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December 27, 2025

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केंद्रीय विद्यालय में पांच दिवसीय बैगलेस डे का समापन

सिमरिया. पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय में आयोजित पांच दिवसीय बैगलेस डे का शनिवार को समापन हुआ. कक्षा छह से आठ के विद्यार्थियों के लिए 23 से 27 दिसंबर तक बैगलेस डे का आयोजन किया गया. जिसका नेतृत्व शिक्षक जहांगीर आलम, विश्वकर्मा कुमार, चेतन प्रकाश सहित अन्य शिक्षकों ने किया. इस दौरान विभिन्न गतिविधियां आयोजित की गयी. आर्ट एंड क्राफ्ट की हैंड्स ऑन गतिविधि में विद्यार्थियों ने रंग, कागज, मिट्टी एवं अन्य सामग्री का उपयोग कर आकर्षक कलाकृतियां तैयार की. कुम्हार द्वारा चाक पर मिट्टी के बर्तन बनाने की प्रक्रिया का प्रदर्शन किया गया. मैथ्स किट व साइंस किट का प्रदर्शन किया गया. इलेक्ट्रिक सर्किट व विभिन्न परियोजनाओं का निर्माण कराया गया. विद्यार्थियों ने ड्रिप इरिगेशन सिस्टम, सोलर कार, स्ट्रीट लाइट तथा हाइड्रोलिक लांचर जैसे नवाचारी मॉडल तैयार किया. बच्चों को इको पार्क चतरा का भ्रमण कराया गया. मौके पर प्राचार्य मंटू कुमार ने कहा कि बैगलेस डे जैसी गतिविधियां बच्चों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं. डिस्क्लेमर: यह नया विचार समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे नया विचार डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है The post केंद्रीय विद्यालय में पांच दिवसीय बैगलेस डे का समापन appeared first on Naya Vichar.

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पाकुड़ की सिष्टी हांसदा बनी झारखंड अंडर-15 क्रिकेटर

संवाददाता, पाकुड़. झारखंड स्त्री अंडर-15 क्रिकेट टीम में पाकुड़ की सिष्टी हांसदा का चयन होना जिले के लिए गर्व का क्षण है. बीसीसीआई घरेलू स्त्री अंडर-15 वन-डे ट्रॉफी 2025–26 के लिए झारखंड राज्य क्रिकेट संघ द्वारा घोषित टीम में उनका नाम शामिल किया गया है. यह प्रतियोगिता 2 जनवरी से 10 जनवरी तक विशाखापत्तनम में आयोजित होगी. सिष्टी का चयन उनके निरंतर परिश्रम, अनुशासन और उत्कृष्ट स्पोर्ट्स प्रदर्शन का परिणाम है. राष्ट्रीय स्तर की इस प्रतियोगिता में वे पाकुड़ जिले का प्रतिनिधित्व करेंगी, जिससे जिले की पहचान और मजबूत होगी. इस अवसर पर उपायुक्त मनीष कुमार और जिला क्रीड़ा पदाधिकारी राहुल कुमार ने सिष्टी को हार्दिक शुभकामनाएं दीं. उन्होंने कोच, प्रशिक्षकों और अभिभावकों को भी बधाई देते हुए कहा कि उनके मार्गदर्शन और सहयोग से ही यह उपलब्धि संभव हो सकी है. उपायुक्त ने विश्वास जताया कि सिष्टी अपने प्रदर्शन से जिले का नाम राष्ट्रीय पटल पर रोशन करेंगी और अन्य बालिकाओं को स्पोर्ट्स में आगे बढ़ने की प्रेरणा देंगी. डिस्क्लेमर: यह नया विचार समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे नया विचार डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है The post पाकुड़ की सिष्टी हांसदा बनी झारखंड अंडर-15 क्रिकेटर appeared first on Naya Vichar.

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घुसियां कलां कबड्डी में 0.5 अकादमी ने जीता खिताब

फोटो कैप्शन- खिताब जितने वाली टीम के साथ आयोजक मंडल बिक्रमगंज. प्रखंड के घुसियां कलां गांव में क्रिसमस डे के अवसर पर आयोजित कबड्डी प्रतियोगिता में 0.5 अकादमी बिक्रमगंज की टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए खिताब अपने नाम किया. फाइनल मुकाबले में 0.5 अकादमी बिक्रमगंज ने कोआथ की टीम को 39–12 अंकों से पराजित किया. प्रतियोगिता के समापन अवसर पर मुख्य अतिथि भीम आर्मी रोहतास जिला प्रभारी गोल्डेन पासवान ने विजेता और उपविजेता टीम को कप देकर सम्मानित किया. उन्होंने खिलाड़ियों के प्रदर्शन की सराहना करते हुए विजेता टीम को बधाई दी. प्रतियोगिता के अन्य मुकाबलों में मोहनी ने तिलौथू को 35–20 से हराया. बिक्रमगंज की टीम ने घुसियां कलां को 50–12 अंकों से पराजित किया, जबकि सासाराम की टीम ने बिक्रमगंज यादव मुहल्ले को 45–35 से मात दी. आयोजन को सफल बनाने में ग्रामीणों का सराहनीय सहयोग रहा. प्रतियोगिता के आयोजक गौतम कुमार, प्रशांत कुमार, गोलू यादव और यस यादव रहे. डिस्क्लेमर: यह नया विचार समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे नया विचार डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है The post घुसियां कलां कबड्डी में 0.5 अकादमी ने जीता खिताब appeared first on Naya Vichar.

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टाउन हाइस्कूल में वोकेशनल कोर्स की पढ़ाई में खानापूर्ति

व्यावसायिक शिक्षा बेपटरी, एक शिक्षक के भरोसे प्रैक्टिकल व थ्योरी नामांकन लेने वाले छात्र परेशान, नयी शिक्षा नीति के उद्देश्य पर सवाल छठी कक्षा से वोकेशनल पढ़ाई का सपना कागजों में सिमटने की आशंका भभुआ नगर. नयी शिक्षा नीति के तहत छात्रों को पढ़ाई के साथ-साथ रोजगार परक बनाने के उद्देश्य से बिहार में अब छठी कक्षा से ही वोकेशनल कोर्स की पढ़ाई कराये जाने की योजना है. प्रशासन का दावा है कि इससे छात्रों में कौशल विकास होगा और वे आगे चलकर आत्मनिर्भर बन सकेंगे, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट नजर आ रही है. जिले का सबसे पुराना व प्रसिद्ध शैक्षणिक संस्थान भभुआ स्थित प्लस टू टाउन हाइस्कूल इस व्यवस्था की बदहाली का जीता-जागता उदाहरण बना हुआ है. अंग्रेजों के जमाने से मशहूर टाउन हाइस्कूल में करीब चार वर्ष पहले व्यावसायिक शिक्षा यानी वोकेशनल कोर्स का उद्घाटन बड़े उत्साह के साथ किया गया था. छात्रों का नामांकन भी हुआ और उम्मीद जगी कि स्थानीय स्तर पर तकनीकी व रोजगार परक शिक्षा का लाभ मिलेगा, लेकिन यह उम्मीद ज्यादा दिनों तक कायम नहीं रह सकी. उद्घाटन के महज एक वर्ष के भीतर ही व्यावसायिक शिक्षा के लिए प्रतिनियुक्त दो शिक्षक, एक थ्योरी व एक प्रैक्टिकल, अपने मूल पदस्थापन पर लौट गये. शिक्षकों के चले जाने के बाद विद्यालय में व्यावसायिक शिक्षा पूरी तरह से बेपटरी हो गयी, जो आज तक नहीं सुधर पायी है. हालात इतने खराब रहे कि दो वर्षों तक छात्रों को बिना नियमित पढ़ाई के ही व्यावसायिक विषय की परीक्षा देनी पड़ी. न तो समय पर थ्योरी की कक्षाएं हुई और न ही प्रैक्टिकल का समुचित अभ्यास कराया गया. इसका सीधा असर छात्रों की गुणवत्ता व कौशल पर पड़ना तय माना जा रहा है, जो नयी शिक्षा नीति के उद्देश्य पर ही सवाल खड़े करता है. हालांकि, विगत आठ महीनों से विद्यालय में एक शिक्षक की तैनाती की गयी है, लेकिन एक ही शिक्षक के भरोसे थ्योरी व प्रैक्टिकल दोनों की पढ़ाई कराना व्यावहारिक रूप से बेहद कठिन साबित हो रहा है. संसाधनों की कमी, लैब की सीमित सुविधा व अतिरिक्त कार्यभार के कारण पढ़ाई प्रभावित हो रही है. छात्रों का कहना है कि उन्हें केवल औपचारिकता निभाने के लिए पढ़ाया जा रहा है, जबकि व्यावसायिक शिक्षा का मूल उद्देश्य हाथों-हाथ कौशल सिखाना होता है. प्रशिक्षित शिक्षकों की तैनाती की उठी मांग इधर, जिले के कई शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ऐसी ही स्थिति बनी रही तो छठी कक्षा से वोकेशनल शिक्षा लागू करने का सपना केवल कागजों में ही सिमट कर रह जायेगा. स्थानीय अभिभावकों व छात्रों ने जिला शिक्षा विभाग से मांग की है कि टाउन हाइस्कूल में अविलंब कम से कम दो पूर्णकालिक प्रशिक्षित शिक्षकों की तैनाती की जाये और प्रैक्टिकल संसाधनों को दुरुस्त किया जाये. कुल मिलाकर, नयी शिक्षा नीति के तहत रोजगार परक शिक्षा का लक्ष्य तभी साकार हो सकता है, जब जमीनी स्तर पर शिक्षकों की पर्याप्त व्यवस्था व बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित की जायें, अन्यथा ऐसी योजनाएं सिर्फ घोषणाओं तक सीमित रह जायेगी. डिस्क्लेमर: यह नया विचार समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे नया विचार डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है The post टाउन हाइस्कूल में वोकेशनल कोर्स की पढ़ाई में खानापूर्ति appeared first on Naya Vichar.

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राजपुर में ठंड का कहर, अलाव नहीं जलने से लोग बेहाल

राजपुर. क्षेत्र में ठंड का प्रकोप दिनों-दिन तेजी से बढ़ता जा रहा है. तापमान लगातार अपने न्यूनतम स्तर की ओर बढ़ रहा है, जिससे जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है. ठंड के कारण लोगों के बीमार होने की गति भी तेज हो गयी है. इसके बावजूद राजपुर प्रखंड प्रशासन ठंड से अनजान बना हुआ है. क्षेत्र के लोग स्थानीय प्रशासन से चौक-चौराहों पर अलाव जलाने की मांग कर रहे हैं. बाजार निवासी भाजपा मंडल अध्यक्ष रामजीत राय, संजय पांडेय, किसान नेता राजेश कुशवाहा, व्यवसायिक मंच के प्रतिनिधि संतोष सोनी, मजदूर नेता रंगनाथ चौधरी, उमेश साह, बिनोद साह सहित अन्य लोगों ने बताया कि अब तक चौक-चौराहों पर अलाव की मुकम्मल व्यवस्था नहीं हो पायी है, जबकि ठंड चरम पर पहुंच गयी है. लोग ठिठुरने को मजबूर हैं. लोगों का कहना है कि जगह-जगह अलाव जलते रहने से ठंड से राहत मिलती है. अलाव नहीं जलने से आमजन को इस शीतलहर में भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है और लोगों में नाराजगी बढ़ रही है. मामले में अंचलाधिकारी पिंटू कुमार चौधरी ने बताया कि अलाव जलाने की दिशा में तेजी से कार्रवाई की जा रही है. उन्होंने दावा किया कि रविवार तक अलाव की व्यवस्था कर दी जायेगी. डिस्क्लेमर: यह नया विचार समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे नया विचार डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है The post राजपुर में ठंड का कहर, अलाव नहीं जलने से लोग बेहाल appeared first on Naya Vichar.

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खंडहर में बदल रहा सांस्कृतिक धरोहर, युवाओं के बिखरे सपने

तत्कालीन राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू ने 2016 में कला संस्कृति भवन का किया था उद्घाटन नौ साल बाद भी उपयोगविहीन बनकर रह गया भवन सुजित मंडल, लिट्टीपाड़ा. जिस भवन से आदिम जनजाति पहाड़िया युवक-युवतियों की कला को नई दिशा देने की कल्पना की गई थी, वही भवन अब खंडहर का रूप ले चुका है. करोड़ों रुपये की लागत से बना कला सांस्कृतिक भवन, जो सोनाधानी गांव के फुटबॉल मैदान में स्थित है, आज उपयोगहीन साबित हो रहा है और स्थानीय लोगों के लिए निराशा का कारण बन गया है. ग्रामीणों का कहना है कि लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद भवन का कोई लाभ नहीं मिल पाया है. बैदा पहाड़िया, सोनिया पहाड़िया, जबरा पहाड़िया और समिएल पहाड़िया सहित कई लोगों ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए बताया कि अगर प्रशासन और प्रशासन ने समय रहते ध्यान दिया होता तो यहां के आदिवासी युवक-युवतियों की प्रतिभा निखरती और वे झारखंडी कला को देश-विदेश में प्रदर्शित कर पाते. 11 अप्रैल 2016 को तत्कालीन राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू ने इस भवन का उद्घाटन किया था. उस समय ग्रामीणों और युवाओं को अनेक सपने दिखाए गए थे. लोगों को विश्वास हुआ था कि अब उनके बच्चों को कला का प्रशिक्षण मिलेगा और उनकी प्रतिभा को मंच मिलेगा. लेकिन विभागीय लापरवाही और प्रशासनिक उदासीनता ने उन सपनों को चकनाचूर कर दिया है. गोदाम बनकर रह गया लाखों का कला संस्कृति भवन आज यह भवन गोदाम के रूप में इस्तेमाल हो रहा है. स्थानीय कलाकारों की प्रतिभा धीरे-धीरे कुंद होती जा रही है और क्षेत्र की जनता खुद को ठगा हुआ महसूस कर रही है. यह केवल एक भवन की बर्बादी नहीं, बल्कि उन उम्मीदों का पतन है जो कभी यहां के लोगों के दिलों में जगी थीं. स्थानीय कलाकारों को मिलता मंच, बनती पहचान जन समस्याओं का बोझ पहले से ही ग्रामीणों को परेशान कर रहा है. रोजगार के अवसरों की कमी, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव, इन सबके बीच कला संस्कृति भवन का बेकार होना लोगों के लिए दोहरी मार जैसा है. यह भवन यदि सही तरीके से उपयोग में लाया जाता तो न केवल स्थानीय कलाकारों को मंच मिलता बल्कि क्षेत्र की पहचान भी मजबूत होती. आज जरूरत है कि प्रशासन और प्रशासन इस पर गंभीरता से ध्यान दें. भवन को पुनर्जीवित कर स्थानीय कलाकारों को प्रशिक्षण और अवसर प्रदान किए जाएं. तभी इस क्षेत्र की कला और संस्कृति को बचाया जा सकेगा और आदिवासी युवक-युवतियों की प्रतिभा को नयी उड़ान मिल पायेगी. डिस्क्लेमर: यह नया विचार समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे नया विचार डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है The post खंडहर में बदल रहा सांस्कृतिक धरोहर, युवाओं के बिखरे सपने appeared first on Naya Vichar.

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फ्लायार इनसेट.. साक्षरता अभियान को लेकर बनी योजना, दो जनवरी से कक्षाएं शुरू

10-10 लोगों के समूह बनाकर सिखाया जायेगा पढ़ना-लिखना दिनारा. बिहार शिक्षा परियोजना कार्यालय में शनिवार को प्रभारी शिक्षा पदाधिकारी मधुरेंद्र कुमार की अध्यक्षता में साक्षरता अभियान को लेकर बैठक आयोजित की गयी. बैठक में अभियान को प्रभावी ढंग से लागू करने को लेकर विस्तृत चर्चा की गयी. प्रभारी शिक्षा पदाधिकारी ने बताया कि असाक्षर स्त्री और पुरुषों को साक्षर बनाने के उद्देश्य से शिक्षकों और टोला सेवकों द्वारा पूर्व में सर्वे कराया गया था. सर्वे के आधार पर चिह्नित असाक्षर लोगों को शिक्षा से जोड़ने की योजना बनायी गयी है. इसके तहत नये वर्ष में दो जनवरी से आंगनबाड़ी केंद्र, सामुदायिक भवन या विद्यालय में कक्षाएं संचालित की जायेंगी. उन्होंने बताया कि जिलाधिकारी के निर्देश के आलोक में साक्षरता अभियान को प्रभावी रूप से लागू किया जायेगा. इसके तहत 10-10 लोगों का समूह बनाकर उन्हें पढ़ना-लिखना सिखाया जायेगा. प्रत्येक समूह की जिम्मेदारी आंगनबाड़ी सेविका, शिक्षा सेवक और जीविका दीदी को दी गयी है. बैठक में बताया गया कि सभी संबंधित कर्मी अपने-अपने क्षेत्र में नियमित रूप से कक्षाएं चलाकर असाक्षर स्त्री और पुरुषों को साक्षर बनायेंगे. इस पहल का उद्देश्य समाज के हर वर्ग को शिक्षा से जोड़ना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है. अभियान के सफल क्रियान्वयन से क्षेत्र की साक्षरता दर में वृद्धि होने की उम्मीद जतायी गयी. डिस्क्लेमर: यह नया विचार समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे नया विचार डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है The post फ्लायार इनसेट.. साक्षरता अभियान को लेकर बनी योजना, दो जनवरी से कक्षाएं शुरू appeared first on Naya Vichar.

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हाथी ने दो घर को किया ध्वस्त, दो बैलों को मार डाला

दहशत. चतरा सदर प्रखंड के तिलरा गांव में हाथी का उत्पात सिमरिया. चतरा सदर प्रखंड की लेम पंचायत के तिलरा गांव में शुक्रवार की रात एक हाथी ने जमकर उत्पात मचाया. हाथी ने गांव में दो मवेशियों ( बैल) को मार डाला, वहीं दो घरों को ध्वस्त कर दिया. खेत में लगी धान, आलू व केला की फसल को खाकर बर्बाद कर दिया. हाथी के हमले में मारे गये दोनों बैल किसान सरहुली महतो के थे. जबकि नेमधारी महतो व रोही महतो के घर को हाथी ने ध्वस्त कर दिया. विशेश्वर महतो, जगदीश महतो व प्रमुख महतो सहित अन्य किसानों के खेत में लगी धान, केला और आलू की फसल को बर्बाद कर दिया. ग्रामीणों ने बताया कि लोग रात को सो रहे थे. इसी बीच रात करीब आठ बजे एक हाथी गांव में घुस आया. गांव में घुसते ही हाथी ने न केवल खेतों में लगी फसलों को बर्बाद किया, बल्कि दो मवेशियों को मार डाला. ग्रामीणों ने शाेर मचाया, तो गांव के लोग इकट्ठा हुए, फिर मशाल जला कर और पटाखा फोड़ कर हाथी को जंगल की ओर खदेड़ा. ग्रामीणों ने इसकी जानकारी वन विभाग को दी है. प्रभावित ग्रामीणों ने उचित मुआवजा देने की मांग की है. साथ ही हाथी के हमले से स्थायी निजात दिलाने की मांग की है. ग्रामीणों के अनुसार, पत्थलगड्डा प्रखंड के नावाडीह चरहेत गांव में कई दिनों से एक हाथी डेरा डाले हुए है. शुक्रवार को हाथी को खदेड़ा गया, इसके बाद हाथी तिलरा जंगल चला गया है. ज्ञात हो कि चतरा जिले में हाथियों ने उत्पात मचा रखा है. आये दिन हाथी किसी न किसी गांव में घुस कर खेतों में लगी फसलों को बर्बाद कर रहे हैं और घरों व चहारदीवारी को भी नुकसान पहुंचा रहे हैं. मवेशियों को भी निशाना बना रहे हैं. इससे गांव के लोग डरे सहमे हुए हैं. कई गांव में लोग रतजगा कर रहे हैं. डिस्क्लेमर: यह नया विचार समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे नया विचार डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है The post हाथी ने दो घर को किया ध्वस्त, दो बैलों को मार डाला appeared first on Naya Vichar.

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मगध विश्वविद्यालय के वीसी करेंगे रामरूप मेहता महोत्सव का उद्घाटन

हर साल दो जनवरी को होता है समारोह का आयोजन, बिहार के भव्यतम कार्यक्रमों में प्रसिद्ध है महोत्सव फोटो नंबर-6-शहीद रामरूप मेहता का फाइल फोटो प्रतिनिधि, गोहराज्य के भव्यतम सांस्कृतिक व स्पोर्ट्स आयोजनों में शामिल रामरूप मेहता महोत्सव का उद्घाटन आगामी दो जनवरी को मगध विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ शशिप्रताप शाही करेंगे. यह जानकारी महोत्सव की संयोजक सुषमा पांडेय ने दी. उन्होंने बताया कि हर वर्ष की तरह इस बार भी आयोजन उच्च विद्यालय हसपुरा के क्रीड़ा मैदान में होगा. कार्यक्रम को लेकर तैयारियां जोरों पर हैं. उल्लेखनीय है कि वर्ष 2024 के महोत्सव का उद्घाटन भी कुलपति डॉ शाही ने ही किया था. महोत्सव के अध्यक्ष अरविंद कुमार वर्मा, कोषाध्यक्ष मणिकांत पांडेय और उपाध्यक्ष अनीश केसरी ने बताया कि इस वर्ष महोत्सव को ऐतिहासिक बनाने की दिशा में एक नयी पहल की जा रही है. शहीद रामरूप मेहता की जयंती पर आयोजित 46वें महोत्सव में पहली बार स्त्री टीमों के बीच फुटबॉल का मुकाबला होगा. मुजफ्फरपुर व बेतिया की टीम के बीच आमने-सामने मुकाबला होगा. प्रशासनिक व पुलिस अधिकारी भी होंगे शामिल महोत्सव में प्रशासनिक और पुलिस महकमे की भी विशेष भागीदारी रहेगी. कार्यक्रम में दाउदनगर एसडीओ अमित राजन, एसडीपीओ अशोक कुमार दास, गोह थानाध्यक्ष प्रशांत कुमार, बंदेया थानाध्यक्ष सूरज कुमार, उपहारा थानाध्यक्ष विकास कुमार, देवकुंड थानाध्यक्ष मनीष कुमार, हसपुरा थानाध्यक्ष दिनेश कुमार और इंस्पेक्टर सुनील कुमार की उपस्थिति प्रस्तावित है. प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी से आयोजन को लेकर सुरक्षा एवं व्यवस्था और सुदृढ़ रहने की उम्मीद है. 45 वर्षों से लगातार हो रहा आयोजन गौरतलब है कि रामरूप मेहता महोत्सव का आयोजन बीते 45 वर्षों से लगातार किया जा रहा है. समाजवादी नेता रामरूप मेहता की 16 मार्च 1980 को शहादत के बाद, उनकी जयंती पर दो जनवरी को वर्ष 1981 से यह समारोह आयोजित होता आ रहा है. साढ़े चार दशकों में यह महोत्सव अब मगध की सांस्कृतिक पहचान बन चुकी है. हर वर्ष इसमें 40 से 50 हजार तक दर्शक शामिल होते हैं. कई दिग्गज हो चुके हैं शामिल महोत्सव में अब तक जननायक कर्पूरी ठाकुर, कई मंत्री, सांसद, विधायक, मगध विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो शशिप्रताप शाही, वरिष्ठ पत्रकार अजय कुमार, सुपर 30 के संस्थापक गणितज्ञ आनंद कुमार समेत कई नामचीन हस्तियां शिरकत कर चुके हैं. कौन थे शहीद रामरूप मेहता शहीद रामरूप मेहता हसपुरा प्रखंड के बिरहारा गांव के निवासी थे. विद्यार्थी जीवन में ही वे विनोबा भावे के भूदान आंदोलन से जुड़े. बाद में लोकनायक जयप्रकाश नारायण के साथ सर्वोदय आंदोलन और ग्राम निर्माण मंडल अभियान में सक्रिय भूमिका निभायी. उनकी नेतृत्वक यात्रा डॉ राममनोहर लोहिया की संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी से शुरू हुई. आपातकाल के दौरान वे भूमिगत रहकर जेपी आंदोलन में सक्रिय रहे. 16 मार्च 1980 को नेतृत्वक विरोधियों द्वारा उनकी हत्या करवा दी गयी. जननायक कर्पूरी ठाकुर की प्रेरणा से उनके सहयोगियों ने वर्ष 1981 से उनकी जयंती पर इस महोत्सव की शुरुआत की, जो आज भी निरंतर जारी है. डिस्क्लेमर: यह नया विचार समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे नया विचार डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है The post मगध विश्वविद्यालय के वीसी करेंगे रामरूप मेहता महोत्सव का उद्घाटन appeared first on Naya Vichar.

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आधार सेंटर की कमी, कार्ड में सुधार या नया बनवाने में करना पड़ रहा घंटों इंतजार

फोटो 1 आधार में सुधर को ले लगी भीड़ 2. गोद में 11 माह के शिशु के साथ आयी ज्योति 3 अपनी 3 वर्षीय बेटी अनाया यादव के साथ आये अरविंद यादव 4. अपनी 5 साल की बेटी के साथ सुनीता देवी कड़ाके की ठंड में सुबह पांच बजे से लग रही लंबी लाइन, शिशु-बुजुर्ग बेहाल आधार सेंटरों की कमी से लोग ठंड में घंटों लाइन ठिठुरने को विवश रोजाना सैकड़ों लोग काम नहीं होने से निराश होकर लौटने को मजबूर भभुआ शहर. आधार कार्ड आज लगभग हर प्रशासनी व कई निजी सेवाओं के लिए अनिवार्य हो गया है. राशन कार्ड, पेंशन, छात्रवृत्ति, किसान सम्मान निधि, बैंक खाता, मोबाइल सिम, स्कूल में नामांकन सहित अन्य कई योजनाओं के लिए आधार जरूरी हो गया है. ऐसे में आधार में जरा-सी गलती या अपडेट की जरूरत लोगों के लिए बड़ी समस्या बनती जा रही है. खासकर ग्रामीण व पहाड़ी इलाकों के लोगों को आधार सेंटर तक पहुंचने में ही कई घंटे लग जाते हैं. दूसरी ओर जिले में पर्याप्त आधार सेंटर की व्यवस्था नहीं होने के कारण आम लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. आधार में सुधार, बायोमेट्रिक अपडेट, मोबाइल नंबर बदलवाने व नया आधार बनवाने के लिए लोग दूर-दराज के गांवों, पहाड़ी व दुर्गम इलाकों से भभुआ पहुंचते हैं, लेकिन सेंटर कम रहने से घंटों लाइन में इंतजार करना पड़ता है. हालत यह है कि कड़ाके की ठंड के बावजूद लोग सुबह पांच बजे से ही लाइन में खड़े हो जाते हैं. ठंड से ठिठुरते छोटे-छोटे शिशु, स्त्रीएं व बुजुर्ग पूरे दिन इंतजार करते नजर आते हैं. इसके बावजूद कई लोगों का काम उसी दिन नहीं हो पाता है. इसके बाद आधार सेंटर आने व लाइन लगाने का सिलसिला कई दिनों तक चलता है, तब जाकर कहीं लोगों का कार्य पूरा हो पाता है. शनिवार को भी देखा गया कि सुबह के अंधेरे में ही पोस्ट ऑफिस व भगवानपुर स्थित आधार सेंटरों के बाहर लोगों की भीड़ जमा हो गयी थी. लोगों का कहना है कि यदि थोड़ी भी देर हो जाये तो नंबर लग पाना मुश्किल हो जाता है. मजबूरी में लोग तड़के घर से निकल पड़ते हैं. कई लोग तो रात में ही गांव से चलकर भभुआ पहुंचते हैं, ताकि सुबह सबसे पहले लाइन में जगह मिल सके. ठंड इतनी अधिक है कि लोग ऊनी कपड़ों, शॉल व कंबलों में लिपटे हुए आते हैं. लंबे समय तक खुले में खड़े रहना आसान नहीं होता. सीमित काउंटर व कर्मचारियों की कमी के कारण रोजाना सैकड़ों लोग काम नहीं होने से निराश होकर लौटने को मजबूर हो जाते हैं. कई लोगों ने बताया कि वे तीसरी या चौथी बार सेंटर आये हैं, फिर भी काम नहीं हो पाया है, जिससे समय व पैसे दोनों की बर्बादी हो रही है. पंचायत स्तर पर अतिरिक्त आधार सेंटर खोलने की मांग इधर, कड़ाके की ठंड में लाइन में खड़े लोगों के लिए न तो बैठने की समुचित व्यवस्था दिखी और न ही ठंड से बचाव का कोई विशेष इंतजाम. स्त्रीएं छोटे बच्चों को गोद में लिए घंटों लाइन में खड़ी देखी गयीं. कई बार बुजुर्गों को सहारा देने वाला भी कोई नहीं होता है. कुछ लोग ठंड व थकान के कारण बीच में ही लाइन छोड़कर लौट जाते हैं. लोगों ने मांग की है कि क्षेत्रों, पंचायतों व प्रखंड स्तर पर अतिरिक्त आधार सेंटर खोले जायें, ताकि आम लोगों को राहत मिल सके. – आधार सेंटरों पर आने लोगों की पीड़ा — बंजारिया गांव से आयी ज्योति अपने गोद में 11 माह के शिशु को लिए सुबह 8 बजे लाइन में खड़ी थी. शिशु को ठंड से बचाने के लिए उन्होंने उसे शॉल में लपेट रखा था. पूछे जाने पर बताया कि दो दिनों से आधार कार्ड में सुधार के लिए चक्कर लगा रही हैं, लेकिन हर बार भीड़ ज्यादा होने के कारण उनका नंबर नहीं आ पाया. आज इसलिए बहुत सुबह आ गयी हूं, ताकि किसी तरह आज मेरा नंबर आ जाये. शिशु को लेकर ठंड में खड़े रहना बहुत मुश्किल है, लेकिन विवशता है. आधार के बिना कई काम अटके हुए हैं. — पोस्ट ऑफिस गेट के सामने अरविंद यादव जो अपनी बेटी अनाया यादव का आधार बनवाने पहुंचे थे. कहते हैं सुबह सात बजे से ही लाइन में लगे हैं. बच्चों का आधार स्कूल, प्रशासनी योजनाओं व अन्य कामों के लिए जरूरी हो गया है. मजबूरी में इतनी ठंड में भी बच्ची को लेकर आना पड़ा है. — धड़निया गांव से आये 65 वर्षीय बब्बन राम ने बताया उम्र हो गयी है, ठंड भी बहुत लगती है, फिर भी मजबूरी है. छह बजे से लाइन में खड़ा बानी. आपन उंगली के पहचान करावल जरूरी है, ताकि पेंशन और अन्य प्रशासनी लाभ समय पर मिल जाये. आधार अपडेट नहीं होइ त पेंशन रुक जायी. भीड़ देख डर लग रहल बा कि आज काम होई भी कि नाहीं. — पहाड़ी क्षेत्र से आये 70 वर्षीय लालमुनि राम कहते हैं सुबह पांच बजे ही बस पकड़ कर भभुआ पहुंचे हैं. छह बजे से ही लाइन में लगे हैं. आधार कार्ड में मोबाइल नंबर बदलवाना है, क्योंकि किसान रजिस्ट्रेशन और अन्य ऑनलाइन सेवाओं के लिए मोबाइल नंबर का अपडेट रहना जरूरी है. ठंड बहुत है, पैरों में जान नहीं बची है, लेकिन क्या करें. अगर आधार में मोबाइल नंबर अपडेट नहीं होगा तो किसान रजिस्ट्रेशन नहीं हो पायेगा और प्रशासनी लाभ भी नहीं मिलेगा. — खालसपुर गांव से आयी सुनीता देवी ने बताया कि वह अपनी पांच साल की बेटी और 65 वर्षीय सास के साथ सुबह छह बजे से लाइन में खड़ी है. एक ही सेंटर होने के वजह से यहां बहुत भीड़ हो जाती है. शिशु और बुजुर्ग दोनों को लेकर आना बहुत कठिन है, लेकिन आधार से जुड़े काम टाल भी नहीं सकते. डिस्क्लेमर: यह नया विचार समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे नया विचार डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है The post आधार सेंटर की कमी, कार्ड में सुधार या नया बनवाने में करना पड़ रहा घंटों इंतजार appeared first on Naya Vichar.

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