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March 16, 2026

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ईरान में जीना मुश्किल… युद्ध के बीच इराकी बॉर्डर खुला; ईरानियों ने रो-रोकर सुनाई दास्तां

Iran War Affect on Locals: पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के बीच लंबे समय से बंद रही सीमा खुलने के बाद रविवार को दर्जनों ईरानी नागरिक उत्तरी इराक के कुर्द क्षेत्र में दाखिल हुए. लोग इराक के हाजी ओमेरान सस्ती खाद्य सामग्री खरीदने, इंटरनेट का उपयोग करने, परिजनों से संपर्क साधने और काम की तलाश में पहुंचे. यात्रियों के अनुसार, लगातार हो रहे हवाई हमलों और खाद्य वस्तुओं की बढ़ती कीमतों ने ईरान में आम लोगों का जीवन बेहद कठिन बना दिया है. जैसे ही बॉर्डर खुला, तो लोग अपनी जरूरत की चीजें लेने, संबंधियों से बात करने और काम की तलाश में निकले. सीमा खुलने से व्यापार और आवागमन में बढ़ी हलचल इराक के कुर्द क्षेत्र से सामान से लदे ट्रक हाजी ओमेरान सीमा चौकी के रास्ते ईरान की ओर जाते दिखाई दिए. इससे महंगाई से जूझ रहे ईरानी नागरिकों को कुछ राहत मिलने की उम्मीद है. हाजी ओमेरान, ईरान-इराक सीमा पर ईराकी कुर्दिस्तान के एरबिल गवर्नरेट की एक बॉर्डर सिटी है.   अमेरिका और इजराइल के साथ युद्ध शुरू होने से पहले भी ईरानी कुर्द अक्सर इराकी कुर्दिस्तान आते-जाते रहे हैं. दोनों क्षेत्रों के बीच पारिवारिक, सांस्कृतिक और आर्थिक संबंध लंबे समय से मजबूत रहे हैं. खुली सीमा के कारण व्यापार और लोगों का आवागमन भी नियमित रूप से होता रहा है. अब युद्धग्रस्त हालात में ईरानियों के लिए बाहरी दुनिया से जुड़ने का एक महत्वपूर्ण माध्यम इराक का कुर्द क्षेत्र बन गया है. ईरान में हमले के बाद पूरा आसमान काला हो गया. फोटो- एक्स (@abbas araghchi). सीमा बंद होने का असर हर वर्ग पर पड़ा ईरान की ओर सामान लेकर जा रहे ट्रक चालक खिदेर चोमानी ने कहा, ‘जब यह सीमा बंद थी, तब इसका असर गरीबों, अमीरों और मजदूरों सभी पर पड़ा.’ क्षेत्रीय सैन्य तनाव बढ़ने के बाद इस सीमा को बंद कर दिया गया था. इराकी कुर्द प्रशासन लंबे समय से अपने ईरानी समकक्षों द्वारा इसे फिर से खोलने का इंतजार कर रहा था. सुरक्षा के डर से पहचान छिपा रहे लोग समाचार एजेंसी एपी से बात करने वाले लगभग सभी ईरानी कुर्दों ने अपनी पहचान गोपनीय रखने का अनुरोध किया. उनका कहना था कि उन्हें अपनी सुरक्षा को लेकर डर है और आशंका है कि ईरानी खुफिया एजेंसियां मीडिया से बात करने वालों पर नजर रखती हैं. कुछ लोगों ने दावा किया कि हालिया हमलों में कई ईरानी सैन्य ठिकाने, खुफिया कार्यालय और अन्य सुरक्षा प्रतिष्ठान नष्ट हो गए हैं. बमबारी के कारण सुरक्षा बलों की गतिविधियां भी सीमित हो गई हैं. ईरान में हमले के बाद उठा धुआं. इंटरनेट बंद, सीमा पार कर फोन करने पहुंचे लोग ईरान के पिरानशहर शहर की एक कुर्द स्त्री रविवार को अपने रिश्तेदारों से संपर्क करने और जरूरी सामान खरीदने के लिए सीमा पार कर आई. उसने बताया कि वह करीब 15 किलोमीटर की यात्रा करके हाजी ओमेरान पहुंची. स्त्री ने कहा, ‘मैं हाजी ओमेरान फोन करने आई हूं. ईरान के अधिकतर हिस्सों में इंटरनेट नहीं है. पिछले 16 दिनों से मेरे रिश्तेदारों को मेरी कोई समाचार नहीं मिली है और वे चिंतित हैं.’ उसके अनुसार इंटरनेट बाधित होने के कारण कई ईरानी लोग इराकी सिम कार्ड खरीदते हैं और सीमा के पास जाकर विदेश में रह रहे अपने परिजनों और दोस्तों से संपर्क करते हैं. वह सीमा के पास बाजार में अपने शहर की तुलना में कम कीमत पर चावल और खाने का तेल जैसे जरूरी सामान खरीदने भी गई थी. उसके मुताबिक युद्ध के कारण महंगाई बढ़ने से ईरान में इन बुनियादी वस्तुओं की कीमतें बहुत ज्यादा हो गई हैं. स्त्री ने कहा, ‘ईरान में हालात बहुत खराब हैं. लोग सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे, चीजें महंगी हैं और लोग घरों से निकलना नहीं चाहते.’ करीब आधे घंटे बाद वह दो प्लास्टिक बैग में सामान लेकर जल्दी-जल्दी वापस ईरान लौट गई, क्योंकि उसके शिशु घर पर उसका इंतजार कर रहे थे. खामेनेई की मौत के बाद शोक रैली में जाते लोग. बेटे की मौत के बाद संघर्ष कर रही बुजुर्ग स्त्री इसी दौरान काली शॉल में लिपटी एक बुजुर्ग स्त्री भी बारिश में अकेले सीमा पार करती दिखाई दी. उसने बताया कि वह ईरान के पश्चिम अजरबैजान प्रांत के सरदश्त से आई है और इराकी कुर्द क्षेत्र के चोमान शहर जा रही है, जो सीमा से करीब 40 किलोमीटर दूर है. स्त्री ने बताया कि उसका बेटा 14 महीने पहले ईरानी सैनिकों की गोली से मारा गया था. वह सीमा पार सिगरेट और अन्य सामान की तस्करी करता था, जो इस इलाके में आजीविका का आम साधन है. बेटे की मौत के बाद परिवार के पास आय का कोई साधन नहीं बचा और वह तीन छोटे बच्चों की देखभाल कर रही है, जिनमें सबसे बड़ा पांच साल का है. उसने कहा कि बढ़ती खाद्य कीमतों के कारण बच्चों का पेट भरना मुश्किल हो गया है और करीब दो महीने का लगभग 200 डॉलर किराया भी बकाया है. रोते हुए उसने कहा, ‘मेरी मदद करने वाला वहां कोई नहीं है. युद्ध ने हालात और खराब कर दिए हैं. सब कुछ और महंगा हो गया है.’ वह अपने रिश्तेदारों को पहले से सूचना भी नहीं दे सकी थी और उम्मीद कर रही थी कि वे उसकी मदद करेंगे. उसने कहा, ‘मैं बेबस हूं, लेकिन शिशु भूखे हैं और मुझे उनके लिए पूरी कोशिश करनी होगी.’ वह बारिश में वैसे ही खड़ी रहीं, ताकि उन्हें कोई लिफ्ट दे सके. 28 फरवरी को सबसे पहले हमले का दृश्य. फोटो- एएनआई. काम की तलाश में इराक पहुंचे मजदूर इस बीच तीन ईरानी मजदूर एक टैक्सी में सवार होकर इराकी कुर्द क्षेत्र में अपने काम पर लौटते दिखाई दिए. उन्होंने बताया कि वे एक ही निर्माण कंपनी में काम करते हैं और बढ़ती महंगाई से निपटने के लिए एक महीने तक काम करके पैसे कमाने का इरादा रखते हैं. उनमें से एक मजदूर ने कहा, ‘हालात और खराब होंगे और इसका असर आम लोगों पर ही पड़ेगा. हम अपने बच्चों और पत्नियों को छोड़कर हाजी ओमेरान काम करने आए हैं, वरना उन्हें अकेला नहीं छोड़ते.’ ये भी पढ़ें:- दक्षिणी लेबनान में घुसा इजरायल, हिज्बुल्लाह के खिलाफ IDF का ग्राउंड ऑपरेशन शुरू ये भी पढ़ें:- ट्रंप बोले- ईरान युद्ध के बाद

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दीपिका पादुकोण ऑस्कर में गयी या नहीं? रेड कार्पेट वाली तस्वीर की क्या है सच्चाई?

Deepika Padukone In Oscar 2026: दुनिया के सबसे बड़े फिल्म अवॉर्ड प्रोग्राम्स में से एक अकेडमी अवार्ड्स का 98वां संस्करण 15 मार्च 2026 को हॉलीवुड लॉस एंजेलिस के डॉल्बी थिएटर में आयोजित हुआ. इस कार्यक्रम में कई इंटरनेशनल स्टार्स के साथ हिंदुस्तान से भी कुछ नामचीन शामिल हुए. इवेंट में प्रियंका चोपड़ा और ईशा अंबानी की मौजूदगी ने हिंदुस्तानीय फैंस का ध्यान खींचा है. इसी बीच सोशल मीडिया पर अचानक दीपिका पादुकोण की एक तस्वीर वायरल हुई, जिसमें वह रेड कार्पेट पर दिखाई दे रही हैं. तस्वीर देखते ही देखते वायरल होने लगी. Deepika Padukone looks absolutely stunning at #Oscar  2026 red carpet.#oscar2026 pic.twitter.com/3VLW9NuFvL — World of Movies (@WOM1993) March 16, 2026 क्या सच में ऑस्कर में दिखीं दीपिका? सोशल मीडिया पर वायरल हो रही तस्वीरों में दीपिका पादुकोण लाल रंग के स्ट्रैपलेस गाउन में बेहद ग्लैमरस अंदाज में नजर आ रही हैं. उनके साथ एक तस्वीर में ईम्मा स्टोन भी दिखाई देती हैं, जिससे लोगों को लगा कि दीपिका इस साल ऑस्कर कार्यक्रम में शामिल हुई थीं. हालांकि, मामला की सच्चाई बाद में सामने आई. दावा किया गया कि ये तस्वीरें असली नहीं हैं. दरअसल, ये तस्वीरें AI की मदद से तैयार की गई हैं. तस्वीरें देखने में बिल्कुल रियल लग रही थीं, जिसकी वजह से सोशल मीडिया पर कई लोग यह मान बैठे कि दीपिका सच में ऑस्कर रेड कार्पेट पर पहुंची थीं. हालांकि, सच्चाई यह रही कि दीपिका इस साल इस कार्यक्रम का हिस्सा नहीं रहीं. प्रियंका चोपड़ा ने प्रेजेंट किया अवॉर्ड इस साल ऑस्कर कार्यक्रम में हिंदुस्तान की तरफ से प्रियंका चोपड़ा ने स्पेनिश एक्टर जैवियर बार्डेम के साथ मिलकर बेस्ट इंटरनेशनल फीचर फिल्म का अवॉर्ड पेश किया.  हिंदुस्तान को नहीं मिला नामांकन ऑस्कर 2026 में हिंदुस्तानीय सिनेमा के लिए यह साल कुछ खास नहीं रहा. इस बार किसी भी हिंदुस्तानीय फिल्म को ऑस्कर में नामांकन भी नहीं मिला. हालांकि, फिल्म होमबाउंड टॉप-15 की लिस्ट तक पहुंचने में जरूर कामयाब रही, लेकिन आगे की रेस में जगह नहीं बना सकी. इससे हिंदुस्तानीय फिल्म इंडस्ट्री को थोड़ी निराशा जरूर हाथ लगी. यह भी पढे़ं: बादशाह को लॉरेंस बिश्नोई गैंग की खुली धमकी, “माथे में मारेंगे गोली” The post दीपिका पादुकोण ऑस्कर में गयी या नहीं? रेड कार्पेट वाली तस्वीर की क्या है सच्चाई? appeared first on Naya Vichar.

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‘अब चुनाव नहीं लड़ूंगा’, जेल लौटने से पहले अनंत सिंह का ऐलान, बोले- अब बच्चे लड़ेंगे

Bihar Politics: बिहार की नेतृत्व में ‘बाहुबली’ और ‘छोटे प्रशासन’ के नाम से मशहूर अनंत सिंह ने एक ऐसे मोड़ पर संन्यास का ऐलान किया है, जिसकी कल्पना शायद ही किसी ने की थी. सोमवार को राज्यसभा चुनाव में अपने मताधिकार का प्रयोग करने जेल से विधानसभा पहुंचे अनंत सिंह ने साफ कर दिया कि अब वे आगे कोई चुनाव नहीं लड़ेंगे. पुलिस की सुरक्षा घेरे में मीडिया से बात करते हुए उन्होंने घोषणा की कि उनकी नेतृत्वक विरासत को अब उनके शिशु संभालेंगे. 6 बार के विधायक रहे अनंत सिंह का यह बयान ऐसे समय आया है जब राज्य में राज्यसभा की 5वीं सीट के लिए सियासी घमासान चरम पर है. वोट डालकर फिर लौटे जेल राज्यसभा चुनाव में मतदान के लिए अनंत सिंह को पुलिस सुरक्षा में जेल से बिहार विधानसभा लाया गया था. मतदान करने के बाद उन्हें वापस बेऊर जेल ले जाया गया. इस दौरान उन्होंने मीडिया से बातचीत करते हुए साफ कहा कि अब वे सक्रिय चुनावी नेतृत्व से दूर रहेंगे. MLA अनंत सिंह अब अपने बड़े बेटे को चुनावी मैदान में उतारने की तैयारी में हैं.#AnantSingh #BiharPolitics #prabhatkhabar @MLA_AnantSingh pic.twitter.com/z9XFQw0F3M — Naya Vichar (@prabhatkhabar) March 16, 2026 उन्होंने कहा कि अब परिवार की अगली पीढ़ी नेतृत्व में आगे आएगी और चुनाव लड़ेगी. उन्होंने कहा- उनके बड़े बेटे चुनावी नेतृत्व में सक्रिय होगे. NDA की जीत का किया दावा अनंत सिंह ने राज्यसभा चुनाव को लेकर भी बड़ा दावा किया. उन्होंने कहा कि एनडीए गठबंधन पूरी तरह मजबूत है और उसके सभी पांचों उम्मीदवार चुनाव जीतेंगे. उनका कहना था कि मौजूदा नेतृत्वक समीकरणों में एनडीए की स्थिति काफी मजबूत है और परिणाम भी उसी के पक्ष में जाएंगे. निशांत कुमार पर भी दिया बयान मुख्यमंत्री पद के सवाल पर भी अनंत सिंह ने प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार में मुख्यमंत्री बनने के सभी गुण मौजूद हैं. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि बिहार का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा, इसका फैसला बड़े नेता करेंगे. जेल में रहते हुए भी दर्ज की थी जीत अनंत सिंह पिछले साल हुए बिहार विधानसभा चुनाव में मोकामा सीट से जीत हासिल कर चुके हैं. उन्होंने आरजेडी की उम्मीदवार वीणा देवी को 28,206 वोटों के अंतर से हराया था. उन्हें कुल 91,416 वोट मिले थे, जबकि वीणा देवी को 63,210 वोट मिले थे. उस समय भी अनंत सिंह जेल में थे, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने चुनाव जीतकर नेतृत्वक ताकत का प्रदर्शन किया था. दुलार चंद यादव हत्याकांड में जेल अनंत सिंह इस समय दुलार चंद यादव हत्याकांड के मामले में जेल में हैं. आरोप है कि जन सुराज पार्टी के समर्थक दुलार चंद यादव की हत्या के मामले में उनका नाम सामने आया था. 1 नवंबर 2025 को विधानसभा चुनाव से पहले उन्हें गिरफ्तार किया गया था. इसके बाद अदालत ने उन्हें बेऊर जेल में न्यायिक हिरासत में भेज दिया. फिलहाल उनकी जमानत याचिका खारिज हो चुकी है और इस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी की जा रही है. Also Read: बेऊर जेल से वोट देने पहुंचे अनंत सिंह, विधानसभा में दिखाया विक्ट्री का साइन The post ‘अब चुनाव नहीं लड़ूंगा’, जेल लौटने से पहले अनंत सिंह का ऐलान, बोले- अब शिशु लड़ेंगे appeared first on Naya Vichar.

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दक्षिणी लेबनान में घुसा इजरायल, हिज्बुल्लाह के खिलाफ IDF का ग्राउंड ऑपरेशन शुरू

Israel Ground Operation Lebanon: ईरान के खिलाफ जारी युद्ध के बीच इजरायल ने लेबनान में ग्राउंड ऑपरेशन शुरू कर दिया है. इजरायली डिफेंस फोर्सेज (IDF) ने आधिकारिक तौर पर दक्षिणी लेबनान में हिज्बुल्लाह (Hezbollah) के प्रमुख ठिकानों के खिलाफ ‘सीमित और लक्षित जमीनी अभियान’ शुरू करने की घोषणा की है. इसे क्षेत्रीय तनाव में एक महत्वपूर्ण बढ़ोतरी माना जा रहा है. ईरान के खिलाफ इजरायल और अमेरिका ने 28 फरवरी को हमला किया था, इसके जवाब में ईरान के प्रॉक्सी हिज्बुल्लाह ने 2 मार्च को अटैक किया. इजरायल को निशाना बनाते हुए उसने रॉकेट दागे, इसके बाद से इजरायली बलों ने लेबनान में दूसरा मोर्चा खोला.  सोशल मीडिया एक्स पर इस अभियान की जानकारी दी. अपने बयान में IDF ने कहा कि यह कार्रवाई ‘फॉरवर्ड डिफेंस एरिया को मजबूत करने’ के उद्देश्य से की जा रही है. सेना के अनुसार यह शुरुआती चरण एक व्यापक रक्षात्मक अभियान का हिस्सा है, जिसका लक्ष्य अग्रिम सुरक्षा व्यवस्था को स्थापित और मजबूत करना है. इसके तहत इलाके में मौजूद आतंकी ढांचे को नष्ट करना और सक्रिय आतंकियों को खत्म करना शामिल है. टारगेटेड अटैक पर IDF फोकस तैनाती के बारे में अधिक जानकारी देते हुए IDF के आधिकारिक अकाउंट ने बताया कि ‘91वीं डिवीजन की सेना’ ने निर्धारित रक्षा क्षेत्र का विस्तार करने के लिए केंद्रित जमीनी अभियान शुरू कर दिया है. सेना ने कहा कि इस रक्षा क्षेत्र का विस्तार खतरों को खत्म करने और उत्तरी इलाकों (इजरायल के) के निवासियों के लिए अतिरिक्त सुरक्षा परत बनाने के लिए जरूरी है. बस्तियों की सुरक्षा करना प्रमुख उद्देश्य जमीनी सैनिकों के प्रवेश से पहले युद्धक्षेत्र की तैयारी के लिए IDF ने बताया कि उसने तोपखाने और वायुसेना की मदद से इलाके में कई आतंकी ठिकानों पर हमले किए. ये अभियान 146वीं डिवीजन के साथ मिलकर चलाए जा रहे हैं और इनका मुख्य उद्देश्य गैलीली क्षेत्र की बस्तियों की सुरक्षा करना है. इजराइली सेना ने यह भी कहा कि वह इजराइल के नागरिकों को किसी भी तरह का नुकसान नहीं होने देगी और दक्षिणी लेबनान में अभियान जारी रहेगा. रात में शुरू हुआ ऑपरेशन हिब्रू भाषा में किए गए पोस्ट के साथ कई दृश्य भी साझा किए गए, जिनमें नाइट विजन फुटेज और हाई-कॉन्ट्रास्ट तस्वीरें शामिल हैं. इन तस्वीरों में IDF के सैनिकों को घने लेबनानी इलाके में हरे थर्मल रंग के बीच आगे बढ़ते हुए देखा जा सकता है. सुरक्षा कारणों से सैनिकों के चेहरे धुंधले किए गए हैं. एक तस्वीर में एक सैनिक किसी इमारत के अंदर हेडलैम्प की रोशनी में तारों या उपकरणों की जांच करता हुआ दिखाई देता है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि मिशन का उद्देश्य आतंकी ढांचे को ढूंढकर खत्म करना है. IDF ने कहा कि यह कार्रवाई सीधे तौर पर हिज्बुल्लाह संगठन के उस फैसले के जवाब में है, जिसमें उसने अभियान में शामिल होकर ईरान समर्थित नेटवर्क के तहत काम करना शुरू किया. במסגרת מאמץ משימת ההגנה הקדמית: כוחות אוגדה 91 החלו בפעילות קרקעית ממוקדת בדרום לבנון כוחות אוגדה 91 החלו בימים האחרונים בפעילות קרקעית ממוקדת ליעדי מפתח בדרום לבנון להרחבת מרחב ההגנה הקדמי. פעולה זו היא חלק מהמאמץ לביסוס ההגנה הקדמית, ובה השמדת תשתיות טרור וחיסול מחבלים… pic.twitter.com/07Gzzh1H3r — צבא ההגנה לישראל (@idfonline) March 16, 2026 इजरायल ने लेबनान प्रशासन ने एक्शन की मांग की थी लेबनान के हिज्बुल्लाह और इजरायली के बीच 1980 से लेकर अब तक लड़ाई चल रही है. 2024 में पेजर हमला करके इजरायल ने इस गुट के कई लड़ाकों का सफाया किया था. 2026 के इस ताजा संघर्ष में इजरायल ने 12 मार्च को लेबनान प्रशासन से मांग की थी कि वह हिज्बुल्लाह के खिलाफ ऐक्शन ले, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई. इजरायल ने कहा था कि कोई एक्शन न लेकर लेबनान प्रशासन आग से स्पोर्ट्स रही है. अब इजरायल ने लेबनान के दक्षिणी इलाके से घुसकर खुद ही अभियान शुरू कर दिया है. इजरायली हमलों से तबाह हो रहा लेबनान इजरायली बलों के इस ऐक्शन की उम्मीद काफी समय से जताई जा रही थी. आरएफईआरएल की रिपोर्ट के मुताबिक, 2 मार्च को हिज्बुल्लाह के अटैक के बाद से आईडीएफ की कार्रवाइयों में अब तक 630 से ज्यादा लेबनानी नागरिक मारे गए हैं, जबकि 1500 से ज्यादा घायल हुए हैं, वहीं 80 हजार से ज्यादा लोग विस्थापित हुए हैं. लेबनान में मारे गए ज्यादातर नागरिकों में शिशु हैं. लेकिन इजरायल हमला करने से पीछे नहीं हट रहा है. उसका कहना है कि ईरान और हिज्बुल्लाह का मकसद हमारा अस्तित्व खत्म करना है, हम 24 घंटे हमले का शिकार हो रहे हैं.  ये भी पढ़ें:- ट्रंप बोले- ईरान युद्ध के बाद क्यूबा का नंबर… अटैक होगा या पीस डील से बनेगी बात?  ये भी पढ़ें:- यूएई में 19 हिंदुस्तानीयों समेत 35 लोग गिरफ्तार, युद्ध के बीच फर्जी वीडियो पोस्ट करने का आरोप हिज्बुल्लाह के खिलाफ इजरायल ने अब तक 800 से ज्यादा हमले किए हैं. इनमें कई सीनियर लड़ाके भी मारे गए हैं. अब इजरायल सीधा मैदान में उतर गया है. ऐसे में ईरान के साथ-साथ यह मोर्चा खुलना जंग के जल्द समाप्त होने की उम्मीद से कहीं दूर है.  The post दक्षिणी लेबनान में घुसा इजरायल, हिज्बुल्लाह के खिलाफ IDF का ग्राउंड ऑपरेशन शुरू appeared first on Naya Vichar.

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डिप्टी डायरेक्टर की नौकरी के साथ UPSC फतेह, शुभम सिंह को मिला AIR 21

Shubham Singh UPSC AIR 21: हर साल लाखों युवा UPSC सिविल सर्विस एग्जाम में सफलता पाने का सपना देखते हैं, लेकिन इस हार्ड एग्जाम में बहुत कम कैंडिडेट्स ही टॉप रैंक हासिल कर पाते हैं.  इन्हीं में से एक नाम शुभम सिंह का भी है, जिन्होंने UPSC 2025 में ऑल इंडिया रैंक (AIR) 21 प्राप्त करके शानदार सफलता हासिल की है. उनकी यह उपलब्धि केवल एक रैंक नहीं, बल्कि कई साल की मेहनत, धैर्य और लगातार किए गए प्रयासों का रिजल्ट है. शुभम सिंह की यह सक्सेस उन सभी युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो सिविल सर्विस में जाकर देश की सेवा करना चाहते हैं. आइए इनकी जर्नी (Shubham Singh UPSC AIR 21) को करीब से जानते हैं.  Shubham Singh UPSC AIR 21: कहां के रहने वाले हैं शुभम सिंह?  शुभम सिंह उत्तर प्रदेश के वाराणसी के रहने वाले हैं. उनके पिता विजय प्रताप सिंह उत्तर प्रदेश में पशु चिकित्सक (veterinary doctor) थे. बाद में वे chief veterinary officer बन गए. उनकी मां एक हाउसवाइफ है. एजुकेशन और डिसप्लिन को इम्पॉर्टेंस देने वाले परिवार में पले-बढ़े शुभम बचपन से पढ़ाई में काफी अच्छे थे.  पढ़ाई और करियर  शुभम सिंह (Shubham Singh UPSC AIR 21) से अपनी 12वीं वाराणसी से ही पूरी की है. फिर वे IIT कानपुर से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में BTech किया. पढ़ाई के बाद उन्होंने कुछ समय तक प्रोफेशनल सेक्टर में भी काम किया. साथ ही उन्होंने Ashoka यूनिवर्सिटी से Young India Fellowship के तहत पोस्टग्रेजुएट डिप्लोमा भी किया.  स्ट्रगल और UPSC की तैयारी  नौकरी के साथ यूपीएससी की तैयारी करना आसान नहीं था. लेकिन उन्होंने टाइम का सही यूज करके तैयारी जारी रखी. वे 2016 से UPSC की प्रिपरेशन में लग गए. 2017 में शुभम ने मेन्स एग्जाम पास नहीं कर पाया. 2018 में उन्होंने अपने दूसरे प्रयास में इंडियन कॉर्पोरेट लॉ सर्विस (ICLS) में  अपनी जगह बना ली. वे 2019 में सर्विस में जॉइन हुए और Ministry of Corporate Affairs में डेप्यूटी डायरेक्टर के पोस्ट में काम कर रहे हैं. पर उनका लक्ष्य IAS बनना था. 2020 में वे इंडियन पोस्टल सर्विस में सिलेक्ट हुए, पर शुभम ने जॉइन नहीं किया. वे यूपीएससी की तैयारी कर रहे थे. उन्होंने 2023 में फिर से यूपीएससी की परीक्षा दी, पर फाइनल राउंड तक नहीं पहुंच पाएं. आखिरकार अपने फाइनल अटेम्प्ट में UPSC 2025 में AIR 21 हासिल किया.  यह भी पढ़ें: 18 नंबर से चूका UPSC सिलेक्शन, 5वें प्रयास में समीक्षा ने हासिल की AIR 56 The post डिप्टी डायरेक्टर की नौकरी के साथ UPSC फतेह, शुभम सिंह को मिला AIR 21 appeared first on Naya Vichar.

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गुमला में हिमाचल से भाई के आने का इंतजार कर रही थीं बहनें, मिली मौत की खबर

गुमला से दुर्जय पासवान की रिपोर्ट Gumla News: झारखंड के गुमला से रोजी-रोटी के लिए हिमाचल प्रदेश गए एक युवक की घर लौटते समय रास्ते में रहस्यमय ढंग से मौत हो गई. घर आने की समाचार सुनकर जिन बहनों की निगाहें अपने भाई के इंतजार में टिकी थीं. उन्हें अचानक अपने भाई की मौत की सूचना मिली. यह समाचार सुनते ही पूरे परिवार के होश उड़ गए. युवक का शव उत्तर प्रदेश के आगरा के पास रेलवे ट्रैक के किनारे मिला. मृतक की पहचान गुमला निवासी 35 वर्षीय बेनाम उरांव के रूप में हुई है. मृतक की पहचान बेनाम उरांव के रूप में बताया जा रहा है कि बेनाम उरांव रोजी-रोटी के लिए हिमाचल प्रदेश में मजदूरी करता था. वह लंबे समय से वहां काम कर रहा था और समय-समय पर अपने घर भी आता-जाता रहता था. परिवार के मुताबिक, वह जनवरी महीने में ही अपने घर आया था और कुछ दिन परिजनों के साथ बिताने के बाद फिर से काम पर लौट गया. घर आने की खुशी में बहन को किया था फोन परिजनों ने बताया कि बीते शुक्रवार को बेनाम उरांव हिमाचल प्रदेश से अपने घर लौटने के लिए ट्रेन में सवार हुआ था. घर आने की खुशी में उसने अपनी बहन सुचिता उरांव को फोन कर बताया था कि वह ट्रेन में बैठ चुका है और जल्द ही घर पहुंच जाएगा. उस समय सुचिता उरांव एक शादी समारोह में व्यस्त थी. इसलिए, दोनों के बीच ज्यादा देर तक बातचीत नहीं हो सकी. किसी को अंदाजा नहीं था कि भाई-बहन के बीच यह आखिरी बातचीत साबित होगी. अचानक फोन कॉल से मिली मौत की समाचार रविवार की सुबह अचानक एक फोन कॉल ने पूरे परिवार की जिंदगी बदल दी. सुचिता उरांव ने जब अपने भाई के मोबाइल पर फोन किया, तो फोन किसी दूसरे व्यक्ति ने कॉल उठाया. फोन उठाने वाले ने खुद को उत्तर प्रदेश के आगरा क्षेत्र की पुलिस बताया. पुलिस ने जानकारी दी कि बेनाम उरांव का शव आगरा के पास रेलवे ट्रैक के किनारे मिला है. इस समाचार को सुनते ही परिवार के लोग स्तब्ध रह गए और घर में मातम छा गया. चलती ट्रेन से गिरने की जताई जा रही आशंका पुलिस से मिली शुरुआती जानकारी के अनुसार, आशंका जताई जा रही है कि बेनाम उरांव चलती ट्रेन से गिर गया होगा, जिससे उसकी मौत हो गई. हालांकि, मामले की पूरी सच्चाई जांच के बाद ही सामने आएगी. पुलिस घटना के सभी पहलुओं की जांच कर रही है. इसे भी पढ़ें: होर्मुज की लहरों में मौत को छूकर आज वतन लौटेगा जमशेदपुर का अंश, पलकें बिछाकर इंतजार कर रहे पापा-मम्मी शव को गुमला लाने की प्रक्रिया शुरू घटना की जानकारी मिलने के बाद बेनाम उरांव की बहन सुचिता उरांव और अन्य परिजन गुमला थाना पहुंचे. उन्होंने प्रशासन से शव को गुमला लाने में मदद की गुहार लगाई. थाना प्रभारी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए श्रम अधीक्षक कार्यालय को इसकी सूचना दी. इसके बाद शव को गुमला लाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. परिवार अब बेटे के शव के घर पहुंचने का इंतजार कर रहा है. इसे भी पढ़ें: दुमका के शिकारीपाड़ा में दर्दनाक सड़क हादसा, हाईवा की चपेट में आने से दो फेरीवालों की मौत The post गुमला में हिमाचल से भाई के आने का इंतजार कर रही थीं बहनें, मिली मौत की समाचार appeared first on Naya Vichar.

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गैस की किल्लत के कारण कैफे ने वसूला ‘गैस क्राइसिस चार्ज’, सोशल मीडिया पर बिल वायरल

Lpg Crisis: आजकल शहरों में रसोई गैस (LPG) की भारी किल्लत चल रही है. इसका असर सिर्फ घरों के किचन तक सीमित नहीं है, बल्कि बाहर का खाना-पीना भी अब जेब पर भारी पड़ रहा है. दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों में गैस न मिलने की वजह से कई ढाबे और रेस्टोरेंट या तो बंद हो गए हैं या उन्होंने अपने दाम बढ़ा दिए हैं. नींबू पानी पर ‘गैस चार्ज’? बेंगलुरु के एक कैफे (Theo Cafe) का एक बिल सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है. इस बिल को देखकर लोग हैरान हैं क्योंकि कैफे ने ग्राहक से 5% ‘गैस क्राइसिस चार्ज’ (Gas Crisis Charge) वसूला है. ताज्जुब की बात यह है कि ग्राहक ने ‘मिंट लेमोनेड’ (शिकंजी) ऑर्डर की थी.अब लोग सोशल मीडिया पर मजे ले रहे हैं और पूछ रहे हैं कि “भाई, शिकंजी बनाने में कौन सी गैस लगती है? क्या नींबू को गर्म करके डाला गया था?” “Gas crisis charge” on a lemonade 🤣 Source: r/bangalore pic.twitter.com/wkAU1QIsNl — Pakchikpak Raja Babu (@HaramiParindey) March 15, 2026 बाहर खाना हुआ महंगा, कई दुकानें बंद गैस के संकट ने खाने-पीने के शौकीनों का बजट बिगाड़ दिया है. दुकानें हुईं बंद: दिल्ली के पहाड़गंज की मशहूर ‘सीताराम दीवानचंद’ जैसी पुरानी दुकान भी गैस न मिलने के कारण बंद हो गई है. मेन्यू बदला: कई रेस्टोरेंट अब डोसा-इडली (जिसमें गैस ज्यादा लगती है) की जगह सैंडविच बेचने लगे हैं. चाय-नाश्ता महंगा: दिल्ली-NCR में जो चाय पहले 10-15 रुपये की थी, वह अब 20 रुपये की मिल रही है.मोमोज, पोहा और छोले-भठूरे की प्लेट पर भी 10 से 100 रुपये तक की बढ़ोतरी हो गई है. दुकानदारों का कहना है कि “हमे गैस सिलेंडर ब्लैक में खरीदने पड़ रहे हैं, इसलिए मजबूरी में दाम बढ़ाने पड़ रहे हैं.” Also Read: लाड़ली बहना योजना की 34वीं किस्त जारी, घर बैठे मोबाइल से 2 मिनट में ऐसे चेक करें अपना स्टेटस The post गैस की किल्लत के कारण कैफे ने वसूला ‘गैस क्राइसिस चार्ज’, सोशल मीडिया पर बिल वायरल appeared first on Naya Vichar.

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राज्यसभा: मल्लिकार्जुन खरगे और जेपी नड्डा आमने-सामने, एलपीजी के मुद्दे पर हंगामा

Lpg Cylinder Crisis : कांग्रेस सांसद मल्लिकार्जुन खरगे ने राज्यसभा में एलपीजी सप्लाई के मुद्दे को उठाया. उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया (ईरान और यूएस-इजरायल के बीच जंग) में चल रहे तनाव का असर अब हिंदुस्तान में भी दिखने लगा है. खरगे ने कहा कि इसका असर मिडिल क्लास, रेस्टोरेंट, हॉस्टल और कमर्शियल गैस इस्तेमाल करने वालों पर पड़ रहा है. ऐसे हालात में एलपीजी की उपलब्धता और कीमत दोनों ही गंभीर मुद्दा बन गए हैं. उन्होंने यह भी कहा कि लोकसभा में पेट्रोलियम मंत्री ने दावा किया था कि एलपीजी की कोई कमी नहीं है, लेकिन जमीन पर हालात कुछ और ही कहानी बता रहे हैं और प्रशासन के दावे सही नहीं लग रहे. LoP, Rajya Sabha, Mallikarjun Kharge speaks in the House on the LPG supply issue amid West Asia conflict He says, “I want to draw the govt’s attention towards the LPG issue owing to the situation in West Asia. This is affecting the middle class, restaurants, hostels and… pic.twitter.com/eP9hfYe8AT — ANI (@ANI) March 16, 2026 बीजेपी सांसद जेपी नड्डा ने खरगे के आरोपों का जवाब दिया. उन्होंने कहा कि कांग्रेस देश के लोगों को भड़काने की कोशिश कर रही हैं. यह दुख की बात है कि मुश्किल समय में भी विपक्ष, खासकर कांग्रेस नेतृत्व करने से बाज नहीं आ रही. उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा संकट हिंदुस्तान की वजह से नहीं है. “A Congress leader has been caught hoarding cylinders. They are inciting the peaceful people of the country…It is sad that the Opposition, particularly the Congress, doesn’t stop doing politics even during difficult times…This crisis is not due to India,” says Union Minister… pic.twitter.com/i5KyUInLga — ANI (@ANI) March 16, 2026 सदन के बाहर लोकसभा सांसद कंगना रनौत ने न्यूज एजेंसी एएनआई से बात करते हुए कहा कि विपक्ष बेवजह डर और घबराहट फैलाने की कोशिश कर रहा है. उन्होंने लोगों से अपील की कि वे नरेंद्र मोदी के नेतृत्व पर भरोसा रखें. #WATCH | On Opposition protest against reports of LPG shortage, BJP MP Kangana Ranaut says, “…The opposition is trying to create panic and I urge the people of the nation to trust the leadership of PM Modi…” pic.twitter.com/HtaERJADvQ — ANI (@ANI) March 16, 2026 The post राज्यसभा: मल्लिकार्जुन खरगे और जेपी नड्डा आमने-सामने, एलपीजी के मुद्दे पर हंगामा appeared first on Naya Vichar.

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ट्रंप बोले- ईरान युद्ध के बाद क्यूबा का नंबर… अटैक होगा या पीस डील से बनेगी बात? 

Trump on Cuba: अमेरिका इन दिनों ईरान में उलझा हुआ है. लेकिन उसके भविष्य के अभियानों की भी तैयारी पूरी है. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को कहा कि संयुक्त राज्य अमेरिका जल्द ही क्यूबा के साथ कोई समझौता कर सकता है या फिर अन्य कदम उठा सकता है. उनके इस बयान से संकेत मिलता है कि लंबे समय से तनावपूर्ण रहे दोनों देशों के रिश्तों में जल्द कोई नया घटनाक्रम हो सकता है. क्यूबा और अमेरिका के बीच लंबे समय से संकट बना हुआ है. लेकिन वेनेजुएला में सत्ता परिवर्तन के बाद से क्यूबा पूरी तरह अकेला पड़ गया है.  रविवार को, वॉशिंगटन से फ्लोरिडा जाते समय एयरफोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत करते हुए ट्रंप ने कहा, ‘क्यूबा एक असफल देश है. क्यूबा भी समझौता करना चाहता है और मुझे लगता है कि हम बहुत जल्द या तो कोई डील करेंगे या फिर जो करना होगा वह करेंगे. हम क्यूबा से बातचीत कर रहे हैं, लेकिन क्यूबा से पहले हम ईरान का मामला निपटाएंगे.’ ट्रंप की क्यूबा पर सख्ती कैसे शुरू हुई वॉशिंगटन और हवाना (क्यूबा की राजधानी) के बीच कई वर्षों से लगे प्रतिबंधों, कूटनीतिक तनाव और प्रवासन व सुरक्षा से जुड़े विवादों के कारण रिश्ते तनावपूर्ण बने हुए हैं. जनवरी 2026 में निकोलस मादुरो को सत्ता से हटाए जाने के बाद अमेरिका ने वेनेजुएला से क्यूबा जाने वाली तेल आपूर्ति और वित्तीय लेनदेन रोक दिए. 11 जनवरी 2026 को ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कहा कि अब ‘क्यूबा को न तेल मिलेगा और न पैसा’ और क्यूबा की प्रशासन से जल्द समझौता करने को कहा. इसके बाद 29 जनवरी 2026 को ट्रंप ने एक कार्यकारी आदेश (14380) पर हस्ताक्षर किए, जिसमें क्यूबा को तेल सप्लाई करने वाले देशों पर टैरिफ लगाने की अनुमति दी गई और क्यूबा को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताया गया. वेनेजुएला में तख्ता पलट के बाद, आयातित तेल की आपूर्ति में बाधा के कारण क्यूबा का आर्थिक संकट और गहरा गया है. यह तेल बिजली संयंत्रों और परिवहन नेटवर्क को चलाने के लिए बेहद जरूरी है. ईंधन की कमी के कारण अधिकारियों को कई इलाकों में बिजली की कटौती करनी पड़ी है और कुछ सार्वजनिक सेवाओं को सीमित करना पड़ा है. क्यूबा बातचीत के लिए तैयार अब डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान से जुड़े ऑपरेशन खत्म होने के बाद अमेरिका क्यूबा पर कदम उठा सकता है. यह बयान ऐसे समय आया है जब क्यूबा के राष्ट्रपति मिगुएल डियाज-कनेल ने पुष्टि की कि अमेरिका और क्यूबा के बीच द्विपक्षीय मतभेदों को लेकर बातचीत हुई है. क्यूबा के राष्ट्रपति मिगुएल डियाज-कानेल ने शुक्रवार को कहा, ‘इन वार्ताओं का उद्देश्य संवाद के माध्यम से उन द्विपक्षीय मतभेदों का समाधान ढूंढना है जो दोनों देशों के बीच मौजूद हैं.’ उन्होंने यह भी उम्मीद जताई कि बातचीत से दोनों लंबे समय से प्रतिद्वंद्वी देशों को टकराव से दूर ले जाने में मदद मिलेगी. हालांकि दोनों देशों के बीच बातचीत शुरू होने के बावजूद प्रशासनों के बीच कई बड़े मतभेद अब भी बने हुए हैं. अमेरिकी अधिकारियों ने संकेत दिया है कि किसी भी तरह की रियायत या दबाव में कमी के लिए हवाना को नेतृत्वक और आर्थिक रियायतें देनी पड़ सकती हैं, जबकि क्यूबा के नेताओं का कहना है कि बातचीत में देश की संप्रभुता और स्वतंत्रता का सम्मान किया जाना चाहिए. ‘फ्रेंडली टेकओवर’ की बात हाल के हफ्तों में ट्रंप ने कई बार बयान दिए हैं जिनमें उन्होंने कहा कि क्यूबा पतन के कगार पर है या अमेरिका के साथ समझौता करने को तैयार है. 27 जनवरी को उन्होंने यह भी कहा था कि क्यूबा पर दोस्ताना तरीके से नियंत्रण किया जा सकता है, लेकिन फिर जोड़ा कि हो सकता है यह दोस्ताना नियंत्रण न हो. ‘फ्रेंडली टेकओवर’ का मतलब क्या हो सकता है? विश्लेषकों के अनुसार इसका मतलब अमेरिका समर्थित सत्ता परिवर्तन या नेतृत्वक बदलाव से हो सकता है. फ्रेंडली टेकओवर न हो तो? ईरान या फिर वेनेजुएला जैसा अभियान. ये भी पढ़ें:- US हमले में परमाणु ठिकाने बर्बाद, मलबे में दफन है यूरेनियम… ईरानी विदेश मंत्री का नया खुलासा 5 मार्च को व्हाइट हाउस में उन्होंने कहा कि क्यूबा बहुत बुरी तरह डील करना चाहता है, लेकिन अमेरिका पहले ईरान के मुद्दे पर ध्यान देगा. 9 मार्च को फ्लोरिडा में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने बताया कि बातचीत में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो भी शामिल हैं. उन्होंने यह भी कहा था कि रुबियो आने वाले समय में क्यूबा भी जा सकते हैं. रुबियो मूल रूप से क्यूबा के ही हैं. उनके माता पिता क्यूबा की कम्यूनिस्ट प्रशासन की प्रताड़ना से बचने के लिए अमेरिका के मियामी भाग गए थे.  क्यूबा में अमेरिका की दिलचस्पी क्यों क्यूबा कैरेबियन का सबसे बड़ा द्वीप देश है, जो अटलांटिक महासागर, मैक्सिको की खाड़ी और कैरेबियन सागर के संगम पर स्थित है. यह अमेरिका के फ्लोरिडा राज्य से लगभग 150 किलोमीटर दक्षिण में है. सेकेंड वर्ल्ड वॉर के बाद रूस और अमेरिका के बी कोल्ड वॉर के समय क्यूबा मिसाइल संकट यूएस के लिए बहुत बड़ी समस्या बन था. ऐसे में अमेरिका यहां पर अपने लिए फ्रेंडली प्रशासन चाहता है.  ये भी पढ़ें:- ट्रंप बोले- NATO का फ्यूचर ‘बहुत बुरा’ होगा… अगर उन्होंने होर्मुज खोलने में US मदद नहीं की ट्रंप की क्यूबा पर नई रणनीति इसी मकसद के लिए ‘मैक्सिमम प्रेशर’ नीति का हिस्सा मानी जा रही है. इसका उद्देश्य क्यूबा की कम्युनिस्ट प्रशासन को कमजोर करना और संभावित नेतृत्वक बदलाव की दिशा में दबाव बनाना है.  The post ट्रंप बोले- ईरान युद्ध के बाद क्यूबा का नंबर… अटैक होगा या पीस डील से बनेगी बात?  appeared first on Naya Vichar.

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क्या आपको पता है शुभमन गिल का टारगेट? वनडे वर्ल्ड कप से पहले दिया बयान

Highlights 2027 वर्ल्ड कप पर बोले गिल वर्ल्ड कप 2023 फाइनल की हार पर छलका दर्द 2013 चैंपियंस ट्रॉफी की यादें 12 साल बाद ट्रॉफी उठाना सपने जैसा Shubman Gill Statement: कप्तान शुभमन गिल की नजरें अब पूरी तरह से वनडे वर्ल्ड कप 2027 पर टिक गई हैं. नई दिल्ली में आयोजित बीसीसीआई के नमन अवार्ड्स में गिल ने साफ कर दिया है कि उनके लिए यह ग्लोबल टूर्नामेंट जीतना ही सबसे अहम है. टी20 वर्ल्ड कप 2026 की टीम से बाहर होने के बाद अब उनका पूरा ध्यान सिर्फ 2027 में होने वाले बड़े टूर्नामेंट पर है. एक कप्तान के तौर पर वह टीम इंडिया को विश्व चैंपियन बनाने की तैयारी में मजबूती से जुट गए हैं. 2027 वर्ल्ड कप जीतना सबसे बड़ा लक्ष्य स्टार स्पोर्ट्स पर पैनल चर्चा के दौरान शुभमन गिल ने खुलकर अपनी बात रखी. उन्होंने बताया कि देश के लिए किसी भी फॉर्मेट में वर्ल्ड कप जीतना उनका सबसे बड़ा सपना है. गिल ने कहा कि यह बात अक्सर उनके मन में आती है कि उन्हें टीम को चैंपियन बनाना है. उनका साफ मानना है कि साउथ अफ्रीका, जिम्बाब्वे और नामीबिया की मेजबानी में होने वाले अगले वनडे वर्ल्ड कप की ट्रॉफी उठाना ही उनके करियर का एकमात्र बड़ा लक्ष्य है. 2023 के फाइनल की हार का दर्द गिल ने 2023 वनडे वर्ल्ड कप के सफर को भी याद किया. उन्होंने कहा कि पिछली बार जब टूर्नामेंट हिंदुस्तान में स्पोर्ट्सा गया था, तब टीम इंडिया जीत के बहुत करीब पहुंच गई थी. पूरे टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन के बाद भी फाइनल में ऑस्ट्रेलिया से मिली हार ने सबका सपना तोड़ दिया था. कप्तान ने बताया कि अब साउथ अफ्रीका में टीम इंडिया को खिताब जीतने का एक नया मौका मिलने वाला है और यह उनके लिए एक बहुत बड़ा अवसर होगा. टी20 वर्ल्ड कप 2026 से रहे बाहर वनडे और टेस्ट टीम की कप्तानी कर रहे गिल के लिए हालिया समय थोड़ा उतार-चढ़ाव भरा भी रहा. खराब फॉर्म के कारण उन्हें टी20 वर्ल्ड कप 2026 की टीम से बाहर कर दिया गया था. इस फैसले के बाद उन्होंने खुद को बहुत अच्छे से संभाला है. अब वह अपना पूरा फोकस वनडे क्रिकेट और उसकी कप्तानी पर लगा रहे हैं ताकि आने वाले समय में देश को और भी अधिक वर्ल्ड कप जिता सकें. 2013 चैंपियंस ट्रॉफी की बचपन की यादें अपने क्रिकेट के सफर को याद करते हुए गिल ने बचपन का एक बेहद दिलचस्प किस्सा साझा किया. उन्होंने बताया कि साल 2013 में जब हिंदुस्तान ने आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी जीती थी, तब वह महज एक स्कूली शिशु थे. उस समय उन्होंने टीवी पर अपने आदर्श खिलाड़ी विराट कोहली, रोहित शर्मा, रविचंद्रन अश्विन और महेंद्र सिंह धोनी को इंग्लैंड के खिलाफ फाइनल जीतते हुए देखा था. उन दिग्गजों को जश्न मनाते देखना उनके लिए बहुत खास एहसास था. 12 साल बाद ट्रॉफी उठाना सपने जैसा बचपन में टीवी पर जीत देखने वाले गिल ने साल 2025 में खुद हिंदुस्तानीय टीम के साथ चैंपियंस ट्रॉफी उठाई. उन्होंने कहा कि बचपन में हर कोई ऐसा एहसास दोहराने का सपना देखता है. जब आप देश के लिए क्रिकेट स्पोर्ट्सते हैं, तो आईसीसी ट्रॉफी जीतने का सपना जरूर देखते हैं. लगभग 12 साल बाद उसी सपने को सच होते देखना और ट्रॉफी हासिल करना उनके लिए एक बहुत बड़ा पल था. गिल के अनुसार यह जीत हमेशा बहुत खास रहेगी. ये भी पढ़ें- पहले कभी नहीं देखा होगा संजू का ऐसा अंदाज, अवॉर्ड शो की वैभव की मिमिक्री IPL 2026 से पहले वैभव का खुलासा, 6 सिक्स नहीं इस महारिकॉर्ड पर निगाह The post क्या आपको पता है शुभमन गिल का टारगेट? वनडे वर्ल्ड कप से पहले दिया बयान appeared first on Naya Vichar.

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