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ऐसे झारखंड-बिहार का खूंखार नक्सली बन गया अरविंद यादव, दर्ज हैं 85 केस

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Naxal News| बोकारो/जमुई, रंजीत कुमार/ पंकज सिंह : बोकारो जिले के ललपनिया के लुगु बुरु पहाड़ की तलहटी में सोमवार को सुरक्षाबलों और नक्सलियों की मुठभेड़ में मारे गये इनामी (बिहार प्रशासन द्वारा घोषित 3 लाख रुपए) बिहार-झारखंड के नक्सली प्रवक्ता अरविंद यादव (42) पर झारखंड प्रशासन 25 लाख रुपए के इनाम की घोषणा करने की तैयारी कर रही थी. इसकी प्रक्रिया अंतिम चरण में थी. कुछ तकनीकी कारणों से इसकी घोषणा में देरी हो रही थी.

बिहार के जमुई का रहने वाला था अरविंद यादव

अरविंद यादव की 21 अप्रैल को मुठभेड़ में मौत के बाद रांची में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में पुलिस ने इसका खुलासा किया. इनाम की घोषणा होने से पहले ही 21 अप्रैल को सुरक्षा बलों ने मुठभेड़ में अरविंद यादव को मार गिराया. अरविंद यादव उर्फ अविनाश मूल रूप से बिहार के जमुई जिले के सोना थाना क्षेत्र के भलवा गांव का रहने वाला था. नक्सली संगठन में उसका कद एसएजी सदस्य का था. झारखंड और बिहार के विभिन्न थानों में अरविंद पर हत्या, आर्म्स एक्ट सहित विभिन्न कांडों से जुड़े कुल 85 प्राथमिकी दर्ज थे.

नक्सली प्रवक्ता भी रहा अरविंद यादव

नक्सली संगठन के लिए अरविंद यादव ने जमुई, मुंगेर और लखीसराय क्षेत्र में लंबे समय तक नक्सली प्रवक्ता के रूप में काम किया. कमजोर पड़ रहे नक्सल संगठन को मजबूत करने की जिम्मेदारी अरविंद के कंधे पर थी. इसलिए वह लगातार झारखंड और बिहार के सीमावर्ती इलाके में मूवमेंट कर रहा था. अरविंद लगातार अपने बिखरे साथियों को एकजुट करने और इलाके में फिर से नक्सलियों की स्थिति को मजबूत करने की कोसिश कर रहा था.

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भेलवा में हुई थी अरविंद के घर की कुर्की-जब्ती

जमुई जिले के चरकापत्थर, सोनो, खैरा, बरहट और अन्य कई थाना क्षेत्र के अलावा लखीसराय क्षेत्र में कई नक्सली घटना में उसकी संलिप्तता रही. फरार रहने के कारण न्यायालय के आदेश पर विभिन्न थाने की पुलिस भेलवा में उसके घर की कुर्की-जब्ती की थी. वर्ष 2018 में सोनो थाना में दर्ज एक कांड में न्यायालय के आदेश पर और फरवरी 2021 में बरहट पुलिस ने भेलवा में उसके घर की कुर्की-जब्ती की थी.

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दो-ढाई दशक तक नक्सलवाद से जुड़ा रहा अरविंद

अरविंद उर्फ अशोक यादव का नक्सलवाद से नाता लगभग दो से ढाई दशक का रहा. वर्ष 2000-01 में वह नक्सल संगठन से जुड़ा. जमीन विवाद के कारण वह नक्सली बना. दरअसल, पिता यमुना यादव को भेलवा गांव में ननिहाल से खेत और अन्य संपत्ति मिली थी. इसलिए वे लोग भेलवा में रहने लगे. अपने गांव दूधनियां में हिस्सेदार के साथ जमीन का विवाद हुआ. विवाद खूनी संघर्ष में बदल गया.

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ईडी की भी थी अरविंद यादव और उसके परिवार पर नजर

इसके बाद अरविंद नक्सली संगठन से जुड़ गया. देखते ही देखते उसने संगठन में महत्वपूर्ण जगह बना ली. नक्सलवाद से जुड़ने के बाद उसका घर आना-जाना कम हो गया. वर्ष 2018 में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अरविंद की पत्नी और अरविंद के ससुर से अर्जित संपत्ति का ब्योरा मांगा था. ईडी ने नोटिस भेजकर वर्ष 2004 के बाद से अर्जित संपत्ति का ब्योरा मांगा था.

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विनोद झा
संपादक नया विचार

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