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November 22, 2025

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Bokaro News : कार्यस्थल पर सुरक्षा को लेकर सामूहिक सहयोग का आह्वान

बोकारो, बोकारो इस्पात डिप्लोमाधारी कामगार यूनियन के हॉट स्ट्रिप मिल टीम की ओर से शुक्रवार को बीएसएल के हॉट स्ट्रिप मिल विभाग में कार्यरत सभी बीएसएल कर्मचारियों व ठेका मजदूरों के साथ सेफ्टी संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया. कार्यक्रम ‘प्रोडक्शन मस्ट बट सेफ्टी फर्स्ट’ व ‘सुरक्षित जीवन का अर्थ है, उसके बिना सब व्यर्थ है’ के नारों के साथ शुरू हुआ. नेतृत्व हॉट स्ट्रिप मिल के मुख्य महाप्रबंधक पीके वर्मा ने किया. उन्होंने विभाग के सभी कर्मचारियों व ठेका मजदूरों से सुरक्षा को लेकर सामूहिक सहयोग का आह्वान किया. कर्मचारियों ने अपने कार्यस्थल पर सुरक्षा से जुड़े तमाम विषयों पर अपने सुझाव दिये. संवाद के बाद सभी कर्मचारियों ने शपथ ली कि वह अपने साथ-साथ अपने साथियों की सुरक्षा को सुनिश्चित करने में बढ़-चढ़कर योगदान देंगे व अपने कार्य स्थल पर मशीनों की अच्छे तरीके से जांच की जायेगी. उनके प्रीवेंटिव मेंटेनेस पर विशेष ध्यान दिया जायेगा. इसके अलावा सभी लोग सेफ्टी हेलमेट, सेफ्टी बूट, सेफ्टी जैकेट इत्यादि का प्रॉपर इस्तेमाल करेंगे और एक सुरक्षित वातावरण तैयार करने में सामूहिक योगदान करेंगे. कार्यक्रम में मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल, ऑपरेशन के प्रमुख अधिकारी व मानव संसाधन विभाग के अधिकारी उपस्थित थे. आयोजन में यूनियन के संयुक्त महामंत्री रत्नेश मिश्रा, नितेश कुमार, जितेंद्र कुमार सहित सभी डिप्लोमा इंजीनियर्स की अहम भूमिका रही. डिस्क्लेमर: यह नया विचार समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे नया विचार डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है The post Bokaro News : कार्यस्थल पर सुरक्षा को लेकर सामूहिक सहयोग का आह्वान appeared first on Naya Vichar.

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ऑर्केस्ट्रा से दस नाबालिग लड़कियों को किया बरामद

प्रतिनिधि, लकड़ी नबीगंज. लकड़ी नबीगंज थाना क्षेत्र के मदारपुर गांव में संचालित एक अवैध ऑर्केस्ट्रा के खिलाफ जिला प्रशासन और दिल्ली मानव तस्करी विरोधी इकाई ने बड़ी कार्रवाई की है. दिल्ली से पहुंची टीम ने पुलिस के साथ मदारपुर में बुधवार की देर रात छापेमारी कर ऑर्केस्ट्रा में पश्चिम बंगाल व बिहार के पूर्णिया से लाई गई दस नाबालिग लड़कियों को बरामद कर लिया. बरामद नाबालिग लड़कियों से ऑर्केस्ट्रा के नाम पर दूर-दराज से बुलाकर संचालक द्वारा जबरन अश्लील नृत्य करने की बात कही जा रही है. पुलिस ने छापेमारी बाजितपुर निवासी दीपक कुमार के मकान और मदारपुर निवासी मनु कुमार के किराये के मकान पर की. जहां से दस नाबालिग लड़कियों की बरामदगी हुई. ऑर्केस्ट्रा संचालक व मुख्य आरोपित पूर्णिया का चंदू उर्फ चंदन पासवान बताया जाता है. मुख्य आरोपित के खिलाफ स्थानीय लोग लंबे समय से शिकायत भी कर रहे थे. ग्रामीणों का आरोप है कि ऑर्केस्ट्रा के बहाने नाबालिग लड़कियों को पूर्णिया, बंगाल के किशनगंज व अन्य क्षेत्रों से लाकर यहां रखा जाता था और उनसे जबरन अश्लील नृत्य कराया जाता था. ऑर्केस्ट्रा के नाम पर आने वाले ग्राहकों से इसके लिए मोटी रकम वसूली भी जाती थी. कार्रवाई के दौरान पुलिस ने मौके पर मौजूद दो-तीन लोगों को हिरासत में भी लिया है. जिनसे पूछताछ की जा रही है. मिली जानकारी के अनुसार दिल्ली के रेस्क्यू फाउंडेशन व मिशन मुक्ति फाउंडेशन को सूचना मिली कि सीवान जिले के मदारपुर में ऑर्केस्ट्रा के नाम पर कई जगहों से नाबालिग लड़कियों को बुलाकर जबरन अश्लील नृत्य कराया जा रहा है. इसके बाद दिल्ली की टीम सारण के नारायणी सेवा संस्थान के साथ जिला मुख्यालय पहुंची. उसके बाद टीम मदारपुर में छापेमारी की. जहां से दस नाबालिग लड़कियों को टीम ने रेस्क्यू किया. बरामद नाबालिग लड़कियों के आधार कार्ड में फर्जी तरीके से उम्र बढ़ाने की बात भी सामने आ रही है. पुलिस ने बरामद सभी नाबालिग लड़कियों को बाल कल्याण समिति को सुपुर्द कर दिया है. मामले में लकड़ी नबीगंज थाना में मानव तस्करी, बाल श्रम निषेध और अमर्यादित व्यापार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है. पुलिस की कार्रवाई से ग्रामीणों में है खुशी लकड़ी नबीगंज. मदारपुर में ऑर्केस्ट्रा से रेस्क्यू की गई दस नाबालिग लड़कियों की इस कार्रवाई से ग्रामीणों में खुशी है. ग्रामीणों की माने तो मदारपुर में पिछले कई महीनों से ऐसे ऑर्केस्ट्रा का संचालन हो रहा था. जिसका बुरा असर गांव के बच्चों-बच्चियों पर पड़ रहा था. रात-रात भर अश्लील गानों और डांस से बच्चों की पढ़ाई-लिखाई भी प्रभावित हो रही थी. लोग दबे जुबान से इसका विरोध तो करते थे लेकिन डर की वजह से कोई खुलकर बोल नहीं पाता था. ग्रामीणों की मांग है कि दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो और गांव में इस तरह के अवैध ऑर्केस्ट्रा पर पूरी तरह से लगाम लगाया जाए. डिस्क्लेमर: यह नया विचार समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे नया विचार डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है The post ऑर्केस्ट्रा से दस नाबालिग लड़कियों को किया बरामद appeared first on Naya Vichar.

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buxar news : शहर की सफाई पर हर माह 1.16 करोड़ खर्च, फिर भी सड़कों पर पसरा है कचरा

बक्सर. शुक्रवार को शहर से कचरा उठाने वाले लगभग एक दर्जन गाड़ियों के चालक वेतन भुगतान की मांग को लेकर हड़ताल पर चले गये. नतीजा शहर के अधिकांश जगहों से कूड़े का उठाव नहीं हुआ. लिहाजा डंपिंग जोन पर पड़े कचरे से उठने वाली दुर्गंध से आसपास के लोगों को जीना मुश्किल हो गया है. बक्सर नप के स्वच्छता अधिकारी रवि कुमार सिंह ने कहा कि कुछ मजदूरों की मजदूरी का भुगतान नहीं हुआ था, जिस कारण वे लोग हड़ताल पर चले गये थे. हालांकि उनके वेतन का भुगतान कर दिया गया है. सफाई का काम देर शाम से शुरू हो जायेगा. गौरतलब है कि शहर को स्मार्ट सिटी बनवाने की मुहिम में जुटा नगर पर्षद जनता की बुनियादी सुविधाएं तक मयस्सर नहीं करा पा रहा है. साफ-सफाई के नाम पर हर माह एक करोड़ 16 लाख रुपये खर्च होने के बाद भी शुक्रवार को शहर के स्टेशन रोड से कचरे का उठाव नहीं किया गया. इससे स्टेशन से बाहर निकलते ही सड़क किनारे कचरा फैला दिखा. वहीं कवलदह पार्क के सामने भी डंपिंग जोन से कचरे का उठाव नहीं किया गया, जिससे निकल रही गंदगी से आसपास के लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ा. शहर की साफ-सफाई की हालत किसी से छिपी नहीं है. सड़कों पर जगह-जगह लगे कचरे के ढेर तरह-तरह की बीमारियां फैला रही हैं. जिस कारण बक्सर शहर देश भर में स्वच्छता रैंकिंग में पीछे छूट गया है. जिसके कारण बक्सर को स्वच्छ रखने की पहल पर फिर एक बार सवाल खड़ा हो गया है. शहर में कोई ऐसी जगह नहीं है, जहां कूड़ों का अंबार नहीं लगा है. बाइपास रोड में कूड़े का ढेर लगे रहने के कारण वातावरण प्रदूषित होने का खतरा बढ़ गया है. डोर-टू-डोर कचरा उठाव का सही से नहीं हो रहा प्रबंधन शहर की साफ-सफाई को लेकर हर माह करीब एक करोड़ 16 लाख रुपये खर्च होता है. इनमें डोर-टू-डोर कूड़ा उठाव और शहर की गली एवं सड़कों की साफ-सफाई की जिम्मेदारी एनजीओ को दी गयी है. बावजूद इसके डोर-टू-डोर कचरा प्रबंधन का कार्य बेहतर नहीं होता है. शहर के अधिकांश वार्ड में डोर-टू-डोर कचरा उठाव में दो कर्मी लगाये गये हैं. लेकिन, किसी भी वार्ड में लगभग पांच सौ से अधिक घर होने के कारण ये कर्मी हर रोज घरों तक नहीं पहुंच पाते हैं. ऐसे में गृहस्वामी घर के कचरे को सड़क पर फेंकने के लिए विवश हो जाते हैं. डिस्क्लेमर: यह नया विचार समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे नया विचार डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है The post buxar news : शहर की सफाई पर हर माह 1.16 करोड़ खर्च, फिर भी सड़कों पर पसरा है कचरा appeared first on Naya Vichar.

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buxar news : केशवपुर में 15 दिनों से जलापूर्ति ठप, हजारों की आबादी परेशान

बक्सर. केशवपुर जलापूर्ति केंद्र का नया-नया कारनामा इन दिनों ग्रामीणों की नाराजगी का मुख्य कारण बन गया है. पानी की आपूर्ति बंद होने के पीछे विभाग और जलापूर्ति केंद्र द्वारा हर बार अलग-अलग बहाना बनाया जाता है. कभी ट्रांसफॉर्मर जलने, कभी स्टार्टर खराब होने, तो कभी पाइप लिकेज का हवाला देकर सप्लाइ रोक दी जाती है. स्थिति यह है कि ग्रामीणों को यह समझ में नहीं आ रहा कि वास्तव में समस्या क्या है और कब तक उनकी परेशानी दूर होगी. यह पहली बार नहीं है जब जलापूर्ति बंद होने की शिकायतें सामने आयी हों. ग्रामीणों के अनुसार, पिछले कई महीनों से लगभग हर महीने कोई न कोई बहाना बनाकर पानी की आपूर्ति दो-तीन दिनों से लेकर एक सप्ताह तक रोक दी जाती है. लेकिन, इस बार समस्या ने विकराल रूप ले लिया है. सोनवर्षा और गढ़नी टंकी से होने वाली आपूर्ति लगभग 15 दिनों से ठप है. इससे हजारों की आबादी के बीव पानी के लिए हाहाकार मचा है. ग्रामीणों ने बताया कि शुरुआत में विभाग ने यह कहकर सप्लाइ बंद कर दी कि टंकी का स्टार्टर जल गया है. इस बहाने से 12 दिन तक पानी की सप्लाइ रुकी रही. स्टार्टर की समस्या ठीक भी नहीं हुई थी कि दो से तीन बार ट्रांसफॉर्मर जलने की बात कहकर फिर से आपूर्ति रोक दी गयी. इसके बाद जब ग्रामीणों ने बार-बार शिकायत की और विभाग का ध्यान आकृष्ट किया, तब एक नया बहाना सामने आ गया कि पाइप लिकेज है. इस लिकेज के कारण अब कई दिनों से पानी की सप्लाइ पूरी तरह बंद है. ग्रामीणों का कहना है कि विभाग की लापरवाही का यह आलम है कि कई दिनों से पानी नहीं मिलने के बावजूद किसी अधिकारी ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लेना भी जरूरी नहीं समझा. लोगों को पीने के पानी के लिए दूर-दराज के नलों और निजी बोरिंग पर निर्भर रहना पड़ रहा है. सबसे गंभीर बात यह है कि विभाग को इस दीर्घकालीन समस्या की जानकारी तक नहीं है. जब इस संबंध में कार्यपालक अभियंता राहुल कुमार से पूछा गया, तो उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि हमें इसकी जानकारी नहीं थी, इसे तुरंत देखवा लेते हैं. अधिकारियों की अनभिज्ञता और स्थानीय स्तर पर कर्मचारियों की लापरवाही ने लोगों के बीच गहरा आक्रोश पैदा कर दिया है. ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन और विभाग की ओर से लाख दावे किये जाते हैं कि हर घर को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराया जा रहा है, लेकिन जमीनी सच्चाई इससे बिल्कुल अलग है. जलापूर्ति योजना की टंकियों की न तो समय से मरम्मत होती है और न ही तकनीकी गड़बड़ियों को दूर करने की कोई तत्परता दिखायी देती है. लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर हर बार स्टार्टर और ट्रांसफॉर्मर ही क्यों जल जाता है. क्या यह तकनीकी समस्या है या जिम्मेदार विभाग के अंदरूनी स्पोर्ट्स. डिस्क्लेमर: यह नया विचार समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे नया विचार डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है The post buxar news : केशवपुर में 15 दिनों से जलापूर्ति ठप, हजारों की आबादी परेशान appeared first on Naya Vichar.

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