Ajit Pawar Death who will lead NCP Faction: महाराष्ट्र की नेतृत्व में अजित पवार एक ऐसा नाम रहे हैं, जिनके बिना सत्ता का समीकरण अधूरा माना जाता था. उपमुख्यमंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) नेता अजित पवार का बुधवार सुबह विमान हादसे में निधन हो गया. वह आज, 28 जनवरी मुंबई से को बारामती जा रहे थे, तभी रास्ते में सुबह लगभग 8.45 बजे यह दुर्घटना हुई. 66 साल के अजित पवार राज्य की नेतृत्व का बड़ा चेहरा थे और अलग-अलग दौर में छह बार उपमुख्यमंत्री रह चुके थे. उनके निधन होने की समाचार ने पूरे राज्य की सियासत को झकझोर दिया है. खास तौर पर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के दोनों गुटों के सामने अब बड़ा नेतृत्वक सवाल खड़ा हो गया है. साल 2023 में उन्होंने अपने चाचा शरद पवार से अलग रास्ता चुनते हुए एनडीए के साथ जाने का फैसला किया था. इसी फैसले से NCP दो हिस्सों में बंट गई. बाद में लंबी कानूनी लड़ाई के बाद उनके गुट को चुनाव आयोग से पार्टी का नाम और ‘घड़ी’ चुनाव चिन्ह भी मिल गया. हालांकि जनता ने किसे ‘असली’ NCP माना? इस पर तस्वीर साफ नहीं हो पाई. 2024 के लोकसभा चुनाव में उनके गुट का प्रदर्शन कमजोर रहा, लेकिन विधानसभा चुनाव में 41 सीटें जीतकर उन्होंने जोरदार वापसी की. फिलहाल उनका गुट ही आधिकारिक NCP माना जाता है और वही फडणवीस प्रशासन का हिस्सा भी है. ऐसे में उनका जाना सिर्फ निजी या पारिवारिक क्षति नहीं, बल्कि सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन के लिए भी बड़ा झटका माना जा रहा है. महायुति में बीजेपी, शिंदे गुट की शिवसेना और अजित पवार की NCP शामिल है. मौजूदा विधानसभा में NCP के 41 विधायक हैं, जो प्रशासन की मजबूती का बड़ा आधार माने जाते हैं. लेकिन सबसे ज्यादा असर खुद NCP पर पड़ने वाला है. पार्टी पहले ही दो हिस्सों में बंटी हुई थी. एक गुट अजित पवार के साथ और दूसरा उनके चाचा शरद पवार के नेतृत्व में. अभी तक विधायकों की संख्या और सत्ता में भागीदारी के लिहाज से अजित पवार का गुट ज्यादा मजबूत स्थिति में है. अजित पवार के पास 41 विधायक और 2 सांसद (एक लोस-एक रास) वहीं शरद पवार गुट के पास 10 विधायक और 7 सांसद (4 लोस और 3 रास) हैं. Maharashtra will dearly miss Ajit Dada Pawar 🙏🏽 A blunt and straightforward politician who bought in a lot of development projects in Western Maharashtra His quick meme worthy one liners always put a smile on my face Om Shanti 🙏🏽 pic.twitter.com/33Oa9ZqlMv — Anmol (@Anmol_299) January 28, 2026 साल 2023 में अजित पवार ने शरद पवार से अलग राह चुनते हुए पार्टी का बड़ा धड़ा अपने साथ लेकर बीजेपी-शिवसेना महायुति प्रशासन में शामिल होने का फैसला किया था. इससे पहले 2019 में भी उन्होंने अचानक बीजेपी के साथ जाकर उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी, लेकिन बाद में वे फिर शरद पवार के साथ लौट आए थे. हालांकि, कुछ साल बाद उन्होंने स्थायी तौर पर अलग गुट बना लिया. हालांकि परिवार की नेतृत्व में आई टूट, हाल के दिनों में जुड़ने का संकेत दे रही थी. परिवार के भीतर रिश्ते फिर से सामान्य हो रहे थे. इसका असर नेतृत्व में भी दिखा, जब हालिया स्थानीय निकाय चुनावों में NCP के दोनों गुटों ने पिंपरी-चिंचवड़ जैसे इलाकों में साथ मिलकर चुनाव लड़ा. इससे अटकलें तेज हो गई थीं कि भविष्य में दोनों गुट फिर एक हो सकते हैं. NCP में शरद पवार के बाद दो बड़े चेहरे माने जाते थे अजित पवार और सुप्रिया सुले. जहां सुप्रिया सुले को दिल्ली की नेतृत्व में पार्टी का प्रमुख चेहरा माना जाता है, वहीं अजित पवार को जमीनी नेता और संगठन संभालने वाला रणनीतिकार समझा जाता था. अगर पार्टी एकजुट होती, तो माना जा रहा था कि दोनों की भूमिकाएं अलग-अलग स्तर पर मजबूत हो सकती थीं. इससे यह चर्चा तेज हुई कि चाचा-भतीजे के रिश्ते फिर सुधर रहे हैं और शायद भविष्य में पार्टी दोबारा एक हो सकती है. हाल ही में NCP नेता सुनील तटकरे ने कहा था कि NCP, NCP (SP) के साथ विलय पर बातचीत कर सकती है, लेकिन राज्य में एनडीए के साथ ही बनी रहेगी. इससे पहले अजित पवार भी संकेत दे चुके थे कि दोनों गुट ‘जहां संभव होगा’ साथ आ सकते हैं, जिससे भविष्य में फिर से एक होने के दरवाजे खुले रहने का संदेश गया था. पिछले हफ्ते शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने भी उम्मीद जताई थी कि अजित पवार अपने गुट का विलय शरद पवार के साथ कर सकते हैं. लेकिन अब अजित पवार के अचानक चले जाने से यह पूरी संभावना अनिश्चित हो गई है. Deeply saddened by the passing of Maharashtra’s Deputy Chief Minister, Ajit Pawar. Just a month ago, we stood together in Baramati for the inauguration of the Sharad Pawar Centre of Excellence in AI – a moment that reflected Ajit ji’s vision, his belief in progress and his… pic.twitter.com/WEbi96HBBm — Gautam Adani (@gautam_adani) January 28, 2026 उनके निधन के बाद कई बड़े सवाल खड़े हो गए हैं. क्या NCP के दोनों धड़े फिर एक मंच पर आएंगे? अजित पवार के गुट का नेतृत्व कौन संभालेगा? और क्या उनके विधायक एकजुट रहेंगे या नेतृत्वक टूट-फूट शुरू होगी? अब यह भी देखा जाएगा कि उनके समर्थक विधायक किस दिशा में जाते हैं. उनका फैसला न सिर्फ NCP, बल्कि महाराष्ट्र की मौजूदा प्रशासन के भविष्य को भी प्रभावित कर सकता है. जो विधायक, सांसद और दूसरे जनप्रतिनिधि उनके साथ आए थे, वे आगे क्या करेंगे? यही देखने वाली बात होगी. क्या वे एकजुट रहेंगे, नया नेता चुनेंगे या फिर शरद पवार के नेतृत्व वाले गुट की तरफ लौटेंगे? इसका असर सीधे महाराष्ट्र की सत्ता पर भी पड़ेगा, क्योंकि अजित पवार का गुट एनडीए प्रशासन का अहम हिस्सा था. अजित पवार ने अपने करियर में हमेशा खुद को एक अलग पहचान देने की कोशिश की, खासकर शरद पवार की बड़ी नेतृत्वक छवि से अलग खड़े होने की. अजित पवार उन नेताओं में गिने जाते थे जो हर दौर में सत्ता के समीकरण साधने की क्षमता रखते थे. वे अलग-अलग प्रशासनों में कुल छह बार महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री रह चुके थे. पृथ्वीराज चव्हाण से लेकर