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Anti Naxal Operation: गृह मंत्री अमित शाह ने कुछ दिन पहले मध्य प्रदेश के नीमच में सीआरपीएफ के स्थापना दिवस समारोह में कहा था कि नेपाल के पशुपतिनाथ से लेकर आंध्र प्रदेश के तिरुपति तक जो नक्सली लाल आतंक फैला रहे थे, वो अब चार जिलों में सीमित रह गए हैं. देश से पूरी तरह से नक्सलवाद को खत्म करने के लिए 31 मार्च 2026 डेडलाइन तक की गई है.
नक्सलबाड़ी से शुरू हुआ था आंदोलन
हिंदुस्तान में नक्सवाद की नींव पश्चिम बंगाल के नक्सलबाड़ी गांव में 1967 में पड़ी थी. जब एक जमींदार से मजदूरी बढ़ाने के लिए एक मजदूर ने कहा था. कई बार एक ही बात दोहराने से नाराज जमींदार ने मजदूर को गोली मार दी थी. नाराज किसानों ने जमींदार नगेन चौधरी को पकड़ लिया और अपना अपराध कबूल करने के लिए कहा. नाराज किसानों के नेता कानू सान्याल ने जमींदार को समझाया लेकिन वो नहीं माना. इसी बीच एक आदिवासी जंगल संभाल ने अचानक जमींदार पर हमला किया और उसका सिर कलम कर दिया. इसी के साथ ही जमींदारों के खिलाफ नक्सलवाद का जन्म हुआ. कानू सान्याल को पहला नक्सली और जंगल संथाल को आदिवासियों को इस आंदोलन से जोड़ने वाले प्रमुख आदमी के रूप में जाना जाता है.
एक गांव से शुरू आंदोलन देश भर में फैला
मजदूरों और आदिवासियों को जमींदारों के शोषण से मुक्त कराने के लिए नक्सलबाड़ी गांव से शुरू हुआ आंदोलन धीरे-धीरे पूरे देश में फैल गया. छत्तीसगढ़, बिहार, झारखंड, उड़ीसा, ओडिशा, मध्य प्रदेश, तेलंगाना, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक तक नक्सलियों ने अपना वर्चस्व बनाया. एक समय था कि इनके प्रभाव वाले इलाकों को लाल गलियारा या रेड कॉरिडोर का नाम दिया गया. जहां पुलिस भी जाने से डरती थी. कई दशकों तक यहां नक्सलियों का राज चलता रहा. मनमाने तरीके से नक्सलियों ने वसूली की और हथियारबंद होकर सुरक्षाबलों और प्रशासन को चुनौती दी. पांच दशक से अधिक समय तक नक्सलियों ने रेड कॉरिडोर पर राज किया.
बीते 10 साल में टूटी नक्सलवाद की कमर
देश में भाजपा प्रशासन बनने के बाद 2015 में नक्सलवाद के खिलाफ विशेष अभियान चलाने की नीति बनायी गई. तत्कालीन गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने 8 सूत्रीय समाधान एक्शन प्लान बनाया. इसमें नक्सलियों के खिलाफ कार्रवाई और नक्सली इलाकों में विकास के काम एक साथ किए गए. नक्सलियों के खिलाफ राज्य प्रशासनों के विशेष बल, केंद्रीय सुरक्षा बलों, पुलिस ने मिलकर कार्रवाई की. इससे नक्सली घटनाओं में जबरदस्त कमी आयी. वर्ष 2010 में 1936 नक्सली हिंसक घटनाओं में 1005 सुरक्षा बलों और नागरिकों की मौत हुई थी. वो हिंसक घटनाएं 2024 में मात्र 374 और मौतें 150 रह गयी हैं.
2025 में कई बड़े ऑपरेशन
वर्ष 2025 में सुरक्षा बलों के ऑपरेशन में अब तक 287 नक्सली मारे जा चुके हैं. वहीं 865 ने समर्पण किया है और 830 गिरफ्तार हुए हैं. 21 मई 2025 को सुरक्षाबलों ने अबूझमाड़ में डेढ़ करोड़ के इनामी नंबाला केशव उर्फ बासवराजू को मार गिराया था. वह तीन दशक से सक्रिय था. इस बड़े एनकाउंटर के बाद दक्षिण बस्तर डिवीजन में 4 हार्डकोर नक्सलियों सहित 18 माओवादियों ने सरेंडर किया था. इन पर 39 लाख का इनाम घोषित था. इसी तरह बीजापुर में 32 और तेलंगाना में 86 नक्सलियों ने सरेंडर किया था. बासव राजू की मौत के बाद गृह मंत्री अमित शाह ने भी एक्स पर लिखा था कि महासचिव स्तर के बड़े नक्सली नेता को मारा गया है.
झारखंड में कई बड़े नक्सली ढेर
छत्तीसगढ़ के साथ ही झारखंड में भी नक्सलवाद के खिलाफ लगातार अभियान जारी है. बीते कुछ दिनों में वहां कई बड़े इनामी नक्सलियों को सुरक्षा बलों ने मार गिराया. इनमें एक एक करोड़ का इनामी प्रयाग मांझी उर्फ विवेक भी था. इसके अलावा कई अन्य बड़े नक्सली एनकाउंटर में मारे गए हैं.
- 21 अप्रैल 2025-बोकारों में लुगू और झुमरा पहाड़ के बीच जंगली इलाके में सुरक्षाबलों ने 8 नक्सलियों को मार गिराया. इसमें एक करोड़ का इनामी प्रयाग मांझी उर्फ विवेक भी था. इस मुठभेड़ में अरविंद यादव उर्फ अविनाश, 10 लाख के इनामी साहेब राम मांझी की पहचान हुई. ढाई घंटे तक चली मुठभेड़ में एक रिवाल्वर, एक एसएलआर, चार इंसास रायफल बरामद हुई थी.
- 24 मई 2025- लातेहार में झारखंड जनसंघर्ष मुक्ति मोर्चा (जेजेएमपी) के सुप्रीमो 10 लाख के इनामी पप्पू लोहरा सहित दो नक्सलियों को पुलिस ने मुठभेड़ में मार गिराया. ईचाबार जंगल में सुबह-सुबह हुई मुठभेड़ में पांच लाख के इनामी सब जोनल कमांडर प्रभात गंझू इसमें मारा गया. वहीं एक घायल नक्सली का इलाज जारी है. इस अभियान में एक जवान अवध सिंह घायल हुआ था. जिसे एयर लिफ्ट करके अस्पताल ले जाया गया.
- 26 मई 2025- लातेहार के दौना गांव में पुलिस ने 5 लाख का इनामी मनीष यादव को ढेर कर दिया. साथ ही 10 लाख के इनामी कुंदन खेरवार को गिरफ्तार किया था. लातेहार के महुआडांड़ थाना क्षेत्र के करमखाड़ और दौना के बीच रविवार रात ये मुठभेड़ हुई. मनीष यादव लातेहार, पलामू, गढ़वा, चतरा, बिहार के गया और औरंगाबाद में 50 से अधिक नक्सल हमले का आरोपी था. कटिया मुठभेड़ में सीआरपीएफ जवान के पेट में बम प्लांट करने के मामले का भी वो आरोपी था. इस हादसे में 13 जवान शहीद हो गए थे. इसके अलावा गढ़वा के पोलपोल में छह जवानों की हत्या में भी मनीष का नाम आया था.
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