Grok AI Blunders Accountability: हिंदुस्तान प्रशासन के सूत्रों के अनुसार, सोशल मीडिया मंच एक्स (पूर्व में ट्विटर) को उसके एआई टूल ग्रॉक द्वारा दिए गए उत्तरों के लिए जिम्मेदार ठहराया जा सकता है. हाल ही में ग्रॉक ने हिंदुस्तानीय नेताओं पर विवादित जवाब दिए, जिससे प्रशासन ने इस मामले की कानूनी समीक्षा शुरू कर दी है. इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय एक्स के साथ चर्चा कर रहा है ताकि यह समझा जा सके कि प्लैटफॉर्म स्थानीय कानूनों का पालन कर रहा है या नहीं. आईटी अधिनियम की धारा 79(3) के तहत प्रशासन सोशल मीडिया कंटेंट की मॉडरेशन नीतियों पर सख्त रुख अपना सकती है.
हिंदुस्तान प्रशासन के सूत्रों के अनुसार, सोशल मीडिया मंच एक्स (पूर्व में ट्विटर) को उसके एआई टूल ‘ग्रॉक’ द्वारा दिए गए जवाबों के लिए जिम्मेदार ठहराया जा सकता है. इस बारे में कानूनी राय तैयार की जा रही है, जिससे यह तय होगा कि एआई-जनित कंटेंट की जवाबदेही प्लैटफॉर्म पर होगी या नहीं.
ग्रॉक के विवादित जवाबों पर मचा बवाल
हाल ही में एक्स के यूजर्स ने ग्रॉक से हिंदुस्तानीय नेताओं और नेतृत्वक मुद्दों पर सवाल किये थे, जिसके जवाब कुछ मामलों में अनुचित और विवादास्पद थे. इसने प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया और इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय इस विषय पर एक्स के साथ बातचीत कर रहा है.
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प्रशासन की सख्ती और एआई नियमन
प्रशासनी सूत्रों के अनुसार, पहले भी गूगल के एआई टूल जेमिनी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक उत्तर दिये थे, जिसके बाद प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई की थी और एआई कंटेंट मॉडरेशन के लिए दिशानिर्देश जारी किए थे. अब प्रशासन यह सुनिश्चित करना चाहती है कि सोशल मीडिया और एआई प्लैटफॉर्म स्थानीय कानूनों और नैतिकता के अनुरूप कार्य करें.
आईटी अधिनियम और कानूनी चुनौती
सोशल मीडिया कंटेंट मॉडरेशन के संदर्भ में आईटी अधिनियम की धारा 79(3) के तहत प्लैटफॉर्म्स को प्रशासन के आदेशों का पालन करना होता है. एक्स ने कर्नाटक उच्च न्यायालय में प्रशासन के खिलाफ एक मामला दर्ज किया है, जिसमें उसने इस धारा को मनमाना और असंवैधानिक बताया है. प्रशासन का मानना है कि यदि कोई सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म यूजर्स द्वारा उत्पन्न सामग्री की जिम्मेदारी लेने को तैयार है, तो उस पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है.
क्या होगा आगे?
न्यूज एजेंसी पीटीआई भाषा की रिपोर्ट के अनुसार, अभी इस मामले में कानूनी सलाह ली जा रही है और अंतिम निर्णय अदालतों के फैसले पर निर्भर करेगा. प्रशासन सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म्स के लिए सख्त दिशानिर्देशों पर काम कर रही है, ताकि एआई-जेनरेटेड कंटेंट को जिम्मेदार और सुरक्षित बनाया जा सके.
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