रांची से अमन तिवारी की रिपोर्ट
Jharkhand Liquor Scam: झारखंड के शराब घोटाला मामले में प्रमुख आरोपी (किंगपिन) छत्तीसगढ़ का शराब कारोबारी भूपेंद्रपाल सिंह भाटिया पुलिस की लापरवाही के कारण भागने में सफल रहा. उसे गिरफ्तार करने छत्तीसगढ़ गयी पुलिस टीम खाली हाथ लौट आई. इस मामले में दूसरा प्रमुख आरोपी नवीन केडिया की भी दोबारा गिरफ्तार करने का निर्देश मिला था, लेकिन वह भी टीम को चकमा देकर अब तक फरार है. इसकी जानकारी मिलने पर एसीबी की चीफ एडीजी प्रिया दुबे ने पूरे मामले की जांच कराई. अब लापरवाही बरतने का मामला उजागर होने पर पूरी पुलिस टीम को निलंबित कर दिया गया है. भूपेंद्रपाल सिंह भाटिया ही भाटिया वाइंस एंड कंपनी का मालिक है. उसे जांच के बाद एसीबी ने केस में अप्राथमिकी अभियुक्त बनाया है.
आरोपियों को फरार होने का कैसे मिला मौका?
एसीबी की चीफ एडीजी प्रिया दुबे के निर्देश पर एसीबी के अधिकारियों ने जब जांच शुरू की. जांच के दौरान उन्होंने पाया कि अगर टीम ने ठीक से छापेमारी की होती, तो आरोपी गिरफ्तार कर लिए जाते. लेकिन, टीम ने छापेमारी के दौरान ठीक से काम नहीं किया. इस कारण आरोपियों को बच कर भागने का मौका मिला.
कौन कर रहा था टीम का नेतृत्व?
झारखंड पुलिस की टीम सब इंस्पेक्टर (एसआई) गगन कुमार के नेतृत्व में छापेमारी के लिए छत्तीसगढ़ गई थी. उन्हें छापेमारी में सहयोग के लिए दो आरक्षी भी मिले थे. आरक्षियों में सत्येंद्र कुमार और प्रभाकर शामिल हैं. सब-इंस्पेक्टर और दोनों आरक्षी रांची जिला पुलिस बल के हैं. रांची पुलिस ने अतिरिक्त पुलिस बल की मांग पर तीनों पुलिस कर्मियों को एसीबी को उपलब्ध कराया था. भूपेंद्रपाल सिंह भाटिया ने अदालत में पहले ही जमानत याचिका भी दायर की थी. लेकिन, उसे खारिज कर दिया गया था.
नवीन केडिया मामले में आठ सस्पेंड
जानकारी के अनुसार, इससे पहले नवीन केडिया मामले में एसीबी ने इंस्पेक्टर सहित आठ पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया था. जिन्हें निलंबित किया गया था, उनमें इंस्पेक्टर विजय केरकेट्टा, सब-इंस्पेक्टर राहुल, शशिकांत और एएसआइ राजू शामिल हैं. इन पुलिस पदाधिकारियों के अलावा अलावा चार आरक्षियों को भी निलंबित कर दिया गया था.
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निगरानी में भी फेल रहे पुलिस के अधिकारी
निलंबित पदाधिकारियों और आरक्षियों को नवीन केडिया की ट्रांजिट बेल के दौरान उस पर निगरानी रखने की जिम्मेवारी मिली थी. लेकिन, पुलिस पदाधिकारियों और जवानों ने निगरानी करने के बजाय सिर्फ खानापूर्ति की और आरोपी नवीन केडिया ट्रांजिट बेल की अवधि पूरी होने के बाद सरेंडर करने की बजाय भाग निकला.
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