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March 28, 2026

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Bokaro: रामनवमी जुलूस में बड़ा हादसा, हाई टेंशन तार से छू गया झंडा, 7 लोग झुलसे

Bokaro (बेरमो/फुसरो): रामनवमी पर्व के दौरान पेटरवार थाना क्षेत्र अंतर्गत खेतको शिव मंदिर के समीप शुक्रवार की शाम पांच बजे एक बड़ा हादसा हो गया. अखाड़ा में महावीरी झंडा खड़ा करने के दौरान यह 132 केवी (एक लाख 32 हजार वोल्ट) के हाइटेंशन टावर के संपर्क में आ गया. इससे सात लोग झुलस गये. घायलों में खेतको निवासी सुरेंद्र सिंह (36 वर्ष), गुलाबचंद दास (28 वर्ष), मिथुन ठाकुर (30 वर्ष), अनिल रविदास (40 वर्ष), मदन कुमार नायक, शुभम रविदास (24 वर्ष) और रुद्र रविदास (15 वर्ष) शामिल हैं. घायलों की हालत स्थिर इलाज के बाद रुद्र रविदास को घर भेज दिया गया, जबकि अन्य घायलों को तत्काल जारंगडीह रेलवे स्टेशन के समीप स्थित जनता हॉस्पिटल पहुंचाया गया. यहां प्राथमिक उपचार के बाद सभी को बेहतर इलाज के लिए बोकारो जनरल अस्पताल रेफर कर दिया गया. चिकित्सकों के अनुसार, सभी घायल फिलहाल खतरे से बाहर हैं, लेकिन उनके हाथ, पैर और कंधे झुलस गये हैं. झंडा खड़ा करते समय हाइटेंशन टावर के संपर्क में आया ग्रामीणों के अनुसार, परंपरा के तहत रामनवमी जुलूस खेतको शिव मंदिर स्थित अखाड़ा पहुंचा था. एक अखाड़ा द्वारा महावीरी झंडा खड़ा करने के बाद जब रविदास टोला का झंडा खड़ा किया जा रहा था, तभी वह हाइटेंशन टावर के दायरे में आ गया और यह हादसा हो गया. घटना के बाद क्षेत्र में अफरा-तफरी मच गयी. अस्पताल परिसर में देर शाम तक लोगों की भीड़ लगी रही. सूचना मिलते ही बेरमो विधायक कुमार जयमंगल, एसडीएम मुकेश मछुआ और एसडीपीओ बीएन सिंह अस्पताल पहुंचे तथा घायलों का हाल-चाल जाना. विधायक ने सभी के बेहतर इलाज के लिए बोकारो उपायुक्त अजय नाथ झा से बात की. ये भी पढ़ें… Ranchi Weather: झमाझम बारिश से मौसम हुआ सुहाना, कम नहीं हुआ रामभक्तों का उत्साह गढ़वा रामनवमी विवाद में दोनों पक्षों के 19 लोग गिरफ्तार, थाना प्रभारी लाइन हाजिर The post Bokaro: रामनवमी जुलूस में बड़ा हादसा, हाई टेंशन तार से छू गया झंडा, 7 लोग झुलसे appeared first on Naya Vichar.

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IPL 2026 में AI और टेक्नोलॉजी से बदलेगा क्रिकेट का रोमांच, कमाल की तैयारी

इस बार इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) सिर्फ खिलाड़ियों की बल्लेबाजी और गेंदबाजी तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि हाई-टेक्नोलॉजी इसे और भी रोमांचक बनाने वाली है. जसप्रीत बुमराह की यॉर्कर से लेकर महेंद्र सिंह धोनी की बैटिंग तक, हर मूवमेंट को अब AI और स्मार्ट सेंसर ट्रैक करेंगे. दर्शकों को ऐसा अनुभव मिलेगा जो पहले कभी नहीं देखा गया. AI-Enhanced DRS: भीड़ में भी पकड़ लेगा असली एज नया AI-Enhanced DRS सिस्टम अब रियल-टाइम में आवाज की बारीकियों को पकड़ सकेगा. इसमें नॉयज फिल्टरिंग तकनीक होगी, जिससे स्टेडियम की भीड़ के शोर में भी असली एज छुप नहीं पाएगा. इसका मतलब है कि विवादित फैसलों में अब और भी सटीकता आएगी. पिच का 3D व्यू और गेंद का डेटा ब्रॉडकास्टर्स अब 3D पिच व्यू टेक्नोलॉजी से दर्शकों को दिखाएंगे कि पिच ओवर दर ओवर कैसे बदलती है. वहीं गेंद में लगे सेंसर उसकी स्पीड, स्पिन और मूवमेंट का डेटा देंगे.बुमराह की यॉर्कर या चहल की गुगली अब सिर्फ आंखों से नहीं, बल्कि नंबरों में भी देखी जा सकेगी. मशीन लर्निंग से जीत की संभावना टीमें अब सिर्फ अनुभव पर नहीं, बल्कि प्रेडिक्टिव विन-प्रोबैब्लिटी एल्गोरिद्म पर भी भरोसा करेंगी. यह सिस्टम मैच का प्रेशर इंडेक्स बताएगा और दर्शकों को यह अंदाजा देगा कि किस टीम की जीत की संभावना कितनी है. खिलाड़ियों की फिटनेस और स्टेडियम सुरक्षा खिलाड़ियों के कपड़ों में लगे Wearable Player Analytics सेंसर उनकी हार्ट रेट, थकान और चोट के खतरे का डेटा देंगे. वहीं स्टेडियम में लगे AI-पावर्ड कैमरे भीड़ पर नजर रखेंगे और किसी भी अनहोनी से पहले अलर्ट जारी करेंगे. बारिश वाले मैदानों में Sub-Air Drainage Systems लगाये गए हैं, जिससे स्पोर्ट्स जल्दी शुरू हो सकेगा. यह भी पढ़ें: IPL का एक भी मैच नहीं होगा मिस, Airtel इस प्लान में दे रहा JioHotstar फ्री यह भी पढ़ें: IPL फैंस के लिए खास Jio प्लान, 90 दिन तक मिलेगा फ्री JioHotstar और डेली 3GB डेटा The post IPL 2026 में AI और टेक्नोलॉजी से बदलेगा क्रिकेट का रोमांच, कमाल की तैयारी appeared first on Naya Vichar.

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सरकारी खर्च पर लग्जरी कार! छोटे अफसरों को भी अब मिलेगी VIP सवारी… मंत्री को 37 लाख की गाड़ी

Bihar government car limit increase : बिहार में अब प्रशासनी अफसरों और मंत्रियों की सवारी पहले से ज्यादा लग्जरी और आधुनिक होने वाली है. जी हां, राज्य प्रशासन ने बढ़ती महंगाई और ऑटोमोबाइल बाजार में कीमतों को देखते हुए प्रशासनी वाहनों की खरीद सीमा में बड़ा इजाफा कर दिया है! इस फैसले के बाद अब सत्ता के शीर्ष से लेकर जिला स्तर और निचले स्तर के अधिकारियों तक के हर वर्ग के लिए गाड़ियों का बजट बढ़ा दिया गया है. पांच श्रेणियों में बंटी वाहन खरीद बिहार प्रशासन ने राज्य के मंत्रियों, न्यायाधीशों और प्रशासनिक अधिकारियों के लिए प्रशासनी वाहनों की खरीद सीमा में बड़ा इजाफा किया है. बढ़ती महंगाई और ऑटोमोबाइल बाजार में गाड़ियों की बढ़ती कीमतों को देखते हुए प्रशासन ने यह निर्णय लिया है. अब सत्ता के शीर्ष से लेकर जिला स्तर के अधिकारियों तक की गाड़ियां पहले से अधिक आधुनिक, सुरक्षित और प्रीमियम नजर आयेंगी. नई व्‍यवस्‍था के तहत 37 लाख की गाड़ी नयी व्यवस्था के तहत मंत्री, हाइकोर्ट के जज और उनके समकक्ष अब 37 लाख रुपए तक की गाड़ी में चल सकेंगे, जबकि पहले यह सीमा 30 लाख रुपए थी. यानी प्रशासन ने इस श्रेणी में सीधे सात लाख रुपए की बढ़ोतरी कर दी है. वरिष्ठ नौकरशाह को भी इस फैसले से बड़ा लाभ मिलने वाला है. अपर मुख्य सचिव, प्रधान सचिव और सचिव स्तर के अधिकारियों के लिए वाहन खरीद की सीमा 25 लाख से बढ़ाकर 30 लाख रुपए कर दी गयी है. अफसरों को भी बड़ा फायदा इस फैसले का लाभ जिला स्तर पर भी देखने को मिलेगा. जिला पदाधिकारी और प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश अब 22 लाख रुपए तक की गाड़ी खरीद सकेंगे, जो पहले 20 लाख रुपए थी. पुलिस अधीक्षक के लिए यह सीमा 16 लाख से बढ़ाकर 18 लाख रुपए कर दी गयी है. छोटे अफसर भी हुए ‘अपग्रेड’ सबसे अहम बदलाव निचले स्तर के अधिकारियों के लिए है. अब अन्य पदाधिकारी, जिन्हें प्रशासनी वाहन की सुविधा मिलती है, वे 16 लाख रुपए तक की गाड़ी खरीद सकेंगे. पहले यह सीमा 14 लाख रुपए थी. यानी अब सबसे छोटे अफसर भी पहले से ज्यादा आधुनिक और महंगी गाड़ियों में अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करेंगे.प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि नयी अधिसीमा में वाहन की ऑन रोड कीमत और अन्य सभी खर्च शामिल होंगे. अब बदल जाएगी ‘प्रशासनी सवारी’ की तस्वीर पहले जहां मंत्री वर्ग मुख्य रूप से टोयोटा इनोवा क्रिस्टा या टोयोटा फॉर्च्यूनर तक सीमित थे, अब उनकी सवारी सीधे बड़ी और लग्जरी श्रेणी में शिफ्ट हो सकती है. उच्च स्तर के अफसर अब टोयोटा इनोवा हाईक्रॉस, महिंद्रा एक्सयूवी 700 और टाटा सफारी जैसी प्रीमियम गाड़ियां ले सकेंगे. जिला स्तर पर डीएम और जज अब सीधे टॉप मॉडल गाड़ियों में नजर आयेंगे. वहीं जो छोटे अफसर अब तक बोलेरो जैसी परंपरागत गाड़ियों में चलते थे, वे अब आधुनिक और आरामदायक वाहनों में शिफ्ट हो सकेंगे. साफ है कि अब जिम्मेदारी के साथ-साथ सवारी का स्तर भी पूरी तरह बदल गया है. Also Read :100KG कचरा? तो खुद निपटाओ वर्ना होगी कार्रवाई, नहीं छांटा तो सफाई बंद! 1 अप्रैल से लागू होगा नियम The post प्रशासनी खर्च पर लग्जरी कार! छोटे अफसरों को भी अब मिलेगी VIP सवारी… मंत्री को 37 लाख की गाड़ी appeared first on Naya Vichar.

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100KG कचरा? तो खुद निपटाओ वर्ना होगी कार्रवाई, नहीं छांटा तो सफाई बंद! 1 अप्रैल से लागू होगा नियम

Bihar Waste Management Rules 2026 : अगर आप राजधानी निगर निकायों में हैं, तो ये समाचार आपके लिए खास है. वर्ना आपका कचरा साफ नहीं होगा. तो जान लीलिए, पटना समेत बिहार के सभी नगर निकायों में 1 अप्रैल से कचरा प्रबंधन को लेकर बड़ा बदलाव लागू होने वाला है. यानी अब कचरा फेंकने वाला वो पुराना तरीका नहीं चलेगा. नए नियम के तहत आम लोगों से लेकर बड़े संस्थानों तक के लिए सभी को कड़े नियमों का पालन करना होगा. 100 किलो से ज्यादा कचरा?  नए नियम के मुताबिक जो संस्थान रोजाना 100 किलो से ज्यादा कचरा प्रोड्यूस करते हैं या जिनका क्षेत्रफल 20 हजार वर्ग मीटर से अधिक है, उन्हें ‘थोक कचरा उत्पादक’ माना जाएगा. ऐसे कचरा प्रोड्यूजर्स को अपना कचरा खुद साफ करना होगा. इसमें अपार्टमेंट, होटल, प्रशासनी कार्यालय और बड़े संस्थान शामिल होंगे. खुद करना होगा निस्तारण ऐसे कचरा उत्‍पादकों को अपने परिसर में ही कचरे का निस्‍तारण करना होगा. गीले कचरे की ऑन साइट कंपोस्टिंग करनी होगी. इन्‍हें कचरे की प्रोसेसिंग की पूरी व्यवस्था खुद ही करनी होगी. निगरानी के लिए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने ऑनलाइन ट्रैकिंग सिस्टम भी तैयार किया है. अब 4 रंग के डस्टबिन में देना होगा कचरा अब तक लोग गीला और सूखा कचरा अलग-अलग देते थे. लेकिन अब 1 अप्रैल से यह नियम और सख्त होने वाला है. अब कचरे को चार अलग-अलग चार श्रेणियों में बांटना अनिवार्य कर दिया गया है. इसके लिए डस्‍टबिन का रंग भी निधारित कर दिया गया है. यानी अब लोगों को कचरे का वर्गीकरण कर ही उन्‍हें फेंकना होगा. ऐसे होगी कचरे की पहचान हरे रंग के डस्‍टबिन में : गीला कचरा (रसोई, सब्जी, फल) यानी ग्रीन वेस्‍ट मेटेरियल डाले जाएंगे.नीले रंग के डस्‍टबिन में : सूखा कचरा होगा जिसमें प्लास्टिक, कागज, धातु फेंके जाएंगे यानी ऐसा कचरा जो रीसाइकिल हो सके.लाल रंग के डस्‍टबिन में : सेनेटरी वेस्ट डायपर, नैपकिन जैसे कचरे फेंके जाएंगे. जो वेस्‍ट होगा.काला रंग के डस्‍टबिन में : खतरनाक/स्पेशल वेस्ट जैसे ई-वेस्ट, बल्ब, दवाइयां, केमिकल आदि फेंके जाएंगे. कचरा उठाने से मना कर सकेंगे सफाईकर्मी नए नियम में सफाईकर्मी को भी ये अधिकार दिया गया है कि अगर उसे कचरे का वर्गीकरण कर नहीं दिया गया तो वो कचरा उठाने से मना भी कर सकता है. यानी अब नागरिकों की ही जिम्‍मेदारी होगी कि वो कचरा घर से निकालते वक्‍त उसका सही तरह से वर्गीकरण करे. ताकि सफाईकर्मी उसे आसानी से आपके घर से ले जाए. पटना में 225 नए वाहन खरीदने की तैयारी मिली जानकारी के मुताबिक कचरा कलेक्शन को मजबूत करने के लिए पटना नगर निगम बड़े स्तर पर तैयारी कर रहा है. 6 अंचलों के 375 सेक्टर में कलेक्शन सिस्टम मजबूत करने के लिए 225 नए वाहन खरीदने की तैयारी है. खरीद में 150 क्लोज टिपर, 75 ओपन टिपर भी हैं. कचरे से बनेगा ईंधन और खाद प्रशासन की ओर से कचरा प्रबंधन की नई नीति में फोकस सिर्फ कचरा हटाना नहीं है, बल्कि उसे संसाधन के रूप में भी तैयार करना है. सूखे कचरे से ईंधन तैयार किया जाएगा. जिसे सीमेंट फैक्ट्रियों आदि में प्रयोग किया जाएगा. इस योजना को लागू करने के बाद अगले 6 साल में 15 फीसद कोयले की जगह RDF इस्तेमाल अनिवार्य कर दिया जाएगा. क्‍या है RFD कचरे प्रबंधन (Waste Management) में RDF का पूरा नाम Refuse Derived Fuel (अपशिष्ट से प्राप्त ईंधन) है. यह एक ऐसी तकनीक है, जिसमें कचरे को संसाधित करके उसे ऊर्जा के स्रोत या ईंधन के रूप में बदला जाता है. गीले कचरे से बनेगी खाद कचरा प्रबंधन को लेकर आगे की योजना ये है कि गीले कचरे से खाद बनाया जाए. जो खेतों की मिट्टी को उर्वरक बनाए. लैंडफिल में अब सिर्फ वही कचरा जाएगा जो रिसाइकल नहीं किया जा सकेगा. क्यों जरूरी है यह बदलाव? इस नई व्यवस्था का मकसद ये है बिहार एक स्‍वच्‍छ प्रदेश बन कर उभरे. बिहार कचरा प्रबंधन में फिसड्डी साबित हुआ है. जिसकी वजह से प्रदेश के जिले गंदे शहरों में गिने जाते हैं. इसके दो फायदे होंगे. एक शहर कचरा मुक्त होगा, साथ ही प्रदूषण भी कम होगा और संसाधनों का भी मैक्सिमम उपयोग हो सकेगा. Also Read : बिहार के इस जिले में 7 अप्रैल से चलेगा बुलडोजर, रेलवे की नोटिस से कई परिवारों को बेघर होने का खतरा The post 100KG कचरा? तो खुद निपटाओ वर्ना होगी कार्रवाई, नहीं छांटा तो सफाई बंद! 1 अप्रैल से लागू होगा नियम appeared first on Naya Vichar.

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