Hindi Vs Marathi Language Row: महाराष्ट्र भाषा विवाद पर बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने कहा, “आप गरीबों को पीटते हैं, लेकिन मुकेश अंबानी वहीं रहते हैं, मराठी बहुत कम बोलते हैं. अगर हिम्मत है, तो उनके पास जाओ. माहिम में मुस्लिम आबादी ज्यादा है, अगर हिम्मत है, तो वहां जाओ. एसबीआई चेयरमैन मराठी नहीं बोलते, उन्हें पीटने की कोशिश करो.” दुबे ने कहा, जिस तरह से ठाकरे बंधुओं को अपनी भाषा से प्यार है, उसी तरह से बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड, मध्य प्रदेश, राजस्थान के लोगों में भी अपनी भाषा के प्रति प्यार है. तो किसी भाषा के आधार पर ठाकरे परिवार लोगों के साथ मारपीट करते हैं. ये हमारे बर्दाश्त से बाहर है.
#WATCH | Gangtok, Sikkim: Amid language row, BJP MP Nishikant Dubey says, “…You beat up the poor. But Mukesh Ambani lives there, he speaks very less Marathi. If you have guts, go to him. Mahim has a large Muslim population, if you have guts – go there. SBI chairman doesn’t… pic.twitter.com/h1PwKeX7gO
— ANI (@ANI) July 10, 2025
अपने पहले वाले बयान पर कायम हैं निशिकांत दुबे
हिंदी-मराठी भाषा विवाद पर अपने पहले के बयान पर, उन्होंने कहा, “मैंने एक बात कही थी और उसे तोड़मरोड़ कर पेश किया गया. इस देश की वित्तीय स्थिति में महाराष्ट्र का बहुत बड़ा योगदान है, लेकिन मैं यह कह रहा हूं कि मुंबई या महाराष्ट्र द्वारा दिए गए टैक्स में हमारा भी योगदान है. इसका ठाकरे परिवार या मराठाओं से कोई लेना-देना नहीं है. एसबीआई और एलआईसी, जो टैक्स देते हैं, उनका मुख्यालय मुंबई में है. सिक्किम के लोग भी अपना पैसा एसबीआई में जमा करते हैं. उनका पैसा भी वहीं है. लेकिन उसका टैक्स महाराष्ट्र के खाते में जाता है. आप गरीबों को पीटते हैं. लेकिन मुकेश अंबानी वहीं रहते हैं, मराठी बहुत कम बोलते हैं. अगर हिम्मत है, तो उनके पास जाओ.” माहिम “जहां मुस्लिम आबादी ज्यादा है, हिम्मत है तो वहां जाओ. एसबीआई चेयरमैन मराठी नहीं बोलते, उन्हें ठोक कर देखो.”
महाराष्ट्र की वित्तीय स्थिति में गरीबों का योगदान
निशिकांत दुबे ने कहा, मेरा कहना है कि जो गरीब आदमी है, जो महाराष्ट्र कमाने-खाने गया है. उसका महाराष्ट्र की वित्तीय स्थिति में योगदान है. उसके साथ मारपीट करना गलत है. दुबे ने ठाकरे बंधुओं को चेतावनी देते हुए फिर से दोहराया कि अगर उद्धव और राज ठाकरे किसी को डराकर-धमकाकर नेतृत्व करना चाहेंगे, तो ये नहीं होने देंगे.
अपने घर में तो कुत्ता भी शेर होता है : निशिकांत दुबे
सांसद निशिकांत दुबे ने इससे पहले भाषा विवाद पर पोस्ट किया था, जिसमें उन्होंने लिखा था, “हिंदी भाषी लोगों को मुंबई में मारने वालों में अगर हिम्मत है तो महाराष्ट्र में उर्दू भाषियों को मार कर दिखाओ. अपने घर में तो कुत्ता भी शेर होता है? कौन कुत्ता है, कौन शेर है, खुद ही फैसला कर लो.’’
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