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December 22, 2025

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Hospital Operating Room Colors: आखिर क्यों हरे-नीले रंग के कपड़े पहनते हैं डॉक्टर्स? जानें सबकुछ

Hospital Operating Room Colors: ऑपरेशन थिएटर में कदम रखते ही चारों तरफ हरे और नीले रंग का दृश्य देखने को मिलता है. डॉक्टर, नर्स, पर्दे और चादरें—सब एक ही रंग परिवार में नजर आते हैं. यह सिर्फ परंपरा नहीं है, बल्कि इसके पीछे वैज्ञानिक, मनोवैज्ञानिक और व्यावहारिक कारण छिपे हैं. आइए जानते हैं क्यों सर्जरी में ये रंग इतने जरूरी हैं. मरीज की सुरक्षा और रंगों का नियम दुनिया के लगभग हर अस्पताल में सर्जरी के समय डॉक्टर हरे या नीले स्क्रब पहनते हैं. यह सामान्य लग सकता है, लेकिन वास्तव में यह डॉक्टरों की आंखों, मानसिक फोकस और मरीज की सुरक्षा से जुड़ा है. ऑपरेशन थिएटर में रंगों का चयन सिर्फ सौंदर्य के लिए नहीं, बल्कि वैज्ञानिक कारणों से किया जाता है. सफेद से हरे-नीले तक का सफर शुरुआत में डॉक्टर सफेद कोट पहनते थे, क्योंकि सफेद रंग स्वच्छता और पवित्रता का प्रतीक माना जाता था. लेकिन 1914 के आसपास सर्जनों ने महसूस किया कि लगातार खून देखने से आंखों पर जोर बढ़ता है और सफेद पृष्ठभूमि पर लाल रंग अधिक चुभता है. तब से धीरे-धीरे हरे और नीले रंग का उपयोग बढ़ा. आंखों और दिमाग का विज्ञान जब मानव आंख लंबे समय तक लाल रंग देखती है, तो उसमें कलर फटीग (रंगों से थकान) होने लगता है. सर्जरी के दौरान खून और लाल ऊतकों पर ध्यान केंद्रित करना पड़ता है. हरा और नीला रंग लाल रंग के विपरीत होते हैं, जिससे आंखों को संतुलन मिलता है और विजुअल क्लैरिटी बनी रहती है. मानसिक शांति और फोकस हरा और नीला रंग आंखों के साथ दिमाग को भी सुकून देते हैं. ये रंग तनाव कम करते हैं और एकाग्रता बढ़ाते हैं, जिससे सर्जरी के दौरान डॉक्टरों के निर्णय लेने की क्षमता बेहतर होती है.ऑपरेशन थिएटर में तेज आर्टिफिशियल लाइट होती है। सफेद या चमकीले रंग ज्यादा रिफ्लेक्शन करते हैं, जिससे आंखों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है. हरे और नीले रंग कम रिफ्लेक्शन पैदा करते हैं और डॉक्टरों को लंबे समय तक बिना थकान काम करने में मदद करते हैं. The post Hospital Operating Room Colors: आखिर क्यों हरे-नीले रंग के कपड़े पहनते हैं डॉक्टर्स? जानें सबकुछ appeared first on Naya Vichar.

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Bihar News: बिहार में घूस लेते रंगे हाथ पकड़ी गई भ्रष्ट महिला अधिकारी, हुई कार्रवाई तो बहाए आंसू

Bihar News: बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही मुहिम के तहत निगरानी विभाग ने एक बार फिर बड़ी कार्रवाई की है. पूर्वी चंपारण जिले के केसरिया प्रखंड में निगरानी विभाग की टीम ने घूस लेते हुए एक स्त्री अधिकारी को रंगे हाथ गिरफ्तार किया है. स्त्री अधिकारी 4 हजार रुपये रिश्वत ले रही थीं. उसी दौरान निगरानी की टीम ने उन्हें दबोच लिया, जिससे पूरे इलाके में हड़कंप मच गया. सुपरवाइजर के पद पर तैनात है स्त्री निगरानी विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, गिरफ्तार स्त्री अधिकारी का नाम अंबालिका कुमारी है. जो केसरिया में बाल विकास परियोजना कार्यालय में स्त्री सुपरवाइजर के पद पर तैनात है. आरोप है कि उसने अपने कार्य से संबंधित लाभ दिलाने के एवज में शिकायतकर्ता से रिश्वत की मांग की थी. पीड़ित की शिकायत के बाद निगरानी विभाग ने पूरी योजना के तहत जाल बिछाया और तय रकम लेते ही स्त्री अधिकारी को पकड़ लिया. कार्रवाई के दौरान छलके आंसू जैसे ही निगरानी टीम ने स्त्री अधिकारी को हिरासत में लिया, वह घबरा गई और अपना चेहरा छिपाने लगी. कार्रवाई के दौरान उसके आंसू भी छलक पड़े, लेकिन निगरानी विभाग की टीम ने पूरे मामले में सख्ती बरती और किसी भी तरह की नरमी नहीं दिखाई. आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए उसे हिरासत में लिया गया और पूछताछ की जा रही है. पूछताछ और कानूनी कार्रवाई जारी निगरानी विभाग की टीम ने रिश्वत की राशि बरामद कर ली है और आगे की जांच शुरू कर दी गई है. टीम यह भी पता लगाने में जुटी है कि स्त्री अधिकारी पहले भी इस तरह की गतिविधियों में शामिल रही है या नहीं. संबंधित दस्तावेजों की जांच की जा रही है और जल्द ही उसे न्यायालय में पेश किया जाएगा. भ्रष्टाचारियों पर लगातार शिकंजा गौरतलब है कि निगरानी विभाग इन दिनों राज्यभर में भ्रष्ट अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ लगातार कार्रवाई कर रहा है. हालिया घटनाएं यह संकेत देती हैं कि प्रशासन और निगरानी विभाग भ्रष्टाचार को किसी भी स्तर पर बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है. इस कार्रवाई के बाद प्रशासनी महकमे में भी खलबली मची हुई है और कर्मचारियों में सतर्कता बढ़ गई है. Also Read: Success Story: धोनी की सलाह ने बदली इजहार की किस्मत, साकिब के लिए मां ने गिरवी रखे थे गहने… बिहार के दो क्रिकेटरों की कहानी The post Bihar News: बिहार में घूस लेते रंगे हाथ पकड़ी गई भ्रष्ट स्त्री अधिकारी, हुई कार्रवाई तो बहाए आंसू appeared first on Naya Vichar.

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Good News For Kisan : झारखंड के किसानों को जल्द मिल सकती है खुशखबरी, सिंचाई के लिए बनेगी नीति

Good News For Kisan : झारखंड के जल संसाधन मंत्री हफीजुल हसन अंसारी ने कहा कि हम भी किसान हैं. पुरखों से किसानी कर रहे हैं. खूब अनाज भी उपजाते हैं. लेकिन, प्रशासन के भरोसे नहीं रहते हैं. खेती प्रशासन के भरोसे नहीं हो सकती है. इसके कई उदाहरण हैं. आदिवासी खुद गांव में डोभा बनाते हैं. खेती करते हैं. राज्य में पानी की कमी नहीं है. लेकिन, इसको रोकना होगा. इसके लिए सिंचाई नीति बनायेंगे. मुख्यमंत्री के साथ सिविल सोसाइटी के लोगों के साथ मिलकर बैठेंगे. मंत्री अंसारी रविवार को कांके के विश्वा सभागार में झारखंड में समावेशी जल प्रबंधन और जलवायु अनुकूल कृषि पर आयोजित राज्यस्तरीय कार्यशाला में बोल रहे थे. मंत्री ने कहा कि खेती करने का अब पुराना जमाना नहीं रहा. खेती में भी किसान समय नहीं देना चाहते हैं. अब मेहनत नहीं करना चाहते हैं. वह चाहते हैं कि सब जल्दी हो जाये. ऐसा नहीं हो सकता है. जल है, पर प्रबंधन ठीक नहीं हार्प प्लांडू के पूर्व प्रधान डॉ शिवेंद्र कुमार ने कहा कि झारखंड में 1100 से 1300 मिमी के आसपास बारिश होती है. एक फसल के लिए 300 से 400 मिमी बारिश चाहिए. झारखंड में जितनी बारिश होती है, उससे हम तीन फसल ले सकते हैं. लेकिन, खरीफ के बाद रबी में खेत खाली रह जाता है. असल में पानी का प्रबंधन ठीक नहीं है. पर्यावरण को सुरक्षित रखेंगे, तो जल भी व्यवस्थित रहेगा पद्मश्री चामी मुर्मू ने कहा कि पर्यावरण को सुरक्षित रखेंगे, तो जल भी व्यवस्थित रहेगा. जल नहीं रहेगा, तो संस्कृति और परंपरा को भी नुकसान होगा. घनश्याम ने कहा कि सिंचाई की समुचित व्यवस्था पर नीति के लिए वन, ग्रामीण विकास, कृषि, जल संसाधन व भू राजस्व विभाग को एक साथ बैठना चाहिए. समाजसेवी बलराम ने कहा कि कोई भी नीति क्षेत्र को ध्यान में रखकर बनायी जानी चाहिए. इसमें जन भागीदारी होनी चाहिए. इस मौके पर सौरव, सतीश टुडू, वामिका सिन्हा, वर्णाली, सालेम मार्डी व नसरीन ने भी अपने विचार रखे. कार्यक्रम का संचालन प्रदान के प्रेम शंकर ने किया. The post Good News For Kisan : झारखंड के किसानों को जल्द मिल सकती है खुशसमाचारी, सिंचाई के लिए बनेगी नीति appeared first on Naya Vichar.

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अभी जारी रहने वाली है सोने-चांदी की चमक

Gold- Silver Rate : वर्ष 2025 बहुमूल्य धातुओं के लिए बहुत ही उम्दा साल रहा और इनकी कीमतें लगातार बढ़ती रहीं. सोना तो इस साल 54 फीसदी बढ़ गया, जबकि चांदी की कीमत दो लाख रुपये प्रति किलोग्राम से ऊपर जाकर 2,14,000 रुपये तक जा पहुंची हैं और अब भी इसके बारे में कयास लगाये जा रहे हैं. सोने की कीमत में इस साल की आखिरी तिमाही में भारी उछाल आया और यह स्थिति बरकरार है. यही हाल चांदी का है. दरअसल इलेक्ट्रिक वाहनों के बढ़ते उत्पादन और स्मार्टफोन में इसके इस्तेमाल के कारण चांदी की कीमत छलांग लगा रही है और यह तेजी जारी रहने वाली है. जेपी मॉर्गन ग्लोबल रिसर्च की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि आम खुदरा खरीदारों के अलावा विभिन्न देशों के सेंट्रल बैंक बड़े पैमाने पर सोना खरीद रहे हैं, जिस कारण सोना मजबूत बना रहेगा. दरअसल हर देश अपने रिजर्व में डॉलर के अलावा सोना रखता है, ताकि विपरीत परिस्थितियों में वित्तीय स्थिति को स्थिरता दे सके. सोने की अतिरिक्त खरीद उन्हें आर्थिक अनिश्चितता से मुक्त रखने में मदद करता है. इस कारण अनेक सेंट्रल बैंक डॉलर की बजाय सोने को रिजर्व के तौर पर तरजीह दे रहे हैं, जिससे इसकी कीमतों में इजाफा हुआ है. केंद्रीय बैंक जब भी खरीदारी करते हैं, तो उससे सोने के दाम और बढ़ जाते हैं. यह सेंटीमेंट अभी बरकरार है, इसलिए आने वाले समय में भी सोने की खरीदारी जारी रहेगी. दुनियाभर में चल रहे युद्ध और आर्थिक संकटों के कारण सेंट्रल बैंक सोने की तरफ झुक रहे हैं. इसका उन्हें फायदा भी मिल रहा है, क्योंकि सोने के दाम बढ़ रहे हैं और डॉलर के गिर रहे हैं. सेंट्रल बैंकों ने इस साल की खासकर तीसरी तिमाही में काफी सोना खरीदा. अनुमान यह है कि दुनिया के कुल स्वर्ण भंडार का 20 प्रतिशत से भी ज्यादा यानी लगभग 36,000 टन सोना सेंट्रल बैंकों के पास है. सेंट्रल बैंकों के अलावा बड़े निवेशक दीर्घ काल के लिए सोने की खरीदारी कर रहे हैं. वे तमाम एसेट के अलावा सोने में भी एक हिस्सा निवेश करते हैं. वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए वे लंबी पोजीशन ले रहे हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि सोने के दाम अभी बढ़ेंगे. जेपी मॉर्गन की रिपोर्ट में बताया गया है कि 2026 में 250 टन सोना इटीएफ के जरिये खरीदा जा सकता है, जबकि सोने की छड़ों और सिक्कों की मांग 1,200 टन से भी ज्यादा हो सकती है. हिंदुस्तानीय रिजर्व बैंक के पास इस समय 880.8 टन सोना है और इसकी मात्रा लगातार बढ़ती जा रही है. दूसरी ओर चीन के पास 2,300 टन सोना है. हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि चीन के पास 5,000 टन से भी ज्यादा सोना है, लेकिन वह इस बारे में कोई जानकारी नहीं देता है. चीन की मंशा दरअसल डॉलर पर निर्भरता धीरे-धीरे घटाने की है और वह इसमें कुछ हद तक सफल भी हो रहा है. कुछ साल पहले चीन ने अपने नागरिकों को भी सोना खरीदने के लिए प्रेरित किया था, जबकि वहां सोने के गहनों का कोई चलन नहीं है. इसके बावजूद लोगों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए सोने की खरीद के लिए प्रेरित किया जाता है. इसके विपरीत, हिंदुस्तान में सोने की खुदरा मांग बहुत ज्यादा है, क्योंकि हर परिवार सोने के गहने खरीदता रहता है और बेटियों की शादी में सोना देना एक सामाजिक कर्तव्य माना जाता है, क्योंकि सोना संकट में साथ देता है. हिंदुस्तानीयों के पास कितना सोना है, इसके सही आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं, लेकिन अनुमान है कि यह आंकड़ा 25,000 टन से भी ज्यादा है, जो पाकिस्तान की कुल जीडीपी से भी ज्यादा है. सोने के दाम बेहद बढ़ जाने के कारण इन दिनों अपने यहां व्यक्तिगत खरीदारी बेशक कम हो गयी है, लेकिन इस पर ब्रेक नहीं लगा है. शादी-ब्याह में लोगों का बजट तो वही है, लेकिन सोने की महंगाई से कुल खरीदारी पर असर साफ पड़ रहा है. यही हाल चांदी का है, जिसके सिक्के शादियों में तो दिये ही जाते हैं, दिवाली में भी दिये जाते हैं. लेकिन इस साल ऐसा कम ही हुआ, क्योंकि चांदी की कीमत बहुत ज्यादा हो गयी थी. वैसे में, लोगों का बजट छोटा पड़ गया. इसका बुरा असर चांदी के सामान बेचने वालों पर पड़ा है और बिक्री काफी घट गयी है. राजधानी दिल्ली के सर्राफा बाजार कूचा महाजनी में चांदी की बिक्री में काफी कमी आई है. खुदरा ग्राहक गायब हैं और वे सही समय का इंतजार कर रहे हैं कि चांदी के दाम घटें.सोने की कीमत कुछ हद तक अमेरिका की आर्थिक स्थिति पर भी निर्भर करती है. अभी वहां ब्याज दरों में गिरावट हुई है, जिस कारण निवेशकों का रुझान सोने की ओर है. डॉलर में गिरावट के कारण भी सोने में मजबूती है. हिंदुस्तान में डॉलर महंगा है, क्योंकि अमेरिका को निर्यात घटने से डॉलर कम आ रहे हैं. इस कारण भी सोना महंगा है, क्योंकि हम सोने का आयात करते हैं, जिसके लिए डॉलर चाहिए. फिलहाल रूस-यूक्रेन युद्ध न थमने तक तो सोने-चांदी के दाम घटने के आसार नहीं हैं.(ये लेखक के निजी विचार हैं.) The post अभी जारी रहने वाली है सोने-चांदी की चमक appeared first on Naya Vichar.

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School Holiday : यूपी के इन जिलों में स्कूलों में दी गई छुट्टी, ठंड से बच्चे थे परेशान

School Holiday : उत्तर प्रदेश में कड़ाके की ठंड को देखते हुए कई जिलों में स्कूल बंद करने का फैसला लिया गया है. यहां 22 से 24 दिसंबर तक छुट्टी घोषित की गई है. वहीं कुछ जिलों में स्कूलों के समय में बदलाव किया गया है. आइए इस सबंध में जानते हैं विस्तार से. अंबेडकरनगर में स्कूल बंद किए गए अंबेडकरनगर जिले में सर्दी तेजी से बढ़ गई है और सोमवार सुबह भी कड़ाके की ठंड से लोग परेशान हैं. ठंड और घने कोहरे को देखते हुए जिलाधिकारी अनुपम शुक्ला ने नर्सरी से कक्षा 12 तक सभी बोर्ड के स्कूलों में 22, 23 और 24 दिसंबर को अवकाश घोषित कर दिया है. इससे बच्चों को कुछ राहत मिली है. संत कबीरनगर में छुट्टी कड़ाके की ठंड को देखते हुए संत कबीर नगर जिले में जिलाधिकारी ने बच्चों के हित में फैसला लिया है. 22 दिसंबर को क्लास 1 से 8 तक के सभी स्कूल बंद रखने का आदेश दिया गया है. यह भी पढ़ें : School Holiday : झारखंड के स्कूलों के समय में होगा बदलाव या कर दी जाएगी छुट्टी फर्रुखाबाद में दो दिन की छुट्टी फर्रुखाबाद में बढ़ती सर्दी को देखते हुए जिलाधिकारी आशुतोष कुमार द्विवेदी ने स्कूल बंद करने का आदेश दिया है. बेसिक शिक्षा अधिकारी विश्वनाथ प्रताप सिंह ने इस संबंध में जानकारी दी है. उन्होंने बताया कि डीएम की अनुमति के बाद जिले के सभी परिषदीय, सहायता प्राप्त, मान्यता प्राप्त, सीबीएसई और आईसीएसई बोर्ड के स्कूल दो दिन के लिए बंद रहेंगे. नर्सरी से क्लास 12 तक के सभी स्कूलों में 22 और 23 दिसंबर को छुट्टी रहेगी, ताकि बच्चों की सेहत सुरक्षित रह सके. स्कूलों का समय बदल दिया गया रायबरेली में दो दिन की छुट्टी रायबरेली में बढ़ती ठंड को देखते हुए जिलाधिकारी हर्षिता माथुर ने स्कूलों को लेकर निर्देश जारी किए हैं. बेसिक शिक्षा अधिकारी राहुल सिंह ने बताया कि डीएम के आदेश के अनुसार प्री-प्राइमरी से कक्षा 8 तक चलने वाले सभी परिषदीय, केजीबीवी, सहायता प्राप्त, राजकीय मान्यता प्राप्त और सभी बोर्ड के स्कूल 22 और 23 दिसंबर को बंद रहेंगे. यह फैसला बच्चों की सुरक्षा और सेहत को ध्यान में रखकर लिया गया है. झांसी में स्कूलों का समय बदल दिया गया झांसी में बढ़ती सर्दी को देखते हुए जिलाधिकारी मृदुल चौधरी ने स्कूलों के समय में बदलाव के आदेश दिए हैं. कक्षा 1 से 8 तक के सभी छात्रों के लिए स्कूल अब सुबह 10 बजे से दोपहर 3 बजे तक संचालित होंगे. The post School Holiday : यूपी के इन जिलों में स्कूलों में दी गई छुट्टी, ठंड से शिशु थे परेशान appeared first on Naya Vichar.

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बांग्लादेश में भारत-विरोध अपने चरम पर

Bangladesh : ढाका में कट्टरपंथी छात्र नेता शरीफ उस्मान हादी की मौत के पश्चात बांग्लादेश में हुए हिंसक प्रदर्शन और विरोध, हिंदू युवक दीपचंद्र दास की पीट-पीटकर हत्या, व्यापक आगजनी, कुछ मीडिया संस्थानों पर हमले और हिंदुस्तान विरोधी प्रदर्शन स्पष्ट संकेत दे रहे हैं कि बांग्लादेश में व्यापक अशांति का जो दौर 2024 में शेख हसीना प्रशासन के विरोध के रूप में शुरू हुआ था, वह अभी थमा नहीं है. अंतरिम प्रशासन के गठन के एक साल से अधिक होने बाद भी वहां स्थिति ज्यों की त्यों बनी हुई है. इस्लामी कट्टरपंथी पार्टियों का बोलबाला बढ़ रहा है. कुख्यात पाक खुफिया एजेंसी आइएसआइ का असर हाल के दौर में वहां बढ़ा है. बांग्लादेश-पाकिस्तान की दोस्ती की बातें हो रही हैं और अवामी लीग के विरोध के साथ-साथ हिंदू और हिंदुस्तान विरोध अपने चरम पर है. ऐसे में, हिंदुस्तान-बांग्लादेश के रिश्तों में उतार-चढ़ाव जारी है. बांग्लादेश के प्रमुख समाचारपत्रों ‘प्रोथोम आलो’ और ‘द डेली स्टार’ के कार्यालयों पर हिंसक हमले तथा सांस्कृतिक संस्था ‘छायानट’ में तोड़फोड़ केवल मीडिया से जुड़े लोगों की सुरक्षा का मामला नहीं है, यह लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर हमला है तथा बांग्लादेश में लोकतंत्र की बहाली में बाधा डालने का सुनियोजित प्रयत्न है. कुछ मीडिया घरानों को निशाना बना कर निश्चित रूप से उदार और सर्वदेशीय विचार को हतोसाहित करने का प्रयत्न किया गया है. जबकि यूनुस प्रशासन इन कट्टरपंथी प्रदर्शनकारियों और विध्वंसकारियों पर नकेल कसने में अभी तक विफल साबित हुई है. ऐसे में, यह सवाल उठता है कि मोहम्मद यूनुस प्रशासन बांग्लादेश में लोकतंत्र की बहाली को लेकर अभी तक क्या सचमुच गंभीर रही है. बांग्लादेश के हालात अंतरिम प्रशासन के मुखिया यूनुस की विवशता बताते हैं, या फिर यूनुस प्रशासन की नीति यही है? बांग्लादेश में यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम प्रशासन के गठन का मुख्य उद्देश्य था जल्द से जल्द निष्पक्ष चुनाव करा कर नयी लोकतांत्रिक प्रशासन का गठन करना. लेकिन यह पूरी तरह स्पष्ट है कि यूनुस प्रशासन कट्टरपंथियों के प्रति नरम रुख अपना रही है और उसकी नीतियों से जमात-ए-इस्लामी बांग्लादेश और उससे संबद्ध छात्र शिविर से जुड़े प्रर्दशनकारियों और दंगाइयों को बढ़ावा मिल रहा है. अवामी लीग के शीर्ष नेतृत्व का मानना है कि हाल के दिनों में बांग्लादेश में स्थिति काफी बिगड़ गई है और बदली हुई स्थिति ने जेहादियों और कट्टरपंथी तत्वों को मुख्यधारा में प्रवेश करने की अनुमति दी है. छात्र नेता शरीफ उस्मान हादी को मिला अपार समर्थन इसी का सबूत थी. उस्मान हादी ने शेख हसीना के इस्तीफे के बाद बांग्लादेश में काफी लोकप्रियता हासिल की थी और अपनी नेतृत्वक सफलता के लिए हिंदुस्तान-विरोधी लहर का फायदा उठाया था. देर से ही सही, बांग्लादेश के चुनाव आयोग ने आम चुनाव की तारीखों की घोषणा की, लेकिन देश की स्थिति, सुरक्षा संबधी चिंताओं, और अंतरिम प्रशासन के रवैये को देखते हुए आयोग की स्वतंत्र व निष्पक्ष चुनाव कराने की क्षमता पर निरंतर सवाल उठाये जा रहे हैं. बांग्लादेश में फिर से हुए व्यापक अशांति, विद्रोह और हिंसक प्रदर्शन से हिंदुस्तान की चिंता बढ़ गयी है कि वहां अगले साल फरवरी में चुनाव सफलता से संपन्न हो भी पायंगे या नहीं. दरअसल हिंदुस्तान के हित बांग्लादेश में लोकतंत्र की बहाली के साथ जुड़े हुए हैं. हिंसक प्रदर्शन, बांग्लादेशी हिदुओं की सुरक्षा की चिंता, हिंदुस्तान-विरोधी बयानबाजी, सीमा की सुरक्षा एवं घुसपैठ, द्विपक्षीय रिश्तों में अस्थायित्व और इस्लामी कट्टरपंथियों का उभार तो चिंता के विषय हैं ही, बांग्लादेश की भू-नेतृत्वक स्थिति भी आशंकित करती है. चीन भी मौके का फायदा उठाने में पीछे नहीं हट रहा. हिंदुस्तान के विदेश मामलों की स्थायी समिति की रिपोर्ट में पिछले दो वर्षों के हिंदुस्तान-बांग्लादेश संबंधों की अस्थिरता का व्यापक विश्लेषण किया गया है. समिति का यह मानना है कि बांग्लादेश में परिवर्तन हो रहा है और आवश्यक समायोजन के बिना हिंदुस्तान बांग्लादेश में अपना वर्तमान रणनीतिक लाभ खो सकता है. और हिंदुस्तान की रणनीतिक हानि चीन के लिए लाभ साबित होगी. शेख हसीना के इस्तीफे के बाद चीन के राजदूत की बीएनपी और जमात के नेताओं से मुलाकात और प्रशंसा छिपी हुई बात नहीं थी. अमेरिका भी बंगाल की खाड़ी में स्थित रणनीतिक सेंट मार्टिन द्वीप को बांग्लादेश से लीज पर लेने में रुचि दिखा रहा है. बंगाल की खाड़ी में अमेरिका और चीन के बढ़ते प्रभाव को हिंदुस्तान अपनी रणनीति से किस तरह संतुलित करेगा, यह देखना दिलचस्प होगा. शेख हसीना के इस्तीफे के बाद बांग्लादेश के साथ द्विपक्षीय रिश्तों में स्थायित्व लाने की भरपूर कोशिश हिंदुस्तान कर रहा है, लेकिन यूनुस प्रशासन से अपेक्षित सहयोग नहीं मिल पा रहा. बल्कि हाल की कुछ घटनाओं से लगता है कि बांग्लादेश चुनाव से पहले हिंदुस्तान को उकसाने की कोशिश कर रहा है. बांग्लादेशी नौसेना के एक जहाज द्वारा मछली पकड़ने वाली एक हिंदुस्तानीय नाव को टक्कर मारने, बंगाल की खाड़ी में हिंदुस्तानीय जलक्षेत्र में बांग्लादेशी मछली पकड़ने वाली नावों की संख्या में लगातार वृद्धि इसके उदाहरण हैं. बांग्लादेश की अंतरिम प्रशासन के साथ द्विपक्षीय रिश्तों के मामले में हिंदुस्तान ने परिपक्व और संतुलित विदेश नीति का प्रदर्शन किया है और गंभीर चुनौतियों के बावजूद प्रतिक्रियावादी दृष्टिकोण को प्राथमिकता नहीं दी गयी है. इसके बजाय हिंदुस्तान की ‘नेवरहुड फर्स्ट’ पॉलिसी में फिलहाल वेट एंड वाच की नीति अपनाई गयी है. इसकी वजह यह है कि हिंदुस्तान-बांग्लादेश के बीच बिगड़ते रिश्ते पाकिस्तान और चीन के लिए फायदेमंद साबित हो सकते हैं. हिंदुस्तान एक जिम्मेदार तथा दक्षिण एशिया के आर्थिक विकास के लिए सजग देश है. इसे पता है कि दक्षिण एशिया के विकास में बांग्लादेश का योगदान अहम है. दक्षिण एशिया के विकास के लिए बिम्सटेक जैसे मंचों की महत्ता का हिंदुस्तान को पता है, इसलिए पूरे क्षेत्र और उपक्षेत्र के विकास को ध्यान में रख कर वह अपनी बांग्लादेश नीति को दिशा दे रहा है. हिंदुस्तान के लिए बंगाल की खाड़ी की सुरक्षा और शांति भी अहम है. बांग्लादेश से जुड़ी बंदरगाह कनेक्टिविटी परियोजना में कोई बड़ी बाधा न आये, यह हिंदुस्तान की प्राथमिकता है. पोर्ट कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट्स में बाधा से नेपाल, भूटान, हिंदुस्तान और बांग्लादेश प्रभावित हो सकते हैं. हिंदुस्तान चाहता है कि बांग्लादेश में शांति हो, कट्टरपंथी प्रशासन पर हावी न रहें, प्रशासन बांग्लादेशी हिंदुओं को सुरक्षा प्रदान करे, जल्द से जल्द लोकतंत्र की बहाली हो और द्विपक्षीय रिश्तों

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Chanakya Niti: क्या आपके आसपास भी हैं टॉक्सिक लोग? चाणक्य नीति से जानें बचाव के अचूक तरीके

Chanakya Niti: जीवन में खासतौर पर दोस्ती, ऑफिस कलीग्स और रिश्तों में – टॉक्सिक लोग (toxic people) अपनी फेक मुस्कान के पीछे नकारात्मकता छिपाकर हमारी मानसिक शांति और ऊर्जा को धीरे-धीरे खत्म कर देते हैं. चाणक्य नीति सिखाती है कि ऐसे लोगों को पहचानना और उनसे दूरी बनाना कमजोरी नहीं, बल्कि आत्मरक्षा का सबसे बेहतरीन उपाय है. चाणक्य नीति से जाने टॉक्सिक लोगों से कैसे बचें और अपनी ऊर्जा व आत्मसम्मान को कैसे सुरक्षित रखें. Chanakya Niti के अनुसार टॉक्सिक लोगों से कैसे बचें? Chanakya niti tips to avoid toxic people 1. झूठी मुस्कान से धोखा न खाएं चाणक्य कहते हैं कि हर मुस्कुराता चेहरा शुभ नहीं होता. टॉक्सिक लोग अक्सर मीठी बातों और दिखावटी व्यवहार से आपके पास आते हैं, लेकिन भीतर से आपकी ऊर्जा खींचते रहते हैं. 2. जितना हो सके नकारात्मक संवाद से दूरी बनाएं लगातार शिकायत, ताना, ईर्ष्या और आलोचना – ये सब मानसिक ऊर्जा को नष्ट करते हैं. चाणक्य नीति के अनुसार, ऐसे संवाद से दूरी बनाना ही बुद्धिमानी है. 3. स्पष्ट सीमाएं (Boundaries) तय करें याद रखें जो आपकी तय की गई सीमाओं का सम्मान नहीं करता, वह आपके जीवन का सम्मान नहीं करता. चाणक्य के अनुसार, सीमाएं बनाना असभ्यता नहीं बल्कि आत्मरक्षा है. 4. मौन को अपना हथियार बनाएं हर उकसावे पर प्रतिक्रिया देना जरूरी नहीं. कई बार मौन ही सबसे बड़ा उत्तर होता है. इससे टॉक्सिक लोग आपकी ऊर्जा तक नहीं पहुँच पाते. 5. खुद को प्राथमिकता देना सीखें चाणक्य नीति साफ कहती है – अपनी मानसिक शांति और ऊर्जा की रक्षा करना स्वार्थ नहीं, कर्तव्य है. आत्म-देखभाल (Self-care) ही असली शक्ति है. क्यों ज़रूरी है टॉक्सिक लोगों से दूरी बनाना? How to deal with toxic people according to chanakya niti वे आपकी मानसिक शांति छीन लेते हैं आत्मविश्वास को कमजोर करते हैं कार्यक्षमता और रिश्तों दोनों पर नकारात्मक असर डालते हैं धीरे-धीरे आपकी सकारात्मक ऊर्जा को खत्म कर देते हैं Chanakya Niti Quotes: चाणक्य नीति के प्रेरणादायक विचार हर मुस्कुराता चेहरा शुभ नहीं होता, हर परिचित व्यक्ति हितैषी नहीं होता और हर संबंध निभाने योग्य नहीं होता. मनुष्य की सबसे मूल्यवान संपत्ति समय नहीं, उसकी ऊर्जा होती है. सीमा खींचना असभ्यता नहीं, आत्मरक्षा है. अपनी ऊर्जा, मानसिक शांति और गरिमा की रक्षा करना स्वार्थ नहीं, कर्तव्य है. आज के तनावपूर्ण जीवन में चाणक्य नीति आत्मरक्षा, मानसिक संतुलन और स्वस्थ रिश्तों का सबसे सशक्त मार्गदर्शन देती है. Also Read: Chanakya Niti: झूठे और धोखेबाज़ लोग ही करते है ये 7 तरह की बातें Also Read: Chanakya Niti: जीवन में कभी हारने नहीं देंगी आचार्य चाणक्य की पावरफुल नीतियां Disclaimer: यह आर्टिकल सामान्य जानकारियों और मान्यताओं पर आधारित है. नया विचार किसी भी तरह से इनकी पुष्टि नहीं करता है. The post Chanakya Niti: क्या आपके आसपास भी हैं टॉक्सिक लोग? चाणक्य नीति से जानें बचाव के अचूक तरीके appeared first on Naya Vichar.

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New Year Gift Ideas For Parents: इस न्यू ईयर माता-पिता के लिए करें कुछ स्पेशल, चुनें गिफ्ट देने के लिए ये आइडियाज 

New Year Gift Ideas For Parents: कुछ ही दिनों में हम सभी पुराने साल को अलविदा कहकर पूरे उत्साह और खुशियों के साथ नए साल का दिल से स्वागत करने जा रहे हैं. इस खास मौके पर लोग अपने प्रियजनों को शुभकामनाएं देते हैं, साथ ही प्यार और अपनापन जताने के लिए एक-दूसरे को गिफ्ट भी देते हैं. न्यू ईयर अपनों के साथ समय बिताने और उन्हें खास महसूस कराने का सबसे अच्छा अवसर होता है. खासकर माता-पिता, जिन्होंने हमें जीवन में हर कदम पर प्यार और सहारा दिया है, उनके चेहरे पर मुस्कान लाने के लिए यह दिन और भी खास होता है. ऐसे में अगर आप नए साल पर अपने माता-पिता को कोई प्यारा-सा गिफ्ट देना चाहते हैं तो ये आर्टिकल आपके काम की है. आज हम आपको नए साल में माता-पिता को गिफ्ट करने के लिए कुछ बेहतरीन आइडियाज के बारे में बताने जा रहे हैं.  हेल्थ गिफ्ट माता-पिता का स्वास्थ्य सबसे महत्वपूर्ण है. इसलिए आप उन्हें बीपी मशीन, शुगर चेकर या मसाजर दे सकते हैं. ये गिफ्ट उनके स्वास्थ्य की देखभाल में करने में मदद करेगा और उन्हें हमेशा काम भी आएगा.  कपड़े और फैशन से जुड़े सामान  न्यू के खास मौके पर आप मां के लिए साड़ी या सूट और पिता के लिए स्वेटर या जैकेट चुन सकते हैं. ये गिफ्ट नए साल के लिए बहुत अच्छा ऑप्शन है साथ ही ठंड के मौसम में इस तरह की गिफ्ट उनके काम में भी आएगा और उन्हें ये देखकर बहुत अच्छा भी लगेगा.  मोबाइल, स्मार्ट वॉच  अक्सर हमारे शौक पूरा करने की वजह से माता-पिता अपनी जरूरत को नजरअंदाज कर देते हैं. वो अपने लिए कभी महंगे फोन या घड़ी जल्दी नहीं खरीदते हैं. नए साल के खास अवसर पर आप उन्हें मोबाइल, स्मार्ट वॉच या म्यूजिक प्लेयर गिफ्ट कर सकते हैं. इसे देखकर उन्हें बहुत खुशी मिलेगी.  ठंड के लिए गिफ्ट नए साल के समय सर्दियों का मौसम रहता हैं. ऐसे में आप उनके काम में आने वाली चीज जैसे – थर्मस, कंबल या आरामदायक स्वेटर गिफ्ट कर सकते हैं.  ये भी पढ़ें: New Year Family Trip Ideas: नए साल का जश्न मनाने के लिए ड्रीम डेस्टिनेशन हैं हिंदुस्तान की ये जगहें ये भी पढ़ें: New Year House Party Ideas: नए साल का जश्न घर पर, अपनाएं ये शानदार हाउस पार्टी आइडियाज The post New Year Gift Ideas For Parents: इस न्यू ईयर माता-पिता के लिए करें कुछ स्पेशल, चुनें गिफ्ट देने के लिए ये आइडियाज  appeared first on Naya Vichar.

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Dhurandhar Box Office Collection: ‘‘एनिमल’ का रिकॉर्ड तोड़ने के बाद ‘धुरंधर’ की अगली चुनौती शाहरुख की यह फिल्म, जानें 18 दिनों में कितना कमा लिया

Dhurandhar Box Office Collection Day 18: रणवीर सिंह की फिल्म ‘धुरंधर’ बॉक्स ऑफिस पर धुरंधर निकली. फिल्म को रिलीज हुए 17 दिन हो गए और अभी तक इसने हर दिन डबल डिजिट में ही कमाई की. फिल्म की छप्परफाड़ कमाई ने इसे साल 2025 की हिट फिल्मों की लिस्ट में लाकर खड़ा कर दिया. दुनियाभर में आदित्य धर की मूवी ने 750 करोड़ रुपये से ज्यादा का कलेक्शन किया और घरेलू बॉक्स ऑफिस पर ये 500 करोड़ का आंकड़ा पार कर चुकी है. 18वें दिन का कलेक्शन रिपोर्ट आपको बताते हैं. 18वें दिन ‘धुरंधर’ ने ‘एनिमल’ के रिकॉर्ड को तोड़ा ‘धुरंधर’ की पकड़ बॉक्स ऑफिस पर काफी मजबूत है. Sacnilk की अर्ली रिपोर्ट के अनुसार, 18वें दिन मूवी ने अभी सिर्फ 0.13 करोड़ रुपये का कलेक्शन किया. ये सुबह 8 बजे के आंकड़े है और नाइट शोज के बाद इसके टोटल आंकड़े आएंगे. तो उम्मीद है कि फिल्म की कमाई जबरदस्त ही होगी. नेट कलेक्शन मूवी ने 555.63 करोड़ रुपये का कर लिया है. इस नंबर्स के साथ मूवी ने रणबीर कपूर और रश्मिका मंदाना की फिल्म एनिमल के लाइफटाइम कलेक्शन 553 करोड़ रुपये को पीछे छोड़ दिया है. अब इसकी नजर शाहरुख खान की फिल्म ‘जवान’ (640 करोड़) के रिकॉर्ड पर है. जानें ‘धुरंधर’ का डे वाइज कलेक्शन Day 1- 28 cr Day 2-32 cr Day 3- 43 cr Day 4- 23.25 cr Day 5- 27 cr Day 6- 26 cr Day 7- 27 cr Day 8- 32.5 cr Day 9- 53 cr Day 10- 58 cr Day 11- 30.5 cr Day 12- 30.5 cr Day 13- 25.5 cr Day 14- 23 cr Day 15- 22.5 cr Day 16- 34.25 cr Day 17- 38.25cr Day 18- 0.13 cr (अर्ली रिपोर्ट) टोटल कलेक्शन- 555.63 करोड़ रुपये इस फिल्म से होगी ‘धुरंधर’ की टक्कर ‘धुरंधर’ की टक्कर 25 दिसंबर 2025 को कार्तिक आर्यन और अनन्या पांडे की मूवी ‘तू मेरी मैं तेरा मैं तेरा तू मेरी’ से होगी. फिल्म का रनटाइम 2 घंटे, 25 मिनट और 41 सेकंड है. यह भी पढ़ें- Dhurandhar की ब्लॉकबस्टर सफलता के बीच एनिमल डायरेक्टर ने ‘धुरंधर’ का किया जबरदस्त रिव्यू, बोले- रणवीर-अक्षय हवा में घुल गए The post Dhurandhar Box Office Collection: ‘‘एनिमल’ का रिकॉर्ड तोड़ने के बाद ‘धुरंधर’ की अगली चुनौती शाहरुख की यह फिल्म, जानें 18 दिनों में कितना कमा लिया appeared first on Naya Vichar.

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Maharashtra Local Body Election: महाराष्ट्र में BJP की सुनामी, निकाय चुनाव में MVA की निकली हवा

Maharashtra Local Body Election: महाराष्ट्र और अरुणाचल प्रदेश में हुए निकाय चुनावों में हिंदुस्तानीय जनता पार्टी (भाजपा) ने शानदार और ऐतिहासिक जीत दर्ज की है. इन नतीजों ने न सिर्फ पार्टी नेतृत्व बल्कि जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं में भी जबरदस्त उत्साह भर दिया है. महाराष्ट्र में भाजपा के नेतृत्व वाली महायुति ने नगर परिषदों और नगर पंचायतों में रिकॉर्ड प्रदर्शन किया, जबकि अरुणाचल प्रदेश में भी पार्टी का दबदबा साफ नजर आया. महाराष्ट्र में महायुति की बड़ी जीत महाराष्ट्र में 288 नगर परिषदों और नगर पंचायतों के चुनाव में महायुति ने जबरदस्त प्रदर्शन किया है. भाजपा ने अकेले 3,325 सीटों पर जीत दर्ज की, जो कुल पार्षदों का करीब 48 फीसदी हिस्सा है. यह प्रदर्शन पार्टी के लिए अब तक का सबसे बेहतर माना जा रहा है. मेयर पदों पर भाजपा का दबदबा नगर परिषद अध्यक्षों के पदों पर भी महायुति का वर्चस्व रहा. करीब 75 फीसदी नगर परिषद अध्यक्ष महायुति के खाते में गए, जिनमें भाजपा के 129 मेयर शामिल हैं. इससे शहरी निकायों में पार्टी की मजबूत पकड़ साफ झलकती है. भाजपा ने 2017 के निकाय चुनावों में 1,602 सीटें जीती थीं, जबकि इस बार यह आंकड़ा दोगुने से भी ज्यादा हो गया. 3,325 सीटों की जीत ने पार्टी के संगठनात्मक विस्तार और बढ़ती लोकप्रियता को साबित कर दिया है. ग्रामीण इलाकों में भी भाजपा का जलवा इन चुनावों में भाजपा को ग्रामीण क्षेत्रों में भी बड़ी सफलता मिली. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बताया कि उन्होंने खुद कम आबादी वाले गांवों में जाकर प्रचार किया. उनके अनुसार, 2014 के बाद भाजपा शहरी केंद्रित पार्टी से आगे बढ़कर ग्रामीण महाराष्ट्र में भी गहरी जड़ें जमा चुकी है. विकास के मुद्दे पर मिला जनसमर्थन मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने किसी व्यक्ति, नेता या पार्टी पर व्यक्तिगत हमले नहीं किए. पार्टी ने सिर्फ विकास के मुद्दे पर वोट मांगे और अपनी पिछली उपलब्धियों व भविष्य की योजनाओं को जनता के सामने रखा. The post Maharashtra Local Body Election: महाराष्ट्र में BJP की सुनामी, निकाय चुनाव में MVA की निकली हवा appeared first on Naya Vichar.

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