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October 16, 2025

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Baby Girl Names: अपनी बेटी के लिए चुनें सबसे खूबूसरत अर्थ वाला एक प्यारा नाम, यहां जानें टॉप नेम्स के लिस्ट

Baby Girl Names: बेटी का जन्म एक अनमोल उपहार होता है, और उसके नाम में छिपा होता है उसका भविष्य, उसकी पहचान. हर माता-पिता की यह ख्वाहिश होती है कि उनकी लाड़ली का नाम न केवल प्यारा हो, बल्कि उसमें गहराई और सुंदर अर्थ भी हो. अगर आप भी अपनी नन्हीं परी के लिए एक ऐसा नाम ढूंढ रहे हैं जो सुनने में मनमोहक हो और अर्थ में भी समृद्ध हो, तो आप बिलकुल सही जगह पर हैं. इस आर्टिकल में में हम आपके लिए लाए हैं टॉप बेबी गर्ल नेम्स की एक शानदार लिस्ट, जिससे आप अपनी बेटी के लिए एक खूबूसरत अर्थ वाला प्यारा नाम चुने सकें. बेटी के खूबूसरत अर्थ वाला प्यारा नाम क्या है ? आराध्या (Aaradhya) – पूजा के योग्य, जिसे पूजा जाएकियारा (Kiara) – रोशनी, चमकअनाया (Anaya) – भगवान की विशेष कृपाइशिता (Ishita) – इच्छा शक्ति, महानताविराजिका (Virajika) – तेजस्वी, गौरवशालीतन्वी (Tanvi) – नाज़ुक, सुंदरसिया (Siya) – माता सीता का नाममायरा (Myra) – प्यारी, प्रियअवनी (Avni) – पृथ्वीनव्या (Navya) – नई, आधुनिकश्रिया (Shriya) – समृद्धि, देवी लक्ष्मी का नामधृति (Dhriti) – धैर्य, साहसअन्विता (Anvita) – समझदार, ज्ञानीवेदिका (Vedika) – ज्ञान का आधार, पूजा की वेदीप्रिशा (Prisha) – भगवान का उपहाररिधिमा (Ridhima) – प्रेम, खुशीकाव्या (Kavya) – कविता, साहित्यआश्विका (Ashvika) – देवी दुर्गा का रूपतृषा (Trisha) – इच्छा, प्याससंविता (Samvita) – ज्ञानवान, सजग ये भी पढ़ें: Baby Girl Names: नन्ही परी के लिए रखें ये प्यारे और यूनिक नाम, हर नाम का है खास मतलब ये भी पढ़ें: Baby Names: शिशु का नाम बताएगा उसका भाग्य,जानिए सबसे प्यारे और अर्थपूर्ण नामों की लिस्ट ये भी पढ़ें: Baby Names: शिशु के नाम में छिपा होता है उसका भविष्य, देखें टॉप नामों की लिस्ट Disclaimer: यह आर्टिकल सामान्य जानकारियों और मान्यताओं पर आधारित है. नया विचार इसकी पुष्टि नहीं करता है. The post Baby Girl Names: अपनी बेटी के लिए चुनें सबसे खूबूसरत अर्थ वाला एक प्यारा नाम, यहां जानें टॉप नेम्स के लिस्ट appeared first on Naya Vichar.

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Bihar Election 2025: आज से सीएम नीतीश करेंगे चुनावी प्रचार का शंखनाद! मंत्री विजय चौधरी के नामांकन में रहेंगे मौजूद

Bihar Election 2025: बिहार में अब चुनावी माहौल गरमाने लगा है. मुख्यमंत्री नीतीश आज यानी गुरुवार से अपने प्रचार अभियान की शुरुआत करने जा रहे हैं. जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने बुधवार को एक्स पर बताया कि नीतीश कुमार सबसे पहले सरायरंजन और बहादुरपुर जाएंगे, जहां वे जल संसाधन मंत्री विजय चौधरी और मंत्री मदन सहनी के नामांकन में शामिल होंगे.  Bihar Vidhansabha Election 2025 : मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आज से अपने प्रचार अभियान की करेंगे शुरुआत. #Bihar #BiharElection #biharvidhansabhaelection2025 #prabhatkhabar #NitishKumar #JDU #NDA — Naya Vichar (@prabhatkhabar) October 16, 2025 नीतीश कुमार के नेतृत्व में फिर से प्रशासन बनाना है संजय झा ने आगे कहा कि एनडीए पूरी तरह एकजुट है और सबका मकसद साफ है, नीतीश कुमार के नेतृत्व में फिर से प्रशासन बनाना. उन्होंने कहा कि बिहार के लोग डबल इंजन की प्रशासन से हो रहे विकास को देख रहे हैं और अब बदलाव नहीं चाहते हैं. उन्होंने नीतीश कुमार की कार्यशैली की भी तारीफ की. बोले, “सीएम हर फैसला सोच-समझकर और सबकी राय लेकर करते हैं. प्रशासन और पार्टी दोनों में वही अंतिम निर्णय लेते हैं.” 2010 का भी टूटेगा रिकॉर्ड संजय झा ने दावा किया कि इस बार एनडीए को जबरदस्त बहुमत मिलेगा, इतना कि 2010 का रिकॉर्ड भी टूट जाएगा. उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार ने एक करोड़ युवाओं को नौकरी या रोजगार देने का वादा किया है, और विकास के सारे बड़े प्रोजेक्ट, सिक्स लेन हाइवे से लेकर नई योजनाओं तक तेजी से पूरे किए जाएंगे. अंत में उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि लोगों का मूड साफ है, स्त्रीएं और युवा दोनों नीतीश प्रशासन के साथ हैं, इसलिए विपक्ष में डर साफ दिख रहा है. ALSO READ: Bihar Election 2025: सम्राट, चिराग और कुशवाहा का एक जैसा पोस्ट, माहौल शांत करने की कोशिश! क्या अंदरखाने में सब ठीक है? The post Bihar Election 2025: आज से सीएम नीतीश करेंगे चुनावी प्रचार का शंखनाद! मंत्री विजय चौधरी के नामांकन में रहेंगे मौजूद appeared first on Naya Vichar.

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Aaj Ka Panchang: आज 16 अक्टूबर 2025 का अभिजीत मुहूर्त और ब्रह्म मुहूर्त, जानें सूर्योदय और सूर्यास्त का समय

Aaj Ka Panchang 16 October 2025: आज 16 अक्टूबर 2025 गुरुवार का पंचांग विशेष धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व रखता है. इस दिन शुभ मुहूर्त, नक्षत्र, तिथि, वार, योग और करण की जानकारी महत्वपूर्ण कार्यों के लिए मार्गदर्शन देती है. जानिए आज का दिन पूजा, व्रत और शुभ कार्यों हेतु कैसा है. आज का पंचांग : 16 अक्टूबर 2025, गुरुवार कार्तिक कृष्ण पक्ष दशमी दिन -01:46 उपरांत एकादशी श्री शुभ संवत-2082,शाके-1947,हिजरी सन-1446-47 सूर्योदय 05:48 सूर्यास्त-05:21 सूर्योदय कालीन नक्षत्र- श्लेषा उपरांत मघा , योग -साध्य ,करण -वव , सूर्योदय कालीन ग्रह विचार -सूर्य- कन्या , चंद्रमा- कर्क , मंगल-तुला , बुध- तुला , गुरु-कर्क ,शुक्र- कन्या ,शनि-कुम्भ ,राहु-कुम्भ , केतु-सिंह चौघड़िया-गुरुवार प्रातः:06:00 से 07:30 शुभ प्रात:07:30 से 09:00 तक रोग प्रातः 09.00 से 10.30 तक उद्वेग प्रातः10:30 से 12:00 तक चर दोपहर: 12:00 से 1:30 तक लाभ दोपहरः 01:30 से 03:00 तक अमृत शामः 03:00 से 04:30 तक काल शामः 04:30 से 06:00 तक शुभ उपायः तंदूर की बनी रोटी कुत्तों को खिलायें . ये भी पढ़ें: मिथुन राशि वालों के गुप्त शत्रुओं की योजनाएं विफल होंगी, जानें मेष से लेकर मीन राशि का आज 16 अक्टूबर 2025 का राशिफल आराधनाः ऊं हं हनुमते रूद्रात्मकाय हुं फट कपिभ्यो नम: का 1 माला जाप करें. खरीदारी करने का समय शामः 03:00 से 04:30 तक राहुकाल: दोपहर 1:30 से 3:00 बजे तक दिशाशूल-अग्नेय एवं दक्षिण ..अथ राशि फलम्.. The post Aaj Ka Panchang: आज 16 अक्टूबर 2025 का अभिजीत मुहूर्त और ब्रह्म मुहूर्त, जानें सूर्योदय और सूर्यास्त का समय appeared first on Naya Vichar.

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Rama Ekadashi Vrat Katha in Hindi: रमा एकादशी पर करें इस व्रत कथा का पाठ, घर में हो सकती है सुख, शांति, समृद्धि और सौभाग्य की वृद्धि

Rama Ekadashi Vrat Katha in Hindi: श्री ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार, कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को “रमा एकादशी” कहा जाता है. यह तिथि बहुत ही शुभ मानी जाती है क्योंकि इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विशेष रूप से पूजा की जाती है. धर्मशास्त्रों में बताया गया है कि रमा एकादशी का व्रत करने से माता लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और उपासक के घर में स्थायी रूप से निवास करती हैं. इससे घर में सुख, शांति, समृद्धि और सौभाग्य की वृद्धि होती है. जो व्यक्ति इस व्रत को श्रद्धा और नियमपूर्वक करता है, उसे पापों से मुक्ति और अंत में मोक्ष की प्राप्ति होती है. युधिष्ठिर का प्रश्न और श्रीकृष्ण का उत्तर एक दिन धर्मराज युधिष्ठिर ने श्रीकृष्ण से पूछा — “हे भगवन्! कृपया मुझे कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी की कथा सुनाइए. इस एकादशी का नाम क्या है और इसे करने से क्या फल प्राप्त होता है?” श्रीकृष्ण मुस्कराते हुए बोले — “हे राजन! यह एकादशी रमा एकादशी के नाम से जानी जाती है. जो भी भक्त इस व्रत को करता है, उसके सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और उसे अपार पुण्य की प्राप्ति होती है. अब मैं तुम्हें इस एकादशी की पौराणिक कथा सुनाता हूँ, ध्यानपूर्वक सुनो.” ये भी पढ़ें: रमा एकादशी पर आज हो रहा है ग्रहों के राजा सूर्य देव करेंगे राशि परिवर्तन, जानें नियम राजा मुचुकुन्द और उनकी पुत्री चन्द्रभागा बहुत समय पहले मुचुकुन्द नामक एक महान राजा राज्य करते थे. वे सत्यवादी, धर्मपरायण और भगवान विष्णु के परम भक्त थे. उनके मित्रों में इन्द्र, वरुण, कुबेर और विभीषण जैसे देवता शामिल थे. उनकी एक सुंदर और गुणवान पुत्री थी जिसका नाम चन्द्रभागा था. जब वह बड़ी हुई तो राजा ने उसका विवाह राजा चन्द्रसेन के पुत्र शोभन के साथ कर दिया. एकादशी का आगमन और चिंता एक बार चन्द्रभागा अपने ससुराल में थी, तभी कार्तिक मास की एकादशी आई. उसे याद आया कि उसके पिता के राज्य में यह नियम था कि एकादशी के दिन कोई भी व्यक्ति भोजन या जल ग्रहण नहीं करता — यहाँ तक कि जानवरों को भी उस दिन भोजन नहीं दिया जाता था. चन्द्रभागा सोचने लगी, “मेरे पति शोभन बहुत दुर्बल हैं, वे यह कठोर व्रत कैसे कर पाएंगे?” शोभन और चन्द्रभागा की बातचीत राजा शोभन ने अपनी पत्नी से कहा, “प्रिय चन्द्रभागा, मुझे बताओ, मैं क्या करूँ? मैं बहुत कमजोर हूँ, क्या मैं इस व्रत को निभा पाऊँगा?” चन्द्रभागा बोली, “हे स्वामी! मेरे पिता के राज्य में कोई भी व्यक्ति एकादशी के दिन भोजन नहीं करता. यदि आप इस नियम का पालन नहीं कर सकते तो किसी दूसरे राज्य में चले जाइए. यदि आप यहाँ रहेंगे तो आपको व्रत करना ही पड़ेगा.” शोभन ने उत्तर दिया, “तुम्हारी बात सही है, प्रिये. लेकिन मैं इस व्रत को अवश्य करूँगा. मेरे भाग्य में जो लिखा है, वही होगा.” व्रत का पालन और शोभन की मृत्यु शोभन ने श्रद्धा से एकादशी का व्रत रखा. जैसे-जैसे दिन बीता, वह और अधिक कमजोर होता गया. जब रात आई और जागरण का समय हुआ, तब उसकी स्थिति और भी खराब हो गई. अंततः भोर होने से पहले ही शोभन की मृत्यु हो गई. उसके शरीर का अंतिम संस्कार विधिपूर्वक कर दिया गया. चन्द्रभागा ने पति के साथ सती न होकर अपने पिता के घर लौटने का निर्णय लिया. व्रत का चमत्कारी फल रमा एकादशी के व्रत के प्रभाव से शोभन को मंदराचल पर्वत पर एक दिव्य और सुंदर नगर प्राप्त हुआ. वह नगर सोने-चाँदी से बना हुआ था, जहाँ सब प्रकार के सुख-सुविधाएँ थीं और कोई शत्रु नहीं था. शोभन वहाँ राजा बनकर निवास करने लगा, परंतु उसका राज्य अध्रुव यानी अस्थायी था. ब्राह्मण सोम शर्मा की यात्रा कुछ समय बाद, मुचुकुन्द के राज्य का एक ब्राह्मण, सोम शर्मा, तीर्थयात्रा के लिए निकला. घूमते-घूमते वह मंदराचल पर्वत पहुँचा, जहाँ उसने वह अद्भुत नगर देखा. नगर के वैभव को देखकर वह आश्चर्यचकित हो गया. जब उसने वहाँ के राजा को देखा तो पहचान लिया कि यह तो उसके राजा का दामाद शोभन है. ब्राह्मण और शोभन की भेंट ब्राह्मण ने शोभन से जाकर कहा, “राजन! मैं आपके ससुर मुचुकुन्द के राज्य से आया हूँ. वहाँ सब कुशल हैं, आपकी पत्नी चन्द्रभागा भी प्रसन्न हैं.” शोभन ने प्रसन्न होकर कहा, “हे ब्राह्मण! बताओ, मेरे ससुर और पत्नी कुशल हैं, यह सुनकर मुझे बहुत अच्छा लगा. तुम बताओ, तुम्हें यह नगर कैसा लगा?” ब्राह्मण बोला, “राजन, यह नगर अत्यंत सुंदर और अलौकिक है. मुझे आश्चर्य है कि आपको इतना वैभव कैसे प्राप्त हुआ?” व्रत का प्रभाव बताना शोभन ने कहा, “हे ब्राह्मण! यह सब रमा एकादशी व्रत के प्रभाव से मिला है. मैंने श्रद्धा से व्रत किया था, जिससे मुझे यह अद्भुत राज्य प्राप्त हुआ, पर यह राज्य स्थायी नहीं है. यदि मेरी पत्नी चन्द्रभागा इस व्रत के पुण्य से इसे स्थायी बना दे, तो यह सदैव बना रहेगा.” ब्राह्मण ने कहा, “हे राजन्! मैं यह बात चन्द्रभागा तक अवश्य पहुँचाऊँगा.” चन्द्रभागा की दृढ़ निष्ठा जब ब्राह्मण लौटकर चन्द्रभागा के पास पहुँचा, तो उसने सारा वृतांत सुनाया. चन्द्रभागा ने कहा, “हे ब्राह्मण! मुझे उस नगर में ले चलो. मैं अपने पति को देखना चाहती हूँ और अपने व्रत के प्रभाव से उस नगर को स्थायी बना दूँगी.” ऋषि वामदेव का आशीर्वाद ब्राह्मण चन्द्रभागा को लेकर मंदराचल पर्वत के समीप वामदेव ऋषि के आश्रम पहुँचा. वहाँ ऋषि ने उसकी कथा सुनी और मंत्रों से उसका अभिषेक किया. उन मंत्रों और उसके वर्षों के व्रत के प्रभाव से चन्द्रभागा ने दिव्य देह धारण कर ली. वह अत्यंत सुंदर और तेजस्वी बन गई. पति-पत्नी का पुनर्मिलन जब शोभन ने अपनी पत्नी को उस दिव्य रूप में देखा, तो वह अत्यंत प्रसन्न हुआ और उसे अपने पास बैठाया. चन्द्रभागा ने कहा, “हे प्राणनाथ! जब मैं आठ वर्ष की थी, तभी से नियमित रूप से एकादशी का व्रत करती आ रही हूँ. उन व्रतों के प्रभाव से आपका यह नगर अब स्थायी हो जाएगा और कभी नष्ट नहीं होगा.” इसके बाद दोनों पति-पत्नी दिव्य स्वरूप में उस नगर में रहने लगे और आनंदपूर्वक जीवन व्यतीत करने लगे. रमा एकादशी का फल और महिमा भगवान श्रीकृष्ण ने कहा, “हे राजन्! यही रमा एकादशी की

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बेअसर होता एंटीबायोटिक

Antibiotic : विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अपनी ‘ग्लोबल एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस सर्विलांस रिपोर्ट’, 2025 में चौंकाने वाला खुलासा किया है कि 2023 में वैश्विक स्तर पर हर छठे बैक्टीरियल संक्रमण पर आम एंटीबायोटिक दवाओं का असर नहीं हुआ. रिपोर्ट के मुताबिक, 2018 से 2023 के बीच एंटीबायोटिक प्रतिरोध में 40 फीसदी से अधिक वृद्धि दर्ज की गयी है. एंटीबायोटिक प्रतिरोध तब होता है, जब बैक्टीरिया को मारने के लिए बनायी गयी दवाओं के प्रति ये रोगाणु बचाव क्षमता विकसित कर लेते हैं. बढ़ता एंटीबायोटिक प्रतिरोध आधुनिक चिकित्सा के लिए बड़ा खतरा बन रहा है. यह सार्वजनिक स्वास्थ्य खतरा है, क्योंकि इससे संक्रमण की स्थिति में रोगी पर एंटीबायोटिक दवाएं काम करना बंद कर सकती हैं, मरीज के अस्पताल में रहने की अवधि बढ़ सकती है और इलाज का खर्च बढ़ने के साथ सार्वजनिक स्वास्थ्य के ढांचे पर भी बोझ बढ़ सकता है. रिपोर्ट यह भी कहती है कि एंटीबायोटिक के बेअसर होने का औसत दुनियाभर में एक समान नहीं है. जैसे, दक्षिण पूर्व एशिया, जिसमें हिंदुस्तान भी है और पूर्वी भूमध्यसागरीय इलाकों में स्थिति सबसे गंभीर है, जहां हर तीन में से एक संक्रमण पर एंटीबायोटिक का असर नहीं हो रहा. जबकि अफ्रीका महाद्वीप में हर पांच में से एक संक्रमण पर एंटीबायोटिक बेअसर पाया गया. कई जीवनरक्षक दवाएं भी अपना असर खो रही हैं. ये महंगी हैं और गरीब देशों में इनकी उपलब्धता भी कम है. एंटीबायोटिक का बेअसर होना न केवल एक बड़ी समस्या है, बल्कि इससे वे देश सबसे अधिक प्रभावित हैं, जहां इस पर सबसे कम ध्यान दिया जाता है. अच्छी बात यह है कि एंटीबायोटिक निगरानी प्रणाली में देशों की भागीदारी चार गुना बढ़ी है. वर्ष 2016 में जहां सिर्फ 25 देश इस निगरानी प्रणाली में शामिल थे, वहीं 2023 में इनकी संख्या बढ़कर 104 हो गयी. पर दुनिया के लगभग आधे देश अब भी विश्वसनीय निगरानी व्यवस्था से वंचित हैं. ये देश नियमित रिपोर्ट नहीं भेजते और कई देशों में जांच की सुविधाएं भी कमजोर हैं. डब्ल्यूएचओ का लक्ष्य है कि 2030 तक हर देश एंटीबायोटिक प्रतिरोध से संबंधित उच्च गुणवत्ता वाले डाटा साझा करें, ताकि मिल कर इस खतरे से लड़ा जा सके. उसने चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर अब भी हमने इस खतरे को गंभीरता से नहीं लिया, तो आने वाले दिनों में साधारण बुखार, खांसी और संक्रमण भी जानलेवा साबित हो सकता है. The post बेअसर होता एंटीबायोटिक appeared first on Naya Vichar.

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Video : वकील का महिला को ‘किस’ करते वीडियो हुआ वायरल, ऑन कैमरे में कैद हो गया पूरा नजारा

Video : Video : एक वीडियो सामने आया है, जो कथित रूप से दिल्ली हाईकोर्ट की वर्चुअल सुनवाई का बताया जा रहा है. यह सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है. सामान्य कोर्टरूम चर्चा या न्यायिक टिप्पणियों के बजाय, इस क्लिप में एक वकील ऑनलाइन सेशन शुरू होने से ठीक पहले अनुचित व्यक्तिगत व्यवहार करते हुए दिखाई दे रहा है. यह घटना कथित तौर पर मंगलवार को घटी. लोग जज के आने का इंतजार कर रहे थे. देखें वीडियो. Welcome to Digital India Justice 😂 Court is online… but judge forgot it’s LIVE! ☠️ When tech meets tradition — and the camera off button loses the case! 🤣 pic.twitter.com/1GbfOFQ6w7 — ShoneeKapoor (@ShoneeKapoor) October 15, 2025 वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि वकील अपने कमरे में कोर्ट के यूनिफॉर्म में बैठे हैं. कैमरा कुछ दूरी पर है. केवल उनका चेहरा ही नजर आ रहा है. एक स्त्री साड़ी में उनके सामने खड़ी दिखाई दे रही है. वकील फिर उसका हाथ खींचते हैं और उसे अपनी ओर लाते हैं. स्त्री हिचकिचाती नजर आती है और विरोध करती प्रतीत होती है, लेकिन वकील साहब रुकते नहीं. स्त्री को किस कर लेते हैं. इसके बाद स्त्री पीछे हट जाती है. सोशल मीडिया यूजर दे रहे हैं रिएक्शन सोशल मीडिया पर वायरल इस वीडियो पर यूजर लगातार रिएक्शन दे रहे हैं. यूजर इसे दिल्ली हाई कोर्ट का बता रहे हैं और वकील की आलोचना कर रहे हैं. आपको बता दें कि जून में भी गुजरात हाई कोर्ट में वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग के दौरान एक व्यक्ति के शौचालय में बैठे हुए वीडियो ने सोशल मीडिया पर खलबली मचा दी थी. गुजरात हाई कोर्ट ने उस व्यक्ति को 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया और 15 दिन की सामुदायिक सेवा करने का आदेश दिया. कोर्ट ने यह कार्रवाई उसकी अनुशासनहीनता और शिष्टाचार का उल्लंघन करने के कारण की, ताकि न्यायपालिका में मर्यादा बनाए रखी जा सके. The post Video : वकील का स्त्री को ‘किस’ करते वीडियो हुआ वायरल, ऑन कैमरे में कैद हो गया पूरा नजारा appeared first on Naya Vichar.

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Bhai Dooj 2025: क्या है भाई दूज का धार्मिक महत्व, जानिए इस पर्व की पौराणिक कहानी

Bhai Dooj 2025: भाई दूज का पर्व दीपावली के दो दिन बाद मनाया जाता है. यह त्योहार भाई-बहन के स्नेह और विश्वास का प्रतीक माना जाता है. इस दिन बहनें अपने भाइयों के माथे पर तिलक लगाकर उनके अच्छे स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना करती हैं. आइए जानते हैं इस पर्व का महत्व और इससे जुड़ी धार्मिक कथाएं. यम यमुना की कहानी भाई दूज से जुड़ी पहली पौराणिक कथा के अनुसार, इसी दिन यमराज अपनी बहन यमुना के घर मिलने गए थे. कहा जाता है कि यम और यमुना सूर्यदेव के पुत्र-पुत्री थे. यमुना कई बार अपने भाई को आमंत्रित करती रहीं, परंतु व्यस्तता के कारण यमराज नहीं जा सके. अंततः एक दिन वे बहन के घर पहुंचे. यमुना ने उन्हें स्नेहपूर्वक भोजन कराया, तिलक लगाया और उनके सुख-समृद्धि की प्रार्थना की. तब यमराज ने प्रसन्न होकर वर मांगने को कहा. यमुना ने इच्छा जताई कि हर वर्ष इसी दिन वे उससे मिलने आएं, और जो भी बहन अपने भाई का इस दिन तिलक करे, उसे मृत्यु या यम का भय न रहे. यमराज ने उसकी यह बात स्वीकार कर आशीर्वाद दिया. तभी से इस पर्व को “भाई दूज” या “यम द्वितीया” के रूप में मनाया जाने लगा. इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण ने बहन सुभद्रा से की थी मुलाकात दूसरी कथा के अनुसार, भाई दूज के दिन भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर नामक दैत्य का संहार कर द्वारका लौटने पर अपनी बहन सुभद्रा से भेंट की. सुभद्रा ने उनके स्वागत में दीप जलाए, मिठाइयाँ और फूल अर्पित किए, और उनके माथे पर तिलक लगाकर उनके दीर्घायु होने की कामना की. तभी से यह दिन भाई और बहन के स्नेह और सुरक्षा के प्रतीक पर्व के रूप में मनाया जाने लगा. भाई दूज का महत्व क्या है? यह पर्व भाई-बहन के स्नेह, विश्वास और सुरक्षा के भाव का प्रतीक है. इस दिन बहन अपने भाई के माथे पर तिलक लगाकर उसकी लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य की कामना करती है. भाई दूज कब मनाई जाती है? भाई दूज का पर्व दीपावली के दो दिन बाद कार्तिक शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है. भगवान श्रीकृष्ण और सुभद्रा की कथा क्या है? नरकासुर का वध करने के बाद भगवान श्रीकृष्ण अपनी बहन सुभद्रा के घर गए। सुभद्रा ने उनका स्वागत दीप, मिठाइयों और फूलों से किया तथा तिलक लगाकर उनकी दीर्घायु की कामना की। तभी से भाई दूज का यह पर्व मनाया जाता है. भाई दूज पर क्या करना शुभ माना जाता है? इस दिन बहनें भाइयों का तिलक कर आरती उतारती हैं, मिठाई खिलाती हैं और उपहार देती हैं. भाई भी बदले में उपहार देकर अपनी बहन के प्रति प्रेम और कृतज्ञता व्यक्त करते हैं. ये भी पढ़ें: Bhai Dooj 2025: 22 या 23 अक्तूबर, कब है भाई दूज, जानें सही तारीख और शुभ मुहूर्त Disclaimer: यहां दी गई जानकारी केवल मान्यताओं और परंपरागत जानकारियों पर आधारित है. नया विचार किसी भी तरह की मान्यता या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. The post Bhai Dooj 2025: क्या है भाई दूज का धार्मिक महत्व, जानिए इस पर्व की पौराणिक कहानी appeared first on Naya Vichar.

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Rama Ekadashi 2025: रमा एकादशी पर हो रहा है ग्रहों के राजा सूर्य देव करेंगे राशि परिवर्तन, जानें नियम

Rama Ekadashi 2025: कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की रमा एकादशी को बहुत शुभ माना गया है. इस दिन भगवान विष्णु की पूजा और व्रत रखने से मनुष्य के सभी पाप दूर होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है. रमा एकादशी से धनतेरस की खरीदारी की शुरुआत भी मानी जाती है. इस साल रमा एकादशी और धनतेरस का संयोग एक साथ पड़ने के कारण यह तिथि और भी खास बन गई है. रमा एकादशी की तिथि और मुहूर्त हिंदू पंचांग के अनुसार रमा एकादशी की तिथि 16 अक्टूबर 2025 को सुबह 10 बजकर 35 मिनट से शुरू होकर 17 अक्टूबर 2025 को सुबह 11 बजकर 12 मिनट तक रहेगी. उदयातिथि के आधार पर व्रत 17 अक्टूबर, शुक्रवार को रखा जाएगा. व्रत का पारण यानी समापन 18 अक्टूबर की सुबह किया जाएगा. पारण का शुभ समय सुबह 6 बजकर 24 मिनट से 8 बजकर 41 मिनट तक रहेगा. इस अवधि में व्रत खोलना अत्यंत शुभ माना गया है. सूर्य देव का राशि परिवर्तन रमा एकादशी के दिन ही ग्रहों के राजा सूर्य देव राशि परिवर्तन करेंगे. इस दिन सूर्य देव तुला राशि से निकलकर वृश्चिक राशि में प्रवेश करेंगे, जिसके स्वामी मंगल हैं. ज्योतिष के अनुसार यह गोचर 17 अक्टूबर को दोपहर 1 बजकर 53 मिनट पर होगा. सूर्य के इस परिवर्तन से कई राशियों पर शुभ प्रभाव पड़ेगा. एक ही दिन सूर्य गोचर और रमा एकादशी का संयोग अत्यंत मंगलकारी माना गया है. ये भी पढ़ें: आज रमा एकादशी पर करें इस व्रत कथा का पाठ, घर में हो सकती है सुख, शांति, समृद्धि और सौभाग्य की वृद्धि व्रत के नियम और पारण विधि दृक पंचांग के अनुसार, एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि समाप्त होने से पहले किया जाना आवश्यक है. यदि द्वादशी तिथि सूर्योदय से पहले समाप्त हो जाए, तो पारण सूर्योदय के बाद किया जाता है. यह ध्यान रखना चाहिए कि द्वादशी के भीतर ही व्रत खोलना चाहिए, अन्यथा इसे धार्मिक दृष्टि से अनुचित माना जाता है. इस दिन व्रत, पूजा और दान का विशेष महत्व होता है. रमा एकादशी का व्रत कब है? इस साल रमा एकादशी का व्रत 17 अक्टूबर 2025, शुक्रवार को रखा जाएगा और पारण 18 अक्टूबर की सुबह शुभ मुहूर्त में किया जाएगा. रमा एकादशी का मतलब क्या होता है? रमा एकादशी का अर्थ है भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी को समर्पित कृष्ण पक्ष की एकादशी, जो पापों का नाश और समृद्धि लाती है. रमा एकादशी के दिन क्या खाना चाहिए? एकादशी के दिन केवल फल, साबुत अनाज, उपवास योग्य भोजन और हल्का पानी या दूध ग्रहण करना चाहिए. क्या एकादशी व्रत में दही खाना चाहिए? एकादशी व्रत में दही और अन्य दुधारू चीजें वर्जित मानी जाती हैं. क्या हम एकादशी व्रत में केला खा सकते हैं? नहीं, एकादशी व्रत में केला, आलू और अन्य नाशपाती व मृदु अनाज से बनी चीजें नहीं खानी चाहिए. The post Rama Ekadashi 2025: रमा एकादशी पर हो रहा है ग्रहों के राजा सूर्य देव करेंगे राशि परिवर्तन, जानें नियम appeared first on Naya Vichar.

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दिवाली पर जा रहे हैं मिठाई खरीदने? पहले जान लीजिए असली और नकली मिठाई की पहचान करने के ये आसान तरीके

How To Identify Real And Fake Sweets: दिवाली आते ही मिठाइयों की मांग बाजार में बहुत ज्यादा बढ़ जाती है. ऐसे में ये बिल्कुल जरूरी नहीं है कि आप जहां से मिठाई ले रहे हैं वो आपको असली मिठाई दे रहे हैं. अब परेशानी की बात यह कि लोग भरोसे के साथ जाते हैं कि उन्हें इस दिवाली में बढ़िया मिठाई खाने को मिलेगा, पर दुकानों में भीड़ होने के कारण कई बार लोग मिलावटी मिठाई भी अपने ग्राहकों को बेचना शुरू कर देते है. अब ऐसे में जरूरी बात यह है कि आप इस बात की पहचान कैसे करेंगे की जो मिठाई आप बाजार से लेकर आए हैं वो असली है या नकली? तो चलिए आपको इस आर्टिकल में बताते हैं कि कौन सी मिठाई असली है और कौन सी नकली इसकी पहचान कैसे करें.  असली मिठाई और नकली मिठई की पहचान कैसे करें? असली मिठाई में खुशबू और स्वाद प्राकृतिक होते हैं, जबकि नकली मिठाई में आर्टिफिशियल फ्लेवर या एसेंस की तेज गंध आती है. मिठाई को सूंघकर और थोड़ा चखकर आप अंतर पहचान सकते हैं. दूध की मिठाई असली है या नकली ये कैसे पहचाने? अगर मिठाई दूध या खोया से बनी है तो उसका टेक्सचर मुलायम और स्वाद में हल्की मिठास होगी. नकली मिठाई में पाउडर मिल्क या सिंथेटिक घी का इस्तेमाल होता है जिससे मिठाई दानेदार या रबड़ जैसी लगती है. मिठाई पर किया गया चांदी का वर्क असली है या नकली कैसे पहचानें? असली चांदी का वर्क उंगलियों से रगड़ने पर टूटता नहीं है और उसमें किसी तरह की गंध नहीं होती. नकली वर्क एल्यूमिनियम फॉयल से बना होता है, जो आसानी से फट जाता है और उसमें धातु जैसी गंध आती है. जिस घी से मिठाई बनी है वो कितना असली कितना नकली कैसे पहचानें? असली घी में हल्की सी खुशबू और स्वाद में मिठास होती है. नकली घी में तेज या केमिकल जैसी गंध आती है और खाने के बाद गले में जलन महसूस हो सकती है. घर पर मिठाई की पहचान कैसे करें? मिठाई को पानी में डालें, अगर रंग निकलने लगे तो उसमें केमिकल मिला है.मिठाई को हाथ से दबाने पर अगर चिपचिपाहट या तेल जैसा निकलता है तो वह नकली हो सकती है. नकली मिठाई खाने से क्या परेशानी हो सकती है? नकली मिठाई में मिलावट वाले रंग, फ्लेवर और घी का इस्तेमाल होता है जिससे पेट दर्द, एलर्जी, उल्टी, और फूड पॉइजनिंग जैसी समस्याएं हो सकती हैं. बाजार से मिठाई खरीदते हुए किन बातों का ध्यान रखना चाहिए? हमेशा भरोसेमंद दुकान से मिठाई लें.मिठाई की तारीख और पैकिंग चेक करें.मिठाई की सतह, रंग और खुशबू देखकर ही खरीदें.बहुत चमकीली मिठाई या तेज रंग वाली मिठाई से बचें. यह भी पढ़ें: Homemade Ladoo For Diwali: दिवाली पर हर किसी को लुभाएंगे घर के बने लड्डू, जानिए आसान तरीका यह भी पढ़ें: Sugar Free Diwali Sweets: बिना चीनी की दिवाली, त्यौहार में घर पर बनाएं 4 हेल्दी और टेस्टी स्वीट्स The post दिवाली पर जा रहे हैं मिठाई खरीदने? पहले जान लीजिए असली और नकली मिठाई की पहचान करने के ये आसान तरीके appeared first on Naya Vichar.

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बढ़ता ही जा रहा है मौसमी असंतुलन

climate change : यह अक्तूबर का मध्य है, पर अभी भी ऐसा लगता है कि बारिश पीछा छोड़ने को तैयार नहीं है. मौसम विभाग की मानें, तो अक्तूबर में भी बारिश होगी. आम तौर पर मॉनसून के नाम पर सब कुछ सितंबर मध्य तक समाप्त हो जाता था, परंतु इस बार पूरा वर्षा चक्र कुछ अलग ही चला. अब तक भी देश के कई हिस्सों में बादल गरज रहे हैं और बारिश हो रही है. बारिश के कारण पहाड़ों की तो हालत बुरी हो गयी. उदाहरण के लिए, कोसी नदी ने ऐसे समय विकराल रूप धारण किया जब सामान्यतः वर्षा समाप्ति की ओर होती है. नेपाल के पहाड़ों में हुई अतिवृष्टि के कारण कोसी ने एक बार फिर पूरे बिहार में गंभीर प्रभाव दिखाया. देश-दुनिया के अन्य हिस्सों में भी अक्तूबर की बारिश ने एक नये पैटर्न को जन्म दे दिया है. असल में इस बार जो कुछ हुआ, उसका एक बड़ा कारण पश्चिमी विक्षोभ है, जो सामान्यतः पहले आता था, लेकिन इस बार ग्लोबल वार्मिंग के कारण इसके स्वरूप और समय दोनों बदल गये. कैस्पियन सागर इसका मुख्य केंद्र बन गया है. यहां वाष्पीकरण की दर पिछले दशक में सर्वाधिक रही, जिससे समुद्र के जलस्तर में भी कमी आयी है. वैज्ञानिकों का मानना है कि इसके पीछे प्रमुख कारण धरती का तपना है. वर्ष 1850 के बाद से पृथ्वी का तापमान औसतन 0.11 डिग्री फाॅरेनहाइट प्रति दशक की दर से बढ़ रहा है. यह समझना आवश्यक है कि दुनिया में मॉनसून का व्यवहार मुख्यतः समुद्रों से तय होता है. जब धरती तपती है, तो समुद्र में वाष्प बनता है और वायु दबाव के अंतर के कारण ये हवाएं चलकर वर्षा करती हैं. इस बार वाष्पोत्सर्जित हवाओं का दबाव इतना अधिक था कि उन्होंने तिब्बत तक को पार कर लिया- जो वैज्ञानिकों के लिए भी हैरानी का विषय रहा. इसे सरल भाषा में समझें, तो पृथ्वी का दो-तिहाई हिस्सा समुद्र है, इसलिए धरती की बढ़ती गर्मी का पहला और बड़ा असर समुद्र पर ही पड़ता है. जब समुद्र का तापमान बढ़ता है, तो उससे अधिक वाष्प उत्पन्न होता है, जो ठंडे क्षेत्रों की ओर बढ़ता है और वहां भारी बारिश करता है. इस बार ये हवाएं हिमालय से अधिक टकरायीं. यही कारण है कि इस बार नेपाल, हिंदुस्तान, अफगानिस्तान और पाकिस्तान, इन सभी देशों में सामान्य से अधिक वर्षा देखी गयी. यह कहना गलत नहीं होगा कि केवल हिमालय ही नहीं, बल्कि दुनिया के कई हिस्सों ने इस बार मौसम की चरम स्थितियों का सामना किया. हाल ही में जिस चक्रवात ने फिलीपींस, मलेशिया और चीन जैसे देशों को प्रभावित किया, वह भी समुद्र की सतह के अधिक गर्म होने का ही परिणाम था. इस बार की अत्यधिक बारिश और उससे हुए भारी नुकसान स्पष्ट संकेत देते हैं कि प्रकृति अब हमारे नियंत्रण से बाहर निकल रही है. अब प्रश्न यह उठता है कि क्या यह केवल इस वर्ष की कहानी है या आने वाले समय में भी ऐसा ही रहेगा? इसका उत्तर साफ है, ऐसे हालात अब लगातार देखने को मिलेंगे. कारण भी स्पष्ट है, दुनिया का कोई देश ऐसा नहीं जो अपने विकास या जीवनशैली को बनाये रखने के लिए ऊर्जा का अत्यधिक उपयोग न कर रहा हो. सड़कों का निर्माण, वाहनों की बढ़ती संख्या, उद्योगों का विस्तार और हमारी बढ़ती उपभोक्तावादी आवश्यकताएं- सब मिलकर वातावरण को लगातार गर्म कर रही हैं. पिछले कुछ वर्षों में धरती का तापमान लगातार बढ़ा है. इसके बावजूद दुनियाभर में पर्यावरण पर आयोजित बैठकों और चेतावनियों के बाद भी कोई ठोस कदम नहीं उठाये गये. न तो देशों ने अपनी विकास नीतियों में बदलाव किया और न ही समाज ने अपनी जीवनशैली में संयम दिखाया. जब तक व्यावहारिक परिवर्तन नहीं होंगे, तब तक ऐसे मौसमी असंतुलन बढ़ते रहेंगे. सर्वविदित है कि समुद्र के तपने से ही वर्षा का स्वरूप तय होता है, और जब समुद्र लगातार गर्म हो रहे हैं तो वर्षा के किसी भी महीने में जमकर बारिश होना अब असामान्य नहीं रहेगा. दुर्भाग्य से, हमने अभी तक कोई ऐसी सामूहिक व्यवस्था नहीं बनायी है जिसमें प्रशासनें, समाज और व्यक्ति एक साथ मिलकर पर्यावरणीय संतुलन के लिए ठोस कदम उठायें. इसका पहला और बड़ा असर फसल चक्रों पर पड़ता है, साथ ही बाढ़ के कारण वे नष्ट भी हो जाते हैं. पंजाब इसका बड़ा उदाहरण है जहां बारिश चार लाख हेक्टेयर में खड़ी फसल लील गयी. इस स्थिति से निपटने का एकमात्र उपाय यही है कि हम स्थानीय स्तर से पर्यावरण के प्रति सजग होकर शुरुआत करें- अपने गांव, शहर, या क्षेत्र से. इसी उद्देश्य से ‘अलायंस फॉर ग्लोबल एनवायरनमेंट (एजीइ)’ नामक एक अंतरराष्ट्रीय संगठन की स्थापना की गयी है, जिसका उद्देश्य है स्थानीय स्तर पर ऐसे प्रयोगों को प्रोत्साहित करना, जिससे वैश्विक बदलाव की दिशा तय की जा सके. यदि हम अपनी आवश्यकताओं की सीमा तय कर लें और अपने स्तर पर जिम्मेदारी निभायें, तो यही छोटे-छोटे प्रयास आगे चलकर दुनिया के लिए उदाहरण बन सकते हैं. वरना मिट्टी, हवा और पानी की जो स्थिति आज दिख रही है, यदि यह ऐसी ही बनी रही, तो या तो हम सूखे से समाप्त हो जायेंगे, या फिर बाढ़ हमें बहा ले जायेगी. इसके बाद भी जो बचेंगे, उन्हें धरती का तापमान झुलसा देगा.(ये लेखक के निजी विचार हैं.) The post बढ़ता ही जा रहा है मौसमी असंतुलन appeared first on Naya Vichar.

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