नया विचार सरायरंजन : प्रखंड के उदयपुर स्थित मां कलावती आश्रम में डॉ. राम सूरत ‘प्रियदर्शी’ लिखित काव्य संकलन ‘सपनों का संसार ‘ का लोकार्पण सह कवि सम्मेलन का आयोजन हुआ। समारोह की अध्यक्षता करते हुए प्रख्यात साहित्यकार शैलेंद्र शर्मा त्यागी ने कहा कि डॉ.राम सूरत प्रियदर्शी एक सफल गीतकार हैं। उनके गीतों में जीवन के सुख-दुख ही नहीं बल्कि विविध अवसरों से संबंधित भावों की सुन्दर प्रस्तुति है। समारोह के मुख्य अतिथि चांद मुसाफिर ने कहा कि डॉ .रामसूरत प्रियदर्शी जीवन जगत, मानव प्रकृति और आध्यात्मिक चेतना से जुड़े एक प्रशंसनीय काव्याकर हैं। वहीं विशिष्ट अतिथि पद से बोलते हुए प्रख्यात गीतकार डॉ. सच्चिदानंद पाठक ने कहा कि डॉ .राम सूरत प्रियदर्शी हिंदी साहित्याकाश के नवीन हस्ताक्षर हैं। उनकी अभिव्यक्ति का सरल सरल प्रवाह श्रोताओं को सहसा प्रभावित कर लेता है। कवयित्री स्मृति झा ने कहा कि डॉ .राम सूरत प्रियदर्शी के काव्य में आध्यात्मिक भाव की सशक्त अभिव्यक्ति है।पुस्तक में प्रस्तुत गीतों पर अपना विचार प्रकट करते हुए प्रख्यात साहित्यकार द्वारिका राय ‘सुबोध’ एवं अनिरुद्ध झा ‘दिवाकर’ ने इसे एक महत्वपूर्ण कृति बताते हुए डॉ. राम सूरत प्रियदर्शी को अपनी बधाई दी। लोकार्पण से पूर्व आए हुए आगत रचनाकारों का स्वागत करते हुए उनके सम्मान में जीवछ राय ‘वीराना’ ने अपने मोहक स्वर में स्वागत गान गाकर सबको भाव – विभोर कर दिया। तत्पश्चात मंचासीन वरिष्ठ साहित्यकारों द्वारा समवेत रूप से दीप जलाकर कार्यक्रम का विधिवत् आरंभ किया। इसके उपरांत आए हुए रचनाकारों एवं सम्मानित साहित्यकारों का सम्मान पाग, अंगवस्त्र और पुष्पहार से किया गया तथा डाॅ. शंभुनाथ झा ने डॉ .राम सूरत प्रियदर्शी की सृजनधर्मिता और उनकी लोकार्पित पुस्तक की रचनाओं में निहित भावों पर प्रकाश डाला। पुस्तक लोकार्पण के बाद काव्य – गोष्ठी का आगाज युवा कवयित्री रंजना लता ने अपने सुमधुर स्वर में एक ग़ज़ल से किया। काव्य गोष्ठी को आगे बढ़ाते हुए डॉ सच्चिदानंद पाठक, अनिरुद्ध झा दिवाकर , चांद मुसाफिर, द्वारिका राय सुबोध ,राज कुमार चौधरी,सत्ससंध भारद्वाज ‘सत्य’, उदय शंकर चौधरी ‘नादान’, यशवंत कुमार , स्मृति झा, ललिता कुमारी , वीणा कुमारी , संजीव कुमार इन्कलाबी, अनिरुद्ध झा , पप्पू राय ‘दानिश’ , रामाश्रय राय ‘राकेश’, राज कुमार राय ‘राजेश’, ऋषि रोही, काविश जमाली , कासिम सबा, दुखित महतो भक्तराज , अरुण कुमार आदि कवियों ने उपस्थित श्रोताओं के समक्ष अपनी रचनाओं का पाठ किया।