पुरुलिया.
पुरुलिया नगरपालिका के पूर्व अध्यक्ष शमीम दाद खान अपने बेटे सोहेल दाद और समर्थकों के साथ कांग्रेस छोड़ कर एक बार फिर तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गये. उनकी वापसी के साथ ही तृणमूल के अंदर गुटबाजी व असंतोष खुल कर सामने आ गया है. पूर्व चेयरमैन नवेंदु महाली, पूर्व पार्षद फैजल कमाल समेत कई तृणमूल नेताओं व कार्यकर्ताओं ने इस कदम के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. शमीम दाद खान के लिए पार्टी के दरवाजे खोलने का पुरजोर विरोध किया जा रहा है. जानकारी के मुताबिक, पिछले नगरपालिका चुनाव में टिकट नहीं मिलने पर शमीम दाद खान अपने बेटे के साथ तृणमूल छोड़ कर कांग्रेस में चले गये थे. कुछ माह बाद राज्य में विधानसभा चुनाव होनेवाले हैं. उससे पहले शनिवार को राज्य के मंत्री मानस भुईंया की मौजूदगी में शमीम दाद खान और उनके समर्थकों को दोबारा तृणमूल का झंडा थमा कर पार्टी में शामिल करा लिया गया.
वापसी पर विरोध व बयानबाजी
शमीम दाद खान ने कहा कि कुछ अभिमान के चलते वे पार्टी छोड़ कर चले गये थे, लेकिन तृणमूल के विकास कार्यों और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी व अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व में मजबूत बंगाल के लक्ष्य को देखते हुए उन्होंने सत्ताधारी पार्टी में वापसी का फैसला किया है. मौके पर मंत्री मानस भुईंया ने कहा कि पार्टी निर्देशानुसार ‘मिलन मेला’ के तहत उनका स्वागत किया गया है और हिंदू-मुस्लिम एकजुट होकर भाजपा के खिलाफ लड़ेंगे. हालांकि जिला तृणमूल कांग्रेस में खेमेबाजी व अंदरूनी कलह को लेकर किये गये सवाल को मंत्री मानस भुईंया और पार्टी के जिलाध्यक्ष व विधायक राजीव लोचन टाल गये और कुछ भी टिप्पणी नहीं की.
असंतोष व नेतृत्वक प्रतिक्रिया
घटनाक्रम पर पूर्व पार्षद फैजल कमाल ने कहा कि जो लोग पहले पार्टी छोड़ कर विरोध कर रहे थे, उन्हें दोबारा शामिल करना गलत है. पूर्व चेयरमैन नवेंदु मोहाली समेत कई नेताओं ने भी पिता-पुत्र की तृणमूल में वापसी की मुखालफत की. सोशल मीडिया में भी पार्टी के संभावित नुकसान की आशंका जतायी जा रही है. वहीं, कांग्रेस के नेताओं ने दावा किया कि शमीम दाद के पार्टी से निकलने पर कोई नुकसान नहीं होगा. उलटे जिले में कांग्रेस की स्थिति मजबूत है और कुछ माह बाद होवाले विधानसभा चुनाव में पार्टी बेहतर प्रदर्शन करेगी.
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