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December 19, 2025

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अमेरिका में परमाणु वैज्ञानिक को घर में घुसकर मारी गोली, लोगों में पैदा हुआ शक, इन पर घुमा रहे सुई

US Nuclear Scientist MIT Professor shot at home: अमेरिकी सुरक्षा महकमों में हड़कंप मचा हुआ है. वजह है US के प्रमुख न्यूक्लियर फ्यूजन वैज्ञानिक और एमआईटी के प्लाज्मा साइंस एंड फ्यूजन सेंटर के डायरेक्टर नूनो लौरेइरो (Nuno Loureiro) की मौत. 47 वर्षीय लौरेइरो की 15 दिसंबर 2025 को मैसाचुसेट्स के ब्रुकलाइन स्थित उनके घर के अंदर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. पुलिस ने उनकी मौत को हत्या करार दिया है और कहा है कि जांच जारी है, लेकिन अब तक न तो किसी संदिग्ध की पहचान की गई है और न ही किसी मकसद का सार्वजनिक रूप से खुलासा किया गया है. लौरेइरो की मौत ने वैश्विक वैज्ञानिक समुदाय को झकझोर कर रख दिया है. उनके कत्ल के संभावित कारणों को लेकर ऑनलाइन अटकलों की बाढ़ आ गई है. द बॉस्टन ग्लोब की रिपोर्ट के मुताबिक, लौरेइरो की पड़ोसी लुईस कोहेन ने सोमवार रात करीब 8:30 बजे गोलियों की आवाज सुनी, जब वह हनुक्का मेनोराह जला रही थीं. तीन मंजिला अपार्टमेंट बिल्डिंग में गोलीबारी की सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और लौरेइरो को बोस्टन के एक अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी मौत हो गई. पुलिस ने पुष्टि की है कि लौरेइरो की मौत गोली लगने से हुई और मामले की जांच हत्या के रूप में की जा रही है. अब तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है और पुलिस ने संभावित संदिग्धों या मकसद से जुड़ी कोई जानकारी साझा नहीं की है. जांच एजेंसियों ने लोगों से संयम बरतने की अपील की है और बिना पुख्ता सबूत के निष्कर्ष निकालने से चेताया है.  नूनो लौरेइरो कौन थे डॉ. नूनो लौरेइरो का जन्म और पालन-पोषण मध्य पुर्तगाल के वीजेउ (Viseu) में हुआ था. उन्होंने लिस्बन स्थित इंस्टीट्यूटो सुपीरियर टेक्निको से भौतिकी में स्नातक की पढ़ाई की और 2005 में इम्पीरियल कॉलेज लंदन से डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की. इसके बाद उन्होंने लिस्बन में परमाणु संलयन (न्यूक्लियर फ्यूजन) के क्षेत्र में शोधकर्ता के रूप में काम किया. लौरेइरो की मौत को विज्ञान और शिक्षा के क्षेत्र के लिए एक बड़ी क्षति के रूप में देखा जा रहा है. छात्र और सहकर्मी उन्हें उनकी उदारता, मार्गदर्शन और जटिल भौतिकी को सरल तरीके से समझाने की क्षमता के लिए याद कर रहे हैं. वे ऐसे आदर्श थे, जिन्होंने यह दिखाया कि सामान्य कक्षाओं से निकलकर वैश्विक शोध के शीर्ष स्तर तक पहुँचना संभव है. द न्यूयॉर्क टाइम्स (NYT) के अनुसार, न्यू जर्सी के प्रिंसटन प्लाज्मा फिजिक्स लेबोरेटरी और ब्रिटेन की राष्ट्रीय फ्यूजन अनुसंधान प्रयोगशाला, कुल्हम सेंटर फॉर फ्यूजन एनर्जी में पोस्टडॉक्टोरल कार्य पूरा करने के बाद वह पुर्तगाल लौटे. वहां उन्होंने इंस्टीट्यूटो सुपीरियर टेक्निको के संस्थान में प्लाज्मा और परमाणु संलयन के लिए प्रमुख अन्वेषक (प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर) के रूप में काम किया. डॉ. लौरेइरो 2016 में MIT के फैकल्टी में शामिल हुए. 2022 में उन्हें प्लाज्मा साइंस एंड फ्यूजन सेंटर का उप-निदेशक नियुक्त किया गया.  लौरेइरो एक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित प्लाज्मा भौतिक विज्ञानी थे. उन्होंने एमआईटी में 10 साल से भी अधिक समय तक परमाणु संलयन से जुड़ी सबसे कठिन समस्याओं पर काम किया. प्लाज्मा साइंस एंड फ्यूजन सेंटर के निदेशक के रूप में उन्होंने प्लाज्मा में टर्बुलेंस और मैग्नेटिक रिकनेक्शन जैसे विषयों पर शोध का नेतृत्व किया, जो फ्यूजन रिएक्टरों को स्थिर और प्रभावी बनाने की प्रमुख चुनौतियाँ हैं. उनके साथी उन्हें गहरी सैद्धांतिक समझ और उत्कृष्ट शिक्षण क्षमता का दुर्लभ संयोग मानते थे. वैज्ञानिक की मौत के बाद ऑनलाइन अटकलों की लहर पुर्तगाल मूल के नूनो लौरेइरो की मौत की समाचार सामने आते ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर अटकलों और दावों की भरमार हो गई. आधिकारिक जानकारी के अभाव में सोशल मीडिया पर तेजी से तरह-तरह के सिद्धांत सामने आने लगे हैं, जिनमें उनकी मौत को परमाणु संलयन ऊर्जा की वैश्विक दौड़ से जोड़कर देखा जा रहा है. कुछ यूजर्स ने उन्हें फ्यूजन वॉर्स का पहला शिकार बताया और दावा किया कि परमाणु संलयन पर उनका काम स्थापित ऊर्जा उद्योगों, खासकर जीवाश्म ईंधन कंपनियों के लिए खतरा बन रहा था, क्योंकि इससे स्वच्छ और दीर्घकालिक ऊर्जा समाधान का रास्ता तेजी से खुल सकता था. कुछ लोगों ने कहा कि बड़े पैमाने पर फ्यूजन तकनीक के विकसित होने से पवन और सौर ऊर्जा में किए गए मौजूदा निवेश मॉडल भी प्रभावित हो सकते हैं. हालांकि अटकलों में जियोपॉलिटिक्स की भी महक आ रही है. सोशल मीडिया पर कहा गया कि अगली पीढ़ी की ऊर्जा तकनीकों, खासकर परमाणु संलयन की वैश्विक दौड़ में शामिल विदेशी प्रशासनें लौरेइरो के शोध को रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मान सकती थीं. फ्यूजन को केवल वैज्ञानिक लक्ष्य नहीं, बल्कि भविष्य की आर्थिक और भू-नेतृत्वक शक्ति के स्रोत के रूप में पेश किया गया.  कुछ पोस्ट्स में तो राज्य-स्तरीय हस्तक्षेप या इंडस्ट्रियल जासूसी तक के आरोप लगाए गए. कुछ वायरल पोस्ट्स में यह भी दावा किया गया कि लौरेइरो किसी बड़ी वैज्ञानिक सफलता के बेहद करीब थे, जिससे फ्यूजन ऊर्जा की व्यावसायिक उपयोगिता तेजी से बढ़ सकती थी. हालांकि, ये सभी अटकलें ही हैं, क्योंकि अधिकारियों ने बार-बार स्पष्ट किया है कि लौरेइरो की हत्या का उनके शोध, उद्योग हितों या भू-नेतृत्वक प्रतिस्पर्धा से जुड़े होने का कोई सबूत नहीं है. एजेंसियों ने न तो किसी मकसद की पुष्टि की है, न ही किसी संदिग्ध का नाम बताया है और न ही यह संकेत दिया है कि उनकी पेशेवर गतिविधियों का इस हत्या से कोई संबंध था.  >guy comes up with plan for clean energy that would make it easily attainable for all>gets killed or dies under mysterious circumstances I kind of hate how common this precise scenario is. https://t.co/2jc5RhwpFh — Doc Strangelove (@DocStrangelove2) December 18, 2025 हिंदुस्तान भी झेल चुका है वैज्ञानिकों को खोने का दंश हिंदुस्तान पिछले कई सालों में अपने ढेर सारे परमाणु वैज्ञानिकों को खो चुका है. 2015 में आई एनडीटीवी की एक रिपोर्ट के मुताबिक उस साल से पहले के बीते चार सालों (2009-2013) में हिंदुस्तान के 11 वैज्ञानिकों की मौत हुई, जो किसी न किसी रूप में न्यूक्लियर शोध से जुड़े हुए थे. इनमें से 8 BARC से जुडे़ हुए थे, जो किसी बम विस्फोट या समुद्र में डूब कर मर गए. हिंदुस्तान के परमाणु विज्ञान के पिता डॉ होमी जहांगीर भाभा की मृत्यु पर भी लोगों

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Bhojpuri Song: खेसारी लाल यादव के ‘गजब तोहार नैना’ में सोना पांडे की अदाओं ने फैंस को बनाया दीवाना, देखें VIDEO

Bhojpuri Song: भोजपुरी म्यूजिक इंडस्ट्री के सबसे बड़े सितारों में गिने जाने वाले खेसारी लाल यादव एक बार फिर अपने पुराने रोमांटिक गाने को लेकर चर्चा में हैं. 7 अक्टूबर को रिलीज हुआ उनका यह गाना ‘गजब तोहार नैना’ यूट्यूब पर आते ही दर्शकों के बीच वायरल हो गया है. यह नया गाना प्यार और रोमांस से भरपूर है. रिलीज के महज कुछ ही घंटों में इस गाने को हजारों बार देखा जा चुका था. समाचार लिखे जाने तक यह गाना 10 मिलियन से ज्यादा व्यूज हासिल कर चुका है और यह आंकड़ा तेजी से बढ़ता ही जा रहा है. सोना पांडे के साथ दिखी शानदार केमिस्ट्री ‘गजब तोहार नैना’ में खेसारी लाल यादव के साथ एक्ट्रेस सोना पांडे नजर आ रही हैं. दोनों की जोड़ी स्क्रीन पर काफी शानदार लगती है. सोना पांडे की अदाएं और एक्सप्रेशंस गाने को और भी खास बना देते हैं, वहीं खेसारी का रोमांटिक अंदाज फैंस को खूब पसंद आ रहा है. गाने में दोनों के बीच की केमिस्ट्री देखकर दर्शक बार-बार इसे देखने पर मजबूर हो रहे हैं. इस गाने को खेसारी लाल यादव और भोजपुरी की पॉपुलर सिंगर शिल्पी राज ने मिलकर गाया है. दोनों की आवाज का मेल गाने में जान डाल देता है. गाने के बोल टुनटुन यादव ने लिखे हैं, जो सीधे दिल को छूते हैं. वहीं आर्या शर्मा का संगीत गाने को और भी मधुर बना देता है.  यूट्यूब पर मचा रहा है धमाल यह गाना स्पीड रिकॉर्ड्स भोजपुरी यूट्यूब चैनल पर रिलीज किया गया है. कमेंट सेक्शन में फैंस खेसारी की जमकर तारीफ कर रहे हैं. कई लोग लिख रहे हैं कि खेसारी एक बार फिर अपने पुराने और सुपरहिट अंदाज में लौट आए हैं. खेसारी लाल यादव की फिल्मों और गानों का क्रेज हमेशा बना रहता है. ‘गजब तोहार नैना’ में भी रोमांस, म्यूजिक और शानदार परफॉर्मेंस का बेहतरीन मेल है. अगर आप भोजपुरी रोमांटिक गानों के शौकीन हैं, तो यह गाना आपकी प्लेलिस्ट में जरूर शामिल होना चाहिए. ये भी पढ़ें: Bhojpuri Song: रितेश पांडे के न्यू ईयर गाने ने पार्टी को बनाया शानदार, ‘मेरी डार्लिंग ठुमके मारेगी’ में लड़कियों संग मचाया धमाल ये भी पढ़ें: Bhojpuri Song: शिशु के आते ही जश्न में डूबी अक्षर सिंह, यूट्यूब पर धमाल मचा रहा फिल्म ‘अग्निसाक्षी’ का ‘सोना के पलना’ ये भी पढ़ें: Bhojpuri Song: यूट्यूब पर फिर वायरल हुआ ‘आरा के ओठलाली’, 6.5 करोड़ व्यूज के साथ इंटरनेट पर मचा रहा बवाल The post Bhojpuri Song: खेसारी लाल यादव के ‘गजब तोहार नैना’ में सोना पांडे की अदाओं ने फैंस को बनाया दीवाना, देखें VIDEO appeared first on Naya Vichar.

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चक्रवाती तूफान के बाद श्रीलंका के हाथ लगा कुबेर का खजाना, दुनिया भर से हो गई डॉलर की बरसात

Sri Lanka Cyclone Fund: चक्रवाती तूफान दित्वा से मची तबाही के बाद श्रीलंका के लिए राहत की बड़ी समाचार सामने आई है. आपदा से उबरने और देश के पुनर्निर्माण के लिए गठित ‘पुनर्निर्माण श्रीलंका कोष’ में अब तक 4.2 अरब श्रीलंकाई रुपये (1.386 करोड़ अमेरिकी डॉलर) से अधिक की राशि जमा हो चुकी है. यह जानकारी शुक्रवार को वित्त मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने साझा की, जिससे यह संकेत मिला कि वैश्विक समुदाय श्रीलंका की मदद के लिए आगे आ रहा है. राष्ट्रपति के निर्देश पर बना पुनर्निर्माण कोष चक्रवात दित्वा के कारण आई भीषण बाढ़, भूस्खलन और बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान के तुरंत बाद राष्ट्रपति अनुर कुमार दिसानायक ने पुनर्निर्माण श्रीलंका कोष के गठन का निर्देश दिया था. इस कोष का उद्देश्य प्रभावित क्षेत्रों में त्वरित राहत, बुनियादी ढांचे की मरम्मत और दीर्घकालिक पुनर्वास कार्यों के लिए वित्तीय संसाधन जुटाना है. 4,286 मिलियन रुपये तक पहुंची कुल राशि वित्त मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी हर्षणा सूरियाप्पेरुमा के अनुसार, कोषागार संचालन विभाग से प्राप्त ताजा आंकड़ों के मुताबिक अब तक कुल 4,286 मिलियन श्रीलंकाई रुपये (1.386 करोड़ अमेरिकी डॉलर) जमा किए जा चुके हैं. उन्होंने बताया कि यह राशि लगभग 1.386 करोड़ अमेरिकी डॉलर के बराबर है, जो किसी आपदा के तुरंत बाद जुटाई गई मदद के लिहाज से एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है. विदेशी मुद्रा से मिला मजबूत सहारा सूरियाप्पेरुमा ने बताया कि इस कोष में केवल विदेशी मुद्राओं के रूप में ही 60 लाख अमेरिकी डॉलर से अधिक की राशि प्राप्त हो चुकी है. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर श्रीलंका के लिए सहानुभूति और समर्थन मजबूत बना हुआ है. विदेशी मुद्रा में प्राप्त यह मदद प्रशासन के लिए राहत कार्यों को तेजी से आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएगी. प्रवासी श्रीलंकाइयों और संगठनों का बड़ा योगदान इस पुनर्निर्माण कोष में योगदान देने वालों में शुभचिंतक, समर्थक, श्रीलंकाई उद्यमी, विभिन्न संगठन, व्यवसायिक संस्थान और बड़ी संख्या में प्रवासी श्रीलंकाई शामिल हैं. इसके अलावा, कई अंतरराष्ट्रीय और गैर-प्रशासनी संगठनों ने भी द्वीपीय राष्ट्र की मदद के लिए आगे बढ़कर सहयोग दिया है. अनुपूरक बजट से मिलेगा अतिरिक्त बल प्रशासन को उम्मीद है कि श्रीलंकाई संसद शुक्रवार को 500 अरब श्रीलंकाई रुपये के अनुपूरक अनुमान को मंजूरी दे देगी. इस अतिरिक्त बजट से पुनर्बहाली और पुनर्निर्माण पर होने वाले भारी खर्च को पूरा किया जाएगा, जिससे राहत कार्यों में तेजी लाई जा सकेगी. इसे भी पढ़ें: Indigo Investigation: जांच रिपोर्ट के बाद इंडिगो पर होगी कार्रवाई, प्रशासन ने दिए सख्त संकेत पुनर्निर्माण की लागत 6–7 अरब डॉलर प्रशासन के प्रारंभिक आकलन के अनुसार, चक्रवात दित्वा से हुई तबाही के बाद देश के पुनर्निर्माण की कुल लागत लगभग 6 से 7 अरब अमेरिकी डॉलर तक हो सकती है. व्यापक बाढ़, भूस्खलन और बुनियादी ढांचे के ध्वस्त होने से श्रीलंका की आपदा-प्रतिक्रिया क्षमता पर भारी दबाव पड़ा है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय सहयोग से देश को इस संकट से उबरने की उम्मीद जगी है. भाषा इनपुट के साथ फेक ग्राफ़िक्स से सावधान रहें चक्रवाती तूफान के बाद श्रीलंका के हाथ लगा कुबेर का खजाना, दुनिया भर से हो गई डॉलर की बरसात 5 Fact check: फैलाई जा रही है मोहन भागवत की नया विचार के Logo वाली भ्रामक तस्वीर The post चक्रवाती तूफान के बाद श्रीलंका के हाथ लगा कुबेर का खजाना, दुनिया भर से हो गई डॉलर की बरसात appeared first on Naya Vichar.

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बांग्लादेश में चुनाव से पहले हिंसा भड़काने का आरोप, हादी खुद उग्र और कट्टर थे, पूर्व मंत्री बोले- यूनुस सरकार भारत को उकसा रही

Bangladesh Election Violence: बांग्लादेश इन दिनों नेतृत्वक और सामाजिक उथल-पुथल के बीच है. हाल ही में छात्र नेता शरीफ उस्मान हादी की मौत ने पूरे देश में हिंसा की लहर दौड़ा दी. इस बीच, पूर्व शिक्षा मंत्री मोहिबुल हसन चौधरी ने आरोप लगाया है कि मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम प्रशासन जानबूझकर हिंसा भड़काकर आगामी चुनावों को टालना चाहती है. चौधरी का कहना है कि हिंदुस्तान के उप उच्चायुक्त के आवास पर हमला पूर्व-निर्धारित और राज्य प्रायोजित था, जिसका मकसद हिंदुस्तान को उकसाना और अंतरराष्ट्रीय ध्यान खींचना था. Bangladesh Election Violence in Hindi: हादी एक कट्टर और उग्र व्यक्ति थे छात्र नेता शरीफ उस्मान हादी की हत्या के बाद पूरे बांग्लादेश में अशांति फैल गई. ढाका में विरोध प्रदर्शन रातभर चले और हिंसा उग्र रूप ले ली. प्रदर्शनकारियों ने आगजनी और मीडिया संस्थानों पर हमला किया. चौधरी ने बताया कि हादी एक कट्टर और उग्र व्यक्ति थे और उन्हें उनके ही करीबी साथी ने गोली मारी, जो उनके सशस्त्र समूह का हिस्सा था. उनका आरोप है कि यूनुस प्रशासन ने हादी की मौत को बहाना बनाकर चरमपंथियों और नेतृत्वक समूहों को संगठित किया, ताकि देशभर में अशांति फैलाई जा सके. (Bangladesh Election Violence Sharif Osman Hadi Death Protests in Hindi) हिंदुस्तान विरोध और विदेशी मिशनों पर निशाना चौधरी ने यह भी कहा कि हिंसा में प्रदर्शनकारियों ने हिंदुस्तान के उप राजदूत के आवास को घेरा और कई विदेशी मिशनों पर हमला किया. उनका मानना है कि इसका उद्देश्य हिंदुस्तान को भड़काना और संकट को अंतरराष्ट्रीय रूप देना था. चौधरी का आरोप है कि अंतरिम प्रशासन के सदस्य कानून-व्यवस्था बनाए रखने की बजाय खुलकर हिंसा भड़का रहे थे. उन्होंने बताया कि कैबिनेट के सदस्य खुले तौर पर खून-खराबे और शहीद बनने की बातें कर रहे थे. हिंसा के दौरान प्रदर्शनकारियों ने ढाका के बड़े मीडिया हाउस जैसे द डेली स्टार और प्रोथोम आलो के दफ्तरों में आग लगा दी. चौधरी का मानना है कि यह हिंसा स्वतःस्फूर्त नहीं थी, बल्कि मंत्रियों के बयान के बाद चरमपंथी भीड़ सड़कों पर उतरी. अंतरिम प्रशासन की प्रतिक्रिया मोहम्मद यूनुस की अंतरिम प्रशासन ने कहा कि वह भीड़ हिंसा, आगजनी और संपत्ति के विनाश की हर तरह की घटनाओं की निंदा करती है. प्रशासन ने नागरिकों से अपील की कि वे हिंसा और नफरत से दूर रहें. उन्होंने चुनाव और जनमत संग्रह की महत्वपूर्णता पर जोर दिया और इसे केवल नेतृत्वक अभ्यास नहीं, बल्कि राष्ट्रीय जिम्मेदारी बताया. प्रशासन ने शहीद हादी के बलिदान का सम्मान करने के लिए संयम और जिम्मेदारी अपनाने की जरूरत बताई. (Sharif Osman Hadi Death Protests Yunus Government in HIndi) पत्रकारों और अल्पसंख्यकों का संरक्षण अंतरिम प्रशासन ने पत्रकारों का समर्थन जताया और कहा कि पत्रकारों पर हमले सच्चाई पर हमला हैं. साथ ही, मैमनसिंह में हुई एक हिंदू व्यक्ति की लिंचिंग की भी निंदा की गई और कहा गया कि नए बांग्लादेश में ऐसी हिंसा की कोई जगह नहीं है. प्रशासन ने हर नागरिक से अपील की कि वे हिंसा, उकसावे और नफरत से दूर रहें और शहीद हादी का सम्मान करें. इंकलाब मंच ने भी शरीफ हादी की मौत के बाद देशभर में फैली हिंसा और तोड़फोड़ से बचने की अपील की. मंच ने कहा कि कुछ समूह बांग्लादेश को बेकार बनाने और देश की स्वतंत्रता कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने चेतावनी दी कि जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आते हैं, अशांति फैलाने वाले केवल अपनी नेतृत्वक मंजिल साधेंगे. ये भी पढ़ें: हादी पर हमला करने वाले को लौटाए… हिंदुस्तान के खिलाफ जहर उगल रहा बांग्लादेश, NCP बोली- हम युद्ध की स्थिति में हैं Bangladesh: 4 घंटे तक घुटा दम, नहीं छपा जुम्मे का अखबार, हादी की मौत के बाद पत्रकारों पर जानलेवा हमला The post बांग्लादेश में चुनाव से पहले हिंसा भड़काने का आरोप, हादी खुद उग्र और कट्टर थे, पूर्व मंत्री बोले- यूनुस प्रशासन हिंदुस्तान को उकसा रही appeared first on Naya Vichar.

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Samar Singh New Bhojpuri Song: समर सिंह का नया भोजपुरी गाना ‘बलमुआ बागी भइल बा’ रिलीज, नैंसी यादव ने नीली साड़ी में ढाया कहर

Samar Singh New Bhojpuri Song Balamua Bagi Bhail Ba: भोजपुरी इंडस्ट्री के पॉपुलर सिंगर समर सिंह एक बार फिर अपने नए गाने को लेकर चर्चा में आ गए हैं. उनका लेटेस्ट भोजपुरी सॉन्ग ‘बलमुआ बागी भइल बा’ शुक्रवार सुबह T-Series Hamaar Bhojpuri यूट्यूब चैनल पर रिलीज कर दिया गया है. रिलीज होते ही यह गाना दर्शकों के बीच छा गया है और महज 9 घंटे में 1 मिलियन से ज्यादा व्यूज बटोर चूका है. ऐसे में आइए इसकी खासियत और बाकी डिटेल्स बताते हैं. यहां देखें गाने का म्यूजिक वीडियो- नैंसी यादव की अदाओं ने लूटा दिल इस गाने के म्यूजिक वीडियो में समर सिंह के साथ नैंसी यादव की शानदार केमिस्ट्री देखने को मिल रही है. वीडियो में नैंसी नीली रंग की साड़ी में बेहद खूबसूरत और ग्लैमरस अंदाज में नजर आ रही हैं, जो हर फ्रेम में फैंस का दिल जीत रही हैं. शादी के बाद की नोक-झोंक पर आधारित है कहानी गाने की कहानी शादी के बाद की मजेदार नोक-झोंक पर आधारित है. शुरुआत में समर सिंह पति के किरदार में नैंसी यादव को परेशान करते नजर आते हैं. इसके बाद पूरी वीडियो में नैंसी शिकायत करती दिखती हैं कि ऐसा लगता है जैसे समर सिंह ने उनसे सिर्फ खाना बनाने के लिए शादी की हो. वीडियो में दिखाया गया है कि पति की इन हरकतों से परेशान होकर पत्नी उन्हें ‘बागी’ कहने लगती है, जो गाने को और भी मजेदार व रिलेटेबल बना देता है. फैंस को पसंद आ रहा मजेदार कॉन्सेप्ट गाने का हल्का-फुल्का और देसी अंदाज दर्शकों को खूब पसंद आ रहा है. समर सिंह की आवाज, नैंसी यादव का एक्सप्रेशन और गाने की कहानी मिलकर इसे एक परफेक्ट एंटरटेनिंग भोजपुरी सॉन्ग बना रही है. गाने की टीम गायक: समर सिंह गीतकार: गौरव यदुवंशी संगीत: अभिराम पांडे संकल्पना: समर मोदी निदेशक: आशीष सत्यार्थी प्रोजेक्ट मैनेजर टी-सीरीज- सोनू श्रीवास्तव डीओपी: संतोआ यादव, नवीन यह भी पढ़ें- Tuntun Yadav New Bhojpuri Song: टुनटुन यादव का नया गाना ‘राजा रंगबाज’ यूट्यूब पर रिलीज, खुशी ककड़ की अदाओं ने लूटा दिल The post Samar Singh New Bhojpuri Song: समर सिंह का नया भोजपुरी गाना ‘बलमुआ बागी भइल बा’ रिलीज, नैंसी यादव ने नीली साड़ी में ढाया कहर appeared first on Naya Vichar.

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Vial Video: हिरण की तस्वीर देख धोखा खा गया मगरमच्छ, करने लगा हमला, वीडियो देख छूट जाएगी हंसी

Viral Video: सोशल मीडिया एक मगरमच्छ का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है. वीडियो काफी हंसाने वाला है. इसमें दिख रहा है कि एक मगरमच्छ हिरण की तस्वीर को असली समझकर उस पर हमला कर देता है. वो बार-बार पानी से निकलकर उसपर हमला करता दिख रहा है. यह दृश्य इतना हास्यास्पद है कि देखने वाले की हंसी नहीं रुकती. हालांकि वीडियो के AI वीडियो होने का दावा किया जा रहा है. जिसमें दिख रहा है कि हिरण के पोस्टर को देखकर मगरमच्छ उसपर झपट पड़ता है. मगरमच्छ ने लगाई हिरण पर छलांग वीडियो में दिख रहा है कि पानी के अंदर से अचानक एक मगरमच्छ जोरदार छलांग लगाता है और तस्वीर पर टूट पड़ता है. उसके तेज जबड़े पोस्टर को चीरने की कोशिश करते हैं, लेकिन बार बार कोशिश के बाद भी हिरण उसकी पकड़ में नहीं आता. मगरमच्छ ने एक बार कोशिश की फिर दूसरी बार ऐसे कर वो कई बार कोशिश करता है लेकिन पोस्टर से हर बार वो टकराकर वापस पानी में आ जाता है. लेकिन जब उसे एहसास होता है कि यह तो असली नहीं है तो वह निराश होकर वापस पानी में लौट जाता है. 😂 pic.twitter.com/OljujpKCKe — Damn Nature You Scary (@AmazingSights) December 18, 2025 वायरल हो रहा वीडिया सोशल मीडिया पर यह वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है. इसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर @AmazingSights के आईडी से शेयर किया गया है. वीडियो को अब तक 41 हजार से ज्यादा लोगों ने देख लिया है. इसे 11 सौ से ज्यादा लोगों ने लाइक किया है. कई यूजर्स ने हंसी वाला इमोजी लगाकर अपना रिएक्शन जाहिर किया है. वीडियो में मगरमच्छ को देखकर हंसी आ जीएगी. वो बार-बार हिरण को पकड़ने के लिए छलांग लगाता दिखाई दे रहा है. वीडियो से जाहिर हो रहा है कि सूंखने की खासी क्षमता होने के बावजूद मगरमच्छ भी धोखा खा सकता है, जाहिर है भूख इंसान ही नहीं, जानवरों को भी बेवकूफ बना देती है. वीडियो देख कई यूजर्स की हंसी नहीं रुक रही. Also Read: Viral Video: अकेली छिपकली ने 4 कुत्तों को पिला दिया पानी, 18 सेकंड का वीडियो देख नहीं रुकेगी हंसी The post Vial Video: हिरण की तस्वीर देख धोखा खा गया मगरमच्छ, करने लगा हमला, वीडियो देख छूट जाएगी हंसी appeared first on Naya Vichar.

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गांव का विकास कैसे करता है मुखिया? क्या कर सकते हैं, क्या नहीं, पावर और रोल समझिए

Bihar Panchayat Chunav: बिहार में पंचायत का मुखिया गांव के विकास, प्रशासन और जनकल्याण से जुड़ा सबसे अहम प्रतिनिधि होता है. अगर कोई व्यक्ति बिहार में मुखिया बनता है तो उसके पास कई तरह की जिम्मेदारियां और अधिकार होते हैं. इनका सही उपयोग गांव की तस्वीर बदल सकता है. इनके दायरे में क्या-क्या आता है सबसे पहले बात विकास योजनाओं और फंड की करें तो मुखिया पंचायत की वार्षिक विकास योजना तैयार करता है और उसे पारित कराता है. उसे मनरेगा सहित कई प्रशासनी योजनाओं के तहत मिलने वाली राशि के उपयोग की जिम्मेदारी होती है. सड़क, नाली, घर, जल का पहुंचना जैसे कामों के प्रस्ताव तैयार कराना और काम की निगरानी करना भी मुखिया का काम है. पंचायत टैक्स, फी और अन्य वसूली पर नजर रखना भी इनका काम होता है. बिहार की ताजा समाचारों के लिए क्लिक करें क्या- क्या भूमिका निभाते हैं ग्राम सभा और प्रशासनिक कामों में भी मुखिया की अहम भूमिका होती है. वह ग्राम सभा और पंचायत बैठकों की अध्यक्षता करता है और हर साल तय संख्या में बैठकें कराना अनिवार्य होता है. पंचायत के रिकॉर्ड, रजिस्टर और डाक्यूमेंट्स की देखरेख की जिम्मेदारी भी मुखिया पर होती है. पंचायत सचिव, रोजगार सेवक और अन्य कर्मचारियों के कामकाज पर प्रशासनिक निगरानी रखना भी इनका काम होता है. सामाजिक कल्याण, शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में मुखिया की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है. वह पेंशन, आवास, राशन जैसी योजनाओं के लिए पात्र लोगों की सूची तैयार कराने में सहयोग करता है. स्कूल, आंगनवाड़ी केंद्र, स्वास्थ्य उपकेंद्र और टीकाकरण जैसे कामों की निगरानी भी मुखिया करता है. स्पोर्ट्स, सांस्कृतिक फंक्शन और स्वयं सहायता समूहों को बढ़ावा के काम भी ये करते हैं. मुखिया के अधिकारों की कुछ सीमाएं भी होती हैं. उसे न्यायिक या पुलिस अधिकार प्राप्त नहीं होते. नियमों का पालन, पारदर्शिता और टीमवर्क के साथ काम करना एक अच्छे मुखिया की पहचान है. मुखिया का पद सेवा और जिम्मेदारी का होता है. ईमानदारी से काम किया जाए तो मुखिया गांव की स्थिति को सही कर सकता है. इसे भी पढ़ें:  अगले 24 घंटे के दौरान थर-थर कांपेगा बिहार, 12 जिलों में रेड और 26 जिलों में येलो अलर्ट, देखिये लेटेस्ट अपडेट The post गांव का विकास कैसे करता है मुखिया? क्या कर सकते हैं, क्या नहीं, पावर और रोल समझिए appeared first on Naya Vichar.

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Numerology: इन तारीखों में जन्मे लोगों के पास होता है सबसे तेज दिमाग, दिखते हैं शांत लेकिन अंदर से होते हैं खतरनाक

Numerology: हमारा स्वभाव कैसा होगा यह काफी हद तक हम इस बात पर भी निर्भर करता है कि हम किस दिन या फिर तारीख पर जन्में हैं. आसान शब्दों में अगर कहें तो आप किस तारीख को जन्में या फिर आपका मूलांक क्या है इसका आपके जीवन में काफी गहरा प्रभाव पड़ता है. आज हम आपको कुछ ऐसे तारीखों में जन्में लोगों के बारे में बताने जा रहे हैं जिनका दिमाग काफी ज्यादा तेज, गहरा और स्ट्रेटेजी से भरा हुआ होता है. ये लोग भले ही ऊपर से आपको शांत दिखाई दे लेकिन अंदर ही अंदर ये लोग हालात को समझकर अपने फायदे की चाल चलने में माहिर होते हैं. समाज इन लोगों को खतरनाक दिमाग वाला कहकर भी बुलाता है क्योंकि इन लोगों को हल्के में लेना किसी के लिए भी काफी भारी पड़ सकता है. मूलांक क्या होता है और ये क्यों है जरूरी? अगर आप मूलांक के बारे में कुछ भी नहीं जानते हैं तो बता दें आपका मूलांक निकालने के लिए आपकी जन्मतिथि के अंकों को जोड़ा जाता है और फिर उससे एक अंक बनाया जाता है. अगर आपका जन्म किसी भी महीने की 15 तारीख को हुआ है तो आपका मूलांक 1+5 को जोड़कर 6 बनता है. हमारे अंक ज्योतिष में 1 से लेकर 9 तक मूलांक होते हैं और हर एक मूलांक किसी भी व्यक्ति की सोच, फैसला लेने की काबिलियत और व्यवहार को दर्शाता है. तो चलिए अब उन मूलांक के लोगों के बारे में जानते हैं जिनमें जन्में लोगों का दिमाग सबसे ज्यादा तेज और चालाक माना जाता है. यह भी पढ़ें: Numerology: मेहनत करने के बाद भी सफलता के मामले में पीछे छूट जाते हैं इस मूलांक के लोग! वजह जानकर चौंक जाएंगे आप 1, 10 और 19 तारीख में जन्मे लोग अंक ज्योतिष के अनुसार जिस भी व्यक्ति का जन्म किसी भी महीने की 1, 10 और 19 तारीख को हुआ है तो इनमें लीडरशिप क्वालिटी होती है. इनका दिमाग काफी तेज चलता है और ये लोग किसी भी हालात में आगे रहने की ही बात सोचते हैं. इन लोगों को यह बात काफी अच्छे से पता होती है कि इन्हें कब कुछ बोलना है और कब इन्हें चुप रहना है. इन लोगों की एक खास बात यह भी होती है कि जब कोई भी इनके खिलाफ जाकर चाल चलता है तो ये उससे भी तेज चाल चलने की काबिलियत रखते हैं. इन लोगों का दिमाग इतना ज्यादा तेज होता है कि ये लोग बड़े से बड़े फैसले भी आसानी से बदल देते हैं. 5, 14 और 23 तारीख में जन्मे लोग अगर आपका जन्म किसी भी महीने की 5, 14 और 23 तारीख को हुआ है तो आपका मूलांक है 5. इस मूलांक के जो लोग होते हैं उन्हें सबसे ज्यादा चालाक और स्मार्ट माना जाता है. इनका जो दिमाग होता है वह बिजली की तरह तेज चलता है. इन लोगों की खासियत होती है कि ये किसी भी इंसान को आसानी से अपने पक्ष में कर लेते हैं. इन लोगों को झगड़ा करना अच्छा नहीं लगता बल्कि ये लोग अपने दिमाग से स्पोर्ट्सना पसंद करते हैं. आप इन लोगों को धोखा नहीं दे सकते हैं क्योंकि इन लोगों को सबकुछ पहले ही समझ में आ जाता है. यह भी पढ़ें: Numerology: इन तारीखों में जन्मीं लड़कियां बनती हैं सुंदरता और किस्मत की रानी, पिता और पति के घर में कभी नहीं होती धन-दौलत की कमी 7, 16 और 25 तारीख में जन्मे लोग अगर आपका जन्म किसी भी महीने की 7, 16 और 25 तारीख को हुआ है तो आपका मूलांक है 7. इस मूलांक के जो लोग होते हैं उनका दिमाग काफी गहरा होता है. इन लोगों की सबसे बड़ी खासियत होती है कि ये बोलते कम हैं लेकिन सोचते काफी ज्यादा हैं. इनके दिमाग में हर वक्त कुछ न कुछ चल ही रहा होता है और अगर आप इन्हें हल्के में लेने की गलती करते हैं तो आगे चलकर आपको पछतावा होना तय है. इनका दिमाग चुपचाप लेकिन खतरनाक काम करता है. 8, 17 और 26 तारीख में जन्मे लोग अगर आपका जन्म किसी भी महीने की 8, 17 और 26 तारीख को हुआ है तो आपका मूलांक है 8. अंक ज्योतिष के अनुसार इस मूलांक के जो लोग होते हैं वे काफी स्ट्रांग दिमाग वाले होते हैं. इनके जीवन में अगर कोई कठिन समय आ जाए तो ये उससे डरते नहीं है बल्कि और भी मजबूत बनते हैं. किसी भी चीज को लेकर ये लोग लंबे समय से प्लानिंग करते हैं और जब सही समय आता है तभी वार करते हैं. ये लोग अपने फायदे के लिए कठिन से कठिन फैसले ले सकते हैं. यह भी पढ़ें: Numerology: धन-दौलत नहीं, प्यार को सबसे ज्यादा महत्व देती हैं इस मूलांक की लड़कियां, शादी के बाद बदल देती हैं ससुराल की किस्मत! Disclaimer: यह आर्टिकल सामान्य जानकारियों और मान्यताओं पर आधारित है. नया विचार इसकी पुष्टि नहीं करता है. The post Numerology: इन तारीखों में जन्मे लोगों के पास होता है सबसे तेज दिमाग, दिखते हैं शांत लेकिन अंदर से होते हैं खतरनाक appeared first on Naya Vichar.

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मोतिहारी: पिता और भाई की मौत ने युवक को बनाया अपराधी, काम छोड़ करता था साइबर ठगी

मोतिहारी: पांच करोड़ से अधिक के साइबर ठगी में गिरफ्तार सीतामढ़ी प्रेमनगर का रहने वाला अमल प्रकाश पहले दिल्ली में मजदूरी करता था. उसके पिता प्रह्लाद पासवान की बीमारी व छोटे भाई की सड़क हादसे में मौत के कारण उसके परिवार की आर्थिक स्थिति काफी खराब हो गयी. मेहनत मजदूरी से कमाया पैसा पिता के इलाज में कम पड़ने लगा, जिसके कारण उसके पिता की जिंदगी से जंग हार गये. आर्थिक रूप से टूट चुके अमल के सामने कोई रास्ता नहीं था. दिल्ली में ही उसकी एक युवक से मुलाकात हुई. उसकी परेशानी सुन युवक ने उसे पैसा कमाने के लिए साइबर क्राइम का शॉटकॉट रास्ता बताया. इसके लिए उसने लखनऊ के आलोक ठाकुर का नम्बर दिया, कहा कि उससे सम्पर्क करो, तुम्हे कम दिनों में बहुत पैसा कमवा देगा.  लखनऊ के होटल में हुई थी मुलाकात  अमल ने आलोक के मोबाइल नम्बर पर सम्पर्क किया. उसके बताये पते पर यूपी चारबाग स्टेशन के पास गया. एक होटल में दोनों की मुलाकात हुई, उसके बाद आलोक ने राजेपुर काशीपकड़ी के जितेंद्र कुमार का मोबाइल नम्बर देकर कहा कि जाकर उससे मिल लेना. जितेंद्र मुजफ्फरपुर में कार्यालय खोल लोगों का इन्कम टैक्स रिटर्न दाखिल करने के साथ -साथ उसकी आड़ में साइबर क्राइम में भी संलिप्ता था. इसका खुलासा अमल ने साइबर थाने के पुलिस अधिकारियों के समक्ष पूछताछ में किया है. साइबर थाने की पुलिस अब आलोक की तशाल शुरू कर दी है. उसकी गिरफ्तारी के लिए लखनऊ पुलिस से सम्पर्क किया गया है. साइबर डीएसपी अभिनव पराशर ने बताया कि आलोक की गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीम को लखनऊ भेजा जायेगा. लालच दे भोले-भाले लोगों का बैंकों में खाता खुलवाते थे आरोपी  इधर गिरफ्तार जितेंद्र, अमल व ओमप्रकाश को पुलिस ने पूछताछ के बाद न्यायिक हिरासत में भेज दिया है. तीनों साइबर बदमाशों के पास से बरामद पासबुक, चेकबुक की जांच पुलिस ने किया तो विभिन्न राज्यों में उक्त सभी अकाउंट पर 70 कम्पलेन दर्ज है. गिरफ्तार उक्त तीनों बदमाशा पांच से दस हजार रूपये का लालच दे भोले-भाले लोगों का बैंकों में खाता खुलवाते, उसके बाद खाते को साइबर ठगी के लिए उपयोग करते थे. मशाला का व्यवसायी है ओमप्रकाश सीतामढ़ी डुमरा का रहने वाला ओमप्रकाश मशाला का व्यवसायी है. उसका बढ़िया कारोबार चलता था. लेकिन अकूत सम्पत्ति कमाने की लालच में उसने बिजनेस पर कम साइबर ठगी पर ज्यादा ध्यान देने लगा. इसके लिए उसने अपनाबिजनेस अकाउंट भी दाव पर लगा दिया. उसकेबिजनेस अकाउंट में एक सप्ताह के अंदर एक करोड़ से भी अधिक रुपये ट्रांजेक्शन हुआ है. उसके बिजनेस अकाउंट पर विभिन्न राज्यों में करीब 21 से अधिक कम्पलेन है. बिहार की ताजा समाचारों के लिए यहां क्लिक करें मुजफ्फरपुर के गोपाल छतरी के अकाउंट में आया ठगी का 3.65 करोड़ पुलिस अनुसंधान में मुजफ्फरपुर के गोपाल छतनी नामक एक व्यक्ति का भी नाम आया है, जो इस गिरोह के लिए काम करता है. पुलिस का कहना है कि उसके अकाउंट में 3.65 करोड़ का ट्रांजेक्शन हुआ है. उक्त सभी ट्रांजेक्शन डिजिटल अरेस्ट के माध्यम से उसके अकाउंट में ट्रांसफर हुआ है, उसके बाद सारे पैसे की निकासी भी कर ली गयी है. गिरफ्तार जितेंद्र के मोबाइल इसका साक्ष्य भी मिला है. जितेंद्र ने ही उसका खाता खुलवाया था. नाम व पते के सत्यापन के साथ गोपाल छतरी को भी गिरफ्तार किया जायेगा. The post मोतिहारी: पिता और भाई की मौत ने युवक को बनाया अपराधी, काम छोड़ करता था साइबर ठगी appeared first on Naya Vichar.

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रूसी तेल पर प्रतिबंध से घटेगी सरकारी कंपनियों की कमाई, सस्ता क्रूड भी नहीं बढ़ा पाएगा मुनाफा

Russian Oil Sanctions: रूसी कच्चे तेल और परिष्कृत उत्पादों पर जारी प्रतिबंधों ने वैश्विक ऊर्जा बाजार के समीकरण को पूरी तरह बदल दिया है. नुवामा इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज की ओर से जारी रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक बाजार में अधिक आपूर्ति और रूसी तेल के प्रवाह में बाधा के चलते कच्चे तेल की कीमतें आने वाले समय में दबाव में रह सकती हैं. हालांकि, इसका सीधा लाभ प्रशासनी तेल विपणन कंपनियों इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी), हिंदुस्तान पेट्रोलियम (बीपीसीएल) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (एचपीसीएल) को पूरी तरह नहीं मिलेगा. समुद्र में फंसा रूसी तेल नुवामा की रिपोर्ट में बताया गया है कि रूसी कच्चे तेल पर लगे प्रतिबंधों के कारण बड़ी मात्रा में तेल समुद्र में तैरते भंडार के रूप में जमा हो गया है. जैसे-जैसे ये बैरल धीरे-धीरे हिंदुस्तान जैसे बड़े उपभोक्ता बाजारों तक पहुंचेंगे, वैश्विक तेल बाजार में अधिशेष आपूर्ति की स्थिति बनी रह सकती है. एफजीई नेक्सेंट के अनुमान के मुताबिक, रोजाना करीब 20 लाख बैरल का अधिशेष रह सकता है, जिससे वर्ष 2026 में ब्रेंट क्रूड की कीमत 55 से 60 डॉलर प्रति बैरल के दायरे में रहने की संभावना है. सस्ते कच्चा तेल से फायदा तो चुनौती भी रिपोर्ट में कहा गया है कि कच्चे तेल की कम कीमतें हिंदुस्तान की सार्वजनिक क्षेत्र की तेल और गैस कंपनियों के लिए संरचनात्मक रूप से सकारात्मक मानी जाती हैं, क्योंकि इससे इनपुट लागत घटती है और घरेलू ईंधन कीमतों पर दबाव कम होता है. इससे प्रशासन को भी कीमतों को नियंत्रित रखने में सहूलियत मिलती है. लेकिन नुवामा की रिपोर्ट के अनुसार, आईओसी, बीपीसीएल और एचपीसीएल की वास्तविक कमाई का निर्धारण कच्चे तेल की कीमतों से कम और रिफाइनिंग मार्जिन से अधिक होता है. रिफाइनिंग मार्जिन बनेंगे कमाई का असली आधार रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि रूसी तेल व्यापार पर प्रतिबंध और यूरोपीय संघ द्वारा रूसी परिष्कृत उत्पादों पर लगाए गए प्रतिबंधों के चलते रोजाना लगभग 10 लाख बैरल रूसी डीजल और ईंधन तेल निर्यात खतरे में पड़ गया है. इससे वैश्विक उत्पाद आपूर्ति में कमी आई है और रिफाइनिंग मार्जिन को मजबूती मिली है. खासकर, डीजल जैसे मध्यम डिस्टिलेट्स के मार्जिन बढ़े हैं, जो हिंदुस्तानीय सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों के उत्पादन का अहम हिस्सा हैं. सिंगापुर जीआरएम पर टिकी उम्मीदें नुवामा की रिपोर्ट के मुताबिक, सिंगापुर बेंचमार्क सकल शोधन मार्जिन (जीआरएम) दीर्घकालिक रूप से 6 से 7 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर स्थिर हो सकता है. यह स्तर हिंदुस्तान की प्रशासनी रिफाइनरियों के लिए अनुकूल माना जाता है, क्योंकि उनकी रिफाइनरी संरचनाएं जटिल हैं. वे भारी और डिस्काउंटेड क्रूड को प्रोसेस करने में सक्षम हैं. साथ ही, मजबूत घरेलू मांग इन कंपनियों को अतिरिक्त सुरक्षा प्रदान करती है. आईओसी, बीपीसीएल और एचपीसीएल को मिलेगा सहारा रिपोर्ट में कहा गया है कि आईओसी, बीपीसीएल और एचपीसीएल को उनके बड़े पैमाने पर संचालन, एकीकृत लॉजिस्टिक्स और व्यापक रिटेल नेटवर्क का लाभ मिलता रहेगा. ये कंपनियां घरेलू बाजार पर केंद्रित हैं, जिससे वैश्विक निर्यात प्रतिबंधों का सीधा असर सीमित रहता है. विनियमित मूल्य निर्धारण व्यवस्था भी इनके लिए एक स्थिरता का कारक बनी हुई है. अस्थिरता का खतरा अब भी बरकरार हालांकि, रिपोर्ट में चेतावनी भी दी गई है कि वैश्विक कच्चे तेल भंडार में बढ़ोतरी, रिफाइनरी उपयोग दरों में इजाफा और नई वैश्विक रिफाइनिंग क्षमता के जुड़ने से निकट भविष्य में मार्जिन में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है. यदि रूस के साथ व्यापारिक तनाव में तेजी से कमी आती है, तो उत्पाद क्रैक पर दबाव बढ़ सकता है, जिससे रिफाइनिंग मार्जिन प्रभावित होंगे. निर्यात पर अप्रत्यक्ष असर, घरेलू बाजार से राहत नुवामा के अनुसार, यूरोपीय संघ के कड़े नियमों का हिंदुस्तानीय रिफाइनरियों पर अप्रत्यक्ष असर पड़ सकता है, लेकिन इसका प्रभाव निजी निर्यातकों पर अधिक होगा. घरेलू खपत पर केंद्रित सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों के लिए जोखिम अपेक्षाकृत सीमित है, क्योंकि उनकी लाभप्रदता मुख्य रूप से घरेलू मांग और प्रशासनी मूल्य निर्धारण नीति पर निर्भर करती है. इसे भी पढ़ें: Christmas Special Train: क्रिसमस और न्यू ईयर पर चलेंगी स्पेशल ट्रेनें, जानें किन रूटों पर चलेंगी गाड़ियां सस्ता क्रूड मगर मुनाफे की राह आसान नहीं कुल मिलाकर, रिपोर्ट बताती है कि कच्चे तेल की कम कीमतें और संरचनात्मक रूप से मजबूत रिफाइनिंग मार्जिन आईओसी, बीपीसीएल और एचपीसीएल को सहारा देंगे. बावजूद इसके, भू-नेतृत्वक तनाव और वैश्विक प्रतिबंध ऊर्जा बाजार में समय-समय पर अस्थिरता पैदा करते रहेंगे, जिससे प्रशासनी तेल कंपनियों की कमाई पर दबाव बना रह सकता है. इसे भी पढ़ें: Indigo Investigation: जांच रिपोर्ट के बाद इंडिगो पर होगी कार्रवाई, प्रशासन ने दिए सख्त संकेत फेक ग्राफ़िक्स से सावधान रहें रूसी तेल पर प्रतिबंध से घटेगी प्रशासनी कंपनियों की कमाई, सस्ता क्रूड भी नहीं बढ़ा पाएगा मुनाफा 2 Fact check: फैलाई जा रही है मोहन भागवत की नया विचार के Logo वाली भ्रामक तस्वीर The post रूसी तेल पर प्रतिबंध से घटेगी प्रशासनी कंपनियों की कमाई, सस्ता क्रूड भी नहीं बढ़ा पाएगा मुनाफा appeared first on Naya Vichar.

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