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January 19, 2026

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Sarailkela Chhau Dance: भोपाल में छऊ नृत्य ने मचाया धमाल, डांसरों की शानदार प्रस्तुति

Sarailkela Chhau Dance: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के प्रसिद्ध हिंदुस्तान भवन में सरायकेला छऊ नृत्य की शानदार प्रस्तुति देखने को मिली. “महाहिंदुस्तान, कालजयी सभ्यता की महागाथा” कार्यक्रम के तहत छऊ नृत्य नाटिका ‘उरुभंगम’ का मंचन किया गया, जिसने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया. इस कार्यक्रम के माध्यम से महर्षि वेदव्यास द्वारा रचित महाहिंदुस्तान की कथा को नृत्य और संगीत के जरिए पेश किया गया. महाहिंदुस्तान के प्रमुख प्रसंगों का सजीव मंचन उरुभंगम प्रस्तुति में महाहिंदुस्तान के कई महत्वपूर्ण प्रसंगों को दिखाया गया. इन प्रसंगों में द्रौपदी चीरहरण का सीन, धर्म और अधर्म के युद्ध का संघर्ष, द्रोणाचार्य और कर्ण का दुखद अंत, और अंत में दुर्योधन के अहंकार पर भीम की गदा का प्रहार शामिल था. इन सभी सीन को बेहद प्रभावशाली तरीके से मंच पर उतारा गया. नृत्य, भाव-भंगिमा और मुखौटों के माध्यम से कलाकारों ने कहानी को इस तरह पेश किया कि दर्शक भावनात्मक रूप से उससे जुड़ते चले गए. प्रसिद्ध गुरुओं के निर्देशन में हुआ आयोजन इस पूरे कार्यक्रम का निर्देशन छऊ नृत्य कला केंद्र सरायकेला-खरसावां और रजतेंदु छऊ कला निकेतन से जुड़े एसएनए अवॉर्डी गुरु तपन कुमार पटनायक और सीनियर फेलो रजतेंदु रथ ने किया. उनके निर्देशन में महाहिंदुस्तान के विभिन्न अध्यायों को एक एक जगह इकट्ठा करके बेहद सुंदर तरीके से पेश किया गया. मंच पर हर सीन अनुशासन, सुंदरता और इमोशनल नजर आया. कलाकारों ने निभाई दमदार भूमिकाएं कार्यक्रम में सूत्रधार की भूमिका में गुरु तपन कुमार पटनायक, श्रीकृष्ण के रूप में संजय कर्मकार, यज्ञसिनी की भूमिका में कुसुमी पटनायक और द्रौपदी की भूमिका में परी ने प्रभावशाली एक्टिंग की. भीष्म की भूमिका रजतेंदु रथ ने निभाई. वहीं, भीम के रूप में सीनियर फेलो निवारण महतो दर्शकों के आकर्षण का केंद्र बने. दुर्योधन के किरदार में काली प्रसन्न षाडंगी, द्रोणाचार्य के रूप में गणेश परिछा, अर्जुन के रूप में सनथ कुमार साहू और कर्ण की भूमिका में होली कुम्हार ने शानदार प्रस्तुति दी. सैनिकों की भूमिका निभाने वाले कलाकारों ने भी मंच को जीवंत बना दिया. संगीत और म्यूजिकल इंस्ट्रुमेंट ने बढ़ाया प्रभाव इस प्रस्तुति में संगीत का भी अहम योगदान रहा. बांसुरी पर सीनियर फेलो देवराज दुबे की मधुर धुनों ने माहौल को भावुक और गंभीर बनाया. वहीं, ढोल पर बाबूराम सरदार और सीनियर फेलो पूर्ण सरदार की थाप ने युद्ध और संघर्ष के सीन को और भी प्रभावशाली बना दिया. संगीत और नृत्य के तालमेल ने दर्शकों को पूरे एक घंटे तक बांधे रखा. अंतरराष्ट्रीय रंगकर्मी भी ले रहे हिस्सा यह आयोजन 16 से 24 जनवरी तक चल रहा है, जिसका उद्घाटन 16 जनवरी को मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने किया था. इस महोत्सव में जापान, इंडोनेशिया, श्रीलंका सहित देश-विदेश के कई प्रसिद्ध रंगकर्मी भाग ले रहे हैं, जिससे यह कार्यक्रम अंतरराष्ट्रीय पहचान भी प्राप्त कर रहा है. इसे भी पढ़ें: कोडरमा से मिला रांची से लापता कन्हैया, पुलिस को 61 दिन बाद मिली कामयाबी महाहिंदुस्तान हमारी सभ्यता का दर्पण नृत्य निदेशक गुरु तपन कुमार पटनायक ने कहा कि महाहिंदुस्तान केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं है, बल्कि यह हिंदुस्तान की सामाजिक, नेतृत्वक और आध्यात्मिक चेतना का जीवंत चित्रण है. सरायकेला छऊ के माध्यम से इस महान महाकाव्य को मंच पर उतारना हमारे लिए गर्व की बात है. इसे भी पढ़ें: दुमका गांधी मैदान में दो फरवरी को झामुमो नेताओं का महाजुटान, भव्य रूप से मनाया जाएगा झारखंड दिवस Sarailkela chhau dance: भोपाल में छऊ नृत्य ने मचाया धमाल, डांसरों की शानदार प्रस्तुति 6 The post Sarailkela Chhau Dance: भोपाल में छऊ नृत्य ने मचाया धमाल, डांसरों की शानदार प्रस्तुति appeared first on Naya Vichar.

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Rashmika Mandanna: ‘सिकंदर’ की नाकामी पर रश्मिका मंदाना का बड़ा बयान, कहा- ‘फिल्म बनने के समय स्क्रिप्ट बदलने लगी’

Rashmika Mandanna: एक्ट्रेस रश्मिका मंदाना इन दिनों अपनी फिल्मों और बयानों को लेकर चर्चा में हैं. हाल ही में उन्होंने अपनी फिल्म ‘सिकंदर’ की असफलता पर पहली बार खुलकर बात की है. फिल्म में रश्मिका ने सुपरस्टार सलमान खान के साथ पहली बार स्क्रीन शेयर की थी. एआर मुरुगादास के निर्देशन में बनी इस फिल्म से दर्शकों और मेकर्स को काफी उम्मीदें थी, लेकिन ईद 2025 पर रिलीज होने के बावजूद यह बॉक्स ऑफिस पर कुछ खास कमाल नहीं दिखा पाई. साल 2025 रश्मिका मंदाना के लिए काफी शानदार रहा. उन्होंने ‘छावा’, ‘द गर्लफ्रेंड’ और ‘थामा’ जैसी हिट फिल्मों से अपनी पोजिशन और मजबूत की. लेकिन फिल्म का कमजोर प्रदर्शन रश्मिका के लिए भी निराशाजनक रहा. जैसी स्क्रिप्ट थी वैसी फिल्म नहीं बनी हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में रश्मिका ने ‘सिकंदर’ की नाकामी को लेकर कहा कि जब उन्हें इस फिल्म की कहानी सुनाई गई थी, तब उन्हें स्क्रिप्ट काफी पसंद आई थी. उन्हें लगा था कि यह फिल्म दर्शकों को पसंद आएगी. लेकिन जैसे-जैसे फिल्म बनने लगी, कई चीजें बदलती चली गई. एक्टिंग से लेकर एडिटिंग और रिलीज के वक्त तक कहानी का ट्रीटमेंट अलग होता चला गया. फिल्मों में ऐसा होना कोई नई बात नहीं है. कई बार जो कहानी कागज पर शानदार लगती है, वह पर्दे पर वैसी नहीं उतर पाती.  रश्मिका ने साफ शब्दों में कहा कि हर फिल्म के साथ एक जोखिम जुड़ा होता है और हर बार सफलता मिल ही जाए, यह जरूरी नहीं. उन्होंने ‘सिकंदर’ की असफलता को अपने करियर का हिस्सा मानते हुए उससे सीख लेने की बात कही. रश्मिका के आने वाले प्रोजेक्ट्स अगर रश्मिका के आने वाले काम की बात करें, तो वह आगे भी कई बड़े प्रोजेक्ट्स में नजर आने वाली हैं. समाचार है कि वह शाहिद कपूर और कृति सेनन के साथ ‘कॉकटेल 2’ में दिखाई देंगी, जिसे लेकर फैंस काफी उत्साहित हैं. इसके अलावा वह तेलुगु फिल्म ‘मैसा’ में भी अहम भूमिका निभा रही हैं. वहीं उनकी पर्सनल लाइफ को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, रश्मिका फरवरी 2026 में अपने बॉयफ्रेंड और साउथ स्टार विजय देवरकोंडा से शादी कर सकती हैं. हालांकि, इस समाचार पर अब तक दोनों की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है. ये भी पढ़ें: Border 2 के ट्रेलर ने इंटरनेट पर उड़ाया गर्दा, देशभक्ति से भरे इन दमदार डायलॉग्स ने बढ़ाया फैंस का जोश The post Rashmika Mandanna: ‘सिकंदर’ की नाकामी पर रश्मिका मंदाना का बड़ा बयान, कहा- ‘फिल्म बनने के समय स्क्रिप्ट बदलने लगी’ appeared first on Naya Vichar.

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दुमका गांधी मैदान में दो फरवरी को झामुमो नेताओं का महाजुटान, भव्य रूप से मनाया जाएगा झारखंड दिवस

Jharkhand Day: दो फरवरी 2026 को झारखंड के स्थापना दिवस के मौके पर दुमका के गांधी मैदान में झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के नेताओं का महाजुटान होगा. इसके आयोजन को ऐतिहासिक और भव्य बनाने के संकल्प के साथ झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) की प्रमंडलीय बैठक संपन्न हुई. बैठक में नेताओं और कार्यकर्ताओं ने संगठनात्मक मजबूती, एकजुटता और झारखंड आंदोलन की संघर्षशील विरासत को आगे बढ़ाने का आह्वान किया. वक्ताओं ने कहा कि भले ही गुरुजी शिबू सोरेन शारीरिक रूप से मंच पर उपस्थित नहीं होंगे, लेकिन उनकी सोच, विचार और संघर्ष की चेतना ही इस आयोजन की आत्मा होगी. दुमका से तय होती थी झारखंड आंदोलन की दिशा पूर्व मंत्री सह दुमका विधायक बसंत सोरेन ने कहा कि 2 फरवरी झारखंड के लिए केवल एक तारीख नहीं, बल्कि आंदोलन की आत्मा है. इसी गांधी मैदान के मंच से झारखंड आंदोलन की दिशा तय होती थी, जो आगे चलकर टोला-गांव तक पहुंची और हक-अधिकार की लड़ाई को मजबूती मिली. उन्होंने कहा कि गुरुजी की कमी जरूर महसूस होगी, लेकिन उनकी विचारधारा को प्रशासन और संगठन पूरी निष्ठा से आगे बढ़ा रहे हैं. उन्होंने एसआईआर, केंद्र प्रशासन की नीतियों और पेसा कानून को लेकर जनता को सही जानकारी देने की जरूरत बताते हुए जिला, प्रखंड और पंचायत स्तर पर बैठकों के माध्यम से तैयारी तेज करने का आह्वान किया. संघर्ष के दिनों की यादें और बेहतर व्यवस्था पर जोर दुमका सांसद नलिन सोरेन ने आंदोलन के दिनों को याद करते हुए कहा कि पहले 2 फरवरी दुमका चलें के नारे के साथ दीवार लेखन होता था और साहिबगंज से मिहिजाम तक के लोग पैदल गांधी मैदान पहुंचते थे. प्रशासन की तमाम बाधाओं के बावजूद यह आयोजन हर साल नया कीर्तिमान बनाता रहा. इस बार भी कार्यकर्ता डुगडुगी के साथ कार्यक्रम में पहुंचेंगे. उन्होंने जिला-वार बस पार्किंग की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया. संगठन की ताकत और निकाय चुनाव की रणनीति मंत्री हफीजुल हसन अंसारी ने कहा कि बसंत सोरेन के नेतृत्व में इस बार झारखंड दिवस की तैयारी और भी बेहतर होगी. उन्होंने बताया कि पहले गांधी मैदान में ठंड से बचाव के लिए कोयला भट्टी जलती थी, जबकि अब रातभर चलने वाले आयोजन में इलेक्ट्रिक हीटर की व्यवस्था की जा रही है. उन्होंने कहा कि संताल परगना में गठबंधन ने 18 में 17 सीटें जीतकर अपनी ताकत दिखाई है और अब निकाय चुनावों में भी बेहतर प्रदर्शन जरूरी है. उन्होंने दीवार लेखन की परंपरा बनाए रखने, स्त्री संगठन को मजबूत करने और एसआईआर को लेकर सतर्क रहने की अपील की. झामुमो के ऐतिहासिक संघर्षों को किया गया याद महेशपुर विधायक स्टीफन मरांडी ने कहा कि प्रमंडलीय बैठक की शुरुआत ही संगठनात्मक उद्देश्य से की गई है. उन्होंने अविभाजित संताल परगना को बनाए रखने के लिए झामुमो द्वारा किए गए ऐतिहासिक संघर्षों को याद किया. बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्रा द्वारा प्रमंडल विभाजन के प्रयासों का कोर्ट तक जाकर विरोध किया गया. तीर-धनुष पर लगे प्रतिबंध को हटवाने के लिए इंदिरा गांधी से मुलाकात तक करनी पड़ी. उन्होंने कहा कि झारखंड दिवस उन तमाम संघर्षों को याद करने और उनसे प्रेरणा लेने का दिन है. साथ ही उन्होंने वर्ष में दो-तीन बार प्रमंडलीय बैठक करने और कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित करने पर जोर दिया. एसआईआर और पेसा कानून पर सतर्क रहने की अपील लिट्टीपाड़ा विधायक हेमलाल मुर्मू ने कहा कि आयोजन को सफल बनाने के लिए संसाधनों की कोई कमी नहीं होनी चाहिए. जिला कमेटी की बैठक जल्द होनी चाहिए, ताकि कार्यक्रम ऐतिहासिक बने. उन्होंने पेसा कानून को लेकर फैलाए जा रहे भ्रम को दूर करने और 14 फरवरी से शुरू होने वाली एसआईआर प्रक्रिया को लेकर संगठन को पूरी तरह तैयार करने की जरूरत बताई. गांव-गांव तक झंडा और हर गाड़ी में डुगडुगी जामा विधायक डॉ लुइस मरांडी ने कहा कि झामुमो का झंडा गांव-गांव तक पहुंचे और हर छोटी-बड़ी गाड़ी में दिखे, तभी झारखंड दिवस का माहौल बनेगा. डुगडुगी और तीर-धनुष झामुमो की पहचान हैं. इसलिए हर गाड़ी में डुगडुगी की आवाज गूंजनी चाहिए. उन्होंने कहा कि गुरुजी के मार्गदर्शन में आगे बढ़ते हुए उनकी कमी महसूस नहीं होने दी जाएगी. गांधी मैदान से ही तय होती है झारखंड की दिशा शिकारीपाड़ा विधायक आलोक सोरेन ने कहा कि गांधी मैदान के मंच से ही हमेशा तय हुआ है कि झारखंड किस दिशा में जाएगा. गुरुजी का नारा “अबुआ दिशोम, अबुआ राज” आज भी उतना ही प्रासंगिक है. उन्होंने कहा कि सत्ता में होने के कारण अब जिम्मेदारी और जवाबदेही दोनों बढ़ गई हैं. इसलिए, 2 फरवरी को आने वाले किसी भी कार्यकर्ता को परेशानी न हो, यह सुनिश्चित करना सभी का दायित्व है. इसे भी पढ़ें: झारखंड की गली-गली में टहल रहा बच्चा चोरों का बड़ा गैंग, अंश-अंशिका के बाद 12 शिशु बरामद तीर-धनुष और डुगडुगी के साथ पहुंचने की अपील बोरियो विधायक धनंजय सोरेन ने सभी कार्यकर्ताओं से अपील किया कि वे तीर-धनुष और डुगडुगी के साथ कार्यक्रम में पहुंचें और आयोजन को सफल बनाएं. उन्होंने कहा कि गुरुजी की कमी जरूर खलेगी, लेकिन एकजुट रहकर संगठन को मजबूत बनाना और विरोधियों को जवाब देना जरूरी है. उन्होंने पार्किंग व्यवस्था प्रखंडवार करने की भी बात कही. इसे भी पढ़ें: कोडरमा से मिला रांची से लापता कन्हैया, पुलिस को 61 दिन बाद मिली कामयाबी दुमका गांधी मैदान में दो फरवरी को झामुमो नेताओं का महाजुटान, भव्य रूप से मनाया जाएगा झारखंड दिवस 2 The post दुमका गांधी मैदान में दो फरवरी को झामुमो नेताओं का महाजुटान, भव्य रूप से मनाया जाएगा झारखंड दिवस appeared first on Naya Vichar.

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बंगाल में म्युनिसिपल स्कूल के शिक्षकों को चार माह से नहीं मिला है वेतन, दाने-दाने को मोहताज हुए कर्मचारी

Table of Contents क्या है समस्या केंद्र नहीं बढ़ा रहा मानदेय Bengal News : कोलकाता: कोलकाता नगर निगम के बाल शिक्षा केंद्र के शिक्षकों को चार माह से मानदेय नहीं मिला है. मानदेय नहीं मिलने के कारण म्युनिसिपल स्कूल के शिक्षकों की हालत बहुत खराब है. बंगाल में म्युनिसिपल स्कूल के शिक्षकों को मानदेय के रूप में मात्र 10 हजार रुपये मिलते हैं. पिछले कई महीनों से रुका हुआ है. सर्व शिक्षा मिशन के तहत केंद्र और राज्य मिलकर इन स्कूलों का संचालन करते हैं. बंगाल प्रशासन का दावा है कि केंद्र प्रशासन शिक्षा अभियान की राशि नहीं दे रही है. इसी वजह से शिक्षकों का मानदेय भुगतान नहीं किया जा रहा है. दूसरी ओर भाजपा नेता बंगाल प्रशासन पर भ्रष्टाचार का आरोप लगा रहे हैं. क्या है समस्या एसएसके और एमएसके शिक्षकों के वेतन में हर साल 3 प्रतिशत तक की वृद्धि होती है. हालांकि उन्हें सेवानिवृत्ति भत्ता मिलता है. शिक्षक अमन बोस ने कहा कि शिक्षा का स्तर तो हाई स्कूल के बराबर है, लेकिन वेतन बहुत कम है. हमें पेंशन मिलनी चाहिए, लेकिन वह भी नहीं मिलती. हम इसी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. इससे पहले भी कई लोग सेवानिवृत्त हो चुके हैं, लेकिन वे खाली हाथ सेवानिवृत्त हुए. एक अन्य कर्मचारी ने कहा- बाल शिक्षा केंद्र में प्राथमिक विद्यालय की तुलना में अधिक छात्र थे, लेकिन प्राथमिक विद्यालय के विपरीत, यहां कपड़े और जूते उपलब्ध नहीं हैं. इसी वजह से वे बच्चों को प्रवेश नहीं दे रहे हैं. हर साल छात्रों की संख्या 5-7 कम हो रही है. केंद्र नहीं बढ़ा रहा मानदेय नगरपालिका के शिक्षकों को इसका भुगतान नहीं किया जाता है. कर्मचारियों का कहना है कि प्रशासन की ओर से उपलब्ध कराए गए मुफ्त कपड़े और जूते भी बाल शिक्षा केंद्रों तक नहीं पहुंचते. यहां तक ​​कि बच्चों की किताबें और नोटबुक भी समय पर नहीं पहुंचतीं. नॉर्थ डम डम चाइल्ड एजुकेशन सेंटर के एक कर्मचारी ने कहा- वेतन बहुत कम है. अगर वेतन थोड़ा ज्यादा होता तो बहुत सुविधा होती. जो है वो भी समय पर मिलता तो हम दाने-दाने को मोहताज नहीं होते. इस विषय पर शिक्षा मंत्री ब्रात्या बसु ने कहा- केंद्र प्रशासन ने कई हजार करोड़ रुपये रोक रखे हैं. मुख्यमंत्री ने खुद कहा था कि सभी शिक्षा कर्मचारियों के वेतन में वृद्धि की जानी चाहिए, लेकिन जब तक केंद्र प्रशासन उनका बकाया वेतन जारी नहीं करती, तब तक हम वेतन में वृद्धि नहीं कर पाएंगे. Also Read: बंगाल में गायब हो रहा केंद्र से आया पैसा, दिलीप घोष का टीएमसी प्रशासन पर बड़ा हमला The post बंगाल में म्युनिसिपल स्कूल के शिक्षकों को चार माह से नहीं मिला है वेतन, दाने-दाने को मोहताज हुए कर्मचारी appeared first on Naya Vichar.

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फॉर्म की चिंता नहीं, न्यूजीलैंड से सीरीज हारने के बाद गिल ने किया रोहित शर्मा का बचाव

यह पहली बार है जब न्यूजीलैंड टीम ने हिंदुस्तान की जमीन पर कोई वनडे सीरीज जीती है. इस पूरी सीरीज में रोहित शर्मा (Rohit Sharma) का बल्ला खामोश रहा, जिसके बाद उनकी आलोचना होने लगी थी. लेकिन इस मुश्किल समय में युवा कप्तान शुभमन गिल (Shubman Gill) हिटमैन के सपोर्ट में आए. गिल ने साफ शब्दों में कहा कि रोहित भाई की फॉर्म को लेकर कोई परेशानी की बात नहीं है. रोहित की फॉर्म पर क्या बोले शुभमन गिल मैच खत्म होने के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में शुभमन गिल ने पूर्व कप्तान रोहित शर्मा का पूरा साथ दिया. गिल ने कहा कि रोहित भाई बिल्कुल सही टच में हैं और अच्छी लय में दिख रहे हैं. गिल ने याद दिलाया कि ऑस्ट्रेलिया और साउथ अफ्रीका के खिलाफ हुई सीरीज में भी रोहित ने शानदार बल्लेबाजी की थी. गिल का कहना था कि हर बार अच्छी शुरुआत को बड़ी पारी में बदलना मुमकिन नहीं होता.  उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि रोहित शर्मा जबरदस्त फॉर्म में हैं. उन्होंने इस सीरीज में भी अच्छी शुरुआत की, लेकिन एक बल्लेबाज के तौर पर आप हमेशा उन 20-30 रनों को सेंचुरी में नहीं बदल पाते. हम सभी कोशिश करते हैं, लेकिन यह हर बार संभव नहीं हो पाता. हिटमैन के बल्ले से नहीं निकले रन इस पूरी सीरीज में हिंदुस्तानीय दिग्गज खिलाड़ी रोहित शर्मा का प्रदर्शन निराशाजनक रहा. तीसरे वनडे में जब टीम को 338 रनों के टारगेट का पीछा करना था, तब रोहित सिर्फ 11 रन बनाकर आउट हो गए. उन्होंने 13 गेंदों का सामना किया और दो चौके लगाए, लेकिन अपनी पारी को आगे नहीं बढ़ा सके. आंकड़ों पर नजर डालें तो रोहित ने इस सीरीज की तीन पारियों में कुल मिलाकर 61 रन बनाए, जिसमें उनका एवरेज 20.33 का रहा. इस सीरीज में उनके बल्ले से एक भी फिफ्टी नहीं आई. न्यूजीलैंड के बल्लेबाजों का शानदार प्रदर्शन टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी न्यूजीलैंड की टीम ने हिंदुस्तानीय गेंदबाजों के खिलाफ खुब रन बनाए. डेरिल मिचेल और ग्लेन फिलिप्स ने इंदौर के मैदान पर चौकों-छक्कों की मदद से सेंचुरी लगाई. मिचेल ने सीरीज में अपना लगातार दूसरी सेंचुरी लगाते हुए 131 गेंदों पर 137 रन बनाए. वहीं ग्लेन फिलिप्स ने भी 88 गेंदों पर 106 रन की पारी स्पोर्ट्सी. आखिरी ओवर्स में माइकल ब्रेसवेल ने 18 गेंदों पर तेज 28 रन बनाकर स्कोर को 337 तक पहुंचा. हिंदुस्तान की तरफ से अर्शदीप सिंह और हर्षित राणा ने तीन-तीन विकेट तो लिए, लेकिन रन रोकने में नाकाम रहे. कोहली और हर्षित की मेहनत बेकार इतने बड़े टारगेट का पीछा करते हुए हिंदुस्तानीय टीम लड़खड़ा गई थी, लेकिन विराट कोहली ने एक छोर संभाले रखा. कोहली ने अकेले दम पर लड़ाई लड़ी और 108 गेंदों पर 124 रनों की पारी स्पोर्ट्सी. लेकिन कुछ समय के लिए उनको युवा हर्षित राणा का साथ मिला. राणा ने अपने वनडे करियर की पहली फिफ्टी लगाते हुए 52 रन बनाए. दोनों के बीच 99 रनों की पार्टनरशिप हुई, जिसने एक समय जीत की उम्मीद जगा दी थी. नितीश कुमार रेड्डी ने भी 53 रनों का योगदान दिया, लेकिन बाकी बल्लेबाजों के फेल होने के कारण पूरी टीम 46 ओवर में 296 रन पर सिमट गई और हिंदुस्तान यह मैच 41 रनों से हार गया. ये भी पढ़ें- कई मौके हाथ से निकल गए, न्यूजीलैंड से सीरीज गंवाने पर बोले कप्तान शुभमन गिल IND vs NZ: न्यूजीलैंड ने रचा इतिहास, इंदौर वनडे 41 रन से जीता, हिंदुस्तान में पहली बार सीरीज अपने नाम की रोहित शर्मा के नाम नया रिकॉर्ड, धोनी-कोहली के क्लब में हुई एंट्री, ऐसा करने वाले छठे खिलाड़ी बने The post फॉर्म की चिंता नहीं, न्यूजीलैंड से सीरीज हारने के बाद गिल ने किया रोहित शर्मा का बचाव appeared first on Naya Vichar.

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Vastu Tips: बालकनी को सजाते समय वास्तु के इन नियमों का रखें ध्यान, घर में बनी रहेगी खुशहाली

Vastu Tips For Balcony: वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर का हर एक हिस्सा ऊर्जा को प्रभावित करता है. यदि सही वास्तु नियमों का पालन करते हुए इन्हें बनाया और सजाया जाए, तो यह सकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करता है. वहीं, जब इन्हें गलत वास्तु नियमों के अनुसार बनाया जाता है, तो इससे घर में नकारात्मक ऊर्जा प्रवेश करती है. इसके प्रभाव से घर में तनाव, आर्थिक दिक्कतें और आपसी झगड़े होने की संभावना बढ़ जाती है. आइए, इस आर्टिकल में घर के एक अहम हिस्से बालकनी से जुड़े वास्तु नियमों के बारे में जानते हैं. बालकनी में कौन से पौधे लगाने चाहिए? बालकनी में छोटे फूलों वाले पौधे जैसे गुलाब, चमेली और गेंदे के फूल लगाना शुभ माना जाता है. इसके अलावा आप पुदीना, मनी प्लांट, मिनी बांस और नींबू के पौधे भी लगा सकते हैं. वास्तु शास्त्र में इन पौधों को बहुत ही शुभ माना गया है. बालकनी किस दिशा में बनानी चाहिए? वास्तु शास्त्र के अनुसार, बालकनी के लिए उत्तर-पूर्व, पूर्व और उत्तर दिशा को सबसे अच्छा माना जाता है. इसके अलावा ध्यान रखें कि जहां बालकनी बनी हो, वहां पर्याप्त धूप आती हो. बालकनी में कुर्सियां किस दिशा में रखें? यदि आप बालकनी में बैठकर आराम करना चाहते हैं और सुबह की धूप का आनंद लेना चाहते हैं, तो बालकनी की दक्षिण और पश्चिम दिशा में कुर्सियां रख सकते हैं. बालकनी में क्या नहीं रखना चाहिए? वास्तु शास्त्र के अनुसार, बालकनी में कांटेदार पौधे जैसे कैक्टस और बबूल नहीं लगाने चाहिए. इसके अलावा टूटा-फूटा सामान, जूते-चप्पल और सूखे पौधे भी बालकनी में नहीं रखने चाहिए, क्योंकि इससे घर में नकारात्मकता आती है. यह भी पढ़ें: Vastu Tips for Money Saving: सैलरी आते ही तुरंत खत्म हो जाता है पैसा, घर में नहीं टिकता धन? करें ये वास्तु उपाय मिलेगा लाभ Disclaimer: यहां दी गई जानकारी केवल मान्यताओं और परंपरागत जानकारियों पर आधारित है. नया विचार किसी भी तरह की मान्यता या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. The post Vastu Tips: बालकनी को सजाते समय वास्तु के इन नियमों का रखें ध्यान, घर में बनी रहेगी खुशहाली appeared first on Naya Vichar.

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Chana Dal Aur Nariyal ki Chutney: खाने का बढ़ जाएगा स्वाद, जब थाली में परोसेंगे चना दाल और नारियल की चटनी

Chana Dal Aur Nariyal ki Chutney: चटनी चाहे किसी भी चीज की हो उसका नाम सुनते ही मुंह में पानी आ जाता है. चटनी एक ऐसा डिश है जो हर तरह के खाने का स्वाद बढ़ा देता है. ऐसा भी कह सकते हैं कि चटनी के बिना खाने की थाली अधूरी है. चटनी खाना हर किसी को पसंद भी होता है. ऐसे में आज आपको चना दाल और नारियल की चटनी बनाने की रेसिपी बताते हैं. इस चटनी को आप मिनटों में बनाकर सर्व कर सकते हैं. अब इसे बनाने की रेसिपी जानिए. चना दाल और नारियल की चटनी बनाने की सामग्री कच्चा नारियल – 1 कप (कद्दूकस) चने की दाल – 2-3 टीस्पून (भुनी हुई) हरी मिर्च – 3 अदरक -1 इंच टुकड़ा (कटा हुआ) हरा धनिया – 3 टीस्पून दही – 2 टीस्पून नमक – स्वादानुसार राई – 1/2 टीस्पून जीरा – 1/2 टीस्पून सफेद उड़द दाल – 1/2 टीस्पून हींग – 1 चुटकी तेल – 2 टीस्पून साबुत लाल मिर्च – 1-2 करी पत्ते – 10-12 इसे भी पढ़ें: Curry Leaf Chutney Recipe: खाने का बढ़ाना है टेस्ट, तो इस सिंपल रेसिपी से बनाएं करी पत्ते की चटपटी चटनी चना दाल और नारियल की चटनी बनाने की विधि चना दाल और नारियल की चटनी बनाने के लिए आप सबसे पहले एक जार में नारियल, हरा धनिया, हरी मिर्च, अदरक, चना दाल, जीरा, नमक और पानी डालकर पीस लें चटनी को थोड़ा गाढ़ा ही रखें. अब आप एक पैन में तेल गरम करके उसमें राई और जीरा डालकर 1 मिनट तक भून लें. फिर इसमें उड़द दाल, हींग, करी पत्ते और लाल मिर्च डालकर अच्छे से भून लें. इसके बाद आप इसे नारियल की चटनी के ऊपर डालकर 2 मिनट के लिए ढक दें. इस चटनी को आप इडली, डोसा या फिर उत्तपम के साथ परोस सकते हैं. इसे भी पढ़ें: Pudina aur Haldi ki Chutney: खाने का स्वाद बढ़ा देगी पुदीने और हल्दी की चटनी, नोट कर लें सिंपल रेसिपी   इसे भी पढ़ें: Mooli Patta Chutney Recipe: खाने का बढ़ जाएगा स्वाद, इस सर्दी जरूर ट्राई करें मूली के पत्तों की चटपटी चटनी The post Chana Dal Aur Nariyal ki Chutney: खाने का बढ़ जाएगा स्वाद, जब थाली में परोसेंगे चना दाल और नारियल की चटनी appeared first on Naya Vichar.

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Startup India रैंकिंग में उत्तराखण्ड को मिला ‘लीडर’ दर्जा, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने दिया CoA, जानें SRF 5.0 में खास क्या?

हिंदुस्तान प्रशासन के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय से उत्तराखंड को बड़ा पुरस्कार मिला. मिनिस्ट्री के उद्योग संवर्धन एवं आंतरिक व्यापार विभाग (DPIIT) द्वारा जारी States Startup Ecosystem Ranking (5वां संस्करण) में उत्तराखण्ड को मजबूत स्टार्टअप इकोसिस्टम विकसित करने में ‘लीडर’ के रूप में मान्यता प्रदान की गई है. इस उपलब्धि के लिए राष्ट्रीय स्टार्टअप दिवस के अवसर पर उत्तराखण्ड प्रशासन के उद्योग विभाग को प्रशंसा प्रमाण पत्र (Certificate of Appreciation) प्रदान किया गया. अब उत्तराखंड की उपलब्धि को राष्ट्रीय स्तर पर एक मॉडल के तौर पर देखा जा रहा है. इस सम्मान से यह साफ हो रहा है कि उत्तराखण्ड स्टार्टअप पॉलिसी के जरिए इनोवेशन, इंटरप्रेन्योरशिप, इनवेस्टमेंट प्रमोशन और युवाओं को खुद के रोजगार से जोड़ने में कामयाब रहा है. इसे अब राष्ट्रीय स्तर पर भी सराहा जा रहा है. उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य की इस उपलब्धि पर खुशी जताई. उन्होंने कहा, ‘यह सम्मान उत्तराखण्ड के लिए गर्व का विषय है. हमारी प्रशासन ने स्टार्टअप को बढ़ावा देने के लिए अनुकूल नीतियां, सरल प्रक्रियाएं और मजबूत इकोसिस्टम विकसित किया है. राज्य के युवाओं में नवाचार की अद्भुत क्षमता है और प्रशासन हर स्तर पर उन्हें सहयोग प्रदान कर रही है. यह उपलब्धि प्रदेश के सभी उद्यमियों, स्टार्टअप्स और अधिकारियों के सामूहिक प्रयास का परिणाम है.’ Startup india रैंकिंग में उत्तराखण्ड को मिला ‘लीडर’ दर्जा, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने दिया coa, जानें srf 5. 0 में खास क्या? 4 स्टेट्स स्टार्टअप इकोसिस्टम रैंकिंग क्या है? Startup India की प्रशासनी वेबसाइट के अनुसार, स्टेट्स स्टार्टअप रैंकिंग एक सालाना प्रक्रिया है, जिसे DPIIT द्वारा शुरू किया गया है. इसमें हिंदुस्तान के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को इस आधार पर परखा जाता है कि वे अपने यहां स्टार्टअप्स के लिए कितना अच्छा माहौल बना रहे हैं. इसका मकसद राज्यों की क्षमता बढ़ाना और उन्हें बेहतर तरीके से स्टार्टअप्स को सपोर्ट करने के लिए प्रेरित करना है. इस रैंकिंग की शुरुआत फरवरी 2018 में की गई थी. इसका मकसद देश में एक मजबूत और भरोसेमंद स्टार्टअप इकोसिस्टम तैयार करना है. इसके तहत यह देखा जाता है कि राज्य प्रशासनें अपनी नीतियों और फैसलों के जरिए स्टार्टअप्स को आगे बढ़ाने के लिए क्या कदम उठा रही हैं और किन राज्यों की नीतियां ज्यादा असरदार साबित हो रही हैं. इस रैंकिंग की वजह से हर राज्य ने अब अपनी अलग स्टार्टअप नीति बनाई है. हर साल होने वाली रैंकिंग के जरिये यह भी देखा जाता है कि इन नीतियों में समय के साथ क्या बदलाव आए हैं और राज्य प्रशासनें स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए कुल मिलाकर कितनी कोशिश कर रही हैं. सीधे शब्दों में कहें तो, यह रैंकिंग राज्यों के बीच एक तरह की हेल्दी कंपटीशन पैदा करती है, जिससे स्टार्टअप्स को बेहतर सुविधाएं, सहयोग और मौके मिल सकें. स्टेट्स स्टार्टअप रैंकिंग फ्रेमवर्क (SRF 5.0) में खास क्या? States’ Startup Ranking में  34+ राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों ने इसमें भाग लेते हैं. इसके अब तक 5 एडिशन लॉन्च किए गए हैं. इसके तहत अब तक 19 से ज्यादा एक्शन पॉइंट तय किए गए हैं. मंत्रालय द्वारा इस रैंकिंग में सुधार के लिए अब तक 3 से ज्यादा डोमेस्टिक क्षमता विकास (Capacity Building) वर्कशॉप आयोजित की गई हैं. इसका पांचवां संस्करण (SRF 5.0) पहले से थोड़ा अलग और ज्यादा एरिया कवर करता है.  इसमें पहली बार यह भी देखा जा रहा है कि प्रशासन के अलावा निजी कंपनियां, निवेशक और संस्थान स्टार्टअप सिस्टम को आगे बढ़ाने में क्या भूमिका निभा रहे हैं. यानी अब सिर्फ प्रशासनी कोशिशों पर नहीं, बल्कि प्राइवेट सेक्टर की भागीदारी पर भी ध्यान दिया जा रहा है. इसके अलावा, इस फ्रेमवर्क में हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश के लिए कुछ खास सेक्टर तय करने पर जोर दिया गया है, ताकि वे उन्हीं क्षेत्रों पर ज्यादा फोकस कर सकें जहां उनके पास बेहतर संभावनाएं हैं. इसके साथ ही, इन्क्यूबेशन सेंटर और स्टार्टअप को मिलने वाली शुरुआती सुविधाओं पर भी खास ध्यान दिया गया है. इसके लिए अलग से सुधार के पॉइंट्स और काम करने के तरीके तय किए गए हैं, ताकि नए स्टार्टअप्स को सही गाइडेंस और सपोर्ट मिल सके. कुल मिलाकर, SRF 5.0 का मकसद राज्यों में स्टार्टअप्स के लिए माहौल को और मजबूत, व्यावहारिक और असरदार बनाना है. ये भी पढ़ें:- Patna NEET Student Death: नीट छात्रा केस मामले में अब हो सकेगा बड़ा खुलासा, दिल्ली एम्स खंगालेगी पोस्टमार्टम रिपोर्ट ये भी पढ़ें:- कोडरमा से मिला रांची से लापता कन्हैया, पुलिस को 61 दिन बाद मिली कामयाबी The post Startup India रैंकिंग में उत्तराखण्ड को मिला ‘लीडर’ दर्जा, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने दिया CoA, जानें SRF 5.0 में खास क्या? appeared first on Naya Vichar.

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Birthday Gift Ideas For Nani: नानी के जन्मदिन पर दें प्यार भरा तोहफा, ये गिफ्ट आइडियाज आएंगे काम

Birthday Gift Ideas For Nani: बचपन या अभी के समय में भी हम स्कूल या कॉलेज से छुट्टी मिलने के बाद सीधे नानी के घर जाने का प्लान बनाने लगते हैं. नानी के साथ का रिश्ता ममता, स्नेह और निस्वार्थ प्रेम से जुड़ा होता हैं. उनकी गोद में बिताया गया हर पल हमारे लिए बहुत यादगार होता है. ऐसे में अगर आपकी नानी का जन्मदिन आ रहा हैं और आप उनको कुछ स्पेशल तोहफा देना चाहते हैं, तो आज हम आपको गिफ्ट देने के लिए बेस्ट आइडियाज के बारे में बताएंगे.  शौक से जुड़े गिफ्ट  नानी को गार्डनिंग का शौक है तो पौधे या गार्डनिंग से जुड़े समान देना सबसे बेस्ट रहेगा. इसके अलावा, नानी को सिलाई या कढ़ाई पसंद होने पर धागे, सुई या कढ़ाई किट गिफ्ट में दे सकते हैं. मन की शांति के लिए भजन, धार्मिक किताबें भी अपने ऑप्शन में रख सकते हैं.  किचन से जुड़े समान  नानी के लिए किचन से जुड़े इस्तेमाल होने वाले सामान एक अच्छा गिफ्ट हो सकता हैं जैसे मसालों के डिब्बे, चाय-कॉफी सेट, सुंदर बर्तन, सब्जी काटने के समान या गैस पर रखने वाले कुकर.  पसंद की ड्रेस  अगर आपकी नानी सूट पहनती हैं तो आप उन्हें उनके पसंदीदा रंग का सूट गिफ्ट कर सकते हैं. इसके अलावा, अगर आपकी नानी को साड़ी पहनना अच्छा लगता हैं, तो जन्मदिन के खास मौके पर आप उनके लिए सूती साड़ी ले सकते हैं. ये गिफ्ट उन्हें बहुत पसंद आएगा और इसे वो हमेशा पहनना भी पसंद करेंगी.  यह भी पढ़ें– Wedding Gift Ideas For Bride: दुल्हन को दें ऐसा खास तोहफा जो चेहरे पर लाए मुस्कान, जानिए बेहतरीन गिफ्ट आइडियाज शरीर को आराम देने वाले गिफ्ट  नानी के लिए शरीर को आराम देने वाले गिफ्ट बहुत काम में आते हैं जैसे मसाजर, गरम पानी की बोतल, नरम तकिया, आरामदायक चप्पल या हल्का कंबल. इस तरह की गिफ्ट शरीर की थकान दूर करते हैं और नानी को देने के बाद काम में भी आते हैं.  यह भी पढ़ें– Birthday Gift Ideas For Parents: अपने माता-पिता को बर्थडे पर दें ऐसा तोहफा जो वो कभी न भूलें, देखें बेस्ट आइडियाज  The post Birthday Gift Ideas For Nani: नानी के जन्मदिन पर दें प्यार भरा तोहफा, ये गिफ्ट आइडियाज आएंगे काम appeared first on Naya Vichar.

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Bihar Bhumi: जमीन के दाखिल-खारिज में सुस्ती बरतने वालों पर भड़के विभाग के सचिव, सभी कलेक्टर को भेजा लेटर

Bihar Bhumi: बिहार में प्रशासनी जमीनों के दाखिल-खारिज के मामले जल्द निपटाने को लेकर मंत्री विजय सिन्हा ने बड़ा आदेश दिया था. इसके बाद राज्य में प्रशासनी जमीन का दाखिल-खारिज अब तक 22.86 प्रतिशत ही हुआ है. कई अंचलों में तो एक भी प्रशासनी जमीन का दाखिल-खारिज नहीं किया गया. ऐसे में लापरवाही सामने आने पर राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव जय सिंह ने कड़ा एक्शन लिया. विभाग के सचिव ने सभी जिलों के कलेक्टर को लेटर लिखा. इसके जरिए सचिव ने प्रशासनी जमीन से जुड़े विवाद का जल्द ही निपटारा कर लेने का आदेश दिया. लेटर में सचिव ने लिखा, अलग-अलग प्रोसेस से मिले या नोटिफाइड प्रशासनी जमीन की जमाबंदी सृजन के लिए विभाग ने दिशा-निर्देश दिया है. इसके लिए प्रशासनी भूमि दाखिल-खारिज पोर्टल भी बनाया गया है. इसके बावजूद राज्य में प्रशासनी जमीन के दाखिल-खारिज मामले का सिर्फ 22.86 प्रतिशत ही निपटारा हो सका है. लेटर में और क्या कुछ लिखा? लेटर में यह भी जिक्र किया गया है कि राज्य के कई अंचलों में प्रशासनी जमीन के दाखिल-खारिज के एक भी मामले का सॉल्यूशन नहीं किया गया है. इससे यह क्लियर होता है कि अंचल लेवल पर इस काम को लेकर गंभीरता नहीं बरती जा रही है. सचिव ने की यह अपील विभाग के सचिव ने सभी कलेक्टर से अपील की है कि वे संबंधित अंचल अधिकारियों को प्रशासनी जमीन के दाखिल-खारिज से जुड़े सभी बचे हुए मामलों का जल्द निपटारा करने का आदेश जारी करें. यह आदेश सभी एडीशनल कलेक्टर, अनुमंडल पदाधिकारियों, भूमि सुधार डिप्टी कलेक्टर और अंचल अधिकारियों को भी सूचना के लिए भेजा गया है. क्या कहना है डिप्टी सीएम विजय सिन्हा का? उपमुख्यमंत्री और राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा है कि प्रशासनी जमीन का तय समय पर दाखिल-खारिज बेहद जरूरी है. किसी भी कंडीशन में प्रशासनी जमीन का प्राइवेट नाम पर दर्ज होना रोका जा सकेगा. इस दिशा में उठाये गये सख्त कदम प्रशासनी संपत्तियों की सुरक्षा और पारदर्शी राजस्व व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए है. प्रशासनी जमीन रिकॉर्ड्स की शुद्धता राज्य के इंडस्ट्रीलाइजेशन और विकास से जुड़ी है. Also Read: Patna NEET Student Death: नीट छात्रा केस मामले में अब हो सकेगा बड़ा खुलासा, दिल्ली एम्स खंगालेगी पोस्टमार्टम रिपोर्ट The post Bihar Bhumi: जमीन के दाखिल-खारिज में सुस्ती बरतने वालों पर भड़के विभाग के सचिव, सभी कलेक्टर को भेजा लेटर appeared first on Naya Vichar.

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