बिहार में बदलाव की बयार सिर्फ सड़कों और पुलों तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में भी ऐतिहासिका बदलाव हुआ है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की प्रशासन ने स्त्रीओं को आगे बढ़ाने के लिए जो प्रयास किए हैं. उनके नतीजे अब साफ नजर आ रहे हैं. बिहार में शिक्षा के क्षेत्र में अब स्त्रीओं की भागीदारी दोगुनी हो गई हैय 2005 में जहां स्त्री शिक्षकों की संख्या 56,498 थी, वहीं 2025 में यह आंकड़ा 2.61 लाख के पार पहुंच गया है. बिहार के स्कूलों में हर अब हर दूसरी शिक्षक स्त्री है.

बिहार के स्कूलों में आधी आबादी की भागीदारी
बिहार में स्त्री सशक्तिकरण को लेकर नीतीश कुमार ने कई ऐतिहासिक कदम उठाए हैं. मुख्यमंत्री साइकिल योजना, बालिका पोषाक योजना, छात्रवृति जैसी योजनाओं ने बेटियों को स्कूल तक पहुंचाने का काम किया है. लड़कियों ड्रापआउट दर कम हुआ है. इन योजनाओं का असर है कि अब स्त्रीओं को शिक्षा के क्षेत्र में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर मिल रहे हैं.
स्कूलों में अब आधी आबादी की बड़ी भागीदारी
बिहार के स्कूलों में अब स्त्री शिक्षकों की भागीदारी अब आधी होने वाली है. 2005 में राज्य के प्रशासनी स्कूलों में जहां स्त्री शिक्षकों की भागीदारी सिर्फ 24 फीसद थी. 2025 तक यह आंकड़ा 44.1% पार कर गया है. बिहार के स्कूलों में अब हर दूसरी शिक्षक स्त्री हैं.
150 फीसद से अधिक हुआ इजाफा
पिछले 28 सालों में बिहार में शिक्षकों की संख्या में 150 फीसद से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है. इसे आंकड़ों में ऐसे समझें कि 2005 में बिहार में कुल 2 लाख 26 हजार शिक्षक थे. इसमें स्त्री शिक्षकों की संख्या 56,498 थी. 2025 में कुल शिक्षकों का आंकड़ा 5 लाख 91 हजार पहुंच गया. इसमें स्त्री शिक्षकों की संख्या दो लाख 61 हजार है.

BPSC के माध्यम से बिहार में बंपर भर्ती
बिहार लोक सेवा आयोग यानी बीपीएससी ने बिहार में तीन चरणों में 2 लाख 38 हजार शिक्षकों की भर्ती की है. इनमें बड़ी संख्या में स्त्रीएं शामिल हैं. बिहार पुलिस भर्ती में भी स्त्रीओं को 35 फीसद आरक्षण देने के बाद नीतीश कुमार की प्रशासन ने पहली से पांचवीं और छठी से आठवीं कक्षा के शिक्षकों की नियुक्ति में 50 फीसद आरक्षण दिया है.
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बेटियों को मिली उड़ान, समाज में नई पहचान
बिहार के प्रशासनी स्कूलों में स्त्री शिक्षकों की बढ़ती संख्या का सबसे बड़ा फायदा यह हुआ कि अब ग्रामीण क्षेत्रों में भी लड़कियां बिना झिझक के स्कूल जा रही हैं. माता-पिता को अब भरोसा है कि उनकी बेटियों को पढ़ाने वाली स्त्रीएं खुद शिक्षा का एक मजबूत उदाहरण हैं. बिहार में पिछले 20 सालों के नीतीश कुमार के नेतृत्व ने यह साबित किया है कि स्त्रीओं को जब अवसर मिलता है तो वो कामयाबी की मिसाल पेश करती हैं.
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