Hot News

January 16, 2026

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

बंगाल में वोटरों को बड़ी राहत, चुनाव आयोग ने बढ़ा दी आपत्ति दर्ज करने की तारीख

मुख्य बातें आयोग को मिली केवल आठ शिकायतें 14 फरवरी को प्रकाशित की जाएगी अंतिम सूची Bengal SIR: कोलकाता. विशेष गहन सुधारों (एसआईआर) की मसौदा सूची प्रकाशित होने के बाद, किसी भी त्रुटि या आपत्ति को दूर करने के लिए आवेदन करने की अंतिम तिथि 15 जनवरी थी. आयोग ने इस समय सीमा को चार दिन और बढ़ा दिया है. सूचना में सुधार के लिए अनुरोध सोमवार, 19 जनवरी तक जमा किए जा सकते हैं. पश्चिम बंगाल के अलावा, गोवा, लक्षद्वीप, राजस्थान और पुडुचेरी को यह अतिरिक्त समय दिया गया है. संयोगवश, आयोग ने 16 दिसंबर को विशेष गहन संशोधनों की एक मसौदा सूची प्रकाशित की. आयोग को मिली केवल आठ शिकायतें अब तक, विभिन्न दलों की ओर से सूची में संशोधन की मांग करते हुए आयोग को केवल आठ शिकायतें प्राप्त हुई हैं. इनमें सबसे अधिक शिकायतें तृणमूल कांग्रेस द्वारा प्रस्तुत की गई हैं. तृणमूल ने तीन शिकायतें दर्ज कराई हैं, जिनमें तीन मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में शामिल करने का अनुरोध किया गया है. तृणमूल का दावा है कि इन मतदाताओं के नाम मसौदा सूची से हटा दिए गए थे. सीपीएम की ओर से दो शिकायतें हैं, फॉरवर्ड ब्लॉक और भाजपा की ओर से एक-एक शिकायत है, और बहुजन समाज पार्टी की ओर से एक शिकायत है. प्रत्येक पार्टी ने सूची में शामिल होने के लिए आवेदन किया है. किसी भी पक्ष ने नाम हटाने का अनुरोध दायर नहीं किया है. 14 फरवरी को प्रकाशित की जाएगी अंतिम सूची उस सूची से 58 लाख से अधिक नाम हटा दिए गए थे. हालांकि, वह सूची अंतिम मतदाता सूची नहीं है. उसमें त्रुटियां हो सकती हैं. आपत्तियां या शिकायतें दर्ज कराने के लिए एक महीने का समय दिया गया था. आयोग ने समय सीमा को चार दिन और बढ़ा दिया है. सभी शिकायतों की समीक्षा और सुधार के बाद अंतिम सूची प्रकाशित की जाएगी. आयोग के सूत्रों के अनुसार, अंतिम सूची 14 फरवरी को प्रकाशित की जाएगी. कुल मिलाकर, आयोग ने पांच राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (सीईओ) को पत्र लिखकर समय सीमा में विस्तार की सूचना दी है. Also Read: कोलकाता में ED के बाद अब CBI की ताबड़तोड़ छापेमारी, बैंक धोखाधड़ी मामले में सुबह सुबह पांच जगहों पर रेड The post बंगाल में वोटरों को बड़ी राहत, चुनाव आयोग ने बढ़ा दी आपत्ति दर्ज करने की तारीख appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

ईरान पर हमला नहीं करेगा अमेरिका, डोनाल्ड ट्रंप ने रात में खुद फोन कर दी जानकारी; ईरानी राजदूत का दावा

ईरान में वर्तमान इस्लामिक रिपब्लिक के खिलाफ काफी तेज विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं. इनमें मरने वालों की संख्या अलग-अलग रिपोर्ट्स में 800-2000 के बीच बताई जा रही है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप विरोध प्रदर्शनों को दबाने पर ईरानी सत्ता को लगातार हमले की धमकी दे रहे हैं. इसी बीच कई घटनाओं ने लोगों का ध्यान खींचा, जैसे- मिडिल ईस्ट में अपने सबसे बड़े सैन्य बेस से अमेरिकी सैनिकों का हटना, नागरिकों के लिए एजवाइजरी जारी करना, यूएसएस अब्राहम लिंकन का साउथ चाइना सी से पर्शियन गल्फ की ओर मूव करना. ऐसा लगा कि हमला हो ही जाएगा, लेकिन ऐन वक्त पर सब शांत हो गया. हमला टल गया. इसके पीछे कोई और नहीं बल्कि डोनाल्ड ट्रंप खुद थे. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुद ईरान को यह जानकारी दी.  उन्होंने ईरान को बताया कि उनका हमला करने का कोई इरादा नहीं है. उन्होंने तेहरान से संयम बरतने को कहा है. यह जानकारी पाकिस्तान में ईरान के राजदूत रजा अमीरी मोघदम ने दी. मोघदम ने बताया कि उन्हें यह सूचना बुधवार को पाकिस्तान समयानुसार रात लगभग 1 बजे मिली. इसके अनुसार ट्रंप युद्ध नहीं चाहते और उन्होंने ईरान से अपील की है कि वह क्षेत्र में अमेरिकी हितों को निशाना न बनाए. यह बयान ऐसे समय आया है जब ईरान हाल के वर्षों की सबसे गंभीर अशांति का सामना कर रहा है और वॉशिंगटन संकेत दे रहा है कि हवाई हमले अभी भी एक विकल्प बने हुए हैं. 800 लोगों को दी जाने वाली थी फांसी ईरानी राजदूत ने यह भी कहा कि ईरान में लोगों को विरोध प्रदर्शन करने का वैध अधिकार है. ईरानी प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत भी की है. मोघदम ने आरोप लगाया कि ईरान में हिंसा के पीछे सशस्त्र समूह शामिल हैं, जिन पर हत्याओं और मस्जिदों पर हमलों के आरोप हैं. इस हमले के बाद हजारों लोगों को गिरफ्तार किया गया, जिसकी संख्या 10000 से ऊपर बताई जा रही है. वहीं इनमें से कई लोगों को फांसी की भी सजा देने का ऐलान किया गया था. बुधवार तक अमेरिका धमकी दे रहा था कि अगर ईरान ने प्रदर्शनों के सिलसिले में गिरफ्तार लोगों को मौत की सजा दी, तो वह सैन्य कार्रवाई करेगा. व्हाइट हाउस की प्रवक्ता कैरोलीना लेविट ने कहा कि ईरान में 800 लोगों को फांसी दी जाने वाली थी.  टली फांसी, एयरबेस पर लौटे सैनिक अमेरिकी हमले की जानकारी ईरान को स्पष्ट रूप से मिल गई थी. क्योंकि जिस हिसाब से अमेरिका ने कार्रवाई की तैयारी की थी, उसका अंदेशा भी साफ झलक रहा था. हालांकि, बाद में व्हाइट हाउस में एक घोषणा के दौरान ट्रंप ने कहा कि उन्हें दूसरी तरफ के बहुत महत्वपूर्ण स्रोतों से आश्वासन मिला है कि फांसी नहीं दी जाएगी. अलग-अलग न्यूज एजेंसियों की रिपोर्ट के मुताबिक, इसके बाद अमेरिकी सैनिक कतर के अपने अल उदैद बेस पर लौट आए. ट्रंप ने कहा कि उन्होंने कहा है कि हत्याएं रुक गई हैं और फांसी नहीं होगी. आज कई फांसी होनी थीं, लेकिन अब वे नहीं होंगी और हम इसकी पुष्टि करेंगे.  अब भी अमेरिका के लिए खुला है सैन्य विकल्प हालांकि व्हाइट हाउस ने अब भी अमेरिकी सैन्य कार्रवाई का विकल्प पूरी तरह खत्म नहीं किया है.  ओवल ऑफिस में एक रिपोर्टर से बात करते हुए  ट्रंप ने कहा कि हम इसे देखेंगे और यह देखेंगे कि प्रक्रिया क्या होती है. वहीं गुरुवार को ईरान ने किसी भी विदेशी खतरे के खिलाफ आत्मरक्षा करने की कसम खाई. ऐसे में दोनों देशों के बीच स्थिति अब भी सामान्य नहीं हुई है. आने वाले समय में बयानबाजी चलती रहने की संभावना है.  ये भी पढ़ें:- ग्रीनलैंड पर ट्रंप का लक्ष्य साफ, व्हाइट हाउस बोला- यूरोपीय सैनिकों से फैसला नहीं बदलेगा विरोध प्रदर्शनों के बीच US ने ईरान पर लगाए नए प्रतिबंध, क्या अब अमेरिकी हमले का खतरा टल गया मचाडो ने ट्रंप को दिया अपना नोबेल पुरस्कार, पर क्या अवॉर्ड साझा हो सकता है? मेडल देने के बाद सुनाई 200 साल पुरानी बात The post ईरान पर हमला नहीं करेगा अमेरिका, डोनाल्ड ट्रंप ने रात में खुद फोन कर दी जानकारी; ईरानी राजदूत का दावा appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

Masik Shivratri: मासिक शिवरात्रि के दिन करें ये शक्तिशाली उपाय, जीवन की हर समस्या से मिल सकता है छुटकारा

Masik Shivratri: मासिक शिवरात्रि हर महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाई जाती है. इस दिन विशेष रूप से भगवान शिव की पूजा और अर्चना की जाती है. मान्यता है कि इस दिन भोलेनाथ का अभिषेक, मंत्र-जाप, पूजा और चालीसा का पाठ अन्य दिनों की तुलना में अधिक प्रभावशाली होता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मासिक शिवरात्रि पर विधि-विधान से की गई पूजा के साथ यदि कुछ ज्योतिषीय उपाय किए जाएं, तो पूजा का प्रभाव दोगुना हो जाता है. साथ ही ग्रह दोष, कार्य में बाधा, विवाह में देरी और रिश्तों में तनाव जैसी समस्याओं से भी राहत मिलती है. मासिक शिवरात्रि के दिन करें ये उपाय मंत्र उच्चारण मासिक शिवरात्रि के दिन महादेव के मंत्रों का जाप अवश्य करना चाहिए. माना जाता है कि इससे मानसिक शांति मिलती है, नकारात्मकता जीवन से दूर रहती है और रिश्तों में तनाव कम होता है. दीया जलाएं इस दिन भक्तों को भगवान शिव के सामने सुबह और शाम के समय दीपक जलाना चाहिए. इसे बहुत शुभ माना जाता है. दीपक जलाने के लिए सरसों का तेल उत्तम माना गया है. कहा जाता है कि इससे घर से बुरी नजर दूर होती है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है. शिवलिंग पर चढ़ाएं गन्ने का रस यदि आपके जीवन में आर्थिक समस्याएं चल रही हैं या काम बनते-बनते रुक जाते हैं, तो मासिक शिवरात्रि के दिन शिवलिंग पर गन्ने का रस चढ़ाना बेहद प्रभावशाली माना जाता है. मान्यता है कि इससे भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और आर्थिक परेशानियों का नाश होता है. काला तिल यदि आपकी कुंडली में शनि या राहु-केतु की स्थिति कमजोर है, तो मासिक शिवरात्रि के दिन शिवलिंग पर काला तिल जरूर चढ़ाएं. इससे ग्रहों की स्थिति मजबूत होती है. अपराजिता के फूल यदि आपके कार्य में बार-बार बाधाएं आ रही हैं और काम बनते-बनते रह जा रहा है, तो इस दिन शिवलिंग पर अपराजिता के फूल अवश्य अर्पित करें. यह भी पढ़ें: Masik Shivratri Shiv Chalisa Path Benefits: मासिक शिवरात्रि पर जरूर करें शिव चालीसा का पाठ, मिलेगा ये सारा फायदा Disclaimer: यहां दी गई जानकारी केवल मान्यताओं और परंपरागत जानकारियों पर आधारित है. नया विचार किसी भी तरह की मान्यता या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. The post Masik Shivratri: मासिक शिवरात्रि के दिन करें ये शक्तिशाली उपाय, जीवन की हर समस्या से मिल सकता है छुटकारा appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

Baby Names: लड़के और लड़की दोनों के लिए प्यारे, यूनिक और अर्थ वाले नाम यहां देखें

Baby Names: शिशु का नाम सिर्फ पहचान नहीं होता, बल्कि उसके साथ जुड़ी भावनाएं और उम्मीदें भी होती हैं. माता-पिता चाहते हैं कि नाम सुनने में प्यारा हो, अर्थ अच्छा हो और समय के साथ कभी पुराना न लगे. आजकल लोग ऐसे नाम पसंद कर रहे हैं जो यूनिक हों, मॉडर्न भी लगें और साथ ही हिंदुस्तानीय संस्कृति से जुड़े हों. अगर आप भी अपने बेटे या बेटी के लिए कोई ऐसा नाम ढूंढ रहे हैं जो अलग पहचान बनाए और दिल को छू जाए, तो यहां आपको लड़के और लड़की दोनों के लिए चुनिंदा, अर्थपूर्ण और प्यारे नाम देखने को मिलेंगे. लड़कों के लिए प्यारे और यूनिक अर्थ वाले नाम कौन से हैं? आरव (Aarav) – शांत और समझदार बच्चाविहान (Vihaan) – नई शुरुआत, सुबह की पहली किरणकियान (Kiaan) – राजा जैसा, सम्मानितईशान (Ishaan) – भगवान शिव का नामयुवान (Yuvan) – जवान, ऊर्जा से भराआद्विक (Advik) – अनोखा, अलग पहचान वालारेयान (Reyan) – समझदार और दयालुप्रणव (Pranav) – ओंकार, पवित्र ध्वनिलक्ष्य (Lakshya) – उद्देश्य, लक्ष्य पर ध्यान रखने वालासमर्थ (Samarth) – सक्षम और मजबूत लड़कियों के लिए प्यारे और यूनिक अर्थ वाले नाम कौन से हैं? अनाया (Anaya) – ईश्वर की कृपाकाव्या (Kavya) – कविता जैसी सुंदरइरा (Ira) – धरती, कोमलआरोही (Arohi) – ऊंचाई की ओर बढ़ने वालीसिया (Siya) – देवी सीता का नाममायरा (Myra) – प्यारी और खासनियति (Niyati) – भाग्य, किस्मतरूहानी (Ruhani) – आत्मा से जुड़ी हुईअवनी (Avni) – धरतीप्रिया (Priya) – प्रिय और प्यारी Disclaimer: यह आर्टिकल सामान्य जानकारियों और मान्यताओं पर आधारित है. नया विचार इसकी पुष्टि नहीं करता है. The post Baby Names: लड़के और लड़की दोनों के लिए प्यारे, यूनिक और अर्थ वाले नाम यहां देखें appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

One Two Cha Cha Chaa: आशुतोष राणा ने बताया बिहारी प्रेम और ‘बिहार’ शब्द का अर्थ, नायरा बोलीं- मेरे ठुमकों से लगता है 440 वोल्ट का झटका

One Two Cha Cha Chaa: बिहारी का प्रेम उसकी मूल प्रकृति है. यहां के लोग जब प्रेम करते हैं तो पूरी निष्ठा के साथ करते हैं. जीवन भर के लिए, जीवन के साथ भी और जीवन के बाद भी. लेकिन बिहारी से प्रेम करवा लेना आसान नहीं होता. यह बातें एक्शन-कॉमेडी फिल्म ‘वन टू चा चा चा’ के प्रमोशन के सिलसिले में नया विचार कार्यालय पहुंचे अभिनेता आशुतोष राणा बोल रहे थे. उन्होंने ‘बिहार’ शब्द का अर्थ ही भ्रमण बताया. कहा ऐसा भ्रमण, जहां मन के भ्रम का भी निवारण हो जाए. यह समस्याओं के समाधान की भूमि है, जहां लोग कठिन परिस्थितियों में भी शांतचित्त रहना जानते हैं. साथ ही, देश के किसी भी हिस्से में डिजिटल मीडिया पर जितने कंटेंट हैं, 40 फीसदी हिस्सा बिहार का है. प्रोमोशन में हर्ष मायर, अनंत जोशी, ललित प्रभाकर, अशोक पाठक व नायरा बनर्जी भी पहुंचे थे.नायरा बनर्जी ने बताया कि वह फिल्म में एक गांव-गांव घूमकर नाचने वाली परफॉर्मर के किरदार में नजर आएंगी, जिनके ठुमकों की चर्चा दूर-दूर तक है. लोग उन्हें देखने उमड़पड़ते हैं और मजाक में कहा जाता है कि उन्हें देखकर 440 वोल्ट का झटका लग जाता है. पढ़ें उनके साथ बातचीत के अंश.. ये भी पढ़ें: जब कहानी मजबूत होती है, तब अभिनय को चमकने के लिए मेहनत नहीं करनी पड़ती, बोले दिब्येंदु भट्टाचार्य Q. फिल्मों में बिहारी किरदार को आप किस तरह ढालते हैं? आशुतोष राणा: आज डिजिटल मीडिया पर जितना कंटेंट है, उसका बड़ा हिस्सा बिहार से जुड़ा हुआ है. ऐसे में यहां की संस्कृति, बोली और जीवनशैली को समझना किसी भी अभिनेता के लिए कठिन नहीं है. बिहार की भाषा में गमक है, मिठास है, खुशबू है. यहां के लोगों की सहजता और सरलता बहुत आकर्षक है. टीवी और सोशल मीडिया पर जिन चेहरों की सबसे ज्यादा चर्चा होती है, उनमें बड़ी संख्या बिहार से जुड़े लोगों की होती है. यही सब देखकर, सुनकर और महसूस कर अभिनेता अपने किरदार को गढ़ता है. Q. साहित्य और अभिनय के बीच आप किस तरह संतुलन बनाते हैं? आशुतोष राणा: मेरे लिए साहित्य और अभिनय एक-दूसरे के पूरक हैं. स्वानुभूति को संसार की अनुभूति बनाना साहित्य है और संसार की अनुभूति को स्वानुभूति बनाकर प्रस्तुत करना अभिनय. एक यात्रा ‘स्व’ से संसार की है और दूसरी संसार से ‘स्व’की. लेकिन दोनों में ही मूल तत्व अभिव्यक्ति है. कभी हम किताबों के माध्यम से बोलते हैं, कभी कविता से, कभी सिनेमा से और कभी संवाद के ज़रिये. मनुष्य की पूरी यात्रा अभिव्यक्ति की यात्रा है. Q. आज के युवाओं के लिए आपका क्या संदेश है? आशुतोष राणा: समय के क्षण का, अन्न के कण का, धन के पण का और स्वयं के प्रण का आदर करना चाहिए. जो इनका सम्मान नहीं करता, समय भी उसका सम्मान नहीं करता. इसलिए समय को पहचानिए, समय को पकड़िए और उसका सदुपयोग कीजिए. Q. कोई प्रेरणादायक पंक्ति या शेर जो आप साझा करना चाहें? आशुतोष राणा: कविता नहीं, लेकिन एक शेर जरूर कहूंगा, जो आज के समय पर बिल्कुल फिट बैठता है.ढूंढिए मत आदमी में आदमी सौ फीसदी, क्योंकि जब चलता है सिक्का कुछ न कुछ घिसता तो है. गम न कीजे जो नहीं है घर तलक पक्की सड़क, धूल-मिट्टी से सना जैसा भी है रस्ता तो है. ये भी पढ़ें: चीन के ये लेखक हुए पटना में सुपरहिट! क्या आप जानते हैं ‘चमकीले बादल’ में क्या है खास? Q. आप कॉमेडी फिल्म ‘वन टू चा चा चा’ के प्रमोशन के सिलसिले में पटना आई हैं. इस फिल्म को लेकर आपका उत्साह कितना है? नायरा बनर्जी: मैं इस फिल्म को लेकर बेहद उत्साहित हूं. वन टू चा चा चा एक हल्की-फुल्की, मस्ती से भरपूर कॉमेडी है, जिसमें मनोरंजन के साथ-साथ एक अलग तरह की एनर्जी भी है. पटना आकर दर्शकों से मिलना मेरे लिए खास है, क्योंकि यहां के लोग सिनेमा को दिल से अपनाते हैं. मुझे उम्मीद है कि यह फिल्म दर्शकों को रोजमर्रा की भागदौड़ से निकालकर हंसी और खुशी के पल देगी. Q. आप टीवी की तुलना में फिल्मों और वेब सीरीज की गति को ज्यादा पसंद करती हैं. वन टू चा चा चा ने आपको कैसे आकर्षित किया? नायरा बनर्जी: हां, क्योंकि टीवी में कलाकार रोज दर्शकों के सामने होते हैं और वहां कहानी की रफ्तार बहुत तेज होती है. फिल्मों में किरदार को समझने और उसे जीने का समय मिलता है. वन टू चा चा चा ने मुझे इसलिए आकर्षित किया क्योंकि इसमें कॉमेडी के साथ-साथ किरदार की परतें भी हैं. इसमें केवल हंसाना ही मकसद नहीं है, बल्कि दर्शकों से एक जुड़ाव भी बनता है, और यही चीज मुझे सबसे ज्यादा पसंद आई. Q. आपने ग्लैमर से हटकर भी कई प्रोजेक्ट्स किए हैं, जैसे बिना मेकअप काम करना. क्या ऐसे रोल आपको ज़्यादा संतुष्टि देते हैं? नायरा बनर्जी:बिल्कुल. एक कलाकार के रूप में मैं हमेशा ऐसे किरदार करना चाहती हूं जो मुझे अंदर से चुनौती दें. जब आप बिना मेकअप या ग्लैमर के किसी किरदार को निभाते हैं, तो पूरा फोकस भावनाओं और सच्चाई पर होता है. ऐसे रोल मुझे खुद को बेहतर कलाकार के रूप में समझने का मौका देते हैं. मेरे लिए अभिनय सिर्फ खूबसूरत दिखना नहीं, बल्कि ईमानदारी से किरदार को जीना है. Q. आपने फिल्मों से करियर शुरू किया, लेकिन टीवी ने आपको बड़ी पहचान दिलाई. इस सफर को आप कैसे देखती हैं? नायरा बनर्जी: टीवी ने मुझे सीधे दर्शकों से जोड़दिया. फिल्मों में पहचान मिलने में वक्त लगता है, जबकि टीवी आपके किरदार को घर-घर तक पहुंचा देता है. दिव्य दृष्टि जैसे शो ने मुझे बहुत प्यार दिलाया. मैं मानती हूं कि हर माध्यम की अपनी अहमियत है और अगर कलाकार दिल से काम करे, तो हर प्लेटफॉर्म उसे आगे बढ़ने का मौका देता है. Q. आखिर में, पटना के दर्शकों के लिए आपका क्या संदेश है? नायरा बनर्जी: पटना के दर्शकों का प्यार और अपनापन हमेशा खास रहा है. मैं यही कहना चाहूंगी कि वन टू चा चा चा जरूर देखें और हंसी के इस सफर का हिस्सा बनें. आपका प्यार ही हमारी सबसे बड़ी ताकत है. फिल्म ‘वन टू चा चा चा’ के स्टारकास्ट ने क्या कहा? हर्ष मायर: इस फिल्म में मैं भतीजा का रोल निभा रहा हूं.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

सावधान! बाइक की टंकी फुल कराने से पहले चेक कर लें आज का रेट, कहीं जेब पर भारी न पड़ जाए पेट्रोल का दाम

Petrol Diesel Price Today 16 Jan 2026: 16 जनवरी, 2026 देश की तेल कंपनियों ने आज सुबह पेट्रोल और डीजल के नवीनतम दाम जारी कर दिए हैं. हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार हलचल बनी हुई है, लेकिन हिंदुस्तानीय घरेलू बाजार में आम आदमी के लिए राहत बरकरार है. लंबे समय से ईंधन की कीमतों में कोई बड़ा बदलाव देखने को नहीं मिला है. प्रमुख महानगरों और शहरों का हाल नीचे दिए गए टेबल में आप देख सकते हैं कि आज देश के प्रमुख शहरों में ईंधन किस रेट पर बिक रहा है: शहर पेट्रोल (प्रति लीटर) डीजल (प्रति लीटर) नई दिल्ली ₹94.72 ₹87.62 मुंबई ₹104.21 ₹92.15 कोलकाता ₹103.94 ₹90.76 चेन्नई ₹100.75 ₹92.34 बेंगलुरु ₹102.92 ₹89.02 हैदराबाद ₹107.46 ₹95.70 जयपुर ₹104.72 ₹90.21 लखनऊ ₹94.69 ₹87.80 पटना ₹105.58 ₹93.80 चंडीगढ़ ₹94.30 ₹82.45 कैसे तय होता है आपकी जेब का खर्च? पेट्रोल और डीजल की अंतिम कीमत कई कारकों पर निर्भर करती है: अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड की कीमत और डॉलर के मुकाबले हिंदुस्तानीय रुपये की मजबूती सबसे बड़ा फैक्टर है. टैक्स का जाल: केंद्र द्वारा लगाई जाने वाली एक्साइज ड्यूटी और राज्यों द्वारा वसूला जाने वाला VAT (वैट) ही वह मुख्य कारण है जिससे अलग-अलग राज्यों में रेट अलग होते हैं. कच्चे तेल को पेट्रोल बनाने की लागत और उसे पंपों तक पहुँचाने का खर्च भी कीमतों में शामिल होता है. घर बैठे मिनटों में चेक करें ताजा रेट अब आपको पेट्रोल पंप जाने की ज़रूरत नहीं, आप अपने फोन से एक SMS भेजकर भी ताज़ा रेट जान सकते हैं: Indian Oil (IOCL): मैसेज बॉक्स में RSP लिखें और 9224992249 पर भेजें. HPCL: HP Price लिखकर 9222201122 पर मैसेज करें. BPCL: RSP लिखकर 9223112222 पर सेंड करें. Also Read: अब जेब में रहेगा PF का पैसा, UPI के जरिए चुटकियों में होगा क्लेम! जानिए कैसे The post सावधान! बाइक की टंकी फुल कराने से पहले चेक कर लें आज का रेट, कहीं जेब पर भारी न पड़ जाए पेट्रोल का दाम appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

बांग्लादेश में नहीं थम रहे अल्पसंख्यकों पर हमले, सिलहट में हिंदू शिक्षक के घर में लगाई आग

बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदायों पर हमले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं. ताजा मामला सिलहट जिले के गोवाइनघाट उपजिला का है, जहां एक हिंदू शिक्षक के घर को आग के हवाले कर दिया गया. यह घर शिक्षक बिरेन्द्र कुमार दे का है, जिन्हें इलाके में ‘झुनू सर’ के नाम से जाना जाता है. घटना के बाद परिवार और स्थानीय हिंदू समुदाय में डर का माहौल है. लोगों का कहना है कि ऐसे हमले अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करते हैं. स्थानीय लोगों ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है. आग की घटना का वीडियो सामने आया इस घटना का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें देखा जा सकता है कि आग तेजी से पूरे घर में फैल रही है. वीडियो में परिवार के लोग जान बचाने के लिए घर से बाहर निकलने की कोशिश करते नजर आ रहे हैं. राहत की बात यह रही कि इस घटना में किसी के घायल होने की तत्काल कोई सूचना नहीं है. फिलहाल यह साफ नहीं हो पाया है कि आग किसने और कैसे लगाई. आरोपियों की पहचान भी अभी नहीं हो सकी है. 🚨Hindu home comes under attack again! Islamists have once again set fire at the home of Birendra Kumar Dey alias “Jhunu Sir” (a teacher by profession) in Bahor village of Nandirgaon union in Gowainghat upazila of Sylhet district in Bangladesh. pic.twitter.com/MZRvHBuWpT — Salah Uddin Shoaib Choudhury (@salah_shoaib) January 15, 2026 हिंदू परिवारों के घरों पर लगातार हमले यह घटना ऐसे समय सामने आई है, जब हाल के हफ्तों में बांग्लादेश में हिंदू परिवारों के घरों को निशाना बनाए जाने की कई घटनाएं सामने आई हैं. एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार, 28 दिसंबर को पीरोजपुर जिले के दुमरीतला गांव में एक हिंदू परिवार के घर में आग लगा दी गई थी. यह घटना 18 दिसंबर को मयमनसिंह में 29 वर्षीय गारमेंट वर्कर दीपु चंद्र दास की कथित तौर पर भीड़ द्वारा हत्या और शव जलाने की घटना के एक हफ्ते बाद हुई थी. दीपु पर कथित रूप से ईशनिंदा के आरोप लगाए गए थे. पांच दिनों में अल्पसंख्यकों पर छठी आगजनी की घटना इससे पहले, 23 दिसंबर को टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, चटगांव के राउजान इलाके में दो प्रवासी हिंदू परिवारों के घरों में आग लगा दी गई थी. आरोप है कि हमलावरों ने घरों के बाहर से दरवाजे बंद कर दिए थे. इस घटना में करीब आठ लोग बाल-बाल बचे. यह इलाका सिर्फ पांच दिनों में अल्पसंख्यकों पर छठी आगजनी की घटना का गवाह बना था. पीड़ितों ने बताया कि वे धुएं से जागे, लेकिन बाहर निकल नहीं सके क्योंकि दरवाजे बाहर से बंद थे. एक पीड़ित ने कहा है कि हमने टीन की छत और बांस की बाड़ काटकर किसी तरह जान बचाई. यह घटना रात करीब 3:15 से 4 बजे के बीच सुल्तानपुर गांव में हुई थी. लगातार हो रही इन घटनाओं ने बांग्लादेश में धार्मिक अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर चिंता और बढ़ा दी है. ये भी पढ़ें: पुलिस हिरासत में अवामी लीग के हिंदू नेता प्रलय चाकी की मौत, परिवार ने प्रशासन पर लगाए गंभीर आरोप खौफ का नंगा नाच, इस देश के बीच पर लटकाए 5 मानव सिर, साथ मिली खूनी चेतावनी The post बांग्लादेश में नहीं थम रहे अल्पसंख्यकों पर हमले, सिलहट में हिंदू शिक्षक के घर में लगाई आग appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

महाराष्ट्र निकाय चुनाव के परिणाम के बाद क्या होगा ठाकरे भाइयों का? चाचा–भतीजा पर भी नजर

Maharashtra Elections Result 2026 : महाराष्ट्र में 29 नगर निगमों के चुनावों के नतीजे राज्य निर्वाचन आयोग 16 जनवरी को यानी आज घोषित करेगा. इनमें मुंबई की बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) भी शामिल है. 15 जनवरी को मतदान हुआ था. मुंबई, पुणे, ठाणे, पिंपरी-चिंचवड़, कल्याण-डोंबिवली, मीरा-भायंदर, उल्हासनगर और नवी मुंबई जैसे बड़े नगर निगमों के नतीजों पर खास नजर रहेगी. इन दो वजह से चुनाव के परिणाम होंगे खास इस बार नगर निकाय चुनावों पर खास नजर है. ऐसा इसलिए क्योंकि नेतृत्वक गठबंधन बदले हुए नजर आ रहे हैं. पुराने साथी अलग हो गए हैं, जबकि कभी विरोधी रहे दल साथ आ गए हैं. ठाकरे परिवार के चचेरे भाई राज और उद्धव ठाकरे ने जून में मतभेद खत्म किया था. इसके बाद इस चुनाव में एकजुट होकर मैदान संभाला है. वहीं, महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार भी शरद पवार की एनसीपी गुट के साथ पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ की दो सीटों पर मुकाबले में हैं. इन दो सवाल के जवाब मिलेंगे चुनाव परिणाम के बाद 1. साल 2005 के बाद पहली बार अलग हुए ठाकरे चचेरे भाइयों ने एक साथ आने का फैसला इस बार के चुनाव में किया है. निकाय चुनाव के लिए उन्होंने एक साथ चुनाव का घोषणा पत्र जारी किया. अब देखना है कि क्या चुनाव के बाद दोनों भाई एक साथ नजर रहेंगे या नतीजों को देखकर दोनों के संबंधों में फिर दूरी आ जाएगी? यह भी पढ़ें : किन 2 सवालों के जवाब आएंगे महाराष्ट्र निकाय चुनाव के बाद? 2. पश्चिमी महाराष्ट्र में अजित पवार और उनके चाचा शरद पवार साथ नजर आए. शरद की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के साथ पुणे, परभणी और पिंपरी-चिंचवड़ में अजित ने गठबंधन किया है. इसके बाद नेतृत्वक गलियारे में चर्चा तेज है कि चुनाव के बाद अजित पवार और चाचा शरद पवार की पार्टी साथ आ सकती है. इसका मतलब एनसीपी के दोनों गुट एक हो सकते हैं. इसके संकेत अजित पवार ने कुछ दिन पहले एएनआई के इंटरव्यू में दिए हैं. एग्जिट पोल में क्या आया सामने ? एग्जिट पोल के मुताबिक बीएमसी चुनाव में बीजेपी की अगुवाई वाले महायुति गठबंधन को बढ़त मिलने का अनुमान है. Axis My India के अनुसार बीजेपी–शिवसेना गठबंधन को 131 से 151 सीटें मिल सकती हैं. वहीं शिवसेना (UBT)–एमएनएस–एनसीपी (एसपी) गठबंधन को 58 से 68 सीटें, कांग्रेस–VBA–RSP गठबंधन को 12 से 16 सीटें मिल सकतीं हैं. अन्य को 6 से 12 सीटें मिलने का अनुमान जताया गया है. JVC ने भी बीजेपी गठबंधन को कम से कम 138 सीटें मिलने की बात कही है. The post महाराष्ट्र निकाय चुनाव के परिणाम के बाद क्या होगा ठाकरे भाइयों का? चाचा–भतीजा पर भी नजर appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

‘मां…’ भी नहीं बोल पाये थे बच्चे, मुंह पर टेप चिपका ले गये मैदान की तरफ! अंश-अंशिका मामले में बड़ा खुलासा

Ansh Anshika Case: रांची के धुर्वा से गायब दो शिशु अंश-अंशिका मामले में बड़ा खुलासा हुआ है. अंश ने रांची पुलिस को पूछताछ में बताया है कि दो जनवरी को जिस दुकान से उन्होंने चूड़ा आदि लिया था उसी गली में पीले रंग का एक ऑटो आया जिसमें एक स्त्री पुरुष बैठे थे. उन दोनों ने उसे और उसकी बहन को उस ऑटो में बिठाया और मुंह पर टेप चिपका दिया. पुलिस ने ये बयान सीडब्ल्यूसी के सामने दर्ज कराया. बच्चों के शरीर पर चोट के निशान नहीं लेकिन हुई है मारपीट सीडब्ल्यूसी ने कुंती साहू ने बताया कि दुकान के आसपास के लोगों ने उन स्त्री पुरुष से पूछा भी था कि ये दोनों तो यहां के हैं. आप लोग इसे कहां ले जा रहे हैं. उनके मुताबिक 5 साल का अंश ने ये बयान दिया है कि वहां से उनलोगों को जिधर भैंस बंधी रहती है उधर के एक खाली मैदान की तरफ ले जाया गया. उसकी बहन अंशिका काफी छोटी है इसलिए वह कुछ बोल नहीं पायी. एक अन्य सवाल के जवाब में कुंती साहू कहती हैं कि बच्चों के शरीर पर चोट के निशान नहीं मिले, लेकिन उनके साथ मारपीट हुई है. Also Read: अंश-अंशिका को खोजने वाले युवाओं को सम्मानित करे प्रशासन, आदित्य साहू ने की मांग सदर अस्पताल में दोनों बच्चों की हुई जांच बच्चों की मेडिकल जांच के लिए कहा गया तो अंश और अंशिका की मां नीतू और पिता सुनील कुमार यादव दोनों बच्चों को लेकर सदर अस्पताल पहुंचे. इमरजेंसी में डॉक्टर ने दोनों को मेडिकल चेकअप किया फिर उन बच्चों को बाल रोग विभाग में रेफर कर दिया गया. वहां पर डॉ सूर्या ने कंप्लीट जांच की तो पता चला कि दोनों शिशु बिल्कुल स्वास्थ्य हैं. इससे पहले 14 जनवरी को धुर्वा से गायब दोनों बच्चों को रामगढ़ के चितरपुर से सकुशल बरामद कर लिया गया था. इस मामले में दो लोगों की गिरफ्तारी भी हुई है. पुलिस उनसे पूछताछ कर रही है. Also Read: Kharsawan News: आकर्षणी माता शक्ति पीठ पर आखान यात्रा में उमड़े श्रद्धालु, 300 फीट ऊंचे पहाड़ी पर हुई पूजा The post ‘मां…’ भी नहीं बोल पाये थे शिशु, मुंह पर टेप चिपका ले गये मैदान की तरफ! अंश-अंशिका मामले में बड़ा खुलासा appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

मचाडो ने ट्रंप को दिया अपना नोबेल मेडल, पर क्या अवॉर्ड साझा हो सकता है? पुरस्कार देने के बाद सुनाई 200 साल पुरानी बात

वेनेज़ुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरिना मचाडो गुरुवार, 15 जनवरी को वाशिंगटन डीसी पहुंची. उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात की. इसी दौरान उन्होंने अपना नोबेल शांति पुरस्कार पदक अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप को सौंप दिया. इसके बाद उन्होंने प्रेस से बात करते हुए कहा कि यह हमारी (वेनेजुएला) स्वतंत्रता के प्रति उनकी विशिष्ट प्रतिबद्धता को सम्मान है. हालांकि उन्होंने इसके बारे में और डिटेल नहीं दी. वहीं व्हाइट हाउस ने भी यह नहीं बताया कि ट्रंप ने वह मेडल स्वीकार किया या नहीं. यह मुलाकात ऐसे समय हुई जब ट्रंप, मचाडो की विश्वसनीयता पर सवाल उठा चुके हैं. वहीं एक साहसिक अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के बाद वेनेजुएला के तत्कालीन राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को 3 जनवरी को कराकास से गिरफ्तार किया गया था. कुल मिलाकर मचाडो ने व्हाइट हाउस में लगभग ढाई घंटे बिताए. इसके बाद, मारिया कोरिना मचाडो ने बाहर आकर प्रेस से बात की. उन्होंने ट्रंप को अपना पुरस्कार देते हुए सिमोन बोलिवर का उदाहरण देते हुए तुलना की. सिमोन बोलिवर ने ब्रिटेन के खिलाफ अमेरिकी स्वतंत्रता संग्राम में अमेरिका की मदद की थी. इस आजादी के बाद में अमेरिका के पहले राष्ट्रपति जॉर्ज वॉशिंगटन की तस्वीर वाला एक पदक फ्रांसीसी अधिकारी मार्क्विस डी लाफायेट ने सिमोन बोलिवार को दिया गया था. वह स्पेन के खिलाफ सफल स्वतंत्रता आंदोलनों का नेतृत्व करने वाले वेनेजुएलावासी थे. मचाडो ने कहा कि इतिहास के दो सौ साल बाद, बोलिवार की जनता वॉशिंगटन के उत्तराधिकारी को एक पदक लौटा रही है. इस मामले में नोबेल शांति पुरस्कार का पदक, हमारी स्वतंत्रता के प्रति उनकी विशिष्ट प्रतिबद्धता की मान्यता के रूप में है. NOW – Venezuelan opposition leader Machado presents to Trump her Nobel Peace prize medal for his “unique commitment” to Venezuelan “freedom.” pic.twitter.com/MtwEA882oZ — Disclose.tv (@disclosetv) January 15, 2026 क्या नोबेल किसी और से साझा किया जा सकता है? नोबेल संस्थान का कहना है कि नोबेल पुरस्कार किसी दूसरे व्यक्ति को स्थानांतरित नहीं किया जा सकता. जबकि व्हाइट हाउस ने पहले कहा था कि यदि मचाडो ट्रंप को पदक देने की कोशिश करती हैं, तो उसे स्वीकार करना या न करना राष्ट्रपति पर निर्भर करेगा. नोबेल संस्थान पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि भौतिक पदक भले ही किसी को दिया जा सकता है, लेकिन नोबेल शांति पुरस्कार का खिताब साझा या स्थानांतरित नहीं किया जा सकता. ट्रंप सार्वजनिक रूप से कई बार नोबेल शांति पुरस्कार जीतने की इच्छा जता चुके हैं. हालांकि उन्होंने अब तक इस बैठक पर कोई टिप्पणी नहीं की है. कौन थे सिमोन बोलिवर? सिमोन बोलिवर लैटिन अमेरिका में स्वतंत्रा आंदोलन के एक सबसे बड़ा चेहरा माने जाते हैं. उनका दक्षिण अमेरका के स्पैनिश देशों में बड़े सम्मान से नाम लिया जाता है. उनके नाम पर एक देश- बोलिविया भी है. वे 1783 में वेनेजुएला में ही पैदा हुए थे. इसीलिए वेनेजुएला का पूरा नाम बोलेवेरियन रिपब्लिक ऑफ वेनेजुएला भी है. उन्हें द लिबरेटर के नाम से जाना जाता है. साइमन बोलिवर ने दक्षिण अमेरिका को स्पेनिश उपनिवेशवाद से मुक्त कराने में निर्णायक भूमिका निभाई. वेनेजुएला में जन्मे बोलिवर ने यूरोप में शिक्षा प्राप्त की, जहाँ अमेरिकी और फ्रांसीसी क्रांतियों से प्रेरित होकर उन्होंने स्वतंत्रता और गणतंत्रवाद के विचार अपनाए. 1810 में वेनेजुएला के स्वतंत्रता संग्राम की शुरुआत के बाद उन्होंने 1813 में पहली बड़ी सैन्य सफलता हासिल की और उसे स्वंतंत्र करा लिया. हालांकि, बाद में वह फिर से स्पैनिश नियंत्रण में चला गया.  आधुनिक सैन्य रणनीतियों और छापामार युद्ध के सहारे 1819 में एंडीज पर्वत पार कर कोलंबिया में निर्णायक जीत सिमोन बोलिवर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में रही. उनका सपना “ग्रैन कोलंबिया” नामक महासंघ स्थापित करने का था. इसे उन्होंने 1819 में बनाया और इसके पहले राष्ट्रपति बने. इसमें वेनेजुएला, इक्वाडोर, कोलंबिया पनामा शामिल थे. उनके नेतृत्व में 1821 में वेनेजुएला, 1822 में इक्वाडोर व पेरू और 1824 में अयकुचो की लड़ाई के बाद पूरे दक्षिण अमेरिका ने स्पेनिश प्रभुत्व से मुक्ति पाई. हालांकि, जीवन के अंतिम वर्षों में ग्रैन कोलंबिया टूट गया, फिर भी 1830 में मृत्यु के बाद भी बोलिवर स्वतंत्रता और एकता के अमर प्रतीक बने रहे. मचाडो की ओर से ट्रंप को दिए गए मेडल पर क्या लिखा था? फोटो- एक्स (@wikileaks). ट्रंप ने मचाडो से काटी कन्नी हालांकि, मचाडो ने ट्रंप को अपना नोबेल पुरस्कार दे तो दिया है, लेकिन उन्होंने इसे स्वीकार किया है या नहीं इस पर कोई जानकारी सामने नहीं आई है. ट्रंप ने बार-बार मचाडो पर संदेह जताया है. ट्रंप ने यह संकेत भी दिया है कि वह कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रीगेज के साथ काम करने को तैयार हैं, जो मादुरो की नंबर दो थीं. रोड्रीगेज ने निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के बाद कार्यवाहक राष्ट्रपति की शपथ ली थी. वे अब रोजमर्रा की प्रशासनी गतिविधियों की कमान संभाल रही हैं. वहीं जब मचाडो की वॉशिंगटन यात्रा पर थीं, तभी रोड्रिगेज अपना पहला स्टेट ऑफ द यूनियन भाषण दे रही थीं. एक तरह से रोड्रीगेज का समर्थन करके ट्रंप ने मचाडो को हाशिए पर डाल दिया है ट्रंप खुद चाहते थे पुरस्कार द वॉशिंगटन पोस्ट की एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप वेनेज़ुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरिना मचाडो का समर्थन करने से हिचकिचा रहे हैं, क्योंकि उन्होंने पिछले साल नोबेल शांति पुरस्कार स्वीकार कर लिया था. रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने मचाडो के इस फैसले को अपने प्रति एक व्यक्तिगत अपमान के रूप में देखा. ट्रपं खुद लंबे समय से खुद नोबेल शांति पुरस्कार पाने की इच्छा रखते हैं.  एक अधिकारी ने इसे ट्रंप की नजर में मचाडो का सबसे बड़ा अपराध बताया. मचाडो को अक्टूबर 2025 में वेनेज़ुएला के लोकतांत्रिक विपक्ष का नेतृत्व करने और निकोलस मादुरो की प्रशासन के खिलाफ प्रतिरोध को संगठित करने के लिए नोबेल शांति पुरस्कार दिया गया था. ट्रंप का मानना था कि यह पुरस्कार उन्हें मिलना चाहिए था. ट्रंप आए दिन पूरी दुनिया में युद्ध रुकवाने का दावा भी करते रहते हैं.  मादुरो को अमेरिकी बलों द्वारा गिरफ्तार कर देश से बाहर ले जाने के कुछ ही दिनों बाद ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से मचाडो से दूरी बना ली थी. पिछले हफ्ते जब ट्रंप से मचाडो के नेतृत्व की संभावनाओं के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि उनके लिए वेनेजुएला का नेतृत्व करना

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

About Us

नयाविचार एक आधुनिक न्यूज़ पोर्टल है, जो निष्पक्ष, सटीक और प्रासंगिक समाचारों को प्रस्तुत करने के लिए समर्पित है। यहां राजनीति, अर्थव्यवस्था, समाज, तकनीक, शिक्षा और मनोरंजन से जुड़ी हर महत्वपूर्ण खबर को विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के साथ प्रस्तुत किया जाता है। नयाविचार का उद्देश्य पाठकों को विश्वसनीय और गहन जानकारी प्रदान करना है, जिससे वे सही निर्णय ले सकें और समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकें।

Quick Links

Who Are We

Our Mission

Awards

Experience

Success Story

© 2025 Developed By Socify

Scroll to Top