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मानव को अपना अधिकार जाने बिना समुचित विकास संभव नहीं

– एएलवाई कॉलेज में विश्व मानवाधिकार दिवस पर संगोष्ठी का किया गया आयोजन – स्वयंसेवक मानवाधिकार संबंधी जागरूकता फैलाकर सभ्य, स्वच्छ व विकसित समाज निर्माण में करें सहयोग त्रिवेणीगंज. एएलवाई कॉलेज में बुधवार को विश्व मानवाधिकार दिवस पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया. इसकी अध्यक्षता प्राध्यापक प्रो. अरुण कुमार ने की. उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति की जिंदगी, आजादी, बराबरी और सम्मान के अधिकारों को हम मानवाधिकार कहते हैं. मानव को अपना अधिकार जाने बिना उनका समुचित विकास संभव नहीं है. मानवाधिकार व्यक्ति को एक पूर्ण और विकसित मानव बनाता है. किसी भी राष्ट्र का विकास वहां के व्यक्ति के ज्ञान, अधिकार और कर्तव्य बोध पर निर्भर करता है. जिस समाज में शिशु-बुढ़े और समाज के दबे कुचले वर्ग के व्यक्ति के अधिकार का हनन होगा, उस राष्ट्र का एक उन्नत अथवा विकसित राष्ट्र बनने का सपना सदैव एक स्वप्न ही रहेगा. विश्व युद्ध की विभीषिका से झुलस रहे लोगों के दर्द को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र संघ की महासभा द्वारा मानव के अधिकारों की रक्षा के लिए 10 दिसंबर 1948 को उनके अपने अधिकार और कर्तव्य का बोध कराने एवं मानवाधिकार रक्षा के उद्देश्य से विश्व मानवाधिकार दिवस मनाने की घोषणा की गयी. संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा अधिकारिक तौर पर वर्ष 1950 को संपूर्ण विश्व में 10 दिसंबर को विश्व मानवाधिकार दिवस मनाने की तिथि निर्धारित की गयी. तब से संपूर्ण विश्व में 10 दिसंबर को विश्व मानवाधिकार दिवस मनाया जाने लगा. हालांकि, हिंदुस्तान में 28 सितंबर 1993 को विश्व मानवाधिकार कानून अमल में आया. 12 अक्तूबर 1993 को हिंदुस्तान प्रशासन ने मानवाधिकार आयोग का गठन किया. हिंदुस्तानीय संविधान मानवाधिकार कानून का रक्षा करते हुए इसे तोड़ने वाले को अदालत द्वारा सजा भी देती है. हिंदुस्तानीय संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 16, 17, 19, 20, 21, 23, 24, 39, 43, 45 देश में मानवाधिकार की रक्षा के लिए सुनिश्चित है. एनएसएस कार्यक्रम पदाधिकारी प्रो. विद्यानंद यादव ने बताया विश्व मानवाधिकार का घोषणा पत्र संयुक्त राष्ट्र संघ का एक बुनियादी भाग है, जो व्यक्ति के विकास के लिए एक मील का पत्थर साबित हो रहा है. हमारा मौलिक अधिकार छह है. समानता का अधिकार, स्वतंत्रता का अधिकार, शोषण के विरुद्ध अधिकार, धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार, संस्कृति और शिक्षा संबंधी अधिकार, संवैधानिक उपचारों का अधिकार, जिसे सभी को जानना आवश्यक है. मानवाधिकार आयोग के अधिकार कार्य क्षेत्र में नागरिक की नेतृत्व के साथ आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक अधिकार के तहत बाल- मजदूरी, एचआईवी/एड्स, स्वास्थ्य, भोजन, बाल-विवाह, स्त्री अधिकार, हिरासत और मुठभेड़ में होने वाली मौत, अल्पसंख्यकों, अनुसूचित जाति, जनजाति, धर्म भेद, लिंग भेद आता है. विश्व मानवाधिकार के घोषणापत्र का मुख्य विषय-शिक्षा,स्वास्थ्य, रोजगार,आवास,संस्कृति, खाद्यान्न व मनोरंजन,धर्म-भेद लिंग-भेद तथा अन्य से जुड़ी मानव की बुनियादी मांगों से संबंधित है, लेकिन विश्व के बहुत से क्षेत्र में अशिक्षा, भुखमरी, बेरोजगारी तथा तरह-तरह के रोग, आवास की समस्या है जो मानवीय अधिकार की रक्षा के लिए बहुत बड़ा बाधक है. इतना ही नहीं, शिशु-वरिष्ठ नागरिक और स्त्रीओं की बुनियादी हितों के साथ नस्लभेद मानवाधिकार के कार्य के विकास के लिए बहुत बड़ा बाधक है. विश्व मानवाधिकार दिवस 2025 का थीम मानवाधिकार हमारी रोजमर्रा की ज़रूरतें मानव के अधिकारों का पहचान देना और उनके वजूद को अस्तित्व में लाना हम सबों का कर्तव्य है. स्वयंसेवकों का कर्तव्य है कि मानवाधिकार संबंधी जागरूकता फैलाकर सभ्य, स्वच्छ एवं विकसित समाज के निर्माण में सहयोग करें. मौके पर प्रो. शंभू यादव, प्रो. कुमारी पूनम, प्रो. देवनारायण यादव, डॉ. अरविंद कुमार, प्रो. कुलानंद यादव, प्रो. राजकुमार यादव, सोनू स्नेहिल, सुरेंद्र कुमार, भूषण कुमार, अनुपम कुमार, दिलीप दिवाकर, गगन कुमार, दिग्दर्शन, रंजन कुमार, करण कुमार कुणाल, नागेश्वर यादव, बालकिशोर कुमार, प्रभात कुमार, हिरेंद्र कुमार, सिमरन गोयल, आस्था कुमारी, प्रियांशु कुमारी, सरिता कुमारी, शबनम कुमारी, नीलू कुमारी, दिव्या कुमारी, स्वीटी कुमारी, रिया कुमारी, गोविंद कुमार, अंकिता हिंदुस्तानी, श्रेया हिंदुस्तानी, आश्वी कुमारी, रंजूषा सुमन, सरिता कुमारी, चांदनी कुमारी, मनीषा कुमारी, शिव कुमार, रोशन राज, शुभम कुमार, ज्ञान मनी, मुस्कान परवीन, रंजीत कुमार, अभिनव कुमार, साक्षी कुमारी आदि मौजूद थे.

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विनोद झा
संपादक नया विचार

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