Budget 2026-27: वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने 3 कर्तव्यों को पूरा करने के संकल्प के साथ साल 2026–27 का बजट पेश किया है. यह बजट हिंदुस्तान के उस सपने की ओर इशारा करता है, जो 2047 तक हिंदुस्तान को एक विकसित राष्ट्र बना सकता है. इस बजट पर गौर करें, तो पता चलता है कि यह यह बजट कैपिसिटी बिल्डिंग और सबके ग्रोथ को प्रमोट करने कोशिश है. आइए समझते हैं कि इस बजट में आखिर ऐसा क्या है, जो हिंदुस्तान को 2047 तक एक विकसित राष्ट्र की श्रेणी में लेकर जा सकता है.
विकास की गति एक समान और सबके लिए विकास
वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट भाषण में यह स्पष्ट किया है कि प्रशासन ने तीन कर्तव्य को पूरा करने के लिए संकल्प लिया है. प्रशासन के ये तीन कर्तव्य हैं –
- आर्थिक विकास को तेज करना और उसे बनाये रखना
- जनता की उम्मीदों को पूरा करना
- सबका साथ, सबका विकास के विजन को लक्ष्य तक पहुंचाना
ये तीनों कर्तव्य अगर पूरे किए जाते हैं, तो यह कहा जा सकता है कि हिंदुस्तान विकसित राष्ट्र की श्रेणी में शामिल होने के लिए एक कदम आगे बढ़ा रहा है.
विकसित राष्ट्र के सपने की ओर एक कदम, लेकिन गति और बढ़ानी होगी : अर्थशास्त्री हरिश्वर दयाल
प्रसिद्ध अर्थशास्त्री हरिश्वर दयाल ने नया विचार के साथ खास बातचीत में बताया कि प्रशासन ने तीन कर्तव्य की बात कही है. सस्टेनेबल ग्रोथ, कैपिसिटी बिल्डिंग और सबके विकास की बात है. 2047 तक विकसित राष्ट्र की श्रेणी में पहुंचने के लिए प्रशासन ने जो सपना देखा है, इस बजट को उस ओर एक प्रयास कहा जा सकता है. ग्रोथ को प्रमोट करने के लिए एग्रीकल्चर, इंडस्ट्री, रोजगार, नयी तकनीक, क्लाइमेंट चेंज, एजुकेशन, स्वास्थ्य और स्त्री सशक्तिकरण जैसे क्षेत्रों में प्रशासन ने जिस तरह ग्रोथ की कोशिश की है, वह अच्छा है.
बावजूद इसके 2047 के लक्ष्य तक पहुंचने के लिए विकास की गति को ना सिर्फ तेज करना होगा, बल्कि उस गति को बनाए रखना भी होगा. प्रशासन ने स्किल्ड डेवलपमेंट के लिए कई यूनिवर्सिटी में इंवेस्ट करने की बात कही है, इसकी वजह यह है कि ह्यूमन रिसोर्स की कमी है, खासकार स्किल्ड रिसोर्स की. नवाचार यानी नयी तकनीक पर भी प्रशासन खर्च कर रही है. सेमी कंडक्टर, एआई तकनीक इसके प्रमुख उदाहरण हैं. एमएसएमई को प्रशासन काफी प्रमोट कर रही है, इसकी वजह यह है कि इसके जरिए काफी संख्या में रोजगार सृजित होते हैं.
ग्रोथ के लिए राज्यों को ज्यादा सशक्त करने की जरूरत
विकसित हिंदुस्तान के सपने को साकार करने के यह जरूरी है कि डेवलपमेंट के आउट कम को देश के हर व्यक्ति तक पहुंचाया जाए. उक्त बातें अर्थशास्त्री हरिश्वर दयाल ने कही. ग्रोथ का बैलेंस बनाने की जरूरत है, इसके लिए लखपति दीदियों को प्रशासन ने टारगेट किया है. यह स्त्री सशक्तिकरण का बढ़िया प्रयास है. ग्रोथ हर सेक्टर में नजर आना चाहिए. इसके लिए राज्यों को ज्यादा सशक्त करने की जरूरत है, क्योंकि विकास को हर तबके तक पहुंचाने के लिए राज्यों का सहयोग बहुत जरूरी है. इसके लिए जरूरी है कि केंद्र प्रशासन, राज्यों को ज्यादा ग्रांट दे. राज्यों को 16वें वित्त आयोग के तहत ग्रांट दिया जा रहा है, इसे और अधिक करने की जरूरत है. प्रशासन ने बजट में पूर्वोदय की बात कही है, जिसके तहत नाॅर्थ–ईस्ट के राज्यों को विकसित करने की बात कही गई है. यह अच्छी योजना है, लेकिन सस्टेनबल और सबका ग्रोथ तभी होगा जब और अन्य वंचित राज्यों जैसे पूर्व के अन्य राज्य बिहार, झारखंड, बंगाल और ओडिशा को ग्रांट दिया जाए और उनका विकास हो.
जीडीपी कितना हो तो हिंदुस्तान बन सकता है विकसित राष्ट्र?
| देश | GDP का आकार (2025) | औसत वास्तविक ग्रोथ (पिछले 5 वर्ष में) | प्रमुख विकास क्षेत्र |
|---|---|---|---|
| United States (USA) | ~$30.5 ट्रिलियन | लगभग 2–3% प्रति वर्ष | सेवा क्षेत्र, तकनीक, उपभोक्ता खर्च, वित्तीय सेवाएं |
| China | ~$19.2 ट्रिलियन | लगभग 4–5% प्रति वर्ष | विनिर्माण, निर्यात, डिजिटल और तकनीकी निवेश |
| Germany | ~$4.7–5.0 ट्रिलियन | लगभग 0–1% | ऑटोमोबाइल, मशीनरी, निर्यात-आधारित उद्योग |
| India | ~$4.1–4.2 ट्रिलियन | लगभग 6–7%+ प्रति वर्ष | सेवाएं, विनिर्माण, घरेलू खपत, डिजिटल/स्टार्टअप |
हिंदुस्तान को अभी विश्व की चौथी सबसे बड़ी वित्तीय स्थिति माना जाता है. हिंदुस्तान लगभग $3.8–$3.9 ट्रिलियन की वित्तीय स्थिति बन चुका है और इसकी विकास दर 2025 में 6.5% रही जिसके 2026 में 7.4% रहने का अनुमान है. आर्थिक जगत के विशेषज्ञों की राय है कि अगर हिंदुस्तान को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनना है तो उसे अपनी विकास दर 7–8% के आसपास लगातार बनाकर रखनी होगी. साथ ही उसे समावेशी और सतत यानी लगातार और सबका विकास करना होगा, तभी यह लक्ष्य प्राप्त हो सकता है. इसके साथ ही रोजगार-आधारित विकास, विनिर्माण और सेवा क्षेत्र, स्त्री सशक्तिकरण, इंफ्रास्ट्रक्चर और ग्रीन एनर्जी पर भी काम करना होगा.
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अमेरिका की जीडीपी विकास दर है 2–3.5%
अमेरिका विश्व की सबसे बड़ी वित्तीय स्थिति है, लेकिन उसकी विकास दर महज 2–3.5% है. यहां गौर करने वाली बात यह है कि अमेरिका का विकास दर कम है, लेकिन उनके विकास दर की खास बात यह है कि वह लगातार एक समान बना हुआ है. इसी तरह चीन की विकास दर को देखें, तो वो अमेरिका से ज्यादा है. वहां की विकास दर 4–5% प्रति वर्ष है. जर्मनी में भी विकास दर धीमी है. इस लिहाज से अगर हिंदुस्तान 7–8% की विकास दर और सतत और समावेशी विकास को कायम रख पाए, तो 2047 का सपना साकार हो सकता है.
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