विनय कुमार/ मुजफ्फरपुर में चमकी बुखार (Chamki Bukhar) का लक्षण दिखने पर उन बच्चों का इलाज किया गया है. गोपालगंज से एइएस पीड़ित शिशु को छोड़ दे तो इस बार कोई भी बच्चा पहली बार एइएस की चपेट में नहीं आया है. हालांकि बच्चों के दोबारा एइएस से पीड़ित होने से स्वास्थ्य विभाग की खामियां उजागर हो रही है. एइएस के प्रोटोकॉल के तहत बीमारी से स्वस्थ होने वाले बच्चों का फॉलोअप करना था. स्वास्थ्य विभाग को एएनएम और आशा के जरिये नियमित अंतराल पर पीड़ित बच्चों के स्वास्थ्य की देखरेख करनी थी, लेकिन पिछले साल गर्मी समाप्त होते ही विभाग ने उन बच्चों के स्वास्थ्य की जांच नहीं की. नतीजा इस बार गर्मी की शुरुआत के साथ ही शिशु एइएस से पीड़ित हो रहे हैं. वर्ष 2010 के बाद ऐसा पहली बार हुआ है, जब इतनी अधिक संख्या में दोबारा शिशु एइएस से पीड़ित हुए हैं.
पिछले साल 32 शिशु हुए थे बीमारी से पीड़ित
पिछले साल जिले के 30 शिशु बीमारी से पीड़ित हुए थे. सभी का इलाज एसकेएमसीएच के पीकू वार्ड में हुआ था. जुलाई तक यहां शिशु इलाज के लिये भर्ती होते रहे. स्वस्थ होने के बाद सभी को डिस्चार्ज किया गया था. इनमें 11 शिशु के परिजनों ने पिछली बार की तरह इस बार जागरुकता के लिहाज से बच्चों के स्वास्थ्य की देखभाल नहीं की. बीमार बच्चों के परिजनों ने भी स्वीकार किया कि इस बार गर्मी शुरू होने के बाद उन लोगों ने एइएस के प्रोटोकॉल के हिसाब से बच्चों को नहीं रखा. अब बच्चों की सही तरीके से देखरेख कर रहे हैं.
क्या बोले पदाधिकारी
वेक्टर बॉर्न डिजीज कंट्रोल पदाधिकारी डॉ सुधीर कुमार ने कहा कि पिछली बार एइएस से पीड़ित होने वाले शिशु ही अब तक इस बीमारी के शिकार हुए हैं. बच्चों के परिजनों ने एइएस जागरुकता में बतायी गयी जानकारी के हिसाब से बच्चों को नहीं रखा था. इस कारण शिशु दोबारा बीमार हुए हैं. स्वास्थ्य विभाग की ओर से हर गांव में चौपाल लगा कर एइएस से बचाव की जानकारी दी जा रही है.
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