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April 3, 2026

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वो गुहार लगाती रहीं, लेकिन ट्रंप नहीं पसीजे… अटार्नी जनरल पाम बॉन्डी को किया बर्खास्त, लेकिन क्यों?

Trump Fires Attorney General Pam Bondi: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अटॉर्नी जनरल पाम बॉन्डी को पद से हटा दिया. यह फैसला ऐसे समय आया है जब उनकी कार्यशैली को लेकर लंबे समय से विवाद और असंतोष चल रहा था. वे अपने पूरे कार्यकाल में ट्रंप के एजेंडे पर ही चल रही थीं, लेकिन इसके बावजूद उनकी छुट्टी कर दी गई. उन्हें ट्रंप के प्रति बेहद वफादार सहयोगी के रूप में देखा जाता था, लेकिन करीब 14 महीने के भीतर ही यह भरोसा टूट गया और उनका कार्यकाल विवादों के बीच खत्म हो गया. आखिर ये कैसे हुआ? डेली मेल की रिपोर्ट के मुताबिक, व्हाइट हाउस में हुए एक तीखे टकराव के बाद यह कदम उठाया गया, जहां ट्रंप ने बॉन्डी पर ‘माफ न करने लायक गलती’ करने का आरोप लगाया. मेल के सूत्रों के मुताबिक, बॉन्डी ने अपने पद पर बने रहने के लिए ट्रंप से गुहार लगाई, लेकिन राष्ट्रपति अपने फैसले पर अडिग रहे और साफ कर दिया कि अब उनका कार्यकाल खत्म हो चुका है. व्हाइट हाउस में टकराव: आखिरी कोशिश भी बेकार मेल की रिपोर्ट्स के अनुसार, यह पूरा घटनाक्रम ट्रंप के ईरान युद्ध पर प्राइम-टाइम संबोधन से ठीक पहले हुआ. बॉन्डी इस फैसले से बहुत परेशान और नाखुश थीं और उन्होंने ट्रंप को मनाने की कोशिश की, लेकिन उन्हें तुरंत हटा दिया गया. शुरुआत में इस फैसले की घोषणा अगले दिन की जानी थी, लेकिन मीडिया में तेजी से बढ़ती अटकलों के कारण इसे जल्द सार्वजनिक कर दिया गया. 60 वर्षीय बॉन्डी ने 2011 से 2019 तक फ्लोरिडा की अटॉर्नी जनरल के रूप में कार्य किया. साल 2020 में जब ट्रंप पर सत्ता के दुरुपयोग को लेकर पहला महाभियोग चला, तब बॉन्डी उनकी कानूनी टीम का हिस्सा बनीं और बचाव पक्ष की वकील के तौर पर उन्होंने अपनी मजबूत दलीलों से खास पहचान बनाई. ट्रंप ने फरवरी 2025 में बॉन्डी को अटार्नी जनरल के पद पर नियुक्त किया था.  Pam Bondi “begged” Donald Trump not to fire her in an “explosive showdown” at the White House. Trump informed her shortly before his prime-time Iran war address, a senior administration source told the Daily Mail. Bondi pleaded for more time in the role, but Trump made it clear… pic.twitter.com/iVivwkXovq — Republicans against Trump (@RpsAgainstTrump) April 2, 2026 बर्खास्तगी की बड़ी वजह: एपस्टीन फाइल्स विवाद बॉन्डी की विदाई के पीछे सबसे बड़ा कारण जेफरी एपस्टीन से जुड़े दस्तावेजों का विवाद माना जा रहा है. ट्रंप प्रशासन पर इन फाइलों को ठीक से हैंडल न करने और पारदर्शिता की कमी के आरोप लगे. बॉन्डी के ऊपर आरोप लगे कि उन्होंने एपस्टीन की क्लाइंट लिस्ट में से कुछ नामों को छुपाया, इससे ट्रंप की छवि को धक्का लगा. वहीं, राष्ट्रपति ट्रंप का मानना था कि न्याय विभाग (DOJ) ने इस मामले में उनके नेतृत्वक विरोधियों के खिलाफ पर्याप्त आक्रामकता नहीं दिखाई, जिससे मामला बिगड़ता चला गया. दूसरा कारण: एरिक स्वॉलवेल लीक विवाद एक और बड़ा आरोप यह है कि बॉन्डी ने एरिक स्वालवेल को एफबीआई की जांच से जुड़ी संवेदनशील जानकारी लीक की. यह जांच स्वॉलवेल और कथित चीनी जासूस क्रिस्टीन फैंग के संबंधों से जुड़ी थी. स्वॉलवेल ने एफबीआई से उनके और फैंग के पुराने संबंधों से जुड़े दस्तावेज सार्वजनिक न करने की मांग की थी. सोमवार को स्वॉलवेल के वकीलों ने एफबीआई निदेशक काश पटेल को एक ‘सीज एंड डेसिस्ट’ नोटिस भेजा, जिसमें बुधवार तक लिखित आश्वासन मांगा गया कि इन फाइलों को जारी नहीं किया जाएगा. सूत्रों के मुताबिक, एफबीआई इन दस्तावेजों को सार्वजनिक करने की तैयारी में था, लेकिन बॉन्डी के हस्तक्षेप से व्हाइट हाउस नाराज हो गया. यह भी कहा जा रहा है कि बॉन्डी और स्वॉलवेल के बीच निजी संबंध अच्छे थे, जिससे शक और गहरा गया. रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि व्हाइट हाउस इस बात से नाखुश था कि बॉन्डी, स्वॉलवेल के साथ अपनी निजी दोस्ती के चलते इस मामले में दखल दे रही थीं. 🇺🇸 ⁠Pam Bondi was reportedly fired as U.S. Attorney General after Trump suspected she tipped off Eric Swalwell about FBI documents tied to his alleged links with a Chinese spy. The FBI was preparing to release files on Swalwell’s past connection to Christine Fang, but Bondi… https://t.co/LwQ5pjvjyQ pic.twitter.com/guDpBxEvmJ — Mario Nawfal (@MarioNawfal) April 2, 2026 ट्रंप की नाराजगी: विरोधियों पर कार्रवाई नहीं रिपोर्ट्स बताती हैं कि ट्रंप बॉन्डी से इसलिए भी नाराज थे, क्योंकि उन्होंने उनके नेतृत्वक विरोधियों के खिलाफ अपेक्षित सख्ती नहीं दिखाई. ट्रंप चाहते थे कि उनके खिलाफ कार्रवाई तेज हो, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. ट्रंप ने सोशल मीडिया पर न्यूयॉर्क अटार्नी जनरल लेटिटिया जेम्स और पूर्व एफबीआई डायरेक्टर जेम्स कोमी का नाम लेकर कानूनी कार्रवाई की इच्छा जताई थी.  बॉन्डी ने केस शुरू तो किया, लेकिन देरी और लचर कानूनी कार्रवाई और पुख्ता सबूत न होने की वजह से कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया. इसके लिए भी बॉन्डी को ही जिम्मेदार ठहराया गया. ट्रंप कुछ समय निजी बातचीत में बॉन्डी के लिए नाराजगी जाहिर कर रहे थे. अब उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है.  पाम बॉन्डी के काम भी बने विवाद की वजह अमेरिका की पूर्व अटॉर्नी जनरल पाम बॉन्डी का कार्यकाल लगातार विवादों में घिरा रहा. उनके फैसलों और कामकाज के तरीके को लेकर न्याय विभाग के अंदर और बाहर दोनों जगह तीखी आलोचना हुई. बॉन्डी पर सबसे बड़ा आरोप यह रहा कि उन्होंने जस्टिस डिपार्टमेंट की स्वतंत्रता को दरकिनार कर ट्रंप की नेतृत्वक प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाया. पद संभालते ही बॉन्डी ने जस्टिस डिपार्टमेंट में बड़े स्तर पर फेरबदल शुरू किया. उन्होंने उन अधिकारियों और वकीलों को हटाना शुरू कर दिया, जिन्होंने पहले ट्रंप से जुड़े मामलों की जांच की थी. इस कदम से विभाग के कई अनुभवी कर्मचारियों में असंतोष फैल गया और कई ने विरोध में इस्तीफा दे दिया.  फरवरी 2026 में एक संसदीय सुनवाई के दौरान बॉन्डी का रवैया काफी आक्रामक रहा. उन्होंने आलोचना करने वाले सांसदों पर व्यक्तिगत टिप्पणी करते हुए उन्हें असफल और अप्रासंगिक तक कह दिया. बॉन्डी पर यह आरोप भी लगा कि उन्होंने पुलिस जवाबदेही से जुड़े प्रयासों को कमजोर किया. नागरिक अधिकारों की निगरानी करने वाले विभाग की गतिविधियों को लगभग ठप कर दिया गया, जिसके विरोध

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पलामू में झोलाछाप डॉक्टर पर बड़ी कार्रवाई, सीआईडी की रिपोर्ट में अवैध क्लिनिक सील

पलामू से रामनरेश तिवारी की रिपोर्ट Palamu News: पलामू जिले में अवैध रूप से चल रहे क्लिनिक के खिलाफ प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है. नावाजयपुर थाना क्षेत्र स्थित बिंदा बैंक्वेट हॉल के बेसमेंट में संचालित एक अवैध क्लिनिक को सील कर दिया गया. यह कार्रवाई सीआईडी की रिपोर्ट के आधार पर की गयी. जिला उपायुक्त समीरा एस के निर्देश पर संबंधित अधिकारियों की टीम ने छापेमारी कर पूरे क्लिनिक को बंद कराया. पांच घंटे चली छापेमारी, कई चौंकाने वाले खुलासे प्रशासनिक टीम ने करीब पांच घंटे तक क्लिनिक में सघन जांच अभियान चलाया. इस दौरान कई आपत्तिजनक और चौंकाने वाले तथ्य सामने आये. क्लिनिक के भीतर एक अस्थायी ऑपरेशन थिएटर और प्रसव कक्ष पाया गया, जहां अवैध तरीके से सर्जरी और डिलीवरी करायी जाती थी. जांच में कई प्रतिबंधित दवाएं भी बरामद की गयीं, जो बिना अनुमति के इस्तेमाल की जा रही थीं. बिना डिग्री चला रहा था क्लिनिक जांच में सामने आया कि पंडवा निवासी सेवक मेहता इस क्लिनिक का संचालन कर रहा था, जबकि उसके पास किसी प्रकार की मेडिकल डिग्री नहीं है. इसके बावजूद वह वर्षों से मरीजों का इलाज कर रहा था और गंभीर मामलों में ऑपरेशन तक कर देता था. यह खुलासा बेहद गंभीर है, क्योंकि इससे गरीब मरीजों की जान को लगातार खतरा बना हुआ था. एलोपैथिक दवाओं का अवैध भंडारण छापेमारी के दौरान एक कमरे में बड़ी मात्रा में एलोपैथिक दवाओं का भंडार भी मिला. जबकि क्लिनिक के बाहर “दिशा आरोग्य धाम जयपुर आयुर्वेद संस्थान” लिखा हुआ था. इससे स्पष्ट होता है कि मरीजों को भ्रमित कर इलाज किया जा रहा था. इसके अलावा डॉक्टर के ओपीडी कक्ष से गर्भवती स्त्रीओं के अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट भी बरामद हुए, जो नियमों के उल्लंघन को दर्शाते हैं. कर्मचारियों ने किया बड़ा खुलासा मौके पर मौजूद दो अस्पताल कर्मियों से पूछताछ में यह सामने आया कि सेवक मेहता ने कभी मेडिकल की पढ़ाई नहीं की है. इसके बावजूद वह खुद को डॉक्टर बताकर मरीजों का इलाज करता था. यह भी पता चला कि क्लिनिक में नियमित रूप से प्रसव और अन्य सर्जिकल प्रक्रियाएं की जाती थीं. अधिकारियों की मौजूदगी में कार्रवाई इस कार्रवाई में पाटन बीडीओ सह सीओ डॉ अमित कुमार झा, प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ अमित कुमार आजाद और नावाजयपुर थाना प्रभारी वीरेंद्र कुमार मेहता सहित कई अधिकारी मौजूद रहे. सभी की देखरेख में क्लिनिक को सील किया गया और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया शुरू की गयी. बार-बार सामने आ रहे ऐसे मामले पलामू जिले में अवैध क्लिनिक का यह कोई पहला मामला नहीं है. जिला प्रशासन लगातार ऐसे झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई कर रहा है, लेकिन इसके बावजूद कई क्लिनिक नाम बदलकर फिर से संचालित होने लगते हैं. यह स्थिति स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े करती है. इसे भी पढ़ें: गढ़वा के मेराल में अबुआ आवास के नाम पर वसूली, बीडीसी और बिचौलियों पर केस दर्ज गरीब मरीजों की जान से खिलवाड़ सबसे चिंताजनक बात यह है कि ऐसे अवैध क्लिनिकों में गरीब और अनजान मरीज इलाज के लिए जाते हैं, जहां उनकी जान जोखिम में डाल दी जाती है. बिना प्रशिक्षित व्यक्ति द्वारा ऑपरेशन और प्रसव कराना गंभीर लापरवाही है, जिससे कई बार जानलेवा परिणाम सामने आते हैं. कुल मिलाकर, इस कार्रवाई ने एक बार फिर यह उजागर किया है कि जिले में स्वास्थ्य व्यवस्था की निगरानी को और मजबूत करने की जरूरत है, ताकि लोगों की जान के साथ खिलवाड़ करने वालों पर सख्त कार्रवाई हो सके. इसे भी पढ़ें: कौन है भीम राम, जिसने भगताइन के कहने पर विष्णुगढ़ की बच्ची का सिर कुचला The post पलामू में झोलाछाप डॉक्टर पर बड़ी कार्रवाई, सीआईडी की रिपोर्ट में अवैध क्लिनिक सील appeared first on Naya Vichar.

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10 अप्रैल को सीएम नीतीश लेंगे राज्यसभा की शपथ, नई सरकार के लिए होंगी ताबड़तोड़ बैठकें

Bihar Politics: बिहार की नेतृत्व में नई प्रशासन को लेकर हलचल तेज होने वाली है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 10 अप्रैल को राज्यसभा के सदस्य की शपथ लेंगे. इसके लिए वे 9 अप्रैल को दिल्ली जायेंगे. 10 अप्रैल को शपथ ग्रहण के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की मुलाकात दिल्ली में एनडीए के कई आला नेताओं से होगी. इसमें ताजा नेतृत्वक हालात पर चर्चा होने की संभावना है. 11 अप्रैल के बाद हो सकती हैं बैठकें इसके साथ ही यह भी संभावना जताई जा रही है कि सीएम नीतीश कुमार 11 अप्रैल को पटना लौट आयेंगे. बिहार में 14 अप्रैल के बाद नई प्रशासन के गठन की प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है. इसके पहले एनडीए विधायक दल की बैठक भी हो सकती है. इसके अलावा जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारिणी और राष्ट्रीय परिषद की बैठक 20 अप्रैल या इसके बाद होने की संभावना है. हाल में जदयू संगठन चुनाव हुए हैं और इसमें राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में एक बार फिर नीतीश कुमार चुने गए हैं. इस चुनाव के बाद यह बैठक खास मानी जा रही है. इसमें कई नेतृत्वक प्रस्तावों पर मुहर लगाए जा सकते हैं. सीएम नीतीश को मिली जेड प्लस सिक्योरिटी राज्यसभा के सदस्य बनने से पहले सीएम नीतीश कुमार को जेड प्लस सिक्योरिटी मिली. गृह विभाग की ओर से जारी लेटर में कहा गया, सीएम नीतीश कुमार को बिहार स्पेशल सिक्योरिटी एक्ट-2000 के तहत सुरक्षा अनुमान्य है. राज्यसभा के लिए मुख्यमंत्री निर्वाचित हुए हैं. जल्द ही अब वे मुख्यमंत्री के पद से भी त्यागपत्र देंगे और राज्यसभा की सदस्यता ग्रहण करेंगे. ऐसे में सीएम नीतीश की सुरक्षा को लेकर समीक्षा की गई और जेड प्लस कैटेगरी की सुरक्षा देने का निर्णय लिया. बिहार में सीएम फेस पर चर्चा तेज राज्यसभा के सदस्य के रूप में सीएम नीतीश शपथ लेने के बाद सीएम पद से इस्तीफा दे सकते हैं. ऐसे में राज्य का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा, इसकी चर्चा तेज है. बीजेपी और जेडीयू के कई नेताओं की चर्चा हो रही. खासकर दो नाम ज्यादा भावी माने जा रहे हैं. बीजेपी से डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी को समर्थन देने की बात की जा रही है. जबकि जेडीयू से सीएम नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को सीएम फेस बताया जा रहा है. लेकिन अब तक एनडीए की ओर से आधिकारिक तौर पर ऐलान नहीं किया गया है. Also Read: आज बिहार में 40 पार जा सकता है पारा, 5 अप्रैल के बाद आंधी-बारिश का अलर्ट, IMD की एडवाइजरी जारी The post 10 अप्रैल को सीएम नीतीश लेंगे राज्यसभा की शपथ, नई प्रशासन के लिए होंगी ताबड़तोड़ बैठकें appeared first on Naya Vichar.

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ईरान के सबसे ऊंचे ब्रिज पर US का अटैक, दो हिस्सों पुल तोड़कर बोले ट्रंप; समझौता कर लो, वरना…

US Attack Iran Bridge: ईरान के खिलाफ अमेरिकी की कार्रवाई अब नागरिक ढांचों पर भी होने लगी है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार देर रात दावा किया कि हवाई हमलों के जरिए ईरान के सबसे ऊंचे पुल को नष्ट कर दिया गया है. यह 136 मीटर ऊंचा और 400 मिलियन डॉलर की लागत से बना B1 सस्पेंशन ब्रिज था, जो तेहरान और करज के बीच स्थित था. इसके चलते आसपास के इलाके में भारी जनहानि हुई. ईरानी मीडिया के अनुसार, इन हमलों में कम से कम आठ नागरिकों के मारे जाने और 95 अन्य के घायल हुए हैं. ईरान के प्रशासनी मीडिया प्रेस टीवी की रिपोर्ट के अनुसार, यह सैन्य हमले में मारे गए लोगों में ईरानी यात्री और स्थानीय गांव के निवासी शामिल हैं. वे हमले के समय उस ढांचे के पास मौजूद थे. प्रेस टीवी ने यह भी बताया कि मृतकों में वे परिवार भी शामिल हैं, जो नेचर डे के मौके पर उस क्षेत्र में घूमने आए थे. यह वह समय होता है जब बड़ी संख्या में लोग बाहर निकलते हैं. ईरान को और तबाही की चेतावनी देते हुए ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर एक वीडियो पोस्ट किया. इसमें एक ईरानी पुल ‘ढहता हुआ’ दिखाई दे रहा है. उन्होंने लिखा, ‘उस देश में अब कुछ भी नहीं बचा है, जो कभी एक महान देश बन सकता था.’ ट्रंप ने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा कि ‘बहुत देर होने से पहले समझौता कर लो.’  इससे पहले ट्रंप ने ईरान को ‘पाषाण युग में वापस भेजने’ की धमकी दी थी. उन्होंने इस युद्ध पर पहली बार देश के नाम संबोधन किया था. 1 अप्रैल की रात को दिए गए भाषण में उन्होंने कहा कि अमेरिका जल्द ही अपना लक्ष्य पूरा करने वाला है. यह युद्ध अगले 2-3 हफ्तों का ही बचा है. उन्होंने कहा कि ईरान की सेना, नौसेना समाप्त हो चुकी है. उनके मुताबिक अब ईरान के मिसाइल क्षमता भी नहीं बची है.  अराघची बोले: ‘यह बिखरे हुए दुश्मन की हार को दर्शाता है’ ट्रंप के इस दावे के तुरंत बाद, ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची सोशल मीडिया एक्स पर तीखी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि इस तरह के हमले ईरान को झुकने पर मजबूर नहीं कर सकते. उन्होंने लिखा, ‘नागरिक ढांचे, जिसमें अधूरे पुल भी शामिल हैं, पर हमला करना ईरानियों को आत्मसमर्पण करने के लिए मजबूर नहीं करेगा. यह केवल एक बिखरे हुए दुश्मन की हार और नैतिक पतन को दर्शाता है.’ उन्होंने आगे कहा कि अमेरिका और इज़राइल के साथ युद्ध में नष्ट हो रहे नागरिक ढांचे को ‘और मजबूत तरीके से फिर से बनाया जाएगा.’ उन्होंने आगे कहा कि जो कभी ठीक नहीं होगा, वह है अमेरिका की साख को हुआ नुकसान. Striking civilian structures, including unfinished bridges, will not compel Iranians to surrender. It only conveys the defeat and moral collapse of an enemy in disarray. Every bridge and building will be built back stronger. What will never recover: damage to America’s standing. pic.twitter.com/872zuE36qD — Seyed Abbas Araghchi (@araghchi) April 2, 2026 ईरानी राष्ट्रपति ने अजरबैजान से की बात इन हमलों के बाद, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने कहा कि ईरान ‘अमेरिका और इज़राइल के हमलावरों के खिलाफ अपनी पूरी क्षमता के साथ आत्मरक्षा करने के लिए पूरी तैयारी के साथ खड़ा है.’ ईरानी राष्ट्रपति ने यह टिप्पणी गुरुवार को अजरबैजान के राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव के साथ टेलीफोन पर बातचीत के दौरान की. इस बातचीत में पेजेश्कियान ने कहा कि जब वॉशिंगटन ने ‘हवाई हमले और बमबारी अभियान’ शुरू किया, उस समय तेहरान ‘संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ अप्रत्यक्ष वार्ता’ में लगा हुआ था.  पेजेश्कियान ने अलीयेव को ‘महत्वपूर्ण और औद्योगिक ढांचे’ के विनाश के साथ-साथ ‘स्कूलों’ और ‘अस्पतालों’ पर हुए हमलों की जानकारी दी. प्रेस टीवी के अनुसार, ईरानी नेता ने संकट के दौरान अज़रबैजान की जनता और प्रशासन द्वारा दिखाई गई ‘सहानुभूति और समर्थन’ के लिए आभार भी व्यक्त किया. इससे पहले पेजेश्कियान ने अमेरिकी नागरिकों के नाम पर पत्र भी लिखा था. इसमें उन्होंने युद्ध से हुए नुकसान को देखते हुए इसे रोकने की अपील की थी. उन्होंने अमेरिका को इजरायल के प्रॉक्सी के तौर पर भी लड़ने का आरोप लगाया था.  ये भी पढ़ें:- ईरान युद्ध के बीच हटाए गए US आर्मी चीफ, रक्षा मंत्री ने किया जबरन रिटायर, अचानक क्यों? ये भी पढ़ें:- होर्मुज स्ट्रेट खुलवाने नहीं आया नाटो, गुस्साए ट्रंप करवाएंगे पुतिन का फायदा, जानें अब क्या कह दिया? ईरान के साथ-साथ दुनिया को भी हो रहा नुकसान इस युद्ध में ईरान के स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक अब तक 2,000 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें स्त्रीएं और शिशु भी शामिल हैं. वहीं होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से दुनिया भर में तेल और गैस संकट पैदा हो गया. तेल और गैस की कीमतें बढ़ रही हैं, जबकि आपूर्ति सीमित हो रही है. होर्मुज स्ट्रेट को खुलवाने के लिए अलग-अलग देश अपने-अपने तरीके से प्रयास कर रहे हैं. इसमें ब्रिटेन की ताजा पहल भी शामिल है, जिसमें वह 30 से अधिक देशों से बातचीत कर रहा है.  The post ईरान के सबसे ऊंचे ब्रिज पर US का अटैक, दो हिस्सों पुल तोड़कर बोले ट्रंप; समझौता कर लो, वरना… appeared first on Naya Vichar.

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BPSC AEDO Admit Card 2026: जारी हुआ एडमिट कार्ड, इस तारीख से होगी परीक्षा

BPSC AEDO Admit Card 2026: बिहार पब्लिक सर्विस कमीशन (BPSC) ने असिस्टेंट एजुकेशन डेवलपमेंट ऑफिसर (AEDO) भर्ती परीक्षा के लिए एडमिट कार्ड जारी कर दिया है. ऐसे कैंडिडेट्स जिन्होंने इस भर्ती के लिए आवेदन किया है, वे अब ऑफिशियल वेबसाइट के जरिए अपना कॉल लेटर डाउनलोड कर सकते हैं. कब होगी परीक्षा? BPSC की AEDO भर्ती परीक्षा 14 अप्रैल 2026 से 21 अप्रैल तक चलेगी. इस बीच अलग-अलग डेट्स पर परीक्षा आयोजित की जाएगी. इस भर्ती परीक्षा के जरिए 935 पोस्ट भरे जाएंगे. कैसे डाउनलोड करें एडमिट कार्ड? BPSC की आधिकारिक वेबसाइट bpsc.bihar.gov.in पर जाएं होमपेज पर “BPSC AEDO Admit Card 2026” लिंक पर क्लिक करें अब अपना यूजरनेम/रजिस्ट्रेशन नंबर और पासवर्ड/जन्मतिथि दर्ज करें लॉगिन बटन पर क्लिक करें आपका एडमिट कार्ड स्क्रीन पर खुल जाएगा एडमिट कार्ड डाउनलोड करें और प्रिंटआउट निकाल लें सिंगल फेज में होगी परीक्षा, इंटरव्यू नहीं इस भर्ती की खास बात यह है कि चयन प्रक्रिया को सरल रखा गया है. उम्मीदवारों का चयन केवल लिखित परीक्षा के आधार पर होगा, इसके बाद डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन किया जाएगा. इसमें इंटरव्यू नहीं लिया जाएगा. एडमिट कार्ड में क्या-क्या होगा? उम्मीदवार का नाम रोल नंबर परीक्षा केंद्र परीक्षा डेट्स और जरूरी निर्देश यहां आपकी जानकारी के लिए बता दें कि परीक्षा केंद्र पर प्रवेश के लिए एडमिट कार्ड अनिवार्य होगा. ऐसे कैंडिडेट्स जिनके पास एडमिट कार्ड नहीं होगा, उन्हें प्रवेश नहीं दिया जाएगा. जरूरी निर्देश परीक्षा केंद्र पर एडमिट कार्ड के साथ वैध फोटो आईडी ले जाना जरूरी है समय से पहले परीक्षा केंद्र पहुंचें एडमिट कार्ड का प्रिंटआउट जरूर रखें यह भी पढ़ें- 54 साल बाद एस्ट्रोनॉट्स सहित मून मिशन पर NASA, अंतरिक्ष में पहुंचा Artemis II, क्यों खास है यह मिशन? The post BPSC AEDO Admit Card 2026: जारी हुआ एडमिट कार्ड, इस तारीख से होगी परीक्षा appeared first on Naya Vichar.

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टैरिफ मुक्त डिजिटल व्यापार से ग्लोबल साउथ को नुकसान, पढ़ें डॉ अश्विनी महाजन का आलेख

Digital Trade: वर्ष 1998 में, विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के सदस्य देशों ने वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक कॉमर्स की घोषणा को अपनाया था और इलेक्ट्रॉनिक ट्रांसमिशन पर कस्टम ड्यूटी न लगाने की प्रथा को जारी रखने पर सहमति जतायी थी. हालांकि यह रोक अगली मंत्रिस्तरीय बैठक शुरू होने तक के लिए एक अस्थायी प्रावधान थी. पर डब्ल्यूटीओ की हर मंत्रिस्तरीय बैठक में इस रोक को अगली बैठक तक के लिए बढ़ाया जाता रहा है. इस बार भी इस पर सहमति नहीं बन पायी. डब्ल्यूटीओ का 14वां मंत्रिस्तरीय सम्मेलन, जिसका आयोजन कैमरून में (26-29 मार्च तक) हुआ, इ-ट्रांसमिशन पर कस्टम ड्यूटी पर रोक को लेकर बिना सर्वसम्मति के ही समाप्त हो गया. डब्ल्यूटीओ में इलेक्ट्रॉनिक ट्रांसमिशन पर लगी रोक एक ऐसा प्रावधान है, जो देशों को इंटरनेट के जरिये इलेक्ट्रॉनिक रूप से भेजे जाने वाले डिजिटल उत्पादों पर टैरिफ लगाने से रोकता है. जब डब्ल्यूटीओ शुरू हुआ था, तब इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों का व्यापार सीमित था. सो, इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों के व्यापार पर लगने वाले टैरिफ को कुछ समय के लिए रोक दिया गया था. वर्ष 1998 में डब्ल्यूटीओ के दूसरे मंत्रिस्तरीय सम्मेलन में यह तय किया गया कि विकासशील देशों की विकास संबंधी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक व्यापार से जुड़े मुद्दों का अध्ययन किया जाये. यह प्रस्ताव भी रखा गया कि इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों पर लगने वाले टैरिफ को अगले मंत्रिस्तरीय सम्मेलन तक के लिए टाल दिया जाये. पर अमेरिका, यूरोपीय संघ और चीन जैसे देश, इलेक्ट्रॉनिक ट्रांसमिशन पर लगने वाले सीमा शुल्क पर डब्ल्यूटीओ की इस रोक को स्थायी (या अनिश्चित काल के लिए) बनाये रखने की लगातार कोशिश कर रहे हैं. डिजिटल उत्पादों के आयात के लिए सबसे ज्यादा माना जाने वाला पैमाना है डिजिटल रूप से दी जाने वाली सेवाएं, जैसे सॉफ्टवेयर, क्लाउड, ओटीटी, डाटा, डिजाइन, फिनटेक आदि. नीति आयोग के अनुमानों के मुताबिक, हिंदुस्तान ने 2024 में 116.9 अरब डॉलर की डिजिटल सेवाएं आयात कीं, जो पिछले वर्षों के 41.4 अरब डॉलर से बहुत अधिक है. इ-ट्रांसमिशन पर डब्ल्यूटीओ की रोक का राजस्व पर बहुत असर पड़ रहा है, क्योंकि इलेक्ट्रॉनिक ट्रांसमिशन, जैसे सॉफ्टवेयर डाउनलोड, इ-बुक्स, फिल्में, क्लाउड सेवाएं आदि, पर कोई कस्टम ड्यूटी नहीं लगती. वर्ष 2017 में राजस्व के इस नुकसान का अनुमान 50 करोड़ डॉलर लगाया गया था, लेकिन अब स्ट्रीमिंग, डिजिटल फिल्में, किताबें, एआइ टूल्स, गेमिंग आदि के आयात में जबरदस्त वृद्धि के कारण यह नुकसान कहीं अधिक होने की संभावना है. उधर अमेरिका यूरोपीय संघ और जापान के साथ मिलकर टैरिफ मुक्त डिजिटल व्यापार को बनाये रखने के लिए इस रोक को स्थायी रूप से अपनाने की पैरवी भी कर रहा है. अमेरिका की ओर से पहला तर्क यह है कि डिजिटल टैरिफ वैश्विक डिजिटल व्यापार में बाधा डालेंगे. दूसरा, इससे व्यवसायों और उपभोक्ताओं के लिए लागत बढ़ सकती है. तीसरा, यह वैश्विक डिजिटल वित्तीय स्थिति को खंडित कर देगा. इ-ट्रांसमिशन पर कस्टम ड्यूटी पर रोक समाप्त होना इसलिए जरूरी है, क्योंकि इससे राजस्व का भारी नुकसान होता है, क्योंकि हिंदुस्तान सहित विकासशील देश इ-प्रोडक्ट्स (डिजिटल प्रोडक्ट्स) के नेट इंपोर्टर है. दूसरा, हमारे स्टार्ट-अप और सॉफ्टवेयर कंपनियां कई तरह के इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट्स बनाने में सक्षम हैं. हम अपने ही देश में फिल्में और दूसरे मनोरंजन प्रोडक्ट्स बना सकते हैं. पर जब ऐसे सभी प्रोडक्ट्स बिना किसी रोक-टोक के, बिना टैरिफ के आयात किये जाते हैं, तो उन्हें देश में बनाने का प्रोत्साहन कम हो जाता है. इ-प्रोडक्ट्स पर टैरिफ लगाने पर लगी रोक असल में ‘आत्मनिर्भर हिंदुस्तान’ के प्रयासों को खत्म कर रही है. तीसरा, स्वास्थ्य, फिनटेक, सार्वजनिक सेवाओं और कई अन्य क्षेत्रों में अनेक डिजिटल उत्पाद, जिनमें एआइ आदि शामिल हैं, इन सेवाओं की मांग के तरीकों को बदल रहे हैं. यदि इन पर नये तरीकों से टैक्स नहीं लगाया गया, तो इसका प्रशासन के वित्त पर बुरा असर पड़ सकता है. साथ ही, इन डिजिटल उत्पादों को देश के अंदर बनाने में भी रुकावटें आ सकती हैं. चौथा, कुछ डिजिटल उत्पाद हैं, जो तेजी से भौतिक उत्पादों की जगह ले रहे हैं. थ्री-डी प्रिंटिंग के बड़े पैमाने पर इस्तेमाल से ऑटो पार्ट्स, मेडिकल डिवाइस, खिलौने और मशीनरी के पुर्जों जैसे उत्पादों का व्यापार, सामान के बजाय डिजाइन फाइलों के रूप में किया जा सकता है. राजस्व नुकसान के अतिरिक्त यह हमारी मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को भी घटा सकता है. इसलिए यह मुद्दा ‘ग्लोबल साउथ’ (विकासशील देशों) के नजरिये से बहुत अहम है. क्योंकि विकसित देश इन डिजिटल उत्पादों के मुख्य निर्यातक हैं, जबकि विकासशील देश इनके मुख्य आयातक. (ये लेखक के निजी विचार हैं.) The post टैरिफ मुक्त डिजिटल व्यापार से ग्लोबल साउथ को नुकसान, पढ़ें डॉ अश्विनी महाजन का आलेख appeared first on Naya Vichar.

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‘धुरंधर 2’ की ताबड़तोड़ कमाई जारी, 15वें दिन भी छापे करोड़ों

Dhurandhar 2 Box Office Day 15: बॉलीवुड की मेगा बजट स्पाई एक्शन थ्रिलर धुरंधर 2 बॉक्स ऑफिस पर लगातार धमाल मचा रही है. रणवीर सिंह, अर्जुन रामपाल, संजय दत्त और आर. माधवन स्टारर इस फिल्म ने रिलीज के दो हफ्ते पूरे करते ही कमाई के नए कीर्तिमान स्थापित कर दिए हैं. खास बात यह है कि 15वें दिन भी फिल्म ने शानदार प्रदर्शन जारी रखा. तीसरे गुरुवार भी मजबूत पकड़ 19 मार्च को रिलीज हुई इस फिल्म ने शुरुआती दिनों से ही बॉक्स ऑफिस पर अपना दबदबा बनाए रखा है. हालांकि तीसरे गुरुवार यानी 15वें दिन कमाई में हल्की गिरावट दर्ज की गई, लेकिन इसके बावजूद फिल्म ने शानदार आंकड़ा छुआ. सैकनिल्क की अर्ली रिपोर्ट के मुताबिक, फिल्म ने 15वें दिन 17.80 करोड़ रुपये का नेट कलेक्शन किया. दो हफ्तों में रिकॉर्डतोड़ कमाई फिल्म का पहले हफ्ते का कलेक्शन 674.17 करोड़ रुपये रहा, जबकि दूसरे हफ्ते में इसने 263.15 करोड़ रुपये की कमाई की. इसी के साथ हिंदुस्तान में इसका कुल नेट कलेक्शन 937.32 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है. वहीं ग्रॉस कलेक्शन 1120.17 करोड़ रुपये हो चुका है, जो इसे साल की सबसे बड़ी हिट फिल्मों में शामिल करता है. दूसरे हफ्ते में सबसे ज्यादा कमाई का रिकॉर्ड ‘धुरंधर 2’ ने सिर्फ कमाई ही नहीं की, बल्कि इतिहास भी रच दिया है. यह फिल्म हिंदी सिनेमा में दूसरे हफ्ते में सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बन गई है. इसने अपनी पिछली फिल्म ‘धुरंधर’ को भी पीछे छोड़ दिया है. दूसरे हफ्ते की टॉप कमाई वाली फिल्में धुरंधर 2 – 263.15 करोड़ धुरंधर – 261.50 करोड़ पुष्पा 2 (हिंदी) – 199 करोड़ छावा – 186.18 करोड़ स्त्री 2 – 145.80 करोड़ बाहुबली 2 (हिंदी) – 143.25 करोड़ फिल्म की रफ्तार को देखते हुए साफ है कि आने वाले दिनों में यह 1000 करोड़ क्लब में एंट्री कर सकती है और कई बड़े रिकॉर्ड तोड़ सकती है. यह भी पढ़ें: रामायण का टीजर देख भावुक हुईं सीरियल की सीता, राम अवतार ने जीता दिल The post ‘धुरंधर 2’ की ताबड़तोड़ कमाई जारी, 15वें दिन भी छापे करोड़ों appeared first on Naya Vichar.

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जनजातीय खेल प्रतिभाएं राष्ट्रीय गौरव हैं, पढ़ें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का आलेख

Khelo India Tribal Games 2026: मैंने देखा है कि ग्रामीण क्षेत्रों और वनांचलों में शिशु घर के बाहर प्रकृति के सान्निध्य में अधिक समय बिताते हैं. वे स्पोर्ट्स-कूद के सहज तरीके खोज लेते हैं. वे मिट्टी में लकीरें खींचकर और आकृतियां बनाकर, स्पोर्ट्सने की जगह तैयार कर लेते हैं. वे फलों के सूखे बीजों का स्पोर्ट्स की गोटियों की तरह इस्तेमाल कर लेते हैं. सूखे पत्तों, पेड़ों की जड़ों और फटे-पुराने कपड़ों से गेंद बना लेते हैं. बांस का उपयोग कर वे हॉकी और फुटबॉल के गोल पोस्ट बना लेते हैं. इस प्रकार अनेक प्राकृतिक वस्तुओं का उपयोग कर वे अपने स्पोर्ट्स संसार की रचना कर लेते हैं. बहुत से शिशु बिना जूते और जर्सी के पूरे जोश से स्पोर्ट्सते रहते हैं. पोखरों-तालाबों में शिशु खूब तैरते रहते हैं. तैराकी की इस सहज प्रतिभा को अब उपलब्ध प्रशिक्षण और संसाधनों की सहायता से विकसित कर केवल 15 वर्ष की जाजपुर की बेटी अंजलि मुंडा ने प्रथम ‘स्पोर्ट्सो इंडिया जनजातीय स्पोर्ट्स 2026’ में पहले ही दिन तीन स्वर्ण पदक जीत कर पूरे देश के युवाओं को प्रेरित किया. तीरंदाजी के प्रति जनजातीय लोगों में सहज तरंग-सी होती है. संताल समुदाय ने 1855 में शोषण के विरुद्ध एक घनघोर संग्राम किया था जो ‘संताल हूल’ के नाम से अमर है. आधुनिक हथियारों से लैस ब्रिटिश सेना ने उस क्रांति को दबा तो दिया, पर अपने विवरणों में अंग्रेजों ने संताल वीरों के युद्ध कौशल, खासकर तीरंदाजी का विशेष उल्लेख किया है. संताल हूल का नेतृत्व करने वाले बहादुर भाइयों सिदो-कान्हू तथा चांद-भैरव एवं वीरांगना बहनों, फूलो-झानो की प्रतिमाओं का झारखंड में उनके गांव उरी-मारी में जाकर अनावरण करने का सौभाग्य मुझे तब मिला था, जब मैं राज्यपाल थी. तीरंदाजी में एकलव्य की महानता से देश का बच्चा-बच्चा परिचित है. वे श्रेष्ठतम धनुर्धर के रूप में सम्मानित हैं. एकलव्य, सभी देशवासियों के लिए, विशेषकर जनजातीय समाज के लिए एक प्रेरक विभूति हैं. एकलव्य आवासीय आदर्श विद्यालयों में स्थापित ‘स्पोर्ट्स उत्कृष्टता केंद्र’ बच्चों को स्पोर्ट्स-कूद की आधुनिक सुविधाओं और पद्धतियों से सक्षम बना रहे हैं. इसी प्रकार, स्कूल-व्यवस्था के साथ अन्यत्र विद्यमान स्पोर्ट्स प्रतिभाओं की पहचान करने और उन्हें प्रशिक्षित करने के कार्यक्रम भी चलाये जा रहे हैं. मेरे व्यक्तिगत प्रयासों से मेरे गांव में वंचित वर्गों के बच्चों के लिए एक आवासीय स्कूल की स्थापना की गयी है. इस विनम्र प्रयास के तहत स्कूल के परिसर में ही तीरंदाजी के प्रशिक्षण की व्यवस्था भी करायी गयी है. प्रशासन के प्रयासों के साथ छोटे-छोटे व्यक्तिगत और सामूहिक प्रयास भी जनजातीय बच्चों में निहित स्पोर्ट्स प्रतिभाओं को निखारने में सहायक होंगे. मेरे गांव के अन्य जनजातीय बच्चों की तरह मुझमें भी तैराकी सहित व्यायाम और स्पोर्ट्सों के प्रति बहुत रुझान था. मैं स्कूल की स्पोर्ट्स प्रतियोगिताओं में प्रायः प्रथम स्थान पर रहती थी. एक प्रतियोगिता में जानबूझकर मैंने अपने को पीछे रखा था, ताकि मेरी एक सहेली को प्रथम पुरस्कार का आनंद मिल सके. स्पोर्ट्स-कूद से टीम भावना विकसित होती है तथा सामाजिक संबंध मजबूत होते हैं. मैदान पर कड़ी प्रतिस्पर्धा और मैदान के बाहर गहरी मित्रता खिलाड़ियों में प्रायः देखने को मिलती है. मेरे भाई फुटबॉल के बहुत अच्छे खिलाड़ी रहे हैं, जो गंभीर चोट के कारण आगे नहीं स्पोर्ट्स सके. मेरे परिवार के कुछ अन्य सदस्यों ने भी विभिन्न स्पोर्ट्सों में उत्कृष्टता प्रदर्शित की है. इस निजी विवरण से मैं यह बताना चाहती हूं कि जनजातीय परिवारों में स्पोर्ट्स-कूद की जीवंत परंपरा विद्यमान है. उनमें स्पोर्ट्सों के लिए असीम प्रतिभा, ऊर्जा और रुचि है तथा आगे बढ़ने का हौसला भी है. सुविधाओं और प्रशिक्षण द्वारा ऐसी प्रतिभाओं को निखारने से, स्पोर्ट्स-कूद उनके लिए केवल मनोरंजन और सामाजिक मेल-जोल का जरिया न होकर जीवन में आगे बढ़ने का, आर्थिक आत्मनिर्भरता का और सामाजिक सम्मान प्राप्त करने का माध्यम बन सकता है. इस संदर्भ में 2018 से केंद्र प्रशासन द्वारा राज्य प्रशासनों तथा स्पोर्ट्स संस्थानों के साथ मिलकर चलाये जा रहे ‘स्पोर्ट्सो इंडिया’ अभियान द्वारा अच्छा बदलाव आया है. कुछ वर्षों पहले तक हमारे देश में स्पोर्ट्स-कूद की अच्छी सुविधाएं केवल महानगरों तक सीमित थीं, जबकि ग्रामांचलों और वनांचलों में अनेक प्रतिभावान खिलाड़ी रहते हैं. जनजातीय क्षेत्रों में स्पोर्ट्स अकादमी और प्रशिक्षण सुविधाएं सुलभ नहीं होती थीं. अब एकलव्य आवासीय आदर्श विद्यालयों में बच्चों के स्पोर्ट्स-कूद पर विशेष ध्यान देने से लेकर ‘स्पोर्ट्सो इंडिया जनजातीय स्पोर्ट्स’ जैसे प्रयत्नों के बल पर जनजातीय प्रतिभाओं को प्रशिक्षण और प्रोत्साहन मिल रहा है. मुझे याद है कि मेरे विद्यार्थी जीवन के दौरान ग्रामीण स्तर पर पांच-छह गांवों के लोग मिलकर स्पोर्ट्स प्रतियोगिताएं आयोजित किया करते थे. कुछ आध्यात्मिक और सांस्कृतिक संस्थाएं भी जनजातीय क्षेत्रों में स्पोर्ट्स-कूद को बढ़ावा देती रही हैं. प्रायः ग्रामीण क्षेत्र की प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाले अच्छे खिलाड़ी भी ग्रामीण स्तर से ऊपर नहीं उठ पाते थे. पिछले कुछ वर्षों में इस स्थिति को बदलने के अनेक सराहनीय प्रयास किये गये हैं. ऐसे प्रयासों को आगे बढ़ाते हुए ‘स्पोर्ट्सो इंडिया जनजातीय स्पोर्ट्स 2026’ का आयोजन किया गया. इस आयोजन से जमीनी स्तर के जनजातीय खिलाड़ियों को भी पहचान मिली है तथा उन्हें सुविधाएं और प्रशिक्षण उपलब्ध कराये गये हैं. इन राष्ट्रीय स्पोर्ट्सों में लगभग सभी राज्यों और संघ राज्यक्षेत्रों के खिलाड़ियों ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया है. हिंदुस्तान ने खिलाड़ियों की नैसर्गिक प्रतिभा के बल पर ओलिंपिक स्पोर्ट्सों में पहला स्वर्ण पदक हॉकी के लिए 1928 में जीता था. उस विजय में जनजातीय समुदाय के खिलाड़ियों की महत्वपूर्ण भूमिका थी. तब से आज तक दिलीप तिर्की, सुबोध लकड़ा और सलीमा टेटे जैसे स्टार हॉकी खिलाड़ी हिंदुस्तान की पुरुष तथा स्त्री टीमों को जनजातीय प्रतिभा से समृद्ध करते रहे हैं. हिंदुस्तान प्रशासन द्वारा चलाये जा रहे ‘स्पोर्ट्सो इंडिया’ राष्ट्रीय स्पोर्ट्स विकास कार्यक्रम के तहत स्थानीय स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक सभी भौगोलिक क्षेत्रों, सामाजिक वर्गों और संस्थाओं के लिए समुचित स्पोर्ट्स इकोसिस्टम उपलब्ध कराने का समावेशी प्रयास किया जा रहा है. इसी कार्यक्रम के तहत, स्पोर्ट्स-कूद में बेटियों की भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए चलायी जा रही ‘अस्मिता’ नामक योजना से जनजातीय बेटियों की क्षमता भी विकसित हो रही है. ‘स्पोर्ट्सो इंडिया जनजातीय स्पोर्ट्स 2026’ द्वारा शुरू की गयी मुहिम को मजबूत बनाते हुए जनजातीय स्पोर्ट्स प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने से खिलाड़ियों के ऐसे समूह तैयार होंगे, जो विश्व पटल पर

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ईरान युद्ध के बीच हटाए गए US आर्मी चीफ, रक्षा मंत्री ने किया जबरन रिटायर, अचानक क्यों?

US Army Chief Retire: ईरान के साथ जारी युद्ध के बीच अमेरिकी सेना के चीफ रैंडी ए जॉर्ज को उनके पद से हटा दिया गया है. अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने उन्हें तत्काल सेवानिवृत्ति लेने के लिए मजबूर किया. अचानक लिए गए इस फैसले के पीछे कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया गया है. पेंटागन ने भी गुरुवार को इस कदम की पुष्टि की.  यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान युद्ध के जल्द समाप्त होने का ऐलान कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर वे मिडिल ईस्ट में अपने सैनिकों की संख्या भी बढ़ा रहे हैं.  पेंटागन के मुख्य प्रवक्ता सीन पर्नेल ने कहा कि जॉर्ज ‘तत्काल प्रभाव से सेना के 41वें चीफ ऑफ स्टाफ के पद से सेवानिवृत्त होंगे.’ उन्होंने कहा कि विभाग उनके ‘देश के प्रति दशकों की सेवा’ के लिए आभारी है. रैंडी के जबरन रिटायरमेंट के बाद, मौजूदा वाइस चीफ ऑफ स्टाफ जनरल क्रिस्टोफर ला-नेव को कार्यवाहक आर्मी चीफ नियुक्त किया गया है. 82वीं एयरबोर्न डिवीजन के पूर्व कमांडर ला-नेव पहले हेगसेथ के सैन्य सहयोगी भी थे. ला-नेव इससे पहले दक्षिण कोरिया में आठवीं सेना की कमान संभाल रहे थे. Pete Hegseth has asked Army Chief of Staff Gen. Randy George to step down and take immediate retirement according to CBS pic.twitter.com/NhUsh1Z7jh — Visegrád 24 (@visegrad24) April 2, 2026 ट्रंप प्रशासन लगातार कर रहा फेरबदल, लेकिन क्यों? यह अचानक नेतृत्व परिवर्तन, हेगसेथ द्वारा अमेरिकी सैन्य ढांचे में किए जा रहे व्यापक बदलाव का हिस्सा है. वह पहले ही एक दर्जन से अधिक वरिष्ठ अधिकारियों को हटा चुके हैं. हेगसेथ ने रक्षा विभाग को अपने तरीके से ढालने के लिए तेजी से कदम उठाए हैं. वह राष्ट्रपति ट्रंप के राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंडे को लागू करने के लिए शीर्ष जनरलों और एडमिरलों को हटाते रहे हैं.  माना जा रहा है ट्रंप प्रशासन उन अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई कर रहा है, जिन्हें पिछले प्रशासन की नीतियों से प्रभावित माना जाता है. यूएस मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, हेगसेथ चार सैन्य अधिकारियों (दो स्त्रीओं और दो अश्वेत पुरुषों) को वन-स्टार जनरल बनाने की प्रक्रिया को रोकने की कोशिश कर रहे हैं. वह पहले भी अमेरिकी सेना से ‘डाइवर्सिटी, इक्विटी और इंक्लूजन’ (DEI) नीतियों को हटाने की बात कर चुके हैं. रैंडी पिछले साल फरवरी में हुई शुरुआती बर्खास्तगी की लहर से बच गए थे, जिनमें जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के अध्यक्ष जनरल चार्ल्स क्यू ब्राउन जूनियर और नौसेना प्रमुख एडमिरल लीसा फ्रैंचेटी और एयर फोर्स के नंबर-2 अधिकारी जनरल जेम्स स्लिफ को हटाया गया था. इसके बाद से एक दर्जन से अधिक अन्य वरिष्ठ सैन्य अधिकारी या तो समय से पहले सेवानिवृत्त हो चुके हैं या उन्हें उनके पदों से हटा दिया गया है. इनमें जॉर्ज के डिप्टी, आर्मी के वाइस चीफ ऑफ स्टाफ जनरल जेम्स मिंगस भी शामिल थे, जिन्हें इस पद पर दो साल से कम समय हुआ था.  आगे भी कुछ और बर्खास्तगी संभव वहीं कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, चीफ ऑफ चैपलिन मेजर जनरल विलियम ग्रीन और यूएस आर्मी ट्रांसफॉर्मेशन एंड ट्रेनिंग कमांड के कमांडिंग जनरल जनरल डेविड होडने भी रिटायर किए गए हैं. हालांकि, इसकी पुष्टि अभी नहीं हो पाई है. माना जा रहा है कि आने वाले समय में अमेरिकी सेना से कुछ और विदाई हो सकती है.  द अटलांटिक की रिपोर्ट के अनुसार, व्हाइट हाउस  एफबीआई निदेशक काश पटेल, आर्मी सेक्रेटरी डैनियल ड्रिस्कॉल और लेबर सेक्रेटरी लोरी शावेज डीरीमर भी ट्रंप प्रशासन छोड़ सकते हैं.  हालांकि, इन फैसलों का समय अभी तय नहीं है और राष्ट्रपति ट्रंप ने अभी अंतिम निर्णय नहीं लिया है. लेकिन अटार्नी जनरल पाम बांडी को ट्रंप ने बाहर कर दिया है.  JUST IN – Pete Hegseth fires two more generals, David Hodne and William Green Jr., alongside Army Chief Of Staff Randy George — Reuters pic.twitter.com/XsYW3tW59D — Disclose.tv (@disclosetv) April 3, 2026 जॉर्ज का सैन्य करियर जनरल रैंडी जॉर्ज एक इन्फैंट्री अधिकारी हैं और वेस्ट प्वाइंट मिलिट्री अकादमी के स्नातक हैं. उन्होंने पहले खाड़ी युद्ध (गल्फ वॉर) के साथ-साथ इराक और अफगानिस्तान में भी सेवा दी है. उन्हें 2023 में सेना के शीर्ष पद पर नियुक्त किया गया था. आमतौर पर यूएस आर्मी चीफ का कार्यकाल चार साल का होता है, ऐसे में रैंडी 2027 में रिटायर होते, यानी उनके पास एक साल का समय और बचा था.  इससे पहले, जॉर्ज आर्मी के वाइस चीफ के रूप में कार्य कर चुके हैं और उससे पहले उन्होंने तत्कालीन रक्षा मंत्री लॉयड ऑस्टिन के वरिष्ठ सैन्य सलाहकार के रूप में काम किया. 2021 से 2022 के बीच वह ऑस्टिन के शीर्ष सैन्य सहयोगी भी रहे, इसके बाद उन्होंने सेना में कई वरिष्ठ नेतृत्व पद संभाले. पद से हटाए जाने से कुछ दिन पहले ही, जॉर्ज वेस्ट प्वाइंट में कैडेट्स के साथ बातचीत कर रहे थे और उन्हें नेतृत्व के लिए अपने अनुभव के आधार पर मार्गदर्शन दे रहे थे. ये भी पढ़ें:- ट्रंप की भतीजी ने खोली परिवार की पोल, सुप्रीम कोर्ट में कानून की सुनवाई के लिए खुद पहुंचे थे US प्रेसिडेंट ये भी पढ़ें:- होर्मुज स्ट्रेट खुलवाने नहीं आया नाटो, गुस्साए ट्रंप करवाएंगे पुतिन का फायदा, जानें अब क्या कह दिया? ईरान युद्ध के बीच क्यों बदला जा रहा सैन्य नेतृत्व? यह पुनर्गठन ऐसे समय हो रहा है जब ईरान से जुड़े संघर्ष के कारण सैन्य गतिविधियां तेज हो गई हैं. ईरान युद्ध पर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने युद्ध का कालक्रम आने वाले 2-3 हफ्ते तक का निर्धारित कर दिया है. उनके अनुसार, अमेरिका जल्द से जल्द इस युद्ध से बाहर होगा. उन्होंने कहा कि अमेरिका अपने निर्धारित लक्ष्यों को लगभग पूरा कर चुका है. हालांकि, युद्ध के बीच इस तरह सैन्य बदलाव करना थोड़ा आश्चर्यचकित करता है. शीर्ष नेतृत्व को बदलना अमेरिका के लिए घातक हो सकता है. एक्सपर्ट्स के अनुसार, इससे ग्राउंड पर सैनिकों का मनोबल टूट सकता है. हालांकि, ट्रंप ने अपने भाषण में यह भी कहा था कि वह आने वाले दिनों में ईरान के ऊपर और बड़ा हमला कर सकते हैं. ऐसे में माना जा रहा है कि ट्रंप प्रशासन अपनी नीतियों के मुताबिक सैन्य नेतृत्व को पद पर बैठाना चाहता है, जो उनके लक्ष्यों को प्राप्त करा सके.  The post ईरान युद्ध के बीच हटाए

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12वीं के बाद बेस्ट कॉलेज की तलाश! ये यूनिवर्सिटी बन सकती है आपकी पहली पसंद

Best College Admission Episode 3: चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी (CU) आज के समय में स्टूडेंट्स की पहली पसंद बनी हुई है. शानदार कैंपस, बेहतरीन प्लेसमेंट और मॉडर्न पढ़ाई के तरीके इसे खास बनाते हैं. अगर आप 12वीं के बाद एक अच्छे यूनिवर्सिटी में एडमिशन लेना चाहते हैं, तो Chandigarh University एक बेहतर विकल्प माना जाता है. NIRF रैंकिंग 2025 में इस कॉलेज को बेस्ट यूनिवर्सिटी के कैटेगरी में 19वां रैंक मिला है. यहां इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट, लॉ, फार्मेसी, मीडिया जैसे कई कोर्स की फैसिलिटी है. आइए ऐसे में बेस्ट कॉलेज एडमिशन (Best College Admission) सीरिज के तीसरे एपिसोड में चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में एडमिशन प्रोसेस के बारे में जानेंगे. साथ ही यहां के प्लेसमेंट रिकॉर्ड के बारे में भी जानेंगे.  कौन-कौन से कोर्स मिलते हैं? चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी (Best College Admission) में कई तरह के कोर्स मिलते हैं, जैसे: BTech (इंजीनियरिंग) BBA, MBA (मैनेजमेंट) BCA, MCA (आईटी) BA, MA (आर्ट्स) Law (LLB, BA LLB) Pharmacy और Nursing एडमिशन के लिए योग्यता (Eligibility) UG कोर्स के लिए 12वीं पास होना जरूरी है.  PG कोर्स के लिए ग्रेजुएशन जरूरी है.  कुछ कोर्स में न्यूनतम 50–60% मार्क्स चाहिए होते हैं.  इंजीनियरिंग जैसे कोर्स में PCM (फिजिक्स, केमिस्ट्री, मैथ्स) होना जरूरी होता है.  Best College Admission: एडमिशन प्रोसेस  चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में ज्यादातर कोर्सेज के लिए CUCET (चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी कॉमन एंट्रेंस एग्जाम ) देना अनिवार्य है. यह सिर्फ एक एंट्रेंस टेस्ट नहीं है, बल्कि स्कॉलरशिप पाने का सुनहरा मौका भी होता है. अगर आप इस टेस्ट में अच्छा स्कोर करते हैं, तो आपको फीस में भारी छूट (100% तक) मिल सकती है. यह एग्जाम ऑनलाइन होता है, जिसे आप घर बैठे अपनी सुविधा के अनुसार स्लॉट बुक करके दे सकते हैं.  एडमिशन के लिए ऐसे करें अप्लाई  सबसे पहले Chandigarh University की ऑफिशियल वेबसाइट cuchd.in पर जाएं.  वहां अपनी बेसिक डिटेल्स डालकर रजिस्ट्रेशन करें.  रजिस्ट्रेशन नंबर और पासवर्ड डालकर लॉगिन करें.  अब अपना एप्लीकेशन फॉर्म भर सकते हैं.  फिर ऑनलाइन फीस जमा करें.  लास्ट में सबमिट करके प्रिंट निकाल लें.  प्लेसमेंट डिटेल्स इस बार चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में प्लेसमेंट रिकॉर्ड काफी अच्छा रहा है. यहां Microsoft, Amazon, IBM, HP, SAP Labs, Samsung, L&T, Wipro और Flipkart जैसे बड़ी कंपनियों ने इंजीनियरिंग के छात्रों को बेहतरीन जॉब ऑफर्स दिए. कुल  3750 इंजीनियरिंग छात्रों को कैंपस प्लेसमेंट के जरिए नौकरी मिली है. पिछले साल के मुकाबले कैंपस आने वाली कंपनियों की संख्या में 30% की बढ़ोतरी देखी गई है. 2025 में इंजीनियरिंग स्टूडेंट्स का हाईएस्ट पैकेज 54.75 लाख रुपये प्रतिवर्ष रहा.  यह भी पढ़ें: Best College Admission: IIT जोधपुर में एडमिशन के लिए क्या है योग्यता? जानें कौन कर सकता है अप्लाई The post 12वीं के बाद बेस्ट कॉलेज की तलाश! ये यूनिवर्सिटी बन सकती है आपकी पहली पसंद appeared first on Naya Vichar.

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