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January 11, 2026

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सांसद ने बरनार जलाशय निर्माण कार्य का लिया जायजा

सोनो . सांसद अरुण हिंदुस्तानी रविवार को बटिया के कटहराटांड़ में हो रहे बरनार जलाशय निर्माण स्थल का दौरा किया. उन्होंने जलाशय निर्माण को लेकर चल रहे सर्वेक्षण, तकनीकी परीक्षण और योजना से जुड़े अन्य कार्यों का जायजा लिया. उन्होंने संबंधित अधिकारियों और कार्य कर रहे एजेंसियों से अब तक के कार्य की प्रगति, भू-तकनीकी अध्ययन, डिजाइन प्रक्रिया सहित तमाम विस्तृत जानकारी प्राप्त किया. सांसद ने कहा कि किसी भी बड़ी और दीर्घकालिक परियोजना की सफलता का आधार मजबूत सर्वेक्षण और वैज्ञानिक योजना होती है. बरनार जलाशय जैसी महत्वपूर्ण योजना ससमय पूरा हो इसको लेकर ध्यान रखा जायेगा. इसके लिए सटीक प्लानिंग और गुणवत्ता आधारित तैयारी जरूरी है. उन्होंने स्पष्ट किया कि सर्वे और योजना का यह चरण समयबद्ध, पारदर्शी और जमीनी वास्तविकताओं के अनुरूप पूरा किया जाना चाहिए ताकि निर्माण कार्य आगे बिना किसी बाधा के प्रारंभ हो सके. सांसद ने कहा कि बरनार जलाशय योजना जमुई के किसानों और क्षेत्रीय विकास के लिए मील का पत्थर साबित होगा. उनके साथ अन्य कई गणमान्य व कार्यकर्ता थे. डिस्क्लेमर: यह नया विचार समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे नया विचार डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है The post सांसद ने बरनार जलाशय निर्माण कार्य का लिया जायजा appeared first on Naya Vichar.

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सदर अस्पताल में पांच महीनों में 1600 से अधिक महिलाओं का हुआ संस्थागत प्रसव

जमुई . मां बनना हर स्त्री के जीवन का सबसे सुंदर सपना होता है, लेकिन यह सपना तब डर और अनिश्चितता में बदल जाता है जब शरीर कमजोर हो, खून की कमी हो और हर कदम पर जान का खतरा महसूस हो. पोषण की अनदेखी और समय पर जांच न होना गर्भावस्था को आसान नहीं, बल्कि कई बार जानलेवा बना देता है. ऐसे में सुरक्षित संस्थागत प्रसव तक पहुंचना कई स्त्रीओं के लिए किसी चुनौतीपूर्ण सफर से कम नहीं होता. जानकारी देते हुए डीपीएम पवन कुमार बताते हैं कि समुदाय में खासकर स्त्रीएं बचपन और किशोरावस्था से ही अपने खान-पान को गंभीरता से नहीं लेतीं, यही लापरवाही आगे चलकर गंभीर एनीमिया का रूप ले लेती है. उन्होंने बताया कि अगर किशोरियों के स्तर पर ही पोषण, रहन-सहन और स्वास्थ्य जांच पर ध्यान दिया जाए तो गर्भावस्था के दौरान स्त्रीओं को इतनी जटिल परिस्थितियों से नहीं गुजरना पड़ेगा. स्त्रीओं को खुद समझनी होगी अपनी स्थिति आशा रेखा देवी कहती हैं कि एनीमिया की गंभीरता को स्त्रीओं को खुद समझना होगा. गर्भावस्था के दौरान खून की कमी मां और शिशु दोनों की जान जोखिम में डाल सकती है. समय पर आयरन की गोली लेना, नियमित एएनसी जांच कराना और दिए गए परामर्श का पालन करना ही सुरक्षित संस्थागत प्रसव की सबसे मजबूत नींव है. अस्पताल में सुरक्षित प्रसव के लिए सभी सुविधाएं उपलब्ध सदर अस्पताल के स्वास्थ्य प्रबंधक रमेश कुमार बताते हैं कि पिछले 5 महीनों में सदर अस्पताल में कुल 1626 संस्थागत प्रसव कराये गये हैं, जिनमें बड़ी संख्या गंभीर एनीमिया से पीड़ित स्त्रीएं भी शामिल हैं. उन्होंने बताया कि अस्पताल में सुरक्षित प्रसव के लिए सभी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध हैं. प्रशिक्षित स्टाफ नर्स, दक्ष चिकित्सक, सुसज्जित प्रसव कक्ष, आधुनिक ऑपरेशन थियेटर, नवजात देखभाल की समुचित व्यवस्था और दवाओं की पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है. सवालों और आशंकाओं के बीच उम्मीद मजबूत व्यवस्था और समर्पित स्वास्थ्यकर्मियों की वजह से आज जमुई सदर अस्पताल उन स्त्रीओं के लिए भरोसे का केंद्र बन रहा है, जिनके लिए मातृत्व का सफर कभी डर और असुरक्षा से भरा हुआ था. केस स्टडी 1 मलयपुर की रहने वाली मधु कुमारी बताती हैं, “जब मुझे मां बनने की समाचार मिली, तो घर में खुशियों का माहौल था लेकिन जांच के बाद डॉक्टर ने बताया कि मेरे शरीर में 7 ग्राम से भी कम खून है. यह सुनते ही डर बैठ गया कि क्या मैं सुरक्षित रह पाऊंगी? क्या मेरा बच्चा सुरक्षित होगा?. मधु बताती हैं कि स्वास्थ्य कर्मियों की लगातार निगरानी, समय पर दवा और सही प्रबंधन ने असंभव को संभव कर दिया और गंभीर एनीमिया के बावजूद उनका सुरक्षित संस्थागत प्रसव हो सका. केस स्टडी 2 दौलतपुर की सोना कुमारी बताती है कि प्रसव का समय जीवन का सबसे डरावना पल बन गया था. जब मुझसे कहा गया कि मैं एनीमिया की शिकार हूं, तो मैं अंदर तक कांप गयी. मन में बस यही सवाल था कि क्या मैं अपने शिशु को देख पाऊंगी? लेकिन सदर अस्पताल में प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मियों की सतत देख-रेख और व्यवस्थित कार्य-प्रणाली ने उनके डर को भरोसे में बदला. आज सोना और उनका नवजात दोनों सुरक्षित हैं. केस स्टडी 3 थेगुआ गांव की निभा कुमारी अपनी तकलीफ याद करते हुए बताती है कि मेरी हालत इतनी खराब थी कि चलना-फिरना तक मुश्किल हो गया था. निजी अस्पताल में डॉक्टर ने साफ कह दिया कि प्रसव जानलेवा हो सकता है. निभा बताती हैं कि अगर सदर अस्पताल में समय पर भर्ती नहीं होतीं, तो शायद आज वह अपने शिशु के साथ न होती. तमाम जोखिमों के बावजूद सदर अस्पताल की टीम ने उनका सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित किया. डिस्क्लेमर: यह नया विचार समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे नया विचार डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है The post सदर अस्पताल में पांच महीनों में 1600 से अधिक स्त्रीओं का हुआ संस्थागत प्रसव appeared first on Naya Vichar.

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सदर अस्पताल में तीन घंटे तक बिजली रही गुल, मरीज परेशान

जमुई . जमुई सदर अस्पताल में रविवार को तीन घंटे से अधिक समय तक बिजली आपूर्ति ठप रही. इस कारण पूरा सदर अस्पताल अंधेरे में डूबा रहा. जबकि इलाज के लिए आये मरीजों एवं उसके परिजनों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा. बिजली गुल होने के कारण मरीज का पर्चा नहीं कट सका और चिकित्सक बिना पर्ची के ही मरीजों का इलाज करने के लिए मजबूर हो गया बताया जाता है कि शॉर्ट सर्किट के कारण अस्पताल के बिजली कंट्रोल रूम का वायर जल गया था जिससे पूरे अस्पताल में विद्युत आपूर्ति खत्म हो गई थी इमरजेंसी में इलाज करने के लिए पहुंचे नीमा रंग मोहल्ला निवासी मोहम्मद खाद अंसारी ने बताया कि मैं सुबह 11:00 बजे से अपनी मरीज को लेकर अस्पताल पहुंचे थे लेकिन बिजली न होने करना तो पर्चा नहीं कट पाया और ना ही समय पर इलाज शुरू हो सका. जबकि सदर थाना क्षेत्र के लठाने गांव निवासी गोपाल यादव ने बताया कि मेरा पुत्र ठंड लगने के कारण बीमार हो गया है रविवार को इलाज के लिए सदर अस्पताल पहुंचा लेकिन बिजली नहीं रहने के कारण एक घंटे से इलाज के इंतजार में खड़ा हूं. इलाज के लिए पहुंचे अन्य मरीज और उनके परिजन ने सदर अस्पताल की इस व्यवस्था पर नाराजगी जताते हुए कहा कि प्रशासन सदर अस्पताल में बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था देने का दावा करती है लेकिन इसके इतर जमीनी हकीकत कुछ और बंया कर रही है. हालांकि इमरजेंसी कक्ष में ड्यूटी पर मौजूद डॉ मनीष कुमार द्वारा बीना पर्चा के ही मरीजों का इलाज करना शुरू कर दिया जिस कारण मरीजों को कुछ राहत मिली. कहते हैं प्रबंधक इस संबंध में अस्पताल प्रबंधक रमेश कुमार पांडेय ने बताया कि शाॅर्ट सर्किट के कारण बिजली व्यवस्था में गड़बड़ी हुई थी जिसे अविलंब दुरुस्त कर लिया गया है. डिस्क्लेमर: यह नया विचार समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे नया विचार डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है The post सदर अस्पताल में तीन घंटे तक बिजली रही गुल, मरीज परेशान appeared first on Naya Vichar.

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साइकिल यात्रा मंच ने कटौना गांव में किया पौधरोपण

जमुई . पर्यावरण संरक्षण को जन-आंदोलन का रूप देने वाली “साइकिल यात्रा एक विचार मंच” ने रविवार को अपनी 10वीं वर्षगांठ मनायी. 10 जनवरी 2016 से लगातार प्रत्येक रविवार को साइकिल यात्रा निकालने वाले इस मंच ने अब तक 523वीं यात्रा पूरी कर ली है. वर्षगांठ के अवसर पर कटौना ग्राम में नीतीश सिंह की निजी भूमि पर पौधारोपण कर पर्यावरण बचाने का संकल्प दोहराया गया. पौधरोपण कार्यक्रम में शेषनाथ राय, राहुल कुमार सिंह, चंदन कुमार, सिंटू कुमार, संजय कुमार सहित दर्जनों ग्रामीण उपस्थित थें. डिस्क्लेमर: यह नया विचार समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे नया विचार डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है The post साइकिल यात्रा मंच ने कटौना गांव में किया पौधरोपण appeared first on Naya Vichar.

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अगले हफ्ते शेयर बाजार में उथल-पुथल या रहेगी तेजी? ये तीन फैक्टर करेंगे फैसला

Stock Market Outlook: अगले सप्ताह घरेलू शेयर बाजार की चाल पूरी तरह से तिमाही नतीजों, महंगाई के आंकड़ों और वैश्विक संकेतों पर निर्भर रहने वाली है. बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आईटी और बैंकिंग सेक्टर की दिग्गज कंपनियों के नतीजे, विदेशी निवेशकों की गतिविधियां और अमेरिका से जुड़े घटनाक्रम निवेशकों की धारणा को तय करेंगे. तिमाही नतीजों से तय होगी बाजार की दिशा इस सप्ताह से कॉरपोरेट जगत में तिमाही नतीजों का सीजन रफ्तार पकड़ेगा. टीसीएस, इंफोसिस, एचसीएल टेक, टेक महिंद्रा, रिलायंस इंडस्ट्रीज और जियो फाइनेंशियल सर्विसेज जैसी बड़ी कंपनियों के नतीजे आने हैं. रेलिगेयर ब्रोकिंग लिमिटेड के वरिष्ठ उपाध्यक्ष (रिसर्च) अजीत मिश्रा के अनुसार, यह सप्ताह आर्थिक गतिविधियों और कॉरपोरेट रिजल्ट्स दोनों लिहाज से बेहद अहम होगा. खासतौर पर आईटी, बैंकिंग, वित्त और ऊर्जा सेक्टर के नतीजे सूचकांकों की दिशा तय करने में प्रमुख भूमिका निभाएंगे. विशेषज्ञों का कहना है कि सिर्फ मुनाफे के आंकड़े ही नहीं, बल्कि कंपनियों का भविष्य के लिए दिया गया मार्गदर्शन भी बाजार की चाल पर बड़ा असर डालेगा. महंगाई के आंकड़ों पर टिकी निवेशकों की नजर घरेलू मोर्चे पर इस सप्ताह खुदरा महंगाई (सीपीआई) और थोक महंगाई (डब्ल्यूपीआई) के आंकड़े जारी होने हैं. ये आंकड़े ब्याज दरों और रिजर्व बैंक की भविष्य की नीति को लेकर संकेत देंगे. एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर के मुताबिक, दिसंबर महीने की महंगाई दर यह तय करेगी कि रिजर्व बैंक आगे नरम रुख अपनाता है या सख्ती बरकरार रखता है. अगर महंगाई अनुमान से कम रहती है तो बाजार को राहत मिल सकती है. वहीं, ऊंचे आंकड़े दबाव बढ़ा सकते हैं. वैश्विक संकेत और अमेरिकी घटनाक्रम रहेंगे अहम वैश्विक स्तर पर निवेशकों की नजर अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के उस संभावित फैसले पर रहेगी, जिसमें डोनाल्ड ट्रंप के प्रस्तावित शुल्कों की वैधता तय होनी है. बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला वैश्विक बाजारों की धारणा को झटका दे सकता है. इसके अलावा, डॉलर के मुकाबले रुपये की चाल, कच्चे तेल की कीमतें और विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की खरीद-बिक्री भी बाजार के मूड को प्रभावित करेगी. बीता सप्ताह रहा भारी उतार-चढ़ाव भरा पिछला सप्ताह घरेलू शेयर बाजार के लिए कमजोर साबित हुआ. अमेरिकी शुल्क को लेकर नई धमकियों, भू-नेतृत्वक तनाव और विदेशी निवेशकों की बिकवाली के चलते बाजार में तेज गिरावट देखने को मिली. बीएसई सेंसेक्स 2,185.77 अंक यानी 2.54 प्रतिशत टूट गया, जबकि निफ्टी में 645.25 अंकों यानी 2.45 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई. इसे भी पढ़ें: आरटीआई को लेकर आरबीआई और बैंक आमने-सामने, सूचना देने पर मचा घमासान क्या करें निवेशक स्वस्तिका इन्वेस्टमार्ट के वरिष्ठ तकनीकी विश्लेषक प्रवेश गौर के मुताबिक, तिमाही नतीजों की शुरुआत के साथ ही अलग-अलग सेक्टरों में चुनिंदा शेयरों में तेज हलचल देखने को मिल सकती है. ऐसे में निवेशकों को सतर्क रहते हुए कंपनियों के नतीजों, प्रबंधन की टिप्पणियों और वैश्विक संकेतों पर बारीकी से नजर रखने की जरूरत होगी. भाषा इनपुट के साथ इसे भी पढ़ें: 65 सालों में 4.12 ट्रिलियन डॉलर का हुआ हिंदुस्तान का जीडीपी, जानें कहां खड़ा है पाकिस्तान The post अगले हफ्ते शेयर बाजार में उथल-पुथल या रहेगी तेजी? ये तीन फैक्टर करेंगे फैसला appeared first on Naya Vichar.

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बिहार में यूपी सरकार का बड़ा प्रोजेक्ट! गंडक पर 761 करोड़ की लागत से बनेगा पुल, जानिए क्या होंगे फायदे

Bihar News: बिहार के बगहा पुलिस जिले के नौरंगिया के पास गंडक नदी पर जल्द ही एक भव्य पुल बनेगा. इस पुल के निर्माण पर 761 करोड़ रुपये खर्च होंगे. खास बात यह है कि पुल का निर्माण उत्तर प्रदेश प्रशासन की ओर से कराया जाएगा. इस पुल के बनते ही उत्तर प्रदेश का खड्डा क्षेत्र सीधे बिहार के बगहा से जुड़ जाएगा. इससे दोनों राज्यों के लोगों को आवागमन में बड़ी राहत मिलेगी. खड्डा विधायक विवेकानंद पांडेय ने बताया कि यूपी प्रशासन ने खड्डा से नौरंगिया को जोड़ने के लिए गंडक नदी पर पुल निर्माण को मंजूरी दे दी है. जल्द ही निर्माण प्रक्रिया शुरू की जाएगी. उन्होंने कहा कि यह पुल वर्षों पुरानी समस्या का स्थायी समाधान होगा. यूपी के 5 गांवों को होगा सबसे ज्यादा फायदा पुल के निर्माण से उत्तर प्रदेश के पांच गांवों को सबसे ज्यादा फायदा होगा. ये गांव नौरंगिया क्षेत्र के पास स्थित हैं, लेकिन प्रशासनिक रूप से उत्तर प्रदेश में आते हैं. अब तक इन गांवों के लोगों को अपने ही मुख्यालय खड्डा पहुंचने के लिए बिहार के रास्ते नौरंगिया होकर जाना पड़ता था. इससे लोगों को काफी परेशानी होती थी. यूपी के जिलों में आसानी से पहुंचेंगे बिहार के लोग पुल बनने के बाद इन गांवों के लोगों को सीधे और आसान रास्ते से खड्डा पहुंचने की सुविधा मिलेगी. इससे समय और दूरी दोनों की बचत होगी. साथ ही प्रशासनिक अधिकारियों को भी निगरानी और विकास कार्यों में आसानी होगी. प्रशासनी योजनाओं का लाभ अब तेजी से इन गांवों तक पहुंच सकेगा. इस पुल का फायदा सिर्फ उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं रहेगा. बिहार के लोगों को भी खड्डा और उत्तर प्रदेश के अन्य जिलों में आने-जाने में सहूलियत होगी. व्यापार, रोजगार और सामाजिक संपर्क को भी बढ़ावा मिलेगा. पर्यटन को भी मिलेगा बढ़ावा पर्यटन के लिहाज से भी यह पुल काफी अहम साबित होगा. उत्तर प्रदेश का सोहगीबरवा वन्यजीव अभयारण्य और बिहार का वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (वीटीआर) इस पुल से और करीब आ जाएंगे. यूपी और बिहार के अलग-अलग जिलों से पर्यटक इन जगहों तक आसानी से पहुंच सकेंगे. इससे स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा और क्षेत्रीय विकास को गति मिलेगी. Also Read: नीतीश कुमार की समृद्धि यात्रा की डेट फाइनल, पूरे बिहार का दौरा कर कामकाज की जमीनी हकीकत देखेंगे सीएम The post बिहार में यूपी प्रशासन का बड़ा प्रोजेक्ट! गंडक पर 761 करोड़ की लागत से बनेगा पुल, जानिए क्या होंगे फायदे appeared first on Naya Vichar.

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AI सेक्टर से जुड़ी यह खबर पढ़कर आपका दिल गार्डेन-गार्डेन हो जाएगा

हिंदुस्तानीय आईटी कंपनियां अब पारंपरिक एआई टूल्स से आगे बढ़कर एजेंटिक एआई (Agentic AI) को अपनाने में सबसे आगे निकल रही हैं. एक ताजा सर्वेक्षण में सामने आया है कि हिंदुस्तान की कंपनियां इसे केवल दक्षता बढ़ाने का साधन नहीं मान रही, बल्कि भविष्य के कारोबारी मॉडल की रीढ़ के रूप में देख रही हैं. यह रुझान वैश्विक स्तर पर हिंदुस्तान को अलग पहचान देता है और आईटी सेक्टर के पेशेवरों और निवेशकों के लिए बेहद अहम है. प्रौद्योगिकी परामर्श कंपनी थॉटवर्क्स ने सात देशों के 3,500 वरिष्ठ अधिकारियों पर आधारित सर्वेक्षण किया, जिसमें हिंदुस्तान से 500 प्रतिभागी शामिल थे. रिपोर्ट बताती है कि 48 प्रतिशत हिंदुस्तानीय आईटी दिग्गजों ने एजेंटिकएआई को अपनी प्राथमिकता माना है. अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया जैसे पश्चिमी बाजार अभी भी पारंपरिक दक्षता सुधार पर केंद्रित हैं, जबकि हिंदुस्तान इस नयी दिशा में सबसे आगे है. सर्वेक्षण में 93 प्रतिशत हिंदुस्तानीय प्रतिभागियों ने माना कि एआई का सबसे बड़ा असर लोगों के कौशल और काम की गति को बढ़ाने में है. खास बात यह रही कि 86 प्रतिशत ने एआई को प्रतिभा का विकल्प नहीं बल्कि उसे और निखारने वाला साधन बताया. इसका सीधा मतलब है कि हिंदुस्तानीय आईटी सेक्टर में एआई को नौकरी छीनने वाले खतरे के बजाय सहयोगी तकनीक के रूप में देखा जा रहा है. एजेंटिकएआई ऐसे स्वायत्त सिस्टम हैं जो स्वतंत्र रूप से तर्क कर सकते हैं और परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढाल सकते हैं. हिंदुस्तान में इसका तेजी से अपनाया जाना यह संकेत देता है कि कंपनियां केवल प्रोडक्टिविटी टूल्स पर निर्भर नहीं रहना चाहतीं, बल्कि एआई-आधारित कारोबारी ढांचे की ओर बढ़ रही हैं. यह बदलाव नीति निर्माताओं के लिए भी संकेत है कि एआई को केवल ऑटोमेशन के नजरिये से नहीं, बल्कि नवाचार और रोजगार सृजन के दृष्टिकोण से देखना होगा. आईटी उद्योग के जानकार मानते हैं कि हिंदुस्तान का यह रुझान वैश्विक प्रतिस्पर्धा में उसे बढ़त दिला सकता है. विशेषज्ञों का कहना है कि जैसे-जैसे नौकरियों को मानव-एआई सहयोग के लिए फिर से तैयार किया जा रहा है, भूमिकाओं में वृद्धि हो रही है. 57 प्रतिशत प्रतिभागियों ने बताया कि एआई के साथ काम करने से नयी जिम्मेदारियां और अवसर पैदा हो रहे हैं. हिंदुस्तानीय आईटी सेक्टर का एजेंटिकएआई पर भरोसा यह दर्शाता है कि आने वाले वर्षों में कंपनियां न केवल तकनीकी दक्षता बढ़ाएंगी बल्कि नये कारोबारी मॉडल भी गढ़ेंगी. यह रुझान हिंदुस्तान को वैश्विक एआई परिदृश्य में अग्रणी बना सकता है और प्रतिभा विकास के साथ-साथ रोजगार के नये अवसर भी खोलेगा. यह भी पढ़ें: कहीं आपने भी तो नहीं बता दीं ChatGPT को अपनी पर्सनल बातें? देर होने से पहले जानें कैसे करें पूरी हिस्ट्री डिलीट The post AI सेक्टर से जुड़ी यह समाचार पढ़कर आपका दिल गार्डेन-गार्डेन हो जाएगा appeared first on Naya Vichar.

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Bajra Vej Thepla: कंट्रोल में रहेगा ब्लड शुगर लेवल और पेट भी देर तक भरा हुआ, इस रेसिपी के साथ परिवार को दें एक हेल्दी और टेस्टी सरप्राइज

Bajra Vej Thepla: अगर आप सुबह के नाश्ते में कुछ ऐसा ट्राय करना चाहते हैं जो सिर्फ हेल्दी न हो बल्कि टेस्टी और मिनटों में तैयार भी हो जाए तो बाजरा वेज थेपला आपके लिए एक परफेक्ट चॉइस है. बाजरा न्यूट्रिशन से लोडेड अनाज है जिसे खासतौर पर सर्दियों के दिनों में खाया जाता है. सर्दियों के इन दिनों में यह आपके शरीर को अंदर से गर्माहट ही नहीं देता है बल्कि आपके डाइजेशन को भी बेहतर बनाता है. जब आप इसमें फ्रेश सब्जियां मिलाते हैं तो इसका स्वाद और फायदा चार गुना बढ़ जाता है. आप इस थेपले को बच्चों के टिफिन, ऑफिस के लंच बॉक्स और अगर कहीं ट्रैवल कर रहे हैं तो उस दौरान खाने के लिए भी तैयार कर सकते हैं. जब आप इसे अपने डाइट में शामिल करते हैं तो यह ब्लड शुगर को कंट्रोल करने में मदद करता है और लंबे समय तक पेट भरा रखता है. तो चलिए जानते हैं इसे बनाने की सबसे आसान रेसिपी. बाजरा वेज थेपला बनाने के लिए जरूरी सामग्री बाजरा आटा – 1 कप गेहूं का आटा – आधा कप कद्दूकस की हुई गाजर – आधा कप बारीक कटी शिमला मिर्च – एक चौथाई कप बारीक कटा प्याज – 1 छोटा अदरक-हरी मिर्च का पेस्ट – 1 चम्मच दही – 2 चम्मच हल्दी पाउडर – एक चौथाई चम्मच लाल मिर्च पाउडर – स्वादानुसार धनिया पाउडर – 1 चम्मच अजवाइन – आधा चम्मच नमक – स्वाद के अनुसार तेल – जरूरत के अनुसार हरा धनिया – बारीक कटा हुआ यह भी पढ़ें: Corn Dahi Kebab: कम तेल में बनने वाला सॉफ्ट एंड क्रिस्पी स्नैक, शाम की भूख मिटाने के लिए आज ही ट्राय करें कॉर्न दही कबाब बाजरा वेज थेपला बनाने की आसान रेसिपी बाजरा वेज थेपला बनाने के लिए सबसे पहले एक बड़े बर्तन में बाजरा आटा और गेहूं का आटा छान लें. इसके बाद इसमें गाजर, शिमला मिर्च, प्याज, हरा धनिया और सभी सूखे मसाले डालें. अब इसमें अदरक और हरी मिर्च का पेस्ट और दही मिलाकर इन सभी चीजों को अच्छे से मिक्स कर लें. अब थोड़ा-थोड़ा पानी डालते हुए सॉफ्ट लेकिन कसा हुआ आटा गूंध लें. इसके बाद आटे को ढककर 10 से 15 मिनट के लिए रख दें ताकि बाजरा अच्छी तरह सेट हो जाए. अब आटे से मीडियम साइज की लोइयां बनाएं और सूखे आटे की मदद से गोल थेपले बेल लें. इसके बाद तवा गर्म करें और हल्का तेल लगाकर थेपला दोनों तरफ से गोल्डन और क्रिस्पी होने तक सेंक लें. एक-एक करके इसी तरह सारे थेपले तैयार कर लें. बाजरा वेज थेपला को परोसने का तरीका बाजरा वेज थेपला को आप हरी चटनी, दही या अचार के साथ परोस सकते हैं. बता दें बाजरा वेज थेपला को गर्मागर्म खाने में सबसे ज्यादा मजा आता है, लेकिन ठंडा होने पर भी इसका स्वाद खराब नहीं होता है. बाजरा वेज थेपला बनाने के लिए कुछ खास टिप्स अगर आप थेपले को और सॉफ्ट बनाना चाहते हैं, तो आटे में थोड़ा सा घी भी मिला सकते हैं. चाहें तो इसमें मेथी या पालक भी मिलाकर इसका पोषण और बढ़ाया जा सकता है. यह भी पढ़ें: Oats Veg Khichdi: 20 मिनट में बनाएं सुपर हेल्दी और टेस्टी ओट्स वेज खिचड़ी, वजन घटाने और डायबिटीज मरीजों के लिए परफेक्ट मील The post Bajra Vej Thepla: कंट्रोल में रहेगा ब्लड शुगर लेवल और पेट भी देर तक भरा हुआ, इस रेसिपी के साथ परिवार को दें एक हेल्दी और टेस्टी सरप्राइज appeared first on Naya Vichar.

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अमेरिका में ट्रंप प्रशासन के खिलाफ भारी प्रदर्शन, हजारों लोग सड़कों पर उतरे, जानें पूरा मामला

Trump administration Protest: अमेरिका के मिनियापोलिस शहर में हाल ही में ऐसा कुछ हुआ कि पूरे देश की निगाहें वहां टिक गईं. बात है उस स्त्री की, जिसकी मौत एक ICE एजेंट की गोली से हुई. इसी घटना ने लोगों का गुस्सा बाहर ला दिया और हजारों लोग सड़कों पर उतर आए. यह प्रदर्शन सिर्फ मिनियापोलिस तक सीमित नहीं रहे, बल्कि अमेरिका के कई बड़े शहरों में भी इसी मुद्दे पर हंगामा देखने को मिला. इस घटना ने एक बार फिर ICE के कामकाज और ट्रंप प्रशासन की इमिग्रेशन नीतियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं. रेनी निकोल गुड: कौन थीं और कैसे हुई मौत? 37 साल की रेनी निकोल गुड, तीन बच्चों की मां, बुधवार को अपनी एसयूवी में बैठी थीं. ICE एजेंटों ने उनके वाहन को घेर लिया. वीडियो में देखा जा सकता है कि एजेंट उन्हें बाहर निकलने के लिए कह रहे थे और ड्राइवर साइड का दरवाजा खींच रहे थे. गाड़ी जैसे ही आगे बढ़ी, एक एजेंट ने कई गोलियां चलाईं. एसयूवी कुछ दूरी पर जाकर क्रैश हो गई और रेनी की मौके पर मौत हो गई. उनकी पत्नी ने बताया कि वे लोग अपने पड़ोसियों का समर्थन करने वहां गए थे, क्योंकि इलाके में इमिग्रेशन कार्रवाई चल रही थी. (Trump administration Protest Thousands Protest in US Minneapolis in Hindi) प्रदर्शनकारियों के नारे और देशभर की प्रतिक्रिया रेनी की मौत के बाद दसियों हजार लोग मिनियापोलिस की सड़कों पर उतर आए. हाथों में तख्तियां और नारे थे कि ‘Abolish ICE’, ‘No justice, no peace’ और ‘Get ICE off our streets’ यानी कि ICE को खत्म करो, न्याय नहीं, तो शांति नहीं और ICE को हमारी सड़कों से हटाओ. मिनियापोलिस के अलावा, ऑस्टिन, सिएटल, न्यूयॉर्क, लॉस एंजिलिस, डरहम जैसे शहरों में भी लोग विरोध कर रहे थे. एक्टिविस्ट संगठन Indivisible के मुताबिक, इस वीकेंड अमेरिका भर में 1,000 से ज्यादा प्रदर्शन तय थे. करीब 30 लोगों को गिरफ्तार किया गया शहर प्रशासन ने कहा कि ज्यादातर प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहे. हालांकि, करीब 30 लोगों को गिरफ्तार किया गया. एक पुलिस अधिकारी को बर्फ का टुकड़ा लगने से मामूली चोट भी आई. शुक्रवार रात पुलिस ने कैनोपी होटल के बाहर जमा भीड़ को गैरकानूनी जमावड़ा घोषित किया. ICE एजेंट उस होटल में ठहरे थे. कुछ लोग पीछे की गली से जबरन घुसने की कोशिश कर रहे थे, जबकि कुछ ने बर्फ, पत्थर और स्नोबॉल फेंके. किसी को गंभीर चोट नहीं आई, लेकिन एक और होटल की खिड़कियां टूट गईं और दीवारों पर नारे लिखे गए. मेयर और पुलिस का रुख मिनियापोलिस के मेयर जैकब फ्रे ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की तारीफ की, लेकिन साफ चेतावनी दी कि जो लोग संपत्ति को नुकसान पहुंचाएंगे या दूसरों की जान खतरे में डालेंगे, उन्हें गिरफ्तार किया जाएगा. पुलिस चीफ ब्रायन ओ’हारा ने बताया कि शुक्रवार रात पकड़े गए सभी लोगों को बाद में छोड़ दिया गया. उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस को रोजाना दर्जनों कॉल मिल रही हैं, जिनमें लोग ICE की मौजूदगी से नाराज हैं. मिनेसोटा की तीन डेमोक्रेट सांसद इल्हान ओमर, केली मॉरिसन और एंजी क्रेग ने मिनियापोलिस के ICE सेंटर का दौरा करने की कोशिश की. उन्होंने कहा कि पहले उन्हें अंदर जाने की अनुमति दी गई, लेकिन बाद में बाहर जाने को कहा गया. इल्हान ओमर ने एक्स पर लिखा कि ICE और होमलैंड सिक्योरिटी कांग्रेस की निगरानी में रुकावट डाल रहे हैं. जनता को यह जानने का हक है कि ICE सेंटरों के अंदर क्या हो रहा है. ट्रंप प्रशासन और मेयर की राय में फर्क ट्रंप प्रशासन का कहना है कि गोली चलाने वाले ICE एजेंट ने आत्मरक्षा में फायरिंग की. होमलैंड सिक्योरिटी सेक्रेटरी क्रिस्टी नोएम ने भी यही कहा कि रेनी गुड ने एजेंट को गाड़ी से कुचलने की कोशिश की. मेयर जैकब फ्रे ने इसे झूठा बताया और कहा कि वीडियो फुटेज से साफ दिखता है कि रेनी बस वहां से निकलना चाह रही थीं, हमला नहीं कर रही थीं. गोली चलाने वाले एजेंट का नाम जोनाथन रॉस है. वह ICE का अनुभवी अधिकारी है. इस घटना की जांच FBI कर रही है. साथ ही मिनेसोटा राज्य प्रशासन ने अलग से राज्य स्तर की जांच शुरू की, क्योंकि उनका कहना है कि फेडरल जांच में उन्हें शामिल नहीं किया गया. इस घटना के बाद ICE की गतिविधियों और ट्रंप प्रशासन की इमिग्रेशन नीतियों पर पूरे देश में सवाल उठने लगे हैं. ICE क्या है? US Immigration and Customs Enforcement (ICE) अमेरिका की बड़ी फेडरल एजेंसी है, जो डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी के तहत काम करती है. 9/11 के बाद इसे बनाया गया. ICE का काम है कि अवैध इमिग्रेशन रोकना, मानव तस्करी और ड्रग स्मगलिंग की जांच करना, और गैरकानूनी प्रवासियों को हिरासत में लेकर देश से बाहर भेजना. ICE की दो मुख्य शाखाएं हैं HSI (Homeland Security Investigations) जो अपराधों की जांच करती है, और ERO (Enforcement and Removal Operations) जो गिरफ्तारी और डिपोर्टेशन देखती है. बड़े पैमाने पर छापे और डिपोर्टेशन की वजह से ICE अमेरिका की सबसे विवादित एजेंसियों में गिनी जाती है. ये भी पढ़ें: ‘अब न तेल मिलेगा, न पैसा!’ वेनेजुएला ऑपरेशन के बाद ट्रंप ने क्यूबा को दी खुली धमकी अमेरिका ने ईरान में दखल दिया तो US बेस बनेंगे निशाना, ईरानी संसद स्पीकर ने ट्रंप को चेताया US Iran Conflict: अमेरिका कर सकता है ईरान पर हमला, इजराइल हाई अलर्ट पर, प्रदर्शन जारी The post अमेरिका में ट्रंप प्रशासन के खिलाफ भारी प्रदर्शन, हजारों लोग सड़कों पर उतरे, जानें पूरा मामला appeared first on Naya Vichar.

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Iran America Tension: चरम पर ईरान-अमेरिका तनाव, खामेनेई ने तरेरी आंखें, कहा- नाकाम हैं ट्रंप

Iran America Tension: ईरान में जारी प्रदर्शन के बीच अमेरिका के साथ उसका तनाव चरम पर पहुंच गया है. अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने साफ कर दिया है कि अगर प्रदर्शन कर रहे लोगों पर ईरान शासन की ओर से शक्ति का इस्तेमाल किया जाता है तो अमेरिका सैनिक कार्रवाई करेगा. अमेरिका के इस बात से तेहरान की आंखें लाल हैं. खामेनेई शासन ने खुलकर कहा है कि अगर अमेरिकी सेना की ओर से कार्रवाई होती है तो ईरान भी इसका माकूल जवाब देगा. रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान के पार्लियामेंट स्पीकर मोहम्मद बाघर गालिबफ ने अमेरिका और इजराइल को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर वॉशिंगटन ईरान पर सैनिक हमला करता है तो दोनों के सैनिक ठिकानों को ईरान टारगेट करेगा. खामेनेई ने ट्रंप पर तरेरी आंखें ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई ने रविवार को अमेरिकी राष्ट्रपति पर सीधा हमला बोला. खामेनेई ने कहा कि ट्रंप ईरान के अंदरूनी मामलों पर कुछ बोलने से पहले अपने देश की चिंता करें. सोशल मीडिया एक्स पर अपने एक पोस्ट में खामेनेई ने आरोप लगाया कि ट्रंप ईरान में अशांति को बढ़ावा दे रहे हैं, जबकि वे अपने देश की गंभीर समस्याओं को हल करने में नाकाम रहे हैं. खामेनेई ने लिखा- संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति ने घोषणा की कि अगर ईरानी प्रशासन ऐसा या वैसा करती है, तो वह दंगाइयों का साथ देंगे. दंगाइयों ने उन पर उम्मीदें लगा रखी हैं. अगर वह इतने काबिल हैं, तो उन्हें अपने देश को संभालना चाहिए. खामेनेई ने यह बात ऐसे समय में कही है जब ईरान और अमेरिका के बीच तनाव चरम पर है, और ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी ईरानी प्रदर्शनकारियों की मदद करने के लिए तैयार है. चरम पर ईरान-अमेरिका तनाव ईरान आंतरिक कलह से जूझ रहा है. हर दिन सड़क पर लोगों का प्रदर्शन हो रहा है. शासन विरोधी लहर पूरे देश में फैल रही है. ऐसे में ट्रंप के मदद के आश्वासन ने पहले से जारी ईरान-अमेरिका टशन में और इजाफा कर दिया है. खामेनेई के लिए यह उनके शासन के इतने लंबे समय में सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है. खामेनेई ने ईरान में बड़े पैमाने पर हो रहे विरोध प्रदर्शनों के लिए अमेरिकी प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया है. उन्होंने पहले भी कहा था कि प्रदर्शनकारी अमेरिका के राष्ट्रपति को खुश करने के लिए काम कर रहे है. वे अपने ही देश का विनाश कर रहे हैं. खामेनेई ने कहा कि ट्रंप को पहले अपना देश संभालना चाहिए. अमेरिका में भी हो रहे हैं प्रदर्शन- खामेनेई खामेनेई ने कहा कि ट्रंप बार-बार ईरानी प्रदर्शनकारियों के लिए समर्थन जाहिर कर रहे हैं. उन्होंने प्रदर्शनों को दबाने के लिए ईरान को ताकत का इस्तेमाल न करने की चेतावनी भी दी है, नहीं वो सैन्य कार्रवाई करेंगे. ट्रंप के इस बयान से दोनों देशों के बीच का तनाव चरम पर पहुंच गया है. खामेनेई का आरोप है कि ट्रंप ने ईरान में हो रहे घटनाक्रमों पर अपना ध्यान लगाया हुआ है. जबकि, अमेरिका के अंदर भी विरोध प्रदर्शन हुए हैं. बीते शनिवार को हजारों लोग मिनियापोलिस की सड़कों पर मार्च करते हुए एक संघीय आव्रजन एजेंट की ओर से स्त्री की हत्या का विरोध कर रहे थे. ईरान में जारी है प्रदर्शन, 203 से ज्यादा लोगों की मौत ईरान में जारी राष्ट्रव्यापी प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा में अब तक कम से कम 203 लोग मारे गए हैं. ईरान में इंटरनेट और फोन सेवाओं के बंद होने के कारण विदेशों से प्रदर्शनों की मौजूदा स्थिति का आकलन करना मुश्किल हो गया है. अमेरिका स्थित ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट न्यूज एजेंसी के अनुसार प्रदर्शनों में जान गंवाने वालों की संख्या में भारी इजाफा हुआ है. एजेंसी के अनुसार मृतकों में 162 प्रदर्शनकारी और 41 सुरक्षा बलों के सदस्य शामिल हैं. ईरान प्रशासन ने प्रदर्शनों में हताहतों की संख्या जारी नहीं की है.   The post Iran America Tension: चरम पर ईरान-अमेरिका तनाव, खामेनेई ने तरेरी आंखें, कहा- नाकाम हैं ट्रंप appeared first on Naya Vichar.

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