Hot News

January 22, 2026

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

Zero Oil Chilli Pickle Recipe: तेल के बिना भी बनेगा चटपटा मिर्च का अचार, जानिए आसान घरेलू तरीका

Zero Oil Chilli Pickle Recipe: हर कोई खाने के साथ कुछ ऐसा चटपटा खाना चाहता है जो कि उसके पूरे खाने का स्वाद बदल दें. खाने में अगर कोई भी ऐसी चीज जोड़ी जाए जो कि खानेका स्वाद दोगुना कर दें. इसे बनाने के लिए लोग सोचते हैं कि ज्यादा मेहनत लगेगी या फिर इसे बनने में ज्यादा समय लगेगा.अगर आप तेल वाला अचार नहीं खाना चाहते या कम तेल वाला अचार पसंद करते हैं, तो यह बिना तेल का मिर्च का अचार आपके लिए बहुत बढ़िया है. इसे बनाना बहुत आसान है और इसमें ज्यादा सामान भी नहीं लगता. स्वाद में यह चटपटा और खट्टा-तीखा होता है. बिना तेल आचार बनाने के लिए सामग्री 250 ग्राम हरी मिर्च 2 चम्मच नमक (स्वाद अनुसार) 2 चम्मच राई (सरसों) दरदरी पिसी 1 चम्मच सौंफ पिसी हुई ½ चम्मच हल्दी ½ चम्मच लाल मिर्च पाउडर (वैकल्पिक) 2 बड़े नींबू का रस या 2 चम्मच सिरका कैसे तैयार करते हैं आचार  सबसे पहले हरी मिर्च को अच्छे से धोकर पूरी तरह सुखा लें. पानी बिल्कुल नहीं रहना चाहिए. अब मिर्च के डंठल काटकर लंबाई में बीच से चीरा लगा दें. एक सूखे बर्तन में नमक, राई, सौंफ, हल्दी और लाल मिर्च डालकर मिला लें. इस मसाले को मिर्च के अंदर और बाहर अच्छी तरह लगा दें. अब ऊपर से नींबू का रस या सिरका डालकर अच्छे से मिलाएं. अचार को कांच के साफ और सूखे जार में भर दें. जार को 2–3 दिन धूप में रखें, रोज़ एक बार हिला दें. 3–4 दिन में मिर्च नरम हो जाएगी और अचार खाने लायक बन जाएगा. यह भी पढ़ें: Pickle Recipe: दादी नानी के अंदाज में घर पर बनाएं मिर्च लहसुन का अचार, जानें आसान विधि यह भी पढ़ें: Vegetable Pickles: अब हर मौसम में बनाएं लाजवाब मिक्स अचार, जानें आसान तरीका  The post Zero Oil Chilli Pickle Recipe: तेल के बिना भी बनेगा चटपटा मिर्च का अचार, जानिए आसान घरेलू तरीका appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

Masala Vada Pav Recipe: हल्की भूख को शांत करने के लिए बेस्ट है मसाला वड़ा पाव, नोट करें सिंपल रेसिपी

Masala Vada Pav Recipe: शाम की हल्की भूख को शांत करने के लिए कुछ हल्का और चटपटा खाने का दिल करता है. ऐसे में हम कुछ फटाफट बनने वाली रेसिपी की तलाश करते हैं. अगर बात करें शाम की चाय के साथ स्ट्रीट फूड खाने की तो इसमें मसाला वड़ा पाव का नाम काफी मशहूर है. यह न सिर्फ स्नैक्स है बल्कि बल्कि लोगों की पहली पसंद भी बन चुका है. शाम की चाय के साथ मसाला वड़ा पाव खाने से चाय का स्वाद दोगुना हो जाता है. शिशु इसे खूब पसंद के साथ खाते हैं. चलिए आज आपको मसाला वड़ा पाव बनाने की रेसिपी बताते हैं.  मसाला वड़ा पाव बनाने की सामग्री 3-4 मध्यम आकार के आलू 1/2 चम्मच राई 1/2 चम्मच हल्दी पाउडर 1/2 चम्मच गरम मसाला 1/2 चम्मच अमचूर पाउडर 1/2 चम्मच जीरा 1 चम्मच अदरक-लहसुन पेस्ट 2-3 हरी मिर्च (बारीक कटी हुई) कुछ करी पत्ते नमक स्वादानुसार तेल 1 कप बेसन 1/4 चम्मच हल्दी पाउडर 1/4 चम्मच लाल मिर्च पाउडर एक चुटकी हींग नमक स्वादानुसार यह भी पढ़ें: Ghugni Chaat: स्नैक्स में कुछ चटपटा खाने का है मन तो, घर पर झटपट तैयार करें घुगनी चाट मसाला वड़ा पाव बनाने की विधि इसे बनाने के लिए पहले एक कटोरे में उबले आलू को छीलकर मैश करें. इसके बाद एक पैन में तेल गर्म करके उसमें राई, जीरा, करी पत्ते, अदरक-लहसुन का पेस्ट, हरी मिर्च, हल्दी पाउडर, गरम मसाला, अमचूर पाउडर, नमक और मैश किए आलू को डाल कर अच्छे से मिला लें.  जब आलू ठंडी हो जाए तब इसके गोल वड़े बनाएं और इसे बेसन के बैटर में डाल कर हल्का भूरा होने तक तल लें. इसके बाद आप पाव को बीच से काट लें और उसमें दोनों तरफ हरी चटनी, लहसुन की चटनी और मीठी चटनी लगाएं. फिर आप पाव के बीच में तले हुए वड़े को रख कर इसके ऊपर से अपने मनपसंद मसाले डाल कर गरमा गरम परोस सकते हैं. यह भी पढ़ें: Bharwa Tandoori Aloo Recipe: घर पर ऐसे बनाएं भरवां तंदूरी आलू, स्वाद ऐसा कि चाटते रह जाएंगे उंगलियां यह भी पढ़ें: Chilli Pakora Recipe: चाय की चुस्की के साथ चटपटा मिर्च पकौड़े की बात ही लाजवाब है. बस कुछ मिनटों में झटपट करें तैयार The post Masala Vada Pav Recipe: हल्की भूख को शांत करने के लिए बेस्ट है मसाला वड़ा पाव, नोट करें सिंपल रेसिपी appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

बोर्ड ऑफ पीस पर चीन का ‘नो’, UN से अलग किसी मंच का हिस्सा बनने से इनकार; ट्रंप की पहल पर सवाल

अमेरिका की ओर से दिए गए न्योते को चीन ने ठुकरा दिया है. अमेरिका चाहता था कि चीन बोर्ड ऑफ पीस (शांति बोर्ड) नाम की नई इंटरनेशनल इनिशिएटिव में शामिल हो, लेकिन बीजिंग ने साफ कह दिया कि वह संयुक्त राष्ट्र (UN) को ही वैश्विक व्यवस्था का केंद्र मानता है. यह जानकारी हिंदुस्तान में चीनी दूतावास की प्रवक्ता यू जिंग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म  एक्स पर साझा की. उन्होंने चीन के विदेश मंत्रालय (MOFA) का हवाला देते हुए यह बयान दिया. चीन का साफ संदेश- UN से अलग कोई मंच नहीं चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता के बयान के मुताबिक, चीन को अमेरिका की ओर से बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने का न्योता मिला था, लेकिन चीन हमेशा सच्चे बहुपक्षवाद (Multilateralism) में भरोसा करता है. चीन ने कहा कि दुनिया की स्थिति चाहे जैसी भी बदले, वह संयुक्त राष्ट्र को केंद्र में रखने वाली अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था, इंटरनेशनल लॉ पर आधारित व्यवस्था और UN चार्टर के सिद्धांतों की रक्षा करता रहेगा. ट्रंप का दावा- UN से ज्यादा असरदार होगा बोर्ड ऑफ पीस यह बयान ऐसे समय आया है, जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस हफ्ते स्विट्जरलैंड के दावोस में होने वाली वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम बैठक के दौरान गाजा बोर्ड ऑफ पीस को फॉर्मली शुरू करने की तैयारी में हैं. रिपोर्टर्स से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि यह बोर्ड अब तक का सबसे प्रतिष्ठित बोर्ड होगा और यह संयुक्त राष्ट्र से ज्यादा काम करके दिखाएगा. हालांकि ट्रंप ने यह भी कहा कि बोर्ड ऑफ पीस, यूएन के साथ मिलकर काम करेगा, लेकिन उसका असर ज्यादा होगा. ट्रंप बोले- ईरान की न्यूक्लियर धमकी खत्म करने से आई शांति ट्रंप ने दावा किया कि मध्य पूर्व में शांति इसलिए आई, क्योंकि ईरान की न्यूक्लियर धमकी को खत्म किया गया. उनका कहना था कि अगर ऐसा नहीं होता, तो गाजा और पूरे मध्य पूर्व में शांति संभव नहीं थी. तट्रंप ने कहा कि वह चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा देश इस बोर्ड में शामिल हों. जिन देशों में जनता का नियंत्रण और ताकत है, वे इसमें आएं. उन्होंने यह भी बताया कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को न्योता दिया गया. पुतिन ने इसे स्वीकार कर लिया. ज्यादातर देशों ने बोर्ड में शामिल होने पर सहमति दे दी है. उनके मुताबिक, मुझे नहीं लगता कि कोई देश है जिसने अब तक मना किया हो. गाजा बोर्ड ऑफ पीस का मकसद क्या है? गाजा बोर्ड ऑफ पीस को 20-पॉइंट पीस प्लान के फेज-2 का हिस्सा बताया जा रहा है. इसका मकसद है पश्चिम एशिया में स्थिरता लाना, युद्ध के बाद गाजा को फिर से बनाने की निगरानी और एडमिनिस्ट्रेटिव स्ट्रक्चर को मजबूत करना यह योजना पहले सिर्फ गाजा युद्ध तक सीमित थी, लेकिन अब इसे दुनिया भर के संघर्षों में मध्यस्थता के तौर पर देखा जा रहा है. बोर्ड में क्या-क्या जिम्मेदारी होगी? व्हाइट हाउस के बयान के अनुसार, बोर्ड के सदस्य इन अहम कामों की निगरानी करेंगे जिसमें शामिल है एडमिनिस्ट्रेटिव क्षमता बढ़ाना, क्षेत्रीय देशों से रिश्ते मजबूत करना, गाजा को फिर से बनाना और इनवेस्टर को आकर्षित करना और बड़े पैमाने पर फंड जुटाना. 1 अरब डॉलर देने वालों को पर्मानेंट सीट इस बोर्ड की एक अहम शर्त भी सामने आई है. जो देश 1 अरब डॉलर (करीब 9 हजार करोड़ रुपये) देंगे, उन्हें पर्मानेंट मेंबर सीट मिलेगी. जो देश पैसा नहीं देंगे, वे भी शामिल हो सकते हैं, लेकिन सिर्फ 3 साल के लिए. अमेरिका के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ ने सीएनबीसी को दिए इंटरव्यू में बताया कि अब तक करीब 25 देशों ने बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने की सहमति दे दी है. किन देशों ने न्योता स्वीकार किया? अब तक जिन देशों ने ट्रंप के निमंत्रण को स्वीकार किया है, उनमें शामिल हैं इजराइल, कोसोवो, संयुक्त अरब अमीरात, हंगरी, बेलारूस, अजरबैजान, मिस्र, आर्मेनिया, तुर्की, पाकिस्तान, कतर और जॉर्डन. ये भी पढ़ें: ग्रीनलैंड पर ट्रंप की नजर, ‘गोल्डन डोम’ की सुरक्षा जरूरत या आर्कटिक में ताकत बढ़ाने की चाल? दक्षिण कोरिया में मार्शल लॉ केस: पूर्व PM हान डक-सू को 23 साल की जेल, अदालत बोली- लोकतंत्र बचाने में नाकाम रहे The post बोर्ड ऑफ पीस पर चीन का ‘नो’, UN से अलग किसी मंच का हिस्सा बनने से इनकार; ट्रंप की पहल पर सवाल appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

Bajaj Chetak C25 की सेल शुरू, पहले बुकिंग पर मिलेगा 4,299 रुपये सस्ता

इंडियन इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर मार्केट में दमदार शुरुआत करने के बाद Bajaj Auto ने अपने नए इलेक्ट्रिक स्कूटर Bajaj Chetak C25 की बिक्री आज से शुरू कर दी है. शुरुआती रिस्पॉन्स को देखते हुए, बजाज ने पहले 10,000 कस्टमर्स के लिए 4,299 रुपये का लिमिटेड इंट्रोडक्टरी बेनिफिट अनाउंस किया है, जिससे बजाज चेतक C25 की इफेक्टिव शुरुआती कीमत 91,399 रुपये एक्स-शोरूम से घटकर 87,100 रुपये एक्स-शोरूम (दिल्ली) हो गई है. देशभर में बिक्री शुरू, डिलीवरी भी चालू Chetak C25 की बिक्री अब देशभर के चेतक शोरूम्स में शुरू हो चुकी है. बड़े शहरों में इसकी डिलीवरी भी पहले से ही चालू है. यह लिमिटेड पीरियड बेनिफिट नए वेरिएंट को ज्यादा एक्सेसिबल बनाने के लिए पेश किया गया है, खासकर उन शहरी राइडर्स के लिए जो रोजाना आने-जाने के लिए इलेक्ट्रिक मोबिलिटी का ऑप्शन देख रहे हैं. शहरों के हिसाब से तैयार किया गया Chetak C25 Bajaj Chetak C25 को खासतौर पर अर्बन यूजर को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है. इसमें ब्रांड की पहचान रही ऑल-मेटल बॉडी और एलिगेंट डिजाइन लैंग्वेज बरकरार रखी गई है. इसका कॉम्पैक्ट साइज इसे भीड़भाड़ वाले ट्रैफिक में चलाने और संभालने में आसान बनाता है. बैटरी, रेंज और रोजमर्रा की जरूरतें Chetak C25 में 2.5kWh का बैटरी पैक दिया गया है, जो सर्टिफाइड तौर पर 113km तक की रेंज देता है. हालांकि, रियल-वर्ल्ड कंडीशंस में इसकी रेंज करीब 90 से 95km रहने की उम्मीद है. यह सेटअप रोजाना ऑफिस आने-जाने और शहर में छोटी-मोटी ट्रैवलिंग के लिए बनाया गया है, ताकि बार-बार चार्जिंग के लिए राइडर को रुकना न पड़े. इसके अलावा, स्कूटर में 25 लीटर का अंडर-सीट स्टोरेज भी दिया गया है, जिसमें हेलमेट और रोजमर्रा का जरूरी सामान आसानी से रखा जा सकता है. फीचर्स जो रोज की राइड को बनाएं आसान फीचर्स कि बात करें, तो Chetak C25 में ऐसे एलिमेंट्स दिए गए हैं, जो डेली कम्यूट को ज्यादा आरामदायक बनाते हैं. जैसे चेतक C25 में ढलान पर आसानी से स्टार्ट करने के लिए हिल होल्ड असिस्ट, आगे डिस्क ब्रेक और रात में पार्किंग के दौरान ज्यादा सुविधा के लिए गाइड-मी-होम लाइटिंग दी गई है. स्कूटर का हल्कापन और आसान हैंडलिंग रोजाना शहर की राइड को कम मुश्किल बनाने के लिए है. यह भी पढ़ें: कम बजट और ज्यादा माइलेज, 1 लाख रुपये से कम में मिलने वाली टॉप 5 100cc बाइक्स, चेक करें लिस्ट The post Bajaj Chetak C25 की सेल शुरू, पहले बुकिंग पर मिलेगा 4,299 रुपये सस्ता appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

सरस्वती पूजा भी होगी और नमाज भी अदा की जाएगी, भोजशाला मामले में सुप्रीम कोर्ट का आदेश

मामले की सुनवाई CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की तीन सदस्यीय पीठ ने की. हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की ओर से दायर याचिका में मांग की गई थी कि 23 जनवरी को पड़ने वाली बसंत पंचमी पर भोजशाला परिसर में मुस्लिम समुदाय के लोगों को नमाज अदा करने से रोका जाए और हिंदू समुदाय को मां सरस्वती की पूजा-अर्चना की अनुमति दी जाए. याचिकाकर्ता का तर्क था कि बसंत पंचमी का दिन हिंदू आस्था के लिहाज से विशेष महत्व रखता है और इस दिन पूरे परिसर में पूजा का आयोजन होता है.  मुस्लिम समुदाय की ओर से सलमान खुर्शीद ने दी दलील   सुनवाई के दौरान मस्जिद कमेटी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद ने दलील दी कि इससे पहले भी तीन बार ऐसा हो चुका है, जब बसंत पंचमी शुक्रवार के दिन पड़ी है और तब दोनों समुदायों ने अपने-अपने धार्मिक अनुष्ठान संपन्न किए हैं. उन्होंने कहा कि पहले की परंपरा को देखते हुए किसी एक समुदाय को पूरी तरह से रोकना उचित नहीं होगा.  हिन्दू पक्ष ने क्या कहा ?  हिंदू पक्ष के वकील विष्णु शंकर जैन ने अदालत को बताया कि बसंत पंचमी पर पूजा सूर्योदय से सूर्यास्त तक चलती है और यह एक दिन का सीमित कार्यक्रम नहीं, बल्कि पूरे दिन का धार्मिक आयोजन होता है. ऐसे में पूजा के दौरान किसी अन्य गतिविधि से श्रद्धालुओं की भावनाएं आहत हो सकती हैं. सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ?  सुप्रीम कोर्ट ने संतुलित रुख अपनाते हुए कहा कि बेहतर यही होगा कि ऐसे प्रशासनिक इंतजाम किए जाएं, जिससे दोनों समुदाय अपने-अपने धार्मिक कर्तव्यों का पालन कर सकें. हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि समाज में शांति और सौहार्द बनाए रखना सर्वोपरि है और प्रशासन को इसी भावना के साथ व्यवस्था करनी चाहिए.  एडिशनल सॉलिसीटर जनरल ने क्या कहा ?  मध्यप्रदेश प्रशासन की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एम. नटराजन ने अदालत को अवगत कराया कि राज्य प्रशासन ने भोजशाला परिसर के भीतर ही एक ऐसी जगह चिन्हित कर ली है, जहां नमाज अदा की जा सकेगी, ताकि पूजा और नमाज के बीच टकराव की स्थिति न बने.  CJI ने क्या कहा ? सीजेआई ने कहा कि हम मामले की मेरिट पर कोई राय नहीं दे रहे हैं. शुक्रवार की नमाज और कल (23 जनवरी) बसंत पंचमी पूजा का मुद्दा है. सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट आदेश जारी करते हुए कहा कि धार की भोजशाला में बसंत पंचमी के दिन पूजा और नमाज दोनों की अनुमति होगी.  कब होगी नमाज ?  अदालत ने निर्देश दिया कि नमाज दोपहर 1 बजे से 3 बजे के बीच पढ़ी जा सकेगी और इसके लिए मंदिर परिसर में ही अलग से स्थान निर्धारित किया जाएगा. नमाज अदा करने वालों के लिए विशेष पास की व्यवस्था भी की जाएगी. कोर्ट ने कहा कि मुस्लिम समुदाय नमाज में शामिल होने वाले नमाजियों की संख्या बताएगा और मुस्लिम समुदाय के लिए उसी कॉम्प्लेक्स में खास जगह और अलग एंट्री और एग्जिट पॉइंट दिया जा सकता है. इसी तरह हिंदू समुदाय को भी पूजा के लिए अलग जगह और एंट्री और एग्जिट पॉइंट दिया जा सकता है.  पूजा के लिए समय तय नहीं  बसंत पंचमी की पूजा के लिए भी अलग से स्थान निर्धारित किया जाएगा. पूजा के लिए किसी प्रकार की समय सीमा तय नहीं की गई है. सुप्रीम कोर्ट ने प्रशासन को निर्देश दिया है कि वह कानून-व्यवस्था और आपसी सौहार्द बनाए रखते हुए सभी आवश्यक इंतजाम सुनिश्चित करे.  The post सरस्वती पूजा भी होगी और नमाज भी अदा की जाएगी, भोजशाला मामले में सुप्रीम कोर्ट का आदेश appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

Saraswati Puja 2026: कल मनाई जाएगी सरस्वती पूजा, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त, पूजन सामग्री लिस्ट, आरती और सही उच्चारण

Saraswati Puja 2026: कल शुक्रवार, 23 जनवरी को बसंत पंचमी का पावन पर्व मनाया जाएगा. इस दिन विद्या, बुद्धि और कला की देवी मां सरस्वती की पूजा होती है. स्कूल, कॉलेज और अन्य शिक्षण संस्थानों में इस दिन खास तैयारियां होती हैं. जगह-जगह मां सरस्वती की प्रतिमाएं स्थापित की जाती हैं और बच्चों के पढ़ाई शुरू करने का विशेष संस्कार भी किया जाता है.बसंत पंचमी न सिर्फ मां सरस्वती की पूजा के लिए शुभ दिन है, बल्कि इसे बसंत ऋतु के आगमन का भी प्रतीक माना जाता है. बसंत पंचमी 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त पूजा का शुभ समय तिथि (Date): माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी शुरू: 23 जनवरी 2026, रात 2:28 बजे समाप्त: 24 जनवरी 2026, रात 1:46 बजे बसंत पंचमी का पर्व: उदया तिथि के अनुसार 23 जनवरी, शुक्रवार को मनाया जाएगा. सरस्वती पूजा का शुभ समय सुबह 7:15 बजे से दोपहर 12:33 बजे तक इसी समय मां सरस्वती की पूजा करने से विशेष फल प्राप्त होता है. बसंत पंचमी क्या है? महत्व और इतिहास बसंत पंचमी का त्योहार सर्दी के खत्म होने और बसंत ऋतु के शुरू होने का संकेत देता है. मकर संक्रांति (14 या 15 जनवरी) के बाद सूर्य देवता मकर राशि से उत्तर की ओर बढ़ते हैं. इसके साथ ही धीरे-धीरे ठंड कम होने लगती है और मौसम में हल्की गर्मी आने लगती है. इस सुखद बदलाव के कारण बसंत ऋतु का आगमन होता है. खासकर उत्तर हिंदुस्तान में लोग अब कड़ाके की ठंड से राहत महसूस करते हैं. लगभग तीस दिन के इस बदलाव के बाद, बसंत पंचमी से शुरू होकर होली तक बसंत ऋतु अपने पूरे सौंदर्य और रंगों के साथ दिखाई देती है. यह समय नई ऊर्जा, खुशियों और रंगों का प्रतीक माना जाता है. मां सरस्वती कौन हैं? स्वरूप, वाहन और प्रतीक देवी सरस्वती का रूप शांत और सुंदर है, जैसे निर्मल चांद और उनके मुख पर प्रकृति की कांति चमक रही हो. माता आमतौर पर सफेद और पीले वस्त्र पहने रहती हैं. मां दुर्गा के दूसरे स्वरूप, ब्रह्मचारिणी माता को भी सरस्वती का रूप माना जाता है. ब्रह्मचारिणी स्वरूप में वे पीले वस्त्र पहनती हैं. लेकिन आमतौर पर सरस्वती की प्रतिमाओं और तस्वीरों में उन्हें सफेद वस्त्रों में ही दिखाया जाता है. मां कमल के फूल पर और हंस पर विराजमान होती हैं. उनका चार हाथ वाला रूप होता है और वे वीणा बजाती हैं. वीणा की मधुर ध्वनि से सृष्टि में हर जीव और प्रकृति में संगीत गूंजता है. सरल शब्दों में कहें तो, मां सरस्वती शांति, ज्ञान और संगीत की देवी हैं, जिनकी वीणा की धुन से पूरे ब्रह्मांड में सुंदरता और ऊर्जा फैलती है. बसंत पंचमी और सरस्वती पूजा का धार्मिक महत्व बसंत पंचमी, जिसे वसंत पंचमी या सरस्वती पूजा भी कहा जाता है, हिंदू धर्म का एक खास त्योहार है. यह बसंत ऋतु की शुरुआत का प्रतीक है. यह दिन खुशी, एकता और नई शुरुआत का संदेश देता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा लाता है. देशभर में इस दिन विद्या, संगीत, कला और ज्ञान की देवी मां सरस्वती की पूजा की जाती है. खासकर विद्यार्थी और कलाकार इस दिन बहुत उत्साहित रहते हैं, क्योंकि यह दिन शिक्षा और रचनात्मकता के लिए बहुत शुभ माना जाता है. सरस्वती पूजा में पूजा का सही समय क्यों जरूरी है? सरस्वती पूजा में शुभ मुहूर्त में की गई पूजा से सकारात्मक फल मिलता है और विद्या में सफलता की कामना पूरी होती है. बसंत पंचमी पर क्या करें और क्या न करें सरस्वती पूजा पर क्या करें मां सरस्वती की पूजा करें – घर या मंदिर में विधिपूर्वक पूजा करें. पीले रंग के कपड़े पहनें – पीला रंग बसंत और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है. विद्यार्थियों के लिए पढ़ाई शुरू करना – अक्षर ज्ञान या विद्यारंभ करना शुभ माना जाता है. वीणा, किताबें और कलम का पूजन करें – विद्या और कला की देवी का सम्मान करें. फूल, धूप, दीप और भोग चढ़ाएं – पूजा सामग्री सही तरीके से लगाएं. सकारात्मक विचार रखें और दान करें – जरूरतमंदों को दान या भोजन देना शुभ है. पतंग उड़ाना और बसंती व्यंजन बनाना – त्योहार का आनंद लें. सरस्वती पूजा पर क्या न करें झगड़ा, गुस्सा और नकारात्मक बातें न करें. किसी भी अपवित्र या अशुद्ध स्थान पर पूजा न करें. अनावश्यक शोर-शराबा और अव्यवस्थित गतिविधियों से बचें. इस दिन शिक्षा, कला या कामकाज में आलस्य न दिखाएं. मां सरस्वती की पूजा के समय अशुद्ध भोजन या अधूरा भोग न रखें. पूजा के लिए जरूरी सामग्री हल्दी, कुमकुम, सिंदूर और रोली अक्षत (अन्न के दाने) आम के पत्ते पीले फूल और फूलों की माला लकड़ी की चौकी पीला वस्त्र या चुनरी / साड़ी कलश पके हुए केले की फली और नारियल भोग के लिए: मालपुआ, तिल के लड्डू, दूध या घी से बनी मिठाई धूपबत्ती, इत्र और गुलाल श्रृंगार का सामान सरस्वती पूजा की संपूर्ण विधि साफ-सफाई: पूजा से पहले अपने घर और पूजा स्थान को साफ करें. चौकी सजाएं: लकड़ी की चौकी रखें और उस पर पीला वस्त्र बिछाएं. प्रतिमा स्थापित करें: मां सरस्वती की प्रतिमा या तस्वीर चौकी पर रखें. गंगाजल छिड़कें: पूजा स्थान पर गंगाजल का छिड़काव करें. आचमन और स्नान: माता सरस्वती का आचमन कराकर स्नान कराएं. फूल और माला अर्पित करें: देवी को फूल, माला और आम के पत्ते चढ़ाएं. सिंदूर और श्रृंगार: सिंदूर, अक्षत और श्रृंगार का सामान अर्पित करें. गुलाल: माता के चरणों में गुलाल जरूर लगाएं. वस्त्र पहनाएं: मां सरस्वती को पीला वस्त्र पहनाएं. भोग अर्पित करें: पकवान, मिठाई, फल आदि अर्पित करें. पुस्तक और पढ़ाई का सामान पूजन: किताबें, कॉपी और कलम की पूजा करें. दान करें: जरूरतमंदों को पढ़ाई का सामान दान करें. भगवान गणेश की पूजा: मां सरस्वती के साथ गणेश जी की पूजा भी करें. प्रसाद वितरण: पूजा के बाद सभी को भोग / प्रसाद बांटें. शाम की पूजा: शाम को भी देवी सरस्वती की पूजा विधि-विधान से करें. सरस्वती माता की आरती ॐ जय सरस्वती माता, जय जय सरस्वती माता।सद्गुण वैभव शालिनी, त्रिभुवन विख्याता॥ चंद्रवदनी पद्मासिनी, धृति मंगलकारी।सोहे शुभ हंस सवारी, अतुल तेजधारी॥ जय… बाएं कर में वीणा धरे, दाएं कर माला।शीश मुकुट मणि सोहे, गले मोतियन माला॥ जय… देवी शरण जो आए, उनका

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

Bihar News: बेतिया जीएमसीएच में जूनियर डॉक्टरों की गुंडागर्दी, इलाज कराने आए परिजनों से की मारपीट

Bihar News: जूनियर डॉक्टरों और इंटर्न छात्रों की गुंडागर्दी थमने का नाम नहीं ले रही है. ताजा मामला बेतिया के GMCH अस्पताल का है. यहां जूनियर डॉक्टर और इंटर्न ने अस्पताल के भीतर मरीज के परिजनों से जमकर मारपीट की है. जानकारी के अनुसार, मरीज के परिजन पटना से उसे बेतिया ले गए थे, लेकिन रास्ते में मरीज की तबीयत बिगड़ गई। अस्पताल में इलाज के दौरान डॉक्टर ने मरीज का ऑक्सीजन मास्क हटा दिया, जिस पर परिजनों और डॉक्टर के बीच मामूली विवाद हुआ. इस विवाद के बाद जूनियर डॉक्टर और इंटर्न ने मरीज के परिजनों की पिटाई कर दी. सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा वीडियो अब इस मारपीट का वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. जानकारी के अनुसार पटना से लौटते समय बेतिया क्रिश्चियन क्वार्टर की रहने वाली सुशीला कुमारी की तबीयत अचानक बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें इलाज के लिए बेतिया GMCH लाया गया. बेतिया: GMCH में जूनियर डॉक्टरों की गुंडागर्दी का आरोप. इलाज कराने आए स्त्री मरीज के परिजनों से मारपीट. घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल. ऑक्सीजन मास्क हटाने को लेकर कहासुनी के बाद विवाद बढ़ा. दो परिजन गंभीर रूप से घायल. पहले भी मारपीट के आरोप लग चुके हैं.#Bettiah #GMCH… pic.twitter.com/EBP28TujiY — Naya Vichar (@prabhatkhabar) January 22, 2026 इलाज के दौरान ऑक्सीजन मास्क हटाने को लेकर परिजनों और एक जूनियर डॉक्टर के बीच कहासुनी हुई. आरोप है कि इसके बाद जूनियर डॉक्टर ने अन्य जूनियर डॉक्टर्स और इंटर्न को बुला लिया. जूनियर डॉक्टर्स और इंटर्न ने ऐसे की मारपीट आरोपी जूनियर डॉक्टर के बुलावे पर आए अन्य जूनियर डॉक्टर्स और इंटर्न ने मरीज के परिजनों के साथ कहा सुनी शुरू की और गुस्से में तमतमाए इंटर्न और जूनियर डॉक्टर्स ने मारपीट शुरू कर दी. इस घटना में विशाल राज के पिता ज्ञान प्रकाश हिलेरियन और अमन ठाकुर पिता इग्नेशियुश हिलेरियन गंभीर रूप से घायल हो गए. पहले भी कर चुके है गुंडागर्दी इससे पहले भी जूनियर डॉक्टरों और इंटर्न अस्पताल परिसर के भीतर इलाज के लिए आए मरीजों और तीमारदारों के साथ मारपीट कर चुके है. कुछ दिनों पहले इन्होंने जीविका दीदियों के साथ भी मारपीट की थी. यह घटना भी काफी चर्चा में रही इसकी शिकायत भी दर्ज कराई गई. बावजूद इसके, जूनियर डॉक्टर्स और इंटर्न की गुंडागर्दी थमने का नाम नहीं ले रही है. क्या ऐसे ही लात घूंसे खाते रहेंगे मरीज और उनके परिजन? अब सवाल यह उठता है कि क्या मरीजों और उनके परिजनों को डॉक्टरों की गुंडागर्दी ऐसे ही झेलनी पड़ेगी? या प्रशासन की ओर से जूनियर डॉक्टर्स पर कोई कार्रवाई होगी? ताकि इलाज के लिए आए परिजनों को लात-घूंसे खाने पड़ें! पटना के पीएमसीएच से लेकर बेतिया के जीएमसीएच तक अक्सर जूनियर डॉक्टर्स के साथ मारपीट की घटनाएं सामने आती रही है लेकिन प्रशासन और प्रशासन इस पर कोई ठोस कार्रवाई करने में नाकाम नजर आया है. ऐसी घटनाओं से जहां डॉक्टरों की छवि धूमिल होती है और मरीजों में भी असुरक्षा का भाव है. Also Read: पटना जंक्शन पर अब मिलेगी एयरपोर्ट जैसी पार्किंग फैसिलिटी, 27 जनवरी से बदल जाएंगे नियम और रेट The post Bihar News: बेतिया जीएमसीएच में जूनियर डॉक्टरों की गुंडागर्दी, इलाज कराने आए परिजनों से की मारपीट appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

Admission Alert 2026 : स्क्रीन एक्टिंग के बेसिक कोर्स समेत कई अन्य कोर्सेज में एडमिशन का मौका

Admission Alert 2026 : एफटीआइआइ पुणे लखनऊ एवं मुंबई में स्क्रीन एक्टिंग में बेसिक कोर्स संचालित करने जा रहा है, वहीं जादवपुर विश्वविद्यालय मौका दे रहा है फार्माकोविजिलेंस इन क्लिनिकल रिसर्च में सर्टिफिकेट कोर्स करने का. कलकत्ता विश्वविद्यालय में दो वर्षीय एमफिल इन क्लीनिकल साइकोलॉजी कोर्स में प्रवेश के लिए भी आवेदन प्रक्रिया चल रही है. स्क्रीन एक्टिंग में करें बेसिक कोर्स फिल्म एवं टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एफटीआइआइ),पुणे एक्टिंग में करियर बनाने के इच्छुक युवाओं को अपनी प्रतिभा को निखारने का बेहतरीन मौका दे रहा है. एफटीआइआइ अपने सेंटर फॉर ओपन लर्निंग के तहत लखनऊ एवं मुंबई में स्क्रीन एक्टिंग में बेसिक कोर्स संचालित करने जा रहा है. यह एक शॉर्ट टर्म ऑफलाइन कोर्स होगा. कोर्स के बारे में जानें : बेसिक कोर्स इन स्क्रीन एक्टिंग का लखनऊ में 19 से 25 फरवरी एवं मुंबई में 9 से 18 फरवरी, 2026 तक सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक संचालन किया जायेगा. दोनों शहरों में कोर्स की क्रमश: 25-25 सीटें हैं और माध्यम इंग्लिश एवं हिंदी है. कोर्स के स्थान के बारे में जानने के लिए नोटिफिकेशन देखें. प्रवेश के लिए योग्यता : अभ्यर्थी का बारहवीं पास होना आवश्यक है और आयु 18 वर्ष से अधिक होनी चाहिए. ऐसे करें आवेदन : नोटिफिकेशन में दिये गये लिंक से ऑनलाइन आवेदन करना है. प्रवेश पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर दिया जायेगा. अंतिम तिथि : लखनऊ से कोर्स करने के लिए 28 जनवरी और मुंबई के लिए 27 जनवरी, 2026, शाम 6 बजे से पहले तक आवेदन कर सकते हैं. विवरण देखें : https://ftii.ac.in/announcement फार्माकोविजिलेंस इन क्लिनिकल रिसर्च में करें सर्टिफिकेट कोर्स संस्थान : क्लीनिकल रिसर्च सेंटर (सीआरसी), जादवपुर विश्वविद्यालय. कोर्स : फार्माकोविजिलेंस इन क्लिनिकल रिसर्च में सर्टिफिकेट कोर्स. यह नौ माह का कोर्स है, जिसे जादवपुर विश्वविद्यालय मणिपाल हॉस्पिटल कोलकाता के साथ मिलकर संचालित करेगा. योग्यता : बीएससी/ बीफार्मा/ एमफार्मा/ एमबीबीएस/एमडी/ एमडीएस/ नर्सिंग/बीएचएमएस/ बीडीएस/बीवीएससी/ डिप्लोमा इन पैरामेडिकल कोर्स की योग्यता रखने वाले यह कोर्स कर सकते हैं. कैसे करें आवेदन : निर्धारित प्रारूप में अपना आवेदन नोटिफिकेशन में दिये गये पते पर भेजें. अंतिम तिथि : 30 जनवरी, 2026. विवरण देखें : https://jadavpuruniversity.in/storage/2026/01/CRC2026.pdf क्लीनिकल साइकोलॉजी में एमफिल के लिए करें आवेदन संस्थान : कलकत्ता विश्वविद्यालय, कोलकाता.कोर्स : दो वर्षीय एमफिल इन क्लीनिकल साइकोलॉजी कोर्स (अकादमिक सत्र 2025-27). योग्यता : किसी मान्यताप्राप्त संस्थान से न्यूनतम 55 प्रतिशत अंकों में साइकोलॉजी/ एप्लाइड साइकोलॉजी/ क्लीनिकल साइकोलॉजी में एमए/एमएससी होना चाहिए. प्रवेश : लिखित परीक्षा एवं मौखिक परीक्षा में प्रदर्शन के आधार पर प्रवेश दिया जायेगा. कैसे करें आवेदन : विश्वविद्यालय की वेबसाइट से ऑनलाइन आवेदन करना है. अंतिम तिथि : 2 फरवरी, 2026. विवरण देखें : https://www.caluniv-ucsta.net/m_phill/ The post Admission Alert 2026 : स्क्रीन एक्टिंग के बेसिक कोर्स समेत कई अन्य कोर्सेज में एडमिशन का मौका appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

ग्रीनलैंड पर ट्रंप की नजर, ‘गोल्डन डोम’ की सुरक्षा जरूरत या आर्कटिक में ताकत बढ़ाने की चाल?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर ग्रीनलैंड को लेकर बड़ा और विवादित दावा किया है. उनका कहना है कि अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ग्रीनलैंड बेहद जरूरी है. इस बार ट्रंप ने इस दावे को सीधे अपनी महत्वाकांक्षी मिसाइल डिफेंस योजना ‘गोल्डन डोम’ से जोड़ दिया है. ट्रंप के मुताबिक, 175 अरब डॉलर की यह मिसाइल सुरक्षा परियोजना अमेरिका ही नहीं, बल्कि कनाडा की सुरक्षा भी करेगी. उन्होंने यहां तक कहा कि अगर ग्रीनलैंड अमेरिका के नियंत्रण में होता है, तो नाटो और ज्यादा मजबूत हो जाएगा. लेकिन सवाल यह है कि क्या वाकई अमेरिका को ग्रीनलैंड अपने पास रखना जरूरी है, या यह दावा ज्यादा नेतृत्व से जुड़ा है? क्या है ‘गोल्डन डोम’ मिसाइल डिफेंस सिस्टम? ‘गोल्डन डोम’ अमेरिका की एक नई और मॉर्डन मिसाइल सुरक्षा योजना है, जिसे पिछले साल एक कार्यकारी आदेश के जरिए शुरू किया गया. ट्रंप इसे अमेरिका का अब तक का सबसे बड़ा और सबसे एडवांस सिक्योरिटी सुरक्षा कवच बताते हैं. इस सिस्टम का मकसद हर तरह के मॉर्डन खतरे से सुरक्षा देना है, जैसे कि बैलिस्टिक मिसाइल, हाइपरसोनिक हथियार, क्रूज मिसाइल और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से लैस ड्रोन के बड़े हमले. इस प्रोजेक्ट की लागत करीब 175 अरब डॉलर बताई गई है और इसे तीन साल में पूरा करने की योजना है. ट्रंप का लक्ष्य है कि यह सिस्टम जनवरी 2029 तक पूरी तरह काम करने लगे. इसकी कमान अमेरिकी स्पेस फोर्स के जनरल माइकल गुएटलिन के पास है. यह योजना पूर्व राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन की ‘स्ट्रैटेजिक डिफेंस इनिशिएटिव’ से प्रेरित है, लेकिन आज के युद्ध हालात के हिसाब से तैयार की गई है. गोल्डन डोम कैसे काम करेगा? इस सिस्टम की रीढ़ एक बड़ा सैटेलाइट नेटवर्क होगा, जो पूरी दुनिया में कहीं से भी मिसाइल लॉन्च होने पर तुरंत उसे पकड़ सकेगा. ये सैटेलाइट्स जमीन, समुद्र या हवा में मौजूद इंटरसेप्टर सिस्टम को जानकारी देंगे, ताकि मिसाइल को रास्ते में ही रोका जा सके. पेंटागन इसे सिस्टम ऑफ सिस्टम्स कहता है, यानी कई स्तरों पर काम करने वाला सुरक्षा ढांचा. ट्रंप क्यों कहते हैं कि ग्रीनलैंड ‘बहुत जरूरी’ है? ट्रंप का तर्क पूरी तरह जियोग्राफी पर आधारित है. ग्रीनलैंड आर्कटिक इलाके में है और यूरेशिया से उत्तरी अमेरिका तक जाने वाले सबसे छोटे रास्ते इसी इलाके से होकर गुजरते हैं. किसी बड़े युद्ध की सिचुएशन में लंबी दूरी की मिसाइलें इन्हीं रास्तों से आ सकती हैं. ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा कि अमेरिका को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ग्रीनलैंड चाहिए. यह उस गोल्डन डोम के लिए जरूरी है जिसे हम बना रहे हैं. दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के दौरान ट्रंप ने कहा कि केवल अमेरिका ही इस विशाल बर्फीले इलाके की रक्षा कर सकता है, इसे डेवलप कर सकता है और बेहतर बना सकता है. उन्होंने ग्रीनलैंड को लेकर तुरंत बातचीत की इच्छा भी जताई. नाटो और कनाडा को लेकर भी ट्रंप का बयान ट्रंप ने कहा कि गोल्डन डोम न सिर्फ अमेरिका, बल्कि कनाडा की सुरक्षा भी करेगा. उन्होंने यह भी जोड़ा कि कनाडा को अमेरिका के सुरक्षा कवच के लिए ज्यादा आभारी होना चाहिए. इसके साथ ही ट्रंप ने नाटो से अपील की कि अगर ग्रीनलैंड अमेरिका के पास होता है, तो गठबंधन और ज्यादा मजबूत और प्रभावी बन सकता है. ग्रीनलैंड में अमेरिका पहले से क्या-क्या करता है? असलियत यह है कि अमेरिका ग्रीनलैंड में दशकों से मौजूद है. 1951 में डेनमार्क के साथ हुए रक्षा समझौते के तहत अमेरिका को वहां मिलिट्री और देखरेख करने की पूरी अनुमति है. ग्रीनलैंड में लोकेटेड पिटुफिक स्पेस बेस (पहले थुले एयर बेस) पहले से ही मिसाइल चेतावनी और अंतरिक्ष निगरानी में अहम भूमिका निभा रहा है. आर्कटिक क्षेत्र में इसकी लोकेशन मिसाइल ट्रैकिंग के लिए बेहद फायदेमंद मानी जाती है. रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि अगर अमेरिका चाहे, तो वह मौजूदा समझौतों के तहत और रडार, सेंसर या रक्षा सिस्टम वहां लगा सकता है. क्या ग्रीनलैंड का मालिक बनना सच में जरूरी है? ज्यादातर विशेषज्ञों की राय है नहीं. Politico के मुताबिक, एक पूर्व अमेरिकी रक्षा अधिकारी ने कहा कि अमेरिका डेनमार्क के साथ मिलकर ज्यादा रडार, बेहतर कम्युनिकेशन सिस्टम और इंटरसेप्टर साइट्स सब कुछ बिना ग्रीनलैंड खरीदे ही बना सकता है. उनका कहना था कि अगर सच में मकसद सुरक्षा मजबूत करना होता, तो मौजूदा तरीका शुरुआत से ही गलत है. अमेरिकन एंटरप्राइज इंस्टीट्यूट के वरिष्ठ विश्लेषक टॉड हैरिसन ने कहा कि ग्रीनलैंड में गोल्डन डोम के लिए अमेरिका को जो चाहिए, उस तक पहले से पूरी पहुंच है. उन्होंने ट्रंप के इस दावे को कि मालिकाना जरूरी है, हकीकत से दूर बताया. क्या गोल्डन डोम कहीं और भी लगाया जा सकता है? अमेरिका के अंदर भी कई जगहों पर इस सिस्टम को लेकर स्टडी हुआ है. न्यूयॉर्क का फोर्ट ड्रम एक संभावित जगह के तौर पर सामने आया है. इसके अलावा, कनाडा में या नाटो के मौजूदा ढांचे के साथ मिलकर भी इसके हिस्से लगाए जा सकते हैं. क्योंकि गोल्डन डोम एक मल्टी लेयर्ड सिस्टम है , इसलिए इसके सभी हिस्सों का एक ही जगह होना जरूरी नहीं है. असली मुद्दा क्या है? विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप जिस तरह ग्रीनलैंड को गोल्डन डोम के लिए जरूरी बता रहे हैं, उसका टेक्निकल बेस कमजोर है. अमेरिका के पास पहले से ही कानूनी अधिकार, सैन्य पहुंच और जरूरी ढांचा मौजूद है. इसलिए यह बहस ज्यादा सैन्य जरूरत की नहीं, बल्कि आर्कटिक इलाके में दबदबा, नाटो पर प्रभाव और वैश्विक नेतृत्व से जुड़ी दिखती है. ये भी पढ़ें: दक्षिण कोरिया में मार्शल लॉ केस: पूर्व PM हान डक-सू को 23 साल की जेल, अदालत बोली- लोकतंत्र बचाने में नाकाम रहे ट्रंप के ‘शांति बोर्ड’ का मेंबर बनेगा पाकिस्तान, कर्ज से दबे पाक को चुकानी होगी 8400 करोड़ की ‘एंट्री फीस’ The post ग्रीनलैंड पर ट्रंप की नजर, ‘गोल्डन डोम’ की सुरक्षा जरूरत या आर्कटिक में ताकत बढ़ाने की चाल? appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

बिहार में ठंड के साथ कोहरे का डबल अटैक, कई जिलों में अलर्ट, मौसम विभाग की चेतावनी

Bihar IMD Alert: बिहार के अधिकांश जिलों में दिन में धूप निकलने से हल्की गर्माहट महसूस की जा रही है. सुबह और देर शाम ठंड के साथ कोहरे का असर देखा जा रहा है. बिहार मौसम सेवा केंद्र के अनुसार अगले दो दिनों तक प्रदेश में बारिश की कोई संभावना नहीं है. कुछ इलाकों में मध्यम स्तर का कोहरा लोगों की परेशानी बढ़ा सकता है. बिहार मौसम सेवा केंद्र का अलर्ट बिहार मौसम सेवा केंद्र का अलर्ट पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, सीतामढ़ी, शिवहर, मधुबनी, सुपौल, अररिया, किशनगंज, पूर्णिया और कटिहार में सुबह के समय कोहरा छाए रहने की संभावना जताई गई है. इन क्षेत्रों में विजिबिलिटी कम होने से सड़क और रेल यातायात प्रभावित हो सकता है. मधेपुरा, सहरसा, खगड़िया और भागलपुर में भी देर शाम और सुबह हल्का से मध्यम कोहरा देखे जाने का अनुमान है. दरभंगा, मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर, वैशाली, बेगूसराय, सारण, सीवान और गोपालगंज में मौसम में बड़ा बदलाव नहीं देखने को मिलेगा. यहां दिन में धूप और रात में ठंड का असर बना रहेगा. पटना सहित नालंदा, शेखपुरा, लखीसराय, जमुई और मुंगेर में भी मौसम साफ रहने की संभावना है. यहां सुबह के समय हल्की धुंध हो सकती है. पटना मौसम केंद्र का तापमान पर अपडेट बिहार की ताजा समाचारों के लिए क्लिक करें तापमान पर क्या अपडेट दक्षिण बिहार के जिलों भोजपुर, बक्सर, कैमूर, रोहतास, औरंगाबाद, गया, जहानाबाद, अरवल और नवादा में दिन का तापमान धीरे-धीरे बढ़ रहा है. यहां अधिकतम तापमान 25 से 28 डिग्री सेल्सियस के बीच और न्यूनतम तापमान 8 से 14 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का पूर्वानुमान है. भागलपुर और बांका में भी मौसम शुष्क बना रहेगा और ठंड का असर सुबह-शाम महसूस होगा. पूरे बिहार में फिलहाल ठंड और शुष्क मौसम का दौर जारी है. आम लोगों से सुबह-शाम सावधानी बरतने और कोहरे के दौरान सतर्क रहने की अपील की गई है. इसे भी पढ़ें: अब प्लास्टिक की नावों से चलेगा बिहार का जल परिवहन, जानें प्रशासन का गेमचेंजर प्लान The post बिहार में ठंड के साथ कोहरे का डबल अटैक, कई जिलों में अलर्ट, मौसम विभाग की चेतावनी appeared first on Naya Vichar.

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

About Us

नयाविचार एक आधुनिक न्यूज़ पोर्टल है, जो निष्पक्ष, सटीक और प्रासंगिक समाचारों को प्रस्तुत करने के लिए समर्पित है। यहां राजनीति, अर्थव्यवस्था, समाज, तकनीक, शिक्षा और मनोरंजन से जुड़ी हर महत्वपूर्ण खबर को विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के साथ प्रस्तुत किया जाता है। नयाविचार का उद्देश्य पाठकों को विश्वसनीय और गहन जानकारी प्रदान करना है, जिससे वे सही निर्णय ले सकें और समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकें।

Quick Links

Who Are We

Our Mission

Awards

Experience

Success Story

© 2025 Developed By Socify

Scroll to Top