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January 29, 2026

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शादी परफेक्ट नहीं होती, साथ परफेक्ट होता है, 19वीं सालगिरह पर मनीष पॉल का इमोशनल नोट

Maniesh Paul: टीवी और फिल्म इंडस्ट्री के चहेते चेहरे मनीष पॉल के लिए यह दिन बेहद खास है. वजह है उनकी शादी की 19वीं सालगिरह. करीब दो दशकों से मनीष पॉल और उनकी पत्नी संयुक्ता पॉल एक-दूसरे का हाथ थामे जिंदगी की हर चुनौती को साथ मिलकर पार कर रहे हैं. इस खास मौके पर मनीष पॉल ने सोशल मीडिया पर पत्नी के नाम एक भावुक नोट शेयर कर अपने दिल की बात कही है, जिसने फैंस को भी भावुक कर दिया. सोशल मीडिया पर लिखा इमोशनल पोस्ट View this post on Instagram A post shared by Maniesh Paul (@manieshpaul) मनीष पॉल ने अपनी पोस्ट में शादीशुदा जिंदगी की सच्चाई को बेहद सादगी और ईमानदारी से बयां किया. उन्होंने लिखा कि शादी सिर्फ खुशियों का नाम नहीं होती, बल्कि इसमें समझौता, धैर्य, दोस्ती और बिना शर्त साथ निभाने की ताकत भी शामिल होती है. मनीष के शब्दों में वो अपनापन था, जो सीधे दिल तक पहुंचता है. फैंस ने लुटाया प्यार मनीष की इस पोस्ट के सामने आते ही सोशल मीडिया पर बधाइयों की बाढ़ आ गई. फैंस ही नहीं, बल्कि कई सेलेब्स ने भी इस जोड़ी को शादी की सालगिरह पर शुभकामनाएं दीं. लोग इस बात की तारीफ करते नजर आए कि एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री की भागदौड़ भरी जिंदगी के बावजूद मनीष और संयुक्ता ने अपने रिश्ते को मजबूती से संभाल कर रखा. लाइमलाइट से दूर, रिश्ते में भरपूर रोशनी मनीष और संयुक्ता पॉल को हमेशा से ही एक सादगी भरी और बैलेंस्ड पर्सनल लाइफ जीने के लिए जाना जाता है. मनीष कई बार सार्वजनिक मंचों पर यह स्वीकार कर चुके हैं कि उनकी जिंदगी और करियर में संयुक्ता उनका सबसे बड़ा सहारा रही हैं. मुश्किल वक्त हो या सफलता का दौर, संयुक्ता हर कदम पर उनके साथ मजबूती से खड़ी रहीं. प्यार जो वक्त के साथ और गहरा हुआ शादी के 19 साल पूरे करने के साथ मनीष और संयुक्ता की कहानी इस बात की मिसाल है कि सच्चा रिश्ता समय के साथ और मजबूत होता है. जरूरत होती है बस एक-दूसरे को समझने की, साथ निभाने की और हर हाल में भरोसा बनाए रखने की. यही वजह है कि उनकी यह जर्नी आज भी लोगों के लिए प्रेरणा बनी हुई है. यह भी पढ़ें: Arijit Singh: अरिजीत सिंह ने प्लेबैक सिंगिंग से लिया संन्यास, विशाल ददलानी ने कहा- खुलकर जियो The post शादी परफेक्ट नहीं होती, साथ परफेक्ट होता है, 19वीं सालगिरह पर मनीष पॉल का इमोशनल नोट appeared first on Naya Vichar.

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पति ने साली से रचाई दूसरी शादी, टूट गई पत्नी… मासूम बेटी संग खाई जहर, दोनों की मौत

Bihar Crime News: नालंदा जिले से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है. पारिवारिक विवाद ने एक मां और उसकी मासूम बेटी की जान ले ली. पति की बेवफाई और मानसिक प्रताड़ना से टूट चुकी स्त्री ने अपनी छह साल की बच्ची के साथ जहर खा लिया. इलाज के दौरान मां-बेटी दोनों की मौत हो गई. इस घटना से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है. मामला रहुई थाना क्षेत्र के रामपुर गांव का है. मृतका की पहचान 27 वर्षीय मालो देवी के रूप में हुई है. उसकी बेटी का नाम प्रिया कुमारी था. प्रिया की उम्र सिर्फ छह साल थी. मालो देवी मूल रूप से बिहार थाना क्षेत्र के पतुआना गांव की रहने वाली थी. 2016 में हुई थी मालो और पिंटू की शादी परिजनों के मुताबिक मालो देवी की शादी साल 2016 में रामपुर गांव निवासी पिंटू कुमार से हुई थी. शादी के कुछ महीनों बाद ही रिश्ते में दरार आ गई. आरोप है कि पिंटू कुमार का अपनी ही साली से प्रेम हो गया. इस रिश्ते ने पूरे परिवार को झकझोर दिया. 2018 में पिंटू ने की साली से शादी बताया जाता है कि साल 2018 में पिंटू कुमार ने साली से दूसरी शादी भी कर ली. इससे मालो देवी पूरी तरह टूट गई. उसने इस मामले की शिकायत थाने में दर्ज कराई थी. पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरोपी पति को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था. पिंटू के जेल से आने के बाद मालो ने उठाया खौफनाक कदम करीब दो महीने बाद जब पिंटू कुमार जेल से बाहर आया, तो हालात और बिगड़ गए. परिजनों का आरोप है कि पति ने मालो देवी पर लगातार दबाव बनाना शुरू कर दिया. उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाने लगा. इसी तनाव और अवसाद में मालो देवी चली गई. उसके बाद स्त्री ने खौफनाक कदम उठाया. उसने दूध में जहर मिलाया. पहले वही दूध अपनी बेटी को पिला दिया. इसके बाद खुद भी जहर खा लिया. कुछ ही देर में दोनों की हालत बिगड़ गई. इलाज के दौरान मां-बेटी की हुई मौत घटना की जानकारी तब मिली, जब स्त्री के भाई ने रहुई बाजार में एक परिचित को बेहोशी की हालत में देखा. फोन पर सूचना मिलते ही परिवार में हड़कंप मच गया. मां-बेटी को तुरंत मॉडल अस्पताल बिहार शरीफ लाया गया. हालत गंभीर होने पर दोनों को विम्स पावापुरी रेफर किया गया. इलाज के दौरान मां और बेटी दोनों की मौत हो गई. मृतका के पिता ने बिहार थाना में पति समेत पांच लोगों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है. आरोप है कि बेटी को जान से मारने की धमकी दी जाती थी और जबरदस्ती जहर पिलाया गया. रहुई थानाध्यक्ष ललित विजय ने बताया कि शवों का पोस्टमार्टम कराकर परिजनों को सौंप दिया गया है. पुलिस हर पहलू से मामले की जांच कर रही है. Also Read: ‘हमें बेड़ियों में नहीं बांधा जा सकता…’, UGC के नए कानून के खिलाफ पटना में प्रदर्शन, काला झंडा लेकर सड़क पर उतरे लोग The post पति ने साली से रचाई दूसरी शादी, टूट गई पत्नी… मासूम बेटी संग खाई जहर, दोनों की मौत appeared first on Naya Vichar.

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सीएम योगी ने किया सिद्धार्थनगर महोत्सव का शुभारंभ, कहा- उपद्रव से उत्सव की ओर उत्तर प्रदेश

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया सिद्धार्थनगर महोत्सव का शुभारंभ 1052 करोड़ रुपये की 229 परियोजनाओं का किया लोकार्पण और शिलान्यास कहा- उपद्रव से उत्सव की ओर बढ़ चुका है उत्तर प्रदेश CM Yogi: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को पांच दिवसीय सिद्धार्थनगर महोत्सव का भव्य शुभारंभ किया. इस अवसर पर उन्होंने जनपद को 1052 करोड़ रुपये की 229 विकास परियोजनाओं की सौगात देते हुए उनका लोकार्पण एवं शिलान्यास किया. मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश प्रशासन ने 25 करोड़ की आबादी को अपना परिवार मानते हुए बिना किसी भेदभाव के विकास का अभियान आगे बढ़ाया है. मुख्यमंत्री ने कहा कि बीमार मानसिकता वाले लोगों ने पूर्वी उत्तर प्रदेश को लंबे समय तक बीमार बनाए रखा, लेकिन प्रदेश प्रशासन ने दृढ़ संकल्प के साथ इस बीमारी को दूर किया. आज उत्तर प्रदेश उपद्रव से निकलकर उत्सव प्रदेश की ओर बढ़ चुका है. उन्होंने बेसिक शिक्षा परिषद के शिक्षक-शिक्षिकाओं द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना की सराहना करते हुए कहा कि जब बच्चों में ऐसे संस्कार जाएंगे तो वे विकसित हिंदुस्तान की संकल्पना के वाहक बनेंगे. कार्यक्रम के दौरान प्रशासनी योजनाओं के सहयोग से सफलता प्राप्त करने वाली दो स्त्री उद्यमियों ने मंच से अपनी प्रेरक सफलता की कहानी साझा की. प्रशासन बिना भेदभाव दे रही धन, जनप्रतिनिधियों के प्रस्तावों से लागू हो रहीं योजनाएं मुख्यमंत्री ने कहा कि जनप्रतिनिधियों के प्रयासों और प्रस्तावों से जनपद में विकास योजनाएं धरातल पर उतर रही हैं. प्रशासन निमित्त मात्र है, बिना किसी भेदभाव के धन उपलब्ध कराया जा रहा है. उन्होंने नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय और सपा विधायक सैयदा खातून का आयोजन में सहभागिता के लिए आभार व्यक्त किया. सीएम योगी ने कहा कि जीवन हताशा-निराशा के लिए नहीं, बल्कि उत्साह, उमंग और मिल- जुलकर विकास के अभियान को आगे बढ़ाने के लिए है. अच्छी सोच के साथ प्रारंभ किए गए प्रयास सकारात्मक परिणाम देते हैं. बांटकर विकास नहीं कर सकती कोई प्रशासन मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि प्रशासन बांटकर विकास नहीं कर सकती. जाति, मत-मजहब, क्षेत्र और भाषा के आधार पर भेदभाव नहीं, बल्कि समग्र और सतत विकास ही प्रशासन का लक्ष्य है. यही रामराज्य की अवधारणा का साकार रूप है. उन्होंने कहा कि बिना भेदभाव हर गरीब को राशन, शौचालय, प्रधानमंत्री आवास योजना और आयुष्मान कार्ड का लाभ मिल रहा है. प्रशासन की योजनाएं गरीबों, स्त्रीओं, युवाओं और किसानों को केंद्र में रखकर बनाई गई हैं. ‘सबका साथ–सबका विकास’ के मूल मंत्र पर चलते हुए गरीब कल्याणकारी योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू किया गया है. पूर्वी यूपी को बीमारी की ओर धकेलने वालों पर प्रहार सीएम योगी ने कहा कि आठ-दस वर्ष पहले कोई यह कल्पना भी नहीं कर सकता था कि सिद्धार्थनगर में मेडिकल कॉलेज होगा, लेकिन आज माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज संचालित है. नर्सिंग कॉलेज प्रारंभ हो चुका है, स्त्री छात्रावास का शिलान्यास किया गया है और सीएसआर फंड से एक हजार सीटों वाले ऑडिटोरियम का निर्माण भी प्रस्तावित है. उन्होंने कहा कि सिद्धार्थनगर आकांक्षी जनपद इसलिए था क्योंकि यहां विकास नहीं, बल्कि बीमारी और पलायन था. इंसेफेलाइटिस के कारण गरीब, दलित, अल्पसंख्यक और अति पिछड़ी जातियों के शिशु दम तोड़ते थे. ये शिशु किसी जाति या वर्ग के नहीं, बल्कि यूपी की अमानत थे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा से 2017 में प्रदेश प्रशासन ने संकल्प लिया कि एक भी बच्चा इंसेफेलाइटिस से नहीं मरेगा. डबल इंजन प्रशासन के प्रयासों से दशकों पुरानी बीमारी समाप्त हुई और आज कोई बच्चा इस रोग से नहीं मर रहा है. गोरखपुर–शामली इकोनॉमिक कॉरिडोर बनेगा विकास का नया आधार मुख्यमंत्री ने कहा कि सिद्धार्थनगर की कनेक्टिविटी को फोरलेन के माध्यम से सुदृढ़ किया जा रहा है. खलीलाबाद से बहराइच जाने वाली रेल लाइन जनपद से होकर गुजर रही है, जिससे निवेश और रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे. गोरखपुर–शामली इकोनॉमिक कॉरिडोर जनपद की तीन विधानसभा क्षेत्रों—इटवा, डुमरियागंज और बांसी—को जोड़ते हुए विकास का नया कॉरिडोर बनेगा. उन्होंने कपिलवस्तु में विपश्यना केंद्र, डारमेट्री और अन्य विकास कार्यों की भी जानकारी दी. प्रशासन का कार्य कृपा नहीं, कर्तव्य मुख्यमंत्री ने महोत्सव के थीम सांग ‘बुद्धं शरणं गच्छामि’ का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रशासन द्वारा किया गया कार्य किसी पर कृपा नहीं, बल्कि जनता के प्रति कर्तव्य है. जनता ने जो शक्ति दी है, उसका उपयोग बिना भेदभाव जनता-जनार्दन के हित में किया जाना चाहिए. स्त्री उद्यमिता की सराहना मुख्यमंत्री ने मंच पर आईं दोनों स्त्री उद्यमियों को स्त्री उद्यमिता का आदर्श उदाहरण बताया. उन्होंने ओडीओपी और मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत सिद्धार्थनगर के प्रयासों की सराहना करते हुए पुराने तालाबों के पुनरुद्धार की आवश्यकता पर बल दिया. किसानों को वैल्यू एडिशन से लाभ की सलाह सीएम योगी ने किसानों से कहा कि एमएसपी के साथ-साथ वैल्यू एडिशन से कई गुना लाभ संभव है. फूड प्रोसेसिंग से जुड़े प्रस्ताव लाएं, प्रशासन सब्सिडी दे रही है. इस अवसर पर नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय, प्रभारी मंत्री अनिल राजभर, सांसद जगदंबिका पाल सहित जनप्रतिनिधि, अधिकारी और बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे The post सीएम योगी ने किया सिद्धार्थनगर महोत्सव का शुभारंभ, कहा- उपद्रव से उत्सव की ओर उत्तर प्रदेश appeared first on Naya Vichar.

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Mardaani 3: तीसरी बार शिवानी शिवाजी रॉय का किरदार निभाने पर रानी मुखर्जी ने तोड़ी चुप्पी, बोलीं- मेरे लिए बहुत बड़ा सौभाग्य और सम्मान है

Mardaani 3: बॉलीवुड स्टार रानी मुखर्जी एक बार फिर अपनी दमदार पुलिस ऑफिसर शिवानी शिवाजी रॉय के रोल में नजर आने वाली हैं. मर्दानी फ्रेंचाइजी के तीसरे पार्ट ‘मर्दानी 3’ को लेकर फैंस पहले से ही काफी एक्साइटटेड हैं. अब रिलीज से पहले रानी मुखर्जी ने तीसरी बार पुलिस यूनिफॉर्म पहनने के अपने एक्सपीरियंस पर खुलकर बात की है. आइए जानते हैं उन्होंने क्या कहा. रानी मुखर्जी: “बहुत बड़ा सौभाग्य और सम्मान है” अपने पसंदीदा किरदार में वापसी को लेकर अपनी एक्साइटमेंट जाहिर करते हुए, रानी ने बताया कि यूनिफॉर्म में एक स्त्री का किरदार निभाना एक बड़ी जिम्मेदारी है. रानी ने IANS से ​​कहा, “मुझे लगता है कि उनमें से एक, यूनिफॉर्म में एक स्त्री का किरदार निभाना मेरे लिए बहुत बड़ा सौभाग्य और सम्मान है. उनकी जिंदगी के संघर्षों, उनकी कहानियों, रोजमर्रा की जिंदगी में उन्हें जिन चुनौतियों का सामना करना पड़ता है और जिस तरह के अपराधों को वे सुलझाती हैं, मुझे लगता है कि वे असाधारण हैं.” उन्होंने आगे कहा, “इसलिए, शिवानी शिवाजी रॉय के किरदार के जरिए, मैं इसे दुनिया को दिखा सकती हूं कि हिंदुस्तानीय स्त्री अधिकारी दिन-रात क्या कर रही हैं.” स्टार कास्ट और मेकिंग टीम मर्दानी 3 को अभिराज मिनावाला ने डायरेक्ट किया है और आदित्य चोपड़ा इसके प्रोड्यूसर हैं. फिल्म की कहानी आयुष गुप्ता ने लिखी है, जो द रेलवे मेन के लिए जाने जाते हैं. इस बार फिल्म में शैतान फेम जानकी बोडीवाला भी एक अहम भूमिका में नजर आएंगी. कब रिलीज होगी मर्दानी 3? मर्दानी 3 दुनिया भर के सिनेमाघरों में 30 जनवरी को रिलीज होने जा रही है. मर्दानी फ्रेंचाइजी का सफर और कहानी मर्दानी फ्रेंचाइजी का पहला पार्ट साल 2014 में रिलीज हुआ था. इस फिल्म में मानव तस्करी जैसे गंभीर मुद्दे को दिखाया गया था. इसमें रानी मुखर्जी के साथ जिस्सू सेनगुप्ता, ताहिर राज भसीन और अनंत विधात शर्मा नजर आए थे. दूसरा पार्ट 2019 में आया, जिसमें एक सीरियल रेपिस्ट की खतरनाक सोच और उसके अपराधों को दिखाया गया, जो पूरे सिस्टम को चुनौती देता है. इस फिल्म को गोपी पुथरन ने डायरेक्ट किया था और इसमें विशाल जेठवा भी अहम भूमिका में थे. अब मर्दानी 3 में समाज की एक और कड़वी और डरावनी सच्चाई को सामने लाया जाएगा. यह फिल्म भी इस सीरीज की तरह किसी बड़े मुद्दे पर आधारित होगी. यह भी पढ़ें- Mardaani 3 Box Office Preview: ओपनिंग डे कमाई पर सबकी नजरें, जानें डे 1 प्रिडिक्शन, रन टाइम और एडवांस बुकिंग स्टेटस The post Mardaani 3: तीसरी बार शिवानी शिवाजी रॉय का किरदार निभाने पर रानी मुखर्जी ने तोड़ी चुप्पी, बोलीं- मेरे लिए बहुत बड़ा सौभाग्य और सम्मान है appeared first on Naya Vichar.

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यूजीसी का इक्विटी फार्मूला: समाधान या समस्या, पढ़ें मिहिर भोले का आलेख

मिहिर भोले, पूर्व प्रोफेसर, राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान, अहमदाबाद UGC: देश में चल रहे मौजूदा यूजीसी विवाद पर कुछ लिखने से पहले बतौर एक शिक्षक अपनी एक वो बात कहना चाहता हूं, जिसे मैं हमेशा अपने विद्यार्थियों के सामने दुहराता रहा हूं. आमतौर पर किसी के प्रति भेदभावपूर्ण व्यवहार का कारण ईर्ष्या या द्वेष होता है. अमूमन व्यक्ति किसी को अपने से आगे या बेहतर देखना पसंद भी नहीं करता है. लेकिन हर सिद्धांत की तरह इसका भी अपवाद है. व्यक्ति जब अपनी संतान या शिक्षक अपने छात्रों को अपने से आगे निकलता देखता है तो उसे ईर्ष्या की जगह गौरव महसूस होता है. इस हार में उसे अपनी जीत दिखती है. इसका कारण यह है कि दोनों के व्यक्तित्व को गढ़ने और निखारने में उसकी बड़ी भूमिका होती है. परिणामस्वरूप, उनकी उपलब्धियों में उसे कहीं न कहीं अपनी परछाई दिखती है. मेरी तरह ही वे असंख्य शिक्षक, जिन्होंने अपने छात्रों को अपनी संतान की तरह गढ़ा है, चाहे वो जिस भी जाति या समुदाय से आते हों, उनकी भी ऐसी ही भावना होती होगी. एक बड़े क्लासरूम में जब आप कई छात्र-छात्राओं को पढ़ाते हैं या वर्षों तक उनके रिसर्च के गाइड या मेंटर होते हैं तो आपके लिए उनकी सिर्फ एक ही जाति होती है और वो है छात्र की. सामान्यतः छात्र भी आपसे तभी जुड़ते हैं जब वो आपके ज्ञान और कमिटमेंट से प्रभावित होते हैं, न कि आपकी जाति से. अब जरा यूजीसी के नये विनियम लागू होने के बाद की स्थिति की कल्पना करें. बारहवीं पास कर कॉलेज में आया एक छात्र जो स्कूल के अनुशासित माहौल से अलग एक खुले माहौल में नये विषय सीखने, नये प्रयोग करने, नयी दक्षताएं हासिल करने और नये साथी बनाने को उत्साहित हो, उसका सामना यदि इनोवेशन सेंटर की जगह इक्वल ऑपर्च्युनिटी सेंटर और कल्चरल, स्पोर्ट्स कमिटी की जगह इक्विटी कमिटी से होने लगे तो क्या डर के माहौल में उसके व्यक्तित्व का विकास हो सकेगा? क्या वो अपने सहपाठियों, शिक्षकों या कैंपस के अन्य व्यक्तियों के साथ सहज हो सकेगा? कैंपस में घूमते इक्विटी स्क्वॉड के डर, 24×7 हेल्पलाइन जैसी कठोर निगरानी के बीच क्या उसके प्रश्न करने की आदत, क्रिएटिव और क्रिटिकल थिंकिंग जैसी जरूरी मनोवैज्ञानिक क्षमताओं का विकास हो सकेगा जिसे सीखने के बाद वो अपना व ‍‍‍‍समाज का विकास कर सके? इस विनियम का एक बड़ा खतरा शिक्षा की गुणवत्ता और छात्रों के मूल्यांकन पर भी होगा. ‘भेदभाव’ की इसकी व्यापक परिभाषा शिक्षकों के निष्पक्ष मूल्यांकन को प्रभावित कर सकती है. छात्रों द्वारा केवल ‘महसूस’ होने पर शिकायत दर्ज कराने की सुविधा से निम्न अंक या फेल करने जैसे निर्णय भेदभाव के दायरे में आ सकते हैं, जिससे शिक्षक अतिरिक्त सावधानी बरतने को मजबूर होंगे. गलत या दुर्भावनापूर्ण शिकायतों पर स्पष्ट दंड न होने से शिक्षकों में असुरक्षा की भावना बढ़ेगी, जो मूल्यांकन की वस्तुनिष्ठता को कमजोर कर सकती है. यूजीसी तो देश में उच्च शिक्षा के स्तर, मुक्त चिंतन और शोध को मार्गदर्शित और प्रोत्साहित करने वाली संस्था है. देश के जाने-माने अनुभवी शिक्षाविद उससे जुड़े होते हैं. क्या हम उससे किसी ऐसे विनियम की अपेक्षा कर सकते हैं, जिससे भय और शंका का माहौल व्याप्त हो और शिक्षण तथा शोध का मुख्य कार्य ही गौण हो जाये? क्या हम अपने कॉलेज और विश्वविद्यालय परिसरों को एक पुलिस स्टेट में बदलना चाहते हैं, जहां शिक्षक और छात्र दोनों डर के साये में रहने को मजबूर हों? इन सब पर यूजीसी को गंभीरता से सोचने की जरूरत थी, परंतु उसने बहुत जल्दबाजी कर दी. दुर्भाग्यवश आजादी के बाद से ही हमारी उच्च शिक्षण व्यवस्था वर्ग-संघर्ष के नैरेटिव का शिकार हो गयी. साहित्य से लेकर इतिहास, नेतृत्व और समाजशास्त्र ज्यादातर विषयों में हिंदुस्तानीय समाज को सिर्फ शोषक और शोषित वर्गों की बाइनरी में बांटकर इस तरह दिखाया जाने लगा, मानो उसमें जातिगत सौहार्द्र का कोई मॉडल ही ना हो. मनुवाद, ब्राह्मणवाद, पितृवाद, नारीवाद जैसी अनगिनत थ्योरियां गढ़ी जाने लगीं. क्या ये विचार जातिवादी और नस्लवादी नहीं थे? इक्विटी रेगुलेशन बनाने वालों को क्या इनसे कोई खतरा नहीं दिखा? वास्तव में जरूरत शैक्षणिक परिसरों को ‘कास्ट न्यूट्रल’ (जाति निरपेक्ष) बनाने की थी ताकि हमारे शैक्षणिक संस्थान किसी प्रकार के पक्षपात और विद्वेषपूर्ण जातिवादी सोच और नेतृत्व का शिकार ना बन सकें. मुक्त और सौहार्द्रपूर्ण वातावरण में शिक्षण और शोध कार्य के लिए यह आवश्यक था. लेकिन यूजीसी के मौजूदा विनियम में एक वर्ग के छात्रों-शिक्षकों को पहले ही जातिवादी और भेदभावपूर्ण व्यवहार के अपराध का दोषी और दूसरे को उसका शिकार मान लिया जाना उसी शोषक और शोषित नैरेटिव से प्रभावित हैं. ऐसे में जातिवादी व्यवस्था कमजोर होगी या मजबूत इसपर पूर्वाग्रहों से हटकर सबको गंभीरता से सोचना पड़ेगा चाहे वो जिस भी समाज से हो. आश्चर्य है कि हिंदुस्तान के प्रगतिशील समाज में जो कि हर विषय पर अपनी राय रखता है, इस खतरनाक पक्षपातपूर्ण विनियम के विरुद्ध आवाज सिर्फ सामान्य वर्ग से ही उठ रही है. शायद हम एक दूसरे के प्रति अपने पूर्वाग्रह और वैमनस्य से इतने ग्रसित हैं कि सही-गलत पर बात करने से कतराते हैं. यूजीसी का यह नया इक्विटी रेगुलेशन 2026 कहने को तो उच्च शिक्षा संस्थानों में जाति-आधारित भेदभाव को समाप्त करने का दावा करता है, किंतु उससे ज्यादा यह कई गंभीर खतरों को आमंत्रित करता है जिसमें सर्वप्रथम एक वर्ग के छात्रों और शिक्षकों पर अनुचित आरोप लगने का भय है. इसके अलावा प्रत्येक संस्थान में अनिवार्य इक्विटी समितियों और ईओसी की स्थापना प्रशासनिक बोझ बढ़ायेगी, जो गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर ध्यान केंद्रित करने के स्थान पर शिकायत-जांच तंत्र में उलझ जाएंगे. गैर-अनुपालन पर कठोर दंड जैसे यूजीसी योजनाओं से वंचन या मान्यता रद्द करना छोटे संस्थानों को वित्तीय संकट में धकेल सकता है. व्यापक निगरानी और रिपोर्टिंग से अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता सीमित हो सकती है, जिससे शैक्षणिक वातावरण में विभाजनकारी नेतृत्व फले-फूलेगी. ये सारे प्रावधान समावेशिता के नाम पर असमानता को बल प्रदान करते हैं. वर्तमान प्रशासन सबका साथ, सबका विकास के समावेशी विचार में यकीन करती है. एक का विकास दूसरे के विनाश का कारण न बने यह सुनिश्चित करना सबसे जरूरी है. यह एक संवेदनशील मुद्दा है और जरूरत एक कास्ट-न्यूट्रल विनियम बनाने की है जिसका दुरुपयोग कोई किसी के प्रति न कर सके. उम्मीद है

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श्री पंचदेव धाम चपरा के नौवं अवतरण महोत्सव पर पांच दिवसीय अनुष्ठान शुरू

हवनात्मक श्री महामृत्युंजय महायज्ञ के साथ अखंड हरि कीर्तन होंगे विशेष आध्यात्मिक आकर्षण अंबा. श्री पंचदेव धाम चपरा के नौवें स्थापना दिवस पर पांच दिवसीय अवतरण महोत्सव पर विशेष धार्मिक अनुष्ठान किया जा रहा है. जलभरी के साथ हवनात्मक श्री महामृत्युंजय महायज्ञ की शुरुआत की गयी. धाम के संस्थापक अशोक कुमार सिंह, उनकी पत्नी चंचला देवी, धाम के सचिव ई सुबोध कुमार सिंह तथा उनकी पत्नी व जिला पर्षद उपाध्यक्ष किरण सिंह, संजय कुमार सिंह आदि ने धाम परिसर स्थित शिव गंगा तालाब से जलभरी की. इस दौरान वाराणसी के आचार्य मथुरा प्रसाद शुक्ल के नेतृत्व में आचार्यों द्वारा मंत्रोच्चार के साथ विधिवत गंगा पूजन किया गया. कलश में जल भरकर श्री श्री सूर्य नारायण परिक्षेत्र यज्ञशाला मंडप में कलश स्थापित किया. इसके साथ ही मंडप प्रवेश, देवताओं का पूजन एवं अरणीमंथन किया गया. धाम के सचिव ने बताया कि धाम के नौवें प्राकट्य दिवस पर पांच दिवसीय अनुष्ठान किया जा रहा है. यह अनुष्ठान निरंतर एक फरवरी तक चलता रहेगा. गुरुवार को वेद पाठ देव पूजन हवन एवं आरती की गयी. महायज्ञ संपन्न होने के उपरांत भंडारा का आयोजन किया जायेगा. विदित है कि 9वां प्राकट्य दिवस पर एक वर्ष तक अखंड कीर्तन का आयोजन किया जा रहा है. इसका शुभारंभ मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष प्रतिपदा 21 नवंबर 2025 को किया गया है. एक वर्ष तक लगातार अखंड कीर्तन हरि कीर्तन के उपरांत 2026 के मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष प्रतिपदा 10 दिसंबर को पूर्णाहुति होगी. अखंड कीर्तन में धाम समिति के सदस्यों के अलावा सुप्रसिद्ध सिकंदर व्यास एवं उनकी कलाकारों की टीम सहभागिता निभा रहे हैं. The post श्री पंचदेव धाम चपरा के नौवं अवतरण महोत्सव पर पांच दिवसीय अनुष्ठान शुरू appeared first on Naya Vichar.

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फाइलेरिया को मात दे दूसरों के लिए मिसाल बनीं किशनगंज की तारा देवी

संघर्ष से सफलता की कहानी : सामाजिक दंश को पीछे छोड़ अब ग्रामीणों को जांच के लिए कर रहीं जागरूक किशनगंज. जिले के ठाकुरगंज प्रखंड अंतर्गत भातगांव पंचायत के प्रशासन पट्टी गांव की तारा देवी आज उन तमाम लोगों के लिए उम्मीद की किरण हैं, जो फाइलेरिया (हाथीपांव) जैसी गंभीर बीमारी के कारण समाज से कट जाते हैं. वर्षों तक शारीरिक पीड़ा व सामाजिक उपेक्षा झेलने वाली तारा देवी ने न केवल इस बीमारी पर नियंत्रण पाया, बल्कि अब वे अन्य ग्रामीणों को भी जागरूक कर रही हैं. थकान समझ कर की थी अनदेखी तारा देवी के पति कैलाश राय एक साधारण गृहस्थ हैं. शुरुआती दिनों में जब तारा देवी के पैरों में सूजन व दर्द शुरू हुआ, तो उन्होंने इसे सामान्य थकान समझकर नजरअंदाज कर दिया. स्थिति बिगड़ने पर कई घरेलू उपचार किए गए, लेकिन समस्या जस की तस रही. धीरे-धीरे बीमारी ने उन्हें शारीरिक रूप से लाचार कर दिया, जिससे उनका मानसिक और सामाजिक संघर्ष भी बढ़ता चला गया. बीमारी से ज्यादा गहरा था सामाजिक दंश अपने पुराने दिनों को याद करते हुए तारा देवी भावुक हो जाती हैं. उन्होंने बताया, “शारीरिक पीड़ा को सहन करना तो आसान था, लेकिन मानसिक और सामाजिक दर्द अधिक गहरा था. बीमारी के कारण लोग मुझसे दूर रहने लगे थे. मेरा आत्मविश्वास पूरी तरह टूट चुका था. मुझे लगने लगा था कि मैं परिवार पर बोझ हूं, और कई रातें मैं चुपचाप रोती रही. “ आयुष्मान आरोग्य मंदिर ने दी नयी राह तारा देवी के जीवन में बदलाव तब आया जब वे आयुष्मान आरोग्य मंदिर के संपर्क में आयीं. वहां मौजूद स्वास्थ्य कर्मियों ने उन्हें समझाया कि यद्यपि यह बीमारी पूरी तरह ठीक नहीं हो सकती, लेकिन नियमित देखभाल और दवाइयों के सेवन से इसे नियंत्रित जरूर किया जा सकता है. सही परामर्श और देखभाल ने उनका आत्मविश्वास लौटाया और स्वास्थ्य में सुधार होने लगा. नाइट ब्लड सर्वे में निभायी अहम भूमिका पिछले वर्ष दिसंबर में ठाकुरगंज प्रखंड में आयोजित नाइट ब्लड सर्वे (एनबीएस) के दौरान तारा देवी ने एक योद्धा की भूमिका निभायी. उन्होंने ग्रामीणों को घर-घर जाकर समझाया कि जांच बेहद जरूरी है और इससे डरने की कोई बात नहीं है. उनके अपने अनुभवों ने लोगों के मन से डर निकाला और कई परिवारों ने स्वेच्छा से जांच करवायी. स्वास्थ्य विभाग ने सराहा जज्बा सिविल सर्जन डॉ राज कुमार चौधरी और वेक्टर बॉर्न डिजीज कंट्रोल ऑफिसर डॉ मंजर आलम ने तारा देवी की इस पहल की सराहना की है. अधिकारियों का कहना है कि फाइलेरिया नियंत्रण में सामुदायिक सहभागिता सबसे महत्वपूर्ण है. तारा देवी ने अपनी कहानी से यह संदेश दिया है कि समय पर दवा के सेवन और सामूहिक सहयोग से इस बीमारी को जड़ से मिटाया जा सकता है, ताकि यह अगली पीढ़ी तक न पहुंचे. The post फाइलेरिया को मात दे दूसरों के लिए मिसाल बनीं किशनगंज की तारा देवी appeared first on Naya Vichar.

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यातायात पुलिस का कारनामा : नंबर किसी और का, जुर्माना किसी और पर कर दिया अधिरोपित

प्रदूषण बनाने गये तो बाइक धारक को चला पता तो हो गये परेशान मुंगेर यातायात पुलिस का कारनाम इन दिनों काफी चर्चा में है. क्योंकि जिस बाइक के नंबर प्लेट का फोटो खींचा उस रजिस्ट्रेशन नंबर पर नहीं, बल्कि दूसरे के मोटर साइकिल के रजिस्ट्रेशन नंबर पर जुर्माना अधिरोपित कर दिया. इसका खुलासा तब हुआ, जब मोटर साइकिल का प्रदूषण बनाने के लिए अधिकृत फिटनेश सेंटर पर गया. जिसके बाद बाइक मालिक काफी परेशान है. बताया कि कासिम बाजार थाना क्षेत्र के निर्दोष काली मंदिर कासिम बाजार निवासी मनीष कुमार अपने ग्लेमर मोटर साइकिल जिसका रजिस्ट्रेशन संख्या बीआर08जे-7034 को लेकर राज फिटनेस सेंटर सफियाबाद गया. जब वाहन का प्रदूषण बनाने की कार्रवाई शुरू हुई तो उस बाइक पर जुर्माना की राशि लंबित रहने की बात सामने आई. जिसके कारण उनके मोटर साइकिल का फिटनेस नहीं बना. जबकि न तो उसके मोबाइल पर कभी जुर्माने से संबंधित मैसेज आया और न ही वह कभी भी पकड़ा गया. यातायात व परिवहन विभाग का चक्कर लगाने के बाद उसने ऑन लाइन माध्यम से अपने बाइक पर अधिरोपित जुर्माना से संबंधित कागजात निकाला. जिसमें पता चला कि यातायात पुलिस ने जिस बाइक के नंबर प्लेट पर अंकित रजिस्ट्रेशन का फोटो खींच कर जुर्माना अधिरोपित करना था उस बाइक का रजिस्ट्रेशन नंबर बीआर08जे-7033 है. लेकिन रजिस्ट्रेशन नंबर बीआर08जे-7034 पर जुर्माना अधिरोपित कर दिया. जिसके कारण वह तनाव में आ गया. उसने अधिकारियों से मिलने का प्रयास किया. लेकिन उसकी मुलाकात नहीं हो सकी. मनीष ने बताया कि उसका प्रदूषण नहीं बन पा रहा है. The post यातायात पुलिस का कारनामा : नंबर किसी और का, जुर्माना किसी और पर कर दिया अधिरोपित appeared first on Naya Vichar.

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सप्ताहिक जांच व क्विज परीक्षा के सफल बच्चों को डीएम ने किया सम्मानित

पूर्ण तन्मयता से पढ़ने के लिए किया प्रोत्साहित सहरसा. बिहार शिक्षा परियोजना के तहत कक्षा छह से कक्षा 12 तक के बच्चों का साप्ताहिक जांच परीक्षा व क्विज परीक्षा को लेकर जिला स्कूल सभागार में गुरुवार को जिलास्तरीय क्विज प्रतियोगिता आयोजित की गयी. जिसमें उत्कृष्ट प्रदर्शन कर प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को जिलाधिकारी दीपेश कुमार ने प्रशस्ति पत्र व पारितोषिक पाठ्य सामग्री प्रदान की. प्रशासनी विद्यालयों की शैक्षणिक व्यवस्था में गुणात्मक सुधार को लेकर निरंतर जारी प्रयासों के तहत जिलाधिकारी के निदेशानुसार कक्षा छह से कक्षा 12 तक साप्ताहिक जांच परीक्षा व क्विज परीक्षा की शुरुआत की गयी है. साथ ही जांच परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों की पुरस्कृत करने की व्यवस्था की गयी है. जिलाधिकारी ने इस दौरान सभी विद्यार्थियों के उज्जवल भविष्य की कामना की व उनको पूर्ण तन्मयता से पढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया. मौके पर जिला शिक्षा पदाधिकारी हेमचंद्र, एडीपीसी, संभाग प्रभारी बालकृष्ण कश्यप, शिक्षक आनंद कुमार झा सहित अन्य मौजूद थे. The post सप्ताहिक जांच व क्विज परीक्षा के सफल बच्चों को डीएम ने किया सम्मानित appeared first on Naya Vichar.

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नीम के पेड़ को लेकर खूनी संघर्ष, आधा दर्जन से अधिक घायल

गोरगामा गांव में दो पक्षों में हिंसक झड़प सलखुआ . प्रखंड क्षेत्र के मुबारकपुर पंचायत अंतर्गत गोरगामा गांव में नीम के पेड़ को लेकर उपजे विवाद ने गुरुवार को हिंसक रूप ले लिया. दो पक्षों के बीच हुई जबरदस्त झड़प में आधा दर्जन से अधिक लोग घायल हो गये. सभी घायलों का इलाज सलखुआ अस्पताल में चल रहा है, जहां कुछ की हालत गंभीर बताई जा रही है. एक पक्ष के अभिषेक कुमार यादव ने आरोप लगाया कि नीम का पेड़ काटने के दौरान उनके पट्टीदार कौशल कुमार, राय यादव सहित अन्य लोग हरवे-हथियार से लैस होकर पहुंचे और अचानक हमला कर दिया. लोहे की रॉड और कुदाल से किए गए हमले में विनय कुमार, अभय कुमार और अभिषेक कुमार गंभीर रूप से घायल हो गये. वहीं दूसरे पक्ष के कौशल कुमार ने बताया कि विवाद पेड़ नहीं बल्कि रास्ते को लेकर था. उनका आरोप है कि अभिषेक कुमार, विनय सहित अन्य लोगों ने अचानक हमला बोल दिया, जिससे राय यादव, नूतन कुमारी और पूजा कुमारी बुरी तरह घायल हो गये. इस घटना में राय यादव और नूतन कुमारी के सिर व चेहरे पर गंभीर चोटें आयी हैं. घटना के बाद गांव में तनाव का माहौल बना हुआ है. दोनों पक्षों ने सलखुआ थाना में आवेदन देकर एक-दूसरे के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है. मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने जांच शुरू कर दी है. और घायलों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं. पुलिस का कहना है कि जांच के बाद दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जायेगी. The post नीम के पेड़ को लेकर खूनी संघर्ष, आधा दर्जन से अधिक घायल appeared first on Naya Vichar.

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