Rath Yatra 2025: रांची के जगन्नाथपुर मंदिर से झारखंड की ऐतिहासिक रथ यात्रा शुक्रवार, 27 जून को निकाली गई. भगवान जगन्नाथ की इस रथ यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं में भारी उत्साह देखा गया. रथ यात्रा से पूर्व, गुरुवार शाम भगवान जगन्नाथ के नेत्रदान की पूजा विधिवत रूप से संपन्न हुई, जिसके बाद भक्तों को उनके दर्शन का सौभाग्य प्राप्त हुआ.
करीब 15 दिनों के एकांतवास के बाद भगवान जगन्नाथ ने अपने भक्तों को दर्शन दिए. उल्लेखनीय है कि 11 जून को महास्नान के बाद भगवान एकांतवास में चले गए थे. नेत्रदान पूजा के दिन भगवान अपने इस एकांत से बाहर आते हैं और आम भक्तों के समक्ष प्रकट होते हैं.
रथ यात्रा की तैयारी पूरी
रथ यात्रा के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली गई थीं. भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ अपने भव्य रथ पर सवार होकर मौसी के घर के लिए रवाना हुए. सुरक्षा व्यवस्था से लेकर रथ सजावट तक, हर पहलू पर विशेष ध्यान दिया गया था, ताकि रथ यात्रा का आयोजन शांतिपूर्ण और भव्य ढंग से हो सके.
333 वर्षों से जारी है रथ यात्रा की परंपरा
जगन्नाथपुर मंदिर में रथ यात्रा की परंपरा पिछले 333 वर्षों से लगातार निभाई जा रही है. इस ऐतिहासिक रथ यात्रा के लिए विशेष रूप से तैयार किया गया है. रथ अब पूरी तरह से अपने अंतिम स्वरूप में आ चुका है. उल्लेखनीय है कि रांची का जगन्नाथ मेला, उड़ीसा के बाद देश का दूसरा सबसे बड़ा और भव्य रथ मेला माना जाता है.
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