अमेरिका और ताइवान ने बृहस्पतिवार को एक महत्वपूर्ण और व्यापक व्यापार समझौते पर सहमति जताई है. इसके तहत ताइवान से अमेरिका आने वाली वस्तुओं पर लगाए जाने वाले शुल्क में और कटौती की जाएगी. वहीं इसके बदले ताइवान अमेरिका में लगभग 250 अरब अमेरिकी डॉलर का नया निवेश करेगा. यह समझौता दोनों देशों के आर्थिक और रणनीतिक संबंधों को नई मजबूती देने की दिशा में एक बड़ा कदम है. ताइवान के संदर्भ में, पहले ट्रंप प्रशासन ने वहां से आयात होने वाले सामान पर 32 प्रतिशत शुल्क लगाने का फैसला किया था, जिसे बाद में घटाकर 20 प्रतिशत कर दिया गया. अब नए समझौते के तहत इस शुल्क दर को और कम करके 15 प्रतिशत कर दिया गया है. यह दर एशिया-प्रशांत क्षेत्र में अमेरिका के अन्य प्रमुख व्यापारिक साझेदारों, जैसे जापान और दक्षिण कोरिया पर लागू शुल्क के बराबर है. अमेरिकी वाणिज्य मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि ताइवान के साथ हुआ यह समझौता एक नई आर्थिक साझेदारी की नींव रखेगा. इसके तहत अमेरिका में घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए कई विश्व स्तरीय औद्योगिक पार्क विकसित किए जाएंगे. इनसे रोजगार सृजन और तकनीकी विकास को बढ़ावा मिलेगा. मंत्रालय ने इस करार को एक ऐतिहासिक व्यापार समझौता बताते हुए कहा कि इससे अमेरिका के सेमीकंडक्टर उद्योग को विशेष रूप से गति मिलेगी. वहीं, ताइवान प्रशासन ने भी एक बयान जारी कर समझौते के प्रमुख बिंदुओं की पुष्टि की और कहा कि इस करार से दोनों देशों के बीच रणनीतिक सहयोग और आर्थिक साझेदारी पहले से कहीं अधिक मजबूत होगी. यह सौदा उन हालिया ट्रेड डील की सीरीज का हिस्सा है, जिन्हें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी व्यापार नीति के तहत अंजाम दिया है. इससे पहले अमेरिका ने यूरोपीय संघ और जापान के साथ भी इसी तरह के व्यापार समझौते किए थे. ये सभी समझौते ट्रंप द्वारा पिछले साल अप्रैल में व्यापार असंतुलन को दूर करने के उद्देश्य से घोषित व्यापक शुल्क योजना के बाद सामने आए हैं. इसी कड़ी में ट्रंप ने चीन के साथ भी रिश्तों को स्थिर करने के लिए एक साल के व्यापारिक संघर्ष-विराम पर सहमति जताई थी. निवेश का नेतृत्व करेगी टीएसएमसी ताइवान के कई निर्यात पर शुल्क कम करने से अमेरिकी तकनीकी उद्योग में नए निवेश को बढ़ावा मिलेगा. वहीं इससे चीन के गुस्से का जोखिम और भी बढ़ गया है. समझौते की घोषणा से एक दिन पहले, ताइवान को चीन का हिस्सा बताने वाले बीजिंग ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी और इसे ताइवान पर अमेरिका द्वारा किया गया आर्थिक शोषण करार दिया. यह समझौता ट्रंप प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण समय में ताइपेई के साथ संबंध मजबूत करता है, क्योंकि चीन इस द्वीप को अपना मानता है. हालांकि, अमेरिकी प्रशासन ने बीजिंग के साथ पूर्ण व्यापार युद्ध से बचने की कोशिश की है. TSMC को हुआ शानदार मुनाफा यह समझौता ऐसे समय में सामने आया है, जब ताइवान स्थित टीएसएमसी ने पूंजीगत खर्च (कैपिटल स्पेंडिंग) में बढ़ोतरी की घोषणा की है. गुरुवार, 15 जनवरी 2026 को बताया कि वह इस साल अपने कैपिटल स्पेंडिंग में लगभग 40 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी करने की योजना बना रही है. TSMC- दुनिया की सबसे बड़ी कंप्यूटर चिप निर्माता कंपनी है. कंपनी ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में आई तेजी के कारण ताजा तिमाही में अपने शुद्ध मुनाफे में 35 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की है. एनवीडिया और एप्पल जैसी कंपनियों की प्रमुख आपूर्तिकर्ता ताइवान सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग कंपनी ने अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में 506 अरब न्यू ताइवान डॉलर (लगभग 16 अरब अमेरिकी डॉलर) का शुद्ध लाभ दर्ज किया. पिछले 12 महीनों में टीएसएमसी के ताइवान स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध शेयरों में भी 59 प्रतिशत की तेजी आई है. अमेरिका में निवेश बढ़ाएगी TSMC इसके बाद, टीएसएमसी ने अमेरिका में करीब 165 अरब डॉलर के निवेश का वादा किया है. गुरुवार को उसने कहा कि वह एरिजोना में नए प्लांटों के निर्माण की रफ्तार बढ़ा रही है. इसका उद्देश्य एक फैब्रिकेशन प्लांट क्लस्टर बनाना और ग्राहकों की मजबूत मांग को पूरा करना है. लंबे समय से बातचीत किए जा रहे समझौते के तहत ताइवान के चिप निर्माता जैसे टीएसएमसी (TSMC) अमेरिका में उत्पादन बढ़ाएंगे. उन्हें सेमीकंडक्टर और संबंधित उत्पादों पर कम शुल्क देना होगा और कुछ वस्तुएँ बिना शुल्क के आयात कर सकेंगे. बदले में ताइवान को क्या मिलेगा? इसके बदले में ताइवानी कंपनियां अमेरिका में सेमीकंडक्टर, ऊर्जा और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) में 250 अरब डॉलर का निवेश करेंगी, जिसमें टीएसएमसी ने 2025 में पहले ही 100 अरब डॉलर का निवेश किया है. इसके अलावा ताइवान अतिरिक्त 250 अरब डॉलर का क्रेडिट भी प्रदान करेगा ताकि निवेश को और बढ़ाया जा सके. अमेरिकी वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लूटनिक के अनुसार, लक्ष्य यह है कि ताइवान की पूरी चिप आपूर्ति श्रृंखला का 40% अमेरिका में स्थापित किया जाए. यदि अमेरिकी निर्माण नहीं होता तो शुल्क 100% तक हो सकता था. इससे टीएसएमसी के प्रमुख आपूर्तिकर्ताओं को भी फायदा होगा, जिनमें ASML, Lam Research और Applied Materials जैसी बड़ी कंपनियां शामिल हैं. वहीं, निवेश बढ़ने से Nvidia जैसी कंपनियों को भी लाभ होगा, जो टीएसएमसी पर अपने चिप निर्माण के लिए निर्भर हैं. अमेरिका को अब विदेशों से, खासकर ताइवान से, कंप्यूटर चिप्स पर अत्यधिक निर्भरता से परेशानी है. सेमीकंडक्टर अमेरिका में विकसित हुए थे और वहीं डिजाइन किए जाते हैं. लेकिन सबसे अत्याधुनिक चिप्स ज्यादातर विदेशों, खासकर ताइवान में बनाए जाते हैं. समझौते के तहत, अमेरिका में विस्तार करने वाली चिप निर्माता कंपनियां निर्माण की तय समय सीमा के दौरान अपनी नई क्षमता के 2.5 गुना चिप्स और वेफर्स बिना अतिरिक्त शुल्क के आयात कर सकेंगी. इसके अतिरिक्त चिप्स पर प्राथमिकता दी जाएगी. टीएसएमसी ने हाल ही में चौथी फैक्ट्री और पहला उन्नत पैकेजिंग प्लांट अमेरिका में बनाने की अनुमति के लिए आवेदन किया है. नए समझौते के तहत ताइवानी ऑटो पार्ट्स, लकड़ी और अन्य उत्पादों पर अधिकतम 15% शुल्क लगेगा. अमेरिका की सर्वोच्च अदालत जल्द ही राष्ट्रपति को बिना कांग्रेस की मंजूरी के व्यापक शुल्क लगाने के अधिकार पर फैसला करेगी. इस फैसले के बाद यह स्पष्ट होगा कि ताइवान या अन्य व्यापार समझौते पर क्या असर पड़ेगा. ताइवान को अमेरिकी सैन्य सहायता भी मिल रही अमेरिका, ताइवान को लगातार मदद भेज रहा है. वहीं, चीन की ओर