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March 20, 2026

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चांद नजर आया, देशभर में कल मनेगा ईद-उल-फितर

Eid ul Fitr 2026: देश के कई हिस्सों में शुक्रवार शाम चांद दिखने की पुष्टि के बाद शनिवार, 21 मार्च 2026 को ईद-उल-फितर मनाने का ऐलान कर दिया गया है. जैसे ही चांद दिखने की समाचार फैली, बाजारों में रौनक बढ़ गई. कपड़ों, मिठाइयों और खासकर सेवइयों की दुकानों पर लोगों की भीड़ देखने को मिल रही है. हर तरफ त्योहार की खुशी और उत्साह का माहौल है. ईद की तारीख कैसे तय होती है? ईद-उल-फितर इस्लामी चंद्र कैलेंडर के अनुसार शव्वाल महीने की पहली तारीख को मनाई जाती है. इस्लाम में महीनों की शुरुआत चांद के दिखने पर निर्भर करती है, इसलिए ईद की तारीख हर साल बदलती रहती है. रमजान के पूरे महीने रोजे रखने के बाद जैसे ही नया चांद नजर आता है, उसी के साथ ईद का त्योहार मनाने की तैयारी शुरू हो जाती है. ईद-उल-फितर का धार्मिक महत्व ईद-उल-फितर का अर्थ है “रोजा खोलने का त्योहार”. यह दिन पूरे महीने की इबादत, संयम और आत्मअनुशासन के बाद खुशी और शुक्रिया अदा करने का अवसर होता है. इस दिन मुस्लिम समुदाय के लोग सुबह-सुबह मस्जिदों और ईदगाह में जाकर खास नमाज अदा करते हैं. नमाज से पहले फितरा (दान) देना जरूरी माना जाता है, ताकि गरीब और जरूरतमंद लोग भी इस त्योहार की खुशियों में शामिल हो सकें. खुशियों और भाईचारे का पर्व ईद सिर्फ धार्मिक त्योहार नहीं, बल्कि आपसी प्रेम और भाईचारे का प्रतीक भी है. इस दिन लोग नए कपड़े पहनते हैं, बच्चों को ईदी दी जाती है और परिवार व दोस्तों से मिलकर खुशियां बांटी जाती हैं. पुराने गिले-शिकवे भुलाकर रिश्तों को मजबूत करने का यह खास मौका होता है. सेवइयों की मिठास से बढ़ती है रौनक ईद का जिक्र सेवइयों के बिना अधूरा है. इस दिन हर घर में मीठी सेवइयां बनती हैं, जो इस त्योहार की पहचान बन चुकी हैं. मेहमानों का स्वागत इन्हीं मिठाइयों से किया जाता है, जिससे त्योहार की मिठास और भी बढ़ जाती है. ईद-उल-फितर दुनियाभर में मनाया जाने वाला एक प्रमुख इस्लामी पर्व है, जो रमजान के खत्म होने की खुशी में मनाया जाता है. यह दिन लोगों को एकता, दया और इंसानियत का संदेश देता है. The post चांद नजर आया, देशभर में कल मनेगा ईद-उल-फितर appeared first on Naya Vichar.

समस्तीपुर

मांगो के समर्थन में आशा एवं आशा फैसिलिटेटर ने दिया धरना 

नया विचार न्यूज़ सरायरंजन । प्रखंड मुख्यालय स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर शुक्रवार को बिहार राज्य आशा एवं आशा फैसिलिटेटर संघ से संबौद्ध बिहार चिकित्सा एवं जन स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के आह्वान पर प्रखंड मंत्री पिंकी ईश्वर के नेतृत्व में धरना एवं प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगों में आठ माह से बकाया मानदेय की राशि का भुगतान करने, सभी योग्य आशा एवं आशा फैसिलिटेटर को नियमित कर समायोजित करने, सभी आशा एवं आशा फैसिलिटेटर को प्रति माह 26हजार रुपए भुगतान करने, सभी राष्ट्रीय कार्यक्रम का बकाया प्रोत्साहन राशि भुगतान का करने की मांग शामिल हैं। कर्मचारी संघ ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि उपयुक्त मांगे पूरी नहीं की जाती हैं तो आगामी 1 अप्रैल से अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार किया जाएगा। मौके पर शैलेंद्र कुमार, अनिला कुमारी, पुनीता कुमारी, रंजना सिंहा, देवंती देवी, विनीता कुमारी, अमृता कुमारी,रीता कुमारी, बबिता, अंजू, ललिता,सरिता, रिंकू सहित सभी आशा एवं स्वास्थ्यकर्मी मौजूद रहे।

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UP TET 2026 का नोटिफिकेशन जारी, इस दिन से भरें फॉर्म

UP TET 2026 Notification: उत्तर प्रदेश एजुकेशन सर्विस सेलेक्शन कमीशन (UPESSC) की तरफ से UP TET 2026 का नोटिफिकेशन जारी कर दिया गया है. नोटिफिकेशन जारी होने के साथ ही आवेदन प्रक्रिया की तारीखें भी घोषित कर दी गई हैं. जो भी कैंडिडेट्स इस परीक्षा में शामिल होना चाहते हैं, वे ऑफिशियल वेबसाइट upessc.up.gov.in पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं. UP TET 2026 के लिए जरूरी तारीखें UP TET 2026 के लिए आवेदन प्रक्रिया 27 मार्च 2026 से शुरू होगी. कैंडिडेट्स 26 अप्रैल 2026 तक ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं. फीस जमा करने की आखिरी तारीख भी 26 अप्रैल 2026 ही रखी गई है. अगर आवेदन में कोई गलती हो जाए तो उसे 1 मई 2026 तक ठीक करने का मौका मिलेगा. UP TET 2026 Registration: ऐसे करें रजिस्ट्रेशन सबसे पहले ऑफिशियल वेबसाइट upessc.up.gov.in पर जाएं. होमपेज पर UP TET 2026 Notification या Apply Online लिंक पर क्लिक करें. अब New Registration पर क्लिक करके जरूरी जानकारी भरें. रजिस्ट्रेशन के बाद लॉगिन करें और आवेदन फॉर्म भरें. मांगे गए डॉक्यूमेंट अपलोड करें. अपनी कैटेगरी के अनुसार आवेदन फीस जमा करें. फॉर्म सबमिट करने के बाद उसका प्रिंटआउट जरूर सेव कर लें. UP TET 2026 Notification PDF Check Here एप्लीकेशन पीस UP TET 2026 के लिए आवेदन करते समय कैंडिडेट्स को एग्जाम फीस जमा करना होगा. General, OBC और EWS वर्ग के उम्मीदवारों के लिए फीस 1000 रुपये तय की गई है. SC और ST वर्ग के लिए एप्लीकेशन फीस 500 रुपये रखा गया है. दिव्यांग उम्मीदवारों के लिए फीस 300 रुपये निर्धारित की गई है. कौन दे सकता है UP TET परीक्षा? UP TET परीक्षा देने के लिए उम्मीदवार के पास बैचलर डिग्री होना जरूरी है. इसके साथ DELED या BEd कोर्स पास या अंतिम वर्ष में होना चाहिए. इसके अलावा 10+2 में कम से कम 50 प्रतिशत अंक के साथ चार साल का BElEd कोर्स करने वाले उम्मीदवार भी आवेदन कर सकते हैं. योग्यता से जुड़ी पूरी जानकारी उम्मीदवारों को आधिकारिक नोटिफिकेशन में मिल जाएगी. यह भी पढ़ें: DRDO CEPTAM टियर 1 एग्जाम के लिए नोटिस जारी, मॉक टेस्ट लिंक एक्टिव The post UP TET 2026 का नोटिफिकेशन जारी, इस दिन से भरें फॉर्म appeared first on Naya Vichar.

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हाजत में मौत मामला: जयनगर थाना प्रभारी लाइन हाजिर, मेडिकल बोर्ड करेगा पोस्टमार्टम

Koderma: जयनगर थाना के हाजत में विजय यादव नामक व्यक्ति द्वारा कथित तौर पर आत्महत्या किये जाने के मामले में एसपी अनुदीप सिंह ने जयनगर थाना प्रभारी उमानाथ सिंह को तत्काल प्रभाव से लाइन हाजिर कर दिया है. उनके जगह पर सर्किल इंस्पेक्टर सुजीत कुमार को प्रभार दिया गया है. इसके साथ ही पुलिस इस मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के गाइड लाइन के अनुसार आगे की प्रक्रिया पूरी करने में जुटी है. एसपी अनुदीप सिंह ने बताया कि पुलिस हिरासत में मौत मामले को गंभीरता से लिया गया है. थाना प्रभारी को तत्काल प्रभाव से लाइन हाजिर किया गया है इसके साथ ही डीएसपी मुख्यालय को पूरे मामले की जांच सौंपी गयी है. एसपी ने आगे कहा कि पुलिस हिरासत में किसी भी व्यक्ति की मौत होने पर उसकी जांच के लिए एनएचआरसी का जो गाइड लाइन है उसका अनुपालन सुनिश्चित किया जा रहा है. मृतक के शव का मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम कराने की तैयारी है. इसके लिए मजिस्ट्रेट की प्रतिनियुक्ति की जा रही है. मृतक की पत्नी ने दिया आवेदन मृतक की पत्नी चमेली देवी ने पुलिस को आवेदन देकर कटिया पुलिस पिकेट के पुलिसकर्मियों पर पति के साथ मारपीट का आरोप लगाया है. स्त्री के अनुसार शिकायत पर रात में पहुंचे पिकेट के पुलिसकर्मी ने उनके सामने पति के साथ मारपीट की. उन्होंने विरोध किया तो उन्हें भी गालियां दी गयी. स्त्री ने मारपीट का आरोप प्रमोद कुमार सिंह, दीपक और चंदन सिंह पर लगाया है. स्त्री का कहना है कि देर रात विवाद के बाद पुलिस जब उनके पति को ले गयी तो एक कर्मी ने उप मुखिया सहदेव यादव को फोन कर कहा कि विजय यादव के साथ क्या करें. पुलिस पर गंभीर आरोप स्त्री ने कहा कि उन्होंने पुलिस को विजय को वापस लाने को कहा और बैठक कर पति-पत्नी के बीच का मामला सलटा देने का आश्वासन दिया, लेकिन पुलिस वाले उनके पति को जबरन जयनगर थाना ले गए. सुबह 9 बजे स्त्री को फोन आया कि अपने पति को थाना से ले जाए. स्त्री ने कहा कि थाना में पति से बात भी की तो उन्होंने बताया कि उक्त तीनों पुलिसकर्मियों ने मेरे साथ काफी मारपीट की है. इसके 10 मिनट के बाद थाना में शोर होने लगा कि विजय यादव ने दम तोड़ दिया है. स्त्री का कहना है कि मेरे पति की मौत पुलिस की मारपीट की वजह से हुई है. परिजनों ने थाने में घंटों किया हंगामा इस पूरे मामले पर दोपहर में परिजनों ने थाने में काफी देर तक हंगामा किया और इंसाफ की मांग की. इस दौरान पुलिस और परिजनों के बीच हल्की नोंकझोंक भी हुई, जिसे नियंत्रित करने के लिए पुलिस को हल्का बल प्रयोग करना पडा. परिजन और ग्रामीण शोर मचाते हुए थाना कार्यालय में घुसने का प्रयास कर रहे थे. ऐसे में पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा. स्थिति को देखते हुए थाने को पुलिस छावनी में बदल दिया गया. बारिश के बावजूद ग्रामीण घंटों थाना परिसर में अपनी मांग को लेकर डटे रहे. इस दौरान लोग पुलिस पर मारपीट कर विजय की हत्या का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग कर रहे थे. मृतक के भाई ने आरोप लगाया कि पुलिस ने विजय यादव के साथ जमकर मारपीट की जिससे उसकी मौत हो गयी. थाना में पुलिस के द्वारा मृतक की पत्नी को अंदर ले जाने पर भी लोग आक्रोशित दिखे. उनका कहना था कि पुलिस स्त्री पर दबाव डाल रही है, ताकि वह पुलिस के पक्ष में बयान दे. आम आदमी पार्टी के जिलाध्यक्ष महेश कुमार यादव ने विजय यादव की पुलिस हिरासत में हुई संदिग्ध मौत को हत्या करार देते हुए कहा कि अब थाना न्याय का केंद्र नहीं बल्कि आम आदमी के लिए भय व अत्याचार का अड्डा बन गया है. श्री यादव ने कहा कि पुलिस सच्चाई छुपाने का प्रयास कर रही है. ये भी पढ़ें… Jamshedpur: झारखंड में पहली मिनी पुंगनूर गाय जमशेदपुर पहुंची, देखने वालों का घर में लगा तांता Ranchi: सरहुल आयोजन स्थलों पर नहीं होगी पानी की किल्लत, मेयर रोशनी खलखो का अधिकारियों को निर्देश The post हाजत में मौत मामला: जयनगर थाना प्रभारी लाइन हाजिर, मेडिकल बोर्ड करेगा पोस्टमार्टम appeared first on Naya Vichar.

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नाटो देशों पर बरसे ट्रंप, कहा- कायर हैं सभी, अमेरिका के बिना सिर्फ कागजी शेर

Trump On NATO Nation: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म ट्रुथ सोशल पर NATO देशों की कड़ी आलोचनी की है. उन्होंने कहा कि अमेरिका के बिना NATO एक कागजी शेर है. ट्रंप ने आरोप लगाया कि NATO सदस्य देश परमाणु शक्ति संपन्न ईरान को रोकने की लड़ाई में शामिल नहीं होना चाहते, जबकि वे केवल तेल की बढ़ती कीमतों की शिकायत करते हैं. उन्होंने यह भी कहा कि सदस्य देश स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलने में मदद करने को तैयार नहीं हैं, जो कि एक सामान्य सैन्य अभ्यास है और उनकी माने तो तेल की ऊंची कीमतों का मुख्य कारण है. ट्रंप की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब दुनिया के देश ऊर्जा संकट से जूझ रहे हैं. ट्रंप ने अपने बयान से यह भी साफ कर दिया है कि अमेरिका ही नाटो (NATO) की असली ताकत है. ट्रंप ने नाटो देशो को डरपोक भी कहा है. US President Donald Trump posts on Truth Social -“Without the USA, NATO is a paper tiger. They didn’t want to join the fight to stop a Nuclear Powered Iran…They complain about the high oil prices they are forced to pay, but don’t want to help open the Strait of Hormuz, a… pic.twitter.com/s3EQ1UXY3V — ANI (@ANI) March 20, 2026 पहले भी नाटो पर हमला कर चुके हैं ट्रंप यह पहली बार नहीं है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर नाटो के खिलाफ आग उगला है. इससे पहले भी वो अपनी भड़ास निकाल चुके हैं. मंगलवार (17 अप्रैल) को उन्होंने ट्रूथ सोशल पर लिखा था- अमेरिका से अधिकांश NATO सहयोगियों ने कहा है कि वे मिडिल ईस्ट में ईरान के आतंकवादी शासन के खिलाफ अमेरिकी सैन्य अभियान का हिस्सा नहीं बनना चाहते हैं. यह उस समय है जब लगभग हर देश इस बात से सहमत था कि अमेरिकी कार्रवाई सही है. ईरान को किसी भी तरह से परमाणु हथियार रखने की अनुमति नहीं दी जा सकती. नाटो देशों से क्यों खफा है ट्रंप? ट्रंप नाटो देशों से इसलिए खफा हैं क्योंकि ईरान ने इजराइल-अमेरिका के साथ जारी संघर्ष के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद कर दिया है. ट्रंप चाहते थे कि चीन, फ्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया और ब्रिटेन, जर्मनी जैसे देश इस अहम समुद्री मार्ग की सुरक्षा के लिए अपनी नौसेना तैनात करें. लेकिन, इन देशों ने इसमें शामिल होने से साफ इनकार कर दिया. इसी वजह से ट्रंप नाराज हैं. उनका कहना है कि जब इन देशों का व्यापार इस जलमार्ग पर काफी हद तक निर्भर है, तो इसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी भी उन्हें ही उठानी चाहिए. ईरान के परमाणु इरादों पर ट्रंप की चेतावनी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यह भी कहा कि ईरान के खिलाफ कार्रवाई में अमेरिका को बड़ी सफलता मिली है. उन्होंने दावा किया कि दो हफ्ते पहले तक ईरान के पास मजबूत नौसैनिक ताकत थी, लेकिन अब उसकी नौसेना लगभग पूरी तरह तबाह हो चुकी है. ट्रंप ने दावा किया कि पिछले दो दिनों में ईरान के 58 जहाज नष्ट कर दिए गए और वे समुद्र में डूब गए हैं. उन्होंने दोहराया कि अमेरिका किसी भी हालत में ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देगा, क्योंकि अगर उनके पास एटम बम होते तो वे उनका इस्तेमाल करते, और हम ऐसा नहीं होने देंगे. #WATCH | US President Donald Trump says, “We’re doing extremely well in Iran…They had a navy 2 weeks ago. They have no navy anymore. It’s all at the bottom of the sea. 58 ships knocked down in 2 days. We’re not going to let them have nuclear weapons because if they had them,… pic.twitter.com/LfkgeQwGzA — ANI (@ANI) March 20, 2026 Also Read: जंग के बीच ईरान ने दी धमकी, कहा- दुनिया में कहीं भी सुरक्षित नहीं रहेंगे तेहरान के दुश्मन The post नाटो देशों पर बरसे ट्रंप, कहा- कायर हैं सभी, अमेरिका के बिना सिर्फ कागजी शेर appeared first on Naya Vichar.

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नीतीश के ‘टच’ का सियासी ट्रेंड, जिसे बताया वारिस, वही हुआ साइडलाइन! क्‍या अब सम्राट की बारी?

समाचार में खास प्रशांत किशोर बिहार में तलाश रहे जमीन आरसीपी सिंह प्रशांत की पार्टी में दे रहे सेवा हाशिए पर गए ललन मनीष वर्मा और संजय झा फोकस से बाहर नीतीश का ‘हाथ’ सियासी ‘ग्रहण’ तो नहीं तेजस्वी के कंधे पर भी रखा था हाथ क्‍या कहते हैं नेतृत्वक विश्लेषक सम्राट के पक्ष में नहीं कयास बीजेपी और सम्राट के लिए असहज ‘इतना प्रोजेक्‍शन’ सम्राट के सामने भी कम चुनौती नहीं सम्राट बीजेपी के लिए अछूत नहीं Nitish Kumar political successor pattern : बिहार की नेतृत्व में Nitish Kumar की शैली हमेशा से संकेतों और प्रतीकों के जरिए संदेश देने वाली रही है. लेकिन उनके सियासी ‘टच’ को लेकर एक दिलचस्प और कुछ हद तक डराने वाला ट्रेंड भी रहा है. जिसकी वजह से नीतीश चर्चा में भी रहे हैं. बिहार की नेतृत्व में अक्सर इस बात की चर्चा होती है कि नीतीश कुमार ने जिन नेताओं को भी आगे बढ़ाया है या उसे अपना नेतृत्वक वारिस बताया है. उस नेता का नेतृत्वक करियर धीरे-धीरे हाशिये पर चला गया है. प्रशांत किशोर बिहार में तलाश रहे जमीन ऐसा नहीं है कि यह बात हवा में कही जा रही है. इसके पीछे उदाहरण भी हैं. बिहार की नेतृत्व में ऐसे आधे दर्जन उदाहरण तो हैं ही! इसमें एक नाम तेजस्वी यादव का भी लिया जा सकता है. आपको याद होगा नीतीश कुमार ने कभी प्रशांत किशोर पर भरोसा जताया था. उनके कंधे पर भी हाथ रखा था. Prashant Kishor कभी जेडीयू के सेकेंड मैन कहे जाते थे. नीतीश ने उन्हें जेडीयू का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया. लेकिन बाद हुआ क्या? आज वो पार्टी से बाहर हैं. बिहार की नेतृत्व में जमीन तलाश रहे हैं. आरसीपी सिंह प्रशांत की पार्टी में दे रहे सेवा दूसरा नाम आरसीपी सिंह का भी है. एक प्रशासनिक अधिकारी को नेतृत्व में लाने वाले नीतीश कुमार ही थे. उन्हें पार्टी में महत्वपूर्ण पद दिए. नीतीश ने उन्हें उपाध्यक्ष बनाया. एक बार उन्हें राष्ट्रीय अध्यक्ष भी बना डाला. लेकिन हुआ क्या? आज वो बिहार की नेतृत्व में लगभग खोया हुआ नाम हैं. जेडीयू से अलग होने के बाद उन्होंने संघर्ष किया. अपनी अलग पार्टी बनाई. मगर आज वो अपनी पार्टी का विलय प्रशांत किशोर की जनसुराज के साथ कर उनकी पार्टी में ही अपनी सेवा दे रहे हैं. कभी उन्हें जेडीयू का सर्वेसर्वा माना जाता था. नीतीश कुमार का नेतृत्वक उत्तराधिकारी माना जाता था. हाशिए पर गए ललन ललन सिंह भी इस लिस्ट में शामिल हैं. जिन्हें नीतीश कुमार का करीबी और विश्वासपात्र माना जाता था. उन्हें भी कभी पार्टी का सर्वेसर्वा और नीतीश का उत्तराधिकारी माना जा रहा था. इस बात की चर्चा बिहार की नेतृत्व में आम थी कि नीतीश कुमार अपनी नेतृत्वक विरासत ललन सिंह के हाथ सौंप सकते हैं. नीतीश कुमार ने उन्हें पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष भी बनाया. लेकिन बाद में उन्हें हटना पड़ा. आज की स्थिति से आप सभी अवगत हैं. मनीष वर्मा और संजय झा फोकस से बाहर इसी लिस्‍ट में मनीष वर्मा और संजय झा जैसे नाम भी शामिल हैं. अब इनके बारे में ज्यादा लिखा जाएगा तो स्‍टोरी लंबी हो जाएगी. मगर इन्‍हें भी ‘नेक्‍सट टू नीतीश’ कहा जा रहा था. यह भी अनुमान लगाया जा रहा था कि नीतीश कुमार आगे चल कर अपनी विरासत इन्‍हीं को सौंप सकते हैं. मगर आज नेतृत्व के हाशिये पर हैं और केंद्र में केवल नीतीश. यहां गौर करने वाली बात ये है कि नीतीश ने इन सभी के ‘कंधे पर अपना हाथ’ रखा था. नीतीश का ‘हाथ’ सियासी ‘ग्रहण’ तो नहीं अब नीतीश कुमार का ‘हाथ’ बिहार के डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी के ‘कंधे’ पर है. वो अपनी आधी दर्जन जनसभाओं में सम्राट को अपने उत्तराधिकारी के रूप में भरोसा जता चुके हैं. ऐसे में जो उदाहरण पीछे हैं. उसके आधार पर ये सियासी सवाल विश्लेषकों के मन में उठना लाजमी है कि क्या नीतीश का हाथ ‘सियासी ग्रहण’ तो नहीं!  तेजस्वी के कंधे पर भी रखा था हाथ इसी कड़ी में बिहार की विपक्षी पार्टी के युवा नेता तेजस्वी यादव का नाम भी है. नीतीश ने कभी इनके कंधे पर भी हाथ रखा था. ये भी कहा था कि ‘अब आगे यही लोग देखेगा’. लेकिन हुआ क्या! तेजस्वी यादव 25 सीटों पर सिमट गए. नेता प्रतिपक्ष बने रहने की हैसियत भी बाल बाल बची. क्‍या कहते हैं नेतृत्वक विश्लेषक पत्रकार और बिहार की नेतृत्व पर पैनी निगाह रखने वाले कौशलेंद्र प्रियदर्शी नीतीश कुमार का सम्राट चौधरी के ‘कंधे पर हाथ’ को ‘सियासी ग्रहण’ के रूप में देख रहे हैं. उनका कहना है कि अब तक नीतीश कुमार ने जिन जिन नेताओं पर भरोसा जताया है, उनका नेतृत्वक करियर अर्श से फर्श पर आया है. अब सम्राट चौधरी के कंधे पर हाथ है. ऐसे में उन्‍हें अंदेशा है कि कहीं सम्राट के लिए भी नीतीश का आशीर्वाद घातक तो साबित नहीं होगा? सम्राट के पक्ष में नहीं कयास इधर, इन्हीं आशंकाओं के बीच एक और नेतृत्वक अटकलें जोर पकड़ रहीं हैं. वो सम्राट चौधरी के पक्ष में नहीं. वैसे तो सम्राट चौधरी विपक्ष के हमलों तीखा जवाब देते हैं. एक मजबूत छवि भी दिखाने की कोशिश करते हैं. जिसमें वो सफल भी रहे हैं. लेकिन यहां नेतृत्वक मैग्निफाइन ग्‍लास को थोड़ा ऊपर करने की जरूरत है. ताकी वो महीन चीजें भी नजर आएं जो नंगी आंखों से नहीं दिखाई दे रही है.  बीजेपी और सम्राट के लिए असहज ‘इतना प्रोजेक्‍शन’ नीतीश लगातार सम्राट चौधरी को अगले मुख्यमंत्री के रूप में प्रोजेक्ट कर रहे हैं. जो बीजेपी और खुद सम्राट को असहज कर रहा है. ये अलग बात है कि बीजेपी ने सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री के रूप में तैयार किया है. लेकिन बीजेपी चुपचाप काम करने वाली पार्टी है. ऐसे में जिस तरह से नीतीश सम्राट को प्रोजेक्ट कर रहे हैं, वह उनके लिए घातक हो सकता है. बीजेपी ने हमेशा चौंकाया है. दिल्ली हो या मध्‍यप्रदेश हमने अचानक से एक अलग ही चेहरा देखा है. जो चर्चा से बिल्कुल अलग रहा है. ऐसे में नीतीश कुमार का इतना प्रोजेक्‍शन सम्राट के लिए ग्रहण साबित हो सकता है. ये अलग बात है कि बीजेपी ने सम्राट पर अपना समय लगाया है लेकिन बीजेपी एक सेंट्रलाइज पार्टी है. नालंदा: प्रशांत किशोर

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घर के अंदर गीले कपड़े सुखाना सही है या गलत? जानें वास्तु शास्त्र के नियम

Vastu Tips: क्या आपके दिमाग में कभी यह सवाल आया है कि घर के अंदर जिन गीले कपड़ों को आप सुखा रहे हैं उनका असर आपको किस्मत और मूड पर कैसा पड़ सकता है? हम में से ज्यादातर लोग वही हैं जिन्हें लगता है कि यह एक नॉर्मल आदत है और इसमें कोई बुराई नहीं है. कई बार बारिश की वजह से तो कई बार जगह को कमी या फिर ठंड की वजह से हम गीले कपड़ों को घर के अंदर ही सुखाने लगते हैं. अगर आप भी ऐसा ही करते हैं तो यह आर्टिकल आपके लिए आंखें खोल देने वाली हो सकती हैं. वास्तु शास्त्र के अनुसार आपकी यह आदत घर की एनर्जी, मेंटल पीस और यहां तक की फिनांशियल कंडीशन पर भी काफी गहरा असर डाल सकती है. अगर आप भी घर पर कपड़े सुखाते हैं तो आपके लिए इस आर्टिकल को पढ़ना और भी ज्यादा जरूरी हो जाता है. आज हम आपको बताने वाले हैं कि आपकी इस आदत का कैसा असर आपकी जिंदगी पर पड़ता है और क्या आपको वाकई में ऐसा करना चाहिए. घर के अंदर कपड़े सुखाने का असर वास्तु शास्त्र के अनुसार आपके घर पर पॉजिटिव और निगेटिव एनर्जी का बैलेंस होना काफी ज्यादा जरूरी हो जाता है. जब आप गीले कपड़ों को घर के अंदर सुखाते हैं तो इसकी वजह से मॉइस्चर बढ़ने लगता है. यही मॉइस्चर आगे चलकर निगेटिव एनर्जी को बढ़ाने का काम करता है. अगर आप घर के अंदर कपड़े सुखाते हैं तो कुछ ही समय में आपको अपने घर का माहौल भारी और अजीब सा लगने लगेगा. यह भी पढ़ें: घर घुसते समय कहीं आप भी तो नहीं करते ये 5 गलतियां? जानिए इनका असर आपकी जिंदगी पर सेहत पर पड़ सकता है असर जब आप घर के अंदर गीले कपड़ों को सुखाते हैं तो इसकी वजह से हवा में मॉइस्चर बढ़ जाता है जिस वजह से फंगस और बैक्टीरिया का खतरा भी बढ़ जाता है. ऐसा होना आपकी सेहत के लिए भी काफी हानिकारक साबित हो सकता है. अगर आप एलर्जी, अस्थमा या फिर सांस लेने से जुड़ी प्रॉब्लम्स है, तो आपकी सेहत के लिए यह आदत काफी ज्यादा खतरनाक साबित हो सकती है. फिनांशियन कंडीशन पर भी पड़ता है असर वास्तु शास्त्र के अनुसार, जिस घर में हर समय एक भीगा हुआ सा एहसास रहता है उस घर में मां लक्ष्मी कभी ठहरती नहीं हैं. जब आपके घर से मां लक्ष्मी चली जाती है तो इसका सीधा असर आपकी फिनांशियल कंडीशन पर पड़ता है. घर के अंदर कपड़े सुखाने की आपकी आदत की वजह से बेवजह के खर्चे बढ़ जाते हैं और साथ ही आपको पैसों की कमी से भी जूझना पड़ जाता है. मजबूरी में अंदर सुखाना पड़े तो क्या करें? अगर आपके पास कपड़ों को घर के अंदर सुखाने के अलावा और कोई ऑप्शन नहीं है तो ऐसे में आप कुछ उपाय अपनाकर इसकी वजह से होने वाले निगेटिव इफेक्ट को कम कर सकते हैं. आपको गीले कपड़ों को उसी जगह पर सुखाना है जहां पर हवा अच्छी तरह से आ-जा सकती हो. इसके अलावा आपको मॉइस्चर के बाहर निकलने के लिए खिड़कियों और दरवाजों को भी खोलकर रख देना है. गीले कपड़ों को आपको कभी भी बेडरूम या फिर पूजाघर में नहीं सुखाना चाहिए. यह भी पढ़ें: बाथरूम का दरवाजा खुला रखना पड़ सकता है महंगा, हो सकती हैं ये बड़ी परेशानियां The post घर के अंदर गीले कपड़े सुखाना सही है या गलत? जानें वास्तु शास्त्र के नियम appeared first on Naya Vichar.

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रूम में प्रैक्टिस करके आया, यशस्वी के छक्का मारने पर जडेजा का मजेदार जवाब वायरल

Highlights यशस्वी जायसवाल का अभ्यास में कमाल  रवींद्र जडेजा ने लिए जायसवाल के मजे  संजू चेन्नई गए और जडेजा राजस्थान आए  वैभव सूर्यवंशी पर भी रहने वाली है नजर  Yashasvi Jaiswal Ravindra Jadeja Video: आईपीएल 2026 के लिए राजस्थान रॉयल्स ने अपनी तैयारी तेज कर दी है. साल 2025 का आईपीएल सीजन टीम के लिए निराशा से भरा था. पिछले साल राजस्थान रॉयल्स 10 टीमों की अंक तालिका में 9वें स्थान पर रही थी. इस बार टीम ने पुरानी हार को भुलाते हुए नई शुरुआत करने का मन बनाया है. अनुभव को महत्व देते हुए टीम ने रवींद्र जडेजा और रवि बिश्नोई को अपने साथ शामिल किया है. इन दोनों के आने से राजस्थान का बॉलिंग और ऑलराउंड विभाग बहुत मजबूत हो गया है. हालांकि इस सीजन में टीम की सफलता बहुत हद तक उनके स्टार ओपनर बल्लेबाज यशस्वी जायसवाल पर निर्भर रहने वाली है.  यशस्वी जायसवाल का अभ्यास में कमाल  सोशल मीडिया पर राजस्थान टीम के अभ्यास सत्र का एक वीडियो बहुत तेजी से वायरल हो रहा है. इस वीडियो में यशस्वी जायसवाल अपनी पहली ही गेंद पर एक गगनचुंबी छक्का मारते हुए नजर आ रहे हैं. जायसवाल ने आईपीएल 2025 में भी बेहतरीन बल्लेबाजी की थी और 14 मैचों में कुल 559 रन बनाए थे. टीम को इस नए सीजन में भी जायसवाल से ऐसे ही आक्रामक स्पोर्ट्स और अच्छी शुरुआत की उम्मीद है. रवींद्र जडेजा ने लिए जायसवाल के मजे  वीडियो में जायसवाल का ऐसा आक्रामक रूप देखकर साथी प्लेयर रवींद्र जडेजा भी हैरान रह गए. अभ्यास के दौरान जडेजा ने जायसवाल का मजाक बनाते हुए कहा कि अभी कह रहा है नींद नहीं हुई रात को, रूम में प्रैक्टिस करके आया है ये. टीम के अभ्यास सत्र में इस तरह का माहौल अन्य सदस्यों का भी हौसला मजबूत करने वाला है और यह टीम के अंदर की अच्छी मानसिकता को दर्शाता है. View this post on Instagram A post shared by Rajasthan Royals (@rajasthanroyals) संजू चेन्नई गए और जडेजा राजस्थान आए  इस नए सीजन से पहले ट्रेड विंडो के समय एक बहुत अहम बदलाव देखने को मिला है. लंबे समय तक राजस्थान टीम की कप्तानी करने वाले संजू सैमसन अब चेन्नई सुपर किंग्स का हिस्सा बन गए हैं. उनके बदले में रवींद्र जडेजा ने अब राजस्थान रॉयल्स की जर्सी पहन ली है. सैमसन का जाना टीम के लिए एक अहम बदलाव है लेकिन जडेजा का अनुभव टीम के बहुत काम आने वाला है. वैभव सूर्यवंशी पर भी रहने वाली है नजर  इस साल क्रिकेट प्रेमियों का ध्यान युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी पर भी रहने वाला है. अपने पहले ही सीजन में वैभव ने पूरी दुनिया को अपनी प्रतिभा दिखा दी थी. उन्होंने पिछले साल 7 मैचों में कुल 252 रन बनाए थे. इसी दौरान वैभव ने मात्र 35 गेंदों में शतक मारा था जो आईपीएल इतिहास में किसी भी हिंदुस्तानीय द्वारा लगाया गया सबसे तेज शतक है. जायसवाल और सूर्यवंशी का एक साथ ओपनिंग करना विरोधी टीमों के बॉलर्स के लिए सबसे अहम परेशानी बन सकता है. ये भी पढ़ें- IPL 2026: KKR की टेंशन हुई दूर, घातक बॉलर फिट होकर टीम से जुड़ने को तैयार 6 महीने से शराब नहीं पी… युजवेंद्र चहल ने IPL 2026 से पहले फिटनेस पर दिया अपडेट IPL 2026 से पहले सीएसके का मास्टरस्ट्रोक, पुराने चैंपियंस के साथ सजेगी महफिल The post रूम में प्रैक्टिस करके आया, यशस्वी के छक्का मारने पर जडेजा का मजेदार जवाब वायरल appeared first on Naya Vichar.

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खद्दी, बा परब या बहा: नाम अनेक पर आस्था एक, झारखंड में सरहुल की धूम, जानें 3 दिनों का पूरा विधान

Sarhul Jharkhand 2026, रांची : झारखंड में मनाया जाने वाला सरहुल केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि प्रकृति के साथ जुड़कर जीने की परंपरा है. ‘सर’ का अर्थ सरई (साल का फूल) और ‘हूल’ का मतलब क्रांति होता है. यह पर्व प्रकृति के प्रति सम्मान, पर्यावरण संरक्षण और आदिवासी संस्कृति को जीवित रखने का प्रतीक है. हालांकि इस पर्व को धरती माता और सूर्य के विवाह से भी जोड़कर जाता है. क्योंकि इस दौरान नई फसल (धान) और आम के फल को धरती माता को समर्पित किया जाता है. अलग-अलग समुदायों में अलग नाम सरहुल को विभिन्न जनजातीय समुदायों में अलग-अलग नामों से जाना जाता है. उरांव समुदाय इसे ‘खद्दी’, मुंडा समुदाय ‘बा परब’ और संथाल समाज ‘बहा परब’ के नाम से मनाता है. यह पर्व झारखंड के अलावा बिहार, छत्तीसगढ़ और ओडिशा समेत कई राज्यों में मनाया जाता है, लेकिन झारखंड में इसकी भव्यता देखते ही बनती है. प्रकृति के प्रति आभार का पर्व आदिवासी समाज के लिए सरहुल नया साल भी माना जाता है. इस दिन लोग प्रकृति के प्रति आभार प्रकट करते हैं और अच्छी फसल की कामना करते हैं. मान्यता है कि मनुष्य प्रकृति से जीवन प्राप्त करता है, इसलिए उसका सम्मान करना जरूरी है. Also Read: जादूगोड़ा के मृत मजदूरों के घर पहुंचे विधायक संजीव सरदार, मदद का दिया भरोसा सखुआ वृक्ष की विशेष पूजा इस पर्व में सखुआ (साल) के वृक्ष की विशेष पूजा की जाती है. जनजातीय मान्यता के अनुसार, इसी वृक्ष में उनके आराध्य देव निवास करते हैं. साथ ही इस मौसम में इस पर नये फूल आते हैं, जो नवजीवन का प्रतीक है. तीन दिनों तक चलता है उत्सव सरहुल का पर्व तीन दिनों तक मनाया जाता है. पहले दिन घरों की साफ-सफाई होती है और गांव के पाहन उपवास रखते हैं. दूसरे दिन सरना स्थल पर जल स्तर देखकर वर्षा का अनुमान लगाया जाता है और पूजा के बाद ‘तहरी’ प्रसाद के रूप में बांटी जाती है. तीसरे दिन ‘फूल खोंसी’ की परंपरा निभाई जाती है, जिसमें पाहन घर-घर जाकर सखुआ के फूल देकर आशीर्वाद देते हैं. परंपरा से जुड़ाव का संदेश समय के साथ सरहुल का स्वरूप बदला है. अब यह केवल सरना स्थल तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सामाजिक एकता का प्रतीक बन गया है. ढोल, नगाड़े और मांदर की थाप पर लोग पारंपरिक वेशभूषा में सड़कों पर भव्य शोभायात्रा निकालते हैं. Also Read: सरायकेला: 1 शिक्षक, आठ क्लास और 15 मिनट की कक्षा! उत्क्रमित मध्य विद्यालय में मजाक बनी पढ़ाई The post खद्दी, बा परब या बहा: नाम अनेक पर आस्था एक, झारखंड में सरहुल की धूम, जानें 3 दिनों का पूरा विधान appeared first on Naya Vichar.

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सांसद शांभवी चौधरी बनीं LJP(R) छात्र विंग की नेशनल प्रेसिडेंट, चिराग पासवान का बड़ा फैसला

Chirag Paswan: शांभवी चौधरी को लोक जनशक्ति पार्टी (रा) के छात्र प्रकोष्ठ का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया है. पार्टी ने उनकी योग्यता, सक्रियता और युवाओं के बीच पकड़ को देखते हुए यह बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है. यह नियुक्ति चिराग पासवान के नेतृत्व में की गई है. पार्टी के राष्ट्रीय प्रधान महासचिव अब्दुल खालिक ने ऑफिसियल पत्र जारी कर इस फैसले की जानकारी दी. इसमें कहा गया है कि शांभवी चौधरी के नेतृत्व में छात्र प्रकोष्ठ को नई दिशा और ऊर्जा मिलेगी. शांभवी चौधरी का सोशल मीडिया पोस्ट क्या बोलीं चौधरी इस जिम्मेदारी मिलने के बाद शांभवी चौधरी ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट भी शेयर किया. उन्होंने पार्टी नेतृत्व का धन्यवाद करते हुए कहा कि यह पद उनके लिए सिर्फ एक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि युवाओं की आवाज को मजबूत करने का मौका है. उन्होंने भरोसा दिलाया कि वह पूरी ईमानदारी और मेहनत से इस भूमिका को निभाएंगी. बिहार की ताजा समाचारों के लिए क्लिक करें पार्टी की विचारधारा को बढ़ाने के लिए करेंगी काम शांभवी चौधरी ने यह भी कहा कि पार्टी की विचारधारा और मूल्यों को आगे बढ़ाने के लिए वह लगातार काम करेंगी. उन्होंने कहा कि युवाओं को संगठित करना और उन्हें सही दिशा देना उनकी प्राथमिकता होगी. उन्होंने पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं के सहयोग को अपनी सबसे बड़ी ताकत बताया. पार्टी के अंदर इस फैसले को लेकर सकारात्मक माहौल देखा जा रहा है. माना जा रहा है कि शांभवी चौधरी के आने से छात्र प्रकोष्ठ और ज्यादा सक्रिय होगा और युवाओं के बीच पार्टी की पकड़ मजबूत होगी. इसे भी पढ़ें: बिहार के 3 जिलों में ऑरेंज और 22 जिलों में येलो अलर्ट, IMD ने भारी बारिश और वज्रपात की जारी की चेतावनी बिहार में विजिलेंस का एक्शन, 12000 घूस लेते हुए पकड़ी गईं पंचायत राज पदाधिकारी The post सांसद शांभवी चौधरी बनीं LJP(R) छात्र विंग की नेशनल प्रेसिडेंट, चिराग पासवान का बड़ा फैसला appeared first on Naya Vichar.

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