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ढाई माह से खाली शस्त्र दंडाधिकारी का पद, 800 लाइसेंसधारी परेशान

हथियारों का रिन्यूअल व इंस्पेक्शन ठप शिवेंद्र कुमार, मेदिनीनगर पलामू जिले में पिछले ढाई माह से जिला शस्त्र दंडाधिकारी का पद खाली रहने से लाइसेंसी हथियारों का रिन्यूअल और वार्षिक इंस्पेक्शन पूरी तरह ठप है. इससे जिले के करीब 800 हथियार लाइसेंसधारी परेशान हैं. समय पर रिन्यूअल व इंस्पेक्शन नहीं होने से न सिर्फ लोगों को कानूनी जोखिम का सामना करना पड़ रहा है, बल्कि प्रशासन को भी राजस्व का नुकसान हो रहा है. रिन्यूअल व इंस्पेक्शन दोनों कार्य लंबित जिले में हथियार लाइसेंसधारियों को प्रत्येक वर्ष इंस्पेक्शन और तीन या पांच वर्ष में लाइसेंस रिन्यूअल कराना अनिवार्य है. लेकिन शस्त्र दंडाधिकारी का पद रिक्त रहने के कारण पिछले ढाई माह से दोनों प्रक्रियाएं लंबित हैं. जानकारी के अनुसार जिला शस्त्र दंडाधिकारी का प्रभार डीसी द्वारा ही दिया जाता है, इसके लिए राज्य प्रशासन की नियुक्ति जरूरी नहीं होती. ऑल ओवर इंडिया लाइसेंसधारियों को ज्यादा परेशानी शस्त्र दंडाधिकारी नहीं रहने से सबसे अधिक दिक्कत ऑल ओवर इंडिया लाइसेंसधारियों को हो रही है. राज्य से बाहर यात्रा के दौरान जांच में उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ता है. पूर्व में कार्यपालक दंडाधिकारी रश्मि रंजन को सामान्य शाखा के साथ जिला शस्त्र दंडाधिकारी का प्रभार दिया गया था, लेकिन उनके स्थानांतरण के बाद अब तक किसी अधिकारी को यह जिम्मेदारी नहीं सौंपी गयी है. हालांकि सामान्य शाखा का प्रभार जिला उप निर्वाचन पदाधिकारी उदय रजक को दिया गया है. फटे बैरल व खराब हथियार बदलने का आदेश नहीं जानकारी के अनुसार करीब एक दर्जन लाइसेंसधारियों ने खराब हथियार बदलने के लिए आवेदन दिया है. इनमें एक लाइसेंसधारी का वेबले एस्कॉर्ट मेड इन इंग्लैंड हथियार का बैरल फट चुका है. इसके बावजूद अब तक हथियार बदलने की अनुमति नहीं मिली है. कई अन्य लाइसेंसधारियों के हथियार भी खराब हो चुके हैं, लेकिन आदेश के अभाव में वे असहाय हैं. लोगों का कहना है कि सुरक्षा के लिए मिला हथियार खराब रहने पर बेकार साबित हो रहा है. रिन्यूअल नहीं होने पर बढ़ता है कानूनी खतरा हथियार का रिन्यूअल या इंस्पेक्शन नहीं होने पर लाइसेंसधारी को गंभीर कानूनी परेशानी हो सकती है. पकड़े जाने पर जुर्माना या जेल की सजा का प्रावधान है. शस्त्र अधिनियम के तहत बिना वैध लाइसेंस हथियार रखने पर दो से पांच साल तक की कैद और जुर्माना हो सकता है. नवीनीकरण नहीं होने पर लाइसेंस रद्द भी किया जा सकता है, जिससे हथियार रखना अवैध हो जाता है. प्रशासन को भी हो रहा राजस्व का नुकसान हथियार इंस्पेक्शन के लिए प्रत्येक वर्ष 500 रुपये, जबकि रिन्यूअल के लिए तीन साल में 1500 और पांच साल में 2500 रुपये शुल्क लिया जाता है. समय पर रिन्यूअल नहीं होने पर 2000 रुपये का फाइन भी देना होता है. लेकिन प्रक्रिया ठप रहने से प्रशासन को यह राजस्व नहीं मिल पा रहा है.

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विनोद झा
संपादक नया विचार

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