Rose Day Special: वेलेंटाइन डे वीक की शुरुआत रोज डे से हो चुकी है. प्यार और भावनाओं का प्रतीक गुलाब जैसे ही चर्चा में आता है, झारखंड में जमशेदपुर का रोज गार्डेन अपने आप सुर्खियों में आ जाता है. यह सिर्फ एक बाग नहीं, बल्कि इतिहास, विरासत और आधुनिक फूलों के कारोबार का अनोखा संगम है. खास बात यह है कि कभी पंडित जवाहरलाल नेहरू के कोट पर सजने वाला जमशेदपुर का गुलाब आज लाखों रुपये के व्यापार का आधार बन चुका है.
नेहरू और जमशेदपुर का गुलाब
जमशेदपुर में गुलाबों की कहानी वर्ष 1958 से शुरू होती है. यह वही वर्ष था, जब टाटा स्टील के गोल्डन जुबिली समारोह के दौरान जुबिली पार्क का उद्घाटन तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने किया था. गुलाबों के शौकीन नेहरू जी को जुबिली पार्क में विकसित विशेष गुलाब बाग भेंट किया गया था. उस समय यहां करीब एक हजार किस्म के देसी गुलाब लगाए गए थे.
जमशेदपुर से रोजाना दिल्ली जाता था गुलाब
जमशेदपुर के गुलाब नियमित रूप से रोजाना दिल्ली भेजे जाते थे और नेहरू जी इन्हें अपने कोट पर सजाया करते थे. यही वजह है कि गुलाब और जमशेदपुर का रिश्ता सिर्फ फूलों तक सीमित नहीं, बल्कि देश के इतिहास से भी जुड़ा है.
पुराने गुलाब बाग से आधुनिक रोज गार्डेन तक का सफर
समय के साथ जुबिली पार्क के गुलाब बाग का स्वरूप बदला. इसे स्थानांतरित कर कॉन्वेंट स्कूल के पास दोराबजी पार्क के समीप विकसित किया गया. करीब दो वर्ष पहले बने इस नये रोज गार्डेन ने जमशेदपुर को एक बार फिर गुलाब प्रेमियों के नक्शे पर ला खड़ा किया है. यह गार्डेन करीब 6000 वर्ग मीटर क्षेत्र में फैला हुआ है, जहां 1580 से अधिक गुलाब के पौधे लगाए गए हैं. यहां हाइब्रिड टी, फ्लोरीबुंडा, ग्रैंडिफ्लोरा, मिनिएचर और पॉलीऐंथस जैसे पांच प्रमुख समूहों के गुलाब देखने को मिलते हैं. सफेद, गुलाबी, लाल, संतरी, पीले, मेजेंडा और गाढ़े लाल रंगों के गुलाब हर उम्र के लोगों को आकर्षित करते हैं.
रखरखाव और लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र
इस रोज गार्डेन का रखरखाव टाटा स्टील, टाटा स्टील यूआइएसएल और हॉर्टिकल्चर सोसाइटी द्वारा किया जाता है. यह गार्डेन प्रतिदिन शाम चार बजे से रात आठ बजे तक आम लोगों के लिए खुला रहता है. खासकर रोज डे और वेलेंटाइन वीक के दौरान यहां युवाओं और फोटोग्राफी प्रेमियों की भीड़ बढ़ जाती है.
गुलाब रिसर्च सेंटर से बढ़ेगी जमशेदपुर की पहचान
जमशेदपुर को गुलाब प्रेमियों के राष्ट्रीय नक्शे पर और मजबूत करने की दिशा में एक अहम पहल की जा रही है. जुबिली पार्क में गुलाब रिसर्च सेंटर यानी रोज ट्रायल ग्राउंड स्थापित करने की योजना है. इस योजना को लेकर टाटा स्टील और हॉर्टिकल्चर विभाग ने नेशनल रोज फेडरेशन को सहमति दे दी है. इस सेंटर में हिंदुस्तान में पायी जाने वाली विभिन्न किस्मों के गुलाबों पर शोध किया जाएगा. इससे न केवल नई किस्में विकसित होंगी, बल्कि स्थानीय किसानों को भी बेहतर तकनीक और बाजार उपलब्ध हो सकेगा.
गुलाब की खेती बन रही पहचान
पूर्वी सिंहभूम जिला अब सिर्फ इस्पात नगरी तक सीमित नहीं रह गया है. जिले में करीब 120 हेक्टेयर क्षेत्र में फूलों की खेती हो रही है, जिसमें लगभग 50 हेक्टेयर में गुलाब की खेती की जाती है. यहां से सालाना करीब 15.37 टन गुलाब का उत्पादन होता है. इस वर्ष नेशनल हार्टिकल्चर मिशन के तहत गुलाब की खेती को भी शामिल किया गया है. हॉर्टिकल्चर पदाधिकारी अनिमा लकड़ा के अनुसार, किसानों को प्रशिक्षण देकर गुलाब की पैदावार और आमदनी बढ़ाने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं.
रोज डे पर 16 लाख की बिक्री का अनुमान
वेलेंटाइन वीक के पहले दिन रोज डे पर शहर में गुलाब की बिक्री अचानक बढ़ जाती है. फूल दुकानदारों के अनुसार, इस बार डिमांड को देखते हुए बेंगलुरु के गुलाब सबसे ज्यादा मंगाए गए हैं. बेंगलुरु के गुलाब सुर्ख लाल, कम कांटों वाले और ज्यादा टिकाऊ होते हैं. शुक्रवार को एक बेंगलुरु गुलाब की कीमत 40 रुपये थी, जो रोज डे पर 50 से 70 रुपये तक पहुंच सकती है. सामान्य दिनों में यही गुलाब 20 से 22 रुपये प्रति पीस मिलता है. इसके अलावा कोलकाता और पुणे से भी गुलाब मंगाए गए हैं. शहर में करीब 80 फूल दुकानें हैं और रोज डे पर हर दुकान से औसतन 500 गुलाब बिकने का अनुमान है. इस तरह कुल 40 हजार गुलाबों की बिक्री से करीब 16 लाख रुपये के कारोबार की संभावना जताई जा रही है.
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क्या कहते हैं दुकानदार
बिष्टुपुर के फूल दुकानदार अथर जमाल बताते हैं कि रोज डे पर सुर्ख लाल गुलाब की सबसे ज्यादा मांग रहती है. वहीं, 1980 से फूल व्यवसाय से जुड़े मो सलीम का कहना है कि रोज डे से ज्यादा बिक्री वेलेंटाइन डे यानी 14 फरवरी को होती है. साकची के दुकानदार टिंकू अहमद के अनुसार, वेलेंटाइन वीक में हर दिन अलग-अलग रंग के गुलाब की मांग रहती है.
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