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November 10, 2025

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Utpanna Ekadashi 2025: कब है उत्पन्ना एकादशी? जानिए तिथि, पूजा विधि और महत्व

Utpanna Ekadashi 2025: मान्यताओं के अनुसार उत्पन्ना एकादशी का व्रत मन को शुद्ध करने और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा लाने वाला होता है. यह दिन नई शुरुआत, आत्मिक शांति और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने का उत्तम अवसर है. जो व्यक्ति इस व्रत को सच्चे मन से करता है, उसके जीवन से दुखों का अंत होता है और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है. उत्पन्ना एकादशी की तिथि और शुभ मुहूर्त इस साल उत्पन्ना एकादशी 15 नवंबर 2025, शनिवार को मनाई जाएगी. एकादशी तिथि शुरू: 15 नवंबर, रात 12:49 बजे समाप्ति: 16 नवंबर, रात 2:37 बजे द्वादशी तिथि के दिन यानी अगले दिन सुबह व्रत पारण (समापन) किया जाएगा. उत्पन्ना एकादशी का महत्व “उत्पन्ना” शब्द का अर्थ है उत्पत्ति या जन्म. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन एकादशी देवी का जन्म हुआ था, जिन्होंने असुरों से धर्म की रक्षा की थी. इसी कारण इसे “सभी एकादशियों की जननी” भी कहा जाता है. कहा जाता है कि जो व्यक्ति श्रद्धा से इस व्रत को करता है, उसके पाप नष्ट होते हैं और जीवन में नई ऊर्जा और सफलता आती है. व्रत और पूजा विधि सुबह स्नान कर के भगवान विष्णु और माता एकादशी की पूजा करें. पीले वस्त्र पहनें और भगवान विष्णु को तुलसी, पीले फूल और फल अर्पित करें. पूरे दिन व्रत रखें- अनाज और दालों का सेवन न करें. फलाहार कर सकते हैं. दिनभर विष्णु मंत्रों का जाप करें “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय.” शाम को दीपक जलाकर आरती करें और भगवान से क्षमा प्रार्थना करें. अगले दिन द्वादशी को भोजन या जल ग्रहण कर व्रत खोलें. जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र या अन्नदान करें, इससे पुण्य बढ़ता है. उत्पन्ना एकादशी से जुड़ी धार्मिक कथा पौराणिक कथा के अनुसार, जब असुर मुर दानव ने तीनों लोकों में आतंक मचा दिया था, तब भगवान विष्णु की योगनिद्रा से एक तेजस्विनी शक्ति उत्पन्न हुई — यही शक्ति “एकादशी देवी” कहलायीं. देवी ने असुर का वध किया और धर्म की स्थापना की. इसलिए इस दिन व्रत रखने से नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है और जीवन में धर्म, धन और शांति का वास होता है. इस दिन किए जाने वाले शुभ कार्य तुलसी के पौधे की पूजा करें और दीपक जलाएं. गरीबों को अन्न, वस्त्र या कंबल का दान करें. घर में विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें. किसी जरूरतमंद की मदद करें. यह सबसे बड़ा पुण्य है. क्या इस दिन अनाज खाना मना है? हां, एकादशी के दिन अनाज और दालों का सेवन वर्जित है. फलाहार या जलाहार किया जा सकता है. क्या इस व्रत में पूजा के लिए कोई खास रंग का वस्त्र पहनना चाहिए? पीले या सफेद रंग के वस्त्र शुभ माने गए हैं क्योंकि ये शांति और पवित्रता के प्रतीक हैं. इस व्रत से क्या लाभ मिलता है? इस व्रत से व्यक्ति के जीवन में नई ऊर्जा, मानसिक शांति, और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है. ये भी पढ़ें: Jyotish Shastra: किस ग्रह के कारण होता है निमोनिया रोग, जानिए ज्योतिष के अनुसार कौन सा रत्न करें धारण The post Utpanna Ekadashi 2025: कब है उत्पन्ना एकादशी? जानिए तिथि, पूजा विधि और महत्व appeared first on Naya Vichar.

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Dr. Sachchidanand Sinha: बिहारी गौरव डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा,जिन्होंने बिहार को ‘नक्शे पर जगह’ दिलाई

Dr. Sachchidanand Sinha: एक ऐसे दौर में जब बिहार बंगाल प्रांत का एक हिस्सा भर था और उसकी अपनी कोई प्रशासनिक पहचान नहीं थी, सच्चिदानंद सिन्हा ने अपनी कलम, विचार और नेतृत्वक समझ से उसे स्वतंत्र स्वर दिया. उन्होंने न सिर्फ बिहार को बंगाल से अलग करवाया, बल्कि उसके सांस्कृतिक पुनर्जागरण, शैक्षिक संस्थानों और न्यायिक ढांचे की भी आधारशिला रखी. अगर आज बिहार हिंदुस्तान के नेतृत्वक नक्शे पर एक अलग राज्य के रूप में मौजूद है, तो इसके पीछे डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा का अथक संघर्ष है, वे उस वैचारिक परंपरा के जनक थे जिसने आधुनिक बिहार की नींव रखी, शिक्षा, कानून, पत्रकारिता और सामाजिक सुधार के जरिए. आरा से उठी आवाज जिसने बदला इतिहास 10 नवंबर 1871 को आरा में जन्मे सच्चिदानंद सिन्हा बचपन से ही असाधारण थे. पिता एक छोटे जमींदार थे, पर उनके संस्कारों में आत्मसम्मान और अध्ययन की गहराई थी. उन्होंने स्थानीय स्कूल से शिक्षा शुरू की और जल्द ही अंग्रेज़ी और संस्कृत दोनों में दक्ष हो गए. इसी दौरान उनकी मित्रता दो ऐसे युवकों से हुई, अली इमाम और हसन इमाम, जो आगे चलकर बिहार की नेतृत्व में उनके सहयात्री बने. एक दिन अली इमाम इंग्लैंड बैरिस्टरी पढ़ने चले गए. तब सिन्हा साहब के मन में भी वही आग जगी. लेकिन उस दौर में कोई हिंदू युवक विदेश जाए, तो समाज उसे अछूत मान लेता था. लोगों ने उन्हें डराया “वापस लौटोगे तो कोई छूएगा भी नहीं.”सच्चिदानंद ने कहा “अगर शिक्षा को पाने की कीमत बहिष्कार है, तो मैं खुशी से दूंगा.” 1889 में उन्होंने सब कुछ बेच दिया, रिश्तेदारों से 200 रुपये उधार लिए और समुद्र पार लंदन पहुंच गए. Dr. Sachchidanand sinha लंदन की गलियों में जन्मी ‘बिहार’ की चेतना लंदन में उन्होंने न केवल बैरिस्टरी की पढ़ाई की, बल्कि हिंदुस्तानीय स्वतंत्रता आंदोलन के बौद्धिक केंद्र से भी जुड़े. वहां वे ब्रिटिश कमेटी ऑफ इंडियन नेशनल कांग्रेस के सदस्य बने और दादाभाई नौरोजी के चुनाव प्रचार में जुट गए. वहीं उन्होंने पहली बार महसूस किया कि हिंदुस्तान की तरह ही बिहार की पहचान भी खो चुकी है. एक दिन किसी ने उनसे पूछा — “Where are you from?”उन्होंने उत्तर दिया — “From Bihar.”सामने वाले ने हंसकर कहा — “Which Bihar?”वह एक सवाल उनके भीतर आग बनकर जलता रहा. हिंदुस्तान लौटने तक उन्होंने ठान लिया बिहार को अपनी पहचान दिलाए बिना चैन नहीं लेंगे. ‘बिहार टाइम्स’: कलम से उठी क्रांति 1894 में पटना लौटकर उन्होंने पत्रकार महेश नारायण और मजहरुल हक के साथ मिलकर ‘बिहार टाइम्स’ नामक अखबार निकाला. यह सिर्फ अखबार नहीं, आंदोलन की आवाज़ बन गया. उन्होंने लिखा —“बंगाल ने बिहार को अपना चारागाह बना लिया है. यहां शिक्षा, प्रशासन और न्यायालयों में बंगाली वर्चस्व है.अब समय आ गया है कि बिहार अपने पैरों पर खड़ा हो.”उनकी लेखनी ने युवाओं में चेतना भर दी. पहली बार लोग “मैं बंगाल का नहीं, बिहारी हूं” कहने लगे. 1905 में जब बंगाल का विभाजन हुआ, तो सच्चिदानंद सिन्हा ने इसका विरोध करते हुए ‘पार्टीशन ऑफ बंगाल एंड सेपरेशन ऑफ बिहार’ नामक पुस्तिका प्रकाशित की.उन्होंने लिखा “अगर बंगाल का विभाजन जरूरी है, तो बिहार को उसकी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक एकता के साथ अलग प्रांत बनाया जाए.” इस विचार ने शिक्षित वर्ग को झकझोर दिया. 1908 में उन्होंने मजहरुल हक, दीप नारायण सिंह और हसन इमाम के साथ बिहार प्रांतीय कांग्रेस समिति बनाई. यह आंदोलन अब पूरे प्रदेश की आवाज बन गया. सच्चिदानंद सिन्हा, मज़हरूल हल और सय्यद अली इमाम दिल्ली दरबार से मिला ऐतिहासिक ऐलान 1910 में वे केंद्रीय विधायिका के सदस्य बने और वहीं से उन्होंने बिहार के हक में तर्क रखना शुरू किया. उनके मित्र अली इमाम ने लॉर्ड हार्डिंग तक यह बात पहुंचाई. अंततः 12 दिसंबर 1911 को दिल्ली दरबार में लॉर्ड हार्डिंग ने बिहार-उड़ीसा प्रांत के गठन की घोषणा की. 1 अप्रैल 1912 को यह सपना साकार हुआ, बिहार पहली बार हिंदुस्तान के नक्शे पर एक स्वतंत्र इकाई बन गया. सिन्हा साहब ने कहा था — “अगर बिहार को सशक्त बनाना है, तो उसे दो चीजे चाहिए , शिक्षा और न्याय” 1916 में उनके प्रयास से पटना हाईकोर्ट और 1917 में पटना विश्वविद्यालय की स्थापना हुई. वह मानते थे कि शिक्षित बिहार ही आत्मनिर्भर बिहार बन सकता है. समाज सुधारक सच्चिदानंद जब वे विदेश से लौटे तो समाज ने उन्हें जाति से बाहर कर दिया. कहा गया कि उन्हें ‘प्रायश्चित भोज’ करना होगा, तभी जाति में पुनः प्रवेश मिलेगा. उन्होंने साफ इनकार कर दिया. किसी कायस्थ परिवार ने उनसे बेटी की शादी करने से इनकार किया तो उन्होंने लाहौर में जाति के बाहर शादी कर ली. उनकी पत्नी राधिका देवी न केवल साथी थीं, बल्कि उनके विचारों की सच्ची सहभागी भी. उनकी याद में उन्होंने ‘राधिका सिन्हा इंस्टिट्यूट’ और ‘सच्चिदानंद सिन्हा लाइब्रेरी’ की स्थापना की. 1899 में उन्होंने ‘कायस्थ समाचार’ और ‘हिंदुस्तान रिव्यू’ नामक पत्र निकाले. इनमें उन्होंने शिक्षा, स्त्री सशक्तिकरण और औद्योगिक विकास पर लेख लिखे. उन्होंने कहा- “अगर बिहार को आगे बढ़ना है, तो उसे रूढ़ियों से मुक्त होकर ज्ञान और उद्योग की ओर बढ़ना होगा.” नेतृत्व में नैतिकता की मिसाल 1921 में वे बिहार-उड़ीसा प्रांत की कार्यकारी परिषद में शामिल हुए और जेल सुधार के लिए काम किया. नेतृत्वक बंदियों के साथ अमानवीय व्यवहार का उन्होंने कड़ा विरोध किया. 1936 में वे पटना विश्वविद्यालय के पहले हिंदुस्तानीय कुलपति बने. 1946 में उन्हें संविधान सभा का सदस्य चुना गया. उन्होंने प्रोटेम स्पीकर के रूप में पहले सत्र की अध्यक्षता की और 14 फरवरी 1950 को पटना में संविधान की मूल प्रति पर हस्ताक्षर किए. सच्चिदानंद सिन्हा जब जवाहरलाल नेहरू को भी झुकना पड़ा डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा जितने विद्वान थे, उतने ही दबंग भी. उनकी मौजूदगी में बड़े-बड़े नेता भी छोटे लगते थे. पंडित मोतीलाल नेहरू, सर तेज बहादुर सप्रू, भूलाभाई देसाई — सभी जब भी पटना आते, सिन्हा साहब के घर ही ठहरते. एक बार आजादी से दो साल पहले जवाहरलाल नेहरू पटना आए और सर्किट हाउस में ठहर गए. समाचार मिलते ही डॉ. सिन्हा वहां पहुंचे और बोले — “तुम्हारे बाप की मजाल नहीं थी कि पटना में कहीं और ठहर जाएं और तुम मेरे जीते-जी सर्किट हाउस में?” नेहरू निरुत्तर हो गए. सिन्हा साहब ने कहा — “खानसामा, साहब का सामान मेरी गाड़ी में रखो.” और जवाहरलालजी बिना

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WBP Constable Admit Card Out: पुलिस कांस्टेबल लिखित परीक्षा का एडमिट कार्ड जारी, ऐसे करें Download 

WBP Constable Admit Card Out: पश्चिम बंगाल रिक्रूटमेंट बोर्ड ने WBP पुलिस कांस्टेबल की लिखित परीक्षा के लिए एडमिट कार्ड जारी कर दिया है. ये परीक्षा 30 नवंबर 2025 को विभिन्न परीक्षा केंद्र पर आयोजित की जाएगी. अगर आप भी परीक्षा में शामिल होने वाले हैं तो आइए जानते हैं कि एडमिट कार्ड कहां से और कैसे डाउनलोड करें.  WBP Constable Admit Card Out: इन डिटेल्स की मदद से डाउनलोड करें एडमिट कार्ड  ऐसे कैंडिडेट्स जो इस परीक्षा में शामिल होने वाले हैं, वे लॉगिन क्रेडेंशियल्स जैसे कि रजिस्ट्रेशन नंबर, डेट ऑफ बर्थ की मदद से ऑफिशियल वेबसाइट से एडमिट कार्ड (Admit Card) डाउनलोड कर लें.  WBP Constable Vacancy: 11749 पदों पर होगी भर्ती  परीक्षा में शामिल होने के लिए एडमिट कार्ड का होना बहुत जरूरी है. बिना एडमिट कार्ड के परीक्षा में एंट्री नहीं मिलेगी. WBPRB इस वैकेंसी के जरिए 11,749 योग्य उम्मीदवारों की कांस्टेबल पद पर भर्ती करेगा.  West Bengal Police Constable Exam Date: कब होगी परीक्षा?  पश्चिम बंगाल पुलिस कांस्टेबल (West Bengal Police) लिखित परीक्षा 30 सितंबर 2025 को आयोजित की जाएगी. इस परीक्षा में शॉर्टलिस्ट किए गए कैंडिडेट्स को फिर PMT/PET फेज के लिए सेलेक्ट किया जाएगा.  Wbp constable admit card out: पुलिस कांस्टेबल लिखित परीक्षा का एडमिट कार्ड जारी, ऐसे करें download  8 WBP Constable Admit Card Steps to Download: कैसे डाउनलोड करें एडमिट कार्ड?  सबसे पहले WBPRB की ऑफिशियल वेबसाइट prb.wb.gov.in पर जाएं.  यहां Recruitment Notification वाले सेक्शन में WBP Constable Admit Card का  लिंक दिखेगा, इस पर क्लिक करें.  अब एक नया टैब खुलेगा, जिसमें एडमिट कार्ड का लिंक दिया होगा.  इस पर क्लिक करें और अपना लॉगिन क्रेडेंशियल (जैसे रजिस्ट्रेशन नंबर और पासवर्ड) डालें.  अब एडमिट कार्ड डाउनलोड करें और इसका प्रिंटआउट निकाल लें.  यह भी पढ़ें- Graduate युवाओं के लिए निकली Indian Air Force में वैकेंसी, आज से शुरू है आवेदन प्रक्रिया The post WBP Constable Admit Card Out: पुलिस कांस्टेबल लिखित परीक्षा का एडमिट कार्ड जारी, ऐसे करें Download  appeared first on Naya Vichar.

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Jaya Kishori Quotes: ओवरथिंकिंग से छुटकारा पाने के लिये अपनाएं जया किशोरी के 5 टिप्स

Jaya Kishori Quotes: आज के समय में ज्यादातर लोग ओवरथिंकिंग यानी ज्यादा सोचने की आदत से परेशान रहते हैं. छोटी-छोटी बातों पर ज्यादा विचार करना, भविष्य की चिंता या अतीत की गलती को लेकर पछतावा, मानसिक शांति को छीन लेता है. आध्यात्मिक वक्ता जया किशोरी जी का मानना है कि मन को नियंत्रित करना और खुद को स्वीकारना ही खुशी जीवन का रहस्य है. उनके अनुसार, जब हम अपने मन पर नियंत्रण नहीं रखते, तब जीवन में सबकुछ होने के बावजूद भी सुकून नहीं मिलता. आइए जानें जयाकिशोरी के कुछ प्रेरणादायक विचार और ओवरथिंकिंग से बचने के उपाय. Jaya Kishori Quotes: ओवरथिंकिंग से बचने के उपाय (Tips to Stop Overthinking) Tips to stop overthinking) ध्यान भटकाना है जरूरी (Diversion is Key) जब भी मन में नकारात्मक विचार आने लगें, तुरंत किसी हॉबी या सामाजिक गतिविधि में खुद को व्यस्त कर लें. संगीत सुनना, पेंटिंग करना या दोस्तों से बात करना मन को शांत करता है. अगर हम अपने मन को नियंत्रित नहीं करते तो दुनिया की हर चीज पाने के बाद भी हम खुश नहीं रह सकते. – जया किशोरी मेडिटेशन से मिलेगी मन पर पकड़ (Meditation for Control) जया किशोरी कहती हैं कि नियमित ध्यान और योग मानसिक संतुलन के लिए बेहद जरूरी हैं. रोज़ कुछ मिनट प्रकृति में समय बिताना भी मन को सुकून देता है. खुद को स्वीकारें (Acceptance Equals Peace) अपनी गलतियों और अनुभवों को स्वीकार करें. अतीत को बदलना संभव नहीं, लेकिन उससे सीख लेकर आगे बढ़ना ही सच्ची शांति का रास्ता है. स्वीकार करना ही शांति है, असली सुख है. – जया किशोरी खुद को व्यस्त रखें (Stay Busy to Avoid Unhealthy Thoughts) खाली दिमाग में नकारात्मक विचार जल्दी घर कर लेते हैं. इसलिए खुद को किसी रचनात्मक काम में लगाएं, जैसे पढ़ना, लिखना या नई स्किल सीखना. लिखना एक बहुत अच्छी आदत है, इससे मन हल्का होता है और भावनाओं पर नियंत्रण मिलता है. – जया किशोरी 5. लिखने की आदत डाले (Writing as Therapy) जया किशोरी के अनुसार, लिखना मन की भावनाओं को व्यक्त करने का सबसे अच्छा तरीका है. डायरी में अपने विचार और परेशानियां लिखने से मन हल्का महसूस करता है. जया किशोरी के ये विचार सिखाते हैं कि मन को शांत रखने का सबसे बड़ा उपाय है खुद को समझना, स्वीकारना और सकारात्मकता की ओर ध्यान लगाना. ओवरथिंकिंग को रोकने का रास्ता मन की शांति और आत्म-स्वीकृति से होकर गुजरता है. Also Read: Chanakya Niti: आचार्य चाणक्य के अनुसार इन 3 जगहों पर लगाया गया पैसा लौटता है दोगुना बनकर Also Read: Vidur Niti: दुख का साया भी नहीं पड़ता उन पर जो करते हैं ये कार्य The post Jaya Kishori Quotes: ओवरथिंकिंग से छुटकारा पाने के लिये अपनाएं जया किशोरी के 5 टिप्स appeared first on Naya Vichar.

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IND vs SA: चोट के बाद पंत की टीम में वापसी, क्या ध्रुव जुरेल प्लेइंग इलेवन से होंगे बाहर!

IND vs SA: हिंदुस्तान और साउथ अफ्रीका (India vs South Africa) के बीच होने वाली दो टेस्ट मैचों की सीरीज से पहले टीम इंडिया के सामने सबसे बड़ी चुनौती है प्लेइंग इलेवन का सही चयन. ऋषभ पंत (Rishabh Pant) की चोट के बाद धमाकेदार वापसी तय है और वे दोबारा विकेटकीपिंग के साथ अपना पसंदीदा बल्लेबाजी स्थान भी संभालेंगे. लेकिन दूसरी तरफ ध्रुव जुरेल (Dhruv Jurel) की शानदार फॉर्म इतनी दमदार है कि टीम मैनेजमेंट उन्हें नजरअंदाज नहीं कर सकता. ऐसे में जुरेल को इस टेस्ट सीरीज में सिर्फ एक स्पेशलिस्ट बल्लेबाज के रूप में खिलाए जाने की पूरी संभावना है. ऋषभ पंत की वापसी से बदली तस्वीर पिछले कुछ टेस्ट मैचों में जब ऋषभ पंत एंकल फ्रैक्चर से उबर रहे थे, तब ध्रुव जुरेल ने तीन टेस्ट ओवल, अहमदाबाद और दिल्ली में विकेटकीपर की भूमिका निभाई थी. लेकिन अब पंत पूरी तरह फिट हैं और टीम में उपकप्तान के रूप में लौट रहे हैं. इसका मतलब है कि विकेटकीपिंग की जिम्मेदारी फिर से उन्हीं के हाथों में जाएगी. पंत की वापसी ने एक तरह से टीम चयन को पेचीदा बना दिया है, क्योंकि जुरेल को बाहर रखना मुश्किल हो गया है. मैनेजमेंट मानता है कि जुरेल की फॉर्म और भरोसेमंद बल्लेबाजी टीम के लिए काफी जरूरी है. ध्रुव जुरेल की चमकदार फॉर्म  घरेलू सीजन की शुरुआत से अब तक जुरेल ने जो प्रदर्शन किया है, वह किसी भी युवा बल्लेबाज के सपने जैसा है. उन्होंने हाल ही में फर्स्ट-क्लास क्रिकेट की कुछ पारियों में शानदार फॉर्म दिखाया था. उन्होंने 140, 1 & 56, 125, 44 & 6, 132 & 127 नाबाद रन बनाए. आठ पारियों में तीन शतक, एक अर्धशतक और 40+ का एक स्कोर ऐसी लय में चल रहे बल्लेबाज को कोई भी चयन समिति नजरअंदाज नहीं कर सकती. इसीलिए माना जा रहा है कि जुरेल को टीम में सिर्फ एक बल्लेबाज की भूमिका में शामिल किया जाएगा. एक BCCI अधिकारी ने बताया जुरेल को बल्लेबाज के तौर पर खिलाने का प्लान है. नंबर-3 पर साई सुदर्शन को हटाना विकल्प था, लेकिन वे पिछले टेस्ट में अर्धशतक लगा चुके हैं. इसलिए टीम वहां बदलाव नहीं करना चाहती. रेड्डी की जगह पर हो सकता है बदलाव जुरेल के लिए टीम में असली जगह नीतीश कुमार रेड्डी की पोजिशन मानी जा रही है. चयन से जुड़े सूत्र बताते हैं हिंदुस्तानीय परिस्थितियों में रेड्डी की गेंदबाजी की उतनी जरूरत नहीं पड़ेगी. ऐसे में जुरेल को उनके ऊपर तरजीह मिल सकती है. रिपोर्ट्स के अनुसार दिल्ली टेस्ट से पहले भी देवदत्त पडिक्कल को खिलाने पर चर्चा हुई थी, क्योंकि अहमदाबाद टेस्ट में रेड्डी को सिर्फ 4 ओवर ही मिले थे. दिल्ली में उन्हें ऊपरी क्रम में बैटिंग दी गई, लेकिन गेंदबाजी का मौका नहीं मिला. स्पष्ट है कि टीम मैनेजमेंट रेड्डी को ऑलराउंडर के रूप में पूरी तरह उपयोग नहीं कर पा रहा है और ऐसे में जुरेल को बैटिंग-स्पॉट देना जायज लगता है. टेस्ट में दुर्लभ प्रयोग सफेद गेंद क्रिकेट में दो विकेटकीपर एक साथ स्पोर्ट्सना नया नहीं है. धोनी-कार्तिक, धोनी-पार्थिव और धोनी-पंत जैसी जोड़ी वनडे मैच में एक साथ स्पोर्ट्सी हैं. हिंदुस्तान की टेस्ट टीम में आखिरी बार 1986 में किरण मोरे और चंद्रकांत पंडित एक साथ स्पोर्ट्से थे, जिसमें पंडित सिर्फ बल्लेबाज थे. इसी इतिहास को देखते हुए ध्रुव जुरेल को बल्लेबाज के तौर पर खिलाना एक दुर्लभ फैसला होगा, लेकिन टीम मैनेजमेंट इससे पीछे हटता नहीं दिख रहा है. क्यों जरूरी है जुरेल को मौका देना? हेड कोच गौतम गंभीर मानते हैं कि हिंदुस्तान को साउथ अफ्रीका जैसी मजबूत टीम के खिलाफ नंबर 8 तक बैटिंग गहराई रखनी होगी. हिंदुस्तान तीन स्पिनर्स और दो तेज गेंदबाजों के साथ उतरने का प्लान बना रहा है. ऐसे में मजबूत मध्यक्रम बहुत अहम हो जाता है. इस वक्त जुरेल का फॉर्म  शानदार है और उनके पास लंबी पारी स्पोर्ट्सने का हुनर है. इसके अलावा ध्रुव के पास मैच का रुख बदलने की क्षमता और लगातार रन बनाने की आदत है. उन्हें मौजूदा फॉर्म में एक बेहद भरोसेमंद विकल्प बनाती हैं. ये भी पढ़ें- IND A vs SA A Unofficial Test: दूसरे टेस्ट में हिंदुस्तान को 5 विकेट से मिली हार, साउथ अफ्रीका के साथ सीरीज 1-1 से बराबर Hong Kong Sixes Final: हार्दिक की नकल पर वायरल हुए पाकिस्तानी खिलाड़ी, पाक टीम ने खिताब जीतकर रचा इतिहास The post IND vs SA: चोट के बाद पंत की टीम में वापसी, क्या ध्रुव जुरेल प्लेइंग इलेवन से होंगे बाहर! appeared first on Naya Vichar.

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Jyotish Shastra: किस ग्रह के कारण होता है निमोनिया रोग, जानिए ज्योतिष के अनुसार कौन सा रत्न करें धारण

Jyotish Shastra: ज्योतिष शास्त्र केवल ग्रहों की चाल ही नहीं बताता, बल्कि यह व्यक्ति के दैनिक जीवन, स्वास्थ्य और भविष्य की संभावनाओं को भी दर्शाता है. जन्मकुंडली के बारह भाव होते हैं, जिनका अलग-अलग जीवन क्षेत्र पर प्रभाव होता है. इसमें छठा भाव रोग और स्वास्थ्य का प्रतिनिधि करता है, आठवां भाव आयु को दर्शाता है, जबकि द्वादश भाव खर्च और हॉस्पिटल से संबंधित होता है. ग्रहों के प्रभाव से रोग जन्मकुंडली में छठा भाव रोग का माना जाता है और इसके अधिपति को षष्ठेश कहते हैं. यह भाव व्यक्ति के स्वास्थ्य की स्थिति और रोगों को दर्शाता है. यदि इस भाव में शुभ ग्रह मौजूद हों, तो रोग कम प्रभावित करता है और व्यक्ति स्वस्थ रहता है. अशुभ ग्रहों के प्रभाव में थोड़ी राहत मिलने के बावजूद व्यक्ति स्वस्थ्य और दीर्घायु हो सकता है. ज्योतिष के अनुसार निमोनिया कैसे होता है निमोनिया शीत ज्वर का बिगड़ा रूप है, जिसमें फेफड़ों में संक्रमण और सूजन हो जाती है. यह रोग बच्चों और वृद्धों को ज्यादा प्रभावित करता है, और जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है, उन्हें अधिक जोखिम रहता है. ज्योतिषशास्त्र के अनुसार, जब गोचर में सूर्य, गुरु और मंगल मिथुन, सिंह या कुम्भ राशि में संचार करते हैं, तो निमोनिया रोग की प्रबल आशंका रहती है. निमोनिया रोग से बचाव के लिए रत्न ज्योतिष में रत्न चिकित्सक पद्धति के अनुसार निमोनिया रोग में राहत के लिए रत्नों का विशेष महत्व है. लाल मूंगा और पिला पुखराज धारण करने से रोग का प्रभाव कम हो जाता है और स्वास्थ्य में सुधार आता है. यह पद्धति प्राचीन काल से चली आ रही है और आज भी लोगों को गंभीर रोगों से राहत दिलाने में उपयोगी साबित हो रही है. जन्मकुंडली, वास्तु और व्रत-त्योहार से संबंधित विस्तृत जानकारी के लिए आप नीचे दिए गए नंबर पर संपर्क कर सकते हैं. ज्योतिषाचार्य संजीत कुमार मिश्रा ज्योतिष, वास्तु एवं रत्न विशेषज्ञ 8080426594 / 9545290847 ये भी पढ़ें: Kaal Bhairav Jayanti 2025: कब है कालभैरव जयंती? जानिए भगवान शिव के इस रौद्र रूप का महत्व The post Jyotish Shastra: किस ग्रह के कारण होता है निमोनिया रोग, जानिए ज्योतिष के अनुसार कौन सा रत्न करें धारण appeared first on Naya Vichar.

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Beautiful Unique Baby Girl Names: देवी जैसी प्यारी लाडली के लिए चुनें ये खास नाम और उनके अर्थ

Beautiful Unique Baby Girl Names: जब किसी घर के आंगन में नन्ही सी परी अपने छोटे-छोटे कदम रखती है, तो पूरे घर का माहौल खुशियों से भर जाता है. हर घर वालों के चेहरे पर मुस्कान खिल उठती है. यह पल हर माता-पिता के लिए बेहद खास और भावनाओं से भरा होता है, इस समय सबसे पहला और सबसे प्यारा काम होता है नन्ही जान के लिए एक सुंदर, अर्थपूर्ण और अलग नाम चुनना. हर मां-बाप चाहते हैं कि अपनी बेटी को ऐसा नाम दें, जो न केवल सुनने में प्यारा लगे बल्कि अर्थ में भी गहराई और सुंदरता हो. आज हम आपको इस आर्टिकल में बेबी गर्ल के लिए सुंदर और अर्थपूर्ण नामों की लिस्ट बताएंगे जिसे आप अपनी नन्ही परी के लिए चुन सकते हैं. बेबी गर्ल के लिए नामों की लिस्ट (Baby Girl Names List) चार्वी – जो बहुत सुंदर हो.   देविका – इस नाम का अर्थ छोटी देवी होता है.  हिमिका – जो हिम से उत्पन्न हो.  मायरा – जो बहुत करुणामयी और प्रिय हो.  कियारा – प्रकाश और उजाला से जुड़ा हुआ नाम.  वेदिका – पवित्र ज्ञान की वेदी. रुचिका –  जो आकर्षक और सुंदर हो.  शिवांगी – भगवान शिव की अंश. बेबी नेम से जुड़ी समाचारें यहां पढ़ें यह भी पढ़ें- Baby Names: नेचर-टच के साथ बच्चों के लिए सुंदर और अर्थपूर्ण नाम यह भी पढ़ें- Beautiful Unique Baby Boy Names: नटखट लड्डू गोपाल के लिए रखें ब्यूटीफुल नाम, देखें बेबी बॉय के लिए यूनिक नामों की लिस्ट  आध्या – प्रथम शक्ति, आदि शक्ति. ईरा – ज्ञान की देवी सरस्वती. आर्या – जो बहुत श्रेष्ठ और कुलीन हो.  अन्वी – देवी लक्ष्मी से जुड़ा हुआ नाम.  आस्था – विश्वास से जुड़ा हुआ नाम.  आरोही – संगीत का सुर, चढ़ती हुई. सायरा – सागर, यात्रा करने वाली. मिषा – जो बहुत प्यारी हो.  नव्या – नई, आधुनिक से जुड़ा हुआ नाम.  परी – अप्सरा, सुंदर बालिका यह भी पढ़ें- Baby Boy Names Inspired By Lord Ganesha: भगवान गणेश से प्रेरित देखें बेबी बॉय के लिए सुंदर और अर्थपूर्ण नामों की लिस्ट  यह भी पढ़ें- Beautiful Baby Girl Names: बेबी गर्ल के लिए चुनें ब्यूटीफुल नाम, देखें पूरी लिस्ट और उनके अर्थ  सृष्टि – सृजन या रचना से जुड़ा हुआ सुंदर नाम.  काश्वी – इस नाम का अर्थ चमकती हुई या तेजस्वी से जुड़ा होता है.  धृति – जो बहुत साहसी और धैर्य हो.  कव्या – काव्य जैसी सुंदर तृषा – इस नाम का अर्थ प्यास और इच्छा से जुड़ा होता है.  ईशानी – देवी पार्वती से जुड़ा हुआ नाम.  वायुना – इस नाम का मतलब सुगंधित हवा होता है.  प्रिशा – प्रिय, ईश्वर का वरदान से जुड़ा हुआ नाम.  नायरा – इस नाम का अर्थ चमकती हुई या उज्ज्वल.  तन्वी – कोमल और सुंदर कन्या यह भी पढ़ें- Hindu Baby Names: नन्हें राजकुमार और राजकुमारी के लिए धर्म से प्रेरित नामों की लिस्ट  यह भी पढ़ें- Twins Baby Names: अपने जुड़वा नन्हे फरिश्तों के लिए चुनें सबसे प्यारे और यूनिक नाम Disclaimer: यह आर्टिकल सामान्य जानकारियों और मान्यताओं पर आधारित है. नया विचार इसकी पुष्टि नहीं करता है. The post Beautiful Unique Baby Girl Names: देवी जैसी प्यारी लाडली के लिए चुनें ये खास नाम और उनके अर्थ appeared first on Naya Vichar.

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Bihar Crime: बिहार में दो पक्षों में फायरिंग, महिला के गले में लगी गोली

Bihar Crime: बिहार के नालंदा जिल के चिकसौरा थाना इलाके के कमरथू गांव में गोलीबारी की घटना को अंजाम दिया गया. इस घटना में दो लोग जख्मी हो गए. जानकारी मिली है कि वर्चस्व को लेकर इस घटना को अंजाम दिया गया है. घायलों में चिकसौरा थाना इलाके के चंद्रिका प्रसाद एवं मुद्रिका प्रसाद की पत्नी सिरदुल देवी (40) शामिल हैं. घायलों का इलाज जारी यह घटना रविवार रात करीब 10:00 बजे की है. इस घटना में दोनों घायलों को इलाज के लिए हिलसा अनुमंडलीय अस्पताल में भर्ती किया गया है. बिहार की ताजा समाचारों के लिए यहां क्लिक करें जांच में जुटी पुलिस अस्पताल में इलाज के दौरान उपस्थित परिजनों ने बताया कि जार्विस यादव एवं पिंटू यादव के बीच वर्चस्व को लेकर गोलीबारी की गई है. दो पक्षों के बीच हुई इस गोलीबारी की घटना में सिरदुल देवी के गर्दन में गोली लगी है. वहीं चंद्रिका प्रसाद का सर फटा हुआ है. हालांकि गोली लगने की अधिकारी पुष्टि नहीं की गई है. पुलिस हर बिंदु पर मामले की जांच पड़ताल में जुटी है.    इसे भी पढ़ें: Bihar News: मैट्रिक का छात्र रातोंरात बना करोड़पति, खाते में आए साढ़े 21 करोड़, जानिए क्या है पूरा मामला The post Bihar Crime: बिहार में दो पक्षों में फायरिंग, स्त्री के गले में लगी गोली appeared first on Naya Vichar.

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Bhojpuri Film: रानी चटर्जी की नई फिल्म का फर्स्ट लुक रिलीज, ‘हम हई जेठानी’ में दिखा जबरदस्त अंदाज

Bhojpuri Film: भोजपुरी सिनेमा की मशहूर अभिनेत्री रानी चटर्जी इन दिनों फिर सुर्खियों में हैं. हाल ही में उनकी आने वाली नई फिल्म ‘हम हई जेठानी’ का पहला पोस्टर रिलीज किया गया है. बी4यू भोजपुरी चैनल और खुद रानी चटर्जी ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर फिल्म का फर्स्ट लुक शेयर किया, जिसे फैंस खूब पसंद कर रहे हैं. पोस्टर शेयर करते हुए रानी ने कैप्शन में लिखा, “भोजपुरी फिल्म हम हई जेठानी का फर्स्ट लुक” और इसके साथ फिल्म से जुड़े कई कलाकारों को टैग भी किया. View this post on Instagram A post shared by B4U Bhojpuri (@b4ubhojpuri) फिल्म की टीम और स्टारकास्ट इस फिल्म को IVY एंटरटेनमेंट्स प्रेजेंट्स के बैनर तले बनाया जा रहा है. फिल्म के निर्माता संदीप सिंह और नीलाभ तिवारी हैं, जबकि निर्देशन अनिल नैनन कर रहे है. पोस्टर से साफ झलक रहा है कि फिल्म में ड्रामा और मनोरंजन का तड़का देखने को मिलेगा. फिल्म में रानी चटर्जी के साथ खुशी झा और सोनाली मिश्रा भी मुख्य भूमिकाओं में नजर आएंगी. इन तीनों का ऑन-स्क्रीन कॉम्बिनेशन दर्शकों के लिए काफी दिलचस्प होने वाला है. रानी चटर्जी ने भोजपुरी इंडस्ट्री में कई यादगार किरदार निभाए हैं और अब वे इस फिल्म में भी एक दमदार किरदार में दिखाई देंगी. कैसी होगी फिल्म की कहानी? फिल्म की कहानी पारिवारिक रिश्तों और भावनाओं पर बताई जा रही है, जिसमें रानी का जेठानी वाला रोल दर्शकों के बीच अट्रैक्टिव होने वाला है. वहीं, रानी चटर्जी के वर्कफ्रंट की बात करें तो हाल ही में उन्होंने अपनी फिल्म ‘यूपी वाली बिहार वाली’ के मुहूर्त की तस्वीरें भी शेयर की थी. इस फिल्म की शूटिंग भी शुरू हो चुकी है. लगातार नई फिल्मों की घोषणाओं के बाद उनके फैंस को अब ‘हम हई जेठानी’ का बेसब्री से इंतजार है, जो जल्द ही बड़े पर्दे पर दस्तक देने वाली है. ये भी पढ़ें: Bhojpuri: खेसारी लाल यादव के पत्नी को बहन बनाने वाले बयान पर आगबबूला हुई रानी चटर्जी, पवन सिंह ने भी जमकर साधा निशाना ये भी पढ़ें: Bhojpuri: रानी चटर्जी के नए वीडियो ने इंटरनेट पर मचाया धमाल, कुमार सानू के इस गाने पर जमकर किया डांस, देखें VIDEO The post Bhojpuri Film: रानी चटर्जी की नई फिल्म का फर्स्ट लुक रिलीज, ‘हम हई जेठानी’ में दिखा जबरदस्त अंदाज appeared first on Naya Vichar.

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Bihar News: एक ही परिवार के 5 लोगों की मौत से दहला दानापुर, सोते समय गिरी छत, इंदिरा आवास योजना से बना था घर

Bihar News: पटना के दानापुर में रविवार की रात दर्दनाक घटना घटी. घर की छत गिरने से एक ही परिवार के पांच लोगों की एकसाथ मौत हो गई. यह घटना दियारा के अकीलपुर थाना क्षेत्र के मानस पंचायत में घटी. परिवार के पांच लोग रात में खाना खाने के बाद सो रहे थे. लेकिन अचानक छत ढहने के कारण पांचों लोगों की मौत हो गई. जानकारी के मुताबिक, मो. बबलू, उनकी पत्नी रोशन खातून, उनके बच्चों रुसार, चांद और चांदनी की मौत हो गई है . अचानक छत गिरने से पांच की मौत बताया जाता है कि मो. बबलू अपनी पत्नी और बच्चों के साथ रविवार की रात एक साथ सोए हुए थे. लेकिन अचानक उनके मकान की छत ढहने से दब कर उनकी मौत हो गई है. सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंचकर मामले की छानबीन कर रही है. मृतक मो. बबलू मजदूरी करता था. एक परिवार के पांच लोगों की मौत के बाद गांव में मातम पसरा हुआ है. इंदिरा आवास योजना के तहत बना था घर घटना को लेकर मुखिया वकील राय की माने तो, रात में जोरदार आवाज आई. जिसके बाद आस-पास के लोग बबलू के घर की तरफ दौड़ पड़े. लोगों ने देखा कि घर की छत गिर चुकी है. इसे बाद जल्दबाजी में मलबे को हटाया गया और पांचों मृतकों को निकाला गया. बताया जा रहा है कि मो. बबलू का मकान इंदिरा आवास योजना के तहत बना था. पूरी घटना की जांच में जुटी पुलिस बताया यह भी जा रहा कि मो. बबलू अपने परिवार में इकलौता कमाने वाला था. घर की दीवारों में दरारें पड़ गई थी. दीवारें जर्जर हो गई थी. लेकिन आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण मो. बबलू अपने घर की मरम्मत नहीं कर पा रहा था. अंत में घर की छत गिरने से पांचों सदस्यों की मौत हो गई. हालांकि, मौके पर पहुंची पुलिस पूरी घटना की जांच-पड़ताल में जुटी है. साथ ही ग्रामीणों ने प्रशासन से पीड़ित परिजनों को उचित मुआवजा देने की मांग की. Also Read: Aaj Bihar Ka Mausam: बिहार में बढ़ने वाली है कड़ाके की सर्दी! डॉक्टरों ने दी सेहत को लेकर चेतावनी, जानें कब से गिरेगा तापमान The post Bihar News: एक ही परिवार के 5 लोगों की मौत से दहला दानापुर, सोते समय गिरी छत, इंदिरा आवास योजना से बना था घर appeared first on Naya Vichar.

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