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April 13, 2026

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आशा भोसले के अंतिम दर्शन के लिए उमड़ी फिल्मी हस्तियां, मुंबई के शिवाजी पार्क में होगा अंतिम संस्कार

Asha Bhosle Died: हिंदुस्तानीय संगीत जगत की कोहिनूर और दिग्गज गायिका आशा भोसले अब हमारे बीच नहीं रहीं. 92 वर्ष की आयु में रविवार को उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया. शनिवार शाम सीने में इंफेक्शन की शिकायत के बाद उन्हें ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती कराया गया था. आज यानी सोमवार को उनके पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए मुंबई के लोअर परेल स्थित उनके आवास ‘कासा ग्रांडे’ में रखा गया है. जैसे ही उनके पार्थिव शरीर को अंतिम विदाई के लिए रखा गया, उन्हें नमन करने के लिए सिनेमा जगत की बड़ी-बड़ी हस्तियां पहुंचने लगीं हैं. घर के बाहर और अंदर का माहौल काफी गंभीर है, जहां हर चेहरा अपनी चहेती ताई को खोने के गम में डूबा नजर आ रहा है. जैकी श्रॉफ एक्टर जैकी श्रॉफ जब वहां पहुंचे तो हाथ जोड़े हुए दर्शकों को नमस्ते किया और काफी इमोशनल नजर आएं. View this post on Instagram A post shared by Viral Bhayani (@viralbhayani) विद्या बालन और उर्मिला मातोंडकर बॉलीवुड एक्ट्रेस विद्या बालन और उर्मिला मातोंडकर आशा भोसले के घर उन्हें पुष्पांजलि अर्पित करने पहुंची. View this post on Instagram A post shared by Viral Bhayani (@viralbhayani) विशाल ददलानी और सलीम मर्चेंट संगीतकार विशाल ददलानी और सलीम मर्चेंट के साथ-साथ एक्ट्रेस सई मांजरेकर भी वहां मौजूद रहीं. View this post on Instagram A post shared by Viral Bhayani (@viralbhayani) सई मांजरेकर View this post on Instagram A post shared by Viral Bhayani (@viralbhayani) शिवाजी पार्क में होगा अंतिम संस्कार संगीत की दुनिया की इस महान सिंगर की अंतिम विदाई की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं. आशा भोसले का पार्थिव शरीर उनके लोअर परेल स्थित घर से दोपहर बाद फूलों से सजी एम्बुलेंस में अंतिम यात्रा के लिए निकाला जाएगा. आज, सोमवार शाम 4 बजे मुंबई के ऐतिहासिक शिवाजी पार्क में उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा. बताया जा रहा है कि उनकी महान उपलब्धियों को देखते हुए उन्हें राजकीय सम्मान के साथ विदाई दी जा सकती है, जहां प्रशासन और पुलिस अधिकारियों के साथ-साथ भारी संख्या में उनके करीबी उन्हें अंतिम विदाई देने जुटेंगे. यह भी पढ़ें: रिकॉर्ड्स की रानी आशा भोसले के जीवन की वो कमी, जिसे वह कभी पूरा नहीं कर सकीं The post आशा भोसले के अंतिम दर्शन के लिए उमड़ी फिल्मी हस्तियां, मुंबई के शिवाजी पार्क में होगा अंतिम संस्कार appeared first on Naya Vichar.

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पाकिस्तान में वार्ता फेल होने पर बोले ट्रंप- ‘ईरान वापस आए या नहीं, मुझे फर्क नहीं पड़ता; तेहरान की हालत खराब’

Trump-Iran Talks Fail: पाकिस्तान में हुई शांति वार्ता फेल होने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर सख्त रुख अपना लिया है. ट्रंप ने साफ कर दिया है कि उन्हें इस बात की कोई फिक्र नहीं है कि ईरान बातचीत की मेज पर वापस आता है या नहीं. एयर फोर्स वन के पास पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि ईरान की हालत इस समय बहुत खराब है और उसकी सैन्य ताकत लगभग खत्म हो चुकी है. ट्रंप ने दावा किया कि ईरान के मिसाइल और ड्रोन बनाने वाले कारखाने तबाह हो गए हैं. होर्मुज की घेराबंदी और कच्चे तेल का संकट एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी नौसेना अब ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ की घेराबंदी करने जा रही है. इस रास्ते से गुजरने वाले उन जहाजों को रोका जाएगा जो ईरान के बंदरगाहों पर जा रहे हैं या वहां से आ रहे हैं. हालांकि, दूसरे देशों के बीच चलने वाले जहाजों को नहीं रोका जाएगा. इस समाचार के आते ही कच्चे तेल के बाजार में हलचल मच गई और कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं. बता दें कि दुनिया का 20 प्रतिशत तेल इसी रास्ते से होकर गुजरता है. न्यूक्लियर हथियार पर ट्रंप की दो टूक ट्रंप ने साफ लफ्जों में कहा है कि चाहे जो हो जाए, ईरान कभी भी न्यूक्लियर हथियार नहीं बना पाएगा. ट्रंप के मुताबिक, पाकिस्तान में चली 21 घंटे की मैराथन मीटिंग में ईरान ने साफ किया था कि वह अब भी न्यूक्लियर ताकत बनना चाहता है. अमेरिका की मांग है कि ईरान यूरेनियम संवर्धन (Enrichment) पूरी तरह बंद करे और दूसरे देशों में सक्रिय हथियारबंद गुटों की मदद करना बंद करे. 22 अप्रैल को मौजूदा सीजफायर खत्म होने वाला है, जिससे तनाव और बढ़ने की आशंका है. नाटो (NATO) से नाराज दिखे अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने नाटो  देशों पर भी जमकर भड़ास निकाली. उन्होंने कहा कि अमेरिका नाटो के लिए लाखों-करोड़ों डॉलर खर्च करता है, लेकिन जरूरत पड़ने पर यह संगठन साथ नहीं खड़ा होता. ट्रंप ने कहा कि नाटो  सिर्फ रूस के खिलाफ एक बचाव का जरिया बनकर रह गया है और वह इसकी भूमिका की दोबारा जांच करेंगे. उन्होंने यह भी बताया कि हालिया मिशन में शामिल रहे अमेरिका के दो पायलट अब ठीक हैं और तेजी से रिकवर कर रहे हैं. ये भी पढ़ें: हंगरी में पीटर मैग्योर की ऐतिहासिक जीत, 16 साल बाद हारे ‘ट्रंप और पुतिन के दोस्त’ विक्टर ओर्बन ईरान की पलटवार की धमकी ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड ने चेतावनी दी है कि अगर होर्मुज के पास कोई भी सैन्य दखलअंदाजी हुई, तो उसका मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा. फिलहाल पाकिस्तान, यूरोपीय संघ, ओमान और रूस इस मामले को सुलझाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन ट्रंप के सख्त बयानों से लग रहा है कि अमेरिका अब कूटनीति के बजाय आर्थिक और सैन्य दबाव का रास्ता अपनाएगा. लेबनान में इजराइल की सैन्य कार्रवाई के बीच इस घटनाक्रम ने पूरे मिडिल ईस्ट में हलचल बढ़ा दी है. ये भी पढ़ें: ईरान पर US का शिकंजा: सभी समुद्री ट्रैफिक को ब्लॉक करने का ऐलान The post पाकिस्तान में वार्ता फेल होने पर बोले ट्रंप- ‘ईरान वापस आए या नहीं, मुझे फर्क नहीं पड़ता; तेहरान की हालत खराब’ appeared first on Naya Vichar.

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Asha Bhosle :जब रोते हुए कैबरे सांग गाया था आशा जी ने … कंपोजर उत्तम सिंह ने किया खुलासा

asha bhosle :हिंदुस्तानीय सिनेमा की दिग्गज गायिका आशा भोसले का निधन बीते रविवार को हो गया. वह 92 साल की थी.संगीतकार उत्तम सिंह और आशा भोसले का साथ दशकों पुराना है.आशा भोसले के साथ अपने जुड़ाव और पुरानी यादों को उन्होंने उर्मिला कोरी के साथ साझा किया. बातचीत के प्रमुख अंश 90 की उम्र में भी प्लेबैक सिंगिंग करना चाहती थी पंजाबी की एक लोकप्रिय फिल्म है। नानक नाम जहाज़ है. 1969 में वह फिल्म रिलीज हुई थी. उसमें उन्होंने पंजाबी शबद गाये थे। मैंने उसमें वायलिन बजाया था. उस फिल्म से हमारी पहचान शुरू हुई जो जल्द ही पारिवारिक बन गयी। वह समय के साथ म्यूजिक की आइकॉन बन गयी लेकिन मेरे साथ हमेशा उनका रिश्ता बहुत घरेलू रहा. हमेशा वह मेरे काम के लिए मौजूद रहती थी. काम को लेकर वह बहुत जुनूनी थी. गानों को लेकर उनके नाम पर ना जाने कितने रिकॉर्ड हैं लेकिन वह 90 की उम्र में भी गाना चाहती थी. मैं जब कभी उनको फ़ोन करता कि दीदी कैसी हैं तो वह जवाब में कहती कि हाल तो ठीक है उत्तम लेकिन बहुत टाइम से कोई रिकॉर्डिंग वगैरह नहीं हुई.वह इस उम्र में भी काम करना चाहती थी. आखिरी मुलाक़ात आठ महीने पहले मैं उनसे अपनी एक मराठी फिल्म में गाने के लिए मिलने गया था। भले गाने को लेकर बात नहीं बनी लेकिन उन्होंने कहा कि घर में कबाब बने हैं। खाकर जाना है.मैं उनके घर गया हूँ और बिना खाये आऊं। ऐसा 50 सालों में कभी नहीं हुआ था. आशाजी बहुत ही केयरिंग थी. मुझे याद है बहुत साल पहले एक बार रात को दो बजे हमलोग उनके घर से निकल रहे थे. हेमंत भोंसले के साथ म्यूजिक सीटिंग करके. मेरे असिस्टेंट राम जी भी मेरे साथ थे. जैसे दरवाजा खोला सामने से वो आ रही थी. वों एक रिकॉर्डिंग से लौटी थी. उन्होने कहा अरे तुमलोग अभी भी यही हो. मैंने बोला हां काम कर रहे थे. उन्होने पूछा कि खाना खाया. मैंने बोला घर जाकर खा लेंगे उन्होने बोला नहीं रुको. बस बीस मिनट दो. मैं बताना चाहूंगा कि उतनी रात को बिना किसी नौकर को जगाये उन्होंने खुद ही चिकन और पुलाव बीस मिनट में गरमागरम बनाकर ले आयी. उन्होने अपने हाथों से हमें परोसा और जब तक हम खाकर अपने घर के लिए निकले नहीं. वे हमारे पास ही बैठी रही थी. एक घंटे में दिल ले गयी रिकॉर्ड कर दिया था आशाजी के करियर के सुपरहिट गीतों में मेरे द्वारा कंपोज़ किया गया फिल्म दिल तो पागल है का गीत दिल ले गयी.. ले गयी भी शामिल है. यह मेरी खुशकिस्मती है कि यह गाना इतना बड़ा हिट बन गया कि आशाजी का कोई भी कॉन्सर्ट इस गाने के बिना पूरा नहीं होता था. इस गाने से जुड़ी रिकॉर्डिंग के अनुभव को याद करुं, तो यश जी कैम्प की सबसे अच्छी बात ये थी कि उनके संगीतकार को जो चाहिए, वों उसे करने की पूरी आजादी देते थे. जब मैंने दिल ले गयी.. ले गयी कंपोज़ किया तो मैंने कहा ये गाना आशाजी का गाना है. आशाजी को बुलाया गया. मैंने उन्हें गाना बताया. गाना था दिल ले गयी.. ले गयी.. लेकिन जब गाया गया तो वों ऐसे गाया गया दिल ले गयी.. ले गयी.या या या , जो लास्ट में एक अलग अंदाज में या या या शब्दों को उन्होंने खींचा है. वो उनका ही आईडिया था. उन्होंने कहा कि उत्तम में ऐसा करुं. मैंने कहा कि आप कीजिये. उन्होने एक घंटे में इस गाने को रिकॉर्ड कर दिया था. रिहर्सल में भी परफेक्शन के साथ गाती थी आशाजी को संगीत में लीजेंड उनकी मेहनत और समर्पण ने बनाया है. रिहर्सल को भी वह बहुत महत्व देती थी . मुझे याद है हमने जब साल 77 का म्यूजिकल टूर शुरू किया, तो उसकी तैयारी 76 से रिहर्सल करना शुरू कर दिया था. एक साल पहले से. लाइव शो करने से पहले हम उसी स्टेज पर पूरी रिहर्सल करते थे चार से पांच घंटे. वों पूरा दिन हमारी बहुत मेहनत का दिन होता था. रिहर्सल में भी वे सारे गाने पूरे परफेक्शन के साथ गाती थी. जो उन्होने में गाया है वैसा ही स्टेज शो ही नहीं बल्कि कार्बन कॉपी गाती थी. एक भी सुर इधर से उधर नहीं होता था. रो रही थी और कैबरे गा रही थी इंडस्ट्री में यह बात प्रसिद्ध है कि आशाजी गाने के मूड को ध्यान में रखकर गाती थी.ख़ुशी वाले गानों को मुस्कुराते हुए जाती थी, लेकिन मैंने उन्हें आँखों में आंसू लेकर कैबरे गाने हुए देखा है.मुझे अभी वो गाना याद नहीं आ रहा है लेकिन कैबरे सांग था. ये अच्छे से याद है. मैं अरेंजर उस वक़्त हुआ करता था. देखा दीदी आयी हैं, लेकिन उनकी आँखों में आंसू हैं. मैंने पूछा क्या हुआ आपको. उन्होंने कहा कि बाद में बताती हूँ. पहले काम करते हैं. उसके बाद उन्होंने कैबरे सांग गाया. पूरे शरारत और मस्ती के अंदाज में गाय था कोई बोल ही नहीं सकता था कि ये लेडी पीछे से कुछ तकलीफ में आयी है. आँखों में आंसू है.ऐसे कमाल के कलाकार अब ऊपर वाला नहीं बनाएगा. ये ढांचे बनना बंद हो गए है. एक युग में ऐसे लोग आते हैं. — The post Asha Bhosle :जब रोते हुए कैबरे सांग गाया था आशा जी ने … कंपोजर उत्तम सिंह ने किया खुलासा appeared first on Naya Vichar.

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ईरान पर US का शिकंजा: सभी समुद्री ट्रैफिक को ब्लॉक करने का ऐलान

यूनाइटेड स्टेट सेंट्रल कमांड ने ऐलान किया है कि 13 अप्रैल (सोमवार) सुबह 10 बजे से ईरान के बंदरगाहों पर नाकेबंदी शुरू होगी. CENTCOM के मुताबिक, ये नियम हर देश के जहाजों पर बराबर लागू होगा. जो भी जहाज ईरानी पोर्ट्स या तटीय इलाकों में आएंगे या जाएंगे, उन पर यह पाबंदी लागू रहेगी. सेंट्रल कमांड ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करके बताया कि ईरान के सभी बंदरगाहों पर आने-जाने वाले जहाजों पर नाकेबंदी लागू की जाएगी. यह फैसला राष्ट्रपति के ऐलान के मुताबिक लिया गया है. चैनल 16 पर अमेरिकी नौसेना से संपर्क रखने की सलाह CENTCOM ने साफ किया कि Strait of Hormuz से गैर-ईरानी बंदरगाहों के लिए आने-जाने वाले जहाजों की आवाजाही पर कोई रोक नहीं होगी. साथ ही व्यापारिक जहाजों को सलाह दी गई है कि वे आधिकारिक ‘नोटिस टू मेरिनर्स’ (आधिकारिक सूचना या अलर्ट) पर नजर रखें और Gulf of Oman व होर्मुज स्ट्रेट के पास काम करते समय चैनल 16 पर अमेरिकी नौसेना से संपर्क में रहें. यह भी पढ़ें : अस‍फल अमेरिका-ईरान वार्ता ने बढ़ायी चिंता, पढ़ें पूर्व विदेश सचिव शशांक का आलेख होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों को रोकना शुरू करेगा अमेरिका अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार (12 अप्रैल) को Truth Social पर कहा कि अमेरिका जल्द ही होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों को रोकना शुरू करेगा. उन्होंने कहा कि खास निशाना उन जहाजों पर है जो इलीगल टोल दे रहे हैं. यह कदम उन जहाजों को निशाना बनाता दिख रहा है जो इस अहम समुद्री रास्ते से गुजरते वक्त चीनी युआन में लेन-देन कर रहे हैं. इसे लंबे समय से चले आ रहे पेट्रोडॉलर सिस्टम के लिए चुनौती माना जा रहा है. साथ ही अमेरिका के प्रतिबंधों से बचने का तरीका भी समझा जा रहा है. पेट्रोडॉलर सिस्टम : वह व्यवस्था जिसमें दुनिया भर में कच्चा तेल (क्रूड ऑयल) की खरीद-फरोख्त मुख्य रूप से अमेरिकी करेंसी यानी अमेरिकी डॉलर में होती है. चीन और ईरान दोनों के खिलाफ अमेरिका का कड़ा रुख इस कदम से साफ है कि अमेरिका ने चीन और ईरान दोनों के खिलाफ अपना रुख और कड़ा कर लिया है. दरअसल, ये दोनों देश अब अमेरिकी आर्थिक दबाव का खुलकर मुकाबला कर रहे हैं. चाहे वो तेल के कारोबार में डॉलर की जगह दूसरी करेंसी लाना हो या रणनीतिक इलाकों पर पकड़ बनाना. इसी वजह से तीनों देशों के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है. हालात टकराव की ओर बढ़ते दिख रहे हैं. The post ईरान पर US का शिकंजा: सभी समुद्री ट्रैफिक को ब्लॉक करने का ऐलान appeared first on Naya Vichar.

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Ambedkar Jayanti Speech: 10 लाइनों में तैयार करें शानदार भाषण, जानें बाबा साहेब के जीवन से जुड़े फैक्ट्स

Ambedkar Jayanti 10 Lines: हिंदुस्तान के महान समाज सुधारक, संविधान निर्माता और दूरदर्शी नेता डॉ भीमराव अंबेडकर की जयंती हर साल 14 अप्रैल को पूरे देश में श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई जाती है. यह दिन सिर्फ एक महान व्यक्तित्व को याद करने का अवसर नहीं है, बल्कि उनके विचारों, संघर्षों और समाज को दिए गए योगदान को समझने का भी मौका है. बाबा साहेब ने अपने जीवन में अनेक कठिनाइयों का सामना करते हुए शिक्षा, समानता और न्याय के लिए जो लड़ाई लड़ी, वह आज भी करोड़ों लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत है. अंबेडकर जयंती के अवसर पर स्कूलों, कॉलेजों और विभिन्न संस्थानों में भाषण और निबंध प्रतियोगिताएं आयोजित की जाती हैं, जहां छात्र उनके जीवन और विचारों को साझा करते हैं. बाबा अंबेडकर के लिए 10 लाइन डॉ. भीमराव अंबेडकर का जन्म 14 अप्रैल 1891 को मध्य प्रदेश के महू में हुआ था. डॉ. अंबेडकर ने उच्च शिक्षा प्राप्त कर समाज में नई मिसाल पेश की वे हिंदुस्तान के महान समाज सुधारक और संविधान निर्माता थे. उन्होंने जीवनभर जातिवाद और छुआछूत के खिलाफ संघर्ष किया. वे दलितों और कमजोर वर्गों के अधिकारों के लिए आवाज उठाने वाले नेता थे. वे स्वतंत्र हिंदुस्तान के पहले कानून मंत्री भी बने थे. उन्होंने हिंदुस्तानीय संविधान की रचना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. उनका नारा था, “शिक्षित बनो, संगठित रहो, संघर्ष करो.” उन्होंने 1956 में बौद्ध धर्म अपनाया और सामाजिक बदलाव का संदेश दिया. उनका जीवन आज भी हमें समानता, शिक्षा और अधिकारों के लिए प्रेरित करता है. अंबेडकर जयंती क्यों मनाई जाती है? 14 अप्रैल को डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती के रूप में मनाया जाता है. यह दिन उनके योगदान और विचारों को याद करने का अवसर होता है. इस दिन देशभर में कार्यक्रम, भाषण और जागरूकता अभियान चलाए जाते हैं. क्यों खास है बाबा साहेब का जीवन? डॉ. अंबेडकर का जीवन हमें यह सिखाता है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, अगर हमारे पास शिक्षा, आत्मविश्वास और दृढ़ संकल्प है, तो हम किसी भी बाधा को पार कर सकते हैं. उनके विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं, जितने उनके समय में थे. ऐसे में अंबेडकर जयंती सिर्फ एक उत्सव नहीं, बल्कि उनके आदर्शों को अपनाने और एक समान, न्यायपूर्ण और जागरूक समाज बनाने का संकल्प लेने का दिन है. यह भी पढ़ें- Ambedkar Jayanti Essay: बाबा साहेब पर 3 छोटे और आसान निबंध, स्कूल में आएंगे काम The post Ambedkar Jayanti Speech: 10 लाइनों में तैयार करें शानदार भाषण, जानें बाबा साहेब के जीवन से जुड़े फैक्ट्स appeared first on Naya Vichar.

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बंगाल चुनाव 2026: नंदीग्राम से भवानीपुर तक… इन ‘हॉट’ सीट्स पर हार-जीत तय करेगी कौन बनेगा मुख्यमंत्री

West Bengal Election 2026 Key Seats: बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 का प्रचार पूरे शबाब पर है. राज्य की सभी 294 विधानसभा सीटों का सियासी पारा सातवें आसमान पर है. हालांकि, पूरे बंगाल की नजरें उन प्रमुख सीटों (Key Seats) पर टिकी हैं, जो इस बार सत्ता का फैसला करेंगी. नेतृत्वक विश्लेषकों की मानें, तो इन सीटों पर किसी तरह का उलटफेर न केवल ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (TMC) और हिंदुस्तानीय जनता पार्टी (BJP) के भाग्य का फैसला करेगा, बल्कि यह भी तय करेगा कि 4 मई को ‘नबान्न’ (Nabanna) में किसकी ताजपोशी होगी. 1. भवानीपुर : दीदी का अभेद्य किला मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की अपनी सीट भवानीपुर हमेशा की तरह सबसे हाई-प्रोफाइल है. यहां की सुरक्षा चूक और हालिया पुलिस निलंबन ने इसे और भी चर्चा में ला दिया है. भाजपा ने यहां अपनी पूरी ताकत झोंक दी है, ताकि मुख्यमंत्री को उनके ही गढ़ में घेरा जा सके. इसे भी पढ़ें : भवानीपुर चुनाव 2026: ममता बनर्जी vs शुभेंदु अधिकारी, क्या बचेगा दीदी का सबसे मजबूत किला? इसे भी पढ़ें : ममता बनर्जी 40 लाख रुपए लेकर उतरीं थीं नंदीग्राम में, सबसे हाई-प्रोफाईल चुनाव में खर्च किये 21.88 लाख इसे भी पढ़ें : नंदीग्राम का संग्राम : 21 लाख लेकर मैदान में उतरे शुभेंदु अधिकारी ने खर्च किये 23.62 लाख रुपए, ममता बनर्जी को हराया इसे भी पढ़ें : भवानीपुर में ममता बनर्जी vs शुभेंदु अधिकारी, जानें BJP का ’बूथ-दर-बूथ’ सोशल इंजीनियरिंग प्लान 2. नंदीग्राम : ‘दादा’ बनाम ‘दीदी’ की विरासत वर्ष 2021 के बंगाल चुनाव में नंदीग्राम ने पूरे देश का ध्यान खींचा था. शुभेंदु अधिकारी के लिए यह सीट उनकी नेतृत्वक साख का सवाल है. टीएमसी यहां 2021 का बदला लेगी या शुभेंदु अपना दबदबा कायम रखेंगे, यह देखना दिलचस्प होगा. इसे भी पढ़ें : बंगाल की सबसे लोकप्रिय नेता और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को शुभेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम में कैसे दी पटखनी, पढ़ें पूरा विश्लेषण इसे भी पढ़ें : नंदीग्राम का संग्राम : 21 लाख लेकर मैदान में उतरे शुभेंदु अधिकारी ने खर्च किये 23.62 लाख रुपए, ममता बनर्जी को हराया 3. पानीहाटी : न्याय की पुकार और आरजी कर का साया आरजी कर कांड की पीड़िता की मां के चुनाव मैदान में उतरने से पानीहाटी इस बार चुनाव का सबसे भावनात्मक केंद्र बन गया है. इस सीट का चुनाव परिणाम बतायेगा कि ‘जनाक्रोश’ वोट में तब्दील होता है या नहीं. अगर तब्दील होता है, तो कितना. बंगाल की समाचारें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें 4-5. सिलीगुड़ी और दार्जिलिंग : उत्तर बंगाल का द्वार उत्तर बंगाल की ये सीटें भाजपा का मजबूत आधार रही हैं. टीएमसी यहां अपनी खोयी जमीन पाने की कोशिश में है. दूसरी तरफ, भाजपा अपनी बढ़त बनाये रखने का हरसंभव प्रयास कर रही है. इसे भी पढ़ें : Mamata Banerjee Net Worth: कितनी संपत्ति की मालकिन हैं बंगाल की ‘दीदी’ ममता बनर्जी? इसे भी पढ़ें : नंदीग्राम से नयी दिल्ली तक 15 बैंक अकाउंट, जानें कितनी संपत्ति है शुभेंदु अधिकारी की? 6-7. मालदा और मुर्शिदाबाद : कांग्रेस बिगाड़ेगी स्पोर्ट्स सूजापुर और मोथाबाड़ी वो सीटें हैं, जहां हैदराबाद वाले असदुद्दीन ओवैसी की AIMIM और टीएमसी से निकाले गये नेता और अब आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP) के चीफ हुमायूं कबीर का गठबंधन ममता बनर्जी के लिए बड़ी चुनौती बनकर उभर रहा था, लेकिन हुमायूं कबीर के एक वायरल वीडियो ने उन्हें कहीं का नहीं छोड़ा. ओवैसी ने उनसे अपना गठबंधन तोड़ लिया. आम जनता उन्नयन पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष ने भी इस्तीफा दे दिया. इसे भी पढ़ें : बंगाल चुनाव से पहले फुरफुरा शरीफ पहुंचे हुमायूं कबीर, ममता बनर्जी पर लगाये गंभीर आरोप, वसूली करती है I-PAC इसे भी पढ़ें : बंगाल चुनाव 2026: 63 लाख वोटर गायब और ‘अस्मिता’ की जंग, ममता बनर्जी बचा पायेंगी अपना किला? कांग्रेस और मौसम नूर बढ़ायेंगी दीदी की मुश्किलें! हालांकि, मालदा और मुर्शिदाबाद में कांग्रेस पार्टी पूरी मजबूती से चुनाव लड़ रही है. मौसम नूर और एबीए गनी खान चौधरी का पूरा परिवार कांग्रेस के साथ है, जो दीदी की मुश्किलें बढ़ा सकते हैं. यहां का ध्रुवीकरण और ‘वोट कटवा’ फैक्टर टीएमसी के लिए बड़ी चुनौती है. इसे भी पढ़ें : बंगाल चुनाव 2026: ममता बनर्जी की बढ़ेंगी मुश्किलें, हुमायूं कबीर ने भवानीपुर में उतारा मुस्लिम उम्मीदवार इसे भी पढ़ें : 85.87 लाख के मालिक शुभेंदु अधिकारी के पास नहीं है कार, जानें नंदीग्राम के योद्धा की प्रॉपर्टी और बैंक बैलेंस 8. सिंगूर : भूमि आंदोलन की जन्मभूमि कभी ममता बनर्जी के उत्थान का केंद्र रहा सिंगूर अब भाजपा और टीएमसी के बीच कड़े मुकाबले का गवाह बनता दिख रहा है. यहां के किसान और औद्योगिक मुद्दे इस बार भी निर्णायक होंगे. इसे भी पढ़ें : बंगाल चुनाव 2026: कल्याणकारी योजनाएं बनाम सत्ता-विरोधी लहर, ममता बनर्जी के 15 साल के शासन की सबसे बड़ी अग्निपरीक्षा इसे भी पढ़ें : बंगाल की सियासत में ‘आया राम, गया राम’, 2021 की जीत के बाद 10 विधायकों ने बदला पाला, BJP को सबसे बड़ा झटका 9-10. डायमंड हार्बर और टॉलीगंज : भाजपा कर रही आक्रामक घेराबंदी अभिषेक बनर्जी के प्रभाव वाले इन इलाकों में भाजपा ने आक्रामक घेराबंदी की है. शहरी मतदाताओं का मिजाज इन सीटों पर हार-जीत तय करेगा. इसे भी पढ़ें : ‘स्पोर्ट्सा होबे’ के बाद ‘आबार जीतबे बांग्ला’, ममता का ‘बोर्गी’ दांव बनाम भाजपा का ‘जय मां काली’, नारों के युद्ध में कौन भारी? इसे भी पढ़ें : बंगाल में 91 लाख वोटर ‘गायब’, 120 सीटों का बिगड़ा गणित! SIR ने उड़ायी टीएमसी और भाजपा की नींद West Bengal Election 2026 Key Seats: क्यों अहम हैं ये सीटें? सांकेतिक जीत : इन सीटों पर जीत का मतलब है पूरे क्षेत्र में मनोवैज्ञानिक बढ़त. दिग्गजों की प्रतिष्ठा : इन क्षेत्रों से दोनों पार्टियों के सबसे बड़े चेहरे चुनाव लड़ रहे हैं. ध्रुवीकरण का केंद्र : ये सीटें बंगाल के मुख्य मुद्दों (भ्रष्टाचार, घुसपैठ और सुरक्षा) का लिटमस टेस्ट हैं. इसे भी पढ़ें कोयलांचल का सियासी मिजाज : आसनसोल दक्षिण में फिर खिलेगा कमल या होगी तृणमूल की वापसी? एक दशक में 16 राज्यों में हुए चुनाव, चुनावी हिंसा में पश्चिम बंगाल नंबर-1 Exit Poll पर 9 से 29 अप्रैल तक बैन, दिखाने वाले 2 साल के लिए जायेंगे जेल बंगाल में इस बार 2 चरण

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अस‍फल अमेरिका-ईरान वार्ता ने बढ़ायी चिंता, पढ़ें पूर्व विदेश सचिव शशांक का आलेख

US Iran Peace Talks: इस्लामाबाद में हुई अमेरिका-ईरान वार्ता का बेनतीजा रहना बहुत आश्चर्यजनक नहीं है. वार्ता के बिल्कुल शुरुआती चरण में इससे ज्यादा उम्मीद की भी नहीं जा सकती थी. हालांकि इससे क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर चिंता जरूर बढ़ गयी है. स्पष्ट है कि अमेरिका की सख्त शर्तों और ईरान के इनकार ने समझौते की राह मुश्किल बना दी. ऐसे में आने वाले समय में तनाव बढ़ने और कूटनीतिक कोशिशों के और जटिल होने की आशंका भी जतायी जा रही है. अलबत्ता ईरान और अमेरिका के बीच हुई बातचीत अगर किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पायी, तो यह नाउम्मीदी का भी कारण नहीं होना चाहिए. यह मानने का कारण है कि दोनों ही पक्ष फिलहाल वार्ता को अंजाम तक पहुंचाने के लिए पूरी तरह तैयार नहीं थे. साथ ही, यह भी सच है कि आपसी मुलाकातों का सिलसिला अगर जारी रहता है, तो पश्चिम एशिया के संकट का हल निकल सकता है. पाकिस्तान में संपन्न हुई इस वार्ता के प्रति बेशक हमें भरोसा नहीं था, लेकिन ईरान और अमेरिका को निश्चित तौर पर था. ईरान ने हालांकि कई मौके पर पाकिस्तान के मध्यस्थ होने के खिलाफ टिप्पणी की, लेकिन ईरानी वार्ताकार पाकिस्तान पहुंचे थे, तो कहीं न कहीं कुछ उम्मीद तो थी ही. दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और पाकिस्तान के सेनाध्यक्ष फील्ड मार्शल असलम मुनीर की गाढ़ी दोस्ती को देखते हुए अमेरिकी वार्ताकार इस्लामाबाद में ठोस उम्मीदों के साथ पहुंचे थे. और ईरान भले ही पाकिस्तान पर भरोसा न करने की बात कह चुका हो, लेकिन खुद पाकिस्तान इस युद्ध को खत्म करना चाहता है, क्योंकि वह जानता है कि ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिकी आक्रामकता अगर जारी रही, तो ईरान के खिलाफ उसकी कार्रवाई कहीं न कहीं पाकिस्तान पर भी असर डाल सकती है. इस्लामाबाद में दोनों ही पक्ष जिन भी उम्मीदों के साथ आये हों, लेकिन लगभग इक्कीस घंटे की बातचीत के बाद दोनों पक्षों का रवैया बिल्कुल स्पष्ट है. ईरान दरअसल किसी जल्दबाजी में नहीं है और उसके हक में कदम न उठाये जाने पर वह युद्ध खत्म नहीं करेगा. इस लिहाज से देखें, तो युद्ध शुरू होने से अब तक उसके रवैये में कोई खास बदलाव नहीं आया है, भले ही इस दौरान उसे भारी नुकसान पहुंचा है. वार्ता बेनतीजा रहने के बाद ईरान के रुख से यह भी लगता है कि वह बहुत निराश नहीं हैं. ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता का कहना है कि कूटनीति कभी खत्म नहीं होती, प्रयास जारी रहते हैं. ऐसी बातचीत में आसानी से हल तक नहीं पहुंचा जाता. याद रखना चाहिए कि वियतनाम के साथ वार्ता में समाधान तक पहुंचने में अमेरिका को कई साल लग गये थे. ईरान के विपरीत अमेरिका के रवैये में फर्क दिखा. अमेरिका वार्ताकारों का नेतृत्व कर रहे उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि ईरान के परमाणु हथियारों और उसके परमाणु कार्यक्रम पर कोई सहमति नहीं बन पायी. यानी परमाणु कार्यक्रम को लेकर दोनों देशों के बीच मतभेद दूर नहीं हो सके. क्या वेंस का यह रुख अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के रुख के अनुकूल है, जो कुछ दिन पहले तक भी ईरान की सभ्यता को निर्मूल कर देने की बात कर रहे थे? क्या अमेरिका सिर्फ ईरान के परमाणु हथियारों के बारे में बातचीत करने के लिए पाकिस्तान गया था? क्या अमेरिका के एजेंडे में और दूसरे मुद्दे नहीं थे? अगर सिर्फ ईरान के परमाणु हथियारों पर ही बात अटकी हुई है, जैसा कि वेंस का कहना है, तो इसके लिए पाकिस्तान की मध्यस्थता की तो कोई जरूरत ही नहीं है. अगर अमेरिका को ईरान के परमाणु हथियारों की चिंता है, तो उसे रूस और चीन के साथ बातचीत करनी चाहिए. यही दोनों देश इस मामले में अमेरिका की चिंता दूर कर सकते हैं. अमेरिका ने बातचीत टूटने को निराशाजनक बताया. क्या वह वार्ता के बिल्कुल शुरुआती चरण में ही समस्या का हल निकल जाने के प्रति आश्वस्त था? अमेरिका ने जिस तरह बातचीत खत्म की, वह भी बेहद चौंकाने वाली रही. पहले ऐसा लग रहा था कि ईरान और अमेरिका के बीच वार्ता रविवार को भी जारी रहेगी. लेकिन अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने रविवार की सुबह समझौता न होने से संबंधित एक बयान अचानक प्रेस को जारी किया और फिर पाकिस्तान से निकल गये. वेंस की यह प्रतिक्रिया चौंकाने वाली रही. हो सकता है कि पूरी स्थिति पर बेहद नजदीकी नजर रख रहे अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने उन्हें ऐसा निर्देश दिया हो. वार्ता के नतीजे तक न पहुंचने के कई कारण रहे. वार्ता के दौरान ईरान ने होर्मुज पर अपना नियंत्रण बनाये रखने की बात कही, जबकि अमेरिका इसे अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग के रूप में पूरी तरह खोलने पर जोर दे रहा था. लेकिन होर्मुज के मुद्दे पर अमेरिकी मांग ईरान के लिए स्वीकार्य नहीं थी. अमेरिका के साथ वार्ता विफल होने के बाद ईरान की सैन्य संस्था इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स ने स्पष्ट कर दिया है कि होर्मुज जलडमरुमध्य की स्थिति में कोई बदलाव नहीं किया जायेगा. यानी जो स्थिति पहले बनी हुई थी, वह आगे भी जारी रहेगी. दरअसल ईरान ने अमेरिका और इस्राइल के हमले के बाद होर्मुज जलडमरुमध्य को बंद कर दिया और हिंदुस्तान समेत गिने-चुने देशों के तेल टैंकर ही वहां से गुजर रहे हैं. वार्ता के किसी अंजाम तक न पहुंचने का एक कारण यह भी रहा कि अमेरिका ने लेबनान पर जारी इस्राइली हमले रोकने का कोई वादा नहीं किया. वार्ता के दौरान भी बेरूत पर इस्राइल की लगातार बमबारी में सैकड़ों लोग मारे गये, जिस पर वैश्विक प्रतिक्रिया हुई, और अनेक विश्लेषकों ने इसे युद्धविराम के उल्लंघन के रूप में देखा. पर वार्ता के टूट जाने का मतलब यह नहीं है कि समाधान की उम्मीदें खत्म हो गयी हैं. ईरान ने कहा है कि वह पाकिस्तान और दूसरे मित्र देशों के साथ इस मुद्दे पर सलाह-मशविरा जारी रखेगा. मध्यस्थ बने पाकिस्तान का भी कहना है कि आपसी बातचीत जारी रहनी चाहिए, और युद्धविराम की अवधि बढ़ाने के बारे में भी सोचा जाना चाहिए. लेकिन अब गेंद अमेरिका के पाले में है. शांति वार्ता विफल होने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान की नौसैनिक नाकेबंदी की धमकी दी है. अगर ऐसा होता है, तो ईरान के तेल राजस्व

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