Bihar Monsoon: पटना. बिहार में 2025 का मॉनसून फिलहाल “अटका हुआ” नज़र आ रहा है. सोमवार की रात से हुई हल्की प्री-मॉनसून बारिश से जो उम्मीद जगी थी, वो मंगलवार को ही खत्म हो गयी. मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, मॉनसून पिछली वार की तरह ही इस साल भी बंगाल सीमा पर ठहर गया है. इसके पीछे पुरवैया हवाओं का कमजोर होना बड़ी वजह है. ऐसे में मौसम विभाग का कहना है कि मॉनसून के लिए बिहार का इंतजार अभी लंबा हो सकता है.
क्यों रुका मॉनसून? मौसम वैज्ञानिकों की व्याख्या
आईएमडी भागलपुर के मौसम वैज्ञानिक आशीष कुमार बताते हैं कि पछुआ हवाएं इस समय ताकतवर हैं, जो अरब सागर से होते हुए बंगाल की खाड़ी तक तेजी से बढ़ रही हैं. इन हवाओं के प्रभाव से पुरवैया कमजोर हो गई हैं. नमी युक्त बादलों को आगे बढ़ाने वाली ऊर्जा कम हो जाने से मॉनसून फिलहाल स्थिर है. ये स्थिति तब तक बनी रह सकती है, जब तक पूर्वी हवाओं को फिर से गति और नमी नहीं मिलती.
कब तक होगी बारिश
बिहार के पूर्वी हिस्सों में तेज हवाओं और आंधी-पानी की स्थिति बन सकती है. हवा की गति 30-40 किमी प्रति घंटा रह सकती है. पूर्वी बिहार के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है, जबकि राज्य के अन्य हिस्सों के लिए यलो अलर्ट. अगले 48 घंटे मौसम की दृष्टि से संवेदनशील और परिवर्तनशील बने रहेंगे. 4 जून से 8 जून के बीच भागलपुर जिले के एक-दो स्थानों पर हल्की बारिश की संभावना जताई गई है.
धान की बुआई पर फोकस
बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर के डॉ. वीरेंद्र कुमार ने किसानों को मौसम के अनुसार धान की बुआई रणनीति को अपनाने की सलाह दी है कि बिचड़ा गिराने का सर्वोत्तम समय अब से 10 जून तक होगा. साफ आसमान और उचित नमी का होना आवश्यक. बुआई का समय 10 जून से 25 जून तक रहेगा. लंबी अवधि वाले किस्म का चयन करें. सिंचाई की समुचित व्यवस्था रखने की सलाह दी गई है. यह मौसम परिवर्तन को ध्यान में रखते हुए फसल उत्पादन और नुकसान से बचाव का रास्ता है.
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