अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने गुरुवार को नाटो (NATO) देशों पर एक बार फिर निशाना साधा. उन्होंने सवाल उठाया कि जरूरत पड़ने पर क्या वे अमेरिका की रक्षा करेंगे. राष्ट्रपति ट्रंप पिछले कुछ दिनों से नॉर्थ अटलांटिक देशों के इस संगठन को टेस्ट करने का इशारा किया है. उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब वह NATO के सदस्य देशों पर आर्थिक भागीदारी बढ़ाने की बात कर रहे हैं. उन्होंने दावा किया कि अफगानिस्तान में तालिबान के खिलाफ अमेरिकी सेना के साथ लड़ते समय दूसरे देशों के सैनिक “थोड़ा पीछे रहे, फ्रंटलाइन से थोड़ा दूर रहे.” ट्रम्प ने यह भी कहा कि अमेरिका को “कभी उनकी जरूरत नहीं पड़ी.” इसी दौरान उन्होंने कहा कि आर्टिकल 5 का उपयोग करके इस गुट के सैनिकों को अमेरिका के दक्षिणी सीमा पर तैनात करना चाहिए.
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर ट्रम्प ने लिखा, “शायद हमें नाटो की परीक्षा लेनी चाहिए थी. अनुच्छेद 5 लागू करते और नाटो को यहां बुलाकर हमारे दक्षिणी सीमा की अवैध प्रवासियों के और हमलों से रक्षा करने के लिए मजबूर करते, ताकि बड़ी संख्या में बॉर्डर पेट्रोल एजेंट्स को दूसरे कामों के लिए खाली किया जा सके.” हालांकि नाटो के आर्टिकल 5 का उपयोग एक बार किया जा चुका है. 9/11 के हमलों के बाद अमेरिका की मदद के लिए अफगानिस्तान में सभी सैनिकों ने मिलकर सैन्य अभियान किया था.
11 सितंबर 2001 के आतंकी हमलों के बाद नाटो सहयोगियों ने अफगानिस्तान में अमेरिका के समर्थन में हजारों सैनिक भेजे थे. अगले दो दशकों में इस संघर्ष में 3,400 से ज्यादा नाटो सैनिक मारे गए, जिनमें 1,000 से अधिक सैनिक अमेरिका के अलावा अन्य देशों के थे.
“Maybe we should have put NATO to the test: Invoked Article 5, and forced NATO to come here and protect our Southern Border from further Invasions of Illegal Immigrants, thus freeing up large numbers of Border Patrol Agents for other tasks.” – President Donald J. Trump pic.twitter.com/pc0BabACOm
— The White House (@WhiteHouse) January 23, 2026
गैर US नाटो सैनिकों की नीयत पर उठाए सवाल
गुरुवार को फॉक्स न्यूज से बात करते हुए ट्रम्प ने यह भी सवाल उठाया कि जरूरत पड़ने पर क्या नाटो अमेरिका की रक्षा करेगा. उन्होंने कहा कि उन्हें पक्का भरोसा नहीं है कि किसी बड़े खतरे की स्थिति में नाटो अमेरिका की रक्षा की अंतिम परीक्षा पर खरा उतरेगा. फॉक्स न्यूज से बातचीत में ट्रम्प ने कहा, “हमें कभी उनकी जरूरत नहीं पड़ी… वे कहेंगे कि उन्होंने अफगानिस्तान में कुछ सैनिक भेजे… और भेजे भी, लेकिन वे थोड़ा पीछे रहे, फ्रंटलाइन से थोड़ा दूर.” यह एक तरह से यूरोपीय सहयोगियों के ऊपर तंज ही था. उन्होंने आगे कहा, “हम यूरोप और कई दूसरे देशों के लिए बहुत अच्छे रहे हैं. यह दोतरफा रिश्ता होना चाहिए.”
इससे पहले हफ्ते की शुरुआत में ट्रम्प ने नाटो को “जरूरत से ज्यादा आंका गया” (overrated) बताया था. उन्होंने कहा था कि उन्हें शक है कि किसी गंभीर संकट की स्थिति में गठबंधन के सदस्य प्रतिक्रिया देंगे या नहीं. दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में जाने से पहले उन्होंने कहा था, “मुझे पता है हम नाटो की मदद के लिए जाएंगे, लेकिन मुझे सच में शक है कि क्या वे हमारी मदद के लिए आएंगे.”
ट्रंप का नाटो के ऊपर हमला कई एंगल से देखा जा सकता है. उन्होंने पहले इस ट्रीटी को अमेरिका के ऊपर आर्थिक बोझ बताया, क्योंकि इसका सबसे ज्यादा भुगतान यूएस ही कर रहा था. वहीं ट्रंप के ग्रीनलैंड लेने की बातों से यूरोपीय देशों में खलबली मच गई, डेनमार्क ने तो इस कदम को नाटो का अंत करार दिया. ट्रंप ने ग्रीनलैंड के साथ ही कनाडा पर भी निशाना साधा, उन्होंने कहा कि वह सुरक्षा के लिए अमेरिका पर निर्भर है.
नाटो का अनुच्छेद 5 क्या है?
नाटो की स्थापना 1949 में यूरोप को सोवियत खतरे से सामूहिक सुरक्षा देने के लिए की गई थी. इसका अनुच्छेद 5 कहता है कि किसी एक सदस्य पर सशस्त्र हमला सभी सदस्यों पर हमला माना जाएगा. व्यवहार में इस अनुच्छेद की ताकत काफी हद तक अमेरिका के समर्थन पर निर्भर करती है, क्योंकि यूरोप अपनी सुरक्षा के लिए बड़े पैमाने पर अमेरिका पर निर्भर है. हालांकि, यह बात सही है कि अमेरिका नाटो के बजट का लगभग दो-तिहाई हिस्सा देता है. वह यूरोप में करीब 40,000 सैनिक तैनात रखता है, जिनमें यूरोपियन डिटरेंस इनिशिएटिव (EDI) जैसी पहलें शामिल हैं.
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