और उसकी चार साल बहन भी शामिल हैं. मृतकों में से अधिकतर वडोदरा और आणंद जिले के निवासी थे. पीएम मोदी ने घटना पर जताया गहरा दुख प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने इस हादसे पर गहरा दुख जाहिर किया है. केंद्र प्रशासन की ओर से प्रत्येक मृतक के परिजनों को दो लाख रुपये और राज्य प्रशासन की ओर से चार लाख रुपये की अनुग्रह राशि दी जाएगी. वहीं, घायल हुए लोगों को 50-50 हजार रुपये के मुआवजे की घोषणा की गई है. पीएम मोदी ने घटना को लेकर सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा “गुजरात के वडोदरा जिले में एक पुल के ढहने से हुई जनहानि बेहद दुखद है. जिन लोगों ने अपने प्रियजनों को खो दिया है, उनके प्रति मेरी संवेदना है. घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूं. प्रत्येक मृतक के परिजन को पीएमएनआरएफ से दो लाख रुपये की अनुग्रह राशि दी जाएगी. घायलों को 50,000 रुपये दिए जाएंगे.” हादसे की होगी जांच गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने इस घटना पर दुख जाहिर करते हुए कहा कि राज्य के सड़क एवं भवन विभाग को इस दुर्घटना की जांच कर जल्द ही पूरी रिपोर्ट सौंपेगी. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर उन्होंने पोस्ट करते हुए लिखा कि राज्य सड़क एवं भवन विभाग तथा पुल निर्माण में विशेषज्ञता रखने वाले निजी इंजीनियरों की टीम को और अन्य तकनीकी मामलों की प्रारंभिक जांच करने और रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए गए हैं. The post वडोदरा पुल हादसे में मरने वालों की संख्या बढ़कर हुई 10, सीएम भूपेंद्र पटेल ने दिए जांच के आदेश appeared first on Naya Vichar.

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Hung Curd Sandwich Recipe: स्कूल में टिफिन खोलते ही खुश हो जाएंगे बच्चे, इस तरह मिनटों में उनके लिए बनाएं हंग कर्ड सैंडविच

Hung Curd Sandwich Recipe: अगर आप अपने शिशु के टिफिन के लिए कोई ऐसा स्नैक ढूंढ रहे हैं जो स्वाद में लाजवाब और सेहत के लिए भी फायदेमंद हो, तो हंग कर्ड सैंडविच एक बेहतरीन ऑप्शन हो सकता है. इसमें दही की क्रीमी फिलिंग होती है जो बच्चों को बहुत पसंद आती है और यह पेट के लिए भी हल्का होता है. साथ ही इसे बनाना भी बेहद आसान है और 10 से 15 मिनट में तैयार किया जा सकता है. जब लंच ब्रेक में शिशु अपने टिफिन को खोलेंगे तो इस यमी डिश को देखकर उछल पड़ेंगे. तो चलिए इसे बनाने की सबसे आसान रेसिपी जानते हैं. हंग कर्ड सैंडविच बनाने के लिए आवश्यक सामग्री ब्रेड स्लाइस – 6 पीस व्हाइट या ब्राउन हंग कर्ड – 1 कप गाढ़ा छाना हुआ कटी हुई गाजर – एक चौथाई कप कटी हुई शिमला मिर्च – एक चौथाई कप उबला और मैश किया हुआ आलू – 1 बारीक कटी हुई हरी मिर्च – 1 ऑप्शनल बारीक कटा हरा धनिया – 2 टेबलस्पून काली मिर्च पाउडर – एक चौथाई टीस्पून चाट मसाला – आधा टीस्पून नमक – स्वादानुसार बटर या घी – टोस्ट करने के लिए ये भी पढ़ें: Suji Sandwich Recipe: टिफिन में हर दिन मचेगा धमाल! ब्रेड नहीं सूजी से बनाएं बच्चों का फेवरेट सैंडविच ये भी पढ़ें: Suji Appe Recipe: बच्चों के लिए शाम के नाश्ते को बनाएं हेल्दी और टेस्टी, इस तरह बिना ऑइल मिनटों में तैयार करें सूजी अप्पे हंग कर्ड सैंडविच बनाने की विधि सबसे पहले एक साफ कपड़े या मलमल के कपड़े में दही डालें और उसे 2-3 घंटे तक टांग कर रखें ताकि उसका पूरा पानी निकल जाए. तैयार हंग कर्ड को एक बाउल में निकाल लें. अब हंग कर्ड में कटी हुई सब्जियां (गाजर, शिमला मिर्च), मैश किया आलू, हरी मिर्च, हरा धनिया, नमक, काली मिर्च पाउडर और चाट मसाला डालें. सारी चीज़ों को अच्छे से मिक्स करें. अब ब्रेड स्लाइस लें और एक स्लाइस पर तैयार स्टफिंग की मोटी परत फैलाएं और दूसरे ब्रेड स्लाइस से कवर करें. अगर आप टोस्ट करना चाहते हैं तो तवा या सैंडविच मेकर में हल्का बटर लगाकर दोनों साइड से सुनहरा सेकें. अगर बच्चा सॉफ्ट सैंडविच पसंद करता है तो टोस्ट किए बिना भी दे सकते हैं. हंग कर्ड सैंडविच को आप टिफिन में हरी चटनी या टोमैटो सॉस के साथ पैक कर सकते हैं. ये भी पढ़ें: Suji Idli Recipe: 15 मिनट में तैयार होगी हल्की-फुल्की और सॉफ्ट सूजी इडली, जानें बिना झंझट तैयार होने वाली रेसिपी The post Hung Curd Sandwich Recipe: स्कूल में टिफिन खोलते ही खुश हो जाएंगे शिशु, इस तरह मिनटों में उनके लिए बनाएं हंग कर्ड सैंडविच appeared first on Naya Vichar.

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Bihar: वोट की स्याही, अब नागरिकता की स्याही से तय होगी : तीन तिथियों से तय होगा लोकतंत्र में प्रवेश

Bihar Politics: हिंदुस्तान का लोकतंत्र दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है. हर पांच साल में एक आम वोटर अपनी उंगली पर लगी स्याही से सत्ता के महलों की चाबी सौंपता है. आज सवाल यह है कि यह स्याही किसकी उंगली पर लगनी चाहिए? हिंदुस्तान निर्वाचन आयोग ने इस सवाल का जवाब इतिहास, संविधान और नागरिकता कानून की रोशनी में खोजा है . और जवाब आया है तीन निर्णायक तिथियों के रूप में. यह सिर्फ एक नियम की घोषणा नहीं है. यह लोकतंत्र के दरवाजे पर टंगे उस नये बोर्ड की कहानी है, जिस पर लिखा है, सिर्फ हिंदुस्तानीय नागरिकों का स्वागत है. कृपया अपनी नागरिकता का प्रमाण साथ रखें. हिंदुस्तान निर्वाचन आयोग का यह निर्णय हमें एक नयी दिशा में ले जा रहा है . जहां पहचान अब केवल आधार नंबर नहीं बल्कि संवैधानिक पहचान होगी. यह सख्ती नहीं बल्कि लोकतंत्र की मर्यादा की रक्षा है. यह गहन पुनरीक्षण केवल आंकड़ों का स्पोर्ट्स नहीं बल्कि नागरिकता की सच्चाई की खोज है. तीन तिथियां, तीन दौर, एक मकसद है सटीक पहचान पहला साक्ष्य एक जुलाई, 1987 से पहले जन्मे नागरिकों के लिए यह वह दौर था जब हिंदुस्तान को अपनी जनसंख्या पर शक नहीं था. जो भी हिंदुस्तान में जन्मा, वह हिंदुस्तानीय नागरिक माना गया. माता-पिता कौन थे, कहां से आए, इससे फर्क नहीं पड़ता था. हिंदुस्तानीय भूमि पर जन्म लेना ही पहचान था. हिंदुस्तान निर्वाचन आयोग भी 1987 से पहले जन्मे वोटरों से उनके जन्म तिथि और जन्मस्थान का साक्ष्य मांग रहा है. यह प्रावधान था कि 1955 से एक जुलाई 1987 के बीच हिंदुस्तान में जन्म लेने वाला व्यक्ति हिंदुस्तान का नागरिक है, भले ही उसके माता-पिता की राष्ट्रीयता कुछ भी रही हो. दूसरा साक्ष्य एक जुलाई 1987 से 3 दिसंबर, 2004 के बीच जन्मे नागरिक देश ने अनुभव से सीखा कि सिर्फ जन्मस्थान की गारंटी पर्याप्त नहीं. वर्ष 1987 तक देश में ऐसे नागरिकों की संख्या में वृद्धि हुई थी. तब संसद द्वारा 1986 में कानून बनाकर यह तय किया गया कि नागरिकता अब माता या पिता की नागरिकता पर भी आधारित होगी. इसमें कहा गया कि एक जुलाई, 1987 के बाद हिंदुस्तान में पैदा हुई व्यक्ति को हिंदुस्तान का नागरिक तभी माना जायेगा जब उनके जन्म के समय उसके माता-पिता में से कोई एक हिंदुस्तान का नागरिक हो. विदेशी नागरिकों के बच्चों को हिंदुस्तान की पहचान यूं ही नहीं दी जा सकती. तीसरा साक्ष्य यह लोकतांत्रिक व्यवस्था का सबसे सतर्क चरण है. अब यदि कोई हिंदुस्तान में जन्म लेता है, तो उसे तभी नागरिकता मिलेगी जब उसके दोनों माता-पिता हिंदुस्तानीय नागरिक हों. नागरिकता कानून को 2004 में और सख्त बना दिया गया. नागरिकता कानून में संसद ने 2003 में संशोधन कर कहा गया कि तीन दिसंबर, 2004 को या उसके बाद हिंदुस्तान में जन्म लेने वालों को तभी हिंदुस्तान का नागरिक माना जायेगा जब उनके माता-पिता दोनों हिंदुस्तान के नागरिक हों. इसी को आधार बनाकर हिंदुस्तान निर्वाचन आयोग ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान को प्रभावी बनाया है. सियासत, सुरक्षा और सच्चाई की तिकड़ी इस निर्णय का एक राजनैतिक पक्ष भी है, जिसे नजरअंदाज़ नहीं किया जा सकता. सीमावर्ती राज्यों, प्रवासी बहुल इलाकों और जन सांख्यिकीय रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में यह कदम वोट बैंक की सियासत को प्रभावित कर सकता है. परंतु यह कदम लोकतंत्र की दीर्घकालिक सेहत के लिए जरूरी भी है. जब मतदाता सूची में गैर-नागरिक शामिल होते हैं, तो यह न सिर्फ संविधान का उल्लंघन है, बल्कि लोकतंत्र की आत्मा के खिलाफ भी है. वोट सिर्फ अधिकार नहीं, बल्कि जिम्मेदारी है और यह जिम्मेदारी हिंदुस्तान के नागरिकों को ही मिलनी चाहिए. वोट सिर्फ मत नहीं, नागरिकता की मोहर है वोट देने का अधिकार हिंदुस्तान में जन्म लेने भर से नहीं, हिंदुस्तानीय होने की कानूनी पुष्टि से तय होगा. तीन तिथियां सिर्फ टाइमलाइन नहीं हैं .ये हैं लोकतंत्र के दरवाजे की तीन चाबियां हैं. और अगर आपके पास इनमें से एक चाबी है तो आप हिंदुस्तान की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक यात्रा में सहभागी बन सकते हैं. Also read: मधेपुरा विधानसभा में किसका पलड़ा होगा भारी, चौक-चौराहों पर शुरू हो गयी नेतृत्वक डिबेट सियासत, सुरक्षा और सच्चाई की तिकड़ी इस निर्णय का एक राजनैतिक पक्ष भी है जिसे नजरअंदाज़ नहीं किया जा सकता. सीमावर्ती राज्यों, प्रवासी बहुल इलाकों और जनसांख्यिकीय रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में यह कदम वोट बैंक की सियासत को प्रभावित कर सकता है. परंतु यह कदम लोकतंत्र की दीर्घकालिक सेहत के लिए जरूरी भी है. The post Bihar: वोट की स्याही, अब नागरिकता की स्याही से तय होगी : तीन तिथियों से तय होगा लोकतंत्र में प्रवेश appeared first on Naya Vichar.

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झारखंड की एक महिला मुखिया पर गिरी गाज, सस्पेंड करने के साथ वित्तीय शक्तियां जब्त

Woman Mukhiya Suspended: हजारीबाग-झारखंड पंचायती राज विभाग ने हजारीबाग जिले के विष्णुगढ़ प्रखंड की अलपिटो पंचायत की मुखिया सुमिता देवी की वित्तीय शक्ति जब्त करते हुए उन्हें निलंबित कर दिया है. 15वें वित्त, मनरेगा और अन्य मदों से विकास योजनाओं में अनियमितता पाये जाने पर मुखिया के खिलाफ यह कार्रवाई की गयी है. मुखिया पर 22 लाख 95 हजार रुपए की अनियमितता का आरोप है. इस कार्य में मुखिया के अलावा उनके पति और पंचायत सचिव की संलिप्तता पायी गयी है. हजारीबाग डीसी की रिपोर्ट पर एक्शन हजारीबाग उपायुक्त ने इस संबंध में 21 अप्रैल 2025 को झारखंड पंचायती राज विभाग को सूचित किया था. उपायुक्त के प्रतिवेदन के आधार पर अलपिटो पंचायत में विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में अनियमितता पायी गयी थी. वित्तीय वर्ष 2021-22 में 16 योजनाओं के क्रियान्वयन में लाभुक समिति को भुगतान नहीं कर किसी एक व्यक्ति नारायण यादव के खाते में राशि जमा की गयी थी. ये भी पढ़ें: झारखंड में 4 लोगों की हत्या मामले में आया फैसला, एक को फांसी, दो को उम्रकैद की सजा निलंबित करते हुए वित्तीय शक्तियां ले ली गयीं वापस गड़बड़ी को लेकर मुखिया सुमिता देवी से सात दिसंबर 2024 को स्पष्टीकरण मांगा गया था, लेकिन मुखिया ने अपना पक्ष और स्पष्टीकरण समर्पित नहीं किया. इसके बाद झारखंड राज्य पंचायती अधिनियम 2001 एवं विभागीय आदेश संख्या-26 में निहित प्रावधानों और उपायुक्त की अनुशंसा के आलोक में मुखिया को निलंबित करते हुए सारी वित्तीय शक्तियां वापस ले ली गयी हैं. ये भी पढ़ें: Jharkhand Village: झारखंड का एक गांव, जहां बरसात में बंधक बन जाती है जिंदगी, गुस्से में ग्रामीणों ने दी नो एंट्री की चेतावनी ये भी पढ़ें: Jharkhand Naxal: भाकपा माओवादियों की बड़ी साजिश झारखंड में आज फिर नाकाम, सर्च ऑपरेशन में 18 IED बम बरामद ये भी पढ़ें: श्री शिव शक्ति मंदिर के नौवें वार्षिकोत्सव पर 400 स्त्रीओं ने उठाया कलश, भगवान शिव के जयघोष से गूंजी रांची The post झारखंड की एक स्त्री मुखिया पर गिरी गाज, सस्पेंड करने के साथ वित्तीय शक्तियां जब्त appeared first on Naya Vichar.

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Chhangur Baba: छांगुर बाबा कभी मांगता था भीख, देखते-देखते खड़ा कर लिया करोड़ों का काला साम्राज्य

Chhangur Baba: जलालुद्दीन उर्फ छांगुर बाबा 2010 से पहले साइकिल पर गली-गली घूमकर अंगूठी बेचा करता था और टोना-टोटका किया करता था. धीरे-धीरे वो झाड़-फूंक कर बीमारियों को ठीक करने का दावा करता था और लोगों को अपनी जाल में फंसाता था. उसने अपने साम्राज्य को बढ़ाना शुरू किया और देखते-देखते करोड़ों रुपये की संपत्ति का मालिक बन गया. बाबा को हाल ही में उत्तर प्रदेश आतंकवाद निरोधक दस्ते ने गिरफ्तार किया था. इसके अलावा नवीन उर्फ ​​जमालुद्दीन और महबूब (जो जलालुद्दीन का बेटा है) को 8 अप्रैल को गिरफ्तार किया गया था. प्रलोभन देकर धर्म परिवर्तन करता था छांगुर बाबा पुलिस के बयान में कहा गया है, “गरीब, असहाय मजदूरों, कमजोर वर्गों और विधवा स्त्रीओं को प्रलोभन, आर्थिक मदद, शादी के वादे या धमकी देकर धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर किया गया.” विदेशी फंडिंग से करोड़ों की कमाई छांगुर बाबा को धर्मांतरण के लिए विदेशी फंडिंग होती थी. उसने धर्मांतरण के लिए जाति आधारित रकम तय की थी. जांच में पाया गया कि छांगुर बाता और उसके अन्य सहयोगियों के 40 से अधिक बैंक खातों से 100 करोड़ रुपये से अधिक की लेन-देन हुई है. उसे खाड़ी देशों से भी फंडिंग होती थी. प्रशासनी जमीन पर कब्जा अपर पुलिस अधीक्षक विशाल पांडे ने बताया कि शिकायत मिली थी कि मध्यपुर गांव में जलालुद्दीन उर्फ छांगुर बाबा ने प्रशासनी जमीन हड़प ली है और जांच में यह बात सच पाई गई. बाबा ने प्रशासनी जमीन पर आलीशान कोठी बनवाई थी. जिसमें करीब 20 कमरे थे. बाबा लग्जरी लाइफ जीता था. उसके पास लग्जरी गाड़ियां, शोरूम हैं. फिलहाल पुलिस ने उसके अवैध संपत्तियों पर बुलडोजर कार्रवाई शुरू कर दी है. 5 जुलाई को एटीएस ने बाबा को उसके सहयोगियों के साथ किया था गिरफ्तार शनिवार 5 जुलाई को उत्तर प्रदेश आतंकवाद निरोधी दस्ते ने छांगुर बाबा को उसके सहयोगी के साथ गिरफ्तार किया था. छांगुर बाबा और सह-आरोपी नीतू उर्फ नसरीन बलरामपुर जिले के मधपुर के निवासी हैं. छांगुर बाबा के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया गया था. पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी पर 50,000 रुपये का नकद इनाम घोषित किया था. सीएम योगी ने कहा था बाबा की गतिविधियां न केवल असामाजिक हैं, बल्कि राष्ट्रविरोधी भी हैं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को कहा था कि प्रारंभिक जांच से पता चला है कि जलालुद्दीन की गतिविधियाँ न केवल असामाजिक हैं, बल्कि राष्ट्रविरोधी भी हैं. लखनऊ के गोमतीनगर स्थित एक पुलिस थाने में हिंदुस्तानीय न्याय संहिता (बीएनएस) और उत्तर प्रदेश गैरकानूनी धर्म परिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम, 2021 की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज मामले में आरोप लगाया गया है कि आरोपियों ने लोगों का धर्म परिवर्तन कराने के लिए संगठित तरीके से काम किया और हिंदुओं तथा गैर मुस्लिम समुदायों के लोगों का इस्लाम में धर्मांतरण कराया. The post Chhangur Baba: छांगुर बाबा कभी मांगता था भीख, देखते-देखते खड़ा कर लिया करोड़ों का काला साम्राज्य appeared first on Naya Vichar.

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Bihar Election: मधेपुरा विधानसभा में किसका पलड़ा होगा भारी, चौक-चौराहों पर शुरू हो गयी राजनीतिक डिबेट

कुमार आशीष/मधेपुरा/बिहार: बिहार विधानसभा चुनाव का समय जैसे-जैसे करीब आता जा रहा है, मधेपुरा विधानसभा सीट को लेकर नेतृत्वक हलचल तेज होती जा रही है. चौक-चौराहों पर विभिन्न दलों के संभावित प्रत्याशियों के नामों की चर्चा आम हो गयी है. वर्तमान में इस सीट से राजद विधायक व पूर्व शिक्षा मंत्री प्रो चंद्रशेखर प्रतिनिधित्व कर रहे हैं. वह इस बार भी पार्टी के प्रमुख चेहरा माने जा रहे हैं, लेकिन उनके खिलाफ कई दलों से मजबूत दावेदार सामने आ सकते हैं, जिससे मुकाबला रोचक होने के आसार हैं. राजद से प्रो चंद्रशेखर की मजबूत दावेदारी राजद की ओर से मौजूदा विधायक प्रो चंद्रशेखर का नाम सबसे प्रबल दावेदार के रूप में सामने है. वे लगातार 2010, 2015 व 2020 में इस सीट से राजद की ओर से जीत दर्ज कर चुके हैं और पिछले दो बार की प्रशासन में आपदा प्रबंधन और शिक्षा मंत्री भी बनाये जा चुके हैं. उनके समर्थकों का कहना है कि उन्होंने शिक्षा और विकास के क्षेत्र में कई योजनाएं शुरू की हैं, जिससे उनका जनाधार बना हुआ है. 2020 के चुनाव में उन्हें 81116 यानी डाले गये कुल मतों का 39.52 प्रतिशत वोट मिला था. दूसरी तरफ राजद से आदर्श कॉलेज घैलाढ़ के संस्थापक व पार्टी नेता ई प्रणव प्रकाश की भी चर्चा हो रही है. विगत दिनों से प्रणव प्रकाश मतदाताओं के बीच तेजस्वी के पैगाम को लेकर सक्रिय दिख रहे हैं. उनका मानना है कि बेदाग छवि की वजह से राजद में सभी गुट के पसंदीदा बने हुए हैं. JDU से निखिल मंडल व सत्यजीत यादव के नाम की है चर्चा जदयू की ओर से इस बार पिछले चुनाव में प्रत्याशी रहे निखिल मंडल के नाम की चर्चा है. निखिल मंडल पिछली बार चुनाव मैदान में थे और इस बार फिर से उनकी दावेदारी पेश करने की पूरी संभावना है. निखिल मंडल पूर्व मुख्यमंत्री बीपी मंडल के पौत्र, पूर्व विधायक मणींद्र कुमार मंडल के पुत्र व बिहार विधानसभा के उपाध्यक्ष नरेंद्र नारायण यादव के दामाद हैं. बीते चुनाव में दूसरे नंबर पर रहे निखिल मंडल को कुल 64767 यानी 31.7 प्रतिशत वोट मिले थे. इनके अलावा जदयू के युवा नेता सत्यजीत यादव का नाम भी चर्चा में है. सत्यजीत यादव मधेपुरा से दो बार सांसद रहे आरपी यादव के पुत्र हैं और संप्रति पार्टी में प्रदेश महासचिव हैं. जदयू नेता सत्यजीत यादव को भी संगठन में सक्रियता और युवा नेतृत्व के कारण संभावित प्रत्याशी माना जा रहा है. जदयू के स्थानीय कार्यकर्ता विधानसभा क्षेत्र में इनकी भी मजबूत पकड़ बताते हैं. जनसुराज से गजेंद्र कुमार या शशि कुमार पिछले एक-डेढ़ वर्षों में जनसुराज ने भी कोसी क्षेत्र में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करायी है. मधेपुरा सीट से जनसुराज पार्टी की ओर से गजेंद्र कुमार का नाम सामने आ रहा है. वे सामाजिक कार्यों में सक्रिय रहे हैं और युवाओं के बीच लोकप्रिय माने जाते हैं. यदि जनसुराज उन्हें उम्मीदवार बनाता है, तो मुकाबले में एक नयी ऊर्जा दिखायी दे सकती है. दूसरी ओर जनसुराज पार्टी से ही गम्हरिया प्रखंड प्रमुख शशि कुमार का नाम भी संभावित प्रत्याशियों में लिया जा रहा है. भाजपा से दीपक या स्वदेश कुमार यदि किसी कारणवश एनडीए में सीटों का हेरफेर या अदला-बदली होती है और मधेपुरा की यह सीट जदयू से लेकर भाजपा को दी जाती है, तो भाजपा की ओर से यहां मैदान में कौन उतरेगा, इसको लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है. हालांकि पार्टी जिलाध्यक्ष दीपक कुमार के समर्थक उन्हें प्रत्याशी बनाये जाने की मांग कर रहे हैं. वहीं, भाजपा में तेजी से उभरे नेता स्वदेश कुमार की चर्चा सबसे अधिक थी, लेकिन हाल ही में उन्हें बिहार पिछड़ा वर्ग आयोग का सदस्य बना दिया गया, जिससे अब वे चुनावी दौड़ में पीछे माने जा रहे हैं. Also Read: शहरी विकास को नई रफ्तार! 1500 करोड़ की योजनाओं को मिली मंजूरी, बनेंगे सड़क और नाले कांग्रेस से सार्थक रंजन के नाम की हो रही चर्चा पिछले विधानसभा चुनाव में जाप के संरक्षक पप्पू यादव ने मधेपुरा सीट से चुनाव लड़ा था, लेकिन गृह जिला होने के बाद भी यहां उनकी जमानत जब्त हो गयी थी. अभी वह पूर्णिया से निर्दलीय सांसद हैं, लेकिन कांग्रेस से उनकी काफी करीबी है. इस बार उनके विधानसभा चुनाव लड़ने की कहीं कोई चर्चा तो नहीं है, लेकिन कांग्रेस के टिकट पर उनके पुत्र सार्थक रंजन को मैदान में उतारने की चर्चा जोरों पर जरूर है. सार्थक की नेतृत्व में यह पहली पारी होगी. वे युवाओं के बीच अपनी छवि बनाने की कोशिश कर रहे हैं. निश्चित रूप से पप्पू यादव भी सार्थक की जीत के लिए हरसंभव कोशिश करेंगे. The post Bihar Election: मधेपुरा विधानसभा में किसका पलड़ा होगा भारी, चौक-चौराहों पर शुरू हो गयी नेतृत्वक डिबेट appeared first on Naya Vichar.

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एडीजी प्रयागराज की फटकार से हिला खागा थाना, विधवा की जमीन पर कब्जे और मारपीट में लापरवाही पर दिए कड़े निर्देश

Fatehpur News: खागा कस्बा स्थित जनहितकारी इंटर कॉलेज के पास रहने वाली विधवा रामरानी सिंह ने बताया कि उनके देवर और कुछ प्रभावशाली स्थानीय लोग मिलकर उनकी पुश्तैनी भूमि पर अवैध कब्जा करने की कोशिश कर रहे हैं. रामरानी सिंह का कहना है कि पति की मृत्यु के बाद वह अकेली रह गई हैं और इसी का फायदा उठाकर रिश्तेदारों ने उनकी जमीन हथियाने की योजना बना ली. विपक्षीगण खुलेआम धमकी दे रहे हैं कि चाहे जो हो जाए, वो जमीन लेकर ही रहेंगे. स्त्री ने कहा कि उन्हें डराने और बेदखल करने के लिए हर तरह की दबंगई अपनाई जा रही है. अभिलेखों में फर्जीवाड़ा, फिर दबंगई से कब्जा रामरानी सिंह ने एडीजी को बताया कि सबसे पहले अभिलेखों में हेरफेर कर उनकी जमीन पर अवैध हक जताने की कोशिश की गई. लेकिन जब तहसील के कर्मचारियों ने जांच में फर्जी दस्तावेज पकड़ लिए, तो विपक्षी पक्ष ने सीधे जबरन कब्जे का रास्ता अपना लिया. 23 जून को जब वह लेखपाल द्वारा चिह्नित अपनी भूमि पर मेड़बंदी करवा रही थीं, तभी विपक्षीजन लाठी-डंडों से लैस होकर पहुंचे. उन्होंने स्त्री के साथ गाली-गलौज, धक्का-मुक्की और मारपीट की. जान बचाकर वह किसी तरह वहां से भागीं. इसके बाद कुछ दिन बीते नहीं कि उन्होंने उसी भूमि पर ट्रैक्टर चलवाकर जोताई करवा दी और खेत को पूरी तरह अपने कब्जे में ले लिया. पुलिस ने नहीं की कार्रवाई, आरोपियों के बढ़े हौसले स्त्री का आरोप है कि स्थानीय थाने में कई बार शिकायत करने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई. पुलिस की निष्क्रियता के चलते आरोपियों के हौसले लगातार बढ़ते जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि खेत में जबरन धान की रोपाई कर दी गई है, ताकि भूमि पर कब्जा साबित किया जा सके. संपूर्ण समाधान दिवस में उन्होंने डीएम और एसपी को भी अपनी पीड़ा बताई, परंतु महज औपचारिकता निभा दी गई. प्रशासनिक निर्देशों को दरकिनार कर केस की अनदेखी होती रही. स्त्री ने कहा कि उन्हें न्याय की बजाय सिर्फ तारीखें और आश्वासन मिलते रहे हैं. फिर से पेड़ लगाने गईं तो मिली धमकी और मारपीट सात जुलाई को रामरानी सिंह अपने खेत में पेड़ लगाने गई थीं, ताकि भूमि पर अपनी उपस्थिति दर्ज करा सकें. लेकिन जैसे ही काम शुरू हुआ, विपक्षी फिर वहां पहुंच गए. उन्होंने स्त्री को पकड़कर धक्का दिया, गालियां दीं और जान से मारने की धमकी दी. डर के मारे स्त्री फिर खेत छोड़कर वापस लौट आईं. उन्होंने बताया कि हर बार शिकायत करने के बाद भी पुलिस कोई कदम नहीं उठाती, जिससे विपक्षी पक्ष और भी अधिक आक्रामक हो गया है. एडीजी ने खागा कोतवाल को लगाई फटकार, दिया कार्रवाई का निर्देश पीड़िता की पूरी बात सुनने के बाद एडीजी जोन प्रयागराज डॉ. संजीव गुप्ता ने खागा कोतवाली प्रभारी को फोन कर मामले में तत्काल संज्ञान लेने के निर्देश दिए. उन्होंने पुलिस की निष्क्रियता पर नाराजगी जताई और कहा कि अगर एक सप्ताह के भीतर जरूरी कार्रवाई नहीं हुई तो जिम्मेदार अधिकारियों पर भी विभागीय एक्शन लिया जाएगा. उन्होंने पीड़िता को आश्वस्त किया कि अब उसकी शिकायत को गंभीरता से लिया जाएगा और दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी. The post एडीजी प्रयागराज की फटकार से हिला खागा थाना, विधवा की जमीन पर कब्जे और मारपीट में लापरवाही पर दिए कड़े निर्देश appeared first on Naya Vichar.

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Viral Video: अपनी मां के पंखों के बीच बैठ पानी में तैरते दिखे नन्हे हंस, दिल को छू लेगा यह क्यूट वीडियो

Viral Video: एक शिशु के लिए उनकी दुनिया उसकी मां होती है. खास कर जानवरों में तो मां ही सब कुछ होती है. उन्हें खाना खिलाना, उनका ख्याल रखना, दूसरे शिकारियों से उन्हें बचाना… सब उनकी मां की जिम्मेदारी होती है. सोशल मीडिया पर ऐसा ही एक वीडियो ट्रेंड कर रहा है.25 सेकंड के वीडियो में दिख रहा है कि हंस के शिशु अपनी मां की पीठ पर दोनों पंखों के बीच बैठकर बड़े आराम से तैर रहे हैं. सोशल मीडिया पर इस क्यूट वीडियो को लोगों ने खूब पसंद किया है. वीडियो में क्या दिख रहा? वीडियो में दिख रहा है कि एक हंस की पीठ पर उसके दो शिशु बैठे हैं. दोनों शिशु अपनी मां की पंखों के अंदर छिपे हुए हैं. बीच-बीच में दोनों शिशु पंखों के बीच से अपने सिर निकालकर आप पास के नजारे भी देख रहे हैं. सोशल मीडिया पर वीडियो को काफी पसंद किया गया है. इस क्यूट वीडियो को हजारों लोगों ने पसंद किया है. कई लोगों ने वीडियो को लाइक और शेयर किया है. Oh to be teeny tiny baby swan napping on your mom’s feathery back, floating through the water. pic.twitter.com/dAJqA63yHQ — Nature is Amazing ☘️ (@AMAZlNGNATURE) July 9, 2025 वायरल हो रहा वीडियो सोशल मीडिया पर यह वीडियो तेजी से वायरल हुआ है. इसे अब तक एक लाख 10 हजार से ज्यादा लोगों ने देख लिया है. इसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर @AMAZlNGNATURE के आईडी से शेयर किया गया है. वीडियो को कई लोगों ने लाइक और शेयर किया है. कई लोगों ने किया कमेंट वायरल हो रहे वीडियो पर कई लोगों ने कमेंट किया है. कोई यूजर ने वीडियो को ब्यूटीफुल कहा है तो किसी ने वीडियो पर अमेजिंग लिखा है. एक यूजर ने प्रतिक्रिया देते हुए लिखा ‘हंसों के बारे में यह कभी नहीं पता था, क्या ऐसे और भी पक्षी हैं जो ऐसा करते हैं?’ वहीं एक और यूजर ने लिखा है ‘प्यार का सुंदर रूप.’ कई अन्य यूजर्स ने भी वीडियो पर कमेंट किया है. The post Viral Video: अपनी मां के पंखों के बीच बैठ पानी में तैरते दिखे नन्हे हंस, दिल को छू लेगा यह क्यूट वीडियो appeared first on Naya Vichar.

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