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December 9, 2025

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दिल्ली-पंजाब सहित कई राज्यों से सीधे जुड़ेगा बिहार, 1675 नए रूटों पर चलेगी बसें, एक बस में होंगे 2 ड्राइवर, जानें वजह

Bihar Transport Department: बिहार सहित दूसरे राज्यों के कुल 1675 नये रास्तों पर परिवहन सेवा शुरू की जायेगी. ने राज्य भर के सभी लोगों को शहरों से जोड़ने और दूसरे राज्यों तक आने-जाने के लिये बड़ी- छोटी गाड़ियों का परिचालन शुरू करने का निर्णय लिया है. विभाग का मानना है कि ग्रामीण इलाकों से लोगों को शहरों तक पहुंचने में थोड़ी परेशानी होती है. इस परेशानी से निजात दिलाने के लिये विभाग ने बिहार के विभिन्न नये 900 से अधिक रास्तों पर गाड़ियां चलायेगी. बिहार के दिल्ली, यूपी, झारखंड, बंगाल, उत्तराखंड, राजस्थान सहित अन्य राज्य के रास्ते शामिल होंगे. विभाग ने समीक्षा बैठक में पूर्व के मार्गों पर बची हुई रिक्तियों के अलावे नये मार्गों को जोड़ने पर काम शुरू करने का निर्णय लिया गया है. परिचालन को बिहार राज्य पथ परिवहन निगम लोक निजी भागीदारी में शुरू करेगा, ताकि लोगों को बिहार या बिहार से बाहर आने-जाने में परेशानी नहीं हो. बिहार से दिल्ली, झारखंड, कोलकाता, यूपी, एमपी और पंजाब तक होगा परिचालन बिहार से दिल्ली, झारखंड, कोलकता, यूपी, एमपी और पंजाब सहित अन्य राज्यों में आने-जाने के लिए पीपीपी मोड में बसों का परिचालन शुरू होगा. परिवहन विभाग ने इसके लिए पूरी तैयारी कर ली है. वर्तमान में बिहार से यूपी और अन्य राज्यों के लिए बसों का परिचालन होता हैं, लेकिन दिल्ली तक बसों का परिचालन नहीं होता है. विभाग ने दिल्ली तक बस परिचालन शुरू करने के लिए विभाग की ओर से प्रस्ताव तैयार किया है. जल्द ही विभाग पीपीपी मोड में बसों के परिचालन के लिए लोगों से आवेदन मांगेगा. लंबी दूरी में दो ड्राइवर नहीं रहने वाली गाड़ियों का परमिट होगा रद्द बिहार में 250 किलो मीटर से अधिक दूरी तय करने वाली बसों को दो ड्राइवर रखना अनिवार्य किया गया है,लेकिन अब तक अधिकांश बस मालिकों ने ऐसा नहीं किया है.इस संबंध में परिवहन विभाग ने जिलों को निर्देश दिया था कि ऐसे सभी बसों का परमिट रद्द किया जाये. जिसकी शुरूआत इस माह से कर दी गयी.अधिकारियों के मुताबिक पिछले चार में 30 से अधिक बसों पर कार्रवाई की गयी है. वहीं, बाकी बस मालिकों को दोबारा से निर्देश भी दिया गया है कि आदेश का पालन करते हुए लंबी दूरी के बसों में दो ड्राइवर रखा जाये. इस कारण दिया गया निर्देश विभाग के मुताबिक इतनी लंबी दूरी एक चालक के भरोसे तय करना सुरक्षित नहीं है. ऐसे में ड्राइवरों की संख्या दो करना अनिवार्य किया गया है.देखा गया है कि कई बार सड़क दुर्घटनों का कारण लगातार चालकों की ड्राइविंग से भी होता है. कई बार ड्राइवर लगातार बिना शरीर को आराम दिये हुए ड्राइविंग करते है. इस कारण से दुर्घटनाएं भी होने की संभावनाएं अधिक बनी रहती है. इसे भी पढ़ें: नीतीश कैबिनेट में 19 प्रस्तावों पर लगी मुहर, राज्यकर्मियों का डीए 5% बढ़ा, देखिये पूरी लिस्ट The post दिल्ली-पंजाब सहित कई राज्यों से सीधे जुड़ेगा बिहार, 1675 नए रूटों पर चलेगी बसें, एक बस में होंगे 2 ड्राइवर, जानें वजह appeared first on Naya Vichar.

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कौन हैं नील मोहन, जिन्हें टाइम पत्रिका ने 2025 के सीईओ ऑफ द ईयर के लिए चुना?

Success Story: हिंदुस्तानीय मूल के यूट्यूब सीईओ नील मोहन का नाम एक बार फिर सुर्खियों में है. उनकी चर्चा इसलिए हो रही है, क्योंकि टाइम पत्रिका ने उन्हें 2025 का सीईओ ऑफ द ईयर चुना है. यह सम्मान सिर्फ एक पदक नहीं, बल्कि उस दूरदर्शी नेतृत्व की पहचान है, जिसने दुनिया की डिजिटल खपत की आदतें बदलकर रख दीं. उनकी शांत, सूझ-बूझ भरी और प्रभावशाली रणनीतियों ने यूट्यूब को सिर्फ एक वीडियो प्लेटफॉर्म नहीं, बल्कि ग्लोबल कल्चरल पावर में बदल दिया है. टाइम पत्रिका नील मोहन को क्यों मानती है गेमचेंजर? टाइम पत्रिका की प्रोफाइल के अनुसार, नील मोहन वह व्यक्ति हैं, जिन्होंने यूट्यूब को नई दिशा दी. पत्रिका ने यूट्यूब को एक कल्चरल डाइट बताया, जिस पर पूरी दुनिया निर्भर है. पत्रिका में कहा गया है, “मोहन किसान हैं, जो वह बोएंगे, वही दुनिया खाएगी.” यह बताती है कि यूट्यूब पर क्या पनपेगा और उसमें किस तरह का कंटेंट फलता-फूलता है. इस पर नील मोहन की रणनीति, विजन और नीतियों का गहरा प्रभाव है. नील मोहन की क्या है असली चुनौती दुनिया भर में 2 बिलियन से ज्यादा लोग हर महीने यूट्यूब का इस्तेमाल करते हैं. इतने बड़े डिजिटल इकोसिस्टम का नेतृत्व करना किसी भी सीईओ के लिए असाधारण चुनौती है. टाइम लिखती है कि नील मोहन इस विशाल प्लेटफॉर्म को बेहद शांत, संयमित और व्यावहारिक अंदाज में चलाते हैं. नील मोहन के नेतृत्व का कमाल टाइम पत्रिका के अनुसार, नील मोहन का व्यक्तित्व बेहद सहज है. वे धीरे बोलते हैं, सोच-समझकर निर्णय लेते हैं और अपने लोगों से सीधा संवाद पसंद करते हैं. उन्हें स्पोर्ट्स देखना, बेटियों के डांस परफॉर्मेंस में शामिल होना और साधारण, आरामदायक स्टाइल पसंद है. उनके अनुसार, ‘मीडिया इंडस्ट्री तेजी से बदल रही है. अगर आप खुद को नहीं बदलेंगे, तो पीछे छूट जाएंगे.’ यह सोच ही यूट्यूब को पारंपरिक वीडियो प्लेटफॉर्म से सोशल मीडिया, शॉर्ट वीडियो और लाइव कंटेंट के सबसे शक्तिशाली केंद्र में बदलने में सहायक रही. नील मोहन का शुरुआती जीवन नील मोहन का जन्म अमेरिका के इंडियाना में हुआ, लेकिन 12 वर्ष की उम्र में वे लखनऊ आ गए. उन्होंने अपने स्कूल के दिनों को याद करते हुए बताया कि संस्कृत सीखना उनके करियर का महत्वपूर्ण हिस्सा था. उन्होंने कहा, ‘संस्कृत सीखना कंप्यूटर प्रोग्रामिंग जैसा नियमों पर आधारित, तार्किक और बेहद ध्वन्यात्मक था.’ उनके व्यक्तित्व में हिंदुस्तानीय और अमेरिकी संस्कृति का मिश्रण साफ झलकता है, जिसने उन्हें वैश्विक नेतृत्व के लिए और सक्षम बनाया. नील मोहन की शिक्षा और शुरुआती करियर करीब 49 वर्षीय नील मोहन ने स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में स्नातक और स्टैनफोर्ड ग्रेजुएट स्कूल ऑफ बिजनेस से एमबीए किया. एमबीए के दौरान वे अर्जे मिलर स्कॉलर रहे. यह सम्मान सिर्फ टॉप 10% छात्रों को मिलता है. करियर की शुरुआत उन्होंने 1996 में एक्सेंचर (तब एंडरसन कंसल्टिंग) से की. इसके बाद उन्होंने नेटग्रेविटी जॉइन किया, जिसे बाद में डबलक्लिक ने खरीदा. एमबीए के बाद वे माइक्रोसॉफ्ट में कमसमय बिताकर फिर डबलक्लिक लौट आए. यहां उनकी भूमिका इतनी प्रभावशाली थी कि गूगल के 3.1 बिलियन डॉलर में डबलक्लिक अधिग्रहण में उन्होंने उल्लेखनीय योगदान दिया. गूगल में नील मोहन का प्रभाव नील मोहन का असली प्रभाव गूगल में दिखा. 2008 से 2015 तक उन्होंने कंपनी के डिस्प्ले और वीडियो एडवरटाइजिंग बिजनेस का नेतृत्व किया. उनके तहत डेवलप किए गए मेन प्रोडक्ट यूट्यूब एड प्लेटफॉर्म, गूगल डिस्प्ले नेटवर्क, एडसेंस, एडमॉब और डबलक्लिक हैं. उन्होंने इनवाइट मीडिया, एडमेल्ड और टेरासेंट जैसे अधिग्रहणों को सफल बनाकर गूगल के एड-टेक साम्राज्य को मजबूत आधार दिया. प्रतिद्वंद्वी भी चाहते थे नील मोहन को अपने साथ मिलाना नील मोहन की प्रतिभा इतनी मांग में रही कि ट्विटर ने उन्हें 2011 में टॉप प्रोडक्ट रोल ऑफर किया था. इतना ही नहीं, गूगल ने उन्हें रोकने के लिए 100 मिलियन डॉलर तक का स्टॉक ग्रांट दिया. ड्रॉपबॉक्स भी उन्हें हायर करना चाहती था, लेकिन नाकाम रही. नील मोहन की कमाई और नेट वर्थ न्यूज एक्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, नील मोहन का मासिक कमाई करीब 3.1 करोड़ रुपये आंकी गई है. यानी नील मोहन सिर्फ 1 घंटे में 1 लाख रुपये की कमाई कर लेते हैं. हालांकि, उनकी पूरी नेट वर्थ सार्वजनिक नहीं है, लेकिन माना जाता है कि उनके पास बड़ी स्टॉक होल्डिंग्स और लग्जरी एसेट्स हैं. इसे भी पढ़ें: Mutual Fund में जल्दी लगा दें पैसा, रिटेल इन्वेस्टर्स की एंट्री से बदलेगी तस्वीर विजनरी लीडर हैं नील मोहन नील मोहन की कहानी सिर्फ सफलता नहीं, बल्कि आधुनिक नेतृत्व का श्रेष्ठ उदाहरण है. लखनऊ के स्कूल से लेकर सिलिकॉन वैली के शिखर तक का उनका सफर दिखाता है कि डिजिटल युग में शांत नेतृत्व और स्पष्ट दृष्टि कितनी शक्तिशाली हो सकती है. टाइम पत्रिका का सीईओ ऑफ द ईयर का सम्मान उनके योगदान, संस्कृति-निर्माण और तकनीकी दूरदर्शिता का अंतरराष्ट्रीय प्रमाण है. इसे भी पढ़ें: बिहार के लाल का कमाल, इंस्टाग्राम पर मखाना बेचकर हर महीने करता है 3 करोड़ की कमाई The post कौन हैं नील मोहन, जिन्हें टाइम पत्रिका ने 2025 के सीईओ ऑफ द ईयर के लिए चुना? appeared first on Naya Vichar.

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RBI मैनेजर का धाकड़ अंदाज, UPSC में गाड़ा झंडा, बनीं इनकम टैक्स ऑफिसर

Priya Meena Success Story: अगर आपको कभी लगे कि मेहनत बेकार जाती है, तो प्रिया मीणा की कहानी पढ़ लेना. यह कहानी नहीं बल्कि रियल लाइफ की वो मोटिवेशन है जो किसी भी थके हुए इंसान की हिम्मत वापस ला सकती है. प्रिया ने UPSC 2024 को शानदार तरीके से क्रैक किया और IRS (इनकम टैक्स) सर्विस में जगह बना ली. लेकिन उनकी ये सफर सीधा नहीं था. यह रोलर कोस्टर से भी ज्यादा टेढ़ा, मजेदार और सीखों से भरा हुआ था. Priya Meena Success Story: पूरे 6 साल की मेहनत प्रिया मीणा ने UPSC CSE के छह अटेम्प्ट दिए. इसमें दो बार इंटरव्यू तक पहुंची लेकिन सफलता हाथ नहीं लगी. कोई और होता तो शायद हार मान लेता, लेकिन प्रिया ने नहीं. उन्होंने खुद से कहा कि एक कोशिश और कर लेते हैं, क्या पता ये ही वाला पास हो जाए और इसी सोच ने उन्हें आगे बढ़ाए रखा. IIT Delhi से की पढ़ाई प्रिया मूलरूप से राजस्थान की रहने वाली हैं. उनकी स्कूलिंग दिल्ली पब्लिक स्कूल से हुई है. इसके बाद उन्होंने IIT Delhi में एडमिशन लिया. आईआईटी दिल्ली से उन्होंने बीटेक+एमटेक की ड्यूअल डिग्री पूरी की. इसके बाद वो सिविल सर्विस की तैयारी में लग गईं. मुख्यमंत्री ने किया सम्मानित View this post on Instagram A post shared by Priya Meena (@priameena_irs) RBI Grade B की परीक्षा UPSC की तैयारियों के बीच प्रिया ने RBI Grade B एग्जाम भी दिया. पहले दो अटेम्प्ट में झटका लगा, रिजेक्ट हो गईं. पर तीसरे अटेम्प्ट में उन्होंने ऐसा कमबैक किया कि रिजल्ट देखकर खुद भी मुस्कुरा उठीं. यह जीत सिर्फ एक नौकरी की नहीं, बल्कि उम्मीद, धैर्य और हिम्मत की जीत थी. साल 2024 में प्रिया का सेलेक्शन RBI में मैनेजर पोस्ट के लिए हो गया. अप्रैल 2024 से लेकर अगस्त 2025 तक प्रिया ने आरबीआई में काम किया. UPSC में मिली सफलता प्रिया को अपने छठे प्रयास में यूपीएससी में सफलता (IRS Priya Meena Success Story) हासिल हुई. उन्होंने UPSC 2024 की परीक्षा रैंक 833 से क्रैक की. इसके बाद उनका चयन इनकम टैक्स में IRS सर्विस के लिए हो गया है. प्रिया अपनी सफलता का बड़ा हिस्सा अपने परिवार, टीचर्स और दोस्तों को देती हैं. वो कहती हैं कि इन लोगों ने उन्हें अच्छे बुरे हर फेस में संभाला. यह भी पढ़ें: कौन हैं जमुई की बेटी संस्कृति, बनीं यूपी की नई IAS, UPSC Rank 17 The post RBI मैनेजर का धाकड़ अंदाज, UPSC में गाड़ा झंडा, बनीं इनकम टैक्स ऑफिसर appeared first on Naya Vichar.

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झारखंड विधानसभा में बोले इरफान अंसारी- रांची में बनेगी बोन मेरो ट्रांसप्लांट यूनिट

Table of Contents कांग्रेस विधायक प्रदीप यादव ने स्वास्थ्य मंत्री से पूछे थे सवाल चाईबासा में 5 बच्चों के एसआईवी पॉजिटिव पाये जाने के मुद्दे पर प्रशासन गंभीर Bone Marrow Transplant Ranchi: 7 करोड़ की लागत से सदर अस्पताल में बनेगी बोनमेरो ट्रांसप्लांट यूनिट Bone Marrow Transplant Ranchi: झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने बड़ी घोषणा की है. मंगलवार को झारखंड विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान उन्होंने सदन को बताया कि राजधानी रांची में जल्द ही अस्थि मज्जा प्रतिरोपण (बीएमटी) इकाई की स्थापना की जायेगी. स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि प्रशासन राज्य के बाहर थैलेसीमिया रोगियों के बोन मेरो ट्रांसप्लांट का खर्च वहन करने पर भी विचार कर रही है. कांग्रेस विधायक प्रदीप यादव ने स्वास्थ्य मंत्री से पूछे थे सवाल कांग्रेस विधायक प्रदीप यादव की ओर से राज्य में थैलेसीमिया रोगियों की स्थिति पर ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के दौरान पूछे गये एक प्रश्न के उत्तर में स्वास्थ्य मंत्री ने यह बात कही. प्रदीप यादव ने स्वास्थ्य मंत्री से पूछा था कि क्या प्रशासन के पास थैलेसीमिया रोगियों का कोई आंकड़ा है. क्या वह अस्थि मज्जा प्रतिरोपण का खर्च वहन करने की योजना बना रही है, जो उपचार के लिए महत्वपूर्ण है. चाईबासा में 5 बच्चों के एसआईवी पॉजिटिव पाये जाने के मुद्दे पर प्रशासन गंभीर प्रदीप यादव के इस सवाल के जवाब में स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने कहा कि झारखंड की हेमंत सोरेन प्रशासन थैलेसीमिया रोगियों का आंकड़ा संकलित कर रही है. यह कार्य एक महीने में पूरा हो जायेगा. उन्होंने कहा कि चाईबासा में रक्त चढ़ाने के बाद थैलेसीमिया से पीड़ित 5 बच्चों के एचआईवी पॉजिटिव पाये जाने के मुद्दे पर प्रशासन गंभीर है. झारखंड की ताजा समाचारें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें Bone Marrow Transplant Ranchi: 7 करोड़ की लागत से सदर अस्पताल में बनेगी बोनमेरो ट्रांसप्लांट यूनिट झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि प्रदेश में अस्थि मज्जा प्रतिरोपण इकाई नहीं है. रांची के सदर अस्पताल में 7 करोड़ रुपए की लागत से बोन मेरो ट्रांसप्लांट यूनिट स्थापित करने का निर्णय लिया गया है. प्रशासन राज्य के बाहर थैलेसीमिया रोगियों के अस्थि मज्जा प्रतिरोपण की लागत वहन करने पर भी विचार कर रही है, जो लगभग 14 लाख रुपए है. इसे भी पढ़ें मीडिया पर बरसे मंत्री इरफान अंसारी, बोले- मेरी बातों को तोड़ा-मरोड़ा गया, SIR पर कह दी बड़ी बात झारखंड विधानसभा के अंदर हेमंत सोरेन कैबिनेट के दो मंत्री आपस में भिड़े, जानें पूरा मामला रूफटॉप व छतों पर संचालित बार-रेस्टोरेंट की होगी सख्त जांच : डॉ इरफान झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री डॉ इरफान अंसारी की बड़ी सौगात, ग्रामीणों का अब ब्लॉक जाना होगा आसान The post झारखंड विधानसभा में बोले इरफान अंसारी- रांची में बनेगी बोन मेरो ट्रांसप्लांट यूनिट appeared first on Naya Vichar.

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Patna Book Fair में ओसवाल बुक्स ने बच्चों से लेकर युवाओं के लिए लांच की किताबों की सीरीज

Patna Book Fair: पटना पुस्तक मेला में ओसवाल बुक्स ने सोमवार को अपनी पांच नई किताबें पाठकों को समर्पित की. इसमें सीबीएसई एक्सीलेंस 95 प्लस और एसएससी चैप्टर वाइज इंग्लिश प्रमुख है. इसके अलावा आईसीएसई 40 कंबाइंड सेंपल पेपर्स, सीबीएसई सेंपल क्वेश्न पेपर्स और एनसीईआरटी जेईई मेंन फ्लेक्स शामिल है.  ओसवाल बुक्स को मिला प्रोडक्ट ऑफ द ईयर का अवार्ड:  रोहित बघेल  पत्रकारों से बातचीत करते हुए ओसवाल बुक्स के रोहित बघेल ने बताया कि हमलोग मुख्यत: छोटे शिशु, स्कूली शिशु और कॉलेज-यूनिवर्सिटी के विद्यार्थियों के लिए विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में सहायक किताबें लाते हैं. इस बार पटना पुस्तक मेला में हम लोग पांच नई किताबें बच्चों व विद्यार्थियों के लिए लाए हैं. हमारे पास एक साल तक के बच्चों के लिए किताबें हैं. एक साल से पांच वर्ष के बच्चों में क्रिएटिविटी बढ़ाने और उन्हें संस्कृति व समाज से जोड़ने वाली लिटिल लिजेंड्स या लिल लेजेंड्स की किताबें भी काफी पसंद की जा रही हैं. इन किताबों को उपभोक्त सर्वेक्षण के द्वारा ‘प्रोडक्ट ऑफ द ईयर’ का अवार्ड मिला है. बिहार की ताजा समाचारों के लिए यहां क्लिक करें कार्ड बोर्ड से बनी हैं किताबें  ये किताब कार्ड बोर्ड से बनी है. ऐसे में बच्चों को इसे फाड़ना या नुकसान पहुंचाना मुश्किल होगा. इन किताबों में सुंदर ग्राफिक्स के माध्यम से हिंदुस्तानीय संस्कृति, परंपरा और समाज से जोड़ने वाली छोटी – छोटी प्रेरणादायी कहानियां हैं. शिशु और उनके माता – पिता इसे काफी पसंद कर रहे हैं. इसमें क्रिएटिव एक्टिविटी भी शामिल है जिससे बच्चों की बौद्धिकता व समझ बढ़ती है. इसके अलावा स्कूली शिशुं ओलंपियाड की किताबें भी काफी पंसद कर रहे हैं. किताब लांचिंग की मौके पर धर्मेंद्र दीक्षित, निखिल कुमार, लोकेश आदि मौजूद थे. इसे भी पढ़ें: UPA सत्ता में रही तो EVM ठीक, हम आए तो हैक, BJP को संसद में मिला JDU का साथ The post Patna Book Fair में ओसवाल बुक्स ने बच्चों से लेकर युवाओं के लिए लांच की किताबों की सीरीज appeared first on Naya Vichar.

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Lava Play Max: देसी कंपनी लेकर आई वेपर कूलिंग चेंबर वाला फोन, मिल रहा FHD+ डिस्‍प्‍ले और 5,000mAh बैटरी

Lava Play Max: देसी कंपनी Lava ने अपने Play सीरीज को इंडिया में Lava Play Max के लॉन्च के साथ बढ़ाया है. यह डिवाइस अच्छा परफॉर्मेंस कम कीमत में देने पर फोकस करता है. कंपनी का दावा है कि Play Max को खासकर युवा यूजर्स की जरूरतों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है. Lava Play Max में लंबे समय तक परफॉर्मेंस के लिए सेगमेंट-फर्स्ट वेपर कूलिंग चेंबर दिया गया है. आइए जानते हैं Lava के इस लेटेस्ट हैंडसेट को थोड़ा डिटेल में. Lava Play Max डिजाइन Lava Play Max दो रंगों में आया है. पहला Deccan Black और दूसरा Himalayan White. ब्लैक वेरिएंट में फ्यूचरिस्टिक डिजाइन एलिमेंट्स हैं जो इसे गेमिंग लुक देते हैं, जबकि व्हाइट वेरिएंट थोड़ा सादा और क्लासिक लगता है. इसमें कैमरा सेटअप वर्टिकल लेआउट में दिया गया है, जिसमें अलग-अलग कटआउट हैं. Lava Play Max परफॉर्मेंस Play Max में MediaTek Dimensity 7300 (4nm) चिपसेट है, जो LPDDR4X RAM और UFS 3.1 स्टोरेज के साथ आता है. यह कॉम्बिनेशन फास्ट मल्टीटास्किंग, एप्लिकेशन तेजी से लोड होने और बैटरी की एफिशिएंसी के लिए डिजाइन किया गया है. डिवाइस में VC कूलिंग सिस्टम भी है, जो लंबी गेमिंग सेशन्स (जैसे COD Mobile, Free Fire और BGMI) के दौरान हीट मैनेजमेंट का काम करता है. Lava Play Max डिस्प्ले और कैमरा डिस्प्ले की बात करें तो Lava Play Max में 6.72-इंच का FHD+ पैनल है, जो 120Hz रिफ्रेश रेट के साथ आता है. इससे स्क्रीन पर स्क्रॉलिंग स्मूद होती है और देखने का एक्सपीरियंस बढ़िया रहता है. कैमरा सेटअप की बात करें तो इसमें 50MP का AI-सपोर्टेड मेन कैमरा है, जिसमें Electronic Image Stabilisation (EIS) भी शामिल है. सेल्फी के लिए इसमें 8MP का फ्रंट कैमरा दिया गया है. रियर कैमरा 4K वीडियो 30fps पर रिकॉर्ड कर सकता है. Lava Play Max बैटरी और मजबूती Lava Play Max में 5,000mAh की बड़ी बैटरी है, जो 33W फास्ट चार्जिंग सपोर्ट करती है. फोन को धूल और पानी से बचाने के लिए इसमें IP54 रेटिंग दी गई है. Play Max Android 15 पर चलता है और Lava का दावा है कि इसमें कोई ब्लोटवेयर, एड्स या अनचाही नोटिफिकेशन नहीं हैं, जिससे यूजर को एक क्लीन और smooth एक्सपीरियंस मिलता है. Lava Play Max की कीमत Lava Play Max की शुरुआती कीमत 6GB/128GB वेरिएंट के लिए ₹12,999 है. 8GB/128GB मॉडल ₹14,999 में उपलब्ध है. यह फोन इस महीने से सेल में जाएगा. Lava पूरे हिंदुस्तान में फ्री होम सर्विस भी ऑफर कर रहा है. यह भी पढ़ें: 6,000mAh बैटरी के साथ बजट में लॉन्च हुआ Poco C85, मिलेगा MediaTek प्रोसेसर और 50MP कैमरा The post Lava Play Max: देसी कंपनी लेकर आई वेपर कूलिंग चेंबर वाला फोन, मिल रहा FHD+ डिस्‍प्‍ले और 5,000mAh बैटरी appeared first on Naya Vichar.

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रूसी महाबली सैन्य विमान हुआ क्रैश, 7 लोग थे सवार, 41 विश्व रिकॉर्ड और 50 साल से है आसमान का बाजीगर

Russia Military Plane Crash: रूस के रक्षा मंत्रालय के स्वामित्व वाला एक An-22 सैन्य परिवहन विमान सोमवार को इवानोवो क्षेत्र में दुर्घटनाग्रस्त हो गया. इवानोवो क्षेत्र राष्ट्रीय राजधानी मॉस्को के उत्तर-पूर्व में स्थित में स्थित है. इसमें सवार सभी सात क्रू सदस्यों के मारे जाने की आशंका है. रूसी राज्य मीडिया TASS के अनुसार विमान फुर्मानोव्स्की जिले में ऊवोद जलाशय के पास गिरा. अधिकारियों के अनुसार, जब हादसा हुआ तो यह एक रूटीन पोस्ट-रिपेयर टेस्ट फ्लाइट पर था. दुर्घटना के तुरंत बाद आपातकालीन टीमें मौके पर पहुंचीं और पानी में मलबे के हिस्से बरामद किए. रूसी मीडिया ने अब तक किसी भी जीवित व्यक्ति की पुष्टि नहीं की है. An-22, जिसे सोवियत नाम Antey से भी जाना जाता है, विमानन इतिहास में एक विशिष्ट स्थान रखता है. यह विमान 1960 के दशक में कीव में विकसित किया गया था. यह दुनिया का पहला चौड़े ढांचे वाला सैन्य परिवहन विमान बना. यह अब तक का सबसे बड़ा टर्बोप्रॉप कार्गो विमान भी है. इसकी पहली उड़ान 27 फरवरी 1965 को हुई थी और 1969 में सेवा में शामिल किया गया. यह विमान 80 टन तक का कार्गो ले जा सकता था और लगभग 250 टन के अधिकतम टेक-ऑफ वजन का सक्षम था. इसे चार NK-12MA इंजनों से शक्ति मिलती थी, जिनमें से प्रत्येक लगभग 15,000 हॉर्सपावर देता था. एंटोनोव की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, An-22 की उड़ान क्षमता अत्यधिक मजबूत है और यह कच्चे व असमान रनवे से भी उड़ान भर सकता है. इस कारण सोवियत संघ के लिए विशाल आकार के उपकरण और माल दूरस्थ इलाकों तक पहुँचाना आसान हो गया था. वेबसाइट के मुताबिक, 1965 से 1976 के बीच कुल 66 विमान बनाए गए. 1980 के बाद, Antei का उपयोग AN-124 Ruslan और AN-225 Mriya के निर्माण के लिए बड़े आकार के पुर्जे ढोने में किया जाता था. An-22 विमान की विशेषताएँ विशेषता मान लंबाई 57.84 मीटर ऊंचाई 12.54 मीटर विंगस्पैन 64.40 मीटर विंग एरिया 345 वर्ग मीटर क्रूज़िंग स्पीड 580 किमी प्रति घंटा ऑपरेशनल रेंज 5,225 किमी अधिकतम उड़ान ऊँचाई 9,100 मीटर 41 विश्व रिकॉर्ड बना चुका है An-22 इस विमान ने अपना अंतिम विश्व रिकॉर्ड 17 अक्टूबर 1967 को बनाया जब An-22 ने 100,444.6 किलोग्राम वजन उठाकर 7,848 मीटर की ऊँचाई तक उड़ान भरी. आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, An-22 विमान मॉडल अब तक गति और लदान क्षमता से जुड़े 41 विश्व रिकॉर्ड बना चुका है. एंटोनोव विमान निर्माता कंपनी की स्थापना 1946 में सोवियत नायक ओलेग कोन्स्टांटिनोविच एंटोनोव के नाम पर की गई थी. रूसी सेना में 50 साल से है शामिल यह विमान भारी सैन्य हथियार, बड़े आकार के उपकरण और एयरबोर्न सैनिकों को लंबी दूरी तक ले जाने के लिए बनाया गया था. इसके डिजाइन ने आगे चलकर An-124 Ruslan और रिकॉर्ड बनाने वाले An-225 Mriya जैसे बड़े परिवहन विमानों के विकास का मार्ग प्रशस्त किया. हालांकि, अधिकांश बचे हुए An-22 विमान अब 50 वर्ष से भी अधिक पुराने हो चुके हैं, जिससे उनकी उड़ान सुरक्षा और आधुनिकीकरण को लेकर सवाल उठते रहे हैं. रूसी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, दुर्घटना में शामिल विमान की उम्र लगभग 49 वर्ष थी. बीते दिनों से हो रहे कई प्लेन क्रैश इससे पहले, सोवियत डिजाइन वाले एक An-24 विमान जिसमें 49 लोग सवार थे, रूस के सुदूर पूर्वी इलाके में अमूर क्षेत्र के टिंडा शहर से लगभग 15 किलोमीटर दूर दुर्घटनाग्रस्त हो गया था. वहीं 4 सिंतबर को रियाजान क्षेत्र में X-32 बेकास विमान हादसे का शिकार हो गया था. वहीं नवंबर 2025 में एयरफोर्स का Su-30 विमान करेलिया के जंगल वाले इलाके में गिर गया था, जिसमें दो पायलटों की मौत हो गई थी. ये भी पढ़ें:- इमरान खान को निपटाना शुरू, CDF मुनीर का मास्टरस्ट्रोक- केस देशद्रोह, चीन, अमेरिका और सऊदी से कसा फंदा Cheers! ब्रह्मांड का हसीन मयखाना, ओपन बार में है इतना अल्कोहल कि 21 लाख साल तक पिएंगे दुनिया वाले पाकिस्तानी गृह मंत्री की लंदन में भारी बेइज्जती, गेट पर रोककर हुई कार की तलाशी, लोग बोले- बम या ड्रग्स तो… The post रूसी महाबली सैन्य विमान हुआ क्रैश, 7 लोग थे सवार, 41 विश्व रिकॉर्ड और 50 साल से है आसमान का बाजीगर appeared first on Naya Vichar.

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झारखंड को जल्द मिलेगा पहला गिद्ध संरक्षण एवं प्रजनन केंद्र, 2013 में तैयार हुआ था इन्फ्रास्ट्रक्चर

Table of Contents 2013 में 41 लाख की लागत से तैयार हुआ था इन्फ्रास्ट्रक्चर Jharkhand First Vulture Conservation and Breeding Centre: बीएनएचएस देगा तकनीकी सहायता देश में गिद्धों की 9 प्रजातियां, झारखंड में मिलती हैं 6 झारखंड में मौजूद हैं 400 से 450 गिद्ध Jharkhand First Vulture Conservation and Breeding Centre: हिंदुस्तान में तेजी से घट रही गिद्धों की संख्या को कम करने के लिए झारखंड में जल्द ही गिद्ध संरक्षण एवं प्रजनन केंद्र की शुरुआत होगी. रांची में यह अपनी तरह का पहला गिद्ध संरक्षण एवं प्रजनन केंद्र होगा. राज्य के एक अधिकारी ने मंगलवार को यह जानकारी दी. इसके लिए बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी (बीएनएचएस) के साथ झारखंड प्रशासन ने तकनीकी सहायता के लिए एक समझौता (एमओयू) करने की मंजूरी वन विभाग को दे दी है. 2013 में 41 लाख की लागत से तैयार हुआ था इन्फ्रास्ट्रक्चर मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) एसआर नटेश ने कहा है कि अगले वर्ष तक इस केंद्र को चालू करने का प्रयास चल रहा है. उन्होंने बताया कि केंद्र प्रशासन ने पक्षियों की घटती संख्या को बढ़ाने के लिए वर्ष 2009 में झारखंड की राजधानी रांची से लगभग 36 किलोमीटर दूर मुटा में राज्य के पहले गिद्ध संरक्षण और प्रजनन केंद्र को मंजूरी दी थी. वर्ष 2013 में 41 लाख रुपए की लागत से इसके लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर विकसित किया गया था. Jharkhand First Vulture Conservation and Breeding Centre: बीएनएचएस देगा तकनीकी सहायता हालांकि, नौकरशाही संबंधी बाधाओं और केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय से अनुमति न मिलने जैसे विभिन्न मुद्दों के कारण यह केंद्र शुरू नहीं हो सका था. नटेश ने कहा कि बीएनएचएस तकनीकी सहायता देगा और केंद्र की निगरानी करेगा. उन्होंने कहा कि गिद्ध, वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की अनुसूची (1) के तहत संरक्षित पक्षी हैं. झारखंड की ताजा समाचारें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें देश में गिद्धों की 9 प्रजातियां, झारखंड में मिलती हैं 6 वहीं, बीएनएचएस झारखंड के समन्वयक सत्य प्रकाश ने बताया कि देश में पाये जाने वाले गिद्धों की 9 प्रजातियों में से 6 झारखंड में पायी जाती हैं. उन्होंने कहा कि कभी पूरे हिंदुस्तान में बहुतायत में पाये जाने वाले गिद्ध पशु चिकित्सा दवा ‘डाइक्लोफेनैक’ से संबंधित विषाक्तता के कारण लगभग गायब हो गये हैं. झारखंड में मौजूद हैं 400 से 450 गिद्ध सत्य प्रकाश ने बताया कि हाल के रिसर्च में बताया गया है कि झारखंड में 400 से 450 गिद्ध हैं. संरक्षण प्रयासों को बढ़ावा देने के लिए कोडरमा जिले में एक ‘गिद्ध रेस्तरां’ स्थापित किया गया है. तिलैया नगर परिषद के अंतर्गत गुमो में एक हेक्टेयर क्षेत्र में स्थित यह सुविधा गिद्धों के लिए ‘डाइक्लोफेनैक-मुक्त पशु शव’ उपलब्ध कराने के लिए नामित भोजन स्थल के रूप में काम कर रही है. इसे भी पढ़ें सिकिदिरी : गिद्ध लाये नहीं गये, केज हो चुके जर्जर तिलैया में एक साथ दिखे विलुप्तप्राय गिद्ध, लॉकडाउन के बाद बदले परिवेश के अच्छे संकेत मिलने की संभावना The post झारखंड को जल्द मिलेगा पहला गिद्ध संरक्षण एवं प्रजनन केंद्र, 2013 में तैयार हुआ था इन्फ्रास्ट्रक्चर appeared first on Naya Vichar.

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Dhurandhar में खूंखार ‘रहमान डकैत’ की ऑन-स्क्रीन पत्नी बनी सौम्या टंडन ने अक्षय खन्ना संग काम करने पर तोड़ी चुप्पी, बोलीं- वह बहुत ही अंडरप्ले करते हैं

Dhurandhar: टीवी शो ‘भाभीजी घर पर हैं’ में अनीता भाभी का रोल निभाने के लिए मशहूर एक्ट्रेस सौम्या टंडन अब बॉलीवुड में धमाल मचा रही हैं. वह आदित्य धर की लेटेस्ट फिल्म ‘धुरंधर’ में अक्षय खन्ना की पत्नी का रोल निभा रही हैं. अपने ज्यादातर सीन उन्होंने अक्षय खन्ना और रणवीर सिंह के साथ शूट किए हैं. इस बीच News18 Showsha के साथ बातचीत में सौम्या ने अपने सुपरस्टार को-स्टार्स अक्षय खन्ना और रणवीर सिंह के साथ काम करने के अपने अनुभव के बारे में खुलकर बात की. आइए बताते हैं एक्ट्रेस ने क्या कुछ कहा. अक्षय खन्ना के साथ काम करना था यादगार अनुभव सौम्या कहती हैं, “मैं अक्षय के काम की बहुत बड़ी फैन हूं. वह स्क्रीन पर बहुत आकर्षक लगते हैं. उन्हें देखना एक ट्रीट है क्योंकि वह बहुत ही अंडरप्ले करते हैं. उनके साथ काम करना सच में शानदार अनुभव था. और उनके पत्नी के रोल के लिए कास्ट होना सोने पे सुहागा था. उनके साथ सभी सीन करना बहुत खास अनुभव रहा क्योंकि मैं उनकी बहुत इज्जत करती हूं.” रणवीर सिंह के काम की भी की तारीफ सौम्या आगे बताती हैं, “रणवीर हमारे सबसे पावरफुल एक्टर्स में से एक हैं. यह उनके लिए बहुत बड़ी फिल्म है और उन्होंने इसमें अपना 100% दिया है. सेट पर सबने देखा कि शूट काफी चुनौतीपूर्ण था और सभी ने अपने काम में पूरी मेहनत की। यह उनके सभी प्यार और मेहनत के हकदार हैं.” सौम्या के लिए नया और इंटेंस अनुभव सौम्या ने कहा, “यह फिल्म एक सच्ची घटना से इंस्पायर्ड है और बहुत इंटेंस थी. मैंने पहले कभी इतना इंटेंस काम नहीं किया था. आमतौर पर मेरे टीवी शो या होस्टिंग के दौरान सब कुछ मजेदार और हल्का होता है, इसलिए यह मेरे लिए बिल्कुल नया अनुभव था.” यह भी पढ़ें- Dhurandhar Box Office Collection Day 5: रणवीर सिंह की फिल्म ने 5वें दिन बनाया इतिहास, अक्षय कुमार की दो फिल्मों को पीछे छोड़ते हुए कमाए करोड़ों The post Dhurandhar में खूंखार ‘रहमान डकैत’ की ऑन-स्क्रीन पत्नी बनी सौम्या टंडन ने अक्षय खन्ना संग काम करने पर तोड़ी चुप्पी, बोलीं- वह बहुत ही अंडरप्ले करते हैं appeared first on Naya Vichar.

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आसिम मुनीर के CDF बनते ही हुआ स्नाइपर हमला, बलूचिस्तान में पाक आर्मी के 4 सैनिकों की मौत

Pakistan Balochistan Sniper Attack: बलूच सेना ने एक बार फिर पाकिस्तान में हुए हमले पर अपनी जिम्मेदारी ली है. द बलूचिस्तान पोस्ट (TBP) की एक रिपोर्ट के मुताबिक बलूच आर्मी ने बलूचिस्तान में अलग-अलग जगहों पर तैनात पाकिस्तानी सुरक्षाकर्मियों और कथित तौर पर प्रशासन के समर्थन वाले हथियारबंद समूह पर हुए हमलों की जिम्मेदारी ली है. बी.एल.एफ के प्रवक्ता ग्वाहरम बलूच ने कहा कि इस ग्रूप के फाइटर्स ने पंजगुर के अवारन, झाओ और पोराम इलाके में एक साथ हमले किए. इस ऑपरेशन में दो मिलिट्री मेंबर और डेथ स्क्वॉड के दो कथित तौर पर हिस्सा लेने वाले मारे गए, जबकि कई अन्य लोग घायल भी हुए.  BLF ने बताया कि 6 दिसंबर को उसके फाइटर रूटीन पेट्रोलिंग पर थे जब हथियारबंद लोगों ने उनका पीछा किया जिन्हें इस समूह ने राज्य समर्थित मिलिशिया बताया. मिलिशिया, आम नागरिकों का एक समूह है जिन्हें मिलिट्री ट्रेनिंग दी जाती है. इसके बाद BLF ने दावा किया कि अपने बचाव में पीछा कर रहे वाहन पर उन्होंने लगातार हमला किया जिसमें एक वाहन क्षतिग्रस्त हो गया और उसमें बैठे दो लोग मारे गए. उन्होंने कहा कि अन्य हथियारबंद लोग मौके से भाग गए और बाद में एक सैन्य गुट शवों और क्षतिग्रस्त वाहन को हटाने के लिए वहां पहुंचा.  इसके अलावा BLF ने दावा किया कि 7 दिसंबर को उसके लड़ाकों ने अवारन के तीरताज जाक पर्वतिय क्षेत्रों में फ्रंटियर कॉर्प्स (फ्रंटियर कोर के सैनिक) की चौकी पर स्नाइपर हमला किया जिसमें एक सैनिक की मौत हो गई. समूह ने आरोप लगाया कि हमले के बाद सुरक्षाबलों ने क्वाडकॉप्टर ड्रोन का इस्तेमाल करके हमलावरों पर जवाबी कार्रवाई करने की कोशिश की जिसे समूह ने मार गिराया. उसी दिन एक और घटना में BLF के फाइटर्स ने झाओ की डोलिजी चौकी में एक और स्नाइपर हमला किया. यहां भी एक और सैनिक की मौत हो गई, जिसके बाद पाकिस्तानी सुरक्षाबलों ने आसपास के क्षेत्र में मोर्टार से जवाबी कार्रवाई की. द बलूचिस्तान पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, बीते 1 दिसंबर को बीएलएफ ने साजिद बलूच, जिन्हें काका रहमत के नाम से भी जाना जाता है उन्हें श्रद्धांजलि दी. बलूच आर्मी के अनुसार साजिद को संगठनात्मक कार्यों का पालने करते समय किसी जहरीले कीड़े के काटने से उसकी मृत्यु हो गई. इस समूह से साजिद साल 2013 से ही जुड़े हुए थे और साथ मिलकर कई अभियानों पर काम भी किया था.   यह भी पढ़ें: इमरान खान को निपटाना शुरू, CDF मुनीर का मास्टरस्ट्रोक- केस देशद्रोह, चीन, अमेरिका और सऊदी से कसा फंदा यह भी पढ़ें: CDF बनते ही आसिम मुनीर की हिंदुस्तान को धमकी, कहा- भ्रम में न रहें… बहुत कड़ा जवाब देंगे, तालिबान को लेकर कही ये बात The post आसिम मुनीर के CDF बनते ही हुआ स्नाइपर हमला, बलूचिस्तान में पाक आर्मी के 4 सैनिकों की मौत appeared first on Naya Vichar.

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