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Fertiliser: पिछले साल उर्वरकों की मांग से अधिक रही उपलब्धता

Fertiliser: कृषि और किसानों की जरूरतों को प्राथमिकता देते हुए केंद्र प्रशासन उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए हर स्तर पर कदम उठाती है. इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि केंद्र प्रशासन ने वर्ष 2024-25 में उर्वरकों की रिकॉर्ड उपलब्धता सुनिश्चित की. इससे किसानों को पूरे साल समय पर पर्याप्त मात्रा में उर्वरक मिल सका. केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के अनुसार  देश में उर्वरकों की अनुमानित जरूरत लगभग 152.50 करोड़ बैग (722.04 लाख टन) थी, जबकि उपलब्धता लगभग 176.79 करोड़ बैग (834.64 लाख टन) रही. उर्वरकों की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने में रेलवे, पत्तन (पोर्ट) प्राधिकरणों, राज्य प्रशासनों और उर्वरक कंपनियों के बीच बेहतर समन्वय से संभव हो सका.

हिंदुस्तानीय रेलवे ने उर्वरक रैकों को प्राथमिकता दी, जिससे तेज ढुलाई हो सकी. वहीं, पत्तनों पर आयात होने वाले उर्वरकों की शीघ्र अनलोडिंग और निर्बाध निकासी सुनिश्चित की गयी. साथ ही प्रशासन ने भंडारण और वितरण व्यवस्था को भी सशक्त बनाया ताकि उर्वरक समय पर किसानों को मिल सके. इसके अलावा उर्वरक कंपनियों के साथ नियमित समीक्षा बैठक कर मांग और आपूर्ति पर लगातार नजर रखी गई और समस्याओं का तुरंत समाधान किया गया. प्रशासन की सक्रियता और समन्वित प्रयासों के कारण देश के किसी भी हिस्से में उर्वरकों की कमी नहीं हुई और इससे कृषि उत्पादन बेहतर हुआ. 

घरेलू उत्पादन बढ़ाने पर दिया गया है जोर

आत्मनिर्भर हिंदुस्तान के लक्ष्य को हासिल करने में केंद्र प्रशासन ने उर्वरक क्षेत्र में घरेलू उत्पादन बढ़ाने पर विशेष जोर दिया है. इसका परिणाम है कि वर्ष 2025 में देश की कुल उर्वरक खपत का 73 फीसदी हिस्से का उत्पादन देश में ही हुआ. यूरिया, डीएपी, एनपीके और एसएसपी का कुल घरेलू उत्पादन लगातार बढ़ रहा है. वर्ष 2021 में यह 433.29 लाख टन था, जो वर्ष 2022 में बढ़कर 467.87 लाख टन हो गया और फिर वर्ष 2023 में इसमें बड़ी वृद्धि दर्ज की गई और उत्पादन 507.93 लाख टन तक पहुंच गया. यह बढ़त वर्ष 2024 में भी जारी रही और उत्पादन 509.57 लाख टन रहा. वहीं वर्ष 2025 में उर्वरक उत्पादन अब तक के सबसे उच्च स्तर पर पहुंच कर 524.62 लाख टन हो गया. उत्पादन बढ़ने की वजह नये उर्वरक संयंत्रों की स्थापना, बंद पड़ी इकाइयों का पुनरुद्धार और स्वदेशी उत्पादन को बढ़ावा देने के कारण हुआ. 

पिछले एक दशक में घरेलू उर्वरक के उत्पादन में रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज की गयी. वर्ष 2013-14 में यूरिया का घरेलू उत्पादन 227.15 लाख मीट्रिक टन था, जो वर्ष 2024-25 में बढ़कर 307.67 लाख मीट्रिक टन हो गया. इस अवधि में यूरिया के उत्पादन में 35 फीसदी की वृद्धि हुई. इसी तरह डीएपी और एनपीकेएस उर्वरक का उत्पादन वर्ष 2013-14 में 110.09 लाख मीट्रिक टन से बढ़कर वर्ष 2024-25 में 158.78 लाख मीट्रिक टन हो गया. इस अवधि में इन उर्वरकों का उत्पादन 44 फीसदी बढ़ा. प्रशासन की इन पहलों से किसानों को उर्वरकों की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित हुई है और कृषि उत्पादन को भी समर्थन मिला है. 

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विनोद झा
संपादक नया विचार

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