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March 4, 2026

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फिन एलेन का तूफानी शतक, दक्षिण अफ्रीका को हराकर न्यूजीलैंड फाइनल में

Table of Contents एलेन ने टी20 वर्ल्ड कप का सबसे तेज शतक जमाया सबसे तेज T20I शतक (गेंदों के अनुसार) ईडन गार्डंस पर होली के दिन बल्ले से आतिशबाजी एलेन और सीफर्ट ने पावरप्ले 84 रन बनाया T20 World Cup 2026: पहले सेमीफाइनल में बुधवार को दक्षिण अफ्रीका ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 8 विकेट पर 169 रन का स्कोर बनाया. जिसके जवाब में न्यूजीलैंड ने केवल एक विकेट खोकर 12.5 ओवर में 173 रन बनाकर मुकाबला अपने नाम कर लिया. एलेन ने टी20 वर्ल्ड कप का सबसे तेज शतक जमाया एलेन ने टी20 वर्ल्ड कप का सबसे तेज शतक जमाया. अपनी पारी में एलेन ने केवल 33 गेंदों का सामना किया, जिसमें 10 चौके और आठ छक्के लगाए. जबकि टी20 अंतरराष्ट्रीय में एलेन के नाम तीसरा सबसे तेज शतक का रिकॉर्ड दर्ज हो गया है. सबसे तेज T20I शतक (गेंदों के अनुसार) 27 – साहिल चौहान (एस्टोनिया) बनाम साइप्रस, एपिस्कोपी, 202429 – मुहम्मद फहद (तुर्की) बनाम बुल्गारिया, सोफिया, 202533 – फिन एलन (NZ) बनाम दक्षिण अफ्रीका, कोलकाता, 202633 – जान निकोल लॉफ्टी-ईटन (NAM) बनाम NEP, कीर्तिपुर, 202433 – सिकंदर रजा (ZIM) बनाम गाम्बिया, नैरोबी, 2024 ईडन गार्डंस पर होली के दिन बल्ले से आतिशबाजी टी20 विश्व कप के सबसे तेज शतक में ईडन गार्डंस पर होली के दिन बल्ले से आतिशबाजी देखने को मिली. दक्षिण अफ्रीका के लिये अर्धशतक बनाने वाले मार्को यानसेन ने 2.5 ओवर में 53 रन दे डाले. मिचेल सेंटनेर की कप्तानी वाली कीवी टीम ने बेहतरीन स्पिन गेंदबाजी का नमूना पेश करते हुए दक्षिण अफ्रीका को आठ विकेट पर 169 रन पर रोक दिया. आफ स्पिनर कोल मैकोंची ( एक ओवर में नौ रन देकर दो विकेट ) और बायें हाथ के स्पिनर रचिन रविंद्र (चार ओवर में 29 रन देकर दो विकेट ) ने कहर बरपाती हुई गेंदबाजी करके दक्षिण अफ्रीका के शीर्ष क्रम को झकझोर दिया. जवाब में एलेन और टिम सीफर्ट ( 33 गेंद में 58 रन ) ने नौ ओवर में 117 रन की साझेदारी करके न्यूजीलैंड को 2021 के बाद दूसरी बार फाइनल में पहुंचाया. एलेन और सीफर्ट ने पावरप्ले 84 रन बनाया एलेन और सीफर्ट ने पावरप्ले के छह ओवरों में 84 रन बना डाले. एलेन ने 19 गेंद में पहला पचासा और 14 गेंद में दूसरा पूरा किया. इससे पहले यानसेन के 30 गेंद में नाबाद 55 रन की मदद से दक्षिण अफ्रीका ने शुरुआती झटकों से उबरते हुए आठ विकेट पर 169 रन बनाये. दक्षिण अफ्रीका ने 11वें ओवर में पांच विकेट 77 रन पर गंवा दिये थे. इसके बाद यानसेन और ट्रिस्टन स्टब्स ( 24 गेंद में 29 रन ) ने पारी को संभाला. दोनों ने छठे विकेट के लिये 73 रन जोड़े. The post फिन एलेन का तूफानी शतक, दक्षिण अफ्रीका को हराकर न्यूजीलैंड फाइनल में appeared first on Naya Vichar.

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ममता बनर्जी और भाईपो डरे हुए हैं, आगे-आगे देखिए होता है क्या…, बोले केंद्रीय मंत्री डॉ सुकांत मजूमदार

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले तृणमूल कांग्रेस के 2 बड़े नेताओं ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी पर हमले तेज हो गये हैं. केंद्रीय मंत्री और हिंदुस्तानीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता डॉ सुकांत मजूमदार ने दावा किया है कि वेस्ट बंगाल की चीफ मिनिस्टर ममता बनर्जी और उनके भतीजे (भाईपो) अभिषेक बनर्जी डरे हुए हैं. अभी धरना से लकर कई और चीजें होंगी. अभी बहुत सी कहानियां बाकी हैं. आगे-आगे देखिये, होता है क्या. प्रशासन ने अधिकारी नहीं दिये, तो पड़ोसी राज्यों से मंगाना पड़ा पत्रकारों के एक सवाल के जवाब में बुधवार को डॉ सुकांत मजूमदार ने कहा कि पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी प्रशासन ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के लिए पर्याप्त संख्या में वरिष्ठ अधिकारी उपलब्ध नहीं कराये. इसकी वजह से सुप्रीम कोर्ट को यह आदेश देना पड़ा कि पड़ोसी राज्यों के लीगल ऑफिसर्स की मदद से एसआईआर की प्रक्रिया पूरी करें. कलकत्ता हाईकोर्ट ने उसी आदेश के अनुरूप पड़ोसी राज्यों से लीगल ऑफिसर्स की मांग की है. बंगाल की समाचारें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें धरना से लेकर बहुत कुछ होने वाला है बंगाल में यह पूछने पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी 6 मार्च को कोलकाता में चुनाव आयोग के खिलाफ धरना देने वाली हैं, डॉ सुकांत मजूमदार ने कहा कि अभी धरना से लेकर बहुत कुछ होने वाला है. बहुत-सी कहानियां बाकी हैं. पश्चिम बंगाल के पूर्व प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सुकांत मजूमदार ने कहा कि इस बार तृणमूल कांग्रेस का कोई दांव नहीं चलेगा. राज्य में हिंदुस्तानीय जनता पार्टी की पूर्ण बहुमत की प्रशासन बनेगी. इसे भी पढ़ें मानस भुइयां पर भड़के सुकांत मजूमदार, बोले- शिक्षक और छात्रों को धमकाना निंदनीय 2021 में ‘कच्चू’ मिला, 2026 में ‘घेंचू’ मिलेगा, अमित शाह के आरोपों से भड़कीं ममता बनर्जी का तीखा वार बंगाल चुनाव 2026: दीवाल पर भाजपा का चुनाव प्रचार शुरू, सुकांत मजूमदार ने की पेंटिंग 72 घंटे में माफी मांगें, सुकांत मजूमदार को बंगाल के पूर्व डीजीपी राजीव कुमार का अल्टीमेटम The post ममता बनर्जी और भाईपो डरे हुए हैं, आगे-आगे देखिए होता है क्या…, बोले केंद्रीय मंत्री डॉ सुकांत मजूमदार appeared first on Naya Vichar.

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गुझिया और भारी लंच के बाद हो रही है एसिडिटी? तुरंत राहत देगी यह देसी ड्रिंक

Holi Detox Drinks: होली पर गुझिया, पकौड़े और पूरियों पर हाथ साफ करने के बाद अब असली आफत पेट के साथ शुरू होती है. भारी लंच और मीठे के ओवरडोज की वजह से आधे से ज्यादा लोग इस वक्त खट्टी डकारें, पेट फूलने और सीने में जलन से परेशान हैं. होली की मस्ती में हम खा तो लेते हैं, लेकिन दोपहर होते-होते शरीर सुस्त पड़ने लगता है और भारीपन महसूस होता है. अगर आप भी सोफे पर लेटे हुए बस यही सोच रहे हैं कि यह भारीपन कैसे खत्म हो, तो घबराएं नहीं. हम आपको बताने जा रहे हैं एक ऐसी देसी डिटॉक्स ड्रिंक, जो आपकी रसोई में मौजूद चीजों से 2 मिनट में तैयार हो जाएगी और पीते ही आपके पेट को बर्फ जैसी ठंडक देगी. चलिए जानते हैं इसे बनाने का सबसे आसान तरीका. Holi Detox Drinks: पेट की जलन और भारीपन मिटाने वाली 3 जादुई ड्रिंक्स अदरक और पुदीने का पानी एक गिलास गुनगुने पानी में आधा चम्मच अदरक का रस और 4-5 पिसी हुई पुदीने की पत्तियां मिलाएं. इसमें थोड़ा सा काला नमक डालकर पिएं. अदरक पाचन को तेज करता है और पुदीना पेट की जलन को तुरंत शांत कर देता. जीरा-अजवाइन का काढ़ा अगर पेट फूलने (Bloating) की समस्या हो रही है, तो एक चम्मच जीरा और आधा चम्मच अजवाइन को एक गिलास पानी में उबालें. जब पानी आधा रह जाए, तो इसे छानकर हल्का गुनगुना पिएं. यह ड्रिंक भारी खाने को मिनटों में पचाने की ताकत रखती है. ठंडा सौंफ और मिश्री का शरबत अगर गुझिया खाने के बाद सीने में जलन हो रही है, तो सौंफ को पीसकर उसमें थोड़ी मिश्री मिलाकर ठंडे पानी के साथ पिएं. यह पेट को तुरंत ठंडक पहुंचाता है और मीठे की वजह से होने वाली एसिडिटी को खत्म करता है. अगले कुछ घंटों के लिए जरूरी टिप्स पानी खूब पिएं: शरीर से टॉक्सिन्स (गंदगी) बाहर निकालने के लिए सादा पानी या नारियल पानी पीते रहें. तुरंत न सोएं: लंच के बाद तुरंत बिस्तर पर न लेटें, कम से कम 10-15 मिनट घर के अंदर ही चहल-कदमी करें. हल्का डिनर: अगर दोपहर में भारी खाया है, तो रात का खाना एकदम हल्का रखें जैसे मूंग दाल की खिचड़ी या सिर्फ सूप. यह भी पढ़ें: Holi 2026: भांग वाली ठंडाई पीते समय रखें इन बातों का ध्यान, नहीं तो बिगड़ सकती है तबीयत Disclaimer: यह आर्टिकल सामान्य जानकारियों और मान्यताओं पर आधारित है. नया विचार इसकी पुष्टि नहीं करता है. The post गुझिया और भारी लंच के बाद हो रही है एसिडिटी? तुरंत राहत देगी यह देसी ड्रिंक appeared first on Naya Vichar.

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31 मार्च 2026 से पहले निपटा लें ये काम, वरना बंद हो जाएगा आपका PPF और सुकन्या समृद्धि खाता

Sukanya Samriddhi Yojana: अगर आपने पब्लिक प्रॉविडेंट फंड (PPF) या सुकन्या समृद्धि योजना (SSY) में निवेश किया है, तो यह समय आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है. चालू वित्त वर्ष (2025-26) खत्म होने में अब कुछ ही समय बचा है. यदि आपने इस साल अपने इन खातों में न्यूनतम राशि जमा नहीं की है, तो 31 मार्च 2026 तक इसे जरूर पूरा कर लें. खाता इनएक्टिव होने का खतरा नियमों के अनुसार, इन प्रशासनी योजनाओं में हर साल एक निश्चित न्यूनतम राशि निवेश करना अनिवार्य होता है. यदि आप ऐसा नहीं करते हैं, तो आपका खाता ‘इनएक्टिव’ (बंद) हो सकता है. बंद खाते को दोबारा चालू करवाने के लिए आपको न केवल बकाया राशि जमा करनी होगी, बल्कि जुर्माना भी भरना पड़ेगा. कितना पैसा जमा करना है जरूरी ? विभिन्न योजनाओं के लिए न्यूनतम निवेश की सीमा अलग-अलग है. योजना का नाम न्यूनतम सालाना निवेश जुर्माना (डिफ़ॉल्ट पर) वर्तमान ब्याज दर PPF (पब्लिक प्रोविडेंट फंड) ₹500 ₹50 प्रति वर्ष 7.1% SSY (सुकन्या समृद्धि योजना) ₹250 ₹50 प्रति वर्ष 8.2% टैक्स बचाने का शानदार मौका इन दोनों योजनाओं में निवेश करने का सबसे बड़ा फायदा आयकर (Income Tax) में मिलने वाली छूट है. सेक्शन 80C का लाभ: आप इन स्कीम्स में निवेश करके इनकम टैक्स एक्ट की धारा 80C के तहत ₹1.5 लाख तक की टैक्स कटौती का दावा कर सकते हैं. टैक्स फ्री इनकम: आसान शब्दों में कहें तो, आप अपनी कुल सालाना कर योग्य आय (Taxable Income) में से ₹1.5 लाख तक की राशि घटा सकते हैं, जिससे आपकी टैक्स देनदारी कम हो जाएगी. सावधानी ही समझदारी है अंतिम तिथि यानी 31 मार्च 2026 का इंतजार न करें, क्योंकि आखिरी दिनों में तकनीकी दिक्कतों या बैंक की छुट्टियों की वजह से देरी हो सकती है. समय रहते निवेश करें ताकि आपका फंड सुरक्षित रहे और ब्याज का लाभ मिलता रहे. Also Read: अब गधे बनाएंगे आपको करोड़पति ! प्रशासन दे रही है ₹50 लाख की भारी सब्सिडी The post 31 मार्च 2026 से पहले निपटा लें ये काम, वरना बंद हो जाएगा आपका PPF और सुकन्या समृद्धि खाता appeared first on Naya Vichar.

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2021 में ‘कच्चू’ मिला, 2026 में ‘घेंचू’ मिलेगा, अमित शाह के आरोपों से भड़कीं ममता बनर्जी का तीखा वार

West Bengal Politics: पश्चिम बंगाल में 2026 विधानसभा चुनाव की औपचारिक घोषणा बाकी है, लेकिन सियासी जंग तेज हो गयी है. राजधानी कोलकाता से करीब 180 किलोमीटर दूर बांकुड़ा जिले से वेस्ट बंगाल की चीफ मिनिस्टर ममता बनर्जी ने देश के गृह मंत्री पर तीखा वार किया. अमित शाह और भाजपा पर निशाना साधने के लिए दीदी ने जिन 2 शब्दों का चयन किया, लोग उसका मतलब तलाशने लगे. तृणमूल कांग्रेस की सुप्रीमो ने खुद पूछा कि इसको अंग्रेजी में क्या कहते हैं. बांकुड़ा के बरजोड़ा से ममता बनर्जी ने किया पलटवार ममता बनर्जी ने बांकुड़ा के बरजोड़ा में जिन शब्दों का इस्तेमाल किया, वे हैं- कच्चू और घेंचू. ममता बनर्जी ने कहा कि 2021 में ‘कच्चू’ मिला, 2026 में ‘घेंचू’ मिलेगा. इससे पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को कोलकाता के सॉल्ट लेक स्थित भाजपा कार्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया. उन्होंने तृणमूल कांग्रेस प्रशासन पर घुसपैठ, भ्रष्टाचार, तुष्टीकरण और विकास परियोजनाओं में बाधा डालने जैसे आरोप लगाये. सीमा सुरक्षा से लेकर चिटफंड घोटाला और पशु तस्करी तक के आरोप लगाये. उन्होंने कहा कि इस बार बंगाल में दो तिहाई बहुमत के साथ भाजपा की प्रशासन बनेगी. अमित शाह को दिलायी ‘अबकी बार 200 पार’ के नारे की याद अमित शाह के प्रेस कॉन्फ्रेंस के खत्म होने के बाद बांकुड़ा जिले में एक रैली को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने गृह मंत्री पर पलटवार किया. एक-एक बिंदु पर शाह को जवाब दिया. इसी रैली में ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (AITC) की सबसे बड़ी नेता ने 2021 में भाजपा के नारे ‘अबकी बार 200 पार’ की याद दिलायी. कहा- पिछली बार आपको कच्चू मिला था, इस बार घेंचू मिलेगा. ‘कच्चू’ और ‘घेंचू’ शब्दों के जरिये उन्होंने भाजपा की दावेदारी का मजाक उड़ाया. उन्होंने हल्के अंदाज में पूछा- घेंचू का अंग्रेजी क्या होगा? बंगाल की समाचारें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें हमारे लोग भ्रष्ट हैं, तो कार्रवाई कीजिए – ममता बनर्जी अमित शाह ने तृणमूल पर तुष्टीकरण की नेतृत्व का आरोप लगाया, तो ममता बनर्जी ने कहा- अगर हमारे लोग भ्रष्ट हैं, तो कार्रवाई कीजिए. बंगाल की चीफ मिनिस्टर ने भाजपा पर भी अपने नेताओं को बचाने के आरोप लगाये. साथ ही वंशवाद के मुद्दे पर भी सवाल उठाया. दोनों नेताओं के बीच शब्दयुद्ध इस बात का संकेत है कि बंगाल चुनाव 2026 की लड़ाई अब मुद्दों के साथ-साथ भाषा और प्रतीकों की भी होगी. इसे भी पढ़ें राहुल सिन्हा का ममता बनर्जी पर हमला, टीएमसी के 4 राज्यसभा उम्मीदवारों में 50 प्रतिशत बंगाली नहीं बंगाल में CAA का काम होगा तेज, अमित शाह ने गठित की दो और समिति अभिषेक बनर्जी के गढ़ में गरजे अमित शाह- टीएमसी ने बंगाल को घुसपैठियों का स्वर्ग बना दिया अमित शाह का ‘परिवर्तन पैकेज’: 45 दिन में DA, 7वां वेतन आयोग और प्रशासनी नौकरी, ममता बनर्जी प्रशासन पर सीधा हमला The post 2021 में ‘कच्चू’ मिला, 2026 में ‘घेंचू’ मिलेगा, अमित शाह के आरोपों से भड़कीं ममता बनर्जी का तीखा वार appeared first on Naya Vichar.

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इजरायली अटैक में ईरान का मुगल काल से संबंधित पैलेस भी क्षतिग्रस्त, भारत से लूटा माल रखा गया था

Iran Golestan Palace Peacock Throne: इजरायल-अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध में जान-माल के नुकसान के साथ-साथ विश्व धरोहर स्थलों को भी नुकसान पहुंचने की समाचारें सामने आ रही हैं. UNESCO ने जानकारी दी है कि ईरान की राजधानी तेहरान में स्थित विश्व धरोहर स्थल गोलिस्तान पैलेस को पास में हुए हवाई हमले के कारण नुकसान पहुंचा है. यूनेस्को के अनुसार, अरग स्क्वायर के आसपास हुए हमले के बाद उठे मलबे और धमाके की तीव्र तरंगों से महल के कुछ हिस्से प्रभावित हुए. गोलिस्तान पैलेस (गुलाबों का महल) का हिंदुस्तान से भी ऐतिहासिक संबंध जुड़ा है. महल के सलाम हॉल में कभी प्रसिद्ध मयूर सिंहासन रखा गया था. यूनेस्को ने बयान जारी कर कहा कि वह ईरान और पूरे क्षेत्र में सांस्कृतिक धरोहरों की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है, ताकि उनके संरक्षण के लिए जरूरी कदम उठाए जा सकें. रिपोर्टों के मुताबिक, हालिया अमेरिकी और इजरायली हमलों के बाद इस ऐतिहासिक परिसर को क्षति पहुंचने की सूचना मिली. ईरान के सांस्कृतिक विरासत मंत्री सैयद रेज़ा सालेही अमीरी ने मौके का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया. वहीं विशेषज्ञ टीमों द्वारा नुकसान का आकलन किया जा रहा है. यह महल 1954 के हेग कन्वेंशन के तहत संरक्षित सांस्कृतिक संपत्ति की श्रेणी में आता है, जो सशस्त्र संघर्ष के दौरान विरासत स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित करता है. UNESCO expresses concern over the protection of cultural heritage sites amidst escalating violence in the Middle East. On Monday 2 march, the Golestan Palace in Tehran, a UNESCO World Heritage site, was reportedly damaged by debris and the shock wave following an airstrike to… pic.twitter.com/qhux4x8ZAE — UNESCO 🏛️ #Education #Sciences #Culture 🇺🇳 (@UNESCO) March 2, 2026 The historic Golestan Palace in Tehran was damaged in recent attacks. “As a result of a joint attack by the US and Israel on Sunday evening in southern Tehran, some parts of the Golestan Palace were damaged,” reported the ISNA news agency, adding that the explosions damaged… pic.twitter.com/oRZXaPntMW — Thinkers Page (@ThinkersPage) March 3, 2026 गोलिस्तान पैलेस का इतिहास यूनेस्को के विवरण के अनुसार, गोलिस्तान पैलेस काजार काल की एक उत्कृष्ट वास्तु कृति है, जिसमें पारंपरिक फारसी कला और शिल्प का पश्चिमी स्थापत्य प्रभावों के साथ अनोखा संगम दिखाई देता है. तेहरान की प्राचीनतम इमारतों में शामिल यह परिसर आठ प्रमुख संरचनाओं का समूह है. तेहरान के इस के प्राचीन गढ़ की नींव सफ़वीद दौर में शाह तहमास्प प्रथम के शासनकाल में रखी गई मानी जाती है, जबकि बाद में शाह अब्बास महान ने इसके उत्तरी हिस्से में एक भव्य बाग़ विकसित कराया. समय के साथ किले के चारों ओर ऊँची प्राचीर खड़ी की गई और परिसर में कई नई इमारतें जोड़ी गईं. 18वीं सदी में ज़ंद वंश के शासक करीम खान ने इसका पुनरुद्धार कराया.  जब 1794 से 1925 तक शासन करने वाले काजार शासकों ने तेहरान को अपनी राजधानी बनाया, तो यही परिसर उनका आधिकारिक निवास बन गया. 1865 में इसी वंश के हाजी अबोल हसन मिमार नवाई ने इसे मौजूदा स्वरूप दिया. बाद में 1925 से 1979 तक के पहलवी शासनकाल में Golestan Palace राजकीय और औपचारिक समारोहों का मुख्य केंद्र रहा, जहां 1926 में रजा शाह और 1967 में मोहम्मद रज़ा शाह व शहबानू फराह का राज्याभिषेक संपन्न हुआ. हालांकि रज़ा शाह ने 1925 से 1945 के बीच परिसर के बड़े हिस्से को यह कहकर ध्वस्त करवा दिया कि वह आधुनिक तेहरान के विस्तार में बाधा बन रहा था. Golestan Palace, a sparkling wonder in the center of Tehran, Iran. A UNESCO Site with some of the most beautiful mirror mosaics from floor to ceiling ✨ pic.twitter.com/ZSfosR75Iv — Muse (@xmuse_) January 8, 2026 गोलिस्तान पैलेस के भीतर और क्या था? इस परिसर में 17 संरचनाएं थीं, जिनमें संग्रहालय, महल और सभागार शामिल थे. अधिकांश निर्माण क़ाजार वंश के 131 वर्षों के शासनकाल में हुआ. हवाई हमलों से पहले यहां पांडुलिपियों की एक समृद्ध लाइब्रेरी, फोटोग्राफिक अभिलेखागार और ऐतिहासिक दस्तावेजों का संग्रह मौजूद था. गोलिस्तान पैलेस आधुनिक ईरान की सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक रहा है. 1974 में जारी 5,000 ईरानी रियाल के नोट के पिछले हिस्से पर भी इसकी तस्वीर अंकित थी. गोलिस्तान पैलेस में मार्बल थ्रोन (संगमरमर सिंहासन) , करीम खानी नुक्कड़, पॉन्ड हाउस, ब्रिलियंट हॉल, आइवरी हॉल, मिरर हॉल, सलाम हॉल, डायमंड हॉल,विंडकैचर मेंशन, एडिफाइस ऑफ द सन और अबीअज पैलेस समेत और भी कई आकर्षक निशान थे. ये भी पढ़ें:- मिडिल ईस्ट में US के सबसे बड़े एयरबेस पर हमला, ईरान ने कतर के अल उदैद पर दागी मिसाइल कभी मुगल काल का मयूर सिंहासन भी रखा गया था इस पैलेस में  चारदीवारी से घिरा यह परिसर बाग-बगीचों, जलाशयों और सुसज्जित इमारतों के लिए प्रसिद्ध है, जिनकी भव्य सजावट मुख्यतः 19वीं सदी की मानी जाती है. वर्तमान में यहां संग्रहालय और ऐतिहासिक वस्तुओं का भी संग्रह है, जिसके चलते इसे यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया. 1950 और 1960 के दशक में पुराने ढांचों की जगह आधुनिक और व्यावसायिक इमारतों का निर्माण किया गया. कभी गोलिस्तान पैलेस में रखा गया मयूर सिंहासन मुगल सम्राट शाह जहां द्वारा 17वीं सदी में बनवाया गया था और दिल्ली के लाल किले में स्थापित था. 1739 में ईरान के शासक नादिर शाह ने दिल्ली पर आक्रमण कर मुगल सम्राट मुहम्मद शाह को पराजित किया और अपार संपत्ति के साथ मयूर सिंहासन भी फारस ले गया. इतिहासकारों के अनुसार, 1747 में नादिर शाह की हत्या के बाद मयूर सिंहासन को उसके कीमती रत्नों के लिए संभवतः तोड़ दिया गया. उससे पहले तक यह गोलिस्तान पैलेस में ही सुरक्षित रखा गया था. ये भी पढ़ें:- ईरान ने फिर दुबई पर किया हमला, यूएस काउंसलेट बना निशाना; उठा धुएं का गुबार युद्ध की आग में बिखर रहा गोलिस्तान पैलेस  गोलिस्तान पैलेस ईरान के इतिहास के कई अहम मोड़ों का साक्षी रहा है. यहां शाही ताजपोशी समारोह आयोजित हुए और संवैधानिक आंदोलनों के दौर भी देखे गए. क़ाजार वंश के पतन के बाद भी यह महल बाद के शासकों के समय में औपचारिक और राजकीय कार्यक्रमों का प्रमुख स्थल बना रहा. गोलिस्तान पैलेस जैसे सांस्कृतिक स्मारक केवल किसी एक देश की धरोहर नहीं होते, बल्कि वे मानव सभ्यता की साझा विरासत का प्रतीक हैं. यही

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बिहार राज्यसभा चुनाव: 4 विधायक वाले उपेंद्र कुशवाहा बने उम्मीदवार, 19 वाली LJP-R को मौका नहीं, जानिए NDA का प्लान

Rajya Sabha Election 2026: बिहार में राज्यसभा के पांच सीटों पर चुनाव की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं. एनडीए की ओर से लगभग सभी सीटों के उम्मीदवार तय हो गए हैं. 19 विधायक वाली चिराग की पार्टी लोजपा-रामविलास को एक भी सीट नहीं मिली हैं. वहीं एनडीए के तरफ से उपेंद्र कुशवाहा पांचवें उम्मीदवार घोषित किए गए हैं. एनडीए के उम्मीदवारों की फाइनल लिस्ट बीजेपी ने दो सीटों के लिए अपने उम्मीदवारों का ऐलान कर दिया है. राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और सासाराम लोकसभा क्षेत्र से चुनाव हार चुके शिवेश राम. वहीं RLM की ओर उपेंद्र कुशवाहा उम्मीदवार घोषित किए गए हैं. एनडीए के तीन उम्मीदवार फाइनल हैं. वहीं जदयू की ओर से दो उम्मीदवारों की चर्चा तेज है. रामनाथ ठाकुर और सीएम नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार की. हालांकि, अभी इसकी औपचारिक घोषणा बाकी है. चिराग की पार्टी को एक भी सीट नहीं वहीं चिराग की पार्टी लोजपा (रामविलास) के 19 विधायक होने के बावजूद उनकी पार्टी को कोई सीट नहीं मिली. लेकिन पार्टी ने कहा है कि वे एनडीए के प्रत्याशियों का पूरा समर्थन करेंगे और उनकी जीत सुनिश्चित करने में योगदान देंगे. हालांकि, कुछ दिनों पहले नेतृत्वक गलियारों में ऐसी चर्चा थी कि चिराग की मां राज्यसभा जा सकती हैं. रीना पासवान को लेकर हुई अफवाहों का खंडन चिराग पासवान की मां रीना पासवान को राज्यसभा भेजे जाने की चर्चा तेज थी. इस पर उन्होंने साफ कर दिया कि वे सक्रिय नेतृत्व में नहीं आ रही हैं. चिराग पासवान ने भी कहा कि इसे चर्चा का हिस्सा न बनाएं. राजद की ओर से घोषणा कल राजद की ओर से तेजस्वी यादव 5 मार्च को अपना उम्मीदवार घोषित करेंगे. इस बार की राज्यसभा लड़ाई में नेतृत्वक हलचल तेज है. मांझी की मांग भी नहीं मानी गई केंद्रीय मंत्री और हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा के सुप्रीमो जीतन राम मांझी ने एक राज्यसभा सीट की मांग की थी. उनकी पार्टी के पांच विधायक और एक विधान पार्षद हैं. हालांकि, मांझी को इस बार मौका नहीं मिला. उन्होंने कहा कि अंतिम समय तक प्रतिक्षा करेंगे, लेकिन किसी दावे का दबाव नहीं बनाएंगे. आगे की प्रक्रिया राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन 5 मार्च तक दाखिल किए जाएंगे. मतदान 16 मार्च को होगा. नेतृत्वक हलचल और सीटों के बंटवारे को लेकर बिहार में सियासी माहौल काफी गर्म है. Also Read: पटना हॉस्टल कांड: NEET छात्रा मौत मामले में CBI ने बढ़ाई धाराएं, अब इस एंगल से भी होगी जांच The post बिहार राज्यसभा चुनाव: 4 विधायक वाले उपेंद्र कुशवाहा बने उम्मीदवार, 19 वाली LJP-R को मौका नहीं, जानिए NDA का प्लान appeared first on Naya Vichar.

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आधा भारत नहीं जानता है Pink Tax, जान जाएगा तो समझदारी से खरीदारी करेगा

Pink Tax: क्या आपने कभी गौर किया है कि बाजार में एक ही तरह के सामान के लिए स्त्रीओं को पुरुषों की तुलना में अधिक कीमत चुकानी पड़ती है? चाहे वह शेविंग रेजर हो, परफ्यूम हो या फिर ड्राई क्लीनिंग की सर्विस. अक्सर ‘पिंक’ यानी गुलाबी रंग या स्त्रीओं के लिए बनी पैकेजिंग वाली चीजों के दाम ज्यादा होते हैं. अर्थशास्त्र की भाषा में इसे ही ‘पिंक टैक्स’ (Pink Tax) कहा जाता है. पिंक टैक्स असल में क्या है ? पिंक टैक्स कोई प्रशासनी टैक्स नहीं है जिसे प्रशासन वसूलती हो. दरअसल, यह कंपनियों द्वारा अपनाई जाने वाली एक कीमत निर्धारण रणनीति (Pricing Strategy) है. इसके तहत कंपनियां एक जैसे उत्पादों और सेवाओं के लिए स्त्रीओं से पुरुषों के मुकाबले 7% से लेकर 15% तक ज्यादा पैसे वसूलती हैं. बस फर्क इतना होता है कि स्त्रीओं के उत्पाद अक्सर गुलाबी रंग के होते हैं या उनकी खुशबू और मार्केटिंग थोड़ी अलग होती है. पिंक टैक्स हमारे रोजमर्रा के जीवन में हर जगह मौजूद है. पर्सनल केयर प्रोडक्ट : एक ही कंपनी का पुरुषों वाला ‘ब्लू रेजर’ सस्ता होता है, जबकि वही रेजर गुलाबी रंग में ‘स्त्रीओं के लिए’ टैग के साथ महंगा बिकता है. यही हाल शैम्पू, साबुन और डियोड्रेंट का भी है. कपड़े और एक्सेसरीज: स्त्रीओं के कपड़ों की सिलाई, कपड़े की बनावट और स्टाइल के नाम पर अक्सर पुरुषों के साधारण कपड़ों से ज्यादा पैसे लिए जाते हैं. सेवाएं (Services): सैलून में स्त्रीओं के ‘हेयरकट’ की कीमत पुरुषों के मुकाबले कहीं ज्यादा होती है, भले ही बाल छोटे ही क्यों न हों. इसके अलावा, स्त्रीओं के कपड़ों की ड्राई क्लीनिंग भी अक्सर महंगी होती है. बच्चों के खिलौने: रिसर्च में पाया गया है कि लड़कियों के लिए बने गुलाबी खिलौने, लड़कों के लिए बने वैसे ही समान खिलौनों से महंगे होते हैं. यह क्यों गलत है ? पिंक टैक्स भेदभावपूर्ण है क्योंकि यह सीधे तौर पर स्त्रीओं की आर्थिक स्थिति पर प्रहार करता है. इसे ‘जेंडर-बेस्ड प्राइसिंग’ भी कहते हैं. विडंबना यह है कि दुनिया भर में स्त्रीओं को पुरुषों की तुलना में कम वेतन मिलता है (Gender Pay Gap), लेकिन उन्हें बुनियादी जरूरतों के लिए अधिक भुगतान करना पड़ता है. Also Read: क्या आप भी UPI से निकालते हैं कैश? HDFC बैंक के नए नियमों को तुरंत जान लें The post आधा हिंदुस्तान नहीं जानता है Pink Tax, जान जाएगा तो समझदारी से खरीदारी करेगा appeared first on Naya Vichar.

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गुजरात के स्कूलों और अदालतों में बम की धमकी देने वाला बंगाल से गिरफ्तार

गुजरात के स्कूलों और अदालतों को बम से उड़ाने की धमकी देने वाले पश्चिम बंगाल के एक व्यक्ति को पुलिस ने गिरफ्तार किया है. गिरफ्तारी अहमदाबाद शहर की क्राइम ब्रांच और साइबर सेल के ज्वाइंट ऑपरेशन में हुई. पुलिस ने यह जानकारी दी है. बार-बार मिल रही थी धमकियां पुलिस ने बताया कि पिछले कुछ महीनों में गुजरात के कई स्कूलों और अदालतों को बार-बार बम से उड़ाने की धमकी वाले ई-मेल मिले हैं. इससे लोगों में दहशत फैल गयी है. सुरक्षा एजेंसियों के लिए यह एक बुरे सपने जैसा हो गया है. बाद में पता चला कि यह सभी धमकियां झूठी थीं. बंगाल की समाचारें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें एक संयुक्त अभियान में अहमदाबाद अपराध शाखा और अहमदाबाद साइबर अपराध इकाई ने स्कूलों और अदालतों को निशाना बनाकर लगातार भेजे गये बम की झूठी धमकी भरे ई-मेल के लिए जिम्मेदार व्यक्ति को गिरफ्तार कर लिया है. यह अभियान सार्वजनिक सुरक्षा और डिजिटल सुरक्षा बनाये रखने में एक बड़ी सफलता है. गुजरात पुलिस धमकी देने वाले को बंगाल से गुजरात ले गयी पुलिस अपराध शाखा की ओर से बताया गया है कि गिरफ्तार किये गये व्यक्ति का नाम सौरभ विश्वास है. उसे पश्चिम बंगाल से गिरफ्तार किया गया. पुलिस सौरभ विश्वास को गुजरात ले आयी है. अभी वह पुलिस हिरासत में है. इसे भी पढ़ें बंगाल में फिर 2 कोर्ट को बम से उड़ाने की धमकी, जांच में जुटी पुलिस बंगाल में अब डाकघरों और पासपोर्ट सेवा केंद्र में विस्फोट की धमकी, हाई अलर्ट बैंकशाल कोर्ट समेत छह अदालतों को बम से उड़ाने की धमकी, हड़कंप बंगाल में रेलवे ट्रैक पर संदिग्ध बम होने की सूचना, सैंथिया के पास रोकी गयी ट्रेनों की आवाजाही The post गुजरात के स्कूलों और अदालतों में बम की धमकी देने वाला बंगाल से गिरफ्तार appeared first on Naya Vichar.

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झारखंड की अनोखी होली, परंपरा, शालीनता और संस्कृति का रंग

Holi in Jharkhand: होली को अक्सर रंग, मस्ती और हुड़दंग से जोड़ा जाता है. कई जगहों पर तेज संगीत, अश्लील गाने और नशे का माहौल भी देखने को मिलता है. लेकिन झारखंड के कई गांवों में होली बिल्कुल अलग अंदाज में मनाई जाती है. यहां न तो अश्लील गाने बजते हैं और न ही हुड़दंग होता है. यहां होली शालीनता, परंपरा और आपसी सम्मान के साथ स्पोर्ट्सी जाती है. इन गांवों में होली केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि अपनी विरासत और संस्कृति को आगे बढ़ाने का अवसर है. लोग मौज-मस्ती भी करते हैं, लेकिन मर्यादा और परंपरा का पूरा ध्यान रखते हैं. लातेहार के पोचरा गांव की राख वाली होली लातेहार मुख्यालय से करीब आठ किलोमीटर दूर पोचरा गांव में होली आज भी प्राचीन रीति-रिवाजों के साथ मनाई जाती है. होलिका दहन के अगले दिन सुबह ग्रामीण मंदिर में पूजा-अर्चना करते हैं. इसके बाद “चुलेही होली” की शुरुआत होती है. यहां लोग राख से होली स्पोर्ट्सते हैं. राख को अहंकार और नकारात्मकता के अंत का प्रतीक माना जाता है. ग्रामीणों का कहना है कि यह परंपरा उन्हें अपने पूर्वजों से मिली है. ढोलक और मजीरे की थाप पर लोकगीत गाए जाते हैं. यहां की होली राधा-कृष्ण के प्रेम और वसंत ऋतु के आगमन का संदेश देती है. कोडरमा में कीर्तन और कीचड़ की होली कोडरमा जिले के सतगावां प्रखंड के कई गांवों में आज भी पारंपरिक होली मनाई जाती है. होलिका दहन के दिन ढोलक-झाल के साथ गाना-बजाना होता है. मरचोई, माधीपुर, टेहरी, शिवपुर, नावाडीह और समलडीह जैसे गांवों में लोग पौराणिक शैली में होली स्पोर्ट्सते हैं. गांव के चौक-चौराहों पर कीर्तन मंडली द्वारा भजन-गीत प्रस्तुत किए जाते हैं. कुछ स्थानों पर कीचड़ की होली स्पोर्ट्सने की भी परंपरा है. इसके बाद होलिका दहन की राख को उड़ाने की रस्म निभाई जाती है. यह सब मिलकर होली को धार्मिक और सांस्कृतिक रूप देते हैं. गुमला में तीन दिन का डोल जतरा गुमला जिले में होली के साथ “डोल जतरा” का आयोजन होता है. यह उत्सव तीन दिनों तक चलता है. आदिम जनजातियां आज भी इस परंपरा को जीवित रखे हुए हैं. बिशुनपुर प्रखंड के पतारी क्षेत्र के पौलपील पाट में हर साल डोल जतरा लगता है. इस दौरान पूजा-पाठ, नृत्य और सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं. पढ़े-लिखे युवक-युवती भी अपने पूर्वजों की परंपरा को आगे बढ़ाते हैं. वे इसे केवल त्योहार नहीं, बल्कि अपनी पहचान मानते हैं. ये भी पढ़ें:- होली पर करें राशि के अनुसार दान, घर रहेगा सुख-समृद्धि से भरा बिशुनपुर में परंपरा और पकवान बिशुनपुर क्षेत्र में डोल जतरा के दौरान पारंपरिक खान-पान का खास आकर्षण होता है. यहां आदिम जनजाति के लोग अपने पारंपरिक व्यंजन बनाकर स्टॉल लगाते हैं. इस मौके पर शादी-ब्याह के लिए लड़का-लड़की देखने की परंपरा भी निभाई जाती है. बदलते समय के साथ रहन-सहन और पहनावे में बदलाव आया है, लेकिन परंपरा आज भी जीवित है. जरियागढ़ की ऐतिहासिक डोल होली झारखंड में ब्रज जैसी होली का अनुभव करना हो, तो जरियागढ़ की डोल होली खास मानी जाती है. यह परंपरा करीब 300 साल पुरानी बताई जाती है. यहां होली केवल रंगों का स्पोर्ट्स नहीं, बल्कि आस्था और अनुशासन का प्रतीक है. सखुआ की डालियों और पलाश के फूलों से भगवान कृष्ण, सुभद्रा और बलभद्र की डोली सजाई जाती है. भजन-कीर्तन के साथ शोभायात्रा निकाली जाती है. जनजातीय और स्थानीय भाषा में गीत गाए जाते हैं, जिससे माहौल भक्तिमय बन जाता है. ये भी पढ़ें:- आज मनाया जा रहा है होली का त्योहार, जानें इसका ज्योतिषीय महत्व परंपरा में बसती है असली होली झारखंड के इन गांवों में होली सिर्फ रंगों की नहीं, बल्कि संस्कृति और सम्मान की होली है. यहां लोग नशा या अश्लीलता से दूर रहकर प्रेम और भाईचारे के साथ त्योहार मनाते हैं. इन परंपराओं को देखकर यह समझ आता है कि होली का असली अर्थ आपसी मेल-मिलाप, खुशी और संस्कृति को सहेजने में है. ऐसी होली न केवल त्योहार को खास बनाती है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को अपनी जड़ों से जोड़कर भी रखती है. The post झारखंड की अनोखी होली, परंपरा, शालीनता और संस्कृति का रंग appeared first on Naya Vichar.

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